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राष्ट्रपति मुर्मु के आगमन से शिमला में बढ़ी हलचल, सुरक्षा और स्वागत के कड़े इंतजाम..

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला इन दिनों राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन को लेकर विशेष चर्चा में है। उनके पांच दिवसीय प्रवास के चलते पूरे शहर में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है। यह दौरा राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें कई आधिकारिक, शैक्षणिक और विकास से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। राष्ट्रपति मुर्मु का यह दौरा 27 अप्रैल से 1 मई तक निर्धारित है। इस दौरान वे शिमला और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। उनके आगमन के सम्मान में राजभवन में विशेष स्वागत समारोह का आयोजन किया गया है, जहां राज्य के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग शामिल होंगे। यह कार्यक्रम राष्ट्रपति के प्रवास की शुरुआत को औपचारिक रूप से चिह्नित करता है। अपने प्रवास के दौरान राष्ट्रपति शिमला स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड का दौरा करेंगी, जहां वे सैन्य प्रशिक्षण और तैयारियों की समीक्षा करेंगी। इसके अलावा वे पालमपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी, जहां विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की जाएगी और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी उपलब्धियों को सराहा जाएगा। राष्ट्रपति मुर्मु सोमवार को मशोबरा स्थित राष्ट्रपति निवास पहुंचीं, जो उनके प्रवास के दौरान उनका अस्थायी आवास बना हुआ है। यह स्थान अपनी ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है और लंबे समय से देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के प्रवास का हिस्सा रहा है। दौरे के कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति 29 अप्रैल को अटल टनल का निरीक्षण करेंगी। यह परियोजना हिमाचल प्रदेश की प्रमुख आधारभूत संरचना उपलब्धियों में से एक मानी जाती है और राज्य के विकास में इसकी अहम भूमिका है। इसके बाद 30 अप्रैल को वे पालमपुर में आयोजित दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी और उसी दिन शाम को मशोबरा स्थित निवास पर “एट होम” कार्यक्रम में शामिल होंगी, जहां विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े आमंत्रित अतिथि उनसे मुलाकात करेंगे। 1 मई को राष्ट्रपति का अंतिम कार्यक्रम शिमला स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड का दौरा होगा, जिसके बाद वे राजधानी दिल्ली के लिए रवाना होंगी। यह पूरा दौरा प्रशासनिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें रक्षा, शिक्षा और विकास तीनों क्षेत्रों की गतिविधियों की समीक्षा और सहभागिता शामिल है। मशोबरा स्थित राष्ट्रपति निवास का ऐतिहासिक महत्व भी विशेष है। यह भवन लगभग 174 वर्ष पुराना है और अपनी यूरोपीय स्थापत्य शैली के कारण जाना जाता है। पहले इसे रिट्रीट बिल्डिंग के नाम से जाना जाता था, जो अब देश के प्रमुख राष्ट्रपति आवासों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।

कम समय में बड़ा स्वाद: बूंदी रायता से पाएं गर्मी में राहत और ताजगी..

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में खाने की थाली में कुछ ऐसा होना जरूरी होता है जो शरीर को ठंडक दे और खाने को हल्का बना दे। ऐसे समय में दही से बनी चीजों की मांग बढ़ जाती है क्योंकि यह न सिर्फ स्वाद बढ़ाती हैं बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा रखने में भी मदद करती हैं। इन्हीं में से एक आसान और लोकप्रिय विकल्प है बूंदी रायता, जो हर उम्र के लोगों के बीच काफी पसंद किया जाता है। बूंदी रायता अपनी सादगी और झटपट बनने वाली रेसिपी के लिए जाना जाता है। यह एक ऐसी डिश है जिसे कम समय में तैयार किया जा सकता है और यह खाने के साथ परफेक्ट साइड डिश के रूप में काम करता है। खासकर मसालेदार खाने के साथ इसका स्वाद और भी बेहतर महसूस होता है, क्योंकि यह स्वाद को संतुलित करता है और पेट को ठंडक देता है। इस रेसिपी को बनाने के लिए सबसे पहले ताजा दही को अच्छे से फेंटना होता है ताकि वह मुलायम और क्रीमी हो जाए। इसके बाद इसमें थोड़ा पानी मिलाकर इसकी मोटाई को संतुलित किया जाता है। ऐसा करने से रायता हल्का और खाने में आसान बनता है। इसके बाद इसमें पहले से तैयार या हल्की तली हुई बूंदी डाली जाती है, जो इस डिश की मुख्य सामग्री होती है। अब इसमें स्वाद के अनुसार नमक मिलाया जाता है। कई लोग इसमें काला नमक और भुना हुआ जीरा भी डालते हैं, जिससे इसका स्वाद और अधिक बढ़ जाता है। चाहें तो इसमें बारीक कटी हरी मिर्च या धनिया भी मिलाया जा सकता है, जो इसे ताजगी और सुगंध प्रदान करता है। सभी सामग्री को अच्छे से मिलाने के बाद इसे कुछ मिनट के लिए रखा जाता है, ताकि बूंदी दही को अच्छे से सोख ले और स्वाद और निखर जाए। बूंदी रायता सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है। दही में मौजूद पोषक तत्व पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जबकि बूंदी इसे हल्का और एनर्जी देने वाला बनाती है। गर्मी के दिनों में यह शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में भी सहायक होता है। इस रेसिपी की खासियत यह है कि इसे किसी भी खाने के साथ आसानी से परोसा जा सकता है। चाहे रोजमर्रा का भोजन हो या कोई खास अवसर, बूंदी रायता हर प्लेट में एक अलग ही स्वाद जोड़ देता है। इसकी आसान तैयारी और शानदार स्वाद इसे हर घर की पसंदीदा डिश बना देता है।

गर्म मौसम में यूरिन जलन की समस्या? ये घरेलू तरीके देंगे आराम..

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम अपने साथ कई तरह की शारीरिक परेशानियां लेकर आता है। तेज धूप, अधिक पसीना और शरीर में पानी की कमी के कारण लोग अक्सर डिहाइड्रेशन की समस्या का सामना करते हैं। इसी वजह से यूरिन में जलन जैसी समस्या भी काफी आम हो जाती है, जो कई लोगों के लिए असहज स्थिति पैदा कर देती है। डॉक्टरों के अनुसार, जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो पेशाब गाढ़ा हो जाता है। यही गाढ़ा यूरिन मूत्र मार्ग में जलन और असहजता का कारण बनता है। इसके अलावा, बैक्टीरियल इंफेक्शन, गलत खान-पान और साफ-सफाई की कमी भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे जरूरी उपाय है पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना। नियमित अंतराल पर पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और यूरिन पतला होकर जलन कम करता है। इसके साथ ही नारियल पानी और छाछ का सेवन भी शरीर के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। ये दोनों पेय शरीर को ठंडक देते हैं और अंदरूनी संतुलन बनाए रखते हैं। नींबू पानी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है, जिससे यूरिन संबंधी समस्याओं में राहत मिल सकती है। जौ का पानी भी एक पारंपरिक और प्रभावी उपाय माना जाता है, जो मूत्र मार्ग की जलन को शांत करने में मदद करता है। यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में भी सहायक होता है और गर्मी के प्रभाव को कम करता है। गर्मी के दिनों में खान-पान पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है। ज्यादा मसालेदार, तला-भुना या जंक फूड शरीर में गर्मी बढ़ाते हैं, जिससे यूरिन जलन की समस्या और अधिक बढ़ सकती है। ऐसे में हल्का और संतुलित आहार लेना बेहतर होता है। साफ-सफाई का ध्यान रखना भी इस समस्या से बचाव में अहम भूमिका निभाता है। शरीर के संवेदनशील हिस्सों की स्वच्छता बनाए रखना और सूती, आरामदायक कपड़े पहनना संक्रमण के खतरे को कम करता है। अगर जलन के साथ बुखार, बदबूदार पेशाब या खून जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह किसी गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है, जिसके लिए तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी होता है।

आज का राशिफल 28 अप्रैल: 4 राशियों पर बरसेगी हनुमान जी की कृपा, 3 को रहना होगा सतर्क

नई दिल्ली। मंगलवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है, क्योंकि आज ग्रहों की स्थिति कई राशियों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दे रही है। माना जा रहा है कि आज का दिन मंगल ग्रह की ऊर्जा और धार्मिक आस्था से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार विशेष प्रभाव लेकर आया है। चंद्रमा की चाल का असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेगा। आज के दिन कुछ राशियों के लिए परिस्थितियां बेहद अनुकूल बनती दिख रही हैं। वृषभ, कन्या, सिंह और मकर राशि के जातकों के लिए समय सकारात्मक संकेत दे रहा है। इन लोगों को कार्यक्षेत्र में सफलता, आर्थिक लाभ और पारिवारिक जीवन में संतुलन मिलने की संभावना है। मेहनत का फल मिलने के योग बन रहे हैं और रुके हुए कार्य आगे बढ़ सकते हैं। इन राशियों पर मानसिक रूप से भी सकारात्मक प्रभाव रहेगा, जिससे निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी। कई मामलों में अचानक लाभ या नए अवसर मिलने की संभावना भी बन रही है। सामाजिक जीवन में सम्मान और पहचान बढ़ने के संकेत भी नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ राशियों को आज विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मेष, तुला और कुंभ राशि के जातकों को आज अपने निर्णयों में सतर्क रहना होगा। आर्थिक मामलों में बिना सोच-समझ के कदम उठाने से नुकसान हो सकता है। साथ ही रिश्तों में गलतफहमी या वाद-विवाद की स्थिति भी बन सकती है, इसलिए संवाद में संयम रखना जरूरी है। इन राशियों को सलाह दी जाती है कि किसी भी बड़े निर्णय से पहले अच्छी तरह विचार करें और भावनाओं में बहकर कोई कदम न उठाएं। कार्यस्थल पर भी धैर्य और समझदारी के साथ स्थिति को संभालना जरूरी होगा। बाकी राशियों के लिए आज का दिन मिश्रित परिणाम लेकर आया है। कुछ जगहों पर अवसर मिलेंगे, तो कुछ जगहों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में संतुलन बनाए रखना और परिस्थितियों को समझदारी से संभालना महत्वपूर्ण रहेगा। धार्मिक दृष्टि से मंगलवार का दिन हनुमान जी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने और सच्चे मन से प्रार्थना करने से मानसिक शांति मिलती है और बाधाओं में कमी आती है। कई लोग इस दिन व्रत या पूजा के माध्यम से अपने दिन को शुभ बनाने का प्रयास करते हैं।

Daily Prediction: आज का अंक ज्योतिष: जानिए मूलांक 1-9 के लिए कैसा रहेगा 28 अप्रैल का मंगलवार..

Daily Prediction:  नई दिल्ली। 28 अप्रैल 2026 का मंगलवार अंक ज्योतिष की दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। इस दिन की ऊर्जा का केंद्र शुक्र ग्रह को बताया जा रहा है, जो प्रेम, संतुलन और सौंदर्य का प्रतीक है। इसी प्रभाव के कारण मूलांक 1 से 9 तक के लोगों के जीवन में अलग-अलग परिस्थितियाँ और अनुभव देखने को मिल सकते हैं। अंक ज्योतिष के अनुसार हर व्यक्ति का मूलांक उसके स्वभाव और जीवन की दिशा को प्रभावित करता है। मूलांक 1 वाले जातकों के लिए यह दिन आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को मजबूत करने वाला हो सकता है। कार्यक्षेत्र में नई शुरुआत के संकेत मिल सकते हैं और जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। हालांकि, अहंकार से दूरी बनाए रखना आवश्यक रहेगा ताकि संबंधों में संतुलन बना रहे। मूलांक 2 के लोगों के लिए यह दिन भावनात्मक समझ और सहयोग का है। कामकाज में धीरे-धीरे प्रगति होगी और टीमवर्क से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। पारिवारिक जीवन में शांति बनी रहेगी और रिश्तों में सकारात्मकता देखने को मिलेगी। मूलांक 3 के जातकों के लिए आज का दिन रचनात्मकता और विचारों की अभिव्यक्ति का संकेत दे रहा है। शिक्षा, लेखन और संवाद से जुड़े क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन संभव है। सामाजिक जीवन में सक्रियता बढ़ सकती है और मित्रों के साथ समय आनंददायक रहेगा। मूलांक 4 वालों के लिए यह दिन मेहनत और अनुशासन पर केंद्रित रहने का है। कार्यक्षेत्र में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन धैर्य और निरंतर प्रयास से स्थिति नियंत्रित रहेगी। जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना बेहतर होगा। मूलांक 5 के लिए यह दिन बदलाव और नई संभावनाओं का संकेत देता है। यात्रा या नए अवसर मिलने की संभावना है। व्यापार और संचार से जुड़े क्षेत्रों में प्रगति देखने को मिल सकती है। मूलांक 6 के जातकों के लिए यह दिन प्रेम, संतुलन और सामंजस्य का है। पारिवारिक जीवन में खुशहाली बनी रहेगी और रिश्तों में मधुरता देखने को मिलेगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है। मूलांक 7 वालों के लिए यह समय आत्मचिंतन और गहराई से सोचने का है। कार्यों की गति थोड़ी धीमी रह सकती है, लेकिन यह समय भविष्य की योजनाओं को मजबूत करने के लिए उपयुक्त है। मानसिक शांति के लिए ध्यान लाभकारी रहेगा। मूलांक 8 के लोगों के लिए यह दिन कर्म और परिणाम से जुड़ा हुआ है। पुराने प्रयासों का फल मिल सकता है और कार्यक्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी। सरकारी या प्रशासनिक कार्यों में सफलता के संकेत हैं। मूलांक 9 के लिए यह दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा। लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा बढ़ेगी और नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी। हालांकि, क्रोध पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा ताकि रिश्तों में संतुलन बना रहे।

LPG Booking Rules: LPG बुकिंग और डिलीवरी में बदलाव की तैयारी: उपभोक्ताओं के लिए नया सिस्टम ला सकता है बड़ी सुविधा और सख्ती

LPG Booking Rules: नई दिल्ली। रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 1 मई 2026 से LPG सिलेंडर वितरण प्रणाली से जुड़े नियमों में संशोधन की संभावना जताई जा रही है, जिससे बुकिंग और डिलीवरी की पूरी प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त और तकनीकी रूप से नियंत्रित हो सकती है। हाल के समय में घरेलू रसोई गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिससे उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण आपूर्ति और कीमतों में बदलाव की स्थिति बनी रहती है, जिसका असर भारत की व्यवस्था पर भी दिखाई देता है। नए प्रस्तावित बदलावों के अनुसार LPG बुकिंग के नियमों में संशोधन किया जा सकता है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुकिंग के बीच के समय अंतराल को फिर से तय करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सके और किसी भी तरह की कमी से बचा जा सके। इसके साथ ही डिलीवरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। डिलीवरी के समय उपभोक्ता की पहचान सुनिश्चित करने के लिए OTP आधारित सत्यापन प्रणाली को और मजबूत किया जा सकता है, जिससे गलत डिलीवरी और अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके। सरकार की ओर से आधार आधारित eKYC प्रक्रिया को भी और सख्ती से लागू करने की संभावना है, खासकर उन उपभोक्ताओं के लिए जो सब्सिडी का लाभ प्राप्त करते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता केवल सही और पात्र लोगों तक पहुंचे। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम तेज किए जा रहे हैं। जिन इलाकों में पाइप्ड गैस सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे इस व्यवस्था की ओर शिफ्ट करने की योजना पर काम चल रहा है।

Chirag Paswan: दिल्ली हत्याकांड ने पकड़ा राजनीतिक तूल, सत्ता-विपक्ष में तीखी बयानबाज़ी..

Chirag Paswan: नई दिल्ली। दिल्ली में डिलीवरी बॉय की हत्या का मामला अब केवल एक आपराधिक घटना न रहकर राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन चुका है। इस घटना के बाद राजधानी की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं, जिसके चलते राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। घटना के सामने आने के बाद विपक्ष की ओर से सरकार पर सीधा हमला किया गया। विपक्षी नेता ने इस वारदात को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह घटना समाज में असुरक्षा की भावना को दर्शाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीड़ित युवक बिहार से था और उसके साथ हुई यह घटना क्षेत्रीय और सामाजिक संवेदनशीलता को उजागर करती है। विपक्ष का कहना है कि इस तरह की घटनाएं राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। विपक्षी बयान में यह भी कहा गया कि राजधानी में प्रशासनिक जिम्मेदारी कई स्तरों पर बंटी हुई है, ऐसे में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत और बढ़ जाती है। उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की बात कही। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया। सत्ता पक्ष की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। केंद्रीय स्तर के एक नेता ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से न केवल गलत संदेश जाता है, बल्कि समाज में भ्रम भी पैदा होता है। सत्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि सरकार हर नागरिक की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दी जाएगी। उन्होंने विपक्ष पर यह आरोप भी लगाया कि ऐसे संवेदनशील मामलों को राजनीतिक रंग देकर मुद्दे को भटकाने की कोशिश की जा रही है, जो सही नहीं है। उनका कहना था कि किसी भी आपराधिक घटना को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना पीड़ित परिवार के साथ न्याय नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ जहां पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक बयानबाज़ी ने मामले को और जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं में राजनीतिक बहस से ज्यादा जरूरी है कि जांच प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो, ताकि पीड़ित को समय पर न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

Movie Announcement: खलनायक के सीक्वल से लौटेगा बल्लू बलराम का खौफ; संजय दत्त की जिद पर सुभाष घई ने तैयार की कहानी,

   Movie Announcement: नई दिल्ली।हिंदी सिनेमा के इतिहास में जिस फिल्म ने ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ के नारे को घर-घर तक पहुँचाया, उस कल्ट क्लासिक फिल्म के सीक्वल की चर्चा एक बार फिर फिजाओं में तैर रही है। करीब तीन दशक पहले रिलीज हुई ‘खलनायक’ ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े थे, बल्कि संजय दत्त के करियर को एक ऐसी नई पहचान दी थी जिसने एंटी-हीरो किरदारों की परिभाषा ही बदल दी। अब तीस साल के लंबे अंतराल के बाद संजय दत्त ने खुद अपनी इस यादगार फिल्म के सीक्वल का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इस खबर के आते ही प्रशंसकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है, लेकिन इसी बीच एक अहम जानकारी सामने आई है कि फिल्म के मूल रचयिता सुभाष घई इस बार निर्देशन की कुर्सी पर नजर नहीं आएंगे। खलनायक के सीक्वल से लौटेगा बल्लू बलराम का खौफ; संजय दत्त की जिद पर सुभाष घई ने तैयार की कहानी, इस बड़े फैसले के पीछे की वजहें बेहद भावनात्मक और पेशेवर हैं। बताया जा रहा है कि संजय दत्त इस प्रोजेक्ट को लेकर वर्षों से खासे उत्साहित थे। उनकी यह इच्छा इतनी प्रबल थी कि जेल में रहने के दौरान भी उन्होंने पत्र लिखकर इस कहानी को आगे बढ़ाने की बात कही थी। संजय दत्त के प्रति पिता जैसा स्नेह रखने वाले सुभाष घई ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी सहमति तो दे दी है और फिल्म की मूल अवधारणा व पटकथा भी तैयार कर ली है, लेकिन वे अब इस विरासत को किसी नई दृष्टि के साथ विकसित होते देखना चाहते हैं। अस्सी वर्ष की आयु में सुभाष घई ने अब निर्देशन के चुनौतीपूर्ण कार्य से दूरी बनाने का फैसला किया है, हालांकि फिल्म के रचनात्मक पक्ष पर उनकी पकड़ पहले की तरह ही बनी रहेगी। फिल्म के इस दूसरे भाग में सुभाष घई एक मार्गदर्शक और ‘क्रिएटिव प्रोड्यूसर’ की भूमिका में नजर आएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भले ही वे कैमरे के पीछे निर्देशक के रूप में न हों, लेकिन फिल्म के निर्माण के हर पड़ाव पर वे संजय दत्त के साथ खड़े रहेंगे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने फिल्म में एक छोटा सा कैमियो करने की इच्छा भी जताई है, जो पुरानी यादों को ताजा करने का काम करेगा। 1993 में आई पहली फिल्म ने जो बेंचमार्क सेट किया था, उसे पार करना किसी भी नए निर्देशक के लिए बड़ी चुनौती होगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुभाष घई की सरपरस्ती में संजय दत्त का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट किस तरह पर्दे पर उतरता है और ‘खलनायक’ की इस विरासत को कौन आगे ले जाता है।

Madhya Pradesh Agriculture: किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त टली, 85 लाख किसानों को अब मई का इंतजार

Madhya Pradesh Agriculture:  मध्य प्रदेश के लाखों किसानों के लिए किसान कल्याण योजना की अगली किस्त का इंतजार और लंबा हो गया है। राज्य के करीब 85 लाख किसान इस योजना के तहत मिलने वाली 14वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब यह साफ होता दिख रहा है कि भुगतान की तारीख आगे खिसक गई है। पहले उम्मीद की जा रही थी कि किसानों के खातों में यह राशि अप्रैल महीने में किसी विशेष अवसर या त्योहार के आसपास पहुंच जाएगी। लेकिन महीने के अंत तक भी कोई आधिकारिक संकेत न मिलने से किसानों की उम्मीदों को झटका लगा है। अब माना जा रहा है कि यह भुगतान मई महीने में किया जा सकता है। इस देरी के पीछे मुख्य कारण प्रशासनिक प्रक्रियाओं और डेटा सत्यापन को बताया जा रहा है। लाभार्थियों की सूची को अंतिम रूप देने और बैंकिंग प्रक्रिया को पूरा करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। इसी वजह से किस्त जारी करने की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित हो गई है और इसे अगले महीने तक आगे बढ़ा दिया गया है। किसानों के बीच अब यह भी चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस बार दो किस्तों की राशि एक साथ जारी की जा सकती है। अगर सरकार ऐसा निर्णय लेती है, तो किसानों को 2000 रुपये की बजाय 4000 रुपये तक की राशि एक साथ मिल सकती है। खेती के महत्वपूर्ण सीजन को देखते हुए यह राशि किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, क्योंकि इस समय बीज, खाद और अन्य कृषि खर्चों में तेजी से बढ़ोतरी होती है। इस योजना के तहत किसानों को हर साल कुल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन बराबर किस्तों में उनके बैंक खातों में सीधे भेजी जाती है। यह सहायता केंद्र की किसान सम्मान निधि योजना के अतिरिक्त होती है, जिससे किसानों को कुल मिलाकर एक निश्चित आर्थिक सहारा मिलता है। हालांकि इस बार की देरी ने किसानों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि प्रक्रिया पूरी होते ही भुगतान जल्द जारी कर दिया जाएगा। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट रखें, ताकि किसी भी तकनीकी समस्या की वजह से भुगतान अटक न जाए। विशेष रूप से यह भी जरूरी बताया जा रहा है कि आधार लिंकिंग और डीबीटी सुविधा सक्रिय हो, क्योंकि इन्हीं तकनीकी प्रक्रियाओं के जरिए राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जाती है। कई बार मामूली गलतियों के कारण भी भुगतान में देरी हो जाती है। फिलहाल किसानों की नजर अब मई महीने पर टिकी हुई है, जब इस किस्त के जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह इंतजार भले ही थोड़ा लंबा हो गया हो, लेकिन किसानों को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें उनकी लंबित राशि प्राप्त हो जाएगी और खेती के कामों में उन्हें राहत मिलेगी।

BJP Congress contest: गुजरात राजनीति में चर्चा का केंद्र बना जडेजा परिवार: नयनाबा की हार, रिवाबा की भूमिका पर सवाल

BJP Congress contest: नई दिल्ली। गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में इस बार नतीजों से ज्यादा चर्चा एक खास पारिवारिक कहानी की रही। राजकोट में हुए चुनाव ने राजनीतिक मुकाबले के साथ-साथ रिश्तों के बीच की दूरी को भी सुर्खियों में ला दिया। भारतीय क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की बहन नयनाबा जडेजा इस चुनाव में मैदान में थीं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। नयनाबा जडेजा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत इस चुनाव से की थी और उम्मीद की जा रही थी कि उनकी पहचान उन्हें बढ़त दिलाएगी। लेकिन मतदान के बाद सामने आए नतीजों ने उनके पक्ष में माहौल नहीं बनाया और उन्हें पराजय स्वीकार करनी पड़ी। इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि यह मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं था, बल्कि परिवार के भीतर भी विचारधारा की अलग राहें साफ दिखाई दीं। एक तरफ नयनाबा अपने राजनीतिक अभियान में सक्रिय थीं, वहीं दूसरी ओर रिवाबा जडेजा की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज रहीं, जिससे यह सीट और अधिक सुर्खियों में आ गई। राजकोट क्षेत्र में पहले से ही राजनीतिक मुकाबला कड़ा माना जाता है, और इस बार भी परिणामों ने यह साफ कर दिया कि यहां मतदाता स्थानीय समीकरणों को प्राथमिकता देते हैं। पार्टी स्तर पर भी इस सीट पर कड़ा संघर्ष देखने को मिला, लेकिन अंत में विजेता पक्ष ने बढ़त हासिल कर ली। नतीजों के बाद नयनाबा जडेजा ने जनता के फैसले को स्वीकार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार दोनों सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने आगे भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने की बात कही। यह पूरा घटनाक्रम इस बात का उदाहरण बन गया कि राजनीति में केवल नाम या पहचान ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि जमीनी स्तर पर जुड़ाव और संगठन की मजबूती भी निर्णायक भूमिका निभाती है। साथ ही, जब परिवार के सदस्य अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं में बंट जाते हैं, तो चुनावी मुकाबला और भी भावनात्मक और चर्चित हो जाता है।