करिश्मा का करिश्मा की रोबो गर्ल ने करियर के पीक पर छोड़ी एक्टिंग, अब बनीं आर्कियोलॉजिस्ट

नई दिल्ली।कभी टीवी स्क्रीन पर एक रोबोट बच्ची की मासूम मुस्कान से दर्शकों का दिल जीतने वाली झनक शुक्ला आज एक बिल्कुल अलग दुनिया में अपनी पहचान बना चुकी हैं। बचपन में ही शोहरत हासिल करने वाली इस कलाकार ने वह फैसला लिया, जो हर किसी के लिए आसान नहीं होता-उन्होंने अपने करियर के चरम पर एक्टिंग की दुनिया छोड़ दी। झनक शुक्ला ने बहुत कम उम्र में मनोरंजन जगत में कदम रखा था। विज्ञापनों से शुरुआत करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे टेलीविजन और फिल्मों तक अपनी जगह बनाई। एक लोकप्रिय टीवी शो में रोबोट बच्ची का किरदार निभाकर वह घर-घर में पहचानी जाने लगीं। उनकी मासूमियत और सहज अभिनय ने उन्हें उस दौर की सबसे चर्चित चाइल्ड आर्टिस्ट्स में शामिल कर दिया। इसके बाद उन्होंने एक बड़ी फिल्म में भी काम किया, जहां वह कई नामी कलाकारों के साथ नजर आईं। उस समय ऐसा लग रहा था कि उनका करियर लगातार ऊंचाइयों की ओर बढ़ेगा, लेकिन जिंदगी ने एक अलग मोड़ ले लिया। बहुत छोटी उम्र में ही उन्होंने एक्टिंग से दूरी बनाने का फैसला कर लिया। बताया जाता है कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने शूटिंग पर जाने से साफ इनकार कर दिया। यह फैसला अचानक जरूर था, लेकिन उनके परिवार ने इसे पूरी समझदारी और समर्थन के साथ स्वीकार किया। खास बात यह रही कि उन पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला गया और उनकी इच्छा को प्राथमिकता दी गई। उनकी मां ने शुरुआत से ही यह तय किया था कि झनक के जीवन में काम से ज्यादा उनकी खुशी और मानसिक संतुलन महत्वपूर्ण रहेगा। यही कारण था कि उनके काम के घंटे सीमित रखे गए और जरूरत पड़ने पर ब्रेक भी दिया जाता था। इसी वातावरण ने उन्हें अपने जीवन के बारे में खुद निर्णय लेने की आजादी दी। एक्टिंग छोड़ने के बाद झनक ने अपनी पूरी ऊर्जा पढ़ाई में लगा दी। उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और विभिन्न विषयों में डिग्रियां प्राप्त कीं। समय के साथ उन्होंने आर्कियोलॉजी जैसे विषय को अपना करियर चुना, जो उनके बचपन की दुनिया से बिल्कुल अलग था। उनका यह बदलाव यह दिखाता है कि जीवन में एक रास्ता बंद हो जाए तो दूसरा रास्ता हमेशा खुला रहता है। झनक ने यह साबित किया कि पहचान केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं होती, बल्कि असली पहचान वह होती है जो व्यक्ति अपने फैसलों से बनाता है। फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में काम करते हुए उन्होंने बहुत कम उम्र में कई बड़े कलाकारों के साथ अनुभव हासिल किया था। वह ऐसे दौर का हिस्सा रहीं जहां सेट पर काम सीखने और समझने का मौका भी मिलता था। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने खुद को एक अलग दिशा में ले जाने का निर्णय लिया। आज झनक शुक्ला एक साधारण और शांत जीवन जी रही हैं। वह ग्लैमर और सुर्खियों से दूर रहते हुए अपनी निजी जिंदगी में संतुलन बनाए हुए हैं। कभी-कभी उनकी झलक जरूर सामने आती है, लेकिन उन्होंने जानबूझकर लाइमलाइट से दूरी बनाए रखी है। उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि हर सफलता का मतलब सिर्फ प्रसिद्धि नहीं होता। कभी-कभी सबसे बड़ी सफलता वही होती है, जहां इंसान अपने मन की सुनकर उस जीवन को चुनता है जिसमें उसे सुकून मिलता है।
कॉफी फेस पैक से पाएं पार्लर जैसा ग्लो, हल्दी, एलोवेरा और शहद से निखरेगा चेहरा

नई दिल्ली । आज के समय में हर कोई साफ, चमकदार और बेदाग त्वचा चाहता है, लेकिन महंगे फेशियल और ब्यूटी ट्रीटमेंट हर किसी के लिए संभव नहीं होते। ऐसे में घरेलू नुस्खे एक आसान और असरदार विकल्प बनकर सामने आते हैं। इन्हीं में से एक है कॉफी फेस मास्क, जो त्वचा को नेचुरल ग्लो देने के साथ-साथ डलनेस और थकान के निशान भी कम करने में मदद करता है। कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और कैफीन त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। यह त्वचा की डेड स्किन हटाने, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने और चेहरे को फ्रेश लुक देने में मदद करता है। कई रिसर्च और स्किनकेयर एक्सपर्ट्स के अनुसार कॉफी त्वचा को अस्थायी रूप से टाइट भी करती है, जिससे चेहरा ज्यादा फ्रेश और ग्लोइंग दिखता है। अगर कॉफी को कुछ प्राकृतिक चीजों के साथ मिलाकर फेस मास्क बनाया जाए, तो इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं। हल्दी, एलोवेरा जेल और शहद जैसी सामग्री त्वचा को पोषण देने और दाग-धब्बों को कम करने में मदद करती हैं। हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो स्किन की सूजन और मुंहासों को कम करते हैं, जबकि एलोवेरा त्वचा को ठंडक और नमी प्रदान करता है। कॉफी और एलोवेरा का फेस मास्क खासतौर पर बहुत लोकप्रिय माना जाता है। कॉफी त्वचा को एक्सफोलिएट करती है और डेड सेल्स हटाती है, जबकि एलोवेरा स्किन को सॉफ्ट और हाइड्रेटेड रखता है। इस मिश्रण से चेहरा न सिर्फ साफ होता है, बल्कि उसमें प्राकृतिक चमक भी आती है। इसी तरह कॉफी और हल्दी का फेस पैक त्वचा के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। हल्दी दाग-धब्बों और टैनिंग को कम करने में मदद करती है, जबकि कॉफी त्वचा को ब्राइट बनाती है। दोनों मिलकर स्किन टोन को सुधारने और चेहरे पर नैचुरल ग्लो लाने में मदद करते हैं। कॉफी फेस मास्क बनाने के लिए आमतौर पर एक चम्मच कॉफी पाउडर में एलोवेरा जेल, हल्दी या शहद मिलाकर एक पेस्ट तैयार किया जाता है। इसे चेहरे पर 10 से 15 मिनट तक लगाकर हल्के हाथों से मसाज करते हुए धो लिया जाता है। नियमित उपयोग से त्वचा साफ, मुलायम और चमकदार दिखाई देने लगती है। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू फेस मास्क का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां जरूरी हैं। सबसे पहले पैच टेस्ट करना चाहिए ताकि किसी भी तरह की एलर्जी से बचा जा सके। इसके अलावा मास्क को ज्यादा देर तक चेहरे पर नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि इससे स्किन ड्राई हो सकती है। निष्कर्ष यही है कि महंगे ब्यूटी ट्रीटमेंट के बिना भी प्राकृतिक चीजों की मदद से त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाया जा सकता है। कॉफी फेस मास्क एक आसान, सस्ता और प्रभावी तरीका है, जो घर पर ही पार्लर जैसा निखार देने में मदद करता है।
digital trading: टेक्नोलॉजी ने बदली निवेश की तस्वीर, ट्रेडिंग और सलाह का पूरा सिस्टम हुआ डिजिटल..

digital trading: नई दिल्ली। वित्तीय बाजार आज जिस तेजी से बदल रहे हैं, उसका सबसे बड़ा कारण तकनीकी प्रगति को माना जा रहा है। हाल ही में एक उच्च स्तरीय आर्थिक कार्यक्रम के दौरान यह बात सामने आई कि निवेश, ट्रेडिंग और वित्तीय सलाह देने के पारंपरिक तरीके अब लगभग पूरी तरह डिजिटल ढांचे में बदल चुके हैं। यह बदलाव सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे निवेशकों के व्यवहार और बाजार की संरचना में भी गहरा परिवर्तन आया है। आज का निवेशक पहले की तुलना में कहीं अधिक डिजिटल रूप से सक्रिय और जागरूक है। मोबाइल और इंटरनेट की आसान पहुंच ने निवेश को हर व्यक्ति के लिए सरल बना दिया है। अब लोग बिना किसी भौतिक प्रक्रिया के सीधे बाजार से जुड़ सकते हैं और तुरंत निर्णय ले सकते हैं। इसी कारण नए निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है और बाजार का दायरा भी व्यापक हुआ है। तकनीक ने ट्रेडिंग सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां निवेश के लिए लंबी प्रक्रियाएं और मध्यस्थों पर निर्भरता होती थी, वहीं अब सब कुछ कुछ सेकंड में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संभव हो गया है। इसके साथ ही निवेश सलाह और वित्तीय सेवाएं भी ऑनलाइन माध्यमों पर शिफ्ट हो गई हैं, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों में सुधार हुआ है। Scindia Inaugurates CSR Project: कोलारस बनेगा रक्षा हब; सिंधिया ने शिवपुरी में की ₹2500 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट की घोषणा इस बदलाव का असर केवल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूंजी प्रवाह भी अब वैश्विक स्तर पर अधिक सक्रिय हो गया है। निवेशक अब देश की सीमाओं से बाहर जाकर भी अवसरों की तलाश कर रहे हैं। इससे बाजार अधिक जुड़ा हुआ और गतिशील बन गया है, लेकिन इसके साथ जोखिमों का स्वरूप भी जटिल हो गया है क्योंकि अब वैश्विक घटनाओं का सीधा असर स्थानीय बाजारों पर पड़ता है। भारतीय शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यह अब केवल आंकड़ों का खेल नहीं रह गया है। करोड़ों निवेशकों की भागीदारी और हजारों सूचीबद्ध कंपनियों की मौजूदगी यह दिखाती है कि बाजार में विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में बाजार पूंजीकरण और निवेश साधनों में भी तेज वृद्धि देखी गई है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिली है। RAGHAV CHADHA: BJP जॉइन करते ही राघव चड्ढा को झटका, 24 घंटे में 1 मिलियन फॉलोअर्स घटे, ‘Gen Z’ में नाराजगी हालांकि, इस तेजी के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। जब बाजार तेजी से बढ़ता है और तकनीक हर प्रक्रिया को आसान बनाती है, तब नियमों और निगरानी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। जरूरत इस बात की है कि नवाचार और सुरक्षा दोनों के बीच सही संतुलन बना रहे, ताकि निवेशकों का भरोसा कायम रहे और बाजार स्थिरता के साथ आगे बढ़े। अंत में यह कहा जा सकता है कि तकनीक ने निवेश की दुनिया को पूरी तरह नया रूप दे दिया है। अब बाजार केवल खरीद-बिक्री का स्थान नहीं रहा, बल्कि यह एक डिजिटल इकोसिस्टम बन चुका है, जहां जानकारी, गति और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
शिक्षकों की छुट्टियों पर विवाद एमपी में जनगणना ड्यूटी के बदले अर्जित अवकाश का प्रस्ताव

भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में शिक्षकों की छुट्टियों को लेकर एक नया विवाद और मांग सामने आई है जहां शिक्षकों ने जनगणना ड्यूटी के बदले अर्जित अवकाश देने की मांग उठाई है। इस संबंध में प्रस्ताव स्कूल शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश को भेजा गया है जिससे इस व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि दिल्ली मॉडल की तर्ज पर उन्हें भी समर वेकेशन के बदले अर्जित अवकाश दिया जाना चाहिए। दिल्ली में ऐसी व्यवस्था लागू है जहां जनगणना या अन्य प्रशासनिक ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को उनके अवकाश का लाभ बाद में दिया जाता है। इसी आधार पर मध्यप्रदेश के शिक्षक भी समान व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार राजधानी भोपाल में करीब दो हजार शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाई गई है। यह कार्य गर्मी की छुट्टियों के दौरान होना है जिससे शिक्षकों के समर वेकेशन प्रभावित हो रहे हैं। इसी कारण शिक्षक संगठनों ने इसे अर्जित अवकाश में बदलने की मांग की है। उपेंद्र कौशल ने बताया कि दिल्ली सरकार के आदेशों के अनुसार जनगणना ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को अवकाश का लाभ दिया जाता है और मध्यप्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। इस मांग को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र भेजने की तैयारी की जा रही है। राज्य में इस वर्ष लगभग साढ़े तीन लाख शिक्षक कार्यरत हैं जिनमें से बड़ी संख्या जनगणना और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाई जाती है। वहीं राजधानी के स्कूलों में लगभग चार हजार शिक्षक कार्यरत हैं जिनमें से आधे से अधिक की ड्यूटी इस बार जनगणना कार्य में लगने की संभावना है। इधर इस मुद्दे पर विरोध भी देखने को मिल रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी जनगणना और अतिरिक्त सर्वे कार्यों में ड्यूटी लगाने का विरोध किया है। इंदौर में प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि छोटे बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए अतिरिक्त सरकारी कार्य करना मुश्किल है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव ड्यूटी का भुगतान अभी तक नहीं मिला है और मानदेय में भी देरी हो रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि अगर उन्हें जनगणना जैसे अतिरिक्त कार्यों में लगाया जाता है तो उनके अवकाश को अर्जित अवकाश में बदला जाना चाहिए ताकि उनके अधिकारों की रक्षा हो सके। इस मुद्दे पर अब स्कूल शिक्षा विभाग के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि यह मामला सीधे शिक्षकों के अवकाश और कार्यभार से जुड़ा हुआ है।
अंकिता लोखंडे का इमोशनल संदेश: पिता को याद कर लिखी दिल छू लेने वाली बात, फैंस हुए भावुक

नई दिल्ली। टेलीविजन और फिल्म जगत की जानी-मानी अभिनेत्री अंकिता लोखंडे एक बार फिर अपने भावुक संदेश को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह कोई फिल्म या शो नहीं, बल्कि उनके निजी जीवन से जुड़ा एक बेहद भावनात्मक पल है, जिसे उन्होंने अपने पिता की याद में साझा किया। उनके इस संदेश ने न सिर्फ उनके फैंस को भावुक कर दिया, बल्कि कई लोगों को अपने जीवन पर भी सोचने के लिए मजबूर कर दिया। अंकिता लोखंडे के पिता शशिकांत लोखंडे का निधन वर्ष 2023 में लंबी बीमारी के बाद हो गया था। पिता के जाने के बाद से ही अंकिता कई बार अपने दर्द और यादों को सोशल मीडिया के जरिए साझा करती रही हैं। हाल ही में उन्होंने एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें वह अपने पिता के साथ नजर आ रही हैं। इस तस्वीर के साथ उनका लिखा संदेश बेहद भावनात्मक था। अंकिता ने अपने पोस्ट में लिखा कि वह हर सांस में अपने पिता को याद करती हैं। उनके शब्दों में एक गहरा दर्द साफ झलक रहा था, जो किसी भी बेटी के अपने पिता के प्रति लगाव को दर्शाता है। यह पोस्ट देखते ही देखते लोगों के बीच वायरल हो गया और बड़ी संख्या में लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। अपने संदेश में अंकिता ने केवल अपनी भावनाएं ही नहीं साझा कीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सीख भी दी। उन्होंने कहा कि जब तक माता-पिता आपके साथ हैं, तब तक उनसे प्यार करना और उनके साथ समय बिताना चाहिए। उन्होंने आगे लिखा कि अगर हम ऐसा नहीं करते, तो बाद में केवल पछतावा ही हाथ लगता है। उनका यह संदेश एक साधारण पोस्ट नहीं बल्कि जीवन की एक बड़ी सीख की तरह सामने आया। उनके इस संदेश ने कई लोगों को अपने परिवार और रिश्तों की अहमियत याद दिला दी। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा कि अंकिता की बातों ने उन्हें अपने माता-पिता के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए प्रेरित किया है। काम के मोर्चे पर अंकिता लोखंडे लगातार सक्रिय हैं। वह अपने पति के साथ एक मनोरंजन शो में नजर आ रही हैं, जहां उनकी मौजूदगी और अंदाज को दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। इस शो में वह अपने सहज व्यवहार और भावनात्मक जुड़ाव के कारण दर्शकों से जुड़ पाती हैं। अंकिता ने अपने करियर की शुरुआत टेलीविजन से की थी और एक लोकप्रिय धारावाहिक में उनके किरदार ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। यह किरदार उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ और इसके बाद उन्होंने मनोरंजन जगत में अपनी मजबूत जगह बना ली। समय के साथ उन्होंने फिल्मों और अन्य प्रोजेक्ट्स में भी काम किया और खुद को एक बहुमुखी कलाकार के रूप में स्थापित किया। हालांकि, उनकी असली पहचान आज भी उनके टीवी करियर और उनके भावनात्मक अभिनय से जुड़ी हुई है। पिता के प्रति उनका यह भावुक संदेश यह दिखाता है कि सफलता और लोकप्रियता के बावजूद पारिवारिक रिश्तों की अहमियत हमेशा सबसे ऊपर रहती है। अंकिता लोखंडे का यह पोस्ट केवल एक याद नहीं, बल्कि एक ऐसा संदेश है जो हर व्यक्ति को अपने जीवन में रिश्तों की कद्र करने की सीख देता है।
दोस्ती से बगावत तक, राघव चड्ढा ने मोड़ा सियासी रुख, संकट में केजरीवाल की साख।

नई दिल्ली।आम आदमी पार्टी में हाल के घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से गर्म कर दिया है। राज्यसभा में पार्टी के भीतर माने जा रहे सात सांसदों के रुख बदलने की खबरों ने न सिर्फ संगठन को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे सियासी समीकरण को भी अनिश्चितता में डाल दिया है। इस स्थिति को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि क्या पार्टी नेतृत्व इस चुनौती से उबर पाएगा या नहीं। मामले की जड़ में राज्यसभा के भीतर बदलता हुआ नंबर गेम है। कुल दस सांसदों में से सात के अलग रुख अपनाने की चर्चा ने स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। नियमों के मुताबिक यदि किसी दल के दो-तिहाई सदस्य एक साथ किसी दूसरे दल के साथ जाते हैं, तो इसे “विलय” माना जा सकता है और उस स्थिति में उनकी सदस्यता पर तत्काल अयोग्यता लागू नहीं होती। इसी वजह से यह पूरा घटनाक्रम कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर अहम बन गया है। हालांकि अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि सभी सात सांसदों की स्थिति एक जैसी नहीं है और कुछ नेताओं को लेकर अभी भी बातचीत जारी है। पार्टी की ओर से लगातार कोशिशें चल रही हैं कि इस टूट को रोका जाए और असंतोष को कम किया जाए। यही कारण है कि पूरा मामला अभी भी अनिश्चितता की स्थिति में बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा मोड़ संख्या से जुड़ा है। अगर पार्टी किसी तरह एक सांसद को भी वापस अपने पक्ष में लाने में सफल हो जाती है, तो यह आंकड़ा सात से घटकर छह हो जाएगा। ऐसी स्थिति में दो-तिहाई का गणित बिगड़ जाएगा और कथित विलय की वैधता पर सवाल उठ सकते हैं। इसके साथ ही दल-बदल कानून के तहत संबंधित सांसदों की स्थिति भी खतरे में आ सकती है। इस राजनीतिक हलचल में कुछ प्रमुख नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं, जिन्हें इस बदलाव का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इन नेताओं के फैसले ने पार्टी के भीतर असंतोष को और गहरा कर दिया है, जिससे संगठनात्मक संतुलन पर असर पड़ा है। यह संकेत भी मिलता है कि यह केवल एक अचानक लिया गया निर्णय नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही अंदरूनी असहमति का परिणाम हो सकता है। अब पूरा मामला आगे चलकर राज्यसभा के सभापति की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। वहीं अंतिम फैसला इस बात पर आधारित होगा कि क्या सांसदों का यह समूह कानूनी रूप से दो-तिहाई की शर्त पूरी करता है या नहीं। अगर प्रक्रिया में कोई कमी या विवाद सामने आता है, तो पूरा समीकरण पलट सकता है और स्थिति पूरी तरह बदल सकती है।
होटल में हुई हत्या का खुलासा 10 साल बाद शिल्पु भदौरिया केस में तीनों आरोपियों को उम्रकैद

इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर में एक दशक पुराने चर्चित हत्याकांड में आखिरकार न्याय की प्रक्रिया पूरी हो गई है जहां शिल्पु भदौरिया हत्या मामले में अदालत ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2016 का है जिसने उस समय पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था और अब लगभग 10 साल बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश विश्व दीपक तिवारी की अदालत ने सुनाया जिसमें यह स्पष्ट रूप से साबित हुआ कि तीनों आरोपियों ने पहले शिल्पु के साथ शराब पी और फिर उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को होटल की चौथी मंजिल से नीचे फेंककर इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। घटना 7 अगस्त 2016 की रात की है जब शिल्पु भदौरिया अपने दोस्तों के साथ आरएनटी मार्ग स्थित होटल लेमन ट्री के कमरे नंबर 418 में रुकी हुई थी। उसके साथ आशुतोष जोहरे शैलेंद्र सारस्वत और नीरज दंडोतिया मौजूद थे। शुरुआत में इन लोगों ने पुलिस को बताया था कि शिल्पु ने गैलरी से कूदकर आत्महत्या की है लेकिन जांच में यह कहानी झूठी साबित हुई। जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से कई अहम सबूत मिले जिससे यह स्पष्ट हुआ कि हत्या से पहले शिल्पु के साथ संघर्ष हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि उसकी मौत गिरने से नहीं बल्कि दम घुटने से हुई थी। इसके अलावा उसके नाखूनों में आरोपियों की त्वचा के निशान भी पाए गए जिससे संघर्ष की पुष्टि हुई। कोर्ट में पेश किए गए साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह साबित हुआ कि आरोपियों ने हत्या को आत्महत्या का रूप देने की पूरी कोशिश की थी और सबूत मिटाने का भी प्रयास किया था। लेकिन जांच एजेंसियों की गहन पड़ताल और गवाहों के बयानों के कारण पूरा सच सामने आ गया।अदालत ने तीनों आरोपियों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है साथ ही साक्ष्य छिपाने के अपराध में 7-7 साल की अतिरिक्त सजा और आर्थिक दंड भी लगाया गया है। इस फैसले के साथ ही शिल्पु भदौरिया के परिवार को लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिला है और यह मामला एक बार फिर यह संदेश देता है कि अपराध कितना भी छुपाने की कोशिश की जाए कानून अंततः सच को सामने ला ही देता है।
सड़क पर दर्दनाक हादसा: बस की टक्कर में युवक की मौत, 2 घायल, परिजनों ने किया जाम

नई दिल्ली । छतरपुर जिले के नौगांव थाना क्षेत्र में देर शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। बुंदेलखंड पेट्रोल पंप के सामने तेज रफ्तार यात्री बस ने बाइक सवार तीन युवकों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें मऊसानिया निवासी 16–17 वर्षीय आकाश अहिरवार की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब तीनों युवक एक अपाचे बाइक पर सवार होकर मऊसानिया से नौगांव की ओर एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। रास्ते में ही छतरपुर से दिल्ली जा रही राधा स्वामी ट्रैवल्स की यात्री बस ने लापरवाहीपूर्वक और तेज रफ्तार में चलाते हुए उनकी बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार तीनों युवक सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे में पीछे बैठा किशोर आकाश अहिरवार गंभीर रूप से घायल हो गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। वहीं बाइक चला रहे युवक और एक अन्य साथी को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार दोनों घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन वे पूरी तरह खतरे से बाहर नहीं हैं। घटना के समय बस में 50 से अधिक यात्री सवार थे। टक्कर के बाद बस कुछ दूरी पर जाकर रुकी, जिससे यात्रियों में भी अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बस काफी तेज गति से चल रही थी और चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया, जिसके कारण यह हादसा हुआ। हादसे की खबर मिलते ही मृतक के परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। बड़ी संख्या में लोग नौगांव थाने पहुंचे और चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए सड़क पर जाम लगा दिया। स्थिति तनावपूर्ण होती देख पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। काफी देर बाद जाम हटवाया गया और यातायात सामान्य हुआ। पुलिस ने बस को जब्त कर थाने में खड़ा कर दिया है और चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि हादसे की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि की जा सके। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच पूरी होने के बाद दोषी चालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरों को उजागर करता है। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।
15 की उम्र में शादी, 17 में मां और फिर बॉलीवुड में एंट्री: मौसमी चटर्जी की प्रेरणादायक कहानी

नई दिल्ली। हिंदी और बंगाली सिनेमा के सुनहरे दौर में कई ऐसी अभिनेत्रियां आईं जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। इन्हीं में एक नाम है मौसमी चटर्जी का, जिन्होंने बिना किसी ग्लैमर की दौड़ में शामिल हुए अपने सहज अभिनय और सादगी से अलग पहचान बनाई। उनकी कहानी केवल एक अभिनेत्री की नहीं, बल्कि उस संघर्ष और आत्मविश्वास की है जिसने उन्हें स्टार बनाया। मौसमी चटर्जी का जन्म 26 अप्रैल 1948 को हुआ था। उनका बचपन का नाम इंदिरा चट्टोपाध्याय था। कम उम्र में ही उनका विवाह हो गया और बहुत छोटी उम्र में वे मां भी बन गईं। आम तौर पर उस समय यह माना जाता था कि शादी के बाद अभिनेत्रियों का करियर खत्म हो जाता है, लेकिन मौसमी ने इस सोच को गलत साबित किया। उन्होंने अपने सपनों को जीवित रखा और फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। कोलकाता में रहते हुए उनका झुकाव फिल्मों की ओर बढ़ा। उनके घर के आसपास फिल्म शूटिंग होती थी, जिसे देखने वे अक्सर जाया करती थीं। धीरे-धीरे यह आकर्षण जुनून में बदल गया। एक दिन किस्मत ने उन्हें वह मौका दिया, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। एक निर्देशक की नजर उन पर पड़ी और उन्हें अभिनय का प्रस्ताव मिला। शुरुआत में वह काफी घबराई हुई थीं। कैमरे के सामने खड़े होना उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन पहले ही अनुभव ने यह साबित कर दिया कि उनमें प्राकृतिक अभिनय क्षमता है। उनके चेहरे के भाव और संवाद बोलने का तरीका इतना स्वाभाविक था कि टीम तुरंत प्रभावित हो गई। उनके करियर की पहली प्रमुख भूमिका एक ऐसी फिल्म में आई, जिसमें उन्होंने अंधी लड़की का किरदार निभाया था। यह उनके लिए पूरी तरह नया अनुभव था। शूटिंग से पहले वह बेहद नर्वस थीं क्योंकि यह उनकी पहली बड़ी भूमिका थी और सामने अनुभवी कलाकारों की टीम थी। लेकिन जैसे ही उन्होंने अभिनय शुरू किया, उनकी सहजता ने सभी को चौंका दिया। इस किरदार को निभाने के लिए उन्हें किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं पड़ी। उनका अभिनय इतना स्वाभाविक था कि निर्देशक ने उन्हें उसी अंदाज में आगे काम करने के लिए कहा। यह फिल्म उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई और यहीं से उनकी पहचान बनने लगी। इसके बाद मौसमी चटर्जी ने कई सफल फिल्मों में काम किया और खुद को एक मजबूत अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया। उन्होंने अपने दौर के बड़े कलाकारों के साथ काम किया और हर किरदार में अपनी अलग पहचान छोड़ी। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे बिना किसी बनावट के भावनाओं को बहुत सहजता से दर्शा देती थीं। उनकी मुस्कान और सादगी भी उनकी पहचान बन गई। वे उन अभिनेत्रियों में से थीं जिनके अभिनय में कृत्रिमता नहीं बल्कि वास्तविकता झलकती थी। दर्शक उनके किरदारों से आसानी से जुड़ जाते थे क्योंकि वे हर भूमिका को बहुत स्वाभाविक तरीके से निभाती थीं। समय के साथ उन्होंने यह साबित कर दिया कि निजी जीवन की परिस्थितियां किसी भी व्यक्ति के सपनों को रोक नहीं सकतीं। शादी और जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और बॉलीवुड में अपनी मजबूत पहचान बनाई। मौसमी चटर्जी का सफर इस बात का उदाहरण है कि अगर प्रतिभा और आत्मविश्वास हो, तो किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। उनकी कहानी आज भी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को सच करने का साहस रखते हैं।
बंगाल चुनाव 2026 में पहले चरण के बाद सियासी गरमाहट, हिमंता का बड़ा दावा

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। Himanta Biswa Sarma ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि पहले चरण के बाद पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है और जनता का रुझान भाजपा की ओर है। पहले चरण के बाद BJP को बढ़त का दावाप्रेस कॉन्फ्रेंस में हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “पहले चरण का मतदान पूरा हो चुका है और हमें पूरा विश्वास है कि भाजपा ने मजबूत शुरुआत की है। इस बार हम असम में 100 सीटों का आंकड़ा पार करेंगे और पश्चिम बंगाल में 200 सीटें जीतेंगे।” उन्होंने इसे “शतक” और “दोहरा शतक” की जीत बताया। कितनी सीटों पर हुआ मतदान?चुनाव आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हुआ है, जबकि बाकी 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। वहीं, तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में मतदान संपन्न हो चुका है। पहले चरण में कुछ जगहों पर छिटपुट हिंसा की घटनाएं सामने आईं, लेकिन इसके बावजूद 92 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो एक रिकॉर्ड माना जा रहा है। इस बीच, केंद्रीय मंत्री Dharmendra Pradhan ने भी पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर आरोप लगाया कि उनके नेतृत्व में राज्य की संस्थाएं कमजोर हुई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में बदलाव की मांग लगातार बढ़ रही है। जादवपुर यूनिवर्सिटी पर विवादजादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की टिप्पणी के बाद ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया पर धर्मेंद्र प्रधान ने सवाल उठाए और कहा कि राज्य के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों को फिर से मजबूत करने की जरूरत है। पहले चरण के मतदान के बाद सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। अब नजर दूसरे चरण के मतदान और अंतिम नतीजों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि पश्चिम बंगाल में सत्ता किसके हाथ में जाएगी।