दिल्ली के बल्लेबाजों ने बेंगलुरु के सामने टेके घुटने, पावरप्ले के न्यूनतम स्कोर के साथ माथे पर लगा सबसे बड़ा कलंक

नई दिल्ली। क्रिकेट के मैदान पर अनिश्चितताओं का दौर हमेशा बना रहता है, लेकिन दिल्ली कैपिटल्स ने सोमवार को जो कर दिखाया, उसने प्रशंसकों को हतप्रभ कर दिया है। शनिवार को जिस टीम ने विपक्षी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए 264 रनों का पहाड़ खड़ा किया था, वही टीम मात्र 48 घंटे के भीतर ताश के पत्तों की तरह ढह गई। अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ आईपीएल इतिहास का सबसे शर्मनाक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। टीम महज 75 रनों पर सिमट गई, लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला प्रदर्शन पावरप्ले के दौरान रहा। दिल्ली की टीम शुरुआती 6 ओवरों के भीतर केवल 13 रन बना सकी और इस दौरान उसने अपने 6 प्रमुख बल्लेबाजों को गंवा दिया, जो कि टूर्नामेंट के इतिहास में अब तक का सबसे खराब पावरप्ले प्रदर्शन है। मैच की शुरुआत से ही दिल्ली के बल्लेबाजों में आत्मविश्वास की भारी कमी दिखी और बेंगलुरु के गेंदबाजों ने इसका भरपूर फायदा उठाया। भुवनेश्वर कुमार की स्विंग और सटीक गेंदबाजी के आगे दिल्ली का शीर्ष क्रम पूरी तरह बेबस नजर आया। पहले ही ओवर की दूसरी गेंद पर विकेट गिरने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह थमने का नाम ही नहीं ले रहा था। आलम यह था कि महज 8 रन के स्कोर तक दिल्ली कैपिटल्स के आधे से ज्यादा बल्लेबाज पवेलियन वापस लौट चुके थे। केएल राहुल, समीर रिज्वी, ट्रिस्टन स्टब्स और अक्षर पटेल जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी क्रीज पर टिकने का साहस नहीं जुटा पाए। पावरप्ले में 13 रन पर 6 विकेट का यह स्कोर अब राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के उन पुराने रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ चुका है, जहां टीमें 14 रन बनाकर संघर्ष कर रही थीं। दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह हार न केवल तकनीकी रूप से एक झटका है, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी यह टीम को झकझोर देने वाली घटना है। एक मैच में रनों का अंबार लगाने वाली टीम का अगले ही मैच में 100 रन के आंकड़े तक न पहुंच पाना खेल की अनिश्चितता और टीम के अस्थिर प्रदर्शन को उजागर करता है। बेंगलुरु के कप्तान के टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने के फैसले को उनके गेंदबाजों ने बिल्कुल सही साबित कर दिखाया। पूरी पारी के दौरान दिल्ली का कोई भी बल्लेबाज पिच के मिजाज को नहीं समझ सका और गलत शॉट चयन की वजह से विकेट गंवाते चले गए। अब यह टीम मैनेजमेंट के लिए चिंता का सबसे बड़ा कारण है कि कैसे एक ही सीजन में टीम का प्रदर्शन इतनी बुरी तरह अर्श से फर्श पर आ गया।
हाथ-पैर का ठंडा रहना सिर्फ सामान्य नहीं, कई बीमारियों का संकेत हो सकता है

नई दिल्ली| कई लोग अक्सर हाथ और पैरों के ठंडे या सुन्न रहने की समस्या को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल मौसम या सामान्य बदलाव नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही कुछ समस्याओं का संकेत हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक जब शरीर में रक्त संचार सही तरीके से नहीं होता है, तो हाथ और पैरों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता। इस वजह से ये हिस्से ठंडे महसूस होने लगते हैं। रक्त का सही प्रवाह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा खराब पाचन भी इस समस्या का एक बड़ा कारण हो सकता है। जब शरीर को पूरी ऊर्जा और पोषण नहीं मिल पाता, तो इसका असर सबसे पहले हाथ-पैरों पर दिखाई देता है। तनाव और कमजोरी भी इस स्थिति को और बढ़ा सकते हैं। लगातार तनाव रहने से शरीर का संतुलन बिगड़ता है, जिससे नसों में रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहे तो यह गंभीर बीमारियों का रूप भी ले सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार हाथ-पैर ठंडे रहने की स्थिति में रेनॉड्स डिजीज का खतरा हो सकता है, जिसमें रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे हाथ-पैरों में दर्द, सुन्नपन और अन्य जटिल समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।इसके साथ ही वैरिकोज वेन्स जैसी समस्याएं भी इस स्थिति से जुड़ी हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस समस्या से बचने के लिए नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज और पैदल चलना चाहिए, ताकि रक्त संचार बेहतर बना रहे। हाथ-पैरों की हल्की मालिश और गर्म रखने के उपाय भी राहत दे सकते हैं। इसके अलावा शरीर में आयरन और विटामिन की कमी भी एक प्रमुख कारण हो सकती है, इसलिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है।
Guna Gang Rape: गुना में नवविवाहिता से गैंगरेप, रिश्तेदार ने 2 दोस्तों के साथ मिलकर किया दुष्कर्म

HIGHLIGHTS : मां से मिलाने के बहाने घर से ले गया रिश्तेदार जंगल में ले जाकर तीन युवकों पर गैंगरेप का आरोप हालत बिगड़ने पर अस्पताल छोड़कर आरोपी फरार पीड़िता की शिकायत पर केस दर्ज पुलिस ने तीनों आरोपियों को किया गिरफ्तार Guna Gang Rape: मध्यप्रदेश। गुना जिले के बमोरी इलाके में 19 वर्षीय नवविवाहिता के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। पीड़िता के मुताबिक, 25 अप्रैल को वह घर पर अकेली थी, तभी उसका दूर का रिश्तेदार उसे अपनी मां से मिलाने के बहाने बाइक पर बैठाकर ले गया। रास्ते में वह उसे सुनसान जंगल क्षेत्र की ओर ले गया, जहां पहले से उसके दो साथी मौजूद थे। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी में गिरावट, शुरुआती कारोबार में दबाव तीन आरोपियों ने मिलकर किया अपराध पीड़िता ने बताया कि जंगल में तीनों युवकों ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। घटना के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद आरोपी उसे शिवपुरी के सरकारी अस्पताल के पास छोड़कर भाग गए। बाद में परिजनों को जानकारी मिली और उसका भाई उसे घर लेकर आया। COW PROTECTION PROTEST: गौ संरक्षण की मांग तेज, अशोकनगर में गोवंश को ‘राष्ट्रीय माता’ बनाने की मांग शिकायत के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस घर पहुंचने के बाद पीड़िता ने अपने भाई को पूरी घटना बताई। इसके बाद बमोरी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। हॉर्मुज स्ट्रेट से तनाव के बीच पहली बार निकला LNG टैंकर, शिपिंग रूट पर फिर हलचल पुलिस की कार्रवाई, तीनों आरोपी गिरफ्तार मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर टीमों का गठन किया गया और लगातार दबिश दी गई। जिसके बाद मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल मामले की आगे जांच जारी है।
पीयूष गोयल ने EPC प्रमुखों संग की बैठक, निर्यात बढ़ाने और वैश्विक अवसरों पर किया मंथन

नई दिल्ली| भारत के निर्यात क्षेत्र को नई गति देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने सोमवार को विभिन्न निर्यात संवर्धन परिषदों (EPCs) के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में निर्यात को मजबूत बनाने और वैश्विक व्यापार अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मंत्री Piyush Goyal ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में क्षेत्र-विशेष प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों की रचनात्मक प्रतिक्रियाएं भी सुनी गईं। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि हाल ही में भारत द्वारा किए गए विभिन्न मुक्त व्यापार समझौते (FTA) देश के निर्यातकों के लिए नए बाजार खोल सकते हैं। इन समझौतों का अधिकतम लाभ उठाकर भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने पर फोकस किया गया। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार निर्यातकों को मजबूत बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाने के लिए लगातार नीतिगत सहयोग प्रदान कर रही है। इससे पहले, Piyush Goyal ने भारत-न्यूजीलैंड व्यापार मंच को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत का बड़ा बाजार, कुशल कार्यबल, डिजिटल क्षमता और विनिर्माण शक्ति न्यूजीलैंड की कृषि-तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और फिनटेक विशेषज्ञता के साथ मिलकर नए अवसर पैदा कर सकती है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। दोनों देशों का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में व्यापार को 5 अरब डॉलर तक बढ़ाने का है, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की यह पहल भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कच्चे तेल की तेजी से शेयर बाजार दबाव में, बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली

नई दिल्ली| कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को कमजोरी के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर सीधे प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया। सुबह 9:17 बजे तक सेंसेक्स करीब 203 अंक गिरकर 77,099 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी लगभग 50 अंक टूटकर 24,042 पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को माना जा रहा है। सेक्टोरल फ्रंट पर बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। Nifty Bank Index में आधा प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर भी लाल निशान में रहे। हालांकि कुछ सेक्टरों में मजबूती भी देखी गई। एनर्जी, मेटल, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटो और डिफेंस सेक्टर में खरीदारी का रुझान बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए हरे निशान में कारोबार किया, जिससे व्यापक बाजार में कुछ संतुलन देखने को मिला। एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख रहा। टोक्यो, शंघाई और हांगकांग के बाजार कमजोर रहे, जबकि बैंकॉक और सोल में हल्की तेजी देखी गई। वहीं अमेरिकी बाजारों में सोमवार को डाओ जोन्स में गिरावट और नैस्डैक में हल्की तेजी दर्ज की गई। बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 109 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव का परिणाम है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती अनिश्चितता के कारण। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के शांति प्रस्ताव पर अमेरिका की असहमति ने भी बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है, जिससे ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है। जब तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव में स्थिरता नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
चिलकुर के इस धाम में मन्नत मांगते ही दूर होती है विदेश यात्रा की हर बाधा..

नई दिल्ली। भारत अपनी विविधता और आस्था के अनगिनत केंद्रों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, लेकिन तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के निकट एक ऐसा मंदिर है जिसकी ख्याति आधुनिक युग की जरूरतों से जुड़ी हुई है। उस्मान सागर झील के किनारे बसे चिलकुर गांव में स्थित भगवान वेंकटेश्वर का पावन धाम ‘चिलकुर बालाजी’ के नाम से जाना जाता है, जिसे लोग प्यार से ‘वीजा मंदिर’ भी कहते हैं। यह मंदिर उन युवाओं और पेशेवरों के लिए आशा की एक बड़ी किरण बन चुका है, जो विदेश में पढ़ाई या नौकरी का सपना देखते हैं। मान्यता है कि यहाँ श्रद्धापूर्वक माथा टेकने से वीजा मिलने की प्रक्रिया में आने वाली हर रुकावट जादुई रूप से दूर हो जाती है। इस मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है और इसके पीछे एक अत्यंत भावुक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि 16वीं या 17वीं शताब्दी में भगवान तिरुपति बालाजी का एक अनन्य भक्त स्वास्थ्य कारणों से तिरुमाला की लंबी यात्रा करने में असमर्थ था। अपने भक्त की व्याकुलता और सच्ची भक्ति देख भगवान स्वयं चिलकुर के इसी स्थान पर प्रकट हुए थे। आज के दौर में इस स्थान ने एक अनूठी पहचान बना ली है। यहाँ की सबसे खास बात यह है कि यहाँ आने वाले भक्त अक्सर अपने हाथों में पेन और आवेदन पत्र जैसे दस्तावेज लेकर भगवान के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और विदेश यात्रा का सफल आशीर्वाद मांगते हैं। यहाँ मन्नत मांगने और उसे पूर्ण करने की परंपरा भी काफी दिलचस्प और अनुशासित है। जब कोई भक्त पहली बार अपनी मनोकामना लेकर आता है, तो वह मंदिर के गर्भगृह की 11 बार परिक्रमा करता है। जैसे ही उसकी विदेश जाने की मुराद पूरी हो जाती है और उसे वीजा प्राप्त हो जाता है, वह भगवान का धन्यवाद करने के लिए दोबारा मंदिर आता है और इस बार श्रद्धा भाव से 108 बार परिक्रमा करता है। चिलकुर बालाजी मंदिर की एक और बड़ी विशेषता इसकी सादगी है। यहाँ न तो कोई दान पेटी रखी गई है और न ही यहाँ किसी भी तरह का सशुल्क ‘वीआईपी’ दर्शन कराया जाता है। राजा हो या रंक, यहाँ सभी के लिए एक समान व्यवस्था है, जो इस मंदिर को आधुनिक समय में भी आध्यात्मिकता का एक सच्चा केंद्र बनाती है।
रविवार को जलदान और पूजन से मिलेगा अक्षय पुण्य, पितृ दोषों से मुक्ति का है यह सबसे शुभ समय

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में सूर्य को जगत की आत्मा और प्रत्यक्ष देव माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ का महीना भगवान सूर्य नारायण की उपासना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि इस दौरान सूर्य अपनी पूर्ण शक्ति और तेज के साथ विद्यमान होते हैं। प्रचंड गर्मी और तपती धूप वाले इस महीने में सूर्य देव की आराधना करने से न केवल व्यक्तित्व में निखार आता है, बल्कि जातक को आरोग्य शरीर और लंबी आयु का वरदान भी प्राप्त होता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ के प्रत्येक रविवार को नियमपूर्वक किए गए पूजन से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और जीवन के समस्त अंधकार दूर हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ माह के रविवार को सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होना चाहिए। पूजन के लिए लाल या केसरिया रंग के वस्त्रों का चुनाव करना श्रेष्ठ रहता है, जो सूर्य के तेज का प्रतीक हैं। अर्घ्य देने के लिए तांबे के पात्र का उपयोग करते हुए उसमें जल, लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत मिलाकर ‘ऊँ घृणि सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप करते हुए भगवान भास्कर को अर्पित करें। अर्घ्य देते समय जल की गिरती धारा से सूर्य की किरणों को देखना आंखों के स्वास्थ्य और मानसिक एकाग्रता के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। पूजन के अंत में आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और सूर्य के 12 नामों का स्मरण करने से अटके हुए कार्य पूर्ण होते हैं और पितृ दोषों से भी राहत मिलती है। ज्येष्ठ के रविवार को व्रत रखने के भी विशेष नियम बताए गए हैं। इस दिन नमक का सेवन वर्जित माना गया है, केवल फलाहार के माध्यम से ही व्रत पूर्ण किया जाता है। प्रचंड गर्मी के इस मौसम में दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। जलदान को इस माह में सबसे बड़ा धर्म माना गया है; प्यासे राहगीरों के लिए शीतल जल की व्यवस्था करना, पशु-पक्षियों के लिए पानी रखना और जरूरतमंदों को छाता या चप्पल दान करना यज्ञ के समान फलदायी होता है। यह माह हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने और सूर्य की असीमित ऊर्जा का उपयोग कर अपने जीवन को प्रकाशमान बनाने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी में गिरावट, शुरुआती कारोबार में दबाव

नई दिल्ली| अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच मंगलवार को सोने और चांदी के दामों में गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में दोनों कीमती धातुएं करीब आधा प्रतिशत तक कमजोर होकर खुलीं, जिससे निवेशकों में हल्का दबाव देखा गया। घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का 05 जून 2026 कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,51,721 रुपये के मुकाबले 1,51,700 रुपये पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 1,51,514 रुपये तक गिरा, जबकि 1,51,802 रुपये का उच्चतम स्तर भी छुआ। चांदी में भी गिरावट देखने को मिली। 05 मई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 2,41,824 रुपये की पिछली क्लोजिंग के मुकाबले 2,40,490 रुपये पर खुला और 2,40,400 रुपये के स्तर तक फिसल गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर सोना 0.27 प्रतिशत गिरकर लगभग 4,680 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 0.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74.48 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में सोना और चांदी ने मजबूत रिटर्न दिया है। पिछले एक साल में डॉलर में सोना 40 प्रतिशत से अधिक और चांदी 126 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है, जिससे यह साफ है कि दोनों धातुएं अभी भी सुरक्षित निवेश विकल्प बनी हुई हैं। बाजार में यह हलचल ऐसे समय पर देखी जा रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता पर अनिश्चितता बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के शांति प्रस्ताव को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव स्पष्ट दिशा नहीं लेता, तब तक सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
अल्मोड़ा के श्मशान में जोड़े ने रचाई शादी, देवभूमि की परंपराओं पर छिड़ा भीषण विवाद

नई दिल्ली। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने जीवन और मृत्यु के बीच की पारंपरिक मर्यादाओं को हिलाकर रख दिया है। आमतौर पर विवाह के लिए लोग पवित्र मंदिरों या आलीशान महलों का चुनाव करते हैं, लेकिन अल्मोड़ा के मर्चुला क्षेत्र में एक जोड़े ने इसके बिल्कुल उलट श्मशान घाट की दहलीज पर अपना नया जीवन शुरू करने का फैसला किया। रामगंगा और बदनगढ़ नदी के संगम पर स्थित यह वही स्थान है, जहां वर्षों से लोग अपनों को अंतिम विदाई देते आए हैं। इसी जगह पर फूलों का मंडप सजाया गया और मंत्रोच्चार के बीच जयमाला की रस्म पूरी की गई। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस विवाह समारोह की जानकारी तब सार्वजनिक हुई जब समारोह का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित होने लगा। वीडियो में देखा जा सकता है कि जिस स्थान पर अर्थियां जलाई जाती हैं, वहां बिजली की झालरें और भव्य सजावट की गई थी। मेहमानों की मौजूदगी में जोड़े ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई। जैसे ही यह दृश्य स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सामने आया, विरोध के स्वर तेज हो गए। लोगों का कहना है कि श्मशान घाट को शास्त्रों में वैराग्य और दुख का स्थान माना गया है, वहां इस तरह का जश्न मनाना हिंदू परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं का सीधा अपमान है। स्थानीय लोगों ने इसे आस्था के साथ खिलवाड़ करार देते हुए कड़ा ऐतराज जताया है। विरोध की आंच अब प्रशासन तक भी पहुंच गई है। अधिकारियों ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी भी सार्वजनिक स्थान, विशेषकर अंत्येष्टि स्थलों का उपयोग किसी निजी मांगलिक कार्य के लिए करना नियमों के खिलाफ है। प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस तरह के आयोजन के लिए कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी, जो कि कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है। सामाजिक संगठनों का आरोप है कि आधुनिकता के नाम पर इस तरह के संवेदनशील स्थानों की गरिमा को ठेस पहुँचाना अनुचित है। फिलहाल, इस अनोखी लेकिन विवादित शादी ने देवभूमि में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां एक पक्ष इसे व्यक्तिगत चुनाव मान रहा है, तो वहीं दूसरा पक्ष इसे समाज और धर्म की मर्यादा का उल्लंघन बता रहा है।
भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को लेकर बड़ा बयान: पीएम मोदी के नेतृत्व की टॉड मैक्ले ने की सराहना

नई दिल्ली| भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री Todd McClay ने कहा है कि इस समझौते को रिकॉर्ड नौ महीनों में पूरा करने में प्रधानमंत्री Narendra Modi और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस लक्सन के मजबूत नेतृत्व की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच विकसित हुए मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों ने बातचीत की प्रक्रिया को बेहद तेज और प्रभावी बनाया। पिछले वर्ष न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री द्वारा भारत का दौरा एक ऐतिहासिक कदम था, जिसमें अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल था। Todd McClay ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की नेतृत्व क्षमता की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि उनके साथ मुलाकात करना उनके लिए सम्मान की बात रही। उन्होंने यह भी कहा कि अब सरकारों का काम लगभग पूरा हो चुका है और अब व्यापारिक समुदाय को इस समझौते का लाभ उठाने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल लगातार बढ़ाए जाएंगे ताकि आर्थिक सहयोग को नई गति मिल सके। साथ ही भारतीय कंपनियों को भी न्यूजीलैंड में निवेश और व्यापार के अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया गया है। Todd McClay ने यह भी कहा कि भारत और न्यूजीलैंड दुनिया के दो मजबूत लोकतंत्र हैंभारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जबकि न्यूजीलैंड सबसे पुराने लोकतंत्रों में से एक माना जाता है। बातचीत के दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि इस वर्ष भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल सहयोग के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने हल्के अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी को न्यूजीलैंड आने और अपनी क्रिकेट टीम साथ लाने का आमंत्रण भी दिया।