सालों बाद सामने आया सच, ‘7 खून माफ’ के किस सीन विवाद पर अन्नू कपूर की सफाई..

नई दिल्ली। फिल्म इंडस्ट्री में कई बार ऐसे किस्से सामने आते हैं जो समय बीतने के बाद भी चर्चा में बने रहते हैं। ऐसा ही एक मामला फिल्म ‘7 खून माफ’ से जुड़ा है, जो एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस फिल्म में साथ काम कर चुके अभिनेता अन्नू कपूर ने हाल ही में उस पुराने विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उनके और प्रियंका चोपड़ा के बीच एक किस सीन को लेकर चर्चा हुई थी। अन्नू कपूर ने इस पूरे मामले को याद करते हुए बताया कि फिल्म के रिलीज के दौरान मीडिया में इस विषय को काफी उछाला गया था। उनसे बार-बार यही सवाल पूछा जाता था कि क्या प्रियंका चोपड़ा उनके साथ ऑनस्क्रीन किस करने से हिचकिचा रही थीं। इस पर उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार के लिए यह पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय होता है और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। उन्होंने यह भी माना कि उस समय उनकी कही गई बातों को बाद में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, जिससे विवाद और गहरा हो गया। उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म के निर्देशक ने उन्हें इस बात की जानकारी दी थी कि प्रियंका इस सीन को लेकर पूरी तरह सहज नहीं थीं। इस पर उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई, बल्कि इसे एक सामान्य स्थिति के रूप में देखा। उनके अनुसार, दोनों के बीच उम्र का अंतर काफी ज्यादा था और सेट पर उनका रिश्ता भी बेहद सहज और सम्मानजनक था। वे अक्सर प्रियंका को स्नेह से ‘बेटा’ कहकर बुलाते थे, जिससे उनके बीच एक अलग तरह की समझ विकसित हो गई थी। अन्नू कपूर ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस पूरे मुद्दे से कभी कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने यहां तक सुझाव दिया था कि यदि जरूरत हो तो उस सीन को हटाया भी जा सकता है, लेकिन फिल्म की कहानी के अनुसार उसे रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि एक पेशेवर अभिनेता के रूप में उनका कर्तव्य था कि वे अपने काम को पूरी ईमानदारी से निभाएं, और उन्होंने वही किया। दूसरी ओर, इस मुद्दे पर प्रियंका चोपड़ा की प्रतिक्रिया भी उस समय सामने आई थी, जिसमें उन्होंने इस तरह की चर्चाओं पर नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि इस विषय को जिस तरह से प्रस्तुत किया गया, वह सही नहीं था और इससे उन्हें असहज महसूस हुआ। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि फिल्म में इस तरह के सीन पहले से तय नहीं थे और बाद में इस पर अनावश्यक विवाद खड़ा कर दिया गया। फिल्म ‘7 खून माफ’ में अन्नू कपूर ने प्रियंका चोपड़ा के एक पति की भूमिका निभाई थी। यह कहानी एक महिला के जीवन और उसके रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें कई कलाकारों ने अलग-अलग किरदार निभाए थे। फिल्म अपने विषय और प्रस्तुति के कारण उस समय चर्चा में रही थी। अब, कई वर्षों बाद जब यह मुद्दा फिर सामने आया है, तो अन्नू कपूर ने अपने पक्ष को स्पष्ट करते हुए यह बताया है कि उस समय की परिस्थितियों को समझना जरूरी है। उनके अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री में काम करते समय कलाकारों की सहजता और सीमाओं का सम्मान करना सबसे महत्वपूर्ण होता है, और यही किसी भी पेशेवर माहौल की पहचान है।
यश की ‘टॉक्सिक’ बनाएगी नई सिनेमाई दुनिया, रुक्मिणी वसंत ने बताया फिल्म को अब तक का सबसे अलग अनुभव

नई दिल्ली। रुक्मिणी वसंत इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘टॉक्सिक: अ फेरीटेल फॉर ग्रो-अप्स’ को लेकर चर्चा में हैं और इसे लेकर उनका उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। हाल ही में उन्होंने फिल्म के पैमाने और इसकी अनोखी प्रस्तुति के बारे में खुलकर बात की। उनके मुताबिक यह फिल्म एक अलग ही स्तर पर बनाई जा रही है, जो दर्शकों को अब तक के अनुभव से बिल्कुल अलग महसूस कराएगी। रुक्मिणी का कहना है कि इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका विशाल और प्रभावशाली स्केल है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने करियर में पहले कभी इतनी बड़ी और अलग तरह की सिनेमाई दुनिया का हिस्सा नहीं बनी हैं। फिल्म की कहानी और उसका प्रस्तुतिकरण इतना नया है कि यह हर किसी के लिए एक ताज़ा अनुभव साबित हो सकता है। उन्होंने आगे बताया कि निर्देशक और टीम जिस तरह इस फिल्म को तैयार कर रही है, वह इसे और खास बनाता है। हर पहलू पर बारीकी से काम किया जा रहा है, ताकि दर्शकों को एक अलग और यादगार अनुभव मिल सके। रुक्मिणी के अनुसार, यह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐसा विज़ुअल अनुभव है जो लोगों को लंबे समय तक याद रहेगा। रुक्मिणी ने यह भी कहा कि वह खुद को इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर काफी भाग्यशाली मानती हैं। उनके लिए यह फिल्म सिर्फ एक और काम नहीं बल्कि एक खास मौका है, जहां उन्हें कुछ नया और बड़ा करने का अवसर मिला है। वह इस बात को लेकर भी उत्सुक हैं कि जब यह फिल्म रिलीज होगी तो दर्शकों की प्रतिक्रिया कैसी होगी। फिल्म में कई बड़े कलाकार नजर आने वाले हैं, जिससे इसकी चर्चा और भी बढ़ गई है। इसे कई भाषाओं में रिलीज करने की तैयारी की जा रही है, ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। इसके जरिए मेकर्स एक बड़े स्तर पर दर्शकों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। रुक्मिणी वसंत के लिए यह फिल्म उनके करियर का अहम मोड़ साबित हो सकती है। इसके अलावा भी वह आने वाले समय में कई अन्य प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाली हैं, जिनकी घोषणा जल्द हो सकती है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि उनके लिए आने वाला समय बेहद खास रहने वाला है।
सड़क पर खुला चैंबर बना खतरा ग्वालियर में बुजुर्ग महिला हादसे का शिकार

ग्वालियर । मध्यप्रदेश के ग्वालियर में नगर निगम की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है जहां एक खुला चैंबर एक बुजुर्ग महिला के लिए जानलेवा साबित हो गया। थाटीपुर थाना क्षेत्र के विवेक आनंद चौराहे पर हुए इस हादसे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार बुजुर्ग महिला अपने घर के पास से गुजर रही थी तभी अचानक उनका पैर सड़क पर बने नवनिर्मित खुले चैंबर में पड़ गया। चैंबर का मुंह खुला होने और गहराई ज्यादा होने के कारण महिला संतुलन खो बैठीं और सीधे उसमें गिर गईं। घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद लोग भी कुछ समझ नहीं पाए और कुछ ही पलों में वहां अफरा तफरी का माहौल बन गया। महिला के गिरते ही उनकी चीख पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। जब उन्होंने देखा कि महिला चैंबर के अंदर फंसी हुई है तो तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मदद नहीं पहुंचती तो यह हादसा और भी गंभीर हो सकता था। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। चैंबर का मुंह संकरा होने के कारण महिला को बाहर निकालना आसान नहीं था। साथ ही महिला के घायल होने से स्थिति और भी जटिल हो गई थी। इसके बावजूद टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हादसे में महिला को शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। रेस्क्यू के तुरंत बाद उन्हें पुलिस वाहन से नजदीकी अस्पताल ले जाया गया जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें निगरानी में रखा गया है। इस घटना के बाद इलाके के लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा बनाए गए चैंबरों को बिना ढके छोड़ दिया गया है जो आम लोगों के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। खासकर रात के समय या बारिश के दौरान ऐसे खुले चैंबर किसी भी बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकते हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र के सभी खुले चैंबरों को तुरंत ढका जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। यह हादसा एक बार फिर यह साबित करता है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है और सार्वजनिक सुरक्षा के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई जानलेवा साबित हो सकती है।
विनोद खन्ना: पर्दे के खलनायक से फिटनेस आइकन तक का शानदार सफर..

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनकी पहचान सिर्फ उनकी फिल्मों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनका व्यक्तित्व भी उन्हें एक अलग मुकाम पर पहुंचा देता है। विनोद खन्ना ऐसे ही दुर्लभ कलाकारों में से एक थे, जिन्होंने अपने अभिनय, स्टाइल और फिटनेस के दम पर लाखों दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। पर्दे पर वे अक्सर खलनायक की भूमिकाओं में नजर आए, लेकिन उनकी स्क्रीन प्रेजेंस इतनी प्रभावशाली थी कि दर्शक उनसे नफरत नहीं बल्कि आकर्षित हो जाते थे। विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 को उस समय के पेशावर में हुआ था, जो आज पाकिस्तान का हिस्सा है। विभाजन के बाद उनका परिवार मुंबई आ गया, जहां उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की। बचपन से ही उनका झुकाव पढ़ाई के साथ-साथ खेलों की ओर भी काफी ज्यादा था। वे टेनिस, फुटबॉल और क्रिकेट जैसे खेलों में गहरी रुचि रखते थे और युवावस्था में उन्होंने कुश्ती की ट्रेनिंग भी ली थी। उनकी मजबूत काया और आकर्षक व्यक्तित्व ने उन्हें शुरुआत से ही भीड़ से अलग खड़ा कर दिया। फिल्मी दुनिया में उनका पहला बड़ा अवसर उन्हें सुनील दत्त के माध्यम से मिला, जिन्होंने उन्हें एक फिल्म में खलनायक की भूमिका के लिए चुना। यही भूमिका उनके करियर की शुरुआत साबित हुई और उन्होंने अपने दमदार अभिनय से सभी का ध्यान आकर्षित किया। खलनायक के रूप में शुरुआत करने के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे केवल नकारात्मक भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने अपने करियर में लगातार विविध भूमिकाएं निभाईं और खुद को एक बहुमुखी अभिनेता के रूप में स्थापित किया। उन्होंने भावनात्मक, सामाजिक और एक्शन से भरपूर फिल्मों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे किसी भी किरदार में सहजता से ढल जाते थे और उसे वास्तविकता के करीब बना देते थे। 1970 और 1980 के दशक में वे हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित चेहरों में से एक बन गए थे। उस दौर में उनकी लोकप्रियता अपने चरम पर थी और वे बड़े सितारों के साथ बराबरी की टक्कर देते थे। उनकी अभिनय शैली सधी हुई और प्रभावशाली थी, जिसने उन्हें दर्शकों के बीच एक खास पहचान दिलाई। अपने करियर के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद उन्होंने अचानक फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली और आध्यात्मिक जीवन की ओर रुख किया। यह फैसला उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जहां उन्होंने कुछ वर्षों तक फिल्मों से दूर रहकर आत्मिक शांति की खोज की। कुछ समय बाद उन्होंने फिल्मों में वापसी की और एक बार फिर अपनी दमदार मौजूदगी से दर्शकों को प्रभावित किया। उनकी वापसी ने यह साबित कर दिया कि सच्चा कलाकार कभी भी अपनी प्रतिभा नहीं खोता। बाद के वर्षों में उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ भी काम किया और अपने अनुभव से फिल्म जगत को समृद्ध किया। विनोद खन्ना का जीवन संघर्ष, सफलता और आत्म-खोज का एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो आज भी लोगों को प्रभावित करता है।
शादी में विवाद से दोहरी हत्या नर्मदापुरम पुलिस का बड़ा एक्शन 6 दिन में इनामी आरोपी पकड़ा

नर्मदापुरम । मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक शादी समारोह के दौरान हुई खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था जहां खुशियों का माहौल अचानक मातम में बदल गया। मामूली विवाद ने देखते ही देखते दोहरे हत्याकांड का रूप ले लिया लेकिन पुलिस की सतर्कता और लगातार प्रयासों के चलते आखिरकार मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना 19 अप्रैल की बताई जा रही है जब एक गांव में सीताराम कीर के घर शादी का समारोह चल रहा था। इसी दौरान पुरानी रंजिश और खाने को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि अमर सिंह और उसके बेटे लोकेश कीर ने डंडों और धारदार चाकू से जयनारायण कीर और उनके परिजनों पर हमला कर दिया। इस हमले में कुल सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दौलतराम कीर की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक अन्य घायल ने इलाज के दौरान तीन दिन बाद दम तोड़ दिया। इस दोहरे हत्याकांड के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल फैल गया और आरोपी फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और आरोपियों की तलाश में दबिश दी। इसी दौरान जब पुलिस टीम मुख्य आरोपी लोकेश कीर को पकड़ने पहुंची तो उसने आरक्षक ओमप्रकाश जाट पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि आरोपी ने उन पर करीब नौ बार वार किए जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद आरोपी जंगल की ओर भाग निकला जिससे मामला और चुनौतीपूर्ण हो गया। पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया और व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। करीब छह दिनों तक पुलिस ने गांवों और गंजाल नदी के बीहड़ जंगलों में लगातार तलाशी अभियान चलाया। पुलिस ने तकनीकी साधनों और मुखबिरों की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रैक की। आखिरकार पुलिस को सफलता मिली और मुख्य आरोपी लोकेश कीर को गंजाल नदी के किनारे से गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले उसके पिता अमर सिंह को भी पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी। इस पूरे ऑपरेशन में थाना प्रभारी के एन रजक साइबर सेल और पुलिस टीम की अहम भूमिका रही जिन्होंने जोखिम उठाकर इस आरोपी को पकड़ने में सफलता हासिल की। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में राहत की सांस ली जा रही है और पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना हो रही है। यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि छोटी सी बात भी किस तरह बड़ा अपराध बन सकती है और कानून से बच पाना आसान नहीं है। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक शादी समारोह के दौरान हुई खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था जहां खुशियों का माहौल अचानक मातम में बदल गया। मामूली विवाद ने देखते ही देखते दोहरे हत्याकांड का रूप ले लिया लेकिन पुलिस की सतर्कता और लगातार प्रयासों के चलते आखिरकार मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना 19 अप्रैल की बताई जा रही है जब एक गांव में सीताराम कीर के घर शादी का समारोह चल रहा था। इसी दौरान पुरानी रंजिश और खाने को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि अमर सिंह और उसके बेटे लोकेश कीर ने डंडों और धारदार चाकू से जयनारायण कीर और उनके परिजनों पर हमला कर दिया। इस हमले में कुल सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दौलतराम कीर की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक अन्य घायल ने इलाज के दौरान तीन दिन बाद दम तोड़ दिया। इस दोहरे हत्याकांड के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल फैल गया और आरोपी फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और आरोपियों की तलाश में दबिश दी। इसी दौरान जब पुलिस टीम मुख्य आरोपी लोकेश कीर को पकड़ने पहुंची तो उसने आरक्षक ओमप्रकाश जाट पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि आरोपी ने उन पर करीब नौ बार वार किए जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद आरोपी जंगल की ओर भाग निकला जिससे मामला और चुनौतीपूर्ण हो गया। पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया और व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। करीब छह दिनों तक पुलिस ने गांवों और गंजाल नदी के बीहड़ जंगलों में लगातार तलाशी अभियान चलाया। पुलिस ने तकनीकी साधनों और मुखबिरों की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रैक की। आखिरकार पुलिस को सफलता मिली और मुख्य आरोपी लोकेश कीर को गंजाल नदी के किनारे से गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले उसके पिता अमर सिंह को भी पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी। इस पूरे ऑपरेशन में थाना प्रभारी के एन रजक साइबर सेल और पुलिस टीम की अहम भूमिका रही जिन्होंने जोखिम उठाकर इस आरोपी को पकड़ने में सफलता हासिल की। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में राहत की सांस ली जा रही है और पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना हो रही है। यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि छोटी सी बात भी किस तरह बड़ा अपराध बन सकती है और कानून से बच पाना आसान नहीं है।
आईपीएल में तहलका मचा रहे वैभव सूर्यवंशी, मोहम्मद कैफ ने बताया भविष्य का सुपरस्टार

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी का जलवा लगातार चर्चा में बना हुआ है। राजस्थान रॉयल्स के इस युवा ओपनर ने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ सिर्फ 36 गेंदों में शतक ठोककर क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। उनकी इस पारी के बाद पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने उनकी जमकर तारीफ की और उन्हें भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ सुपरस्टार बताया। मोहम्मद कैफ ने कहा कि इतनी कम उम्र में वैभव जिस तरह के गेंदबाजों के सामने बिना किसी डर के बल्लेबाजी कर रहे हैं, वह उन्हें खास बनाता है। उन्होंने याद दिलाया कि वैभव ने एक ही ओवर में चार छक्के जड़कर विपक्षी गेंदबाज को पूरी तरह दबाव में ला दिया था और पिछले मुकाबले की हार का जवाब भी मैदान पर दिया। कैफ के मुताबिक वैभव की सबसे बड़ी ताकत उनका निडर रवैया है। उन्होंने बताया कि वह नाम या बड़े गेंदबाजों को देखकर अपनी सोच नहीं बदलते, बल्कि हर गेंद को अटैक करने के इरादे से खेलते हैं। पैट कमिंस जैसे अनुभवी गेंदबाज के सामने भी उन्होंने पहली ही गेंद पर छक्का लगाकर अपनी मंशा साफ कर दी। पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने यह भी कहा कि वैभव की लगातार दो सीजन में शतक लगाने की क्षमता और तेज स्ट्राइक रेट इस बात का सबूत है कि उनकी मानसिकता बेहद मजबूत है। उनके अनुसार वैभव गेंद की लेंथ को जल्दी समझ लेते हैं और क्रीज पर उनका संतुलन उन्हें बाकी युवा खिलाड़ियों से अलग करता है। अंत में कैफ ने कहा कि अगर वैभव इसी तरह फिट रहते हैं और अपने खेल पर फोकस बनाए रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट को एक ऐसा खिलाड़ी मिल सकता है जो लंबे समय तक टीम की रीढ़ बन सकता है।
शेयर बाजार में अगले हफ्ते बड़ा उतार-चढ़ाव संभव, ग्लोबल फैक्टर्स रहेंगे अहम..

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह कई अहम घटनाओं से भरा रहने वाला है, जिनका सीधा असर बाजार की दिशा और निवेशकों की रणनीति पर पड़ सकता है। इस समय बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और वैश्विक से लेकर घरेलू स्तर तक कई ऐसे कारक हैं जो आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव को बढ़ा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण घटना अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक मानी जा रही है, जो 28 और 29 अप्रैल के बीच होने वाली है। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर लिए जाने वाले फैसले पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां पहले से ही अस्थिर हैं और ऐसे में किसी भी नीति निर्णय का प्रभाव सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर देखने को मिल सकता है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ेगा। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। वैश्विक तनाव और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। तेल की कीमतों में किसी भी तरह का बदलाव महंगाई और कंपनियों की लागत संरचना को प्रभावित कर सकता है, जिससे बाजार की चाल पर सीधा असर पड़ता है। वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियां भी इस समय बाजार की दिशा को प्रभावित कर रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों में चल रही अनिश्चितताओं और बातचीत की स्थिति में बदलाव का असर निवेशकों की धारणा पर साफ दिखाई देता है। यही कारण है कि अगले सप्ताह बाजार में सतर्कता और अस्थिरता दोनों बनी रह सकती है। घरेलू स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं, जिनमें औद्योगिक उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े आंकड़े शामिल हैं। ये डेटा देश की आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर बाजार में सेक्टर आधारित हलचल देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, कॉरपोरेट सेक्टर में भी चौथी तिमाही के नतीजों का सिलसिला जारी रहेगा। कई बड़ी कंपनियां अपने वित्तीय परिणाम घोषित करेंगी, जिनमें बैंकिंग, ऑटो, एनर्जी और अन्य प्रमुख सेक्टर शामिल हैं। इन नतीजों के आधार पर संबंधित कंपनियों के शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है और निवेशकों की रणनीति भी इसी के अनुसार बदलेगी। पिछला सप्ताह बाजार के लिए कमजोर साबित हुआ था, जहां प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई थी। कई सेक्टरों में दबाव देखने को मिला था, जबकि कुछ क्षेत्रों में सीमित मजबूती भी दिखाई दी थी। कुल मिलाकर बाजार में अनिश्चितता और अस्थिरता का माहौल बना रहा था। आने वाले सप्ताह में भी यही स्थिति जारी रहने की संभावना है, जहां वैश्विक घटनाक्रम, आर्थिक डेटा और कंपनियों के नतीजे मिलकर बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता और सोच-समझकर निर्णय लेने का रहेगा।
MP में हेलमेट पर सख्ती शुरू बिना हेलमेट पकड़े गए तो चालान के साथ लाइसेंस भी होगा सस्पेंड

भोपाल । मध्यप्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सख्त कदम उठाया गया है। राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में आज से हेलमेट चेकिंग अभियान शुरू हो गया है। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना भारी पड़ सकता है क्योंकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान आज से शुरू होकर 10 मई तक लगातार चलेगा और इस दौरान हर जिले में व्यापक स्तर पर चेकिंग की जाएगी। पुलिस की टीम सड़कों पर तैनात रहेगी और जो भी चालक बिना हेलमेट पाया जाएगा उसका चालान काटा जाएगा। इतना ही नहीं कई मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस के निलंबन की कार्रवाई भी की जा सकती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ चालान काटना नहीं बल्कि लोगों को जागरूक करना भी है। आंकड़ों के अनुसार सड़क हादसों में होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण हेलमेट का उपयोग न करना है। करीब 50 प्रतिशत मामलों में दोपहिया चालक की मौत सिर्फ इसलिए हो जाती है क्योंकि उसने हेलमेट नहीं पहना होता। पुलिस मुख्यालय की ओर से इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। एडीजी पीटीआरआई विवेक शर्मा ने बताया कि प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं और यातायात नियमों की अनदेखी इसके पीछे मुख्य वजह है। उन्होंने कहा कि हेलमेट पहनना सिर्फ कानूनी बाध्यता नहीं बल्कि जीवन की सुरक्षा का सबसे जरूरी उपाय है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभियान के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस टीम न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी निगरानी बढ़ाएगी ताकि हर स्तर पर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। इस अभियान के पीछे मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करना है। सरकार और पुलिस विभाग चाहते हैं कि लोग अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और नियमों का पालन करें। कई बार छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो जाती है और हेलमेट जैसी साधारण चीज जीवन बचा सकती है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे बिना हेलमेट वाहन चलाने से बचें और अपने परिवार तथा खुद की सुरक्षा के लिए नियमों का पालन करें। यह अभियान एक चेतावनी भी है और एक अवसर भी कि लोग अपनी आदतों में सुधार लाएं। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में शुरू हुआ यह अभियान सड़क सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है जो आने वाले दिनों में लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव ला सकता है।
वैभव सूर्यवंशी को लेकर बड़ी सलाह, ब्रायन लारा मॉडल अपनाने की जरूरत: कार्लोस ब्रैथवेट..

नई दिल्ली। वेस्टइंडीज के पूर्व ऑलराउंडर कार्लोस ब्रैथवेट ने 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर एक अहम राय दी है। उनका कहना है कि इस तरह के प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जल्दबाजी में नहीं उतारना चाहिए, बल्कि उन्हें सही तरीके से तैयार करके आगे बढ़ाना चाहिए ताकि उनका करियर लंबे समय तक सफल रह सके। ब्रैथवेट ने उदाहरण देते हुए ब्रायन लारा का नाम लिया और कहा कि वेस्टइंडीज क्रिकेट ने लारा को बहुत सोच-समझकर तैयार किया था। उन्हें शुरुआत में सीधे अंतरराष्ट्रीय दबाव में नहीं डाला गया, बल्कि सीनियर खिलाड़ियों के साथ अभ्यास और सीखने का मौका दिया गया, जिससे उनका खेल और मजबूत हुआ। उन्होंने सुझाव दिया कि वैभव सूर्यवंशी को भी इसी तरह धीरे-धीरे तैयार किया जाना चाहिए। उन्हें भारतीय क्रिकेट के अनुभवी खिलाड़ियों जैसे विराट कोहली और रोहित शर्मा के साथ समय बिताने और सीखने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे खेल की बारीकियों को बेहतर समझ सकें। वैभव सूर्यवंशी ने हाल के समय में अपने आक्रामक बल्लेबाजी अंदाज से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है। कम उम्र में ही उन्होंने बड़े-बड़े गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ बल्लेबाजी करते हुए अपनी पहचान बनाई है। उनकी तेज रन बनाने की क्षमता और निडर खेल शैली ने उन्हें चर्चा में ला दिया है। आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें भविष्य का बड़ा खिलाड़ी माना जाने लगा है। कई मौकों पर उन्होंने कम गेंदों में तेजी से रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया है। हालांकि क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम उम्र में उन्हें सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतारना सही नहीं होगा। सही मार्गदर्शन और धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया उनके करियर को और मजबूत बना सकती है और वह लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कोर्ट आदेश के बाद भी राहत नहीं कर्मचारियों का गुस्सा फूटा प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी

भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर कर्मचारियों का असंतोष खुलकर सामने आ गया है। लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का संकेत दे दिया है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ की हाल ही में हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और इसके बाद प्रदेश स्तर पर आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली गई है। संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि कर्मचारियों की समस्याएं वर्षों से लंबित हैं लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के आदेश के बावजूद सरकार नव नियुक्त कर्मचारियों के लिए 70 80 और 90 प्रतिशत वेतन के बंधन को समाप्त नहीं कर रही है। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है और वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। बैठक में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। कर्मचारियों ने मांग की कि अनुकंपा नियुक्ति में सीपीसीटी का बंधन समाप्त किया जाए ताकि प्रभावित परिवारों को जल्द राहत मिल सके। इसके अलावा यह भी कहा गया कि वर्ष 2019 से कोर्ट के आदेश के अनुसार कर्मचारियों को पूर्ण वेतन का लाभ दिया जाना चाहिए लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर भी कर्मचारियों ने नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए और इसके लिए व्यापक बीमा योजना लागू की जानी चाहिए। साथ ही यह मांग भी उठी कि कर्मचारियों को बैंक खातों के माध्यम से बड़े स्तर पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए। संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के मुद्दे भी बैठक में छाए रहे। संघ का कहना है कि इन कर्मचारियों को भी नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं और लाभ मिलना चाहिए ताकि उनके साथ भेदभाव खत्म हो सके। इसके अलावा शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर भी चर्चा हुई और इसे निरस्त करने की मांग उठाई गई। बैठक में महंगाई राहत को लेकर भी आवाज बुलंद हुई। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई राहत देने की मांग की गई ताकि उन्हें आर्थिक रूप से राहत मिल सके। इसके साथ ही केंद्रीय दर और तिथि के अनुसार लाभ देने की भी मांग रखी गई। इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के बाद कर्मचारी संघ ने आगामी दिनों में प्रदेश स्तर पर आंदोलन करने का निर्णय लिया है। बैठक में विभिन्न संस्थानों के पदाधिकारी भी शामिल हुए और सभी ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने की सहमति जताई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह स्थिति सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में कर्मचारी इससे जुड़े हुए हैं। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में कर्मचारियों का यह बढ़ता असंतोष आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है जो सरकार और प्रशासन दोनों के लिए अहम परीक्षा साबित होगा।