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मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी का कहर, भोपाल में मंगलवार रहा सीजन का सबसे गर्म दिन

भोपाल। मध्य प्रदेश में गर्मी लगातार रिकॉर्ड तोड़ रही है। राज्य का प्रमुख पर्यटन स्थल खजुराहो इस समय सबसे ज्यादा तप रहा है, जहां मंगलवार को तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल में भी पारा 43.6 डिग्री तक पहुंच गया, जो पिछले 10 वर्षों में दूसरा सबसे अधिक और इस सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। मौसम में बदलाव का कारण सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन है, जिसकी वजह से राज्य के उत्तरी क्षेत्रों ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिली है। हालांकि, बुधवार को प्रदेश के 15 जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। इनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, विदिशा, सागर, रायसेन, मंडला और छिंदवाड़ा शामिल हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) भोपाल केंद्र के अनुसार, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, पन्ना, सतना और रीवा में दिन के समय लू का प्रभाव रहेगा, जबकि शाम के बाद मौसम में बदलाव के संकेत हैं। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इसके अलावा मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, बालाघाट, सिवनी और बैतूल में भी वर्षा की संभावना जताई गई है। भीषण गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेष रूप से दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी गई है, क्योंकि इस समय लू का असर सबसे ज्यादा रहता है। भोपाल सहित कई शहरों में गर्मी का प्रभाव अभी जारी रहने वाला है। मंगलवार को खजुराहो के अलावा कई शहरों में तापमान 44 डिग्री के पार दर्ज किया गया। सीधी में 44.6 डिग्री और श्योपुर में 44 डिग्री तापमान रहा। वहीं रायसेन में 43.8, उमरिया में 43.5, खंडवा में 43.4, मुरैना में 43.3, मंडला में 43.2 और रतलाम-दमोह में 43 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल 43.6 डिग्री के साथ सबसे गर्म रहा, जबकि इंदौर में 42.2, जबलपुर में 42.7 और ग्वालियर व उज्जैन में 41 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

रोहित शर्मा की वापसी पर सस्पेंस, टॉस के समय होगा बड़ा फैसला

नई दिल्ली | आईपीएल 2026 में बुधवार को वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच होने वाले मुकाबले से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है क्या रोहित शर्मा मैदान पर उतरेंगे? फिलहाल इस पर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है और अंतिम फैसला टॉस के समय लिया जाएगा। टीम से जुड़े सूत्रों के अनुसार, रोहित शर्मा की फिटनेस में लगातार सुधार देखा गया है, लेकिन उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाएगा या नहीं, यह मैच से ठीक पहले तय होगा। उनकी वापसी मुंबई के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, खासकर तब जब टीम इस सीजन में संघर्ष कर रही है। रोहित शर्मा पिछले तीन मैचों से हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण टीम से बाहर हैं। उनकी गैरमौजूदगी में मुंबई ने कई ओपनिंग संयोजन आजमाए, लेकिन कोई भी सफल साबित नहीं हुआ। ओपनिंग जोड़ी की अस्थिरता टीम के खराब प्रदर्शन की एक बड़ी वजह रही है। पिछले मुकाबलों में डिकॉक के साथ नए चेहरों को मौका दिया गया, लेकिन टीम को अपेक्षित शुरुआत नहीं मिल सकी। रोहित ने इस सीजन की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी और कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ अर्धशतक जड़ा था। हालांकि, चौथे मैच में चोट के कारण उन्हें रिटायर हर्ट होना पड़ा और तब से वह मैदान पर वापसी नहीं कर सके हैं। उन्होंने अब तक खेले 4 मैचों में 137 रन बनाए हैं, जिसमें एक अर्धशतक शामिल है। अगर रोहित फिट होकर टीम में लौटते हैं, तो वह ओपनिंग में स्थिरता ला सकते हैं और टीम के बल्लेबाजी क्रम को मजबूती दे सकते हैं। उनकी मौजूदगी न सिर्फ रन बनाने में मदद करेगी, बल्कि टीम का मनोबल भी बढ़ाएगी। मुंबई इंडियंस का इस सीजन में प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है। टीम 7 मैचों में सिर्फ 2 जीत के साथ 4 अंक लेकर अंकतालिका में निचले पायदान पर है। कप्तान हार्दिक पांड्या, सूर्यकुमार यादव और जसप्रीत बुमराह जैसे बड़े खिलाड़ियों का फॉर्म में न होना भी टीम के लिए चिंता का विषय है। अब स्थिति ऐसी बन गई है कि प्लेऑफ की दौड़ में बने रहने के लिए मुंबई को अपने सभी बचे हुए मैच जीतने होंगे। ऐसे में रोहित शर्मा की वापसी टीम के लिए किसी “टर्निंग पॉइंट” से कम नहीं होगी। कुल मिलाकर, फैंस की निगाहें अब टॉस पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो जाएगा कि मुंबई का सबसे अनुभवी बल्लेबाज इस अहम मुकाबले में टीम का हिस्सा होगा या नहीं।

त्वचा पर आएगा हीरे जैसा नेचुरल निखार, अपनाएं ये ट्रिक

नई दिल्ली|  आज के समय में ऐसे कई बड़े और महंगे प्रोडक्ट हैं जिनका उपयोग हम अपने चेहरे और त्वचा को चमकाने के लिए करते हैं। लेकिन कई बार पैसे ना होने की वजह से हम इन प्रोडक्ट को नहीं खरीदते हैं। लेकिन आप परेशान होने की बात नहीं है अगर आप अपनी त्वचा को और ज्यादा चमकना चाहती हैं तब आपके लिए एक छोटा सा नींबू ही काफी कारगर साबित हो सकता है बस इससे जुड़ा आपको यह उपाय और यह ट्रिक अपनाना चाहिए। नींबू के छिलके का कमालहम। अक्सर नींबू के रस का इस्तेमाल स्वाद के लिए करते हैं, लेकिन हम अक्सर उसके छिलकों को बेकार समझकर कूड़े में फेंक देते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है नींबू का छिलका ही आपके चेहरे और स्किन को काफी हद तक चमक सकता है। विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, नींबू के छिलके आपकी त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। चलिए जानते हैं कैसे। नींबू के छिलके के फायदे  प्राकृतिक ब्लीचये त्वचा पर मौजूद काले धब्बे और दाग-धब्बे हल्के करने में मदद करते हैं। निखारये त्वचा में रक्त संचार को बढ़ाते हैं, जिससे चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक आती है। रूखी हुई त्वचा हटानाछिलकों का पाउडर रूखी त्वचा (डेड स्किन) हटाने के लिए एक बेहतरीन एक्सफ़ोलिएटर का काम करता है। इस प्रकार करें इस्तेमालआप नींबू के छिलके के पाउडर से एक फ़ेस पैक बना सकते हैं। इसके लिए, नींबू के छिलकों को धूप में सुखा लें और उन्हें पीसकर बारीक पाउडर बना लें। अब, इस पाउडर का 1 चम्मच, 1 चम्मच शहद और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर लें। इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाएँ, 15 मिनट तक लगा रहने दें, और फिर ठंडे पानी से धो लें। नींबू के छिलकों से करें मसाजएक अच्छा नींबू लेने उसको काटकर उसके अंदरूनी हिस्से पर थोड़ी सी चीनी या शहद छिड़कें।हल्के हाथों से इसे अपने चेहरे पर धीरे-धीरे रगड़ें। इससे आपकी त्वचा से टैनिंग हटाने में मदद मिलेगी और त्वचा मुलायम महसूस होगी। इस प्रकार आप नींबू नींबू के छिलके से अपनी त्वचा का भरपूर ध्यान रख सकती हैं और उसे चमका सकती हैं।

पंजाब पर जीत से आरआर की छलांग, तीसरे नंबर पर पहुंची टीम

नई दिल्ली | इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में मंगलवार की शाम मोहाली के न्यू पीसीए स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स (आरआर) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पंजाब किंग्स (पीबीकेएस) को उसके ही घर में हरा दिया। यह पंजाब की इस सीजन की पहली हार रही, जबकि राजस्थान के लिए यह जीत बेहद अहम साबित हुई। 223 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए राजस्थान ने जबरदस्त बल्लेबाजी का नमूना पेश किया और 19.2 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 228 रन बनाकर मैच अपने नाम कर लिया। टीम की इस जीत के हीरो रहे डोनोवन फरेरा, जिन्होंने सिर्फ 26 गेंदों पर नाबाद 52 रन की ताबड़तोड़ पारी खेली और प्लेयर ऑफ द मैच बने। इस जीत के साथ राजस्थान रॉयल्स ने अंकतालिका में जबरदस्त छलांग लगाई है। अब टीम 9 मैचों में 12 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। हालांकि, हार के बावजूद पंजाब किंग्स 8 मैचों में 13 अंकों के साथ अब भी पहले स्थान पर काबिज है। दूसरे स्थान पर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) है, जिसके 8 मैचों में 12 अंक हैं। अंकतालिका में चौथे स्थान पर सनराइजर्स हैदराबाद है, जिसने 8 मैचों में 10 अंक हासिल किए हैं। वहीं गुजरात टाइटंस पांचवें, चेन्नई सुपर किंग्स छठे, दिल्ली कैपिटल्स सातवें, कोलकाता नाइट राइडर्स आठवें, मुंबई इंडियंस नौवें और लखनऊ सुपर जायंट्स दसवें स्थान पर मौजूद हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कई टीमों के अंक समान होने के बावजूद उनकी रैंकिंग नेट रन रेट के आधार पर तय हो रही है, जिससे अंकतालिका और भी दिलचस्प बन गई है। इस मुकाबले के बाद ऑरेंज कैप की दौड़ में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राजस्थान रॉयल्स के 15 वर्षीय युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर यह कैप अपने नाम कर ली है। पंजाब के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 16 गेंदों पर 43 रन बनाए और अब 9 मैचों में उनके कुल 400 रन हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने 37 छक्के और 34 चौके जड़कर अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी का शानदार प्रदर्शन किया है। वहीं पर्पल कैप फिलहाल भुवनेश्वर कुमार के पास है, जो रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेलते हुए 8 मैचों में 14 विकेट हासिल कर चुके हैं। कुल मिलाकर, आईपीएल 2026 का यह मुकाबला न सिर्फ रोमांचक रहा, बल्कि इसने अंकतालिका और व्यक्तिगत पुरस्कारों की दौड़ को भी और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है।

वानखेड़े में हाई-वोल्टेज टक्कर: जीत की राह तलाशेगी मुंबई, लय बरकरार रखना चाहेगा हैदराबाद

नई दिल्ली | आईपीएल 2026 का रोमांच अपने चरम पर है और बुधवार शाम मुंबई इंडियंस (एमआई) और सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के बीच वानखेड़े स्टेडियम में एक बेहद अहम मुकाबला खेला जाएगा। दोनों टीमों के लिए यह मैच अलग-अलग मायनों में महत्वपूर्ण है मुंबई के लिए यह “करो या मरो” की स्थिति है, जबकि हैदराबाद अपनी जीत की लय को बरकरार रखना चाहेगा। मुंबई इंडियंस का इस सीजन में प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। टीम ने अब तक खेले गए 7 मुकाबलों में सिर्फ 2 जीत दर्ज की है और 4 अंकों के साथ अंकतालिका में सबसे निचले पायदान पर है। पिछले मैच में चेन्नई के खिलाफ 103 रनों की बड़ी हार ने टीम का मनोबल और गिराया है। अब प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए मुंबई को अपने बाकी सभी मैच जीतने होंगे, जिसकी शुरुआत इस मुकाबले से करनी होगी। हालांकि, मुंबई की सबसे बड़ी समस्या टीम संतुलन की रही है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में टीम एक साथ अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रही है। कप्तान हार्दिक पांड्या के सामने खिलाड़ियों को एकजुट कर बेहतर प्रदर्शन निकालना बड़ी चुनौती बन चुका है। वहीं सूर्यकुमार यादव की अस्थिर फॉर्म और रोहित शर्मा की चोट ने टीम की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।दूसरी ओर, सनराइजर्स हैदराबाद शानदार फॉर्म में नजर आ रही है। टीम ने 8 मैचों में 5 जीत दर्ज कर 10 अंक हासिल किए हैं और अंकतालिका में चौथे स्थान पर काबिज है। पैट कमिंस की वापसी के बाद टीम का संतुलन और मजबूती साफ दिखाई दे रही है। खास बात यह है कि हैदराबाद अपने पिछले चार मुकाबले लगातार जीतकर आत्मविश्वास से भरपूर है और इस मैच में भी उसी लय को जारी रखने के इरादे से उतरेगी। वानखेड़े स्टेडियम की पिच हमेशा से बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग मानी जाती है। यहां की हार्ड और फ्लैट सतह गेंद को अच्छा बाउंस देती है, जिससे बल्लेबाज खुलकर शॉट खेल पाते हैं। हालांकि, शुरुआत में तेज गेंदबाजों को थोड़ी मदद मिल सकती है, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, बल्लेबाजी आसान हो जाती है। स्पिनर्स को बीच के ओवरों में थोड़ी मदद मिल सकती है, लेकिन यह ज्यादा प्रभावी नहीं रहती। मौसम की बात करें तो मैच के दौरान आसमान साफ रहेगा और तापमान लगभग 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। बारिश की कोई संभावना नहीं है, लेकिन शाम को ओस गिरने की उम्मीद है, जो दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। यही वजह है कि टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना पसंद कर सकती है। कुल मिलाकर यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है, जहां एक ओर मुंबई अपनी प्रतिष्ठा और प्लेऑफ की उम्मीदों को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकेगी, वहीं हैदराबाद जीत की रफ्तार को बनाए रखते हुए अंकतालिका में अपनी स्थिति और मजबूत करने की कोशिश करेगा।

गर्भावस्था में क्यों जरूरी है फोलिक एसिड? जानिए ‘प्रेग्नेंसी विटामिन’ का पूरा महत्व..

नई दिल्ली। गर्भावस्था का समय महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण माना जाता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनका सीधा असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों पर पड़ता है। ऐसे में संतुलित और पोषक आहार की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। इन्हीं पोषक तत्वों में फोलिक एसिड को विशेष स्थान दिया जाता है, जिसे अक्सर “प्रेग्नेंसी का विटामिन” कहा जाता है। फोलिक एसिड, विटामिन बी-9 का एक सिंथेटिक रूप है, जबकि इसका प्राकृतिक स्रोत फोलेट कहलाता है। यह शरीर में नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है और रक्त निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत बनाता है। गर्भावस्था के दौरान जब शिशु का तेजी से विकास होता है, तब यह पोषक तत्व उसकी वृद्धि में अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने बच्चे के सबसे महत्वपूर्ण विकास चरण होते हैं। इसी समय भ्रूण के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का निर्माण होता है। फोलिक एसिड इस प्रक्रिया में सहायक होता है और न्यूरल ट्यूब को सही तरीके से विकसित करने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर बच्चे में जन्म के समय विकास संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। फोलिक एसिड की कमी केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकती है। इसकी कमी से शरीर में कमजोरी, थकान, एनीमिया और सिरदर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यही कारण है कि डॉक्टर गर्भधारण से पहले ही फोलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं ताकि शरीर पहले से तैयार हो सके। यह पोषक तत्व कई प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक और मेथी, दालें, चना, मूंग और मसूर इसके अच्छे स्रोत हैं। इसके अलावा संतरा, अनार जैसे फल और बादाम-अखरोट जैसे सूखे मेवे भी शरीर में फोलिक एसिड की पूर्ति करते हैं। पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों में भी गर्भावस्था के दौरान विशेष आहार पर जोर दिया गया है। इस अवधि को संतुलित भोजन और सही जीवनशैली का समय माना जाता है, जिसमें शरीर को आवश्यक पोषण देने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन महत्वपूर्ण होता है। सही आहार न केवल मां के स्वास्थ्य को बनाए रखता है, बल्कि शिशु के समुचित विकास में भी मदद करता है। आज के समय में फोलिक एसिड को गर्भावस्था का अनिवार्य हिस्सा माना जाता है। यह न केवल बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास को मजबूती देता है, बल्कि मां को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसलिए इसे “प्रेग्नेंसी का विटामिन” कहा जाता है, क्योंकि यह आने वाले जीवन की नींव को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बुधवार पूजा विधि: धन, सौभाग्य और सफलता के लिए जरूर अपनाएं ये 5 नियम, वरना रुक सकती है किस्मत

नई दिल्ली| हिंदू धर्म में बुधवार का दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश और बुध ग्रह की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से न केवल बुद्धि का विकास होता है, बल्कि व्यापार, करियर और जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सफलता के रास्ते खुलते हैं। लेकिन अगर पूजा के दौरान छोटी-सी भी गलती हो जाए, तो इसका प्रभाव आपके भाग्य पर पड़ सकता है। इसलिए बुधवार की पूजा पूरी श्रद्धा और सही नियमों के साथ करना बेहद जरूरी है। बुधवार के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ और विशेष रूप से हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित कर उन्हें दूर्वा, मोदक और हरी मूंग अर्पित करें। घी और गुड़ का भोग लगाना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इन चीजों से गणेश जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि, बुद्धि और सफलता का आशीर्वाद देते हैं। हालांकि पूजा के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है। सबसे पहली बात, इस दिन काले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। इसके अलावा भगवान गणेश को कभी भी तुलसी पत्र अर्पित नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह पूजा में वर्जित माना गया है। साथ ही पूजा में टूटे हुए चावल यानी अक्षत का उपयोग न करें, बल्कि साबुत और स्वच्छ अक्षत ही चढ़ाएं। इसके अलावा चंदन, सफेद फूल या सफेद वस्त्र भी गणेश जी को अर्पित नहीं करने चाहिए। केतकी के फूल भी इस पूजा में निषिद्ध माने गए हैं। ध्यान रखें कि पूजा में कभी भी सूखे या मुरझाए फूलों का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे पूजा का प्रभाव कम हो सकता है। पूजा के बाद दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है। बुधवार की पूजा का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि मानसिक, बौद्धिक और आर्थिक उन्नति भी है। कहा जाता है कि इस दिन की गई सच्चे मन से पूजा व्यक्ति की सोच, बोलचाल और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाती है। साथ ही कुंडली में बुध ग्रह के दोष भी शांत होते हैं, जिससे जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं। अगर आप भी जीवन में सफलता, धन और सौभाग्य पाना चाहते हैं, तो बुधवार की पूजा को हल्के में न लें। सही विधि और नियमों के साथ की गई पूजा आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

बुधवार व्रत कब और कैसे शुरू करें? जानिए गणेश कृपा पाने के अचूक नियम और चमत्कारी लाभ

नई दिल्ली| सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है और बुधवार का दिन विशेष रूप से भगवान गणेश और बुध देव की पूजा के लिए शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे मन से इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करता है, उसके जीवन से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि आज के समय में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार व्रत का पालन करते हैं। अगर आप बुधवार व्रत शुरू करने की सोच रहे हैं, तो इसके लिए सबसे शुभ समय किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से माना जाता है। इस दिन विधिवत संकल्प लेकर व्रत की शुरुआत करनी चाहिए। मान्यता है कि व्रत को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए, इसलिए 7, 11 या 21 बुधवार का संकल्प लेकर ही व्रत शुरू करें। व्रत पूर्ण होने के बाद उद्यापन करना भी जरूरी माना गया है, तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। बुधवार व्रत की पूजा विधि भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के ईशान कोण में गंगाजल छिड़ककर एक स्वच्छ चौकी स्थापित करें और उस पर हरे रंग का कपड़ा बिछाएं। इस चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर पंचामृत से उनका अभिषेक करें और बुध देव का ध्यान करें। पूजा के दौरान कुमकुम, हल्दी, चंदन, फूल, सिंदूर आदि अर्पित करें और विशेष रूप से 11 दूर्वा चढ़ाना न भूलें। गणेश जी को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं, इसके बाद व्रत कथा सुनें और आरती करें। शाम के समय पुनः पूजा कर सात्विक भोजन ग्रहण करें। व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक माना गया है। इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए और केवल एक समय ही भोजन करना उचित होता है। व्रत में दही, हरी मूंग दाल का हलवा, फल और दूध का सेवन किया जा सकता है। साथ ही इस दिन किसी भी महिला या बेटी का अपमान करने से बचना चाहिए, अन्यथा गणेश जी की कृपा से वंचित रहना पड़ सकता है। बुधवार व्रत रखने से व्यक्ति को तीव्र बुद्धि, करियर में सफलता, आर्थिक मजबूती और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है। इतना ही नहीं, कुंडली में बुध ग्रह के अशुभ प्रभाव भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। आस्था और नियमों के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है।

8वां वेतन आयोग: महंगाई के बीच सैलरी बढ़ाने की मांग तेज, जानिए कैसे तय होती है कर्मचारियों की तनख्वाह

नई दिल्ली| देशभर में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत में लगातार हो रही वृद्धि के कारण अब कर्मचारी सैलरी में बड़े इजाफे की मांग कर रहे हैं। शिक्षक, पोस्टमैन समेत कई वर्गों का कहना है कि मौजूदा वेतन उनकी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है, ऐसे में सरकार को वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव करना चाहिए। कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने की है। फिटमेंट फैक्टर वह अहम फॉर्मूला होता है, जिसके जरिए पुरानी बेसिक सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 गुना रखा गया था, लेकिन अब कर्मचारी इसे बढ़ाकर 3.5 गुना या उससे अधिक करने की मांग कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में सीधा बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। सैलरी तय करने का गणित केवल फिटमेंट फैक्टर तक सीमित नहीं होता। इसके साथ महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे कई भत्ते भी जुड़े होते हैं, जो कुल वेतन को प्रभावित करते हैं। महंगाई भत्ता खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बढ़ती कीमतों के असर को संतुलित करने के लिए दिया जाता है। जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती है, DA में भी वृद्धि की जाती है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलती है। इसके अलावा, पे मैट्रिक्स सिस्टम के तहत हर कर्मचारी का एक लेवल तय होता है। इसी लेवल के आधार पर उसकी बेसिक सैलरी और प्रमोशन के बाद होने वाली बढ़ोतरी निर्धारित होती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस बार वेतन तय करते समय परिवार के वास्तविक खर्च को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि सैलरी मौजूदा आर्थिक हालात के अनुरूप हो। 8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को क्या फायदा मिल सकता है, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि अगर मांगों को माना गया, तो खासकर निचले स्तर के कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उनकी क्रय शक्ति भी बढ़ेगी, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक रूप से पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला केंद्र सरकार के हाथ में है और वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल, लाखों कर्मचारियों की नजर इस पर टिकी है कि सरकार उनकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।

छत्तीसगढ़ में 32 लाख राशन कार्ड पर संकट: 31 अक्टूबर तक E-KYC नहीं तो नवंबर से बंद होगा मुफ्त राशन

नई दिल्ली|Chhattisgarh के राशन कार्डधारकों के लिए एक बेहद अहम और सतर्क करने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन लोगों ने अभी तक अपने राशन कार्ड की E-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं कराई है, उन्हें 31 अक्टूबर के बाद बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। खाद्य विभाग के मुताबिक, यदि निर्धारित समय सीमा तक E-KYC नहीं कराई गई, तो नवंबर से ऐसे लाखों परिवारों को मिलने वाला मुफ्त राशन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 32 लाख राशन कार्डधारकों ने अब तक E-KYC नहीं कराई है। विभाग को आशंका है कि इनमें बड़ी संख्या में फर्जी या डुप्लीकेट कार्ड शामिल हो सकते हैं। यही वजह है कि सरकार अब इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ देने की दिशा में काम कर रही है। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जो लोग इस प्रक्रिया को नजरअंदाज कर रहे हैं, उन्हें राशन वितरण प्रणाली से बाहर किया जा सकता है। E-KYC की प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता लाना और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है। कई मामलों में यह सामने आया है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर कई राशन कार्ड बने होते हैं या ऐसे लोग भी लाभ उठा रहे होते हैं जो इसके पात्र नहीं हैं। इससे असली जरूरतमंदों को नुकसान होता है। E-KYC के जरिए आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल सही लोगों को ही सरकारी सहायता मिले। E-KYC कराने की प्रक्रिया काफी सरल रखी गई है। इसके लिए राशन कार्डधारकों को अपने परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड के साथ नजदीकी राशन दुकान पर जाना होगा। वहां बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिसमें फिंगरप्रिंट या अन्य पहचान के जरिए मिलान किया जाता है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होती है, आपकी E-KYC सफल मानी जाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि परिवार के हर सदस्य का सत्यापन जरूरी है, तभी राशन कार्ड पूरी तरह सक्रिय रहेगा। यदि कोई व्यक्ति 31 अक्टूबर तक E-KYC नहीं कराता है, तो उसका राशन कार्ड निष्क्रिय (Inactive) कर दिया जाएगा। ऐसे में नवंबर से उसे मुफ्त राशन जैसे चावल, नमक और शक्करका लाभ नहीं मिल पाएगा। इतना ही नहीं, बाद में कार्ड को दोबारा सक्रिय कराने के लिए नई प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, जो समय लेने वाली हो सकती है। खाद्य विभाग ने सभी राशन कार्डधारकों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और जल्द से जल्द E-KYC की प्रक्रिया पूरी कर लें। यह कदम न सिर्फ उनके राशन को सुरक्षित रखेगा, बल्कि पूरे सिस्टम को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में भी मदद करेगा।