भोजशाला परिसर विवाद पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी, सभी पक्षों को दस्तावेज सौंपने के निर्देश

मध्य प्रदेश/धार: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर से जुड़े विवाद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं, जिनसे मामले की जांच और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को आदेश दिया है कि 98 दिनों तक चले सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी पक्षों को वीडियो रिकॉर्डिंग सौंप दी जाए, ताकि वे अपने तर्क और दावे इन साक्ष्यों के आधार पर प्रस्तुत कर सकें। इस मामले में भोजशाला परिसर के अधिकार को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद जारी है और अदालत में इस विषय पर नियमित सुनवाई हो रही है। याचिका मुस्लिम पक्ष की ओर से कमाल मौला वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा दायर की गई है, जिस पर डबल बेंच में सुनवाई की जा रही है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से अपने कानूनी तर्क और ऐतिहासिक तथ्यों को प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न न्यायिक निर्णयों और पूर्व मामलों का उल्लेख भी शामिल है। सुनवाई के दौरान कानूनी बहस मुख्य रूप से टाइटल विवाद, साक्ष्यों की स्वीकार्यता और याचिका की वैधता जैसे मुद्दों पर केंद्रित रही। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत दलीलों में यह कहा गया कि एएसआई सर्वे की रिपोर्ट और उसकी प्रक्रिया को लेकर पहले भी न्यायालयों द्वारा कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें इस मामले में भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। मुस्लिम पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि सर्वे प्रक्रिया के दौरान कुछ पहलुओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। उनका कहना है कि सर्वे के दौरान की गई खुदाई और रिकॉर्डिंग में कुछ अवशेषों को लेकर असमानता देखने को मिली है, जिससे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि वीडियोग्राफी से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और अदालत के समक्ष सभी पक्षों के दावों का सही मूल्यांकन संभव हो सकेगा। दूसरी ओर, पक्षकारों का कहना है कि सर्वे के दौरान विभिन्न धार्मिक और ऐतिहासिक अवशेषों को रिकॉर्ड किया गया है और इन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत किया गया है। इस पूरे मामले में दोनों पक्ष अपने अपने दावों को मजबूत करने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों पर आधारित दलीलें पेश कर रहे हैं। अदालत के इस आदेश के बाद अब सभी पक्षों को 27 अप्रैल तक संबंधित वीडियो क्लिप्स उपलब्ध कराई जाएंगी, जिसके बाद मामले की आगे की सुनवाई में इन साक्ष्यों के आधार पर तर्क प्रस्तुत किए जाएंगे। यह निर्णय मामले की पारदर्शिता और निष्पक्ष सुनवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आगे की कानूनी प्रक्रिया और स्पष्ट हो सकेगी।
नेपाल में राजनीतिक हलचल तेज, गृह मंत्री के इस्तीफे से सरकार पर बढ़ा दबाव…

नई दिल्ली: पड़ोसी देश नेपाल की राजनीति में इन दिनों गंभीर अस्थिरता का माहौल देखा जा रहा है, जहां प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार को एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का सामना करना पड़ा है। कार्यकाल शुरू होने के महज छब्बीस दिनों के भीतर गृह मंत्री सूदन गुरुंग के इस्तीफे ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस घटनाक्रम को सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक संतुलन पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। काठमांडू में हाल के दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक मतभेदों के बीच यह इस्तीफा स्थिति को और अधिक जटिल बनाता दिखाई दे रहा है। गृह मंत्री के इस्तीफे को लेकर सामने आ रही जानकारी के अनुसार उन पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों में विभिन्न कारोबारी समूहों के साथ कथित वित्तीय संबंध और कुछ कंपनियों में संदिग्ध निवेश की बात शामिल रही है। जैसे ही यह मामले सार्वजनिक हुए, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर उनके खिलाफ आलोचना तेज हो गई। कहा जा रहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की छवि के बावजूद इन आरोपों ने उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता को गहरा झटका दिया। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब विभिन्न दस्तावेजों और रिपोर्टों के आधार पर यह दावा किया गया कि गृह मंत्री के कुछ विवादित व्यापारिक संस्थानों से संबंध रहे हैं। इसके साथ ही उन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी सामने आए, जिससे राजनीतिक माहौल और तनावपूर्ण हो गया। विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर काठमांडू में विरोध प्रदर्शन किए और इस्तीफे की मांग को और तेज कर दिया। लगातार बढ़ते दबाव और राजनीतिक अस्थिरता के बीच सरकार के लिए स्थिति को संभालना कठिन होता गया। इस घटनाक्रम ने नेपाल की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां सरकार के भीतर स्थिरता और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी कम अवधि में एक महत्वपूर्ण पद से इस्तीफा सरकार की कार्यप्रणाली और गठबंधन की मजबूती पर प्रभाव डाल सकता है। साथ ही यह स्थिति आने वाले समय में प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है। काठमांडू में मौजूदा राजनीतिक माहौल में यह घटना सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखी जा रही है, जहां आगे की रणनीति और नेतृत्व की परीक्षा और अधिक कठिन हो सकती है। बढ़ती अस्थिरता के बीच सभी राजनीतिक दलों की नजर अब आने वाले निर्णयों और संभावित बदलावों पर टिकी हुई है।
प्रेगनेंसी के अनुभव और रिश्तों पर रुबीना दिलैक का खुलासा, निजी जीवन को लेकर साझा किए विचार

नई दिल्ली: टेलीविजन जगत की जानी-मानी अभिनेत्री रुबीना दिलैक ने हाल ही में अपने निजी जीवन और रिश्तों को लेकर खुलकर बातचीत की है। लोकप्रिय धारावाहिकों से घर-घर में पहचान बनाने वाली रुबीना ने अपने जीवन के उस दौर का उल्लेख किया जब वे प्रेगनेंसी के समय भावनात्मक और मानसिक बदलावों से गुजर रही थीं। उन्होंने बताया कि यह समय उनके लिए केवल शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण रहा, जिसमें उन्होंने अपने आसपास के लोगों को नए दृष्टिकोण से समझा। रुबीना दिलैक ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रेगनेंसी के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि कुछ लोग केवल दिखावे के लिए उनके जीवन में मौजूद थे। उनके अनुसार, जब जीवन में सब कुछ सामान्य और अच्छा चल रहा था तब कई लोग करीब थे, लेकिन कठिन समय में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। इसी अनुभव ने उन्हें अपने रिश्तों को दोबारा आंकने पर मजबूर किया और उन्होंने कई ऐसे संबंधों से दूरी बना ली जिन्हें वे लंबे समय से निभा रही थीं। उन्होंने यह भी बताया कि यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन उस समय उन्होंने अपनी मानसिक शांति और आत्मसम्मान को प्राथमिकता दी। रुबीना के अनुसार, जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों पर इंसान को यह समझ आता है कि कौन वास्तव में उसके साथ खड़ा है और कौन केवल औपचारिकता निभा रहा है। इसी समझ ने उनके दृष्टिकोण को बदल दिया और उन्हें अपने जीवन में स्पष्टता दी। अपने परिवारिक जीवन पर बात करते हुए रुबीना ने अपने पति और बच्चों के साथ संबंधों को सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि मातृत्व ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया है और उन्हें जीवन के प्रति अधिक संवेदनशील और मजबूत बनाया है। उनके अनुसार, बच्चों के आने के बाद प्राथमिकताएं बदल जाती हैं और इंसान अधिक जिम्मेदार हो जाता है। रुबीना दिलैक ने यह भी कहा कि जीवन में हर अनुभव, चाहे वह अच्छा हो या कठिन, व्यक्ति को आगे बढ़ने की सीख देता है। उन्होंने अपने अनुभवों को व्यक्तिगत विकास का हिस्सा बताया और कहा कि समय के साथ उन्होंने खुद को बेहतर तरीके से समझना शुरू किया है। उनके अनुसार, सच्चे रिश्ते वही होते हैं जो बिना किसी शर्त के हर परिस्थिति में साथ निभाते हैं। उनके इस बयान के बाद उनके प्रशंसकों में भी उनकी ईमानदारी और स्पष्ट सोच को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। रुबीना का यह अनुभव यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत जीवन में बदलाव अक्सर व्यक्ति को अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाते हैं।
Bollywood couple : फिल्म ‘ढाई अक्षर प्रेम के’ से शुरू हुआ रिश्ता, ‘गुरु’ तक पहुंचकर बनी जिंदगी की कहानी..

Bollywood couple : नई दिल्ली: बॉलीवुड के चर्चित कपल अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी और रिश्ते को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में दोनों ने अपनी शादी की 19वीं सालगिरह मनाई, जिसके बाद अभिषेक बच्चन ने अपनी लव स्टोरी और रिश्ते से जुड़े कई दिलचस्प पहलुओं पर बात की। अभिषेक बच्चन के अनुसार उनकी ऐश्वर्या राय से पहली मुलाकात साल 2000 में फिल्म ‘ढाई अक्षर प्रेम के’ की शूटिंग के दौरान हुई थी। उस समय दोनों सिर्फ एक-दूसरे के सह-कलाकार थे और किसी तरह के रिश्ते की शुरुआत नहीं हुई थी। इसके बाद समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और फिल्म ‘उमराव जान’ तथा अन्य प्रोजेक्ट्स के दौरान यह रिश्ता और गहरा होता चला गया। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती प्यार में बदल गई। अभिषेक ने बताया कि उनके रिश्ते में असली मोड़ फिल्म ‘गुरु’ के समय आया, जिसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया। यह फिल्म उनके लिए सिर्फ पेशेवर नहीं बल्कि निजी जीवन में भी एक अहम पड़ाव साबित हुई। साल 2007 में दोनों ने शादी कर ली और इसके बाद 2011 में उनकी बेटी आराध्या का जन्म हुआ। अपने वैवाहिक जीवन के बारे में बात करते हुए अभिषेक ने कहा कि उनका रिश्ता समय के साथ और मजबूत हुआ है और ऐश्वर्या सिर्फ उनकी पत्नी नहीं बल्कि उनकी सबसे बड़ी ताकत भी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार उनके जीवन का सबसे अहम हिस्सा है और वह अपनी बेटी को अच्छे संस्कार देने में ऐश्वर्या के योगदान की सराहना करते हैं। आगामी 20वीं सालगिरह को लेकर अभिषेक ने संकेत दिए कि उन्होंने कुछ खास प्लान तैयार किए हैं, हालांकि उन्होंने इसके बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने बस इतना कहा कि यह दिन उनके लिए बेहद खास होने वाला है। अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की जोड़ी बॉलीवुड की सबसे चर्चित जोड़ियों में से एक मानी जाती है। दोनों ने साथ में ‘धूम 2’, ‘सरकार राज’, ‘बंटी और बबली’ और ‘गुरु’ जैसी फिल्मों में भी काम किया है। निजी जीवन को लेकर दोनों हमेशा ही काफी प्राइवेट रहते हैं, लेकिन उनके फैंस हमेशा उनकी झलक पाने के लिए उत्सुक रहते हैं।
Dry Skin Care Tips : गर्मियों में भी ड्राई स्किन की खास देखभाल जरूरी, इन घरेलू उपायों से पाएं मुलायम और निखरी त्वचा

नई दिल्ली। अक्सर यह माना जाता है कि ड्राई स्किन की समस्या सिर्फ सर्दियों में होती है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। गर्मियों में भी तेज धूप, पसीना, धूल-मिट्टी और गलत स्किन केयर रूटीन के कारण त्वचा और ज्यादा रूखी और बेजान हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हर मौसम में त्वचा को नमी (moisture) की जरूरत होती है, और अगर इसकी अनदेखी की जाए तो स्किन में खिंचाव, खुजली और डलनेस जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। गर्मियों में कई लोग गर्म पानी से नहाने या ज्यादा केमिकल युक्त ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगते हैं, जिससे स्किन की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है। यही कारण है कि ड्राई स्किन वालों को इस मौसम में भी विशेष देखभाल की जरूरत होती है। नारियल तेल से मिलेगी गहरी नमीड्राई स्किन के लिए नारियल तेल बेहद फायदेमंद माना जाता है। नहाने के बाद या रात में सोने से पहले त्वचा पर हल्के हाथों से नारियल तेल लगाने से स्किन में नमी लॉक हो जाती है और रूखापन कम होता है। एलोवेरा जेल से त्वचा बनेगी मुलायमएलोवेरा जेल त्वचा के लिए नेचुरल मॉइश्चराइजर की तरह काम करता है। इसे चेहरे पर 5 से 10 मिनट तक हल्के हाथों से मसाज करने के बाद धोने से स्किन सॉफ्ट और फ्रेश नजर आती है। इसके बाद मॉइश्चराइजर लगाना और भी बेहतर परिणाम देता है। एवोकाडो मास्क से मिलेगा ग्लोएवोकाडो में मौजूद विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को गहराई से पोषण देते हैं। इसका फेस मास्क लगाने से ड्राई स्किन में सुधार आता है और चेहरा प्राकृतिक रूप से चमकदार दिखता है। नहाने के पानी में तेल मिलाना है फायदेमंदअगर नहाने के पानी में थोड़ा सा नारियल या बादाम तेल मिला लिया जाए तो त्वचा लंबे समय तक हाइड्रेट रहती है। इससे स्किन की ड्राइनेस काफी हद तक कम हो जाती है। ग्लिसरीन से मिलेगी रातभर की केयरसोने से पहले चेहरे पर ग्लिसरीन की हल्की परत लगाने से त्वचा की डैमेज सेल्स की मरम्मत होती है और सुबह स्किन ज्यादा मुलायम महसूस होती है। ड्राई स्किन की देखभाल सिर्फ क्रीम लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही दिनचर्या और प्राकृतिक उपाय अपनाकर भी इसे स्वस्थ रखा जा सकता है। गर्मियों में नियमित देखभाल से त्वचा न सिर्फ रूखेपन से बचती है, बल्कि प्राकृतिक निखार भी बनाए रखती है।
MLA PRITAM LODHI: BJP विधायक प्रीतम लोधी पर गिरेगी गाज! 3 दिन में जवाब तलब, खंडेलवाल ने भेजा नोटिस

MLA PRITAM LODHI: मध्य प्रदेश शिवपुरी । मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर संगठनात्मक अनुशासन का मुद्दा सुर्खियों में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने शिवपुरी जिले के पिछोर से विधायक प्रीतम लोधी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ओर से जारी किया गया है, जिसमें विधायक से तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। जारी पत्र में पार्टी ने स्पष्ट किया है कि हाल के दिनों में विधायक प्रीतम लोधी का आचरण “अत्यंत आपत्तिजनक” पाया गया है और यह पार्टी की अनुशासनात्मक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं माना जा रहा है। भाजपा ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जवाब तलब किया है और साफ संकेत दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह नोटिस 22 अप्रैल 2026 को जारी किया गया है और इसकी प्रतिलिपि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को भी भेजी गई है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भाजपा नेतृत्व इस पूरे मामले को केवल औपचारिकता नहीं मान रहा, बल्कि इसे अनुशासन से जुड़ा गंभीर विषय मानकर आगे बढ़ रहा है। हालांकि, नोटिस में किसी विशेष बयान या घटना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे हाल के बयानों और सार्वजनिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाकर संगठन में अनुशासन और एकरूपता बनाए रखना चाहता है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पार्टी लंबे समय से सार्वजनिक मंचों पर दिए जा रहे विवादित बयानों और अनुशासनहीन गतिविधियों को लेकर सतर्क है। इसी क्रम में यह कार्रवाई एक संदेश के तौर पर भी देखी जा रही है कि पार्टी लाइन से बाहर जाकर बयानबाजी या आचरण को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस नोटिस के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्ष भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, जबकि भाजपा के भीतर इसे अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामान्य हिस्सा बताया जा रहा है। अब सभी की निगाहें विधायक प्रीतम लोधी के जवाब पर टिकी हैं। उनका स्पष्टीकरण यह तय करेगा कि मामला यहीं समाप्त हो जाता है या आगे किसी बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई की दिशा में बढ़ता है।
Bengal politics 2026: बंगाल में डबल इंजन सरकार पर सीएम योगी का दावा, विकास और बदलाव का किया आह्वान..

Bengal politics 2026: नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल और तेज हो गया है। चकदहा में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की मौजूदा सरकार और राजनीतिक स्थिति को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने नदिया जिले की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि चैतन्य महाप्रभु की वैष्णव परंपरा की पहचान रही है और अब यहां बदलाव की संभावनाएं दिख रही हैं। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने विकास के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की तुलना करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार बनने पर विकास की गति तेज होती है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर उद्योगों का विस्तार हुआ है और रोजगार के अवसर बढ़े हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में औद्योगिक गतिविधियों में गिरावट देखी गई है। उन्होंने कहा कि विकास और निवेश के लिए स्थिर शासन जरूरी है। सीएम योगी ने अपने भाषण में सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बंगाल की भूमि हमेशा से आध्यात्मिक और साहित्यिक योगदान के लिए जानी जाती रही है और इसे अपनी मूल पहचान को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है। राजनीतिक टिप्पणी के दौरान उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था और प्रशासन को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि विकास तभी संभव है जब सुरक्षा और सुशासन मजबूत हों। उन्होंने यह भी कहा कि जनता को ऐसे विकल्प पर विचार करना चाहिए जो स्थिरता और विकास सुनिश्चित कर सके। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विभिन्न ऐतिहासिक और सांस्कृतिक हस्तियों का भी उल्लेख किया और कहा कि बंगाल की धरती ने देश को कई महान योगदान दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी जनता की है। सभा के दौरान उन्होंने स्थानीय प्रत्याशी के समर्थन में मतदान की अपील की और कहा कि आने वाले समय में राज्य में विकास और बदलाव की नई दिशा तय हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस तरह के बयानों से चुनावी माहौल और अधिक गर्म हो गया है और आने वाले दिनों में प्रचार अभियान और तेज होने की संभावना है।
Rinku Singh Priya Saroj marriage : रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की शादी की तारीख को लेकर चर्चा तेज, काशी दर्शन के बाद बढ़ेगी हलचल

Rinku Singh Priya Saroj marriage : नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेटर Rinku Singh और उनकी मंगेतर Priya Saroj हाल ही में Varanasi पहुंचे। दोनों ने यहां आकर प्रसिद्ध Kashi Vishwanath Temple में पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। बाबा विश्वनाथ के दर्शन और गंगा आरती में हुए शामि मंदिर में करीब आधे घंटे बिताने के बाद रिंकू और प्रिया ने काशी के घाटों का आनंद लिया। शाम को दोनों Dashashwamedh Ghat पहुंचे, जहां उन्होंने भव्य गंगा आरती में हिस्सा लिया। दोनों ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “काशी, महादेव की धरती और गंगा का पावन संग।” जून में हो सकती है शादी, होटल ताज में फेरे की चर्चा रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की शादी जून के पहले हफ्ते में हो सकती है। यह भी खबर सामने आ रही है कि शादी Taj Hotel Varanasi में हो सकती है। कहा जा रहा है कि दोनों उसी होटल में रुके थे, जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने शादी की तैयारियों का जायजा भी लिया। IPL 2026 के बीच काशी पहुंचे रिंकू रिंकू सिंह इस समय Kolkata Knight Riders के लिए Indian Premier League 2026 खेल रहे हैं और टीम के उपकप्तान हैं। KKR का अगला मुकाबला Lucknow Super Giants के साथ लखनऊ में होना है। कौन हैं प्रिया सरोज? प्रिया सरोज उत्तर प्रदेश की मछलीशहर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद हैं। वह राजनीति में तेजी से उभरता हुआ चेहरा मानी जाती हैं और अब रिंकू सिंह के साथ अपने रिश्ते को लेकर भी चर्चा में हैं। रिंकू सिंह का क्रिकेट करियर रिंकू सिंह भारत के लिए वनडे और टी20 इंटरनेशनल में डेब्यू कर चुके हैं। उन्होंने अब तक 2 वनडे और 45 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं। वह 2018 से IPL में खेल रहे हैं और शुरुआत से ही कोलकाता नाइट राइडर्स का हिस्सा हैं। रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की वाराणसी यात्रा ने उनकी शादी की खबरों को और हवा दे दी है। हालांकि अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जून में शादी और वाराणसी में फेरे की चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं।
Earth Day 2026: धरती बचाने के लिए Bhopal के लोग कर रहे हैं खास प्रयास, जानिए कैसे मना रहे हैं पृथ्वी दिवस

Earth Day 2026: भोपाल। आज पूरी दुनिया 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस के रूप में मना रही है, जो पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन का सबसे बड़ा वैश्विक प्रतीक बन चुका है। वर्ष 1970 में अमेरिका से शुरू हुआ यह अभियान आज 190 से अधिक देशों तक फैल चुका है और हर साल लाखों लोग इसमें भाग लेकर धरती को बचाने का संकल्प लेते हैं। इस आंदोलन की शुरुआत अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने की थी, जिन्होंने बढ़ते प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के खिलाफ एक जनजागरण की नींव रखी थी। पहले ही वर्ष में इस अभियान को अभूतपूर्व समर्थन मिला था, और समय के साथ यह एक वैश्विक आंदोलन बन गया। आज पृथ्वी दिवस केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक सक्रिय मंच है। जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, वनों की कटाई और जल संकट जैसे मुद्दों पर अब दुनिया भर में गंभीर चर्चा हो रही है। भोपाल में भी पृथ्वी दिवस को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर के स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कई जगहों पर पौधारोपण अभियान चलाया गया, जिसमें छात्रों और नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लोगों ने “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। भोपाल के पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि शहर को हरित और स्वच्छ बनाए रखने के लिए छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। प्लास्टिक का कम उपयोग, जल संरक्षण, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और अधिक से अधिक पेड़ लगाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। कई स्वयंसेवी संगठनों ने झीलों और पार्कों की सफाई अभियान भी चलाया, ताकि शहर की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखा जा सके। शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों ने पोस्टर, निबंध प्रतियोगिता और रैली के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। बच्चों ने “धरती बचाओ, जीवन बचाओ” जैसे नारों के साथ लोगों को जागरूक करने की कोशिश की। विशेषज्ञों का मानना है कि पृथ्वी दिवस का असली उद्देश्य केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीवनशैली में स्थायी बदलाव लाना है। यदि हर व्यक्ति रोजमर्रा के जीवन में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाए, तो जलवायु संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में पृथ्वी दिवस एक बार फिर यह याद दिलाता है कि धरती की सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। भोपाल समेत पूरे देश में लोग इस संदेश को अपनाकर एक हरित और स्वच्छ भविष्य की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
Atal Pension Yojana : सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार को मिला बढ़ावा, एपीवाई में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज..

Atal Pension Yojana : नई दिल्ली: दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा संचालित अटल पेंशन योजना ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जहां इस योजना के तहत कुल नामांकन संख्या 9 करोड़ के पार पहुंच गई है। यह आंकड़ा देश में सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ती जागरूकता और सरकारी योजनाओं के प्रति लोगों के भरोसे को दर्शाता है। विशेष रूप से वित्त वर्ष 2025-26 में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब तक के किसी भी एक वर्ष में सबसे अधिक बताई जा रही है। अटल पेंशन योजना को वर्ष 2015 में इस उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था कि देश के नागरिकों को वृद्धावस्था में एक सुनिश्चित आय का सहारा मिल सके। यह योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के कामगारों और कम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि वे रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सकें। इस योजना के तहत लाभार्थियों को 60 वर्ष की आयु के बाद निश्चित मासिक पेंशन प्रदान की जाती है, जो उनकी चुनी गई राशि पर आधारित होती है। योजना के अंतर्गत 18 से 40 वर्ष की आयु के नागरिक इसमें शामिल हो सकते हैं, जिससे उन्हें लंबी अवधि तक योगदान करने और भविष्य के लिए पेंशन सुनिश्चित करने का अवसर मिलता है। इस व्यवस्था में सरकार की ओर से एक मजबूत संरचना तैयार की गई है, जो पेंशन फंड प्रबंधन के माध्यम से योजना को स्थिर और प्रभावी बनाती है। अटल पेंशन योजना की एक विशेषता यह भी है कि यह केवल व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार की सुरक्षा को भी ध्यान में रखती है। लाभार्थी की मृत्यु के बाद पेंशन का लाभ उनके जीवनसाथी को मिलता है, और दोनों की अनुपस्थिति में संचित राशि नामित व्यक्ति को वापस की जाती है। इससे यह योजना सामाजिक सुरक्षा के व्यापक दायरे को कवर करती है। पिछले एक दशक में इस योजना के विस्तार में बैंकों, डाक विभाग और अन्य वित्तीय संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभिन्न स्तरों पर जागरूकता अभियानों और जनसंपर्क प्रयासों के माध्यम से योजना को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पहुंचाया गया है। इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों और बहुभाषी जानकारी ने भी इसके प्रसार में अहम योगदान दिया है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार इस योजना की बढ़ती लोकप्रियता का मुख्य कारण इसकी सरल संरचना और सुनिश्चित लाभ है, जो आम नागरिकों को भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। विशेष रूप से उन वर्गों के लिए यह योजना महत्वपूर्ण साबित हुई है, जिनके पास रिटायरमेंट के बाद स्थायी आय का कोई साधन नहीं होता। सरकारी प्रयासों के तहत इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। इसके साथ ही वित्तीय जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे लोगों को बचत और भविष्य की सुरक्षा के महत्व को समझाया जा सके।