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मेटा में AI जॉब्स का क्रेज, इंजीनियरों को मिल रहा रिकॉर्डतोड़ वेतन….

नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने नौकरी और कमाई के पैटर्न को पूरी तरह बदल दिया है। इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियों में देखने को मिल रहा है, जहां AI और मशीन लर्निंग इंजीनियरों को बेहद ऊंचे पैकेज दिए जा रहे हैं। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं बल्कि एक हाई-वैल्यू स्किल बन चुकी है, जिसकी वजह से इस क्षेत्र में काम करने वालों की मांग तेजी से बढ़ रही है। मेटा में AI इंजीनियरों की कमाई कई स्तरों पर तय होती है, लेकिन शुरुआती बेस सैलरी ही इतनी ज्यादा है कि यह आमतौर पर करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती है। मशीन लर्निंग और AI से जुड़े इंजीनियरों को सालाना लाखों डॉलर तक की बेस सैलरी दी जा रही है, जो भारतीय मुद्रा में करोड़ों रुपये के बराबर बैठती है। यह दिखाता है कि कंपनी अपने एआई टैलेंट को सबसे महत्वपूर्ण संसाधन मान रही है। सिर्फ इंजीनियरिंग रोल्स ही नहीं, बल्कि डेटा साइंस और रिसर्च से जुड़े पदों पर भी भारी वेतन दिया जा रहा है। डेटा से जुड़ी रणनीति बनाने वाले प्रोफेशनल्स की सैलरी भी करोड़ों रुपये तक पहुंच रही है। इससे यह साफ होता है कि सिर्फ कोडिंग ही नहीं, बल्कि डेटा को समझने और उसका उपयोग करने वाले लोगों की भी भारी मांग है। मेटा में सीनियर लेवल पर काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की कमाई भी काफी ज्यादा है। अनुभव और जिम्मेदारी बढ़ने के साथ-साथ सैलरी में भी बड़ा उछाल देखने को मिलता है। कई मामलों में कुल पैकेज कई करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है, जिससे यह इंडस्ट्री दुनिया की सबसे ज्यादा भुगतान देने वाली इंडस्ट्री में शामिल हो जाती है। भारत में भी मेटा अपने इंजीनियरों को बहुत आकर्षक पैकेज ऑफर करती है। यहां शुरुआती स्तर पर ही अच्छी सैलरी मिलती है, जबकि अनुभवी AI इंजीनियरों के लिए यह पैकेज करोड़ों रुपये तक जा सकता है। यह भारत के टेक सेक्टर में सबसे हाई-पेइंग जॉब्स में से एक माना जाता है। इस पूरे पैकेज में सिर्फ बेस सैलरी ही नहीं बल्कि स्टॉक ऑप्शंस और बोनस भी शामिल होते हैं। इन्हीं अतिरिक्त फायदों के कारण कुल कमाई और भी ज्यादा बढ़ जाती है। कई सीनियर इंजीनियरों की कुल सालाना कमाई कई करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है, जिससे यह क्षेत्र और भी आकर्षक बन जाता है।

शिवपुरी में दर्दनाक सड़क हादसा कार पलटी एक की मौत चार घायल महाकाल दर्शन जा रहे थे दोस्त

शिवपुरी । मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है जहां आगरा से उज्जैन स्थित महाकाल दर्शन के लिए जा रहे पांच दोस्तों की कार तेज रफ्तार के कारण अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो युवतियों सहित चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह हादसा शिवपुरी के नोहरी इलाके में रेलवे पुल के पास हुआ जहां कार संख्या UP 80 FV 2581 तेज रफ्तार में होने के कारण अचानक नियंत्रण खो बैठी और सड़क पर पलट गई। हादसे के समय कार में मयंक भदौरिया उम्र 26 वर्ष प्रवीण सिंह उम्र 28 वर्ष अभय सिंह उम्र 21 वर्ष प्रियांशी राठौर उम्र 28 वर्ष और दीक्षा सेनी उम्र 28 वर्ष सवार थे। सभी यात्री अलग अलग शहरों से थे और धार्मिक यात्रा पर निकले थे। जानकारी के अनुसार सभी दोस्त आगरा से मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए जा रहे थे। लेकिन शिवपुरी के पास पहुंचते ही खराब सड़क और वन वे व्यवस्था के चलते वाहन असंतुलित हो गया और पलट गया जिससे बड़ा हादसा हो गया। हादसे में मयंक भदौरिया की मौके पर ही मौत हो गई जिससे यात्रा का माहौल पूरी तरह मातम में बदल गया। वहीं प्रियांशी राठौर और प्रवीण सिंह की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है। अन्य दो घायल अभय सिंह और दीक्षा सेनी का इलाज शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में जारी है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और सड़क की स्थिति को हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाही से ड्राइविंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धार्मिक यात्रा पर निकले इन दोस्तों की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं जिससे परिवारों में शोक का माहौल है और पूरे क्षेत्र में घटना को लेकर संवेदना व्यक्त की जा रही है।

माता सीता का किरदार निभाने वाली अभिनेत्रियों की यादगार यात्रा, टीवी और सिनेमा में इन चेहरों ने रचा इतिहास

नई दिल्ली। भारतीय परंपरा में सीता नवमी का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। यह दिन माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें भारतीय संस्कृति में त्याग, मर्यादा और करुणा की प्रतीक माना जाता है। राजा जनक की पुत्री और भगवान श्रीराम की पत्नी माता सीता का जीवन आदर्शों और संघर्षों से भरा रहा है, जिसे समय-समय पर भारतीय सिनेमा और टेलीविजन में भी विभिन्न रूपों में प्रस्तुत किया गया है। पर्दे पर इस पवित्र किरदार को निभाने वाली कई अभिनेत्रियों ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। सबसे पहले जिस नाम को सबसे अधिक सम्मान और पहचान मिली, वह है दीपिका चिखलिया का। उन्होंने एक ऐतिहासिक धार्मिक धारावाहिक में माता सीता की भूमिका निभाई थी। उनका अभिनय इतना प्रभावशाली रहा कि दर्शक उन्हें वास्तविक जीवन में भी उसी रूप में देखने लगे। उनके चेहरे की शालीनता और भावनात्मक प्रस्तुति ने इस किरदार को अमर बना दिया। आज भी जब माता सीता की छवि की बात होती है, तो सबसे पहले दीपिका चिखलिया का चेहरा सामने आता है। इसके बाद स्मृति ईरानी का नाम आता है, जिन्होंने एक अन्य संस्करण में माता सीता का किरदार निभाया था। इस भूमिका में उन्होंने भावनात्मक दृश्यों को गंभीरता से प्रस्तुत किया, जिससे दर्शकों ने उनके प्रयास की सराहना की। हालांकि यह संस्करण उतना लोकप्रिय नहीं हो सका जितना पहला, लेकिन इस किरदार ने उनके अभिनय करियर में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया। समय के साथ कई अन्य कलाकारों ने भी इस किरदार को निभाने का प्रयास किया। एक टीवी धारावाहिक में नेहा सरगम ने माता सीता की भूमिका निभाई, जिसमें उनके अभिनय को दर्शकों ने सकारात्मक रूप से स्वीकार किया। हालांकि यह शो लंबे समय तक नहीं चला, लेकिन उनकी प्रस्तुति ने किरदार की गरिमा को बनाए रखा। एक अन्य लोकप्रिय संस्करण में नए कलाकारों की जोड़ी को भगवान राम और माता सीता के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस धारावाहिक की खास बात यह थी कि इसकी कहानी और संवाद पारंपरिक शैली से प्रेरित थे, जिससे दर्शकों को पुरानी यादों की झलक मिली। इस शो ने अपने समय में अच्छी लोकप्रियता हासिल की और नए कलाकारों को पहचान दिलाई। दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी माता सीता के किरदार को बड़े स्तर पर दिखाया गया। एक चर्चित फिल्म में नयनतारा ने माता सीता की भूमिका निभाई, जिसे दर्शकों ने बेहद सराहा। उनकी अभिनय शैली, भावनात्मक अभिव्यक्ति और स्क्रीन प्रेजेंस ने इस किरदार को एक अलग ही ऊंचाई दी। यह फिल्म विशेष रूप से उन दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुई, जो पौराणिक कथाओं को बड़े पर्दे पर देखना पसंद करते हैं। इसके अलावा भी कई अन्य धारावाहिकों और फिल्मों में अलग-अलग अभिनेत्रियों ने माता सीता के किरदार को निभाया है। हर कलाकार ने अपने तरीके से इस पवित्र भूमिका को जीवंत करने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही ऐसी रहीं जिनकी छवि दर्शकों के मन में स्थायी रूप से बस गई। सीता नवमी के इस पावन अवसर पर यह कहना उचित होगा कि माता सीता का किरदार केवल अभिनय नहीं, बल्कि एक गहरी जिम्मेदारी और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। जिन अभिनेत्रियों ने इस भूमिका को निभाया, उन्होंने न केवल एक किरदार को जिया, बल्कि उसे दर्शकों के दिलों में अमर भी कर दिया।

दिल्ली बनाम पंजाब की टक्कर: प्वाइंट्स टेबल पर असर डाल सकता है आज का मैच

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में शनिवार को खेले जाने वाले डबल हेडर के पहले मुकाबले में Delhi Capitals का सामना Punjab Kings से होगा। यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए काफी अहम माना जा रहा है, खासकर दिल्ली के लिए, जो इस मैच को जीतकर अंक तालिका में अपनी स्थिति सुधारना चाहेगी। पॉइंट्स टेबल में किसकी स्थिति बेहतर?मौजूदा सीजन में पंजाब किंग्स शानदार फॉर्म में नजर आ रही है। टीम ने अब तक खेले गए 6 मैचों में से 5 में जीत हासिल की है, जबकि एक मुकाबला बेनतीजा रहा है। इसी के साथ पंजाब पॉइंट्स टेबल में पहले स्थान पर बनी हुई है। दूसरी ओर दिल्ली कैपिटल्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। टीम ने 6 मैचों में 3 जीत और 3 हार के साथ फिलहाल छठे स्थान पर कब्जा जमाया हुआ है। हेड टू हेड रिकॉर्डअगर दोनों टीमों के हेड टू हेड रिकॉर्ड की बात करें तो यहां मुकाबला पूरी तरह बराबरी का है। दिल्ली और पंजाब के बीच अब तक कुल 35 मैच खेले गए हैं, जिसमें दोनों टीमों ने 17-17 मुकाबले जीते हैं, जबकि एक मैच का कोई नतीजा नहीं निकला। इससे साफ है कि दोनों के बीच मुकाबला हमेशा कड़ा रहता है। हालांकि इस सीजन के प्रदर्शन को देखें तो पंजाब किंग्स का पलड़ा थोड़ा भारी नजर आ रहा है। टीम के खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और जीत की लय में हैं। वहीं दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह मुकाबला वापसी का मौका है और टीम इस मैच को जीतकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहेगी। किस टीम का पलड़ा भारी?दोनों टीमों के स्क्वॉड पर नजर डालें तो पंजाब के पास श्रेयस अय्यर, मार्कस स्टोइनिस और अर्शदीप सिंह जैसे खिलाड़ी हैं, जबकि दिल्ली की टीम में अक्षर पटेल, केएल राहुल, डेविड मिलर और कुलदीप यादव जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं, जो मैच का रुख पलटने का दम रखते हैं। आज का मुकाबला रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है। एक तरफ पंजाब अपनी जीत की लय को बरकरार रखना चाहेगी, तो दूसरी तरफ दिल्ली कैपिटल्स इस मैच में जीत हासिल कर टूर्नामेंट में मजबूती से वापसी करना चाहेगी। अब देखना होगा कि मैदान पर किस टीम का प्रदर्शन बेहतर रहता है और जीत किसके खाते में जाती है। Delhi Capitals का स्क्वॉडपथुम निसांका, केएल राहुल (विकेटकीपर), नितीश राणा, समीर रिज़वी, डेविड मिलर, ट्रिस्टन स्टब्स, आशुतोष शर्मा, अक्षर पटेल (कप्तान), कुलदीप यादव, लुंगी एनगिडी, मुकेश कुमार, टी नटराजन, करुण नायर, दुशमंथा चमीरा, त्रिपुराना विजय, औकिब नबी डार, मिशेल स्टार्क, काइल जैमीसन, रेहान अहमद, अजय जादव मंडल, पृथ्वी शॉ, अभिषेक पोरेल, साहिल पारख, विप्रज निगम, माधव तिवारी। Punjab Kings का स्क्वॉडप्रियांश आर्य, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कूपर कोनोली, श्रेयस अय्यर (कप्तान), मार्कस स्टोइनिस, नेहल वढेरा, शशांक सिंह, मार्को जानसन, जेवियर बार्टलेट, अर्शदीप सिंह, युजवेंद्र चहल, विजयकुमार विशक, हरप्रीत बराड़, सूर्यांश शेडगे, यश ठाकुर, विष्णु विनोद, बेन ड्वारशुइस, लॉकी फर्ग्यूसन, अजमतुल्लाह उमरजई, मिशेल ओवेन, हरनूर सिंह, मुशीर खान, पायला अविनाश, विशाल निषाद, प्रवीण दुबे।

BHIND ACCIDENT: भिंड में दर्दनाक सड़क हादसा, तेज रफ्तार बस की टक्कर से तीन युवकों की मौत; एक की हालत गंभीर

BHIND ACCIDENT

HIGHLIGHTS: बस ने बाइक को पीछे से मारी टक्कर तीन युवकों की मौके और इलाज के दौरान मौत एक युवक गंभीर हालत में ग्वालियर रेफर हादसा नेशनल हाईवे 552 पर हुआ पुलिस जांच जारी, पहचान नहीं हो सकी   BHIND ACCIDENT: मध्यप्रदेश। भिंड जिले में शनिवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसे ने तीन परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। उमरी थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे 552 पर एक तेज रफ्तार बस ने बाइक सवार चार युवकों को पीछे से टक्कर मार दी। यह हादसा करीब दोपहर 1:30 बजे किशोर सिंह का पुरा गांव के पास हुआ। पूर्व सेना प्रमुख का स्पष्टीकरण, सार्वजनिक कॉपी की प्रामाणिकता पर उठाए सवाल.. मौके पर ही दो की मौत प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक पर सवार चारों युवक सड़क पर दूर जा गिरे। हादसे में दो युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए पहुंचे। जानलेवा हो सकती है मलेरिया के इलाज में लापरवाही अस्पताल में एक और मौत स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस और 112 एंबुलेंस मौके पर पहुंची। घायलों को तुरंत रौन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दो को मृत घोषित कर दिया। बाद में जिला अस्पताल भिंड में इलाज के दौरान एक और युवक की मौत हो गई। चौथे युवक की हालत गंभीर बनी हुई है, जिसे बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है। उत्तराखंड में बोर्ड परीक्षा के नतीजे घोषित, सीएम धामी ने छात्रों को दी बधाई.. पहचान की कोशिश में जुटी पुलिस हादसे में मृत और घायल युवकों की पहचान खबर लिखे जाने तक नहीं हो सकी थी। पुलिस उनकी पहचान करने और परिजनों तक सूचना पहुंचाने के प्रयास कर रही है। आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। उमरी थाना प्रभारी शिव प्रताप सिंह राजावत ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया गया। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।  

खाने में तेल की बढ़ती मात्रा से बढ़ रहा मोटापा, एक्सपर्ट्स ने बताए बचाव के आसान तरीके

नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में खानपान की गलत आदतें स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण है भोजन में अत्यधिक तेल का इस्तेमाल। विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा तेल का सेवन धीरे-धीरे मोटापे और कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकता है। यह न केवल शरीर में अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाता है, बल्कि हृदय, लीवर और पाचन तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, संतुलित मात्रा में तेल का उपयोग स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है, लेकिन जब इसकी मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाती है, तो यह शरीर में फैट बढ़ाने लगता है। समय के साथ यह मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए खानपान में छोटे-छोटे बदलाव करके बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सबसे पहले हमें अपने रोजमर्रा के खाने में तेल की मात्रा को नियंत्रित करना चाहिए। खाना बनाते समय सीधे बर्तन में तेल डालने की बजाय मापने वाली छोटी चम्मच का उपयोग करना एक प्रभावी तरीका है। इससे अनजाने में ज्यादा तेल डालने की आदत पर रोक लगती है और कैलोरी इनटेक नियंत्रित रहता है।इसके अलावा तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन भी सीमित करना जरूरी है। समोसा, पकौड़ी, पूड़ी और फास्ट फूड जैसे भोजन में तेल की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो शरीर में फैट बढ़ाने का काम करता है। इसकी जगह भाप में पका हुआ, ग्रिल्ड या हल्का भुना हुआ भोजन अधिक फायदेमंद होता है। ऐसे भोजन में पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और तेल की मात्रा भी कम होती है। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि घर पर खाना बनाते समय हल्के और स्वस्थ तेलों का चयन किया जाए, साथ ही उनकी मात्रा पर विशेष ध्यान दिया जाए। बार-बार तेल गर्म करने से भी उसमें हानिकारक तत्व बन जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए और अधिक नुकसानदायक होते हैं। इसलिए ताजा और सीमित मात्रा में तेल का उपयोग करना बेहतर विकल्प है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मोटापा कई बीमारियों की जड़ है और इसका एक प्रमुख कारण असंतुलित खानपान है। जब शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होने लगती है, तो यह न केवल शारीरिक सक्रियता को कम करती है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। इसलिए समय रहते खानपान में सुधार करना बेहद जरूरी है।अगर हम अपने दैनिक जीवन में कुछ छोटे बदलाव अपनाएं, जैसे कम तेल का उपयोग, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम, तो न केवल मोटापे से बचा जा सकता है बल्कि जीवनशैली भी बेहतर बन सकती है। सही खानपान और अनुशासन ही स्वस्थ जीवन की असली कुंजी है।

नींद की अनियमितता बन सकती है खतरनाक: जानिए तन-मन को कैसे रखें सुरक्षित

नई दिल्ली । तन और मन की सेहत के लिए नींद को सबसे बुनियादी जरूरत माना जाता है, लेकिन आज की तेज रफ्तार जिंदगी में नींद की अनियमितता एक “खामोश खतरे” के रूप में उभर रही है। देर रात तक मोबाइल, काम का दबाव, तनाव और असंतुलित दिनचर्या ने लोगों की स्लीप साइकल को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, नियमित और गहरी नींद स्वस्थ जीवन की नींव है, और इसकी कमी धीरे-धीरे शरीर और मस्तिष्क दोनों को कमजोर कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि शरीर की मरम्मत और दिमाग की रीसेट प्रक्रिया है। जब यह प्रक्रिया बार-बार बाधित होती है, तो इसका असर सीधे मानसिक संतुलन, एकाग्रता और इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। शुरुआत में यह समस्या सामान्य लगती है, लेकिन समय के साथ यह गंभीर रूप ले सकती है। नींद की अनियमितता के प्रमुख संकेतों में दिनभर थकान महसूस होना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, बार-बार भूलने की आदत और चिड़चिड़ापन शामिल हैं। कई लोगों में यह समस्या चिंता और अवसाद जैसी स्थितियों को भी बढ़ा सकती है। कुछ मामलों में नींद के दौरान असामान्य गतिविधियां, जैसे बार-बार करवट बदलना या अचानक जाग जाना भी देखने को मिलता है। यह सभी संकेत इस बात का संकेत हैं कि शरीर की प्राकृतिक लय बिगड़ चुकी है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नींद की अनियमितता का सबसे बड़ा कारण अनियमित दिनचर्या और डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग है। रात में देर तक स्क्रीन देखने से दिमाग सक्रिय रहता है और मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे नींद आने में देरी होती है। इसके अलावा कैफीन, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी भी इस समस्या को बढ़ाते हैं। इस समस्या से बचाव के लिए सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि हर दिन एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत बनाई जाए। इससे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी, जिसे बॉडी क्लॉक कहा जाता है, संतुलित रहती है। हल्का व्यायाम या योग भी नींद को बेहतर बनाने में मदद करता है, क्योंकि इससे तनाव कम होता है और शरीर थकान महसूस करता है। इसके अलावा, सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप से दूरी बनाना जरूरी है। स्क्रीन की नीली रोशनी दिमाग को सक्रिय रखती है और नींद आने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है। रात में कैफीन, शराब और धूम्रपान से बचना भी बेहद जरूरी है क्योंकि ये नींद की गुणवत्ता को खराब करते हैं। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि अगर नींद की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से सलाह लें। अच्छी नींद न केवल शरीर को ऊर्जा देती है बल्कि मानसिक स्थिरता, सकारात्मक सोच और बेहतर जीवनशैली में भी अहम भूमिका निभाती है। इसलिए व्यस्त जीवन के बीच नींद को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही वह आधार है जो तन और मन दोनों को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखता है।

सेहत का आसान योग: सर्वांगासन कैसे सुधारता है हार्मोन और डाइजेशन

नई दिल्ली । आज की तेज़ रफ्तार और असंतुलित जीवनशैली में पाचन संबंधी समस्याएं और हार्मोनल असंतुलन आम हो गए हैं। कब्ज, अपच, ब्लोटिंग और थायरॉइड जैसी परेशानियां लोगों की सेहत को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में योग एक प्राकृतिक और प्रभावी समाधान के रूप में सामने आता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, सर्वांगासन, जिसे शोल्डर स्टैंड भी कहा जाता है, शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी योगासन है, जो हार्मोन बैलेंस करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है। सर्वांगासन को योग शास्त्र में “संपूर्ण शरीर का आसन” कहा गया है क्योंकि यह शरीर के लगभग हर हिस्से पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से थायरॉइड और पैराथायरॉइड ग्रंथियों की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है, जिससे हार्मोन का संतुलन बेहतर होता है। जब शरीर में हार्मोन संतुलित रहते हैं, तो मेटाबॉलिज्म सही तरीके से काम करता है और शरीर की ऊर्जा भी बढ़ती है। खासतौर पर महिलाओं में यह आसन पीरियड्स की अनियमितता को सुधारने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा, सर्वांगासन पाचन तंत्र के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इस आसन के दौरान पेट के अंग जैसे आंतें, लिवर, पैंक्रियास और पेट पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे इनकी कार्यक्षमता बढ़ती है। यह दबाव पाचन क्रिया को सक्रिय करता है और कब्ज, गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याओं को कम करता है। नियमित अभ्यास से पेट हल्का महसूस होता है और भोजन का पाचन बेहतर तरीके से होता है। आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में सर्वांगासन को एंडोक्राइन सिस्टम को संतुलित करने और पाचन सुधारने वाला महत्वपूर्ण योगासन बताया गया है। यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है, मानसिक तनाव को कम करता है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इसके नियमित अभ्यास से थकान कम होती है और शरीर अधिक सक्रिय महसूस करता है। साथ ही यह वजन नियंत्रण में भी सहायक माना जाता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वांगासन का अभ्यास सही तकनीक के साथ करना जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं और हाथों को शरीर के बगल में रखें, हथेलियां जमीन की ओर हों। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए दोनों पैरों को ऊपर उठाएं। इस दौरान घुटनों को सीधा रखें और धीरे-धीरे नितंब और पीठ को ऊपर उठाते हुए शरीर का भार कंधों पर लाएं। ठोड़ी को छाती से लगाने की कोशिश करें और हाथों से पीठ को सहारा दें। कोहनियां जमीन पर टिकी रहें। शरीर को सीधा रखते हुए पैरों को ऊपर की ओर रखें और इस स्थिति में 10 से 30 सेकंड तक बने रहें। शुरुआती लोग कम समय से शुरुआत कर सकते हैं और धीरे-धीरे अवधि बढ़ा सकते हैं। इस दौरान सामान्य और गहरी सांस लेते रहना चाहिए। अंत में धीरे-धीरे वापस प्रारंभिक स्थिति में आएं और शरीर को आराम दें। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वांगासन का अभ्यास खाली पेट करना चाहिए। हालांकि, जिन लोगों को गर्दन में दर्द, हाई ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था जैसी स्थिति है, उन्हें यह आसन बिना डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए। नियमित अभ्यास से सर्वांगासन न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी संतुलित करता है और एक स्वस्थ जीवनशैली की ओर ले जाता है।

ट्रेन में बवाल और पथराव घंटों रुकी मेमू ट्रेन यात्रियों पर हमला, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

कटनी । मध्यप्रदेश के कटनी रेलवे रूट पर उस समय हड़कंप मच गया जब कटनी से बीना जा रही मेमू ट्रेन में यात्रियों और अवैध वेंडरों के बीच विवाद अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। यह घटना न केवल रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी पैदा कर रही है। जानकारी के अनुसार ट्रेन जैसे ही कटनी से रवाना हुई कुछ ही देर बाद रीठी स्टेशन के पास दमोह निवासी यात्रियों और सलैया क्षेत्र के अवैध वेंडरों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। मामूली विवाद ने जल्द ही गंभीर रूप ले लिया और वेंडरों ने धारदार हथियारों से यात्रियों पर हमला कर दिया जिससे दो यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थिति तब और बिगड़ गई जब ट्रेन बकलेहटा स्टेशन पहुंची। आक्रोशित यात्रियों ने सुरक्षा की मांग को लेकर ट्रेन के इंजन की ओर बढ़ने की कोशिश की जिससे माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच पथराव भी शुरू हो गया और ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई। हालात बिगड़ते देख लोको पायलट ने तुरंत ट्रेन रोक दी और रेलवे कंट्रोल रूम को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेलवे पुलिस की अनुपस्थिति या देरी से पहुंचने को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौके पर नहीं दिखी। सूचना मिलने पर रीठी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस के पहुंचते ही उपद्रवी मौके से फरार हो गए। बाद में डायल 112 की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर रेलवे में अवैध वेंडरों की बढ़ती दबंगई और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को उजागर कर दिया है। यात्रियों का कहना है कि ट्रेनों में आए दिन मारपीट, चोरी और अभद्रता जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं लेकिन सुरक्षा बलों की मौजूदगी बेहद कम दिखाई देती है। करीब एक घंटे तक बकलेहटा स्टेशन पर ट्रेन रुकी रही जिसके बाद स्थिति सामान्य होने पर इसे आगे के लिए रवाना किया गया। हालांकि इस घटना ने यात्रियों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कुणाल कपूर का बड़ा खुलासा: आमिर खान ने व्यक्तिगत रूप से बुलाया ‘एक दिन’ में, बताया दिल छू लेने वाला अनुभव

नई दिल्ली। फिल्म इंडस्ट्री में कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब पुराने रिश्ते और अनुभव नए प्रोजेक्ट्स को और भी खास बना देते हैं। हाल ही में अभिनेता कुणाल कपूर ने अपनी आगामी फिल्म ‘एक दिन’ को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि इस फिल्म में उनका कैमियो रोल किसी आम चयन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, बल्कि इसके पीछे आमिर खान की व्यक्तिगत पहल थी। कुणाल कपूर के अनुसार, आमिर खान ने खुद उनसे संपर्क किया और उन्हें इस फिल्म का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया। यह बातचीत उनके लिए काफी खास रही, क्योंकि यह केवल एक पेशेवर प्रस्ताव नहीं था, बल्कि एक रचनात्मक जुड़ाव का हिस्सा था। कुणाल ने बताया कि आमिर चाहते थे कि वह इस फिल्म में एक विशेष भूमिका निभाएं, जो कहानी के एक अहम मोड़ को मजबूत करती है। कुणाल कपूर ने फिल्म को एक भावनात्मक और दिल को छू लेने वाली कहानी बताया है। उनका कहना है कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक अनुभव है, जो दर्शकों को कहानी के साथ जोड़ने की क्षमता रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म में काम करना उनके लिए बेहद आनंददायक रहा, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें मजबूत लेखन और भावनात्मक गहराई मौजूद है। फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में जुनैद खान और साई पल्लवी नजर आएंगे। कुणाल कपूर ने दोनों कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि साई पल्लवी हमेशा अपने किरदारों में शानदार प्रदर्शन करती हैं और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस बेहद प्रभावशाली होती है। वहीं जुनैद खान के बारे में उन्होंने बताया कि वह बेहद फोकस्ड और मेहनती कलाकार हैं, जो न सिर्फ अभिनय पर ध्यान देते हैं बल्कि फिल्म निर्माण की जिम्मेदारियों को भी गंभीरता से निभा रहे हैं। कुणाल ने यह भी साझा किया कि उन्होंने जुनैद खान को बचपन से देखा है और अब उनका एक परिपक्व कलाकार के रूप में सामने आना बेहद प्रेरणादायक है। उनके अनुसार, जुनैद का समर्पण और काम के प्रति गंभीरता उन्हें भविष्य में एक मजबूत पहचान दिला सकती है। इस फिल्म का निर्देशन सुनील पांडे कर रहे हैं, जिनके साथ कुणाल कपूर का पुराना जुड़ाव रहा है। दोनों ने पहले भी एक साथ काम किया है, जब वे अपने करियर के शुरुआती दौर में थे। कुणाल ने इस अनुभव को एक “फुल सर्कल मोमेंट” बताया, क्योंकि यह उनके लिए पुरानी यादों और नए अनुभवों का मेल है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी पुराने सहयोगी के साथ दोबारा काम करना हमेशा खास होता है, क्योंकि उसमें एक अलग तरह की समझ और सहजता होती है। फिल्म ‘एक दिन’ को लेकर दर्शकों में पहले से ही उत्सुकता बनी हुई है। इसकी कहानी, कलाकारों की टीम और भावनात्मक प्रस्तुति इसे एक अलग पहचान देने की ओर इशारा करती है। कुणाल कपूर की वापसी और आमिर खान की सक्रिय भागीदारी ने इस प्रोजेक्ट को और भी चर्चा में ला दिया है। यह फिल्म न केवल कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव है, बल्कि दर्शकों के लिए भी एक भावनात्मक और यादगार कहानी बनने की उम्मीद रखती है।