Chambalkichugli.com

रिजल्ट का इंतजार खत्म: 12वीं के नतीजे आज, जानें कब, कहां और कैसे देखें स्कोर

नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) आज यानी 23 अप्रैल 2026 को कक्षा 12वीं का रिजल्ट जारी करने जा रहा है। रिजल्ट शाम 4 बजे घोषित किया जाएगा, जिसके बाद छात्र-छात्राएं अपने अंक ऑनलाइन देख सकेंगे। इन वेबसाइट्स पर चेक करें रिजल्टरिजल्ट जारी होते ही छात्र नीचे दी गई आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं, upmsp.edu.inupresults.nic.in रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को अपना रोल नंबर दर्ज करना होगा। परीक्षा का शेड्यूलयूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च 2026 के बीच आयोजित की गई थीं। परीक्षा खत्म होने के बाद से ही छात्र रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। इस बार मार्कशीट में बदलावइस साल बोर्ड ने मार्कशीट को और सुरक्षित और आधुनिक बनाया है। मार्कशीट A-4 साइज में होगी और उसमें एक खास मोनोग्राम दिया जाएगा, जो धूप में लाल रंग का दिखाई देगा और छांव में रंग बदल देगा। इससे मार्कशीट की असली पहचान करना आसान होगा और किसी भी तरह की छेड़छाड़ रोकी जा सकेगी। जल्दी रिजल्ट देखने के आसान तरीकेरिजल्ट जारी होते ही वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक आ सकता है, जिससे साइट धीमी या बंद हो सकती है। ऐसे में छात्र ये उपाय अपना सकते हैं: एक से ज्यादा डिवाइस पर वेबसाइट खोलकर रखें रिजल्ट लिंक एक्टिव होते ही तुरंत रोल नंबर डालें अलग-अलग वेबसाइट्स पर भी कोशिश करते रहें छात्रों के लिए जरूरी क्यारिजल्ट देखने के बाद छात्र अपनी मार्कशीट की सभी जानकारी ध्यान से जांच लें। अगर कोई गलती मिलती है, तो तुरंत अपने स्कूल या बोर्ड से संपर्क करें। UP Board Result 2026 आज जारी होने जा रहा है, जिससे लाखों छात्रों का इंतजार खत्म होगा। छात्र तैयार रहें और बताए गए तरीकों से आसानी से अपना रिजल्ट चेक करें।

महिला आरक्षण की अधूरी यात्रा और लोकतंत्र

– विवेक रंजन श्रीवास्तव भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक़त उसकी विविधता और समावेशिता है। लेकिन जब लोकसभा में ही महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का संविधान संशोधन वर्षों तक पारित नहीं हो सका, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या हमारा लोकतंत्र वास्तव में आधी आबादी को बराबरी का अवसर देने की इच्छा रखता है। विधेयक का महत्व महिला आरक्षण विधेयक केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं था, बल्कि यह भारतीय राजनीति में समानता और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम होता। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% सीटें मिलतीं तो उनकी आवाज़ अधिक मज़बूती से गूँजती। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर नीतियाँ अधिक संवेदनशील और व्यावहारिक बनतीं। राजनीतिक विश्लेषण सेवा आज भी संसद में महिलाओं की संख्या 15% से कम है। यह आँकड़ा बताता है कि लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी कितनी सीमित है। आरक्षण से यह अंतर मिटाने का अवसर मिलता। असफलता के कारण विधेयक पारित न हो पाने के पीछे कई कारण रहे जिनमें राजनीतिक असहमति प्रमुख है। कुछ दलों ने जनगणना आधारित सीटों के पुनर्वितरण (परिसीमन) पर आपत्ति जताई। भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष को दो धारी तलवार पर खड़ा कर दिया। उनके लिए संविधान संशोधन हेतु जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाना कठिन साबित हुआ। सपा जैसे कुछ दलों को आशंका थी कि आरक्षण से उनके पारंपरिक वोट बैंक प्रभावित होंगे, इसलिए वे विरोध में रहे। इन कारणों ने मिलकर एक ऐतिहासिक अवसर का गर्भपात कर दिया। 2023 का नया अध्याय लंबे संघर्ष और बहस के बाद 2023 में संसद ने आखिरकार महिला आरक्षण विधेयक पारित कर दिया। इसमें यह प्रावधान है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% सीटें मिलेंगी, लेकिन यह आरक्षण परिसीमन (delimitation) और जनगणना के बाद ही लागू होगा। इस शर्त ने इसे एक अधूरी जीत बना दिया है, क्योंकि वास्तविक प्रभाव तब तक नहीं दिखेगा जब तक नई जनगणना और सीटों का पुनर्वितरण पूरा नहीं होता। समकालीन परिप्रेक्ष्य 2024 के आम चुनावों में महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी, लेकिन प्रतिनिधित्व अब भी सीमित रहा। महिला संगठनों ने 2023 के विधेयक को “ऐतिहासिक लेकिन अधूरा” कहा। कई राजनीतिक दलों ने इसे समर्थन दिया, पर साथ ही यह मांग भी उठी कि इसे शीघ्र लागू किया जाए ताकि केवल कागज़ी प्रावधान न रह जाए। असर और चुनौती महिला आरक्षण विधेयक का अधूरा रहना और फिर विलंबित रूप से पारित होना कई स्तरों पर असर डालता है। महिला नेतृत्व का अवसर फिलहाल टल गया लगता है। महिला संगठनों और नागरिक समाज में गहरी निराशा है। राजनीतिक दलों पर इसे शीघ्र लागू करने का दबाव बढ़ेगा। लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक का अधूरा रहना केवल एक विधायी पराजय नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की अधूरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें राजनीति व्यापक राष्ट्रहित से बड़ी सिद्ध हुई। जब तक संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या पर्याप्त नहीं होगी, तब तक नीतियाँ समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएँगी। भारत की आधी आबादी को बराबरी का अधिकार देना केवल संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। यह विधेयक पारित होना हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमारी राजनीति वास्तव में समावेशी है। महिला आरक्षण विधेयक का अधूरा रहना लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक चुनौती है। यह आवश्यक है कि सभी राजनीतिक दल अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर इस मुद्दे पर सहमति बनाएँ। महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% प्रतिनिधित्व देना भारतीय लोकतंत्र को अधिक सशक्त, न्यायपूर्ण और संतुलित बनाएगा। आज नहीं तो कल यह होकर रहेगा, क्योंकि यह जन आकांक्षा है।

मार्केट क्रैश: निवेशकों को झटका, Sensex लुढ़का, Nifty में भारी गिरावट से मचा हड़कंप

नई दिल्ली । गुरुवार, 23 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन बाजार खुलते ही निवेशकों को झटका लगा और दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में30 शेयरों वाला BSE Sensex करीब 532 अंक की गिरावट के साथ 77,983 के आसपास खुला। वहीं NSE Nifty 50 भी 175 अंक से ज्यादा गिरकर 24,202 के स्तर पर ओपन हुआ। दिन की शुरुआत से ही बाजार में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। बुधवार को भी रहा था बाजार कमजोरइससे पहले बुधवार, 22 अप्रैल को भी बाजार में गिरावट देखी गई थी। सेंसेक्स 756 अंक टूटकर 78,516 पर बंद हुआ था निफ्टी 198 अंक गिरकर 24,378 के स्तर पर बंद हुआ लगातार दूसरे दिन गिरावट से बाजार में कमजोरी का संकेत मिल रहा है। बाजार में कई सेक्टरों में दबाव देखने को मिला आईटी सेक्टर में कमजोरी बैंकिंग शेयरों में गिरावट ऑटो सेक्टर भी दबाव में हालांकि, कुछ सेक्टर जैसे FMCG और मिडकैप शेयरों में हल्की मजबूती देखने को मिली। किन शेयरों ने किया निराश?गिरावट के बीच कई दिग्गज कंपनियों के शेयर टूटे, जिनमें शामिल हैं HCL Technologies, TCS, ICICI Bank, Mahindra & Mahindra, वहीं कुछ कंपनियों जैसे Reliance Industries और NTPC में हल्की तेजी देखी गई। निवेशकों के लिए क्या संकेत?लगातार गिरते बाजार से यह संकेत मिल रहा है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। निवेशकों को सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है। 23 अप्रैल को शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि दिन के आगे के कारोबार में बाजार संभलता है या गिरावट जारी रहती है।

लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 में क्रिकेट की ऐतिहासिक वापसी, जय शाह ने बताया बड़ा मील का पत्थर

नई दिल्ली ।लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए क्रिकेट की ऐतिहासिक वापसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जहां कैलिफोर्निया के पोमोना में क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। इस निर्माण की शुरुआत को खेल जगत में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि लगभग 128 वर्षों बाद क्रिकेट एक बार फिर ओलंपिक मंच पर वापसी करने जा रहा है। इस मौके पर आयोजित एक विशेष समारोह में कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं और इसे क्रिकेट के वैश्विक विस्तार का नया अध्याय बताया गया। इस अवसर पर क्रिकेट प्रशासन से जुड़े शीर्ष प्रतिनिधियों ने इस परियोजना को खेल के भविष्य के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह क्रिकेट को नई पहचान और नए बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। उनके अनुसार क्रिकेट आज पहले से कहीं अधिक वैश्विक खेल बन चुका है और ओलंपिक में इसकी वापसी इस बात का प्रमाण है कि इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। क्रिकेट प्रशासन के प्रमुख ने इस अवसर पर कहा कि यह मैदान ओलंपिक खेलों के दौरान केंद्र बिंदु के रूप में काम करेगा और दुनिया भर के दर्शकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल न केवल खिलाड़ियों के लिए नए अवसर खोलेगी, बल्कि अमेरिका जैसे बड़े बाजार में क्रिकेट के विकास को भी गति देगी। इस परियोजना को खेल के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में क्रिकेट का शामिल होना इस खेल के लिए एक नए युग की शुरुआत करेगा। इससे न केवल नए खिलाड़ी और दर्शक जुड़ेंगे, बल्कि खेल की व्यावसायिक और सांस्कृतिक पहुंच भी कई गुना बढ़ जाएगी। कार्यक्रम में मौजूद अन्य खेल प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस पहल का स्वागत किया और इसे भविष्य की खेल संरचना के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि यह स्टेडियम आने वाले वर्षों में क्रिकेट की वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा और ओलंपिक में इसकी उपस्थिति को यादगार बनाएगा। पिछले कुछ वर्षों में क्रिकेट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विस्तार किया है। दर्शकों की संख्या, डिजिटल जुड़ाव और वैश्विक टूर्नामेंट्स में भागीदारी में लगातार वृद्धि देखी गई है। ऐसे में ओलंपिक में इसकी वापसी को खेल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

जन-जन को मिले जलाधिकार

– डॉ.वेदप्रकाशकुछ लोग जल का व्यापार करें और कुछ लोग बूंद बूंद को तरसें। क्या यह जन-जन के जलाधिकार का हनन नहीं है? शासन- प्रशासन मौन क्यों है? क्या हम नहीं जानते कि जल जीवन तत्व है,अमृत है और प्रत्येक जीवधारी के लिए परमात्मा द्वारा दिया गया उपहार है। जल के बिना न तो जीवन संभव है और न ही प्रकृति-संस्कृति की संकल्पना साकार हो सकती है। पृथ्वी पर लगभग 70 प्रतिशत जल होने पर भी पेयजल लगभग 03 प्रतिशत ही है। आज जब जनसंख्या की दृष्टि से भारत सबसे आगे है। नदी, कुएं ,तालाब, बावड़ियां, झरनें और भूजल निरंतर प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। तब क्या हमें जल के संरक्षण- संवर्धन और सदुपयोग पर गंभीरता से विचार नहीं करना चाहिए? ध्यातव्य है कि विगत दिनों इंदौर सहित देश में कई स्थानों पर प्रदूषित पानी पीने से कई लोग असमय मृत्यु के शिकार हो गए। यदि उन्हें स्वच्छ जल का अधिकार मिला होता तो आज वे जीवित होते। भारत की त्यागपूर्वक भोग की संस्कृति ने सर्वे भवंतु सुखिन: के माध्यम से सबके सुख की कामना की है। कुएं, हैंडपंप, झरने और बावड़ियों से उतना ही जल लिया जाता था, जितनी आवश्यकता होती थी। सभी की चिंता करते हुए सभी को पर्याप्त और स्वच्छ जल की उपलब्धता हेतु धनी लोग जगह-जगह कुंए और प्याऊ बनवाते थे। पानी खरीदने और बेचने का विचार ही नहीं था। आज भारत में मानक व अमानक, वैध एवं अवैध से परे सैकड़ों नामों से पैकेज्ड पानी बिक रहा है। पैकेज्ड पानी का व्यापार करने वाली 10 शीर्ष कंपनियों में बिसलेरी, किनले,एक्वाफिना, रेल नीर, टाटा वाटर प्लस, ऑक्सीरिच, किंगफिशर, हिमालयन, बेले एवं नेस्ले प्रमुख हैं। इन कंपनियों का वार्षिक व्यापार लगभग 20 हजार करोड़ रुपए है जिसमें 32 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बिसलेरी सबसे ऊपर है। बाजार में एक लीटर पानी की कीमत लगभग 20 रुपये है। एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में लगभग 3 लीटर पानी पीना चाहिए, यानी एक व्यक्ति दिन में लगभग 60-70 रुपये का पानी पीता है। परिवार के हिसाब से यह खर्च लगभग 300-400 रुपये प्रति परिवार हो जाता है। क्या यह परिवार की आर्थिकी को प्रभावित नहीं करता? क्या किसी गरीब व्यक्ति के लिए खरीद कर पानी पीना संभव है? जानकारी के अनुसार भारत में पैकेज्ड पानी का चलन 1960 के दशक में शुरू हुआ। कुएं, तालाब, बावड़ी और प्याऊ आदि पर उपलब्ध जल में सभी का अधिकार होता था लेकिन धीरे-धीरे औद्योगीकरण एवं भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रदूषणों से ये जल स्रोत प्रदूषित होने लगे। प्याऊ खत्म कर दी गई और विज्ञापनों के माध्यम से बोतल बंद पानी पीने वालों को ही स्वस्थ और सभ्य दिखाया जाने लगा। प्रश्न यह है कि जब जल पर मानव सहित सभी जीवधारियों का अधिकार है तो उसे भूगर्भ से निकालकर, नदी- झरनों से लेकर व्यावसायिक प्रयोग के लिए कुछ कंपनियां अथवा लोग कैसे दोहन कर सकते हैं? देश के अनेक हिस्सों में अवैध रूप से नदियों, झरनों और भूगर्भ से जल निकालकर खुलेआम बेचा जा रहा है। नदियां और झरनें सूख रहे हैं। उनके बहाव क्षेत्र में रहने वाले लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में ये लोग आवश्यकता के लिए पानी खरीदने को मजबूर हैं। क्या यह इन लोगों के जलाधिकार का हनन नहीं है? क्या व्यवसाय के लिए दोहन कर रहे लोग इस जल के बदले किसी को कोई कीमत दे रहे हैं? देश के कई हिस्सों में और विशेष रूप से महानगरों व पर्वतीय क्षेत्रों में शासन- प्रशासन की मिलीभगत से जल माफिया पनप रहे हैं। नहर, बांध एवं पाइपलाइन से स्थानांतरित किए जाने वाले जल का बड़ा हिस्सा लीकेज के कारण बर्बाद होता है। विभिन्न स्थानों पर घरों में सप्लाई हेतु बिछाई गई पाइपलाइन जर्जर हैं। कई स्थानों पर उन्हें अवैध रूप से तोड़कर पानी लिया जाता है और बाकी व्यर्थ बहता रहता है। इसकी निगरानी हेतु कोई व्यवस्था भी दिखाई नहीं देती। क्या यह जिन्हें जल नहीं मिल पा रहा है और पानी के लिए सरकार को पैसा भी दे रहे हैं उनके जलाधिकार का हनन नहीं है? 23 मार्च 2026 को छपा एक समाचार बताता है कि भूजल के अवैध दोहन के कारण राष्ट्रीय राजधानी डे जीरो की तरफ बढ़ रही है, अर्थात् राजधानी में वर्षा जल संचयन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। न ही उपचारित पानी के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है और न ही पानी की बर्बादी रुक रही है। पानी की कमी को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर भूजल का अवैध दोहन हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार राजधानी में लगभग 1250 मिलियन गैलन पानी की प्रतिदिन आवश्यकता है। इसकी तुलना में केवल 1000 मिलियन गैलन पानी ही उपलब्ध है। जितना उपलब्ध है उसमें से भी लगभग आधा चोरी या रिसाव के कारण बर्बाद हो जाता है जबकि समय-समय पर पाइप लाइन की मरम्मत एवं रखरखाव के लिए करोड़ों रुपया आवंटित किया जाता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2050 तक विश्व के कई शहर डे जीरो की स्थिति में पहुंच सकते हैं। जिसमें भारत के दिल्ली, जयपुर, चेन्नई, हैदराबाद व बेंगलूर जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। चिंताजनक यह भी है कि राष्ट्रीय राजधानी जैसे स्थान पर वर्षा जल संचयन की विभिन्न योजनाएं होने पर भी उचित व्यवस्था न होने के कारण प्रतिवर्ष वर्षा जल का लगभग 85 प्रतिशत नालों में बेकार बह जाता है। क्या इस प्रकार की स्थिति जन-जन के जलाधिकार हेतु एक बड़ी समस्या नहीं है? नदियां सिंचाई पेयजल एवं औद्योगिक आपूर्ति की एक बड़ी स्रोत हैं। देश की छोटी बड़ी कई नदियां भयानक रूप से प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। कई नदियों में अनुपचारित औद्योगिक अपशिष्ट एवं सीवेज खुलेआम बहाया जा रहा है। कई नदियों पर बांध बना दिए गए हैं, जिससे नदी को उसके जीवन के लिए बहाव हेतु जल ही नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में नदी का पारिस्थितिकी तंत्र गड़बड़ा रहा है। नदियां दम तोड़ रही हैं। इन नदियों के आसपास रहने वाले लोग विस्थापन को मजबूर हैं। नदियों को जोड़ने से सभी को पेयजल की सुनिश्चितता संभव है। चिंताजनक है कि विगत दिनों जल संसाधन संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी ताजा रिपोर्ट में नदी जोड़ो परियोजना के

बीमारी से थे परेशान: Katni में बुजुर्ग की मौत, पुलिस जांच में जुटी

नई दिल्ली। कटनी जिले के बड़वारा थाना क्षेत्र में एक बुजुर्ग की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में हड़कंप मच गया। ग्राम सलैया में 72 वर्षीय व्यक्ति का शव उनके ही घर के बाहर फांसी के फंदे पर लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई। घर के बाहर लकड़ी की ठाट पर लगाई फांसीमृतक की पहचान सलैया निवासी मुन्ने लाल सिंह (72) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपने घर के बाहरी हिस्से में बनी लकड़ी की ठाट (ढांचे) पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सुबह जब परिजनों की नजर शव पर पड़ी तो उन्होंने तुरंत बड़वारा थाना पुलिस को सूचना दी। लंबे समय से बीमारी से थे परेशानपरिजनों के मुताबिक, मुन्ने लाल सिंह काफी समय से गंभीर शारीरिक बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके पुत्र नवाब सिंह परस्ते ने बताया कि पिता को शरीर में तेज जलन और असहनीय दर्द की शिकायत रहती थी। इस कारण वे मानसिक रूप से भी परेशान रहने लगे थे और कई बार आत्महत्या करने की बात करते थे। परिजनों ने जताई आत्महत्या की आशंकापरिवार का कहना है कि लगातार बीमारी और दर्द से तंग आकर उन्होंने यह कदम उठाया होगा। हालांकि, पुलिस ने अभी इसे केवल प्रारंभिक आशंका माना है और सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार, जांच जारीबड़वारा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी के.के. पटेल के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही सामने आएगा।

सुकेश चंद्रशेख का जैकलीन को भावुक पत्र,कहा-प्यार और जंग में सब जायज है.कानूनी प्रक्रिया के बीच बढ़ी हलचल

नई दिल्ली । 200 करोड़ रुपये से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर नया घटनाक्रम सामने आया है, जहां जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर ने अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को एक और पत्र लिखा है। यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब मामला अदालत में विचाराधीन है और विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इस नए पत्र ने एक बार फिर इस हाई-प्रोफाइल केस को चर्चा में ला दिया है और कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ सार्वजनिक स्तर पर भी इस पर ध्यान बढ़ गया है। अपने पत्र में सुकेश चंद्रशेखर ने भावनात्मक और व्यक्तिगत अंदाज में जैकलीन फर्नांडिस को संबोधित किया है। उसने पत्र की शुरुआत एक खास संबोधन से की और जैकलीन को मेरीबताते हुए अपने भावनात्मक जुड़ाव का उल्लेख किया। पत्र में उसने लिखा कि वह उनसे बेहद प्यार करता है और हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा। उसने एक बार फिर अपने शब्दों में यह दोहराया कि उसके अनुसार प्यार और जंग में सब जायज हैऔर अपने रिश्ते को लेकर कई भावनात्मक दावे किए। पत्र में उसने यह भी कहा कि वह लगातार जैकलीन को याद कर रहा है और उनके बीच का संबंध उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है। सुकेश ने अपने पत्र में खुद को भावनात्मक रूप से व्यक्त करते हुए कई निजी दावे किए और यह दिखाने की कोशिश की कि वह अब भी इस रिश्ते को लेकर गंभीर भावनाएं रखता है। उसने पत्र के अंत में खुद को एक विशेष नाम से संबोधित किया और यह भी लिखा कि वह हमेशा उनके साथ रहेगा। यह पहली बार नहीं है जब उसने इस तरह का पत्र लिखा हो, इससे पहले भी वह कई बार इसी तरह के भावनात्मक पत्र भेज चुका है, जिनमें उसने अपने दावों और भावनाओं को दोहराया है। इस पूरे मामले के बीच अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस की ओर से अदालत में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई है, जिसमें उन्होंने सरकारी गवाह बनने की अनुमति मांगी है। इस याचिका के दाखिल होने के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है और अदालत में इस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों ने अपना पक्ष रखने के लिए समय की मांग की है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और प्रत्येक पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। इस याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख भी तय की गई है, जिसके बाद आगे की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है। यह मामला लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है और समय-समय पर इससे जुड़े नए घटनाक्रम सामने आते रहे हैं। सुकेश चंद्रशेखर द्वारा लिखे गए पत्र पहले भी सुर्खियों में रहे हैं, जिनमें उसने बार-बार व्यक्तिगत भावनाओं और दावों को दोहराया है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का निर्णय केवल अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही तय किया जाएगा। इस नए पत्र ने एक बार फिर पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जहां एक ओर अदालत में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे पत्रों के कारण मामला लगातार सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है।

हवाई सफर हुआ आसान इंदौर से दिल्ली ,और जलगांव के लिए एलायंस एयर की नई उड़ान शुरू

इंदौर । मध्य प्रदेश के हवाई यात्रियों के लिए बड़ी राहत और सुविधा की खबर सामने आई है जहां इंदौर स्थित देवी अहिल्या बाई होलकर अंतरराष्ट्रीय विमानतल से हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है इस विस्तार के तहत एलायंस एयर आगामी एक मई से इंदौर को सीधे जलगांव और दिल्ली से जोड़ने वाली नई उड़ान सेवा शुरू करने जा रही है जिससे यात्रियों को यात्रा के नए और आसान विकल्प मिलेंगे इस नई फ्लाइट सेवा के शुरू होने से न केवल इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को लाभ मिलेगा बल्कि व्यापारिक गतिविधियों पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को भी नई गति मिलने की उम्मीद है लंबे समय से इस रूट पर सीधी उड़ान की मांग की जा रही थी जिसे अब पूरा किया जा रहा है एयरलाइन द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार यह फ्लाइट सप्ताह में तीन दिन मंगलवार गुरुवार और शनिवार को संचालित की जाएगी यह विमान दिल्ली से उड़ान भरकर इंदौर पहुंचेगा और इसके बाद जलगांव के लिए रवाना होगा इसी तरह वापसी के दौरान यह फ्लाइट जलगांव से इंदौर होते हुए फिर दिल्ली की ओर जाएगी जिससे तीनों शहरों के बीच बेहतर हवाई संपर्क स्थापित होगा फ्लाइट संख्या 9आई 627 दिल्ली से शाम चार बजकर पचास मिनट पर उड़ान भरकर शाम छह बजकर पचास मिनट पर इंदौर पहुंचेगी इसके बाद यही विमान शाम सात बजकर पंद्रह मिनट पर इंदौर से रवाना होकर रात सात बजकर पचपन मिनट पर जलगांव पहुंचेगा इस तरह यात्रियों को कम समय में एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी वापसी की उड़ान में फ्लाइट संख्या 9आई 628 जलगांव से रात आठ बजकर बीस मिनट पर उड़ान भरेगी और रात नौ बजे इंदौर पहुंचेगी इसके बाद यह विमान रात नौ बजकर पच्चीस मिनट पर दिल्ली के लिए रवाना होकर रात ग्यारह बजकर तीस मिनट पर राजधानी पहुंचेगा यह रूट खासकर उन यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा जो रात के समय यात्रा करना पसंद करते हैं इस सेवा के लिए टिकट बुकिंग भी तीन कैटेगरी में शुरू कर दी गई है इंदौर से जलगांव के लिए सुपर सेवर कैटेगरी का किराया चार हजार चौहत्तर रुपये वैल्यू कैटेगरी का किराया दस हजार एक सौ चौसठ रुपये और फ्लेक्सिबल कैटेगरी का किराया पंद्रह हजार दो सौ चार रुपये तय किया गया है वहीं इंदौर से दिल्ली के लिए सुपर सेवर कैटेगरी छह हजार बासठ रुपये वैल्यू बारह हजार एक सौ बावन रुपये और फ्लेक्सिबल कैटेगरी बीस हजार पांच सौ बावन रुपये में उपलब्ध होगी इंदौर और जलगांव के बीच सीधी उड़ान को लेकर लंबे समय से व्यापारिक वर्ग की ओर से मांग की जा रही थी जलगांव महाराष्ट्र का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र होने के साथ साथ अजंता की प्रसिद्ध गुफाओं के लिए भी जाना जाता है ऐसे में यह नई हवाई सेवा पर्यटन और व्यापार दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी इंदौर के कपड़ा और सराफा व्यापारियों को इस रूट से विशेष लाभ मिलेगा क्योंकि अब उन्हें महाराष्ट्र के इस हिस्से में पहुंचने के लिए लंबा सड़क या रेल सफर नहीं करना पड़ेगा वहीं दिल्ली के लिए अतिरिक्त रात की उड़ान मिलने से कॉर्पोरेट और प्रोफेशनल यात्रियों को भी बड़ी सुविधा प्राप्त होगी एलायंस एयर ने इस नए रूट के संचालन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और माना जा रहा है कि यह सेवा क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी

दिल दहला देने वाला सड़क हादसा: टक्कर के बाद सड़क पर तड़पता रहा बुजुर्ग, ज्यादा खून बहने से गई जान

नई दिल्ली । अनूपपुर जिले में नेशनल हाईवे-43 पर बुधवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसे ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। तेज रफ्तार ट्रक ने एक बुजुर्ग को कुचल दिया, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसमें हादसे की भयावह तस्वीर सामने आई है। सड़क पर तड़पते रहे बुजुर्ग, नहीं रुका ट्रकघटना रामनगर थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। मृतक की पहचान 56 वर्षीय जमुना विश्वकर्मा के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, वे बुधवार दोपहर करीब 2 बजे पैदल जा रहे थे, तभी नगर परिषद डोला कार्यालय के सामने तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बुजुर्ग के सिर में गंभीर चोटें आईं और माथे की हड्डियां तक टूट गईं। सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। घायल बुजुर्ग सड़क पर तड़पते रहे, लेकिन काफी देर तक कोई उनकी मदद के लिए नहीं रुका। यह दृश्य मानवता को झकझोर देने वाला रहा। अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालतस्थानीय लोगों ने कुछ समय बाद घायल को एंबुलेंस के जरिए बिजुरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। डॉक्टरों के अनुसार, उनके सिर में गहरी चोटें थीं और काफी खून बह चुका था। हालत नाजुक होने के कारण इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। CCTV से ट्रक की पहचान, पुलिस जांच में जुटीरामनगर थाना प्रभारी सुमित कौशिक ने बताया कि पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की है। फुटेज में एक संदिग्ध ट्रक की पहचान हुई है, जो अनूपपुर से छत्तीसगढ़ की ओर जा रहा था। पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश जारी है। लोगों में आक्रोश, सड़क सुरक्षा पर सवालघटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण नहीं है, जिससे आए दिन हादसे हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से सख्त कार्रवाई और सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की मांग की है।

गर्मी में हजारों वाहन सील: खखान नदी इलाके में जाम हटाने में जीती पुलिस-प्रशासन टीम

नई दिल्ली । Singrauli जिले से गुजरने वाले नेशनल हाईवे-39 पर खाखंन नदी के पास बुधवार रात हुए सड़क हादसे ने यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा दी। एक भारी वाहन के पीछे लुढ़कने से दो गाड़ियों की जोरदार टक्कर हो गई, जिसके बाद दोनों वाहन सड़क पर पलट गए। हादसे में ड्राइवर सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन सड़क पूरी तरह बाधित हो जाने से लंबा जाम लग गया।  10 किलोमीटर लंबा जाम, हजारों वाहन फंसेहादसे के बाद देवसर से बरगवां मार्ग और सीधी-सिंगरौली रोड पर करीब 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। इस जाम में हजारों छोटे-बड़े वाहन फंसे हुए हैं। ट्रक, बस और निजी वाहन घंटों से सड़क पर खड़े हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में लोग बेहालगर्मी के इस मौसम में जाम में फंसे लोगों की हालत खराब हो गई है। कई यात्रियों के पास पीने का पानी और खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान नजर आए। कई लोग वाहनों से उतरकर सड़क किनारे छांव तलाशते दिखे।  प्रशासन जुटा, लेकिन राहत में देरीघटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। Bargawan थाना प्रभारी मोहम्मद समीर के अनुसार, सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों के कारण क्रेन को घटनास्थल तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है। इसी वजह से राहत कार्य में देरी हो रही है।  क्रेन पहुंचाने की कोशिश, धीरे-धीरे हटाए जा रहे वाहनप्रशासन की टीम एक-एक कर वाहनों को किनारे कर रही है, ताकि क्रेन को रास्ता मिल सके और पलटे वाहनों को हटाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सड़क को पूरी तरह साफ कर यातायात बहाल कर दिया जाएगा।  हाईवे प्रबंधन पर उठे सवालइस घटना के बाद हाईवे पर आपातकालीन व्यवस्था और ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर क्रेन और राहत दल पहुंच जाते, तो इतना लंबा जाम नहीं लगता।