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मासूमों पर मंडराया खतरा फेल हुई बच्चों की दवा पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन

जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां बच्चों को दी जाने वाली एक दवा जांच में मानकों पर खरी नहीं उतरी है। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल सख्त कदम उठाते हुए संबंधित सिरप के उपयोग और वितरण पर रोक लगा दी है। यह मामला बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण पूरे स्वास्थ्य तंत्र में हलचल मच गई है और अभिभावकों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है। जानकारी के अनुसार पैरासिटामॉल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन आईपी 125mg 5ml नाम की सिरप जांच के दौरान फेल पाई गई है। यह दवा बच्चों को बुखार और दर्द में दी जाती है और सरकारी अस्पतालों में भी इसकी सप्लाई की गई थी। जैसे ही जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आई स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी अस्पतालों और चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नवीन कोठारी ने सभी संबंधित संस्थानों को पत्र लिखकर इस विशेष बैच की दवा के उपयोग और वितरण को पूरी तरह से बंद करने के आदेश दिए हैं। साथ ही अस्पतालों और क्लिनिक को अपने स्टॉक की जांच करने और संदिग्ध बैच को अलग रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी तरह से यह दवा मरीजों तक न पहुंचे। इस दवा का निर्माण इंदौर स्थित मेसर्स जेनिथ ड्रग्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। बताया जा रहा है कि दवा का सैंपल कुछ समय पहले जांच के लिए भोपाल भेजा गया था जहां परीक्षण के दौरान यह मानकों पर खरी नहीं उतरी। रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बिना देरी किए इसे प्रतिबंधित कर दिया। सीएमएचओ नवीन कोठारी ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है। स्टोर में रखी दवाओं का समय समय पर परीक्षण किया जाता है और एनएबीएल रिपोर्ट आने के बाद ही उन्हें उपयोग में लाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित सिरप में क्लंपिंग की समस्या पाई गई है जिससे उसमें क्रिस्टलाइजेशन हो रहा था और यह निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह दवा पूरी तरह खराब नहीं है लेकिन तय गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरने के कारण इसे उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता। फिलहाल यह दवा बाजार में उपलब्ध नहीं है और केवल सरकारी स्टॉक में ही थी जिससे स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली है। स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों को यह विशेष सिरप न दें और यदि उनके पास इस बैच की दवा है तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सतर्कता कितनी जरूरी है खासकर जब मामला बच्चों की सेहत से जुड़ा हो। इस कार्रवाई से साफ है कि स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही को लेकर गंभीर है और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। अब आगे इस मामले में विस्तृत जांच के बाद और भी कदम उठाए जा सकते हैं।

16 साल की लड़ाई के बाद न्याय: National Investigation Agency केस में आरोपी बने राजेंद्र चौधरी बरी, पहली बार में पास की थी PSC परीक्षा

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के Depalpur निवासी राजेंद्र चौधरी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं, लेकिन यह हकीकत है-दर्द, संघर्ष और आखिरकार न्याय की जीत की कहानी। 16 साल तक आतंकवाद के गंभीर मामलों में आरोपी रहे राजेंद्र को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। बुधवार को आए फैसले के बाद उन्होंने कहा, “मेरा सपना अधिकारी बनकर समाज सेवा करना था, लेकिन मुझे आरोपी बना दिया गया।” पहले ही प्रयास में PSC क्लियर, फिर बदली जिंदगी की दिशाराजेंद्र चौधरी ने बीकॉम की पढ़ाई के बाद MPPSC की प्रारंभिक परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर ली थी। वे प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए काम करना चाहते थे। लेकिन दिसंबर 2012 की एक रात ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। रामायण पाठ के दौरान गिरफ्तारी, NIA ने घेराराजेंद्र के मुताबिक, 15 दिसंबर 2012 को वे गांव में रामायण का पाठ कर रहे थे, तभी National Investigation Agency (NIA) की टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेरकर गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर हरियाणा ले जाया गया और पंचकूला की विशेष अदालत में पेश किया गया। उन पर Mecca Masjid Blast, Samjhauta Express Blast और मालेगांव ब्लास्ट जैसे मामलों में शामिल होने के आरोप लगाए गए। कस्टडी में टॉर्चर के आरोप, ‘अंधेरी कोठरी में रखा गया’राजेंद्र ने दावा किया कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें कस्टडी में मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्हें अंधेरी कोठरी में अकेले रखा जाता था, घंटों तक एक ही स्थिति में बैठने या खड़े रहने को मजबूर किया जाता था।उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सोने नहीं दिया जाता था, मारपीट की जाती थी और कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया जाता था। यहां तक कि बिजली के झटके देने जैसी यातनाएं भी दी गईं। फरारी, जेल और अदालत-संघर्ष के 16 सालराजेंद्र के परिचितों के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले वे करीब दो साल जम्मू-कश्मीर में फरारी काट चुके थे। इससे पहले उज्जैन के एक हत्याकांड में भी उन्हें आरोपी बनाया गया था, जिसमें वे 2014 में बरी हो गए थे। इन वर्षों में उन्हें अलग-अलग जेलों में रखा गया और कई मामलों में सुनवाई चली। इस दौरान उनका करियर, सामाजिक जीवन और परिवार सब प्रभावित हुआ। अदालत से बरी, न्याय व्यवस्था पर जताया भरोसाहाल ही में अदालत ने उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया। फैसले के बाद राजेंद्र ने कहा, “हमें शुरू से ही भारतीय न्याय व्यवस्था पर भरोसा था। आज उसी विश्वास की जीत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि इतने सालों का नुकसान कोई वापस नहीं कर सकता, लेकिन न्याय मिलने से सुकून जरूर मिला है। अब आगे क्या? राजनीति में एंट्री के संकेतराजेंद्र चौधरी से जब पूछा गया कि क्या वे अब राजनीति में कदम रखेंगे, तो उन्होंने कहा कि यह फैसला समाज और उनके समर्थकों की राय पर निर्भर करेगा। फिलहाल उन्हें किसी राजनीतिक दल से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है, लेकिन वे भविष्य के लिए विकल्प खुले रखे हुए हैं। सवालों के घेरे में जांच एजेंसियांयह मामला एक बार फिर जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। 16 साल तक गंभीर आरोपों में फंसे रहने के बाद बरी होना इस बात की ओर इशारा करता है कि जांच और साक्ष्यों की प्रक्रिया में कहीं न कहीं खामियां रही होंगी।

2021 के आंकड़ों और इस बार के उच्च मतदान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में संभावित बदलाव की अटकलें बढ़ाईं

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए पहले चरण के मतदान के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 16 जिलों की 152 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान में रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसने राजनीतिक दलों के भीतर उम्मीदों और विश्लेषणों को नया आयाम दे दिया है। सभी प्रमुख दल अपने अपने पक्ष में जनसमर्थन का दावा कर रहे हैं, जबकि राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे बदलते जनमत के संकेत के रूप में देख रहे हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों के परिणामों पर नजर डालें तो इन 152 सीटों पर मुकाबला मुख्य रूप से दो बड़े राजनीतिक दलों के बीच केंद्रित रहा था। उस समय सत्तारूढ़ दल को स्पष्ट बढ़त मिली थी और उन्होंने इन सीटों में से बड़ी संख्या में जीत हासिल की थी, जबकि विपक्षी दल ने भी कई क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन किया था। चुनावी परिणामों में क्षेत्रीय विविधता स्पष्ट रूप से दिखाई दी थी, जहां कुछ जिलों में एक दल का दबदबा था, वहीं अन्य क्षेत्रों में मुकाबला अपेक्षाकृत संतुलित रहा था। उत्तरी बंगाल के कई जिलों में विपक्षी दल का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा था, जबकि दक्षिणी बंगाल के कई हिस्सों में सत्तारूढ़ दल ने मजबूत पकड़ बनाई थी। कुछ जिलों में मुकाबला बेहद करीबी था, जहां जीत का अंतर काफी कम रहा, जिससे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और भी रोचक हो गई थी। यह स्थिति राज्य की विविध राजनीतिक संरचना को दर्शाती है, जहां क्षेत्रीय मुद्दे और स्थानीय समीकरण चुनाव परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस बार के चुनावी चरण में सबसे उल्लेखनीय पहलू मतदान प्रतिशत में वृद्धि है। पहले चरण में दर्ज हुआ उच्च मतदान प्रतिशत राज्य के चुनावी इतिहास में एक महत्वपूर्ण आंकड़ा माना जा रहा है। इससे पहले के चुनावों की तुलना में इस बार अधिक मतदाताओं की भागीदारी ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है। आम तौर पर उच्च मतदान को मतदाताओं की सक्रियता और कभी कभी सत्ता विरोधी रुझान के संकेत के रूप में देखा जाता है, हालांकि यह निष्कर्ष हर स्थिति में समान नहीं होता। पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में भी ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जहां मतदान प्रतिशत में वृद्धि के बाद सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है। इसी कारण वर्तमान स्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग अलग अनुमान लगाए जा रहे हैं। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि केवल मतदान प्रतिशत के आधार पर चुनाव परिणामों का आकलन करना पूरी तस्वीर को स्पष्ट नहीं करता। इस समय राज्य में सभी प्रमुख दल अपने अपने जनसमर्थन को मजबूत बताते हुए भविष्य को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। जमीनी स्तर पर मतदाताओं की भागीदारी और क्षेत्रीय समीकरण यह तय करेंगे कि आने वाले परिणाम किस दिशा में जाते हैं। 152 सीटों का यह समूह राज्य की राजनीतिक दिशा को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह पूरे चुनावी रुझान का संकेत देने वाला एक बड़ा हिस्सा माना जाता है।

रसोई बना मौत का मंजर ,तेज विस्फोट में बुजुर्ग की जान गई ,पत्नी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

राजगढ़ । मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। बायपास स्थित शिवधाम कॉलोनी में एक घर के रसोईघर में गैस सिलेंडर में हुए भीषण विस्फोट ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक घटना में पति की मौके पर ही हालत गंभीर हो गई और बाद में अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई जबकि पत्नी गंभीर रूप से झुलसकर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। जानकारी के अनुसार यह हादसा सुबह करीब पांच बजे हुआ जब सुरेंद्र सिंह भल्ला अपने घर में मौजूद थे। रसोईघर में रखे गैस सिलेंडर में अचानक आग लग गई और देखते ही देखते जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना तेज था कि उसकी आवाज दूर तक सुनाई दी और आसपास के लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। कुछ ही पलों में पूरी कॉलोनी में अफरा तफरी का माहौल बन गया। विस्फोट की चपेट में आकर 60 वर्षीय सुरेंद्र सिंह भल्ला और उनकी पत्नी पद्मा भल्ला बुरी तरह झुलस गए। दोनों को तत्काल बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें भोपाल रेफर कर दिया। लेकिन रास्ते में नरसिंहगढ़ पहुंचते ही सुरेंद्र सिंह ने दम तोड़ दिया जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वहीं उनकी पत्नी का इलाज जारी है और उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है। घटना के समय दंपती घर में अकेले थे जिससे किसी को तुरंत मदद के लिए बुलाने का मौका भी नहीं मिल पाया। घर में पीएनजी गैस कनेक्शन के साथ एलपीजी सिलेंडर भी मौजूद था जिससे हादसे की वजह को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पहले आग लगी और उसके बाद विस्फोट हुआ या फिर विस्फोट के कारण आग भड़की। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव को सिविल अस्पताल ब्यावरा भेजकर पोस्टमार्टम कराया और मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए हर पहलू की जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। इस हादसे ने एक बार फिर घरेलू गैस सिलेंडर की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गैस सिलेंडर के उपयोग में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है इसलिए समय समय पर सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है। पूरी कॉलोनी में इस घटना के बाद शोक और डर का माहौल है। स्थानीय लोग इस दर्दनाक हादसे को लेकर स्तब्ध हैं और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। यह घटना एक चेतावनी भी है कि घर में उपयोग होने वाली गैस से जुड़ी सावधानियों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।

धार्मिक प्रतीकों पर रोक का विरोध: Bhopal में कर्मचारियों को बांधा कलावा, प्रदर्शन तेज

नई दिल्ली । राजधानी Bhopal के एमपी नगर स्थित एक निजी कंपनी में कर्मचारियों के धार्मिक प्रतीकों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। तिलक, बिंदी, मंगलसूत्र और कलावा जैसे प्रतीकों पर रोक के फैसले ने सामाजिक और धार्मिक संगठनों को नाराज़ कर दिया है, जिसके बाद मामला सड़कों तक पहुंच गया। हिंदू उत्सव समिति का प्रदर्शन, कर्मचारियों को बांधा कलावाइस फैसले के विरोध में Hindu Utsav Samiti ने जोरदार प्रदर्शन किया। समिति के अध्यक्ष Chandrashekhar Tiwari ने आरोप लगाया कि कंपनी ने नोटिस जारी कर कर्मचारियों को धार्मिक प्रतीक पहनकर आने से मना किया है, जो आस्था पर सीधा हमला है।प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने फैक्ट्री पहुंचकर कर्मचारियों को तिलक लगाया और कलावा बांधा, ताकि विरोध दर्ज कराया जा सके। साथ ही प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की गई। कर्मचारी का आरोप-तिलक लगाकर आने पर रोका गयाविवाद तब और बढ़ गया जब एक कर्मचारी ने दावा किया कि वह तिलक और कलावा लगाकर काम पर पहुंचा, लेकिन उसे गेट पर ही रोक दिया गया। इस घटना के बाद कर्मचारियों में नाराज़गी बढ़ गई है और मामला संवेदनशील होता जा रहा है। कंपनी का पक्ष-प्रोडक्ट क्वालिटी का हवालावहीं कंपनी प्रबंधन ने इस फैसले को धार्मिक नहीं, बल्कि तकनीकी और गुणवत्ता से जुड़ा बताया है। फैक्ट्री के मैनेजर VS Rajput के अनुसार, इन वस्तुओं के उपयोग से प्रोडक्ट के दूषित होने या रिजेक्ट होने का खतरा रहता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संगठन की आपत्ति के बाद नोटिस पर पुनर्विचार किया जा रहा है और समाधान निकालने की कोशिश होगी। बहिष्कार की चेतावनी, प्रशासन पर नजरHindu Utsav Samiti ने कंपनी के फैसले को वापस न लेने पर उसके उत्पादों के बहिष्कार की चेतावनी दी है। प्रदर्शनकारियों ने बीडीए कार्यालय से लेकर फैक्ट्री तक रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। फिलहाल दोनों पक्ष आमने-सामने हैं और प्रशासन की ओर से किसी ठोस कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है धार्मिक स्वतंत्रता बनाम कार्यस्थल नियम-बड़ा सवालयह मामला अब केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बहस भी तेज हो गई है कि कार्यस्थल पर धार्मिक प्रतीकों की सीमा क्या होनी चाहिए। एक ओर जहां कर्मचारी अपनी आस्था को बनाए रखने की बात कर रहे हैं, वहीं कंपनी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का हवाला दे रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख तय करेगा कि यह विवाद शांत होता है या और तूल पकड़ता है

सिनेमा अब आपके घर: एक्शन, रोमांस और खौफनाक हॉरर का जबरदस्त कॉकटेल, आज रिलीज हुई इन बड़ी फिल्मों

नई दिल्ली। सिनेप्रेमियों के लिए यह शुक्रवार किसी उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि आज विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सात नई और प्रभावशाली फिल्में व सीरीज रिलीज हो गई हैं। अगर आप इस वीकेंड घर पर रहकर बेहतरीन कहानियों का आनंद लेना चाहते हैं, तो आपके पास एक्शन, इमोशनल ड्रामा और सस्पेंस के कई शानदार विकल्प मौजूद हैं। इस सप्ताह की सबसे बड़ी चर्चा एक लोकप्रिय जासूसी थ्रिलर सीरीज के तीसरे सीजन को लेकर है, जिसमें मुख्य नायक एक बार फिर देश के होने वाले प्रधानमंत्री की सुरक्षा और अपनी अगवा बेटी को बचाने की दोहरी चुनौती का सामना करता नजर आ रहा है। तेज रफ्तार कहानी और जबरदस्त एक्शन इसे इस हफ्ते की सबसे अनिवार्य वॉच लिस्ट में शामिल करता है। हॉलीवुड फिल्मों के शौकीनों के लिए आज का दिन बेहद खास है। सर्वाइवल थ्रिलर ‘एपेक्स’ में एक महिला रॉक क्लाइंबर और एक शिकारी के बीच की खौफनाक जंग दिखाई गई है, जो दर्शकों की धड़कनें तेज करने के लिए काफी है। वहीं, 1950 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित एक अन्य फिल्म पिंग-पोंग के एक माहिर खिलाड़ी के जुनून और उसके वैश्विक चैंपियन बनने के सपने की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है। विज्ञान और विनाश की कहानियों में रुचि रखने वालों के लिए ‘ग्रीनलैंड 2: माइग्रेशन’ एक बेहतरीन विकल्प है, जो तबाही के पांच साल बाद एक सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकले परिवार के संघर्ष की दास्तां बयां करती है। सिनेमा के वैश्विक फलक से एक दक्षिण कोरियाई हॉरर सीरीज भी आज रिलीज हुई है, जिसमें एक रहस्यमयी मोबाइल ऐप और उसके जरिए पूरी होने वाली इच्छाओं के साथ जुड़ी मौत का खौफनाक खेल दिखाया गया है। क्षेत्रीय सिनेमा की बात करें तो ‘हैप्पी राज’ और ‘बैंड मेलम’ जैसी फिल्में रिश्तों की गहराई और पुराने प्यार की यादों को नए अंदाज में पेश कर रही हैं। जहाँ ‘हैप्पी राज’ पिता-पुत्र के जटिल रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, वहीं ‘बैंड मेलम’ बचपन के उन दो दोस्तों की कहानी है जो वक्त के साथ अलग हो गए लेकिन उनकी मंजिलें उन्हें फिर से आमने-सामने ले आईं। कुल मिलाकर, यह हफ्ता हर तरह के दर्शकों के लिए मनोरंजन का पिटारा लेकर आया है, जो आपके वीकेंड को यादगार बनाने के लिए तैयार है।

‘हर युग में हुआ विरोध’: हर्षा बोलीं-मेरा मार्ग राम ने तय किया, विवाद पर दिया जवाब

नई दिल्ली । उज्जैन में संन्यास को लेकर छिड़े विवाद के बीच Swami Harshanand Giri ने एक वीडियो जारी कर संत समाज के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनका संन्यास कोई आवेश में लिया गया फैसला नहीं, बल्कि आस्था और कर्म का मार्ग है-और अगर भगवान राम ने उनके जीवन में यह लिखा है, तो इसे कोई रोक नहीं सकता। ‘डेढ़ साल से सह रही हूं अपमान, अब हो गई मजबूत’वीडियो में Swami Harshanand Giri ने कहा कि वे पिछले डेढ़ साल से लगातार आलोचना और अपमान झेल रही हैं, लेकिन इस दौरान उन्होंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत किया है। उन्होंने इसे अपनी “अग्नि परीक्षा” बताते हुए कहा कि अब वे किसी भी तरह के विरोध का सामना करने के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि महाकुंभ 2024 के दौरान चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने हाल ही में संन्यास ग्रहण किया और अब वे स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाती हैं। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में Mahant Sumananand Ji Maharaj ने उन्हें दीक्षा दी थी। हालांकि, उनके इस कदम पर Anilanand Maharaj सहित कुछ संतों ने आपत्ति जताई है। मीरा, बुद्ध और सीता का उदाहरण देकर जवाबअपने बयान में उन्होंने इतिहास और धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि जब-जब किसी ने सत्य और धर्म का मार्ग चुना, उसे विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने Meera Bai, Gautama Buddha, Jesus Christ, भगवान राम और सीता का उदाहरण देते हुए कहा कि हर युग में सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों की परीक्षा ली जाती रही है और महिलाओं को अक्सर ज्यादा आलोचना झेलनी पड़ती है। ‘परिवर्तन कभी भी संभव, वाल्मीकि इसका उदाहरण’ संन्यास की उम्र और परंपरा पर उठे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में परिवर्तन का सिद्धांत हमेशा से रहा है। उन्होंने Valmiki का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन में किसी भी समय बदलाव संभव है। अगर ऐसा नहीं होता, तो ऐसे उदाहरण धर्मग्रंथों में क्यों मिलते? ‘प्रचार के लिए मुझे बनाया गया निशाना’Swami Harshanand Giri ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सिर्फ प्रसिद्धि पाने के लिए उन्हें निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि “आपको वायरल होने के लिए एक मुद्दा चाहिए था, और आपने मुझे चुन लिया। साथ ही उन्होंने संतों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर भी आपत्ति जताई और कहा कि एक महिला के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग संत परंपरा के खिलाफ है। युवाओं को धर्म से जोड़ने की अपीलवीडियो के अंत में उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे विवाद बढ़ाने के बजाय युवाओं को धर्म से जोड़ने का प्रयास करें। उनका कहना था कि इस तरह के विवाद युवाओं को आस्था से दूर कर सकते हैं। उन्होंने अपनी बात “होइहि सोइ जो राम रचि राखा” के साथ खत्म करते हुए कहा कि उनका मार्ग ईश्वर ने तय किया है और उन्हें किसी की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है।

विकास में किसानों की भागीदारी मजबूत,चार गुना मुआवजे से बदलेगी आर्थिक तस्वीर ,सीएम का बड़ा बयान

भोपाल । भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भूमि अधिग्रहण और किसानों के हितों को लेकर एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अब प्रदेश में जमीन देने वाले किसानों को चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। इस फैसले को सरकार की विकास नीति और किसान हितैषी दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसानों को केवल मुआवजा देना नहीं बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा में भागीदार बनाना है ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसानों को उनकी जमीन के बदले पर्याप्त और संतोषजनक मुआवजा मिलेगा तो वे न केवल अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा कर पाएंगे बल्कि नई जमीन खरीदने या अन्य निवेश करने में भी सक्षम होंगे। इससे उनकी आजीविका सुरक्षित होगी और वे भविष्य को लेकर अधिक आत्मविश्वास महसूस करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय से भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और लंबे समय से लंबित प्रकरणों का समाधान भी शीघ्र हो सकेगा। सीएम ने जोर देते हुए कहा कि प्रदेश में सिंचाई परियोजनाएं सड़क निर्माण पुल रेलवे और बांध जैसे बड़े विकास कार्य अक्सर भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण प्रभावित होते रहे हैं। लेकिन अब जब किसानों को चार गुना मुआवजा मिलेगा तो इन परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराना आसान होगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी। इससे न केवल शहरी क्षेत्रों में बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सरकार हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में किसानों को प्रदान करेगी। यह एक बड़ी आर्थिक राशि है जो सीधे तौर पर किसानों के खातों में पहुंचेगी और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि भूमि देने वाले किसान परिवारों को इस योजना से बड़ा लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा। इस फैसले को राज्य में कृषि और विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जहां एक ओर सरकार विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है वहीं दूसरी ओर किसानों के हितों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। कुल मिलाकर सरकार का यह निर्णय किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ साथ विकास कार्यों को गति देने वाला साबित हो सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस योजना का जमीनी स्तर पर किस तरह क्रियान्वयन होता है और किसानों को इसका वास्तविक लाभ कितनी तेजी से मिल पाता है।

पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में पीएम मोदी का संबोधन, बड़ी भीड़ और स्थानीय उत्साह के बीच चुनावी गतिविधियों में तेजी

नई दिल्ली। बारुईपुर पश्चिम बंगाल में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दूसरे चरण के तहत एक जनसभा को संबोधित किया। पूरे क्षेत्र में सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियों का वातावरण देखने को मिला और जैसे जैसे समय आगे बढ़ा, सभा स्थल पर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती गई। स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती सुनिश्चित की गई ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था की गई और गर्मी को देखते हुए लोगों के लिए पानी तथा प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं का भी प्रबंध किया गया। सभा स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने राजनीतिक माहौल को और अधिक सक्रिय बना दिया। दूरदराज के क्षेत्रों से भी लोग इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि वे इस चुनाव को राज्य के भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि विकास की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। भीड़ में मौजूद लोगों ने यह भी बताया कि वे प्रधानमंत्री के विचारों और कार्यशैली से प्रभावित हैं और उन्हें विश्वास है कि उनके नेतृत्व में विकास की गति को मजबूती मिल सकती है। कार्यक्रम के दौरान एक भावनात्मक दृश्य भी सामने आया जब एक स्थानीय नागरिक प्रधानमंत्री के लिए बांग्ला भाषा में लिखी गई एक पुस्तक लेकर पहुंचा। उसने बताया कि इस पुस्तक में प्रधानमंत्री के कार्यों और उनसे जुड़ी जन अपेक्षाओं का वर्णन किया गया है। उसका कहना था कि यह एक व्यक्तिगत प्रयास है जिसमें उसने अपने विचार और अनुभव शामिल किए हैं। उसने यह भी उम्मीद जताई कि यह संदेश किसी माध्यम से प्रधानमंत्री तक पहुंच सकेगा। इस पहल ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और माहौल में एक अलग तरह की भावनात्मक जुड़ाव की भावना दिखाई दी। स्थानीय लोगों के बीच राजनीतिक चर्चाओं का माहौल भी काफी सक्रिय रहा। कई लोगों ने कहा कि राज्य में विकास और स्थिरता की आवश्यकता है और इसके लिए बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है। कुछ नागरिकों का मानना था कि पिछले वर्षों में कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता महसूस हुई है और अब वे एक स्थिर और विकासोन्मुखी शासन की उम्मीद कर रहे हैं। इसके साथ ही लोगों ने यह भी कहा कि चुनावी माहौल अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण दिखाई दे रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। सभा में मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि वे नियमित रूप से सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक भाषणों को देखते और सुनते हैं, जिससे उन्हें नीतियों और योजनाओं को समझने में मदद मिलती है। उनके अनुसार इस तरह की जनसभाएं जनता और नेतृत्व के बीच संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। बारुईपुर की यह जनसभा क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बनी रही और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने चुनावी माहौल को और अधिक सक्रिय बना दिया।

इंदौर में जनगणना की तैयारी तेज तीसरे चरण का प्रशिक्षण शुरू 2000 अधिकारी बने प्रक्रिया का हिस्सा

इंदौर । इंदौर में आगामी जनगणना को लेकर प्रशासन ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है और इसी कड़ी में प्रशिक्षण का तीसरा चरण शुरू कर दिया गया है। इस चरण में लगभग 2000 अधिकारी और कर्मचारी भाग ले रहे हैं जिन्हें जनगणना की पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझाने और लागू करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शहर में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम होलकर साइंस कॉलेज में आयोजित किया जा रहा है जहां मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रतिभागियों को विस्तृत और व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जनगणना प्रक्रिया को अधिक सटीक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है ताकि एकत्रित की जाने वाली जानकारी पूरी तरह विश्वसनीय हो सके। बदलते समय के साथ अब जनगणना की प्रक्रिया भी डिजिटल होती जा रही है और इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार डिजिटल डेटा कलेक्शन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों को यह बताया जा रहा है कि किस प्रकार डिजिटल माध्यम से डेटा को सही तरीके से एकत्रित किया जाए और फॉर्म भरने की प्रक्रिया को सरल और त्रुटिरहित बनाया जाए। प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को अलग अलग मॉड्यूल के माध्यम से तैयार किया जा रहा है ताकि वे फील्ड में जाकर बिना किसी परेशानी के अपना कार्य कर सकें। उन्हें यह भी सिखाया जा रहा है कि जनगणना के दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है और किस प्रकार प्रत्येक परिवार से सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी मौके पर ही किया जा रहा है जिससे उन्हें किसी भी प्रकार की उलझन न रहे। प्रशासन का मानना है कि यदि प्रशिक्षण मजबूत होगा तो फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे और जनगणना की पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न होगी। यही कारण है कि इस बार प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और हर स्तर पर अधिकारियों को तैयार किया जा रहा है। जनगणना किसी भी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है क्योंकि इसके आधार पर ही भविष्य की नीतियां और योजनाएं तैयार की जाती हैं। ऐसे में डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बेहद जरूरी हो जाती है। इंदौर में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो आने वाले समय में जनगणना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस तरह के व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सशक्त प्रशिक्षण के माध्यम से जनगणना प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी और शहर में इसे बिना किसी त्रुटि के पूरा किया जा सकेगा। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा बल्कि विकास योजनाओं को भी सही दिशा देने में मदद मिलेगी।