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क्रिकेट जगत के दिग्गज देशों के आकर्षक प्रस्तावों पर राशिद खान का खुलासा..

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में अपनी जादुई फिरकी और आक्रामक बल्लेबाजी के लिए मशहूर अफगानिस्तान के स्टार खिलाड़ी राशिद खान ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने खेल गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। हाल ही में उनके जीवन और करियर पर आधारित एक नई पुस्तक के माध्यम से यह बात सामने आई है कि दुनिया के दो बड़े देशों ने उन्हें अपनी नागरिकता और अपनी टीम से खेलने का प्रस्ताव दिया था। इन देशों की सूची में भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे दिग्गज क्रिकेट राष्ट्र शामिल थे। हालांकि राशिद खान ने इन आकर्षक प्रस्तावों को विनम्रतापूर्वक ठुकराते हुए अपने देश अफगानिस्तान के प्रति अपनी अटूट वफादारी और प्रेम को सर्वोपरि रखा। राशिद खान के जीवन पर लिखी गई इस पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि नागरिकता के ये प्रस्ताव तब आए जब वह अपने करियर के बेहतरीन दौर से गुजर रहे थे और वैश्विक क्रिकेट में एक बड़े ब्रांड बन चुके थे। लेखक के साथ बातचीत में राशिद ने स्पष्ट किया कि उन्हें भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही देशों की ओर से उनके लिए खेलने का प्रस्ताव मिला था। इस पर अपना रुख साफ करते हुए राशिद ने कहा कि यदि वह अपने देश के लिए नहीं खेलेंगे तो वह किसी अन्य देश का प्रतिनिधित्व करने के बारे में सोच भी नहीं सकते। यह बयान उनके व्यक्तित्व की गहराई और अपने राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। विशेष रूप से भारत की ओर से मिले प्रस्ताव का जिक्र करते हुए राशिद ने बताया कि भारतीय लीग के एक सत्र के दौरान उनकी मुलाकात क्रिकेट प्रबंधन के एक वरिष्ठ अधिकारी से हुई थी। उस समय अफगानिस्तान की आंतरिक स्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण थीं। बातचीत के दौरान उन्हें सुझाव दिया गया कि वह भारत में बस जाएं और उन्हें भारतीय दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि वह यहीं रहकर अपना क्रिकेट करियर आगे बढ़ा सकें। राशिद ने बताया कि उस क्षण वह काफी हैरान थे लेकिन उन्होंने मुस्कुराहट के साथ इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और कहा कि वह केवल अपने वतन के लिए ही खेलना जारी रखेंगे। अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के मुद्दे पर राशिद खान का यह अडिग रुख पहली बार सार्वजनिक नहीं हुआ है। इससे पहले भी कई बार मैदान पर उनके शानदार प्रदर्शन के बाद प्रशंसकों द्वारा उन्हें नागरिकता देने की मांग उठती रही है। वर्ष दो हजार अठारह में एक महत्वपूर्ण मैच में उनके हरफनमौला प्रदर्शन ने दर्शकों का दिल जीत लिया था जिसके बाद उन्हें टीम में शामिल करने की चर्चाएं जोरों पर थीं। वर्तमान में सत्ताइस वर्षीय यह खिलाड़ी दुनिया भर की क्रिकेट लीग में अपनी धाक जमा चुका है लेकिन वैश्विक मंच पर वह अपनी पहचान केवल एक अफगान खिलाड़ी के रूप में ही बनाए रखना चाहता है।

रतलाम में DJ विवाद बना खून-खराबा, युवक की चाकू से हत्या

नई दिल्ली। रतलाम जिले के ताल कस्बे में रविवार रात एक शादी समारोह उस समय खूनखराबे में बदल गया जब डीजे पर गाली-गलौज का विरोध करने पर 22 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई और तीन बारातें बिना शादी किए ही वापस लौट गईं। डीजे पर शुरू हुआ विवाद, महिलाओं के सामने गालियों से भड़का मामलाजानकारी के अनुसार, भोई मोहल्ले में शंकरलाल भोई की तीन बेटियों की शादी का कार्यक्रम चल रहा था, जिसमें तीन अलग-अलग जगहों से बारातें आई थीं। तोरण और जुलूस के दौरान डीजे ऑपरेटरों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई, जिसके चलते माइक पर ही अपशब्द और गालियां दी जाने लगीं। इसी दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। ‘महिलाओं के सामने गाली मत दो’ कहना बना जानलेवामोहल्ले के युवक दिलीप (22) ने जब डीजे ऑपरेटरों को महिलाओं और परिवार के सामने गाली देने से रोका, तो विवाद और बढ़ गया। बहस के दौरान डीजे संचालकों और कुछ बारातियों ने मिलकर दिलीप और उसके साथियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान एक आरोपी ने दिलीप के पेट में चाकू घोंप दिया। अस्पताल ले जाते समय मौत, परिवार में मचा कोहरामगंभीर रूप से घायल दिलीप को पहले जावरा अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे रतलाम रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इस घटना से शादी की खुशियां मातम में बदल गईं और पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। आरोपी डीजे ऑपरेटर मंदसौर का, दो हिरासत मेंपुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी डीजे ऑपरेटर माखन कुमावत मंदसौर का रहने वाला है। उसे हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य की तलाश जारी है। तीन बारातें बिना शादी लौटीं, इलाके में तनावघटना के बाद हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए तीनों बारातें बिना विवाह संपन्न हुए वापस लौट गईं। इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। परिवार में गम का माहौल, शादी के बाद भी नहीं बचे दिनमृतक दिलीप की शादी मात्र डेढ़ महीने पहले हुई थी। परिवार पर अचानक आई इस त्रासदी से मातम पसरा हुआ है। परिजन आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

रिकॉर्ड समय में बढ़ता जहाजों का आवागमन और बंदरगाह विस्तार की भविष्य की योजनाएं..

नई दिल्ली। वैश्विक समुद्री व्यापार के मार्ग में उत्पन्न हुए होर्मुज संकट ने भारत के पहले डीपवॉटर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट विजिनजम की महत्ता को पूरी दुनिया के सामने सिद्ध कर दिया है। वर्तमान परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां एक सुरक्षित और भरोसेमंद मार्ग की तलाश में हैं और केरल स्थित यह बंदरगाह इस आवश्यकता को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विजिनजम पोर्ट पर जहाजों का आवागमन इस कदर बढ़ गया है कि वर्तमान में करीब सौ जहाज यहां प्रवेश की प्रतीक्षा में कतारबद्ध खड़े हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि दक्षिण एशिया में समुद्री व्यापार के केंद्र अब तेजी से बदल रहे हैं और भारत वैश्विक लॉजिस्टिक्स के मानचित्र पर एक नए मानक स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है। विजिनजम पोर्ट की संकल्पना तीन दशक पहले अंतरराष्ट्रीय कार्गो के भार को व्यवस्थित करने और विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष दो हजार पंद्रह में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और वर्तमान में यह बंदरगाह रिकॉर्ड समय में दस लाख टीईयू का आंकड़ा पार कर चुका है। भारी दबाव के बावजूद इस पोर्ट की कार्यक्षमता उल्लेखनीय रही है और पिछले महीने ही यहां साठ से अधिक जहाजों का सफल संचालन किया गया जो अपने आप में एक नया कीर्तिमान है। डीपवॉटर ट्रांसशिपमेंट की सुविधा होने के कारण यहां बड़े जहाजों को आसानी से संभाला जा सकता है जिससे यह अंतरराष्ट्रीय कार्गो परिवहन के लिए एक अनिवार्य विकल्प बन गया है। ट्रांसशिपमेंट सुविधा किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग के लिए रीढ़ की हड्डी के समान होती है जहां कंटेनरों को एक बड़े जहाज से दूसरे जहाजों में स्थानांतरित किया जाता है ताकि वे अपने अंतिम गंतव्य तक सुगमता से पहुंच सकें। भारत पारंपरिक रूप से इस कार्य के लिए पड़ोसी देशों के हब पर निर्भर रहा है लेकिन विजिनजम के उदय ने इस समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। वर्तमान विस्तार कार्यों के पूरा होने के बाद यहां एक साथ पांच बड़े मदरशिप्स को संभालने की क्षमता विकसित हो जाएगी। यह विस्तार न केवल भारत की समुद्री शक्ति को बढ़ाएगा बल्कि वैश्विक स्तर के बड़े समुद्री केंद्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में भी सक्षम बनाएगा। समुद्री विशेषज्ञों का मानना है कि विजिनजम पोर्ट का विकास अब केवल एक राष्ट्रीय परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह एक वैश्विक आवश्यकता बन चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे गतिरोध के बीच शिपिंग उद्योग को एक ऐसे केंद्र की तलाश थी जो सुरक्षित होने के साथ-साथ तकनीकी रूप से भी उन्नत हो। विजिनजम ने इन सभी मानकों पर खरा उतरकर खुद को एक भरोसेमंद समुद्री दिग्गज के रूप में स्थापित किया है। जैसे-जैसे इसके दूसरे चरण का काम गति पकड़ रहा है उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में यह बंदरगाह वैश्विक अर्थव्यवस्था की गति को बनाए रखने में भारत का सबसे महत्वपूर्ण योगदान साबित होगा।

शादी सम्मेलन जा रहा परिवार हादसे का शिकार, इंदौर-पचोर मार्ग पर दुर्घटना

नई दिल्ली। देवास जिले के टोंककला क्षेत्र में सोमवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसमें एक महिला की मौत हो गई और छह लोग घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब इंदौर से एक परिवार शादी सम्मेलन में शामिल होने के लिए पचोर जा रहा था। मक्सी रोड पर टायर फटने से पलटी कारघटना सुबह करीब 8:30 बजे बरखेड़ा फाटा के पास हुई। जानकारी के अनुसार, कार अचानक अनियंत्रित हो गई और पलट गई। बताया जा रहा है कि वाहन का टायर फटने से यह हादसा हुआ। टक्कर इतनी तेज थी कि मौके पर ही अफरा-तफरी मच गई। महिला की मौके पर मौत, परिवार के कई सदस्य घायलइस हादसे में इंदौर निवासी निर्मला (पत्नी घनश्याम) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं कृष्णा साहू (35), मंजू साहू (23), आर्यन साहू (6), आदर्श साहू (ढाई वर्ष) और कार चालक कृष्णा मुरारी सहित कुल छह लोग घायल हो गए। इंदौर से पचोर जा रहा था परिवारजानकारी के मुताबिक, यह परिवार इंदौर के नंदा नगर क्षेत्र से पचोर में आयोजित विवाह सम्मेलन में शामिल होने के लिए निकला था। यात्रा के दौरान ही यह हादसा हो गया, जिससे खुशी का माहौल मातम में बदल गया। घायलों का इलाज जारी, पुलिस जांच में जुटीसभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद इंदौर रेफर कर दिया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही टोंककला पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।

खंडवा में ‘डबल कुर्सी’ का खेल, पद महिला जनप्रतिनिधियों के और फैसले पति के हाथ

नई दिल्ली। खंडवा जिले में पंचायत से लेकर नगर निकाय और राजनीतिक पदों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही “डबल कुर्सी” संस्कृति भी चर्चा में आ गई है। स्थिति यह है कि 11 प्रमुख पदों पर महिलाएं निर्वाचित हैं, लेकिन कई जगहों पर प्रशासनिक और राजनीतिक फैसले उनके पति या परिजन पर्दे के पीछे से लेते नजर आ रहे हैं। दफ्तरों में ‘डबल कुर्सी’ आधिकारिक और अनौपचारिक सत्ता साथ-साथजिले के कई कार्यालयों में यह दृश्य आम हो गया है कि एक कुर्सी पर महिला जनप्रतिनिधि और दूसरी पर उनके पति बैठे दिखाई देते हैं। आरोप है कि वास्तविक निर्णय प्रक्रिया में भी कई बार पति ही सक्रिय भूमिका निभाते हैं, जबकि महिला जनप्रतिनिधि औपचारिक रूप से पद संभाल रही होती हैं। इस प्रवृत्ति को स्थानीय स्तर पर “डबल कुर्सी कल्चर” कहा जा रहा है। विधायक से लेकर नगर निकाय तक पति निभा रहे ‘अतिरिक्त भूमिका’कई पदों पर महिलाओं के पति को अनौपचारिक रूप से ज्यादा सक्रिय माना जा रहा है। खंडवा विधायक कंचन तनवे के पति मुकेश तनवे को राजनीतिक हलकों में “सुपर विधायक” तक कहा जाता है। इसी तरह महापौर अमृता यादव के पति अमर यादव नगर निगम से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं, हालांकि विवाद के बाद उनकी गतिविधियां सीमित हो गई हैं। नगर पंचायत और जनपदों में भी समान स्थितिजनपद पंचायत और नगर परिषदों में भी यही तस्वीर सामने आ रही है। खंडवा जनपद अध्यक्ष मीनाबाई सोलंकी, मूंदी नगर परिषद अध्यक्ष ज्योतिबाला राठौर, ओंकारेश्वर नगर परिषद अध्यक्ष मनीषा परिहार समेत कई स्थानों पर उनके पति या परिजन कार्यालयीन कामकाज में सक्रिय दिखाई देते हैं। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और वास्तविक नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कहां महिलाएं खुद संभाल रही जिम्मेदारीहालांकि सभी जगह ऐसी स्थिति नहीं है। पंधाना विधायक छाया मोरे जैसी कुछ महिला जनप्रतिनिधि अपने निर्णय स्वयं लेती हैं, हालांकि कुछ मामलों में वे राजनीतिक सलाहकारों पर निर्भर रहती हैं। जिले में महिलाओं की मजबूत भागीदारी, लेकिन बहस जारीवर्तमान में जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, महापौर और कई नगर पंचायत अध्यक्ष सहित 11 अहम पदों पर महिलाएं काबिज हैं, जबकि 7 प्रमुख पद पुरुषों के पास हैं। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को जहां एक ओर सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है, वहीं “डबल कुर्सी” कल्चर इसे लेकर नई बहस भी खड़ी कर रहा है कि क्या वास्तविक सत्ता महिलाओं के हाथ में है या फिर निर्णय कहीं और से नियंत्रित हो रहे हैं।

जानिए परदे पर दिखने वाले 'किसिंग सीन' के पीछे का वो सच, जिसे जानकर आपका नजरिया बदल जाएगा!

नई दिल्ली। फिल्मों में दिखाए जाने वाले रोमांटिक और अंतरंग दृश्य हमेशा से ही दर्शकों के बीच कौतूहल का विषय रहे हैं। पर्दे पर बेहद वास्तविक और भावुक दिखने वाले ये दृश्य अक्सर यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या कलाकार वास्तव में एक-दूसरे को चूमते हैं। हाल के वर्षों में कई बड़े सितारों की फिल्मों में ऐसे दृश्यों की काफी चर्चा हुई है लेकिन इन दृश्यों के पीछे की सच्चाई काफी तकनीकी और पेशेवर होती है। कैमरे के पीछे इन दृश्यों को फिल्माने की प्रक्रिया इतनी व्यवस्थित होती है कि जो पर्दे पर पूरी तरह असली दिखता है वह असल में सोची-समझी योजना और सटीक कैमरा एंगल का परिणाम होता है। आधुनिक फिल्म निर्माण में अब इंटिमेसी डायरेक्टर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। यह एक ऐसा विशेषज्ञ होता है जिसका मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अंतरंग दृश्य को फिल्माते समय कलाकारों की सहमति और उनका आराम बना रहे। जिस तरह किसी एक्शन सीक्वेंस या डांस स्टेप्स की कोरियोग्राफी की जाती है ठीक उसी तरह किसिंग सीन की भी पूरी प्लानिंग होती है। इसमें चेहरे का एंगल, हाथों की स्थिति और समय सीमा पहले से तय होती है। इससे कलाकारों के बीच किसी भी प्रकार की असहजता की गुंजाइश नहीं रहती और वे अपने किरदार को बेहतर ढंग से निभा पाते हैं। तकनीकी रूप से इन दृश्यों को प्रभावशाली बनाने के लिए कैमरा एंगल और एडिटिंग का सहारा लिया जाता है। कई बार कैमरा इस तरह से लगाया जाता है कि दर्शकों को लगता है कि कलाकार एक-दूसरे के बेहद करीब हैं जबकि वास्तव में उनके बीच एक निश्चित दूरी होती है। पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान एडिटिंग और लाइटिंग के जरिए इन दृश्यों को अधिक वास्तविक प्रभाव दिया जाता है। हालांकि कुछ मामलों में कलाकार आपसी सहमति से वास्तव में इन दृश्यों को अंजाम देते हैं लेकिन यह पूरी तरह से उनकी मर्जी और पेशेवर समझ पर निर्भर करता है। ऐसे दृश्यों की शूटिंग के समय सेट पर कम से कम लोगों को रखा जाता है ताकि कलाकारों की निजता सुरक्षित रहे। सिनेमा जगत में अब बॉडी लैंग्वेज पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। केवल स्पर्श ही नहीं बल्कि आंखों का संपर्क और चेहरे के हाव-भाव भी दृश्य को भावनात्मक गहराई प्रदान करते हैं। पहले के दौर में इस तरह की संरचित प्रक्रिया का अभाव था जिससे कई बार कलाकारों को असहज स्थितियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब फिल्म उद्योग में बढ़ते प्रोफेशनलिज्म ने इस पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और गरिमामय बना दिया है। तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के इस मेल ने पर्दे पर प्रेम और रोमांस को दिखाने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है जिससे दर्शकों को एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव मिलता है।

हरदा : बैग चोरी केस में पुलिस को बड़ी सफलता, कुछ ही घंटों में पकड़े गए आरोपी

नई दिल्ली। हरदा में रविवार शाम बोहरा मस्जिद वाली गली में एक व्यापारी का लेदर बैग चोरी होने का मामला सामने आया, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई से कुछ ही घंटों में आरोपियों को पकड़ लिया गया। इस वारदात में हैरानी की बात यह रही कि चोरी के लिए एक नाबालिग का भी इस्तेमाल किया गया। लोडिंग के दौरान पिकअप से गायब हुआ बैगजानकारी के अनुसार, हरसूद निवासी व्यापारी सौरभ सोनी (32) अपने काम के सिलसिले में हरदा आए थे। वे बोहरा मस्जिद के पास अपनी पिकअप गाड़ी में सामान लोड करवा रहे थे। इसी दौरान गाड़ी के केबिन का कांच खुला होने का फायदा उठाकर अज्ञात व्यक्ति उनका लेदर साइड बैग चुरा ले गया। बैग में जरूरी दस्तावेज, एक मोबाइल फोन और करीब 6 हजार रुपए नकद रखे थे। 20 से ज्यादा CCTV खंगालकर पकड़े गए आरोपीपीड़ित की शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने 20 से अधिक स्थानों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज और साइबर सेल की मदद से आरोपियों की पहचान की। इसके बाद तेजी दिखाते हुए पुलिस ने कुछ ही घंटों में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। नाबालिग का किया इस्तेमाल, चोरी का सामान बरामदपुलिस ने विष्णु और सजन सोलंकी (22) को गिरफ्तार किया है, जो आपस में दोस्त हैं। जांच में सामने आया कि चोरी की इस वारदात में एक नाबालिग का भी इस्तेमाल किया गया था। आरोपियों के कब्जे से चोरी किया गया बैग, मोबाइल और नकदी बरामद कर ली गई है। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी पहले भी चोरी के मामलों में शामिल रह चुका है। पुलिस की सतर्कता से जल्द खुला मामलाइस पूरे मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी जांच की वजह से आरोपियों को जल्दी पकड़ लिया गया, जिससे पीड़ित को राहत मिली।

हॉलीवुड फिल्मों पर भारतीय संस्कृति और विविधता का गहरा प्रभाव…

नई दिल्ली। विश्व सिनेमा के मानचित्र पर भारत हमेशा से अपनी सांस्कृतिक विविधता और अनूठी कहानियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। हॉलीवुड के बड़े फिल्मकारों ने समय-समय पर भारत की मिट्टी से जुड़ी कहानियों को पर्दे पर उतारकर न केवल वैश्विक स्तर पर सराहना प्राप्त की है बल्कि कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी अपने नाम किए हैं। भारतीय पृष्ठभूमि पर आधारित ये फिल्में दर्शाती हैं कि यहां की कहानियां भाषाई और भौगोलिक सीमाओं को पार कर मानवीय संवेदनाओं को छूने की शक्ति रखती हैं। चाहे वह मुंबई की गलियों का संघर्ष हो या स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली गाथा भारत के बैकड्रॉप में लिखी गई इन पटकथाओं ने हॉलीवुड के तकनीकी कौशल के साथ मिलकर सिनेमा जगत को कुछ ऐसी कालजयी कृतियां दी हैं जिन्हें सदियों तक याद रखा जाएगा। इन्हीं ऐतिहासिक फिल्मों में गांधी का नाम सबसे ऊपर आता है जिसने महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के मार्ग को पूरी दुनिया के सामने जीवंत कर दिया। इस फिल्म ने भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्याय को इतनी कुशलता से प्रस्तुत किया कि इसने कुल आठ ऑस्कर पुरस्कार जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इसी तरह स्लमडॉग मिलेनियर ने मुंबई की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले एक युवक के संघर्ष और उसकी किस्मत की कहानी को इस तरह दिखाया कि यह वैश्विक स्तर पर एक बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई। यह फिल्म भारतीय लेखक के उपन्यास पर आधारित थी और इसने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति के दम पर आठ ऑस्कर अवॉर्ड्स अपने नाम किए थे। यह फिल्में साबित करती हैं कि भारतीय कहानियों में वह गहराई है जो दुनिया के किसी भी कोने के दर्शक को प्रभावित कर सकती है। साहित्यिक कृतियों को पर्दे पर उतारने के मामले में लाइफ ऑफ पाई और द जंगल बुक जैसी फिल्मों ने भी जबरदस्त सफलता हासिल की है। पुडुचेरी से शुरू होकर समुद्र की लहरों के बीच एक लड़के और बाघ के जीवित बचने की अद्भुत दास्तान ने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया था। वहीं मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के जंगलों की पृष्ठभूमि पर आधारित मोगली की कहानी ने बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी का दिल जीता और अरबों डॉलर का कारोबार किया। इन फिल्मों की सफलता का सबसे बड़ा कारण भारत की वह रहस्यमयी और रोमांचक छवि रही है जिसे हॉलीवुड ने अपनी उन्नत तकनीक के जरिए और भी भव्य बना दिया। सच्ची घटनाओं और मानवीय रिश्तों पर आधारित फिल्में जैसे लायन ने भी वैश्विक स्तर पर खूब सुर्खियां बटोरीं। एक छोटे बच्चे के अपने परिवार से बिछड़ने और सालों बाद आधुनिक तकनीक की मदद से अपनी जड़ों को तलाशने की यह यात्रा बेहद भावुक थी। इसके अलावा भारतीय संस्कृति और यहां के आतिथ्य सत्कार को मजाकिया और भावनात्मक रूप से दिखाने वाली फिल्में जैसे द बेस्ट एक्जॉटिक मैरीगोल्ड होटल ने भी विदेशी दर्शकों को भारत के प्रति आकर्षित किया। यहां तक कि इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम जैसी साहसिक फिल्मों ने भी अस्सी के दशक में भारत की रहस्यमयी छवि को वैश्विक पटल पर मजबूती से रखा था। यह स्पष्ट है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और यहां के परिवेश ने हॉलीवुड को हमेशा एक उर्वर जमीन प्रदान की है जहां रचनात्मकता और वास्तविकता का संगम देखने को मिलता है। भारतीय कहानियों और संस्कृति पर आधारित उन प्रमुख हॉलीवुड फिल्मों का विश्लेषण जिन्होंने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई और प्रतिष्ठित ऑस्कर पुरस्कार जीते।

महिला शक्ति बनाम राजनीति ,मध्य प्रदेश में टिकट वितरण और भागीदारी, का पूरा लेखा जोखा

भोपाल । भोपाल मध्य प्रदेश में महिला आरक्षण और राजनीति को लेकर बहस तेज हो गई है। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित न होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे लोकतंत्र के लिए काला अध्याय बताया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष के रवैये से उसकी महिला विरोधी सोच उजागर होती है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात बताया है। इसी मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में सियासत तेज हो गई है। लोकसभा 2024 के चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी उनतीस सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने कब्जा किया। भाजपा ने इन सीटों पर छह महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया और सभी छह महिलाओं ने जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस ने उनतीस में से केवल एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा जो रीवा से नीलम अभय मिश्रा थीं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। राज्यसभा में मध्य प्रदेश की ग्यारह सीटों में से आठ पर भारतीय जनता पार्टी और तीन पर कांग्रेस का प्रतिनिधित्व है। भाजपा के आठ राज्यसभा सांसदों में तीन महिलाएं शामिल हैं। कांग्रेस के तीनों राज्यसभा सांसदों में एक भी महिला प्रतिनिधि नहीं है। यह आंकड़ा संसद के उच्च सदन में महिलाओं की भागीदारी की स्थिति को स्पष्ट करता है। विधानसभा चुनाव 2023 में मध्य प्रदेश की दो सौ तीस सीटों में भाजपा ने एक सौ तिरसठ सीटें जीतीं और कांग्रेस ने छियासठ सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट अन्य दल के खाते में गई। दोनों प्रमुख दलों ने कुल छप्पन महिला प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था जिनमें से सत्ताईस महिलाएं विधायक बनीं। भाजपा ने दो सौ तीस सीटों में से केवल सत्ताईस सीटों पर महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया जो लगभग ग्यारह प्रतिशत है। इनमें से इक्कीस महिलाएं जीतकर विधानसभा पहुंचीं। कांग्रेस ने उनतीस महिलाओं को टिकट दिया जो लगभग तेरह प्रतिशत है लेकिन केवल पांच महिलाएं विधायक बन सकीं। इसके विपरीत मध्य प्रदेश की पंचायत व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी काफी मजबूत दिखाई देती है। राज्य की कुल पंचायतों में लगभग दो लाख नब्बे हजार से अधिक महिला जनप्रतिनिधि सक्रिय हैं जो कुल प्रतिनिधियों का इक्यावन प्रतिशत से अधिक है। चौबीस जिला पंचायतों में महिलाएं अध्यक्ष के पद पर हैं। चार सौ चवालीस महिलाएं जिला पंचायत सदस्य हैं। एक सौ उनहत्तर महिलाएं जनपद अध्यक्ष हैं और तीन हजार चार सौ पच्चीस महिलाएं जनपद सदस्य के रूप में काम कर रही हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि जमीनी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी मजबूत है लेकिन विधानसभा और संसद स्तर पर उनकी संख्या अभी भी अपेक्षाकृत कम है। समग्र रूप से देखा जाए तो मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में पंचायत स्तर पर बेहतर स्थिति है लेकिन विधानसभा लोकसभा और राज्यसभा में राजनीतिक दलों द्वारा महिलाओं को टिकट देने की दर अभी भी सीमित है। यह मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आने वाले चुनावों में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर दबाव और बढ़ने की संभावना है।

नर्मदापुरम में सनसनीखेज हत्या, खाने को लेकर विवाद में गई जान; पुलिस पर भी हमला

नई दिल्ली। नर्मदापुरम जिले के शिवपुर थाना क्षेत्र के ग्राम नाहरकोला में रविवार रात एक शादी समारोह में मामूली बात ने खूनी रूप ले लिया। जानकारी के मुताबिक, शादी में आए एक युवक को खाना खाने के लिए कहने पर विवाद इतना बढ़ा कि चाकूबाजी हो गई। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हुए हैं। हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब आरोपियों को पकड़ने पहुंची पुलिस टीम पर भी हमला कर दिया गया। शराब के नशे में पहुंचे आरोपी, फिर लौटकर किया हमलापुलिस के अनुसार, गांव में रामनारायण के भतीजे की शादी चल रही थी। इसी दौरान अमर सिंह कीर शराब के नशे में वहां पहुंचा। रामनारायण ने उसे खाना खाने के लिए कहा, जिस पर वह भड़क गया और विवाद करने लगा। भीड़ ज्यादा होने के कारण उसे समझाकर घर भेज दिया गया, लेकिन कुछ देर बाद वह अपने बेटे लोकेश कीर के साथ डंडा और चाकू लेकर वापस लौटा और झगड़ा शुरू कर दिया। बीच-बचाव करने आए लोगों पर चाकू से वार, एक की मौतविवाद बढ़ने पर दूल्हे के चाचा हरिनारायण बीच-बचाव के लिए आगे आए, लेकिन लोकेश ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद दौलत कीर, रामनारायण, जयनारायण और क्षमा कीर सहित अन्य लोग भी बीच में आए, जिन पर आरोपियों ने हमला कर दिया। इस हमले में दौलत कीर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस टीम पर हमला, आरक्षक को 9 जगह चाकू लगेघटना की सूचना मिलने पर रात करीब 1 बजे पुलिस टीम आरोपियों को पकड़ने पहुंची, लेकिन यहां भी हमला हो गया। आरोपियों ने आरक्षक ओम जाट पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे उन्हें पेट, हाथ और पैर में 9 गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। दो केस दर्ज, आरोपियों की तलाश जारीमामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास के दो अलग-अलग केस दर्ज किए हैं। फिलहाल आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। शादी की खुशियां मातम में बदलींपरिवार के मुताबिक, अगले दिन बारात निकलनी थी, लेकिन इस घटना ने पूरे घर की खुशियों को मातम में बदल दिया। बताया जा रहा है कि आरोपी परिवार के ही सदस्य हैं और उनके बीच पिछले कई सालों से विवाद चल रहा था।