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मोबाइल-टीवी की लत बना रही बच्चों का बचपन कैद: सेहत और दिमाग पर पड़ रहा गहरा असर

नई दिल्ली । आज के डिजिटल युग में जहां तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं इसका एक चिंताजनक पहलू भी तेजी से सामने आ रहा है—बच्चों में बढ़ती स्क्रीन की लत। घरों में अक्सर यह नजारा आम हो गया है कि बच्चे मैदान में खेलने के बजाय घंटों मोबाइल या टीवी स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं। शुरुआत में यह माता-पिता के लिए सुविधा का जरिया लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खतरा बन जाती है। व्यस्त जीवनशैली के चलते कई पेरेंट्स बच्चों को शांत रखने या खाना खिलाने के लिए उनके हाथ में मोबाइल दे देते हैं। यह तरीका भले ही तुरंत काम कर जाए, लेकिन लंबे समय में यह एक तरह की डिजिटल निर्भरता पैदा कर देता है। जब बच्चा स्क्रीन की दुनिया में खो जाता है, तो उसका वास्तविक दुनिया से जुड़ाव कम होने लगता है, जिससे उसके सामाजिक कौशल प्रभावित होते हैं। दोस्तों के साथ खेलना, बातचीत करना और भावनाओं को समझना—ये सभी क्षमताएं धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती हैं। स्क्रीन टाइम का असर बच्चों की सेहत पर भी साफ नजर आने लगा है। जहां पहले बच्चे घंटों बाहर खेलते थे, वहीं अब उनका समय वीडियो गेम और कार्टून में बीतता है। इस बदलाव के कारण मोटापा, आंखों में जलन, सूखापन और कम उम्र में चश्मा लगने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से रीढ़ की हड्डी पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट बच्चों की नींद को प्रभावित करती है, जिससे उनकी दिनचर्या बिगड़ जाती है और वे चिड़चिड़े व थके हुए महसूस करते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों के दिमागी विकास पर भी असर डालता है। उनकी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता घटने लगती है और वे जल्दी बोर या अधीर हो जाते हैं। डिजिटल कंटेंट की तेज गति उन्हें तुरंत परिणाम की आदत डाल देती है, जिससे धैर्य और एकाग्रता कमजोर हो जाती है। इसके साथ ही, वर्चुअल दुनिया में ज्यादा समय बिताने से बच्चों में सहानुभूति और सामाजिक समझ भी कम होने लगती है। हालांकि यह भी सच है कि आज के दौर में बच्चों को तकनीक से पूरी तरह दूर रखना संभव नहीं है। ऑनलाइन पढ़ाई, शैक्षणिक ऐप्स और जानकारी से भरपूर वीडियो उनके विकास के लिए जरूरी हैं। लेकिन असली चुनौती जरूरत और लत के बीच संतुलन बनाए रखने की है। तकनीक का उपयोग एक साधन के रूप में होना चाहिए, न कि आदत या निर्भरता के रूप में। इस समस्या से बचाव के लिए माता-पिता को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की एक निश्चित सीमा तय करना जरूरी है। इसके साथ ही उन्हें आउटडोर खेल, किताबें पढ़ने, पेंटिंग, संगीत या अन्य रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रोत्साहित करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे अपने बड़ों से सीखते हैं, इसलिए माता-पिता को खुद भी मोबाइल और स्क्रीन का सीमित उपयोग करना चाहिए। अगर समय रहते इस आदत पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह बच्चों के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि डिजिटल दुनिया और वास्तविक जीवन के बीच संतुलन बनाकर ही बच्चों का स्वस्थ और खुशहाल बचपन सुनिश्चित किया जाए।

30 अप्रैल राशिफल: किस्मत चमकेगी या बरतनी होगी सावधानी? जानें मेष से मीन तक का हाल

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 30 अप्रैल 2026, गुरुवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के चलते कई राशियों के लिए खास रहने वाला है। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन भगवान Lord Vishnu की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है, जिससे सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी राशियों का दिन कैसा रहेगा- मेष राशिलव लाइफ में सुधार के प्रयास सफल होंगे। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। सेहत अच्छी रहेगी, लेकिन विवादों से दूर रहें। वृषभ राशिसमझदारी से रिश्तों की चुनौतियों को सुलझाएंगे। करियर में सफलता मिलेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी, छोटी परेशानियां आ सकती हैं।  मिथुन राशिरोमांस के मामले में दिन शानदार रहेगा। करियर में नए मौके मिलेंगे और धन लाभ के योग हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा। कर्क राशि ईमानदारी से रिश्ते मजबूत होंगे। ऑफिस में चुनौतियां आएंगी, लेकिन आप उन्हें संभाल लेंगे। सेहत सामान्य रहेगी। सिंह राशिरिश्तों में सुधार की जरूरत है। पार्टनर के साथ समय बिताएं। काम में सफलता मिलेगी, लेकिन धन और स्वास्थ्य को लेकर सावधानी रखें। कन्या राशि पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ संतुलित रहेगी। ऑफिस में तारीफ मिलेगी। खान-पान का ध्यान रखें और खर्चों पर कंट्रोल करें। तुला राशिरिश्तों में अहंकार से बचें। कार्यक्षेत्र में मेहनत रंग लाएगी। आर्थिक मामलों में थोड़ी परेशानी हो सकती है। वृश्चिक राशि तनाव को काबू में रखें। ऑफिस में नए मौके मिलेंगे। सेहत को लेकर सतर्क रहें और रिश्तों के लिए समय निकालें। धनु राशि लव लाइफ में खुशियां आएंगी। करियर में अच्छे अवसर मिलेंगे। धन और सेहत दोनों पक्ष मजबूत रहेंगे। मकर राशिरिश्तों में खुशी बनी रहेगी और काम में प्रोडक्टिव रहेंगे। निवेश के नए मौके मिल सकते हैं। सेहत पर ध्यान दें।  कुंभ राशिनौकरी में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। रिश्तों में समय देना जरूरी है। हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने से फायदा होगा और धन लाभ के योग हैं। मीन राशिरिश्तों में सावधानी रखें। कार्यक्षेत्र में आपका व्यवहार महत्वपूर्ण रहेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और सेहत अच्छी रहेगी।  कुल मिलाकर, 30 अप्रैल का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर लेकर आएगा, जबकि कुछ को सोच-समझकर कदम बढ़ाने की जरूरत होगी।

गुरुवार के रामबाण उपाय: शादी में आ रही रुकावटें होंगी दूर, धन की बरसात के बनेंगे योग

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन बेहद शुभ माना जाता है। यह दिन देवगुरु Brihaspati और भगवान Lord Vishnu को समर्पित होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर हो, तो उसे धन की कमी, करियर में रुकावट और विवाह में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गुरुवार के दिन किए गए कुछ सरल उपाय जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। धन प्राप्ति के लिए उपायगुरुवार सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद Brihaspati को हल्दी, चने की दाल और गुड़ अर्पित करें। फिर “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। मान्यता है कि इससे रुका हुआ धन मिलने लगता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। नौकरी और प्रमोशन के उपाअगर करियर में तरक्की नहीं मिल रही है, तो गुरुवार के दिन गाय को पीली दाल और गुड़ खिलाएं। यह उपाय निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है और नौकरी में प्रमोशन के रास्ते खोलता है। विवाह में देरी दूर करने के उपाविवाह में रुकावट आ रही है तो गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करें। पेड़ की जड़ में जल, हल्दी, चने की दाल और पीले फूल अर्पित करें। ऐसा करने से शादी में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी मिलने के योग बनते हैं। साथ ही, गाय को केला खिलाना भी शुभ माना जाता है। सफलता और सौभाग्य के उपागुरुवार के दिन केसर या हल्दी का तिलक लगाएं। इससे Brihaspati की कृपा प्राप्त होती है और हर कार्य में सफलता मिलने लगती है। इसके अलावा किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को पीला भोजन कराने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। गुरुवार को क्या न करेंइस दिन पैसों का लेन-देन करने से बचेंतामसिक भोजन (मांस-मदिरा) का सेवन न करेंगुरुजनों और बड़ों का अपमान न करेंबाल और नाखून काटने से परहेज करें अगर आप जीवन में धन, सफलता और शादी से जुड़ी समस्याओं से परेशान हैं, तो गुरुवार के ये आसान उपाय आपके लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।

आज का मकर राशिफल 30 अप्रैल 2026: नए संपर्क बनेंगे, बढ़ेगा मान-सम्मान

नई दिल्ली। 30 अप्रैल 2026 का दिन मकर राशि वालों के लिए सकारात्मक ऊर्जा लेकर आ रहा है। आज आप अपने व्यवहार और समझदारी से लोगों का दिल जीतने में सफल रहेंगे। खासतौर पर सामाजिक दायरा बढ़ेगा और नए संपर्क बनने की पूरी संभावना है, जो भविष्य में आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। करियर और व्यापारकार्यस्थल पर आपका प्रदर्शन सराहनीय रहेगा। नए प्रोजेक्ट्स या जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। अगर आप बिजनेस करते हैं, तो किसी नए व्यक्ति से जुड़ाव भविष्य में लाभ दिला सकता है। ऑफिस पॉलिटिक्स से दूर रहकर अपने काम पर फोकस करना बेहतर रहेगा। आर्थिक स्थिति आर्थिक रूप से दिन संतुलित रहेगा। अचानक धन लाभ के छोटे मौके मिल सकते हैं। निवेश करने से पहले सोच-समझकर निर्णय लें, खासकर लंबी अवधि के प्लान पर ध्यान दें। प्रेम और संबंधरिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। परिवार और पार्टनर के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। नए लोगों से मुलाकात आपकी पर्सनल लाइफ को भी सकारात्मक दिशा दे सकती है। स्वास्थ्यसेहत सामान्य रहेगी, लेकिन भागदौड़ के कारण थकान महसूस हो सकती है। पर्याप्त आराम और संतुलित खान-पान जरूरी है। कुल मिलाकर, मकर राशि वालों के लिए यह दिन नेटवर्किंग और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ाने का है। सही लोगों से जुड़ाव आपके भविष्य के रास्ते खोल सकता है।

यूडीए अध्यक्ष बने डॉ. रवि सोलंकी, गोशाला में हुआ भव्य सम्मान: गो सेवा से की नई पारी की शुरुआत

नई दिल्ली। उज्जैन में उज्जैन विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी ने अपने कार्यकाल की शुरुआत धार्मिक और सामाजिक संदेश के साथ की। रिंग रोड स्थित तिलकेश्वर गोशाला में उनका भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जहां उन्होंने गो सेवा कर नई जिम्मेदारी का शुभारंभ किया। मंगलवार शाम पदभार ग्रहण करने के बाद डॉ. सोलंकी अगले ही दिन गोशाला पहुंचे। यहां उन्होंने गो माता को चना खिलाकर आशीर्वाद लिया और समाज को गो सेवा का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। निशांत यादव और रोहित मित्तल मंडल की ओर से डॉ. सोलंकी को महाकाल का दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समाजसेवी नारायण यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे। आयोजन में ढोल-नगाड़ों की गूंज और आतिशबाजी के बीच उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। सम्मान समारोह में डॉ. रवि सोलंकी ने कहा कि वे अपने पद की जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाएंगे। उन्होंने उज्जैन के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प दोहराया और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की बात कही। इस मौके पर अभय यादव, मुन्ना सरकार, नीलेश यादव, अशोक जैन, राजेश मेवाड़े, विकास यादव, रवि दरब, जय किशन खत्री, हरीश, पंकज धनोतिया, मुकुल सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

उज्जैन में महाकाल की दिव्य भस्म आरती: रजत चंद्र, भांग-चंदन से सजा बाबा का अद्भुत श्रृंगार

नई दिल्ली। उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में गुरुवार तड़के बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई, जहां श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह ठीक 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित देव प्रतिमाओं का विधिवत पूजन शुरू किया। पूजा की शुरुआत जलाभिषेक से हुई, जिसके बाद भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से स्नान कराने के दौरान ‘हरि ओम’ के मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। प्रथम घंटाल बजते ही श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। अभिषेक के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर विधिवत भस्म अर्पित की गई। इसके पश्चात शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित फूलों से बाबा को सजाया गया। कपूर आरती के बाद जटाधारी स्वरूप में भगवान महाकाल का दिव्य रूप सामने आया। श्रृंगार के दौरान बाबा के मस्तक पर रजत चंद्र, भांग, चंदन और गुलाब की मालाएं अर्पित की गईं। त्रिपुण्ड धारण कर भगवान को राजसी स्वरूप दिया गया। इसके साथ ही भांग, ड्रायफ्रूट, आभूषण और पुष्पों से सुसज्जित कर उन्हें राजा के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। गुलाब के फूलों की सुगंध से महकते मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। जैसे ही भस्म आरती पूर्ण हुई, भक्तों ने बाबा के दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आरती के अंत में भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल की भस्म आरती का विशेष महत्व माना जाता है और देशभर से श्रद्धालु इस अद्वितीय अनुष्ठान के साक्षी बनने उज्जैन पहुंचते हैं

ग्वालियर में मेधावी सपनों का दर्दनाक अंत: 11वीं की छात्रा ने खुद को मारी गोली, सुसाइड नोट में लिखा- 'नहीं कर सकी परिवार का नाम रोशन'

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक ऐसा हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसने आधुनिक शिक्षा प्रणाली और बच्चों पर बढ़ते मानसिक दबाव को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के घोसीपुरा इलाके में रहने वाली 17 वर्षीय छात्रा ट्विंकल ने परीक्षा में कम अंक आने के अवसाद में आकर मौत को गले लगा लिया। आईटीबीपी (ITBP) जवान की बेटी ने बुधवार तड़के अपने ही घर में पिता की लाइसेंसी पिस्तौल से खुद के सीने में गोली मार ली। जब तक परिजन उसे अस्पताल ले जाते, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। सपनों का बोझ और एक घातक फैसलाघटना बुधवार सुबह करीब 7 बजे की है। गिरराज जी मंदिर के पास रहने वाले श्याम कुमार अहिरवार के घर में सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक एक धमाके ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। ट्विंकल अपनी मां के साथ सोई थी, लेकिन सुबह उठकर वह दूसरे कमरे में चली गई। जैसे ही गोली चलने की आवाज आई, परिजन बदहवास होकर कमरे की ओर दौड़े, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की से झांकने पर जो मंजर दिखा उसने सबके पैरों तले जमीन खिसका दी। ट्विंकल लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़ी थी और पास ही उसके पिता की रिवॉल्वर पड़ी थी। सुसाइड नोट: “गुड बाय… कम नंबर आए हैं”पुलिस को मौके से छात्रा का एक रजिस्टर मिला है, जो अब उसकी आखिरी याद बन गया है। इस रजिस्टर में अंग्रेजी में लिखे चार लाइनों के सुसाइड नोट ने पुलिस और परिजनों की आंखों में आंसू ला दिए। ट्विंकल ने लिखा, “मेरे कम मार्क्स आए हैं। मैं परिवार का नाम रोशन नहीं कर सकी, इसलिए यह कदम उठा रही हूं। गुड बाय।” यह चंद शब्द बताते हैं कि एक किशोर मन पर ‘सफलता’ का कितना भारी दबाव था कि उसने जीवन को ही हार मान लिया। दो दिन पहले आए 11वीं के रिजल्ट ने उसे इतना तोड़ दिया था कि उसने अपनी प्रतिभा और भविष्य की जगह मौत को चुनना बेहतर समझा। जांच में जुटी पुलिस और फोरेंसिक टीमघटना की सूचना मिलते ही बहोड़ापुर थाना प्रभारी और सीएसपी कृष्णपाल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और फिंगरप्रिंट टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने वह रजिस्टर और हथियार जब्त कर लिया है जिससे छात्रा ने खुदकुशी की। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट है कि छात्रा रिजल्ट के बाद से ही गुमसुम थी और गहरे मानसिक तनाव से गुजर रही थी। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। बच्चों की उपलब्धियों को केवल अंकों के तराजू पर तौलने की प्रवृत्ति आज मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रही है। ग्वालियर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संवाद की कमी और ‘नाम रोशन’ करने का अनकहा दबाव किसी भी हंसते-खेलते घर का चिराग बुझा सकता है।

MP में बीजेपी का ‘मेगा एडजस्टमेंट प्लान’: 31 विभागों की समितियों में 10,500 कार्यकर्ताओं को मिलेगा मौका

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी ने एक व्यापक ‘कार्यकर्ता एडजस्टमेंट अभियान’ शुरू किया है। इस रणनीति के तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में विभिन्न सरकारी समितियों और बोर्डों के जरिए करीब 10,500 से अधिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। यह पहल न केवल संगठन को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है, बल्कि जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ को भी और सुदृढ़ करेगी। पिछले एक सप्ताह से निगम-मंडलों में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है और अब इसे जिला स्तर तक विस्तार दिया जा रहा है। पार्टी का फोकस पंचायत से लेकर जिला स्तर तक सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक ढांचे में शामिल करना है, ताकि वे सीधे शासन-प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें। इसके लिए 31 विभागों के अंतर्गत 70 से अधिक प्रकार की समितियों का गठन किया जा रहा है। हर जिले में प्रभारी मंत्रियों को नियुक्तियों की जिम्मेदारी दी गई है। वे जिला स्तर के कोर ग्रुप के साथ मिलकर योग्य कार्यकर्ताओं के नामों का चयन कर रहे हैं। यह प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में है और मुख्यमंत्री कार्यालय से इसकी लगातार निगरानी की जा रही है। दरअसल, 27 जनवरी को ही इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए थे, जिसके बाद अब तेजी से अमल शुरू हुआ है। यदि औसतन आंकलन किया जाए तो हर जिले में लगभग 190 से 200 सदस्यों को विभिन्न समितियों में जगह मिलेगी। इस तरह पूरे प्रदेश में हजारों कार्यकर्ता प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ेंगे। यह संख्या पंचायत और ब्लॉक स्तर को जोड़ने पर और भी बढ़ सकती है। विभागवार देखें तो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की 8 समितियों में ‘दिशा’, जल स्वच्छता और युवा ग्राम शक्ति जैसी इकाइयां प्रमुख हैं। वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय समितियों में हर जिले से करीब 9 सदस्यों की नियुक्ति होगी। उच्च शिक्षा की जनभागीदारी समितियों में प्रति कॉलेज एक अध्यक्ष और 13 सदस्यों को शामिल किया जाएगा, जो कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा अवसर होगा। सामाजिक न्याय, योजना एवं सांख्यिकी विभाग की समितियों में भी बड़ी संख्या में पद उपलब्ध हैं। जिला अंत्योदय समिति में 10 से 30 तक सदस्य नियुक्त किए जा सकते हैं। नगरीय निकायों की समितियों में भी 5 से 21 सदस्यों का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा जेल, पुलिस, तकनीकी शिक्षा, खेल और पीएचई विभागों में भी विभिन्न समितियों के माध्यम से नियुक्तियां की जाएंगी। आर्थिक और विकास से जुड़े विभागों में भी कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाएगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, उद्योग, कृषि और उद्यानिकी विभागों की समितियां इस अभियान का अहम हिस्सा हैं। इन सभी नियुक्तियों में प्रभारी मंत्रियों की सिफारिश और कोर ग्रुप की सहमति को प्राथमिकता दी जा रही है।बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कहना है कि हर नियुक्ति में सर्वसम्मति सुनिश्चित की जा रही है, ताकि योग्य कार्यकर्ताओं को सही स्थान मिल सके। आने वाले कुछ हफ्तों में सभी जिलों की सूची अंतिम रूप ले लेगी और इसके साथ ही प्रदेश में बीजेपी का संगठनात्मक ढांचा और अधिक सक्रिय नजर आएगा।

MP का पहला सरकारी IVF सेंटर तैयार, लेकिन लाइसेंस का इंतजार: आधे खर्च में मिलेगी बड़ी राहत

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के नि:संतान दंपतियों के लिए राहत भरी खबर के साथ एक निराशाजनक पहलू भी सामने आया है। राजधानी Bhopal स्थित AIIMS Bhopal में प्रदेश का पहला सरकारी IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) सेंटर पूरी तरह तैयार हो चुका है। यहां हाईटेक मशीनें स्थापित कर दी गई हैं और भ्रूण इंप्लांट करने वाले विशेषज्ञ एम्ब्रायोलॉजिस्ट की नियुक्ति भी हो चुकी है। इसके बावजूद सेंटर अभी शुरू नहीं हो पाया है, क्योंकि संचालन के लिए जरूरी लाइसेंस का इंतजार है। संस्थान प्रबंधन का कहना है कि लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया गया है और प्रक्रिया अंतिम चरण में है। गौरतलब है कि इस सेंटर की घोषणा साल 2022 में की गई थी, लेकिन चार साल बाद भी इसकी शुरुआत अधूरी है। आधे खर्च में मिलेगा इलाज, हजारों दंपतियों को राहतइस सेंटर की सबसे बड़ी खासियत इसकी किफायती लागत है। अभी प्रदेश में करीब 10 हजार दंपती हर साल निजी क्लीनिकों में IVF कराते हैं, जहां एक साइकिल का खर्च 1.5 लाख से 3 लाख रुपए तक पहुंच जाता है। वहीं AIIMS Bhopal में यही इलाज करीब 50 हजार से 75 हजार रुपए में उपलब्ध होगा। दिल्ली और रायपुर के बाद यह देश का तीसरा और मध्य प्रदेश का पहला सरकारी IVF सेंटर होगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए लगभग 20 करोड़ रुपए का बजट भी मंजूर किया है, जिससे अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। हाईटेक सुविधाएं और एडवांस तकनीकइस सेंटर में IVF, ICSI, IUI, टेस्ट ट्यूब बेबी जैसी आधुनिक प्रजनन तकनीकों की पूरी सुविधा होगी। साथ ही एम्ब्रियो फ्रीजिंग, हाई-एंड इन्क्यूबेटर और एडवांस लैब भी तैयार की गई है। खास बात यह है कि यहां डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए डिजिटल स्किल लैब बनाई गई है, जिसमें एआई आधारित सिम्युलेटर के जरिए भ्रूण ट्रांसफर और अन्य प्रक्रियाओं की ट्रेनिंग दी जाएगी। घटती प्रजनन दर से बढ़ी IVF की मांगमध्य प्रदेश में पिछले 10 सालों में फर्टिलिटी रेट में करीब 12.8% की गिरावट दर्ज की गई है। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण कई दंपतियों को माता-पिता बनने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि IVF जैसी तकनीकों की मांग तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि IVF की सफलता महिला की उम्र पर निर्भर करती है, इसलिए समय पर इलाज शुरू करना बेहद जरूरी होता है।  नियम सख्त, लेकिन उम्मीद बरकरारIVF को लेकर सरकार ने कई सख्त नियम भी लागू किए हैं। महिला की अधिकतम उम्र 50 साल और पुरुष की 55 साल तय की गई है। एक बार में केवल दो भ्रूण ही ट्रांसफर किए जा सकते हैं और हर प्रक्रिया की रिपोर्ट संबंधित समितियों को भेजना अनिवार्य है। इंतजार खत्म होते ही बदलेगी तस्वीरअगर जल्द ही लाइसेंस मिल जाता है, तो यह सेंटर हजारों दंपतियों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित होगा। कम खर्च में बेहतर इलाज की सुविधा मिलने से न सिर्फ आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि कई परिवारों का सपना भी पूरा हो सकेगा

धार में भीषण सड़क हादसा: पिकअप पलटने से 16 की मौत, 6 बच्चे भी शामिल; कई गंभीर घायल

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Dhar जिले में बुधवार रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हो गया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। जानकारी के मुताबिक, इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर चिकलिया फाटा के पास एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन का टायर अचानक फट गया, जिससे चालक का नियंत्रण वाहन से हट गया। अनियंत्रित पिकअप डिवाइडर पार करते हुए दूसरी लेन में जा पहुंचा और सामने से आ रही स्कॉर्पियो से टकरा गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि पिकअप वाहन 3-4 बार पलट गया और सड़क पर चीख-पुकार मच गई।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के वक्त पिकअप की रफ्तार करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटा थी और उसमें बड़ी संख्या में मजदूर सवार थे। टायर फटने के बाद वाहन बेकाबू होकर सीधे हादसे का शिकार हो गया, जिससे मौके पर ही कई लोगों की जान चली गई। 16 लोगों की मौत, बच्चों समेत कई परिवार उजड़ेइस दर्दनाक हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें 6 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा 13 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 7 की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें बेहतर इलाज के लिए Indore रेफर किया गया है। अन्य घायलों का इलाज स्थानीय और निजी अस्पतालों में जारी है।हादसे ने कई परिवारों को एक झटके में उजाड़ दिया है। मृतकों में महिलाएं, बच्चे और युवा शामिल हैं, जिससे गांवों में मातम का माहौल है। प्रशासन ने घायलों के इलाज के लिए अस्पतालों में विशेष इंतजाम किए हैं और डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है।  प्रशासन अलर्ट, राहत और इलाज की व्यवस्थाइंदौर संभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सभी घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अस्पतालों में फ्रैक्चर और गंभीर चोटों के इलाज के लिए जरूरी संसाधन जुटाए गए हैं। इंदौर में भी मेडिकल टीम को अलर्ट पर रखा गया है ताकि रेफर किए गए मरीजों का बेहतर इलाज हो सके।  सरकार का ऐलान: मृतकों के परिजनों को मुआवजाइस हादसे पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गहरा दुख व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2-2 लाख रुपए तथा घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है।वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए, गंभीर घायलों को 1-1 लाख रुपए और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी घायलों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। तेज रफ्तार और लापरवाही बनी जानलेवायह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार के खतरों की गंभीरता को उजागर करता है। एक छोटी सी चूक या तकनीकी खराबी किस तरह बड़ी त्रासदी में बदल सकती है, यह घटना उसका दर्दनाक उदाहरण है।