Madhya Pradesh Agriculture: किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त टली, 85 लाख किसानों को अब मई का इंतजार

Madhya Pradesh Agriculture: मध्य प्रदेश के लाखों किसानों के लिए किसान कल्याण योजना की अगली किस्त का इंतजार और लंबा हो गया है। राज्य के करीब 85 लाख किसान इस योजना के तहत मिलने वाली 14वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब यह साफ होता दिख रहा है कि भुगतान की तारीख आगे खिसक गई है। पहले उम्मीद की जा रही थी कि किसानों के खातों में यह राशि अप्रैल महीने में किसी विशेष अवसर या त्योहार के आसपास पहुंच जाएगी। लेकिन महीने के अंत तक भी कोई आधिकारिक संकेत न मिलने से किसानों की उम्मीदों को झटका लगा है। अब माना जा रहा है कि यह भुगतान मई महीने में किया जा सकता है। इस देरी के पीछे मुख्य कारण प्रशासनिक प्रक्रियाओं और डेटा सत्यापन को बताया जा रहा है। लाभार्थियों की सूची को अंतिम रूप देने और बैंकिंग प्रक्रिया को पूरा करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। इसी वजह से किस्त जारी करने की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित हो गई है और इसे अगले महीने तक आगे बढ़ा दिया गया है। किसानों के बीच अब यह भी चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस बार दो किस्तों की राशि एक साथ जारी की जा सकती है। अगर सरकार ऐसा निर्णय लेती है, तो किसानों को 2000 रुपये की बजाय 4000 रुपये तक की राशि एक साथ मिल सकती है। खेती के महत्वपूर्ण सीजन को देखते हुए यह राशि किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, क्योंकि इस समय बीज, खाद और अन्य कृषि खर्चों में तेजी से बढ़ोतरी होती है। इस योजना के तहत किसानों को हर साल कुल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन बराबर किस्तों में उनके बैंक खातों में सीधे भेजी जाती है। यह सहायता केंद्र की किसान सम्मान निधि योजना के अतिरिक्त होती है, जिससे किसानों को कुल मिलाकर एक निश्चित आर्थिक सहारा मिलता है। हालांकि इस बार की देरी ने किसानों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि प्रक्रिया पूरी होते ही भुगतान जल्द जारी कर दिया जाएगा। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट रखें, ताकि किसी भी तकनीकी समस्या की वजह से भुगतान अटक न जाए। विशेष रूप से यह भी जरूरी बताया जा रहा है कि आधार लिंकिंग और डीबीटी सुविधा सक्रिय हो, क्योंकि इन्हीं तकनीकी प्रक्रियाओं के जरिए राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जाती है। कई बार मामूली गलतियों के कारण भी भुगतान में देरी हो जाती है। फिलहाल किसानों की नजर अब मई महीने पर टिकी हुई है, जब इस किस्त के जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह इंतजार भले ही थोड़ा लंबा हो गया हो, लेकिन किसानों को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें उनकी लंबित राशि प्राप्त हो जाएगी और खेती के कामों में उन्हें राहत मिलेगी।
BJP Congress contest: गुजरात राजनीति में चर्चा का केंद्र बना जडेजा परिवार: नयनाबा की हार, रिवाबा की भूमिका पर सवाल

BJP Congress contest: नई दिल्ली। गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में इस बार नतीजों से ज्यादा चर्चा एक खास पारिवारिक कहानी की रही। राजकोट में हुए चुनाव ने राजनीतिक मुकाबले के साथ-साथ रिश्तों के बीच की दूरी को भी सुर्खियों में ला दिया। भारतीय क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की बहन नयनाबा जडेजा इस चुनाव में मैदान में थीं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। नयनाबा जडेजा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत इस चुनाव से की थी और उम्मीद की जा रही थी कि उनकी पहचान उन्हें बढ़त दिलाएगी। लेकिन मतदान के बाद सामने आए नतीजों ने उनके पक्ष में माहौल नहीं बनाया और उन्हें पराजय स्वीकार करनी पड़ी। इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि यह मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं था, बल्कि परिवार के भीतर भी विचारधारा की अलग राहें साफ दिखाई दीं। एक तरफ नयनाबा अपने राजनीतिक अभियान में सक्रिय थीं, वहीं दूसरी ओर रिवाबा जडेजा की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज रहीं, जिससे यह सीट और अधिक सुर्खियों में आ गई। राजकोट क्षेत्र में पहले से ही राजनीतिक मुकाबला कड़ा माना जाता है, और इस बार भी परिणामों ने यह साफ कर दिया कि यहां मतदाता स्थानीय समीकरणों को प्राथमिकता देते हैं। पार्टी स्तर पर भी इस सीट पर कड़ा संघर्ष देखने को मिला, लेकिन अंत में विजेता पक्ष ने बढ़त हासिल कर ली। नतीजों के बाद नयनाबा जडेजा ने जनता के फैसले को स्वीकार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार दोनों सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने आगे भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने की बात कही। यह पूरा घटनाक्रम इस बात का उदाहरण बन गया कि राजनीति में केवल नाम या पहचान ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि जमीनी स्तर पर जुड़ाव और संगठन की मजबूती भी निर्णायक भूमिका निभाती है। साथ ही, जब परिवार के सदस्य अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं में बंट जाते हैं, तो चुनावी मुकाबला और भी भावनात्मक और चर्चित हो जाता है।
Budhwar Puja Vidhi: धन, सौभाग्य और सफलता के लिए जरूर अपनाएं ये 5 नियम, वरना रुक सकती है किस्मत

Budhwar Puja Vidhi: नई दिल्ली| हिंदू धर्म में बुधवार का दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश और बुध ग्रह की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से न केवल बुद्धि का विकास होता है, बल्कि व्यापार, करियर और जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सफलता के रास्ते खुलते हैं। लेकिन अगर पूजा के दौरान छोटी-सी भी गलती हो जाए, तो इसका प्रभाव आपके भाग्य पर पड़ सकता है। इसलिए बुधवार की पूजा पूरी श्रद्धा और सही नियमों के साथ करना बेहद जरूरी है। बुधवार के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ और विशेष रूप से हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित कर उन्हें दूर्वा, मोदक और हरी मूंग अर्पित करें। घी और गुड़ का भोग लगाना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इन चीजों से गणेश जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि, बुद्धि और सफलता का आशीर्वाद देते हैं। हालांकि पूजा के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है। सबसे पहली बात, इस दिन काले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। इसके अलावा भगवान गणेश को कभी भी तुलसी पत्र अर्पित नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह पूजा में वर्जित माना गया है। साथ ही पूजा में टूटे हुए चावल यानी अक्षत का उपयोग न करें, बल्कि साबुत और स्वच्छ अक्षत ही चढ़ाएं। इसके अलावा चंदन, सफेद फूल या सफेद वस्त्र भी गणेश जी को अर्पित नहीं करने चाहिए। केतकी के फूल भी इस पूजा में निषिद्ध माने गए हैं। ध्यान रखें कि पूजा में कभी भी सूखे या मुरझाए फूलों का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे पूजा का प्रभाव कम हो सकता है। पूजा के बाद दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है। बुधवार की पूजा का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि मानसिक, बौद्धिक और आर्थिक उन्नति भी है। कहा जाता है कि इस दिन की गई सच्चे मन से पूजा व्यक्ति की सोच, बोलचाल और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाती है। साथ ही कुंडली में बुध ग्रह के दोष भी शांत होते हैं, जिससे जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं। अगर आप भी जीवन में सफलता, धन और सौभाग्य पाना चाहते हैं, तो बुधवार की पूजा को हल्के में न लें। सही विधि और नियमों के साथ की गई पूजा आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।
Amrit Bharat Express: यात्रियों के लिए नई राहत: अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई ट्रेनें शुरू, उत्तर से महाराष्ट्र तक सीधी कनेक्टिविटी

Amrit Bharat Express: नई दिल्ली। भारतीय रेल ने यात्रियों को बड़ी सुविधा देते हुए अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई सेवाओं की शुरुआत की है, जो उत्तर भारत और महाराष्ट्र के बीच यात्रा को अधिक आसान और किफायती बनाएंगी। नई ट्रेन सेवाएं अयोध्या से मुंबई और वाराणसी से पुणे के बीच चलाई जा रही हैं, जिससे लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इन ट्रेनों के शुरू होने से लंबे समय से प्रतीक्षित सीधी कनेक्टिविटी अब साकार हो गई है। विशेष रूप से वाराणसी से पुणे तक चलने वाली ट्रेन उत्तर भारत और महाराष्ट्र के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए एक सुविधाजनक विकल्प बनकर उभरेगी। यह ट्रेन अपने मार्ग में कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहराव करेगी, जिससे विभिन्न शहरों के यात्रियों को भी इसका लाभ मिल सकेगा। इसी तरह अयोध्या से मुंबई के बीच शुरू की गई ट्रेन धार्मिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। यह सेवा राम मंदिर अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को सरल बनाएगी, वहीं मुंबई जैसे बड़े महानगर तक सीधी पहुंच भी उपलब्ध कराएगी। नई सेवाओं के संचालन के साथ रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग, तीर्थ स्थलों की लोकप्रियता और राज्यों के बीच बढ़ते आवागमन को ध्यान में रखा है। इन ट्रेनों के रूट ऐसे चुने गए हैं, जो प्रमुख शहरों और महत्वपूर्ण जंक्शनों को जोड़ते हैं, जिससे यात्रा समय और लागत दोनों में कमी आएगी। इस पहल का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। छोटे व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और छात्रों के लिए यह कनेक्टिविटी नई संभावनाएं लेकर आएगी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
BAHUBALI 2: सिनेमा का सबसे विशाल सेट: बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन के महिष्मती राज्य ने रचा इतिहास

BAHUBALI 2: नई दिल्ली। भारतीय फिल्म जगत में बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन एक ऐसी ऐतिहासिक फिल्म के रूप में जानी जाती है, जिसने अपने शानदार निर्माण और विशालता से एक नया मानक स्थापित किया। इस फिल्म की सफलता के पीछे केवल कहानी या अभिनय ही नहीं, बल्कि इसकी भव्य प्रस्तुति और विशाल सेट भी बड़ी वजह रहे। फिल्म में दिखाया गया महिष्मती साम्राज्य वास्तव में एक कल्पनात्मक दुनिया था, जिसे बेहद वास्तविक रूप देने के लिए विशाल स्तर पर निर्माण कार्य किया गया। हैदराबाद के प्रसिद्ध रामोजी फिल्म सिटी में करीब 100 एकड़ क्षेत्र में इस सेट को तैयार किया गया। इस भव्य सेट को खड़ा करने में लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च हुए और 500 से अधिक लोगों ने मिलकर इसे तैयार किया। इस विशाल प्रोजेक्ट के पीछे कला निर्देशक साबू सिरिल और उनकी टीम की अहम भूमिका रही। उन्होंने हर एक संरचना, महल और युद्धस्थल को इस तरह डिजाइन किया कि वह पर्दे पर पूरी तरह जीवंत नजर आए। सेट की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे दर्शकों को एक वास्तविक साम्राज्य का अनुभव मिल सके। फिल्म की शूटिंग केवल स्टूडियो तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई महत्वपूर्ण दृश्यों को प्राकृतिक लोकेशनों पर भी फिल्माया गया। केरल के प्रसिद्ध अथिरप्पिल्ली जलप्रपात जैसे स्थानों पर शूट किए गए दृश्य फिल्म की खूबसूरती और भव्यता को और बढ़ाते हैं। खासकर झरनों के आसपास फिल्माए गए सीन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने। एक रोचक तथ्य यह भी है कि फिल्म के पहले भाग की शूटिंग के दौरान ही दूसरे भाग के कुछ हिस्सों को पहले ही शूट कर लिया गया था। इससे फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया गया और समय की बचत भी हुई। बाद में शेष हिस्सों को पूरी सावधानी और सुरक्षा के साथ पूरा किया गया। फिल्म की लोकप्रियता इतनी अधिक रही कि इससे जुड़ी चीजों को संरक्षित रखने के लिए एक विशेष संग्रहालय भी बनाया गया, जहां फिल्म में इस्तेमाल किए गए हथियार, कवच और सेट के हिस्से आज भी सुरक्षित रखे गए हैं। यहां आने वाले लोग उस भव्य दुनिया को करीब से महसूस कर सकते हैं, जिसे उन्होंने पर्दे पर देखा था। इस तरह बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन ने यह साबित कर दिया कि अगर कल्पना, तकनीक और मेहनत का सही तालमेल हो, तो सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक भव्य अनुभव भी बन सकता है।
Virat Kohli: गुरु को सम्मान, युवाओं को संदेश: Virat Kohli ने किया नए क्रिकेट हब का शुभारंभ..

Virat Kohli: नई दिल्ली में एक खास अवसर देखने को मिला, जब भारतीय क्रिकेट के स्टार बल्लेबाज Virat Kohli ने अपने शुरुआती क्रिकेट सफर से जुड़े एक अहम पड़ाव को फिर से जिया। उन्होंने अपने बचपन के कोच Rajkumar Sharma की क्रिकेट अकादमी के नए ब्रांच का उद्घाटन किया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसमें भावनाएं, यादें और प्रेरणा तीनों का संगम देखने को मिला। इस नए प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत के साथ ही स्थानीय युवा खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाओं का रास्ता खुल गया है। यहां आधुनिक संसाधनों और अनुभवी मार्गदर्शन के जरिए उभरते क्रिकेटरों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान कई लोग मौजूद रहे, जिससे इस पहल की अहमियत साफ नजर आई। मौके पर मौजूद छात्रों से बातचीत करते हुए कोहली ने अपने जीवन के शुरुआती अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने कम उम्र में ही क्रिकेट को लेकर अपनी सोच स्पष्ट कर ली थी और उसी दिशा में पूरी लगन से काम करना शुरू कर दिया था। उनके अनुसार, जीवन में लक्ष्य तय करना और उसके प्रति ईमानदार रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों को यह भी समझाया कि स्कूल का समय केवल पढ़ाई के लिए नहीं होता, बल्कि यह वह दौर होता है जहां इंसान अपने व्यक्तित्व को आकार देता है। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि छात्रों को अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और ध्यान बनाए रखना चाहिए, क्योंकि वही उन्हें सही दिशा दिखाते हैं। अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कोहली ने बताया कि उन्होंने बहुत छोटी उम्र से ही नियमित अभ्यास शुरू कर दिया था। इस अकादमी के साथ उनका गहरा जुड़ाव रहा है और आज भी जब समय मिलता है, वह यहां आकर अपने पुराने दिनों को याद करते हैं। उनके लिए यह जगह केवल अभ्यास का मैदान नहीं, बल्कि उनके सपनों की शुरुआत का केंद्र है। उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने क्रिकेट को अपने करियर के रूप में चुनने का फैसला लिया, तब उन्होंने अपने परिवार और शिक्षकों से पूरी ईमानदारी के साथ यह बात साझा की। यही पारदर्शिता और समर्पण आगे चलकर उनके सफल करियर की नींव बनी। इस नए ब्रांच के शुरू होने से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यहां से कई नए खिलाड़ी निकलेंगे, जो क्रिकेट के क्षेत्र में अपना नाम बनाएंगे। कार्यक्रम के अंत में कोहली ने सभी युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अगर वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहेंगे, तो सफलता जरूर मिलेगी। यह आयोजन न केवल एक नई शुरुआत का प्रतीक बना, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि कड़ी मेहनत, सही मार्गदर्शन और स्पष्ट लक्ष्य के साथ कोई भी अपने सपनों को हकीकत में बदल सकता है।
Sheopur development project: श्योपुर में विकास की रफ्तार तेज, 3 करोड़ की चौपाटी समेत 20 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स भूमिपूजन

HIGHLIGHTS : बाईपास रोड पर 3 करोड़ से बनेगी चौपाटी 20 करोड़ से ज्यादा के विकास कार्यों की शुरुआत जय स्तंभ और सामुदायिक भवन का उद्घाटन लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी बड़े नेताओं की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम Sheopur development project: ग्वालियर। श्योपुर शहर में विकास को नई गति देने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नरेंद्र सिंह तोमर ने बाईपास रोड पर करीब 3 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली चौपाटी का भूमिपूजन किया। यह चौपाटी शहरवासियों के लिए घूमने-फिरने और मनोरंजन का नया केंद्र बनेगी। गंगा एक्सप्रेसवे पर तैयार हो रहा हाई-इंसेंटिव मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर.. 20 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ नगर पालिका द्वारा 20 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों की शुरुआत और लोकार्पण किया गया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत लगभग 19.87 करोड़ रुपए की लागत से लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया, जिससे शहर में गंदे पानी के निपटारे और सफाई व्यवस्था में सुधार होगा। 1 से 30 मई तक बीजेपी का मेगा प्रशिक्षण अभियान ,नई कार्यसमिति जल्द राम नगरी ओरछा में होगी अहम बैठक सामुदायिक भवन और स्मारकों की सौगात कार्यक्रम के दौरान वार्ड नंबर 12 में 10 लाख रुपए की लागत से बने सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया गया। इसके अलावा 25 लाख रुपए से बने जय स्तंभ और वैरवा समाज के सामुदायिक भवन का उद्घाटन भी हुआ। साथ ही पुल दरवाजा क्षेत्र में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया। उज्जैन यूनिवर्सिटी में दहशत का साया नई बिल्डिंग पर लिखी धमकी ने बढ़ाई चिंता सुरक्षा पर उठे सवाल जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी, लोगों में उत्साह इस अवसर पर सांसद शिवमंगल सिंह तोमर, रामनिवास रावत, पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया और शहर के विकास कार्यों को लेकर लोगों में काफी उत्साह दिखाई दिया।
AMIT SHAH SOMNATH VISIT: सोमनाथ दौरे पर अमित शाह, पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और सामाजिक पहलों की शुरुआत

AMIT SHAH SOMNATH VISIT: नई दिल्ली। गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ धाम में एक विशेष धार्मिक अवसर देखने को मिला, जब देश के गृह मंत्री अमित शाह ने यहां पहुंचकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी उपस्थित रहे। मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। ध्वजा पूजा, तग पूजा और महापूजा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने अपनी आस्था प्रकट की। इस दौरान एक विशेष भेंट भी अर्पित की गई, जो भारतीय परंपरा और ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित थी। इस पूरे आयोजन ने मंदिर की प्राचीन परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। पूजा के बाद मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराने की परंपरा भी निभाई गई, जिसे अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान मंदिर प्रशासन द्वारा उनका स्वागत किया गया और उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह पूरा दृश्य श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस अवसर पर एक विशेष धार्मिक आयोजन की शुरुआत भी की गई, जिसमें भक्तों को भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस आयोजन के तहत भगवान शिव का अभिषेक पंचामृत, दूध और अन्य पवित्र सामग्री से किया जाएगा। साथ ही वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच पूजा संपन्न होगी। इसमें गौ-पूजा, ब्राह्मण भोजन और अन्य पारंपरिक अनुष्ठान भी शामिल किए गए हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक और ज्ञानवर्धक पहल भी इस मौके पर शुरू की गई। इसके तहत एक डिजिटल माध्यम के जरिए प्राचीन भारतीय ज्ञान और परंपराओं को लोगों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और उन्हें भारतीय परंपरा के महत्व से अवगत कराना है। इसके अलावा, सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए जरूरतमंद लोगों के लिए एक विशेष पहल भी की गई। स्वास्थ्य से जुड़ी इस पहल के अंतर्गत पोषण सामग्री का वितरण किया गया, जिससे जरूरतमंदों को सहायता मिल सके। यह कदम दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ समाज सेवा को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में आस्था, संस्कृति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। यह दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं रहा, बल्कि इसमें समाज और संस्कृति के प्रति समर्पण का व्यापक संदेश भी निहित था, जिसे वहां मौजूद लोगों ने गहराई से अनुभव किया।
Gujrat copper bell art : गुजरात की विरासत ने जीता दुनिया का दिल, कच्छ की तांबे की घंटियां अब विदेशों में भी लोकप्रिय

Gujrat copper bell art : नई दिल्ली। गुजरात के कच्छ क्षेत्र की पारंपरिक कॉपर बेल कला आज अपनी सीमाओं को पार करते हुए वैश्विक पहचान हासिल कर रही है। पीढ़ियों से चली आ रही यह हस्तकला अब केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी खास जगह बना चुकी है। कच्छ के गांवों में रहने वाले कारीगर इस परंपरा को आज भी पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। कॉपर बेल बनाने की प्रक्रिया बेहद मेहनत और कौशल से जुड़ी होती है। इसमें सबसे पहले धातु की शीट से घंटी का ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद उस पर तांबे या पीतल की परत चढ़ाई जाती है और फिर इसे भट्टी में पकाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद घंटियों को अंतिम आकार दिया जाता है और उनमें एक विशिष्ट ध्वनि उत्पन्न की जाती है, जो इन्हें खास बनाती है। इस कला की खास बात यह है कि इसमें परिवार के सभी सदस्य शामिल होते हैं। अलग-अलग चरणों में सभी अपनी भूमिका निभाते हैं, जिससे यह केवल एक काम नहीं बल्कि पारिवारिक परंपरा का हिस्सा बन जाता है। समय के साथ कारीगरों ने इसमें नए डिजाइन और आधुनिक रूप भी शामिल किए हैं, जिससे इसकी मांग और अधिक बढ़ गई है। AMIT SHAH SOMNATH VISIT: सोमनाथ दौरे पर अमित शाह, पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और सामाजिक पहलों की शुरुआत पहले ये घंटियां मुख्य रूप से पशुओं के गले में बांधने के लिए बनाई जाती थीं, लेकिन अब इनका उपयोग सजावट के रूप में भी व्यापक रूप से होने लगा है। घरों, होटलों और विभिन्न आयोजनों में इनका उपयोग बढ़ने से इनकी उपयोगिता और लोकप्रियता दोनों में इजाफा हुआ है। सरकारी सहयोग और योजनाओं के चलते इस पारंपरिक कला को नई दिशा मिली है। नए डिजाइनों और तकनीकों के जरिए इसे आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा है। इससे कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूती मिल रही है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। जीआई टैग मिलने के बाद इस कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। अब कच्छ की कॉपर बेल्स अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में निर्यात की जा रही हैं, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इस बढ़ती लोकप्रियता ने न केवल कच्छ की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूती दी है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। आज यह कला भारत की पारंपरिक विरासत का एक ऐसा उदाहरण बन चुकी है, जो वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना रही है।
Ganga Expressway: गंगा एक्सप्रेसवे पर तैयार हो रहा हाई-इंसेंटिव मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर..

Ganga Expressway: नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बनाए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स अब तेजी से एक बड़े निवेश केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। यह पूरा क्षेत्र अब सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं रहा, बल्कि इसे एक हाई-इंसेंटिव इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में तैयार किया जा रहा है। इस क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्योगों के लिए सरकार की ओर से कई स्तरों पर आर्थिक लाभ दिए जा रहे हैं। इसमें पूंजी निवेश पर आकर्षक सब्सिडी, टैक्स में छूट और अन्य वित्तीय प्रोत्साहन शामिल हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य उद्योग स्थापित करने की लागत को कम करना और निवेशकों के लिए माहौल को अधिक अनुकूल बनाना है। Sheopur development project: श्योपुर में विकास की रफ्तार तेज, 3 करोड़ की चौपाटी समेत 20 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स भूमिपूजन भूमि आवंटन और उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। निवेशकों को कम कागजी प्रक्रिया और तेज मंजूरी व्यवस्था का लाभ मिल रहा है, जिससे प्रोजेक्ट जल्दी शुरू हो सके। इसके साथ ही विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए भी विशेष रियायतों का प्रावधान किया गया है। ऊर्जा क्षेत्र में भी उद्योगों को राहत दी जा रही है। कुछ श्रेणियों के निवेशकों को निर्धारित अवधि तक बिजली शुल्क में छूट दी जा रही है, जिससे उनके संचालन खर्च में कमी आए। इसके अलावा पर्यावरण के अनुकूल उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं। नवाचार और तकनीकी विकास को मजबूत करने के लिए अनुसंधान आधारित परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत नए विचारों और आधुनिक तकनीकों को अपनाने वाले उद्योगों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। निवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाने के लिए एक डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है, जहां सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। इससे निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और समय की बचत होती है। इन सभी प्रयासों के चलते गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास का क्षेत्र तेजी से एक आधुनिक औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभर रहा है, जो आने वाले समय में राज्य की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा सकता है।