केरल में 8 जहरीले सांपों और किंग कोबरा के लिए नहीं है खास एंटीवेनम, इलाज बना चुनौती

नई दिल्ली। केरल में सांप काटने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में पाए जाने वाले आठ प्रमुख विषैले सांपों और किंग कोबरा के लिए कोई विशेष एंटीवेनम उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से डॉक्टरों को मरीजों का इलाज केवल लक्षणों के आधार पर करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिट वाइपर प्रजाति के सांप इस समस्या के केंद्र में हैं। इनमें कूबड़दार नाक वाला पिट वाइपर (हाइपनेल हाइपनेल) सबसे खतरनाक माना जाता है, जो जंगलों, रबर बागानों और खेतों में आमतौर पर पाया जाता है। यह केरल में सांप काटने के लगभग 25 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार बताया जाता है और इसकी मृत्यु दर भी अधिक है। इलाज सीमित, चुनौतियां बड़ी फिलहाल इन मामलों में इलाज डायलिसिस और प्लाज्मा थेरेपी जैसे तरीकों से लक्षण नियंत्रित करने तक सीमित है। स्वास्थ्य और वन विभाग लंबे समय से स्थानीय एंटीवेनम विकसित करने की सिफारिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस प्रगति नहीं हो पाई है। केरल में पाए जाने वाले प्रमुख विषैले सांप राज्य में मालाबार पिट वाइपर की विभिन्न किस्में, हॉर्सशू पिट वाइपर की दो प्रजातियां, बांस पिट वाइपर और बड़े आकार के पिट वाइपर जैसे सांप पाए जाते हैं। इनमें से कई प्रजातियां राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में फैली हुई हैं और इनके काटने के मामले सामने आते रहते हैं। किंग कोबरा और कोरल स्नेक पर भी संकट रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किंग कोबरा के लिए भारत में कोई स्वदेशी एंटीवेनम उपलब्ध नहीं है। असम में एक उत्पादन केंद्र पहले मौजूद था, लेकिन कम मांग के कारण उसे बंद कर दिया गया। इसी तरह पश्चिमी घाट में पाए जाने वाले कोरल स्नेक के लिए भी कोई एंटीवेनम विकसित नहीं किया गया है। वर्तमान में भारत में बहुसंयोजक (मल्टी-वैलेंट) एंटीवेनम चेन्नई से एकत्र किए गए विष के आधार पर तैयार किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केरल की स्थानीय सांप प्रजातियों के अनुसार अलग एंटीवेनम तैयार करना जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो राज्य में सांप काटने से होने वाली मौतों का खतरा और बढ़ सकता है।
71 की उम्र में भी फिटनेस का जलवा, अनुपम खेर की जिम मेहनत ने सबको चौंकाया..

नई दिल्ली। कई लोग 70 की उम्र के बाद जीवन को आराम और सीमित गतिविधियों तक समेट लेते हैं, लेकिन अनुपम खेर इस सोच को पूरी तरह बदलते नजर आते हैं। 71 वर्ष की उम्र में भी वे जिस तरह से खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रखे हुए हैं, वह लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है। हाल ही में उनका एक जिम वीडियो सामने आया, जिसमें उनकी फिटनेस और ऊर्जा ने सभी का ध्यान खींच लिया। इस वीडियो में वे पूरी लगन के साथ व्यायाम करते दिखाई देते हैं। उनका अंदाज़ यह दर्शाता है कि वे फिटनेस को केवल एक शौक नहीं, बल्कि जीवन का जरूरी हिस्सा मानते हैं। वर्कआउट के दौरान उनकी एकाग्रता और निरंतरता यह साबित करती है कि उन्होंने अनुशासन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है। अनुपम खेर का मानना है कि शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उनके अनुसार नियमित व्यायाम न केवल शरीर को मजबूत करता है, बल्कि मन को भी शांत और स्थिर बनाता है। यही कारण है कि वे हर परिस्थिति में अपनी फिटनेस रूटीन को प्राथमिकता देते हैं। कई बार जब सामान्य रूप से मन व्यायाम करने का नहीं होता, तब भी वे खुद को प्रेरित करते हैं और अभ्यास जारी रखते हैं। उनका यह दृष्टिकोण दिखाता है कि असली अनुशासन वही है जो बिना मन के भी जिम्मेदारी को निभाए। इसी वजह से उनकी फिटनेस यात्रा लोगों के लिए एक मजबूत संदेश बन चुकी है। उनकी यह सक्रिय जीवनशैली केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक मजबूती और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच को भी दर्शाती है। वे अक्सर अपने अनुभवों के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि जीवन में निरंतरता और सकारात्मकता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उनका यह भी मानना है कि जब कोई व्यक्ति अपने अनुशासन और प्रयासों से दूसरों को प्रेरित करने लगता है, तो उसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। इसी सोच के साथ वे अपनी फिटनेस यात्रा को साझा करते हैं ताकि लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो सकें। फिलहाल अनुपम खेर अपने थिएटर और अन्य रचनात्मक प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपने फिटनेस रूटीन से समझौता नहीं करते। उनकी यह जीवनशैली यह साबित करती है कि उम्र कभी भी सक्रियता और सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती, अगर व्यक्ति में इच्छाशक्ति और अनुशासन मजबूत हो।
राम-लक्ष्मण से कम, रावण से ज्यादा बातचीत: दीपिका चिखलिया ने बताए ‘रामायण’ सेट के किस्से

नई दिल्ली।भारतीय टेलीविजन के इतिहास में रामायण एक ऐसा सीरियल रहा है, जिसने दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी। इस सीरियल में मां सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया आज भी उसी भूमिका के कारण पहचानी जाती हैं। उनका कहना है कि इस किरदार ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया, लेकिन इसके पीछे कई ऐसे अनुभव भी रहे, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। दीपिका चिखलिया ने बताया कि जब उन्हें सीता के किरदार के लिए चुना गया, तो यह उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ था। ऑडिशन की प्रक्रिया लंबी और प्रतिस्पर्धी थी, जहां कई राउंड के बाद उनका चयन हुआ। उस समय यह अंदाजा नहीं था कि यह किरदार उन्हें इतनी बड़ी पहचान दिला देगा। सेट पर माहौल काफी अनुशासित रहता था। हर कलाकार अपने किरदार में इतना डूबा रहता था कि आपसी बातचीत सीमित हो जाती थी। अरुण गोविल और अन्य सह-कलाकारों के साथ उनका संवाद औपचारिक और कम ही होता था, क्योंकि सभी अपनी भूमिकाओं की गंभीरता को बनाए रखते थे। उन्होंने यह भी बताया कि सेट पर अपेक्षाकृत अधिक बातचीत अरविंद त्रिवेदी से होती थी, जिन्होंने रावण का किरदार निभाया था। हालांकि यह बातचीत भी सीमित दायरे में ही रहती थी और उसमें निजी संबंधों की गहराई नहीं बन पाई। सीरियल के प्रसारण के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। लोग उन्हें वास्तविक जीवन में भी देवी स्वरूप मानने लगे। कई बार सार्वजनिक जगहों पर लोग उनके चरण स्पर्श करते, आरती करते और फूल अर्पित करते नजर आते थे। यह लोकप्रियता उनके लिए जितनी सम्मानजनक थी, उतनी ही असामान्य भी साबित हुई। एक अनुभव के दौरान उन्हें ऐसी स्थिति का भी सामना करना पड़ा जहां लोगों की आस्था के कारण सामान्य जीवन प्रभावित हुआ और भोजन जैसी बुनियादी चीजों में भी कठिनाई आ गई। यह उनके लिए भावनात्मक रूप से एक अलग और यादगार अनुभव था। इस पूरी यात्रा ने उन्हें यह एहसास कराया कि एक किरदार केवल अभिनय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह कलाकार की वास्तविक पहचान बन सकता है। दीपिका चिखलिया की यह कहानी आज भी बताती है कि लोकप्रियता के साथ जिम्मेदारी और चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं।
फोलिक एसिड क्यों कहलाता है ‘प्रेग्नेंसी का विटामिन’? मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद जरूरी

नई दिल्ली गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है, क्योंकि इस समय मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे का भी विकास हो रहा होता है। इसी कारण डॉक्टर फोलिक एसिड के सेवन की सलाह देते हैं, जिसे अक्सर “प्रेग्नेंसी विटामिन” भी कहा जाता है। फोलिक एसिड, विटामिन-बी समूह का एक सिंथेटिक रूप है, जबकि इसका प्राकृतिक रूप फोलेट कहलाता है। यह हरी पत्तेदार सब्जियों, दालों और कुछ सूखे मेवों में पाया जाता है। शरीर में यह नई कोशिकाओं के निर्माण और लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्भावस्था में इसका सबसे अहम काम भ्रूण के न्यूरल ट्यूब (brain and spinal cord) का सही विकास करना होता है। यदि गर्भधारण से पहले और शुरुआती तीन महीनों में फोलिक एसिड पर्याप्त मात्रा में न लिया जाए, तो बच्चे में जन्मजात विकारों का खतरा बढ़ सकता है, जैसे रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क का विकास प्रभावित होना। इसी वजह से विशेषज्ञ गर्भधारण से पहले ही फोलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर में इसकी पर्याप्त मात्रा बनी रहे और भ्रूण का विकास सही तरीके से हो सके। फोलिक एसिड की कमी से गर्भवती महिलाओं में एनीमिया, कमजोरी, थकान और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। यह शरीर में रक्त निर्माण को भी संतुलित रखता है, जिससे मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। आयुर्वेद में गर्भावस्था को “गर्भिणी परिचर्या” कहा गया है, जिसमें संतुलित आहार को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें पालक, मेथी, आंवला, संतरा, अनार, मूंग, चना, बादाम और अखरोट जैसे फोलिक एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा शतावरी, अश्वगंधा और गिलोय जैसी औषधियों का सेवन भी डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार किया जा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि संतुलित आहार और फोलिक एसिड का सही सेवन गर्भावस्था को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है।
HIGHCOURT HEARING: धोखाधड़ी केस में राजेंद्र भारती को राहत या झटका? दिल्ली हाईकोर्ट में आज अहम सुनवाई

HIGHLIGHTS : भूमि विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में सुनवाई आज 3 साल की सजा के बाद रद्द हुई थी सदस्यता पिछली सुनवाई में शिकायतकर्ता नहीं दे सका जवाब कोर्ट के फैसले पर टिकीं राजनीतिक नजरें दतिया की राजनीति पर पड़ सकता है असर HIGHCOURT HEARING: ग्वालियर। दतिया से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती से जुड़े भूमि विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में आज 28 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा की बेंच करेगी। इससे पहले दिल्ली की MP-MLA कोर्ट ने भारती को तीन साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई थी। मुंबई में परिवार की मौत के बाद तरबूज पर सवाल, क्या इससे हो सकती है फूड प्वाइजनिंग? डॉक्टरों ने बताया सच नोटिस का जवाब न देने से टली थी सुनवाई मामले की पिछली सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष अदालत के नोटिस का जवाब दाखिल नहीं कर सका था। जवाब पेश नहीं होने के कारण अदालत ने सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए अगली तारीख 28 अप्रैल तय की थी। अब इस सुनवाई को लेकर दोनों पक्षों की तैयारी पूरी मानी जा रही है। Guna Gang Rape: गुना में नवविवाहिता से गैंगरेप, रिश्तेदार ने 2 दोस्तों के साथ मिलकर किया दुष्कर्म फैसले पर टिकीं राजनीतिक नजरें इस केस को लेकर कानूनी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बनी हुई है। पूर्व विधायक की सजा और सदस्यता रद्द होने के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। ऐसे में हाईकोर्ट का फैसला आने वाले समय में कई मायनों में अहम साबित हो सकता है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी में गिरावट, शुरुआती कारोबार में दबाव दतिया की राजनीति पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का सीधा असर दतिया के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। अगर फैसले में कोई बड़ा मोड़ आता है, तो स्थानीय राजनीति में नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
वाराणसी में ऐतिहासिक तैयारी,पीएम मोदी के दौरे से पहले शहर में रोशनी और विकास का अद्भुत नजारा

नई दिल्ली। वाराणसी इस समय एक अलग ही रंग में नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय दौरे से पहले पूरा शहर रोशनी, सजावट और उत्साह से भर गया है। सड़कें, चौराहे और प्रमुख मार्ग इस तरह सजाए गए हैं कि पूरा शहर किसी बड़े पर्व जैसा दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों से लेकर प्रशासन तक हर कोई इस दौरे को सफल बनाने में जुटा हुआ है। दौरे की शुरुआत धार्मिक परंपराओं के साथ हुई, जहां काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस पूजा ने पूरे कार्यक्रम को आध्यात्मिक शुरुआत दी और इसे केवल एक राजनीतिक दौरा नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ा अवसर भी बना दिया। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने इस क्षण को बेहद महत्वपूर्ण बताया और इसे काशी की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा। इसके बाद शहर में तैयारियों का दायरा और बढ़ गया। जिन रास्तों से प्रधानमंत्री गुजरेंगे, उन्हें विशेष रूप से सजाया गया है। सड़क किनारे रोशनी, रंगीन सजावट और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया है। पूरा शहर एक नए रूप में नजर आ रहा है, जहां आधुनिक विकास और पारंपरिक संस्कृति का सुंदर मेल देखने को मिल रहा है। इस दौरे के दौरान एक बड़ा जनसंबोधन कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। खासकर महिलाओं की भागीदारी को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे यह कार्यक्रम सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है। इस अवसर पर कई विकास परियोजनाओं की घोषणा और शुरुआत की जाएगी, जो क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं। इन परियोजनाओं में सड़क, परिवहन और शहरी विकास से जुड़े कई बड़े काम शामिल हैं। इसके अलावा कुछ नई ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी, जिससे विभिन्न शहरों के बीच संपर्क और मजबूत होगा। इन सभी योजनाओं को क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। पूरे शहर में बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। महिला पुलिस बल की भी मजबूत उपस्थिति देखने को मिल रही है। निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है और पूरे क्षेत्र को कई सुरक्षा स्तरों में बांटा गया है ताकि किसी भी स्थिति पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में एक लंबा रोड शो भी शामिल है, जहां वे जनता का अभिवादन करते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरेंगे। इस रोड शो को लेकर लोगों में खासा उत्साह है और बड़ी संख्या में नागरिक सड़कों पर उनका स्वागत करने की तैयारी में हैं। पूरे शहर का माहौल इस समय एक उत्सव जैसा है, जहां आस्था, विकास और जनसंपर्क एक साथ दिखाई दे रहे हैं। वाराणसी का यह दृश्य न केवल स्थानीय लोगों के लिए खास है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
काशी में हाई अलर्ट: पीएम मोदी के आगमन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद

नई दिल्ली। वाराणसी में प्रधानमंत्री के आगामी दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। पूरे शहर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण से लेकर वीआईपी मूवमेंट तक के लिए विशेष योजना तैयार की है, ताकि कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। शहर के प्रमुख आयोजन स्थलों और मार्गों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था में महिला पुलिसकर्मियों की भी बड़ी संख्या शामिल है, जिन्हें विशेष रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जिस स्थान पर बड़ा जनसमूह जुटने की संभावना है, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है। पूरे कार्यक्रम क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से लैस सुरक्षा घेरे में रखा गया है। निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का व्यापक नेटवर्क सक्रिय किया गया है, जिससे हर गतिविधि पर रियल टाइम नजर रखी जा सके। इसके साथ ही ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम भी लगाया गया है। भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है और यातायात को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों की योजना बनाई गई है। इससे आम लोगों को कम से कम असुविधा हो और शहर में आवाजाही सामान्य बनी रहे। कार्यक्रम के दौरान एक बड़े महिला सम्मेलन का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है, ताकि पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। इसके अलावा प्रधानमंत्री के धार्मिक कार्यक्रमों को देखते हुए भी विशेष तैयारी की गई है। शहर में उत्साह का माहौल है और लोग उनके स्वागत के लिए तैयार हैं। प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि दौरा पूरी तरह सुरक्षित, व्यवस्थित और सफल रहे।
मुंबई में परिवार की मौत के बाद तरबूज पर सवाल, क्या इससे हो सकती है फूड प्वाइजनिंग? डॉक्टरों ने बताया सच

नई दिल्ली। गर्मियों में तरबूज को सबसे ताजगी देने वाले फलों में गिना जाता है, लेकिन हाल ही में मुंबई में हुई एक दर्दनाक घटना ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत के बाद आशंका जताई जा रही है कि मामला फूड प्वाइजनिंग से जुड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि परिवार ने पहले बिरयानी खाई थी और उसके बाद घर में रखा तरबूज खाया था। कुछ ही घंटों बाद सभी की तबीयत बिगड़ गई और उल्टी-दस्त जैसे लक्षण सामने आए। अस्पताल पहुंचने पर सभी की मौत हो गई। पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और इसे फिलहाल संदिग्ध फूड प्वाइजनिंग मानते हुए खाद्य सामग्री को जांच के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही मौत के कारणों की स्पष्ट पुष्टि हो सकेगी। क्या तरबूज से हो सकती है मौत?इस घटना के बाद यह सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या तरबूज खाना जानलेवा भी हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, तरबूज खुद में सुरक्षित फल है, लेकिन अगर यह दूषित हो जाए या गलत तरीके से स्टोर किया जाए तो इसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि तरबूज में पानी और प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए खराब या संक्रमित होने पर यह बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है। कुछ मामलों में इसमें मिठास बढ़ाने के लिए बाहरी पदार्थ मिलाने की भी आशंका रहती है, जो जोखिम को बढ़ा सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द शामिल हैं। इसकी गंभीरता बैक्टीरिया के प्रकार और व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि केवल तरबूज को दोष देना सही नहीं है। फूड प्वाइजनिंग किसी भी दूषित भोजन या असुरक्षित तरीके से रखे गए खाने से हो सकती है, इसलिए पूरे मामले की जांच के बाद ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
बंगाल की सियासी ज़मीन पर टकराव: IPS अधिकारी और TMC उम्मीदवार के बीच बयानबाज़ी से बढ़ा तनाव

नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है और इसी बीच दक्षिण 24 परगना क्षेत्र में सामने आया एक विवाद अब राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। इस घटनाक्रम में कानून व्यवस्था संभाल रहे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एक राजनीतिक उम्मीदवार के बीच हुई बयानबाज़ी ने पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। मामला सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह खुली राजनीतिक टकराव की स्थिति में बदल गया है। पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब कुछ स्थानीय लोगों ने शिकायत दर्ज कराई कि एक राजनीतिक उम्मीदवार के समर्थक इलाके में लोगों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा एजेंसियों की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया गया। इसी दौरान पुलिस अधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी तरह की धमकी, अनुशासनहीनता या कानून तोड़ने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। कुछ ही समय बाद राजनीतिक उम्मीदवार ने भी सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी। अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत चाहे किसी भी तरफ से मानी जाए, लेकिन उसका अंत वही तय करेंगे। उनके शब्दों में आत्मविश्वास के साथ-साथ चुनौती का भाव भी साफ दिखाई दिया। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी भी दबाव या सुरक्षा व्यवस्था से डरने वाले नहीं हैं और जनता उनके साथ मजबूती से खड़ी है। इस बयानबाज़ी के बाद इलाके का राजनीतिक माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है। एक तरफ समर्थकों के बीच जोश और उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। चुनावी समय में इस तरह की बयानबाज़ी अक्सर जनता की राय और राजनीतिक माहौल दोनों को प्रभावित करती है, जिससे तनाव और बढ़ जाता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं चुनावी प्रक्रिया को और जटिल बना देती हैं। जब प्रशासनिक जिम्मेदारियों और राजनीतिक दावों के बीच सीधा टकराव जैसा माहौल बनता है, तो स्थिति को संभालना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे समय में सभी पक्षों के लिए संयम और संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ सके।
गर्मियों का एनर्जी बूस्टर: शिकंजी, स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल

नई दिल्ली| गर्मियों की तेज धूप और लू से राहत पाने के लिए शिकंजी एक बेहतरीन और प्राकृतिक पेय माना जाता है। यह न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि शरीर को तुरंत ऊर्जा और ठंडक भी प्रदान करती है। नींबू, काला नमक, भुना जीरा और पुदीने से बनी यह पारंपरिक ड्रिंक गर्मियों में शरीर के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, शिकंजी शरीर में पसीने के जरिए खोए हुए इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करती है। इसमें मौजूद नींबू विटामिन-सी से भरपूर होता है, जो इम्युनिटी को मजबूत बनाता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। शिकंजी पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाती है। भुना जीरा पाचन क्रिया को मजबूत करता है और सूजन कम करने में सहायक होता है, जबकि पुदीना शरीर को ताजगी देता है और डिटॉक्स प्रक्रिया को तेज करता है। इसके अलावा यह वजन नियंत्रित करने में भी मददगार है। नींबू में मौजूद पेक्टिन फाइबर भूख को नियंत्रित करता है, जिससे कैलोरी इनटेक कम हो सकता है। यही कारण है कि इसे एक हेल्दी समर ड्रिंक माना जाता है। गर्मियों में शरीर में पानी की कमी आम समस्या है, ऐसे में शिकंजी हाइड्रेशन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। यह थकान को कम करती है और शरीर को पूरे दिन तरोताजा बनाए रखती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार के कृत्रिम और मीठे पेय की बजाय घर पर बनी शिकंजी का सेवन अधिक फायदेमंद है। इसे बनाना भी बेहद आसान है ताजा नींबू का रस, ठंडा पानी, काला नमक, भुना जीरा और पुदीना मिलाकर कुछ ही मिनटों में तैयार किया जा सकता है। नियमित रूप से शिकंजी का सेवन गर्मियों में शरीर को न सिर्फ ठंडक देता है, बल्कि त्वचा की सेहत और पाचन को भी बेहतर बनाता है।