हेड-क्लासेन का कहर, मुंबई पस्त: IPL इतिहास का चौथा सबसे बड़ा रनचेज

नई दिल्ली । सनराइजर्स हैदराबाद ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए हाई-स्कोरिंग मुकाबले में शानदार जीत दर्ज करते हुए आईपीएल इतिहास में अपना नाम और मजबूत कर लिया। 244 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए हैदराबाद ने महज 18.4 ओवर में चार विकेट खोकर 249 रन बनाते हुए मुकाबला छह विकेट से अपने नाम कर लिया। यह आईपीएल इतिहास का चौथा सबसे बड़ा सफल रनचेज बन गया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मुंबई इंडियंस ने विस्फोटक अंदाज में रन बटोरे। टीम की ओर से रेयान रिकेल्टन ने शानदार शतक जड़ा और 55 गेंदों में 123 रन बनाकर नाबाद रहे। उनकी इस पारी में चौकों-छक्कों की झड़ी देखने को मिली। शुरुआत में विल जैक्स ने भी 46 रन की तेज पारी खेली, जिससे टीम ने 20 ओवर में 243 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। कप्तान हार्दिक पांड्या ने भी 31 रन का योगदान दिया। हालांकि इतना बड़ा स्कोर भी मुंबई के लिए नाकाफी साबित हुआ। जवाब में हैदराबाद की शुरुआत बेहद धमाकेदार रही। ट्रेविस हेड और अभिषेक शर्मा ने पहले विकेट के लिए तेजी से रन जोड़े। हेड ने सिर्फ 30 गेंदों में 76 रन की विस्फोटक पारी खेली, जबकि अभिषेक ने 45 रन बनाए। मध्यक्रम में हेनरिक क्लासेन ने जिम्मेदारी संभाली और 30 गेंदों में नाबाद 65 रन बनाकर टीम को जीत की ओर ले गए। उनके साथ नीतीश रेड्डी और सलिल अरोड़ा ने अहम साझेदारियां निभाईं, जिससे टीम ने लक्ष्य को बेहद आसानी से हासिल कर लिया। इस जीत के साथ हैदराबाद ने लगातार पांचवीं जीत दर्ज की और अंक तालिका में 12 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गई। वहीं मुंबई इंडियंस की यह आठ मैचों में छठी हार रही, जिससे टीम नौवें स्थान पर खिसक गई है और प्लेऑफ की राह अब मुश्किल नजर आ रही है। यह मुकाबला आईपीएल के इतिहास के सबसे रोमांचक मैचों में से एक बन गया, जहां बल्लेबाजों का दबदबा पूरी तरह देखने को मिला। इस मैच ने एक बार फिर साबित कर दिया कि टी20 क्रिकेट में कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता, अगर बल्लेबाजी में दम और रणनीति में सटीकता हो।
तेज, सटीक और घातक कार्रवाई: 22 मिनट में खत्म हुआ आतंकियों का नेटवर्क

नई दिल्ली । भारतीय सेना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर साझा किए गए नए वीडियो ने न केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति का भी संदेश दिया है। महज 22 मिनट में अंजाम दिए गए इस ऑपरेशन ने आतंकियों के पूरे कमांड ढांचे को हिलाकर रख दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए आधिकारिक पोस्ट में सेना ने साफ शब्दों में कहा कि जब मानवता की सीमाएं पार होती हैं तो प्रतिक्रिया भी उतनी ही निर्णायक होती है। यह संदेश न केवल चेतावनी है बल्कि उन ताकतों के लिए संकेत भी है जो भारत की शांति और सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश करते हैं। सेना के अनुसार, इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी गति और सटीकता रही। बेहद कम समय में कई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाते हुए आतंकियों के नेटवर्क को गहरा नुकसान पहुंचाया गया। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे आधुनिक तकनीक और सटीक रणनीति के साथ अलग-अलग टारगेट्स पर समन्वित तरीके से कार्रवाई की गई। इससे यह साफ होता है कि ऑपरेशन की योजना बेहद बारीकी से बनाई गई थी और उसे उसी स्तर की दक्षता के साथ लागू किया गया। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आतंकियों के नेतृत्व तंत्र को खत्म करना था, जिसे सेना ने सफलतापूर्वक पूरा किया। कमांड स्ट्रक्चर पर सीधे प्रहार से आतंकियों की गतिविधियों को गंभीर झटका लगा है। इस तरह की कार्रवाई यह दिखाती है कि भारतीय सेना न केवल रक्षात्मक बल्कि आक्रामक रणनीति में भी पूरी तरह सक्षम है। नए वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में इस ऑपरेशन को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ऑपरेशन भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को और मजबूत करेंगे। यह भी संकेत मिलता है कि सेना अब तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत हो चुकी है, जिससे कम समय में बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम के जरिए भारतीय सेना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि देश के खिलाफ किसी भी साजिश का जवाब तुरंत और प्रभावी तरीके से दिया जाएगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता न केवल सैन्य ताकत का प्रदर्शन है बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है और हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।
Bhopal Tender Irregularity: 1.20 करोड़ का टेंडर रद्द करने पर, मुरैना नगर निगम कमिश्नर को कारण बताओ नोटिस जारी

HIGHLIGHTS : मुरैना नगर निगम कमिश्नर को कारण बताओ नोटिस 1.20 करोड़ का टेंडर रद्द करने पर विवाद RTI में जानकारी न देने पर मामला भोपाल पहुंचा ठेकेदार ने लगाए 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप लोकायुक्त, EOW और कोर्ट तक पहुंचा मामला Bhopal Tender Irregularity: ग्वालियर। मुरैना नगर निगम के कमिश्नर को भोपाल स्थित नगरीय प्रशासन आयुक्त कार्यालय से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में 7 दिन के भीतर तथ्यों के साथ जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। मामला सदर बाजार के सौंदर्यीकरण के लिए वर्ष 2025 में जारी किए गए टेंडर को अचानक रद्द करने से जुड़ा है, जिस पर शिकायत के बाद यह कार्रवाई हुई है। US: मैक्सिको के बड़े नेताओं-अधिकारियों पर ड्रग तस्करी के आरोप, गवर्नर समेत 10 पर केस दर्ज बिना कारण टेंडर किया रद्द आरोप है कि जिस फर्म का टेंडर विधिवत खुला और चयनित हुआ था, उसे एग्रीमेंट से ठीक पहले बिना किसी नोटिस के रद्द कर दिया गया। फर्म ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी, लेकिन नगर निगम ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद मामला भोपाल तक पहुंचा, जहां से अब नोटिस जारी किया गया है। अमेरिकी नाकाबंदी से रुका निर्यात…. ईरान पुराने और कबाड़ टैंकों में स्टोर कर रहा तेल कमिश्नर पर भ्रष्टाचार के आरोप शिकायतकर्ता जेएम कंस्ट्रक्शन के संचालक अनिल गुर्जर ने आरोप लगाया है कि टेंडर रद्द करने के पीछे भ्रष्टाचार है। उनका कहना है कि उनसे एग्रीमेंट से पहले 5 लाख रुपए की मांग की गई थी, जो उन्होंने नहीं दी। इसके बाद उनका टेंडर रद्द कर दिया गया। उन्होंने लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में भी शिकायत दर्ज कराई है, साथ ही कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी से ग्लोबल मार्केट में उथल-पुथल …. कच्चा तेल 120 डॉलर के पार कमिश्नर बोले- फाइल देखकर देंगे जवाब नगर निगम कमिश्नर सतेंद्र सिंह धाकरे ने कहा कि नोटिस मिला है, लेकिन पूरी जानकारी फाइल देखने के बाद ही दी जा सकेगी। वहीं महापौर शारदा सोलंकी ने इस मामले से खुद को अलग बताते हुए कहा कि टेंडर से जुड़े सभी निर्णय कमिश्नर स्तर पर होते हैं। अब सभी की नजर 7 दिन बाद आने वाले जवाब पर टिकी है।
कर्ज, टूटन और मौत के बीच लिखा गया अमर गीत, बेटे ने पूरा किया पिता का सपना

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में कई ऐसे गीत बने हैं जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि इंसानी भावनाओं की गहराई को भी छूते हैं। ऐसा ही एक गीत है जीना यहां मरना यहां जो मेरा नाम जोकर का हिस्सा है। यह गीत आज भी लोगों के दिलों में बसता है और हर बार सुनने पर आंखें नम कर देता है। लेकिन इस गीत के पीछे की कहानी जितनी भावुक है उतनी ही दर्दनाक भी है। इस अमर गीत को आवाज दी थी मुकेश ने और इसके संगीतकार थे शंकर जयकिशन। लेकिन इस गीत की आत्मा थे इसके गीतकार शैलेंद्र जिन्होंने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में इसे लिखा। कहा जाता है कि यह गीत उनके निजी दर्द और संघर्ष का आईना है। दरअसल शैलेंद्र ने अपने करियर में एक फिल्म तीसरी कसम बनाई थी जिसे लेकर उन्हें काफी उम्मीदें थीं। लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस असफलता ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया। कर्ज का बोझ बढ़ता गया और मानसिक तनाव ने उन्हें घेर लिया। इसी दौर में उनके करीबी दोस्त राज कपूर ने उनसे अपनी फिल्म के लिए गीत लिखने का आग्रह किया। जब शैलेंद्र राज कपूर से मिलने पहुंचे तो वे बेहद शांत और टूटे हुए नजर आए। राज कपूर ने फिल्म की कहानी और भावनाएं साझा कीं। उसी समय शैलेंद्र ने कागज पर गीत की शुरुआती पंक्तियां लिखीं। यह वही पंक्तियां थीं जो आगे चलकर इतिहास बन गईं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। गीत पूरा होने से पहले ही शैलेंद्र की तबीयत बिगड़ गई और उनका निधन हो गया। उनके जाने से न केवल फिल्म जगत बल्कि राज कपूर भी गहरे सदमे में आ गए। राज कपूर इस गीत को अधूरा नहीं छोड़ना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने शैलेंद्र के बेटे शैली शैलेंद्र को यह जिम्मेदारी सौंपी। बेटे ने पिता के अधूरे शब्दों को पूरा किया और इस गीत को एक मुकाम तक पहुंचाया। यह सिर्फ एक गीत नहीं रहा बल्कि पिता-पुत्र के भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गया। फिल्म खुद भी संघर्ष की कहानी रही। राज कपूर ने इसे बनाने में अपनी पूरी पूंजी लगा दी यहां तक कि अपना घर भी गिरवी रख दिया। फिल्म बनने में करीब छह साल लगे लेकिन रिलीज के बाद यह बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो पाई। हालांकि समय के साथ यह फिल्म और इसका संगीत क्लासिक बन गया। आज जीना यहां मरना यहां सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि जीवन की सच्चाई और संघर्ष की कहानी बन चुका है। यह हमें याद दिलाता है कि कभी-कभी सबसे खूबसूरत कला सबसे गहरे दर्द से जन्म लेती है।
US: मैक्सिको के बड़े नेताओं-अधिकारियों पर ड्रग तस्करी के आरोप, गवर्नर समेत 10 पर केस दर्ज

न्यूयॉर्क । अमेरिका (America) में मैक्सिको (Mexico) के कई बड़े नेताओं और अधिकारियों पर ड्रग तस्करी (Drug smuggling) के गंभीर आरोप लगे हैं। न्यूयॉर्क की एक अदालत में दाखिल आरोपपत्र में इन अधिकारियों पर अमेरिका में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भेजने और हथियारों से जुड़े अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मैक्सिको के सीनालोआ राज्य (Sinaloa State.) के गवर्नर रुबेन रोचा मोया (Governor Ruben Rocha Moya) और नौ अन्य मौजूदा व पूर्व सरकारी अधिकारी इस मामले में आरोपी बनाए गए हैं। इन सभी पर ड्रग तस्करी और हथियारों से जुड़े अपराधों का केस दर्ज किया गया है। हालांकि अभी तक इनमें से किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। ड्रग कार्टेल से गहरे संबंध का आरोपआरोपपत्र में कहा गया है कि ये अधिकारी कुख्यात सिनालोआ कार्टेल के साथ मिलकर काम कर रहे थे। यह कार्टेल लंबे समय से अमेरिका में फेंटेनिल, हेरोइन, कोकीन और मेथामफेटामाइन जैसी खतरनाक ड्रग्स की तस्करी करता रहा है। बताया गया है कि कुछ आरोपी इस कार्टेल की हिंसक गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं। ‘एल चापो’ के बेटों से जुड़ा नेटवर्कजांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी उस गुट से जुड़े थे, जिसे कुख्यात ड्रग माफिया जोकिन ‘एल चापो’ गुजमैन के बेटे चलाते हैं। ‘एल चापो’ पहले ही अमेरिका की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। अमेरिका का बड़ा बयानअमेरिका के अटॉर्नी जे क्लेटन ने सीनालोआ कार्टेल को ‘बेहद खतरनाक आपराधिक संगठन’ बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्टेल दशकों से अमेरिका में ड्रग्स फैलाता रहा है और भ्रष्ट नेताओं व अधिकारियों की मदद के बिना यह संभव नहीं होता। इस मामले में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनमें से कुछ मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम की पार्टी ‘मोरेना’ से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि अन्य कई आरोपी किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं। मैक्सिको की सरकार ने आरोपों को नकारामैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने इन आरोपों को लेकर कहा कि उनकी सरकार को अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में किसी मैक्सिकन नागरिक के खिलाफ जांच होती है, तो उसके सबूत मैक्सिको की अटॉर्नी जनरल ऑफिस के साथ साझा किए जाने चाहिए। भ्रष्टाचार के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाईइस मामले से पहले अमेरिका के मैक्सिको में राजदूत रॉन जॉनसन ने संकेत दिया था कि अमेरिका मैक्सिको के उन अधिकारियों के खिलाफ अभियान चलाएगा, जिनके संबंध संगठित अपराध से हैं।
अमेरिकी नाकाबंदी से रुका निर्यात…. ईरान पुराने और कबाड़ टैंकों में स्टोर कर रहा तेल

तेहरान। ईरान (Iran) अपने तेल (Oil) को इकट्ठा करने के लिए नए तरीके खोजने में जुटा है। अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी (American naval blockade) ने उसके निर्यात (Export) को लगभग रोक दिया है। ईरान पूरी तरह उत्पादन बंद करना नहीं चाहता। ऐसे में वह पुराने और कबाड़ टैंकों में बिना बिके तेल को भरने में जुटा है। ईरान के भीतर तेल का भंडार बढ़ने के साथ ही वह अब जंक स्टोरेज (कबाड़ भंडारण) के रूप में जाने जाने वाले पुराने स्थलों को फिर से चालू कर रहा है। वह कामचलाऊ कंटेनरों का उपयोग कर रहा है। इसके साथ ही रेल के जरिये चीन को कच्चा तेल भेजने की कोशिश भी कर रहा है। वह किसी टैंक, जहाज, कामचलाऊ जगह या फिर उसे जमीन के नीचे ही छोड़ने पर काम कर रहा है। ये असामान्य कदम बुनियादी ढांचे के संकट को टालने और हॉर्मुज को लेकर जारी गतिरोध में वाशिंगटन के दबाव को कम करने के लिए उठाए जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच यह युद्ध अब इस बात की होड़ बन गया कि पहले कौन झुकता है। रेल से भेजने की कोशिश काफी महंगीईरान के तेल-निर्यातक संघ के प्रवक्ता हामिद हुसैनी के अनुसार, ईरान अब रेल के जरिये चीन को तेल भेजने की कोशिश कर रहा है। रेल मार्ग तेहरान को चीन के यीवू और शीआन शहरों से जोड़ता है। हालांकि, यह समुद्री मार्ग की तुलना में बहुत महंगा है। तेल न बिक पाना और उसे इकट्ठा करना देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डालता है। इससे वह देश बातचीत की मेज पर आने या युद्ध की स्थिति में झुकने को मजबूर हो सकता है। तेल रखने की जगह जल्द खत्म होगीरिपोर्ट के अनुसार, यदि नाकाबंदी जारी रही तो मई के मध्य तक ईरान का उत्पादन मौजूदा स्तर से आधे से भी कम (12 से 13 लाख बैरल रोज) गिर सकता है। ईरान के पास तेल रखने की जगह दो हफ्ते से भी कम समय में खत्म हो सकती है। ईरान के पास जमीन पर मौजूद तेल का भंडार नाकाबंदी के दौरान 46 लाख बैरल बढ़कर अब लगभग 4.9 करोड़ बैरल हो गया। 1. सबसे पहले तेल को बड़े-बड़े जमीनी टैंकों में भरा जाता है। जब ये टैंक भर जाते हैं, तो वे पुराने या कबाड़ टैंकों का भी इस्तेमाल करते हैं। 2. जब जमीन पर जगह खत्म हो जाती है, तो तेल को समुद्री जहाजों में भरकर समुद्र में ही खड़ा कर दिया जाता है। इसे फ्लोटिंग स्टोरेज कहते हैं। 3. अधिक तेल को निकालने के लिए देश भारी छूट पर तेल बेचने लगते हैं ताकि खरीदार आकर्षित हों। 4. अगर भंडारण की जगह बिल्कुल खत्म होने वाली हो, तो तेल के कुओं को बंद करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सबसे आखिरी और जोखिम भरा रास्ता है। क्योंकि, कुओंको दोबारा शुरू करना तकनीकी रूप से कठिन और महंगा होता है।
होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी से ग्लोबल मार्केट में उथल-पुथल …. कच्चा तेल 120 डॉलर के पार

तेहरान। ग्लोबल ऑयल मार्केट (Global Oil Market) में उथल-पुथल जारी है। अमेरिका के ईरान के खिलाफ सख्त रुख और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जारी नौसैनिक नाकाबंदी (Naval blockade) के चलते कच्चे तेल के दाम (Crude Oil Price) लगातार बढ़ रहे हैं। गुरुवार को कीमतों में और इजाफा देखने को मिला, जबकि एक दिन पहले ही इनमें करीब 7 प्रतिशत की उछाल आई थी। ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर के पारब्लूमबर्ग के मुताबिक इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड का जून कॉन्ट्रैक्ट 120.08 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद स्तर से 1.74 प्रतिशत अधिक है। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (Nymex) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) का जून कॉन्ट्रैक्ट 0.55 प्रतिशत चढ़कर 107.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ट्रंप का बयान: ‘सूअर की तरह घुट रहे हैं ईरान’अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में साफ किया कि जब तक ईरान के साथ परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी नहीं हटाई जाएगी। उन्होंने कहा, “यह नाकाबंदी बमबारी से कहीं ज्यादा कारगर है। वे (ईरान) सूअर की तरह घुट रहे हैं। उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।” ईरान का प्रस्ताव भी खारिजइससे पहले ईरान ने परमाणु वार्ता को टालते हुए होर्मुज को फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन ट्रंप इससे खुश नहीं थे क्योंकि इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा नहीं उठाया गया था। शांति वार्ता ठप होने और नाकाबंदी जारी रहने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चरमरा गई है। ध्यान रहे कि होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार की आवाजाही होती है। भारत पर क्या असर पड़ रहा है?भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में इस नाकाबंदी ने देश के लिए एलपीजी, एलएनजी और क्रूड ऑयल की सप्लाई बुरी तरह बाधित की है। महंगे कच्चे तेल का सीधा असर आम नागरिक की जेब पर भी पड़ने के आसार प्रबल होते जा रहे हैं, हालांकि पेट्रोल-डीजल के रिटेल दाम अभी स्थिर हैं। इक्रा की चेतावनी: इन सेक्टरों पर दबावरेटिंग एजेंसी इक्रा ने बुधवार को अनुमान जताया कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में कच्चे माल की कीमतों में दबाव और सप्लाई कमी के चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs, फर्टीलाइजर सेक्टर, केमिकल इंडस्ट्री, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन क्षेत्र के मुनाफे पर असर पड़ेगा। OMCs का मुनाफा क्यों घट रहा है?इक्रा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने बताया कि क्रूड की ऊंची कीमतों के बावजूद पंप पर पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं, जिससे तेल कंपनियों की लाभप्रदता प्रभावित हुई है। हाल ही में एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद भी यह स्थिति बनी हुई है। कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर कितना हो रहा नुकसानउनके अनुसार, अगर क्रूड 120-125 डॉलर प्रति बैरल पर रहता है और लॉन्ग-टर्म औसत क्रैक स्प्रेड बना रहता है, तो पेट्रोल पर मार्केटिंग मार्जिन लगभग माइनस 14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर माइनस 18 रुपये प्रति लीटर रहने का अनुमान है। क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी जारी रहेगी और अमेरिका-ईरान वार्ता में सफलता नहीं मिलती, तब तक तेल की कीमतों में गिरावट की संभावना कम है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है।
एशिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा तेल संकट का असर…. हो सकता है 1970 जैसा बदलाव!

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis.) और तेल की कीमतों (Oil prices) में उछाल का असर अब धीरे-धीरे एशिया की अर्थव्यवस्थाओं (Economies of Asia.) और आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह बदलाव वैसा ही हो सकता है जैसा 1970 के दशक के तेल संकट के बाद यूरोप में देखने को मिला था, जब पूरी ऊर्जा व्यवस्था ही बदल गई थी। 1970 का सबक: कैसे यूरोप ने तेल पर निर्भरता घटाई1973 और 1979 के तेल संकट के बाद शुरुआत में अनुमान था कि यूरोप पहले की तरह ही तेल पर निर्भर रहेगा। लेकिन हुआ इसका उल्टा। महंगे कच्चे तेल ने यूरोप को गैस और परमाणु ऊर्जा की ओर धकेल दिया। नतीजा यह हुआ कि 1980 के दशक तक तेल की खपत गिर गई और गैस का इस्तेमाल दोगुना हो गया। अब एशिया में दिख रहे वही संकेतआज एशिया भी उसी मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। दुनिया का 80% से ज्यादा तेल-गैस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर एशिया जाता है, लेकिन इस रूट पर तनाव और सप्लाई बाधित होने से कीमतें बढ़ रही हैं और देशों की निर्भरता संकट बनती जा रही है। जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देश पहले से ही आयात पर निर्भर हैं, जबकि वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देश भी अब नेट इंपोर्टर बन चुके हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश और थाईलैंड में घरेलू गैस उत्पादन घट रहा है, जिससे महंगे आयात पर निर्भरता बढ़ रही है। आम लोगों पर सीधा असरऊर्जा महंगी होने का असर सीधे आम आदमी पर दिख रहा है। जापान और दक्षिण कोरिया में खाने-पीने की चीजें महंगी हो रही हैं। कई देशों में हवाई यात्रा महंगी हो गई है, एयरलाइंस ने उड़ानें कम कर दी हैं। इस्लामाबाद में एक गैसोलीन स्टेशन पर ग्राहकों की कतार। पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतें बढ़ा दीं। पाकिस्तान, श्रीलंका और फिलीपींस में फ्यूल बचाने के लिए चार दिन का वर्क वीक लागू किया गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भी किसानों पर असर दिख रहा है, जहां फर्टिलाइजर महंगे हो रहे हैं और लागत बढ़ रही है। क्लीन एनर्जी की ओर तेज रुखइस संकट का सबसे बड़ा असर यह है कि अब क्लीन एनर्जी की ओर तेजी से रुख बढ़ रहा है। भारत में LPG की कमी के चलते लोग इंडक्शन चूल्हों की ओर जा रहे हैं। एशिया के कई देशों में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की मांग तेजी से बढ़ी है। थाईलैंड और सिंगापुर जैसे बाजारों में EV की हिस्सेदारी 50% तक पहुंच गई है। सोलर एनर्जी में भी बूम देखने को मिल रहा है। फिलीपींस, इंडोनेशिया और पाकिस्तान में सोलर इंस्टॉलेशन तेजी से बढ़ रहे हैं। OPEC से UAE का बाहर होना बना नया ट्रिगर: ओपेक से यूएई के बाहर होने का फैसला तेल बाजार में अस्थिरता को और बढ़ा सकता है। इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ेगा और आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ेगा। क्या तेल की मांग घटने की शुरुआत हो चुकी है: एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर यह संकट लंबा चलता है, तो एशिया में तेल की मांग पर बड़ा असर पड़ सकता है। जैसे यूरोप में 1970 के बाद तेल की मांग कभी पहले जैसी नहीं रही, वैसे ही एशिया में भी बड़ा बदलाव संभव है।
पांच राज्यों के चुनाव के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं….

नई दिल्ली। 5 राज्यों के चुनाव के बाद आज पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel Price) के नए रेट जारी हो गए हैं। इस बीच बुरी खबर ये है कि कच्चा तेल (Crude oil) 119 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। आज 30 अप्रैल को सुबह 6 बजे सरकारी ऑयल माार्केटिंग कंपनियों (Government oil marketing companies) इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने फ्यूल के रेट अपडेट कीं। आज के ताजा रेट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। बता दें कि अप्रैल 2022 के शुरू से ही पेट्रोल और डीजल के रिटेल दाम नहीं बदले हैं। कच्चे तेल की कीमतों में लगी आगईरान-अमेरिका युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 119 डॉलर प्रति बैरल के पार हैं। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा है। जबकि, WTI के भाव 106 डॉलर प्रति बैरल पर हैं। क्या कही थी सरकारकेंद्र सरकार ने उन अटकलों को खारिज कर दिया था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। आज चुनाव के बाद भी तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। ₹10 और ₹12.50 की बढ़ोतरी की अफवाहबता दें चुनाव बाद पेट्रोल डीजल के रेट में इजाफे को लेकर सोशल मीडिया पर एक आदेश वायरल हो रहा है। इस दावा किया गया है कि आदेश पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमशः ₹10 और ₹12.50 की बढ़ोतरी की गई है।” पीआईबी फैक्ट चेक ने कहा कि भारत सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है। भारत में आज कहां मिल रहा सस्ता पेट्रोल– पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹82.46 प्रति लीटर– ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹90.87 प्रति लीटर– सिलवासा, दादरा और नगर हवेली: ₹92.37 प्रति लीटर– दमन, दमन और दीव: ₹92.55 प्रति लीटर– हरिद्वार, उत्तराखंड: ₹92.78 प्रति लीटर– रुद्रपुर, उत्तराखंड: ₹92.94 प्रति लीटर– ऊना, हिमाचल प्रदेश: ₹93.27 प्रति लीटर– देहरादून, उत्तराखंड: ₹93.35 प्रति लीटर– नैनीताल, उत्तराखंड: ₹93.41 प्रति लीटरस्रोत: इंडियन ऑयल भारत में सस्ता डीजल बेचने वाले शहर– पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹78.05 प्रति लीटर– ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹80.38 प्रति लीटर– जम्मू, जम्मू और कश्मीर: ₹81.32 प्रति लीटर– संबा, जम्मू और कश्मीर: ₹81.58 प्रति लीटर– कठुआ, जम्मू और कश्मीर: ₹81.97 प्रति लीटर– उधमपुर, जम्मू और कश्मीर: ₹82.15 प्रति लीटर– चंडीगढ़: ₹82.44 प्रति लीटर– राजौरी, जम्मू और कश्मीर: ₹82.64 प्रति लीटरस्रोत: इंडियन ऑयल पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेकाबूकच्चे तेल की कीमतों का असर से भारत के पड़ोसी देश के लोग पेट्रोल-डीजल की महंगाई की मार झेल रहे हैं। पाकिस्तान में 133.56 और चीन में 125.71 रुपये लीटर है। श्रीलंका में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 135.13 रुपये पर पहुंच गई है। नेपाल में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 137.13 रुपये तक पहुंच गई है। बंग्लादेश में भी पेट्रोल 107.78 रुपये लीटर है। जबकि, म्यांमार में 147.25 रुपये। भूटान में पेट्रोल 102.78 रुपये लीटर पर पहुंच गया है।
PM मोदी अगले माह जाएंगे यूरोप दौरे पर… रास्ते में कुछ समय UAE में रुकेंगे!

दुबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अगले महीने संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.- UAE) की एक संक्षिप्त यात्रा कर सकते हैं। अपनी आगामी यूरोप यात्रा (Europe trip) के दौरान पीएम मोदी बीच रास्ते में कुछ समय के लिए यूएई में रुकेंगे, जहां उनकी यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (President Sheikh Mohammed bin Zayed Al Nahyan.- MBZ) के साथ द्विपक्षीय वार्ता होने की उम्मीद है। वर्तमान में इस यात्रा की रूपरेखा तैयार की जा रही है और अभी तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। यूरोप दौरे के बीच यूएई में पड़ावप्रधानमंत्री मोदी 15 से 20 मई तक चार यूरोपीय देशों- नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड और इटली की अहम यात्रा पर रहेंगे। इस दौरे का मुख्य आकर्षण ओस्लो (नॉर्वे) में होने वाला ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ होगा। इस साल की शुरुआत में यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिए जाने के बाद पीएम मोदी की यह पहली यूरोप यात्रा होगी। संकट के बीच निरंतर उच्च-स्तरीय वार्ताएंपश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय दौरों का सिलसिला लगातार जारी है। अगर पीएम मोदी यूएई पहुंचते हैं, तो यह इसी कड़ी का नवीनतम हिस्सा होगा। इससे पहले यूएई के राष्ट्रपति (MBZ) एक दिवसीय यात्रा पर भारत आए थे, जहां उन्होंने पीएम मोदी के साथ वार्ता की। मार्च में ईरान युद्ध के बीच, यूएई की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल-हाशिमी ने भारत का दौरा किया। अप्रैल (11-12) में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूएई का दौरा किया। उन्होंने राष्ट्रपति MBZ से मुलाकात कर पीएम मोदी का एक निजी संदेश उन्हें सौंपा। इसके अलावा, उन्होंने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की। पिछले सप्ताह ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने यूएई जाकर राष्ट्रपति MBZ से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों पर अहम चर्चा हुई। तेजी से बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक संबंधपिछले एक दशक में भारत और यूएई के संबंधों में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। दोनों देशों ने आर्थिक, सुरक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को काफी मजबूत किया है। वर्ष 2021 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ा दिया था। यूएई भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है। 2025 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों देशों का लक्ष्य 2032 तक इस व्यापार को दोगुना करना है। यूएई ऊर्जा, बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत में सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक बन गया है। ऊर्जा क्षेत्र में गहराता सहयोग (एलएनजी और ओपेक)ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से दोनों देशों के बीच हाल ही में कई बड़े कदम उठाए गए हैं। जनवरी में यूएई के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान 10 साल का तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आपूर्ति समझौता हुआ था। इसके तहत, यूएई 2028 से शुरू होकर अगले 10 वर्षों तक भारत को $3 बिलियन तक की एलएनजी की आपूर्ति करेगा। यूएई ने तेल निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) से बाहर निकलने का फैसला किया है। इसके बाद यह उम्मीद की जा रही है कि यूएई अपने तेल उत्पादन में भारी वृद्धि करेगा, जिससे भारत और यूएई के बीच ऊर्जा संबंध और अधिक मजबूत होंगे। संक्षेप में कहें तो, पीएम मोदी की यह संभावित यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश न केवल व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं, बल्कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक-दूसरे के मजबूत रणनीतिक साझेदार भी बने हुए हैं।