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तेज रफ्तार बस का कहर, बाइक सवार की दर्दनाक मौत, के बाद ग्रामीणों ने किया चक्का जाम

इंदौर । इंदौर जिले के महू क्षेत्र में स्थित किशनगंज थाना इलाके के भैंसलाए गांव में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। तेज रफ्तार से दौड़ रही एक फैक्ट्री बस ने बाइक सवार युवक को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद युवक को संभलने का मौका तक नहीं मिला और घटनास्थल पर ही उसकी सांसें थम गईं। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और माहौल गम और गुस्से में बदल गया। यह घटना केवल एक हादसा नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा मानी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सड़क से तेज रफ्तार में गुजरने वाले वाहनों को लेकर कई बार प्रशासन को चेताया गया था। विशेष रूप से फैक्ट्री की बसों की रफ्तार पर लगाम लगाने और गांव में स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग बार बार उठाई गई थी लेकिन हर बार इसे नजरअंदाज कर दिया गया। इस अनदेखी ने आखिरकार एक युवक की जान ले ली और अब ग्रामीणों का धैर्य टूट गया। हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीण बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए और उन्होंने चक्का जाम कर दिया। लोगों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। उनका साफ कहना था कि यदि समय रहते स्पीड ब्रेकर बनाए गए होते तो शायद यह हादसा टल सकता था। प्रदर्शन के चलते इलाके में यातायात पूरी तरह ठप हो गया और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री की बसें अक्सर लापरवाही से और तेज रफ्तार में गांव के भीतर से गुजरती हैं जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद न तो कोई गति नियंत्रण के उपाय किए गए और न ही सुरक्षा के अन्य इंतजाम किए गए। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल घटनाओं के बाद सक्रिय होता है जबकि पहले से चेतावनी देने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया जाता। घटना की सूचना मिलते ही किशनगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में करने की कोशिश की। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया और यातायात बहाल कराने की दिशा में कदम उठाए। साथ ही मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार करता है या फिर समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएंगे। एक जान जाने के बाद अब गांव के लोग ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

कांग्रेस IT सेल वर्कर्स को लेकर विवाद: Bhopal में परिजनों ने लगाया अपहरण का आरोप, जांच की मांग

नई दिल्ली । राजधानी Bhopal में राजस्थान साइबर पुलिस की कार्रवाई ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के बाद परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘अपहरण’ तक करार दिया है। मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर गरमा गया है, जबकि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का आरोप: बिना सूचना ले गए, कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाईशिकायतकर्ता मोहम्मद आमिर ने आरोप लगाया कि उनके भांजे बिलाल खान समेत तीन युवकों निखिल और इनाम को कुछ लोग खुद को राजस्थान पुलिस बताकर अपने साथ ले गए। परिवार का कहना है कि उन्हें यह कहकर गुमराह किया गया कि तीनों को कोर्ट में पेश किया जाएगा, लेकिन न तो उन्हें किसी स्थानीय अदालत में पेश किया गया और न ही मेडिकल कराया गया। परिजनों का आरोप है कि बिना आधिकारिक जानकारी के इस तरह ले जाना कानून के खिलाफ है। वायरल पत्र से जुड़ा है पूरा विवादयह पूरा मामला राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री Vasundhara Raje के नाम से वायरल हुए एक कथित पत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित इस पत्र के तार भोपाल स्थित कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े होने की आशंका जताई गई थी। इसी सिलसिले में राजस्थान साइबर पुलिस की टीम जांच के लिए भोपाल पहुंची थी। राजनीतिक बयानबाजी भी तेजकांग्रेस नेता PC Sharma ने इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब परिवार ने शिकायत दर्ज करा दी है, तो संबंधित एजेंसियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सूचना, बिना मेडिकल और बिना कोर्ट पेशी के कार्रवाई पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। परिवार की मांग है कि तीनों युवकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए। टाइमलाइन से बढ़ी शंकाघटना की टाइमलाइन भी कई सवाल खड़े करती है। 19 अप्रैल: तीनों कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर रोका गया। 21 अप्रैल दोपहर: परिजनों को जानकारी मिली कि उन्हें कलेक्टर कार्यालय के पास रखा गया है। उसी दिन दोपहर 3 बजे: एक कार से उन्हें कहीं ले जाया गया, परिजनों को जमानत की बात कहकर भेज दिया गया। शाम तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर परिजनों ने थाना कोहेफिजा में शिकायत दर्ज कराई। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर संदेह और गहरा कर दिया है। हाईकोर्ट सख्त, 27 अप्रैल को पेश करने के आदेशमामले ने जब कानूनी मोड़ लिया तो Madhya Pradesh High Court की जबलपुर बेंच ने हस्तक्षेप किया। अदालत ने राजस्थान पुलिस को 27 अप्रैल को तीनों कार्यकर्ताओं को पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस से पूरी कार्रवाई का विवरण मांगा गया है। कोर्ट ने 20-21 अप्रैल के सीसीटीवी फुटेज भी प्रस्तुत करने को कहा है। गिरफ्तारी प्रक्रिया पर उठे बड़े सवालयाचिका में गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए न्याय की मांग की गई है। सवाल यह है कि यदि कार्रवाई नियमों के तहत हुई, तो परिजनों को अंधेरे में क्यों रखा गया? यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है। सच्चाई सामने आना जरूरीभोपाल में हुई इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली, कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता पर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर 27 अप्रैल पर टिकी है, जब अदालत में सच्चाई सामने आएगी और यह तय होगा कि कार्रवाई कानून के दायरे में थी या नहीं।

CM का बयान: एक्सपोर्ट बाधित होने से बढ़ा दबाव, गेहूं खरीद बढ़ाने और जूट सप्लाई सुधारने की अपील

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सरकार ने बड़ा रुख साफ किया है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा है कि प्रदेश में रिकॉर्ड उत्पादन को देखते हुए केंद्र सरकार से खरीदी का कोटा बढ़ाने की मांग की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक हालातों के चलते निर्यात में कमी और जूट आयात में आ रही दिक्कतों के बावजूद राज्य सरकार किसानों का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। वैश्विक संकट का असर: एक्सपोर्ट रुका, जूट आयात प्रभावितमुख्यमंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां इस समय जटिल बनी हुई हैं, जिसके कारण भारत से गेहूं का निर्यात लगभग ठप हो गया है। वहीं पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालातों के चलते जूट की आपूर्ति भी बाधित हुई है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने वैकल्पिक इंतजाम करते हुए पीपी बैग्स की व्यवस्था कर खरीदी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने दिया है। रिकॉर्ड पैदावार से बढ़ी चुनौती, कोटा कम पड़ने की आशंकाइस साल प्रदेश में गेहूं का उत्पादन लगभग दोगुना हुआ है, जिससे खरीदी व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। केंद्र सरकार ने फिलहाल 78 लाख मीट्रिक टन का कोटा तय किया है, लेकिन मौजूदा उत्पादन को देखते हुए यह लक्ष्य अपर्याप्त साबित हो सकता है। इसी कारण राज्य सरकार लगातार केंद्र से संपर्क कर कोटा बढ़ाने की मांग कर रही है, ताकि हर किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। किसानों के हित में रणनीति: छोटे किसानों को प्राथमिकतासरकार ने किसान संगठनों के साथ चर्चा के बाद खरीदी की प्राथमिकता तय की है। इसके तहत पहले छोटे किसानों, फिर मध्यम और अंत में बड़े किसानों की उपज खरीदी जाएगी। इससे छोटे और जरूरतमंद किसानों को पहले राहत मिलने की उम्मीद है। एमएसपी पर बोनस के साथ खरीदी, 2700 का वादा बरकरारप्रदेश में इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके साथ ₹40 प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर किसानों को कुल ₹2625 प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि संकल्प पत्र में किए गए ₹2700 प्रति क्विंटल के वादे को अगले तीन वर्षों में पूरा किया जाएगा। भंडारण भी बड़ी चुनौती, फिर भी खरीदी जारीसीएम ने यह भी माना कि पिछले साल का गेहूं अभी भी बड़ी मात्रा में गोदामों में रखा हुआ है, जिससे भंडारण की समस्या सामने आ रही है। बावजूद इसके, सरकार खरीदी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने देगी और हर किसान की फसल खरीदे जाने का प्रयास जारी रहेगा। किसानों को भरोसा: सरकार हर हाल में साथमुख्यमंत्री Mohan Yadav ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है। केंद्र से कोटा बढ़ाने की मांग भी इसी दिशा में एक अहम प्रयास है, जिससे प्रदेश के किसानों को उनका हक मिल सके।

डेविड धवन ने पहली बार तोड़ी चुप्पी, बताया आखिर क्यों सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ कभी नहीं बन पाई कोई फिल्म।

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी व्यावसायिक और मनोरंजक फिल्मों का जिक्र होता है, तो निर्देशक डेविड धवन का नाम सबसे ऊपर आता है। उन्होंने अपने करियर में गोविंदा, सलमान खान, संजय दत्त और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम करके सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। डेविड धवन की फिल्मों की अपनी एक अलग पहचान रही है, जिसमें हंसी, मस्ती और पारिवारिक मनोरंजन का अनूठा संगम होता है। हालांकि, फिल्म जगत के जानकारों और प्रशंसकों के मन में हमेशा यह एक बड़ा सवाल बना रहा कि आखिर क्यों डेविड धवन ने ‘रोमांस के बादशाह’ शाहरुख खान के साथ कभी कोई फिल्म निर्देशित नहीं की। यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि जिस दौर में डेविड धवन एक के बाद एक सुपरहिट फिल्में दे रहे थे, उसी दौर में शाहरुख खान भी बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार बनकर उभरे थे। हाल ही में अपनी आने वाली फिल्म के प्रचार के दौरान डेविड धवन ने इस रहस्य से पर्दा हटाया और बताया कि उनके और शाहरुख के बीच कभी किसी अनबन या मतभेद की वजह से दूरी नहीं रही। असल में एक समय ऐसा भी था जब दोनों कलाकार और निर्देशक साथ में किसी प्रोजेक्ट पर काम करने की गंभीरता से योजना बना रहे थे। डेविड धवन के अनुसार, वह शाहरुख खान की प्रतिभा के कायल रहे हैं और उनके मन में हमेशा से उनके साथ काम करने की इच्छा थी। दोनों के बीच बातचीत भी हुई और एक कहानी को लेकर शुरुआती चर्चाएं भी की गईं, लेकिन सिनेमाई दुनिया के कुछ व्यावहारिक कारणों ने इस जोड़ी को पर्दे पर आने से रोक दिया। इस दूरी का सबसे बड़ा कारण डेविड धवन का उस समय का अत्यधिक व्यस्त वर्क शेड्यूल था। निर्देशक ने साझा किया कि 90 के दशक और उसके बाद के वर्षों में उनके पास काम का इतना दबाव रहता था कि अक्सर उनकी दो से तीन फिल्में एक साथ फ्लोर पर रहती थीं। एक फिल्म की शूटिंग खत्म होने से पहले ही दूसरी फिल्म के प्री-प्रोडक्शन का काम शुरू हो जाता था। दूसरी ओर, शाहरुख खान भी अपने करियर के शिखर पर थे और उनकी डेट्स मिलना बेहद चुनौतीपूर्ण था। डेविड धवन का कहना है कि जब वे दोनों एक प्रोजेक्ट के लिए साथ बैठने की कोशिश करते थे, तो समय का तालमेल नहीं बैठ पाता था। निर्देशक का मानना है कि किसी बड़े स्टार के साथ काम करने के लिए पूरी एकाग्रता और समय की आवश्यकता होती है, जो उस समय उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। डेविड धवन ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म उद्योग में कलाकारों के साथ उनकी एक खास ‘ट्यूनिंग’ रही है। जैसे गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी ने लगातार कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, वैसे ही सलमान खान और संजय दत्त के साथ भी उनका एक सहज रिश्ता बन गया था। उन्होंने अपनी शैली की फिल्मों के लिए एक विशेष कलाकार वर्ग चुन लिया था, जिसके साथ वे काम करने में बहुत सहज महसूस करते थे। हालांकि, वे शाहरुख खान के साथ भी वैसा ही जादुई अनुभव साझा करना चाहते थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। समय बीतता गया और वे अपने स्थापित कलाकारों के साथ प्रोजेक्ट्स में व्यस्त होते गए, जिसके कारण शाहरुख के साथ काम करने का विचार धीरे-धीरे पीछे छूट गया। वर्तमान परिदृश्य की बात करें तो डेविड धवन आज भी फिल्म निर्माण की दुनिया में सक्रिय हैं और अब वे अपने बेटे वरुण धवन के साथ नई पीढ़ी के दर्शकों के लिए कॉमेडी फिल्में बना रहे हैं। उनकी आने वाली फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। यह फिल्म न केवल डेविड के निर्देशन की वापसी को दर्शाती है, बल्कि वरुण धवन के करियर के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भले ही डेविड धवन और शाहरुख खान का साथ काम करने का सपना अधूरा रह गया हो, लेकिन डेविड के मन में आज भी शाहरुख के प्रति गहरा सम्मान है। वे मानते हैं कि शाहरुख एक बेहद मेहनती और समर्पित अभिनेता हैं और अगर भविष्य में कभी सही स्क्रिप्ट और सही समय का मेल हुआ, तो दर्शक शायद उस अधूरा सपने को पूरा होते देख सकें। डेविड धवन और शाहरुख खान का साथ न आना फिल्म इंडस्ट्री के उन ‘मिसिंग लिंक्स’ में से एक है जिसे लेकर प्रशंसक आज भी चर्चा करते हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि मनोरंजन की चकाचौंध भरी दुनिया में कभी-कभी प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि समय और परिस्थितियों का सही तालमेल न बैठना बड़े कोलैबोरेशंस को रोक देता है। डेविड धवन की सुपरहिट फिल्मों की सूची में भले ही शाहरुख खान का नाम शामिल न हो, लेकिन दोनों ने अपने-अपने तरीके से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया है। आज भी जब डेविड अपनी पुरानी यादें साझा करते हैं, तो उनके शब्दों में एक कलाकार के प्रति दूसरे कलाकार का सम्मान साफ झलकता है, जो यह साबित करता है कि सिनेमाई पर्दे से परे भी रिश्तों और व्यावसायिक व्यस्तताओं की अपनी एक अलग जटिलता होती है।

गर्मियों में डायबिटीज को लेकर लापरवाही पड़ सकती है भारी, संतुलित आहार है सबसे जरूरी

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम शुरू होते ही तापमान के साथ-साथ डायबिटीज की समस्या भी बढ़ जाती है। देश में डायबिटीज के मरीज बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। ऐसे में गर्मी में लापरवाही से यह और खतरनाक हो सकती है। अच्छी खबर यह है कि सही खान-पान और सही कैलोरी काउंट से इसे बेहतरीन तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, गर्मियों में सही खान-पान और कैलोरी काउंट पर ध्यान देकर डायबिटीज को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित आहार और उचित मात्रा में कैलोरी का सेवन डायबिटीज प्रबंधन का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। सही कैलोरी काउंट ब्लड शुगर को स्थिर रखता है और दवाओं की जरूरत को भी कम कर सकता है। डायबिटीज में ब्लड शुगर बढ़ने से आंखों की समस्या, किडनी खराब होना, नसों में दिक्कत और दिल की बीमारी जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। गर्मियों में पसीना ज्यादा आने और डिहाइड्रेशन की वजह से यह समस्या और बढ़ जाती है। इसलिए लापरवाही बिल्कुल न करें। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, अपने भोजन की थाली का आधा हिस्सा सब्जियों से भरें। एक चौथाई हिस्सा दाल या प्रोटीन से भरें बाकी हिस्सा साबुत अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, ओट्स, ब्राउन राइस से भरें। ज्यादा चावल, आलू, मैदा और मीठे पदार्थों से परहेज करें। फाइबर युक्त आहार, पालक, ब्रोकली, भिंडी, लौकी, करेला और दालें रोजाना खाएं। वहीं, चीनी, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, जूस और प्रोसेस्ड फूड को पूरी तरह से ना कहें। फल का सेवन सीमित मात्रा में करें। इसके लिए सेब, अमरूद, पपीता, जामुन व मौसमी फल अच्छे विकल्प हैं। हालांकि, मिठास वाले फलों के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। खाने का समय भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए चार्ट बनाएं नाश्ता सुबह 8-9 बजे के बीच, दोपहर का भोजन 1 से 2 बजे के बीच लें, व रात का भोजन 7 से 8 बजे के बीच करें। बीच में भूख लगे तो कुछ हल्का स्नैक ले सकते हैं, जैसे मुट्ठी भर मखाना या दही। नियमित 30 मिनट की सैर, हल्का व्यायाम और तनाव कम करना भी डायबिटीज नियंत्रण में मदद करता है। अगर ब्लड शुगर बढ़ जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

प्याज और आंवला रस का मिश्रण: बालों की मजबूती और ग्रोथ के लिए असरदार घरेलू उपाय

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम सिर्फ शरीर को ही नहीं, बल्कि बालों को भी सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी मिलकर स्कैल्प को कमजोर कर देते हैं, जिससे बाल झड़ने, रूखापन और डैंड्रफ जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। ऐसे में प्राकृतिक उपायों की ओर लौटना सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना जाता है। आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में प्याज और आंवला का मिश्रण बालों के लिए बेहद फायदेमंद बताया गया है। प्याज का रस कैसे करता है कामप्याज का रस स्कैल्प में रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) को तेज करता है। इससे बालों की जड़ों को अधिक पोषण मिलता है और नई बालों की ग्रोथ को बढ़ावा मिलता है। इसमें मौजूद सल्फर बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है और हेयर फॉल को कम करने में मदद करता है। नियमित उपयोग से बाल घने और मजबूत हो सकते हैं।  आंवला क्यों है बालों के लिए वरदानआंवला को आयुर्वेद में बालों के लिए सबसे उपयोगी औषधि माना गया है। इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो बालों को अंदर से पोषण देते हैं। यह समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या को भी कम करता है और स्कैल्प को स्वस्थ बनाए रखता है।  प्याज और आंवला रस का मिश्रण कैसे करें तैयारइस उपाय को अपनाने के लिए समान मात्रा में प्याज का रस और आंवला का रस मिलाएं। इसे अच्छी तरह मिक्स करके स्कैल्प और बालों की जड़ों पर हल्के हाथों से लगाएं। लगाने के बाद कम से कम 30 मिनट तक छोड़ दें, ताकि यह स्कैल्प में अच्छी तरह अवशोषित हो सके।इसके बाद हल्के गुनगुने पानी और माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें।  उपयोग करते समय सावधानी जरूरीकुछ लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है, ऐसे में प्याज का रस लगाने से हल्की जलन या चुभन महसूस हो सकती है। यदि ऐसा हो तो तुरंत बाल धो लें। इस मिश्रण को लगाने के बाद सीधे धूप में जाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे स्कैल्प में जलन बढ़ सकती है।  कितनी बार करें इस्तेमालबेहतर परिणाम के लिए इस मिश्रण को सप्ताह में 2 बार इस्तेमाल करना उचित माना जाता है। इससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और बालों का झड़ना धीरे-धीरे कम होने लगता है।  अतिरिक्त देखभाल के उपायबाल धोने के बाद हल्का हेयर सीरम लगाने से नमी बनी रहती है। यदि सीरम उपलब्ध न हो तो दही और एलोवेरा का मिश्रण भी सप्ताह में एक बार लगाया जा सकता है। इससे बालों में चमक आती है और रूखापन कम होता है। प्याज और आंवला का मिश्रण एक सरल, सस्ता और प्राकृतिक उपाय है, जो गर्मियों में बालों को झड़ने से रोकने और उन्हें मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। सही तरीके से और नियमित उपयोग करने पर यह बालों की सेहत में स्पष्ट सुधार ला सकता है।

बॉलीवुड किस्सा: माधुरी दीक्षित के लिए मुश्किल रही ये फिल्म, शूटिंग के दौरान जोशीली हो गई थीं एक्ट्रेस

नई दिल्ली। बॉलीवुड में सितारों की चमक-दमक और शानदार कॉस्ट्यूम्स अक्सर फिल्मों की पहचान बन जाते हैं, लेकिन एक फिल्म ऐसी भी रही, जहां लीड एक्ट्रेस को पूरी कहानी सिर्फ दो जोड़ी कपड़ों में निभानी पड़ी। यह किस्सा जुड़ा है सुपरहिट फिल्म Khalnayak और इसके निर्देशक Subhash Ghai से, जिन्होंने अपनी परफेक्शन के लिए Madhuri Dixit को एक कठिन स्थिति में डाल दिया था। जब डायरेक्टर की सोच बन गई चुनौतीफिल्म ‘खलनायक’ की कहानी में माधुरी दीक्षित का किरदार एक किडनैप्ड लड़की का था। इस किरदार को वास्तविक बनाने के लिए सुभाष घई ने एक सख्त फैसला लिया पूरी फिल्म में माधुरी सिर्फ दो ही आउटफिट्स पहनेंगी। उनका तर्क साफ था कि एक अपहृत लड़की के पास कपड़े बदलने का विकल्प नहीं होता, इसलिए किरदार की सच्चाई बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। यह फैसला भले ही कहानी के लिहाज से मजबूत था, लेकिन माधुरी के लिए काफी मुश्किल भरा साबित हुआ। बार-बार बदली ड्रेस की इच्छा, लेकिन नहीं मिली इजाजतशूटिंग के दौरान माधुरी कई बार नई ड्रेस पहनने की इच्छा जाहिर करती थीं, लेकिन सुभाष घई अपने फैसले पर अड़े रहे। उन्होंने साफ कहा कि फिल्म की डिमांड यही है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि उन्होंने एक वादा जरूर किया कि गानों में उन्हें शानदार और आकर्षक लुक दिया जाएगा। इस सख्ती के कारण कई बार माधुरी भावुक भी हो गईं, लेकिन उन्होंने अपने प्रोफेशनलिज्म के चलते काम जारी रखा। संजय दत्त का दमदार किरदार और फिल्म की सफलताफिल्म में Sanjay Dutt ने खलनायक का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। सुभाष घई ने उनके लुक और डायलॉग डिलीवरी पर खास मेहनत की थी, जो फिल्म की सफलता का बड़ा कारण बना। यह फिल्म अपने समय की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक रही और बॉक्स ऑफिस पर भी जबरदस्त हिट साबित हुई। ‘चोली के पीछे’ गाने ने मचाया था बवालफिल्म का मशहूर गाना Choli Ke Peeche Kya Hai रिलीज के साथ ही विवादों में आ गया था। इसके बोलों को लेकर काफी विरोध हुआ और शुरुआती दौर में इसे बैन भी कर दिया गया था। हालांकि बाद में इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसे वापस शामिल करना पड़ा। इस गाने के लिए Alka Yagnik और Ila Arun को फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। शूटिंग के दौरान मुश्किलें और अनोखे किस्सेफिल्म की शूटिंग के दौरान कई उतार-चढ़ाव भी आए। Sanjay Dutt को उस समय जेल जाना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने बाहर आकर फिल्म की डबिंग पूरी की। इसके अलावा, उसी समय एक और फिल्म ‘खलनायिका’ को लेकर भी विवाद सामने आया, जिससे इस प्रोजेक्ट की चर्चा और बढ़ गई। आज भी यादगार है यह किस्सा‘खलनायक’ सिर्फ अपनी कहानी और गानों के लिए ही नहीं, बल्कि ऐसे दिलचस्प किस्सों के लिए भी याद की जाती है। माधुरी दीक्षित का यह अनुभव बताता है कि एक कलाकार अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए किस हद तक समर्पण दिखाता है।

एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, खजुराहो में पारा 43.4 डिग्री पहुंचा, आज 19 जिलों में लू चलने की चेतावनी

भोपाल । मध्यप्रदेश में गर्मी का असर लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को राज्य का प्रमुख पर्यटन स्थल खजुराहो सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके बाद नर्मदापुरम और नौगांव में भी पारा 43 डिग्री के पार पहुंच गया। मौसम विभाग ने गुरुवार को भी तेज गर्मी और लू का असर बने रहने की चेतावनी दी है। ग्वालियर सहित 19 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी गर्म हवाएं परेशान करेंगी। इन जिलों में लू का अलर्ट जारीमौसम केंद्र भोपाल के अनुसार ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, रतलाम, झाबुआ, धार और अलीराजपुर में लू चलने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रदेश के कई शहरों में पारा 40°C से ऊपरबुधवार को कई जिलों में तापमान 40 डिग्री से अधिक रिकॉर्ड किया गया। खजुराहो के बाद नर्मदापुरम (43.2°C) और नौगांव (43°C) सबसे गर्म रहे। रायसेन, दतिया, टीकमगढ़, सागर, रीवा, मंडला और अन्य कई जिलों में भी पारा 40 से 42 डिग्री के बीच दर्ज हुआ। बड़े शहरों की बात करें तो जबलपुर 41.6°C, ग्वालियर 41.2°C, भोपाल 40.6°C, इंदौर 40°C और उज्जैन 40.2°C पर रहा। रातें भी नहीं दे रहीं राहत, वॉर्म नाइट की स्थितिप्रदेश में अब रात का तापमान भी राहत नहीं दे रहा है। कई शहरों में न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति ‘वॉर्म नाइट’ कहलाती है, जब रात का तापमान सामान्य से काफी अधिक रहता है। हालांकि फिलहाल ‘सीवियर वॉर्म नाइट’ की स्थिति दर्ज नहीं की गई है। मौसम विभाग की चेतावनी और सलाहलगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दिन में पर्याप्त पानी पीने, धूप से बचने और हल्के सूती कपड़े पहनने की अपील की गई है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है, ताकि हीटवेव के असर से बचा जा सके।

फारस की खाड़ी और होर्मुज में तेल रिसाव का संकट गहराया, उपग्रह तस्वीरों में मिले गंभीर संकेत

दुबई । अमेरिका और ईरान से जुड़े सैन्य तनाव के बाद फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में कई स्थानों पर तेल रिसाव के गंभीर संकेत सामने आए हैं। उपग्रह तस्वीरों में ईरान के केश्म द्वीप, लावान द्वीप और कुवैत तट के पास समुद्र में फैला हुआ तेल स्पष्ट रूप से देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस स्थिति पर तुरंत नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र एक बड़े पर्यावरणीय संकट में बदल सकता है, जिससे समुद्री जीवन, तटीय आबादी और जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। उपग्रह निगरानी में सामने आया समुद्री प्रदूषणएक रिपोर्ट के अनुसार उपग्रह चित्रों ने न केवल तेल ढांचे और जहाजों पर हुए नुकसान को उजागर किया है, बल्कि फारस की खाड़ी के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर मंडरा रहे खतरे को भी सामने रखा है। कई तस्वीरों में समुद्र की सतह पर फैला तेल स्पष्ट दिखाई देता है, जो तटीय समुदायों की आजीविका और मछली पालन पर सीधा असर डाल सकता है। केश्म द्वीप के पास लगभग पांच मील तक फैले तेल के निशान दर्ज किए गए हैं। शिदवर द्वीप के पारिस्थितिकी तंत्र पर संकटफारस की खाड़ी में स्थित शिदवर द्वीप को एक महत्वपूर्ण कोरल क्षेत्र माना जाता है, जहां कछुए, समुद्री पक्षी और अन्य जीव रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का तेल रिसाव यदि इन क्षेत्रों तक पहुंचता है तो यह समुद्री प्रजातियों के प्रजनन, भोजन श्रृंखला और पूरे पारिस्थितिक संतुलन को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है। कुवैत तट तक फैला असरछह अप्रैल को प्राप्त उपग्रह तस्वीरों में कुवैत के तटीय क्षेत्र के पास भी तेल फैलाव देखा गया। इसी दिन ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने खाड़ी क्षेत्र की ईंधन और पेट्रोकेमिकल सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही थी, जिसके बाद स्थिति और संवेदनशील हो गई। लाखों लोगों और समुद्री जीवन पर खतरापर्यावरण विशेषज्ञ विम ज्वाइनेनबर्ग के अनुसार, इस तरह का तेल रिसाव लाखों लोगों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है, खासकर तटीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को। प्रदूषित समुद्र मछली पालन को नुकसान पहुंचा सकता है और खाद्य सुरक्षा पर असर डाल  है। समुद्री जीव जैसे कछुए, डॉल्फिन और व्हेल भी इससे गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि वे तेल के संपर्क में आ सकते हैं या उसे निगल सकते हैं। साथ ही, समुद्री जल को शुद्ध करने वाले संयंत्रों (डिसैलिनेशन प्लांट्स) पर भी खतरा मंडरा रहा है।

PM मोदी अगले माह जाएंगे एक सप्ताह के विदेश दौरे पर…. इन देशों की करेंगे यात्रा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अगले महीने यानी मई (May) के मध्य में यूरोप की एक सप्ताह की महत्वपूर्ण यात्रा पर जाने वाले हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यूरोपीय संघ (European Union-EU) के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करना तथा महाद्वीप के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी को नई दिशा देना है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ताबड़तोड़ विदेश दौरा करेंगे। वे नॉर्वे, नीदरलैंड और इटली जाएंगे। नॉर्वे का दौरा: तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और EFTA पर जोरWION की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव नॉर्वे की राजधानी ओस्लो होगा, जहां वे तीसरे ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ में भाग लेंगे। इस सम्मेलन में स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता भी शामिल होंगे। इससे पहले यह सम्मेलन 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित हो चुका है। नॉर्वे ‘यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ’ (EFTA) का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। अक्टूबर 2025 में लागू हुए ‘भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते’ के बाद इस दौरे की अहमियत काफी बढ़ गई है। भारत को क्या मिलेगा?इस समझौते के तहत EFTA देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है, जिससे देश में लगभग 10 लाख नए रोजगार पैदा होने का लक्ष्य है। साथ ही, इससे कपड़ा, चमड़ा और खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खुलेंगे। ओस्लो में होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी), जलवायु परिवर्तन, ‘ब्लू इकॉनमी’, इनोवेशन, डिजिटलीकरण और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग पर विस्तार से चर्चा होगी। नीदरलैंड दौरा: कृषि और तकनीक पर फोकसओस्लो के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड जाएंगे। यहां उनकी पिछली यात्रा 2017 में हुई थी। द हेग (नीदरलैंड) जल प्रबंधन, कृषि, तकनीक और आतंकवाद विरोधी प्रयासों में भारत का एक प्रमुख भागीदार रहा है। पिछले साल कुछ कारणों से टल गए कार्यक्रमों और बैठकों की तारीखों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया जा सके। इटली और वेटिकन सिटी: पहली द्विपक्षीय यात्राप्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में इटली भी शामिल है। यह उनकी इटली की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। हालांकि वे 2021 में G20 शिखर सम्मेलन और 2024 में G7 आउटरीच के लिए रोम जा चुके हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ उनकी चर्चा का मुख्य केंद्र रक्षा, ऊर्जा और निवेश से जुड़े मुद्दे होंगे। पोप से मुलाकात संभवइस बात की भी प्रबल संभावना है कि पीएम मोदी वेटिकन सिटी का दौरा करें और ईसाई धर्मगुरु पोप से मुलाकात करें। ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलनमई का यह यूरोप दौरा 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुए 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के ठीक बाद हो रहा है। उस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता पीएम मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की थी। उसमें ‘भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA)’ पर बातचीत पूरी होने की ऐतिहासिक घोषणा की गई थी। साथ ही, एक नई ‘सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी’ और ‘टुवर्ड्स 2030’ संयुक्त रणनीतिक एजेंडा भी तय किया गया था। मई यात्रा का लक्ष्यइस दौरे से FTA को तेजी से लागू करने, सप्लाई चेन को विविधतापूर्ण बनाने और स्वच्छ तकनीक (क्लीन टेक) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी। आगामी कार्यक्रम: फ्रांस में G7 सम्मेलनयूरोप के साथ इस सघन कूटनीति के क्रम में, प्रधानमंत्री मोदी जून के महीने में फ्रांस भी जाएंगे, जहां वे G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत को 2019 से लगातार इस प्रभावशाली समूह के आउटरीच कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता रहा है, जो वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है।