इंदौर में फ्लैट सौदे में धोखाधड़ी: गिरवी रखी प्रॉपर्टी बेचने की कोशिश, दंपति पर FIR दर्ज

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रॉपर्टी सौदे से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक दंपति पर गिरवी रखे फ्लैट को बेचने की कोशिश करने का आरोप लगा है। मामले में शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है। घटना अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार, पीड़िता सुनिता पाल ने संगीता मोटवानी और उनके पति कमल मोटवानी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि दंपति ने धनवंतरी निवास सिल्वर पैलेस कॉलोनी में स्थित अपने फ्लैट का सौदा 47 लाख रुपए में तय किया, जबकि वह पहले से ही बैंक में गिरवी रखा हुआ था। सौदे के तहत पीड़िता ने पहले 1 लाख रुपए बयाने के रूप में दिए और 6 जून 2025 को सेल एग्रीमेंट होने के बाद 5 लाख रुपए का चेक भी दिया गया, जिसे आरोपियों ने नकद कर लिया। इसके बाद टैक्स भुगतान के नाम पर भी पीड़िता से रकम खर्च करवाई गई, जिसमें हाउस टैक्स और अन्य देनदारियां शामिल थीं। जब रजिस्ट्री का समय आया, तब आरोपियों ने खुलासा किया कि फ्लैट पर बैंक से लोन लिया गया है। जांच में सामने आया कि फ्लैट पर करीब 23 लाख रुपए का कर्ज बकाया है। जबकि इस महत्वपूर्ण जानकारी का जिक्र सेल एग्रीमेंट में नहीं किया गया था। पीड़िता का आरोप है कि जब उसने पूरी रकम की व्यवस्था कर ली और रजिस्ट्री की बात की, तो दंपति ने सौदा करने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, आरोप है कि उन्होंने समाज के कुछ लोगों को बुलाकर पीड़िता को धमकाया और मानसिक दबाव बनाया। मामला बढ़ने पर पीड़िता ने पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी। जांच के बाद पुलिस ने इसे प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी मानते हुए दंपति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। यह मामला एक बार फिर प्रॉपर्टी खरीदते समय पूरी जांच-पड़ताल और दस्तावेजों की पुष्टि की जरूरत को रेखांकित करता है, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
दही, एलोवेरा और शहद का हेयर मास्क: बालों को बनाएं मजबूत और चमकदार, महंगे प्रोडक्ट्स की छुट्टी

नई दिल्ली। आज के समय में बालों की देखभाल एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। प्रदूषण, गलत खानपान और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स के कारण बाल रूखे, बेजान और कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में लोग महंगे हेयर केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कई बार उनसे भी मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलता। ऐसे में घरेलू नुस्खे एक बेहतर और सुरक्षित विकल्प बनकर सामने आते हैं। इन्हीं में से एक असरदार उपाय है दही, एलोवेरा और शहद से बना हेयर मास्क। यह तीनों चीजें मिलकर बालों को गहराई से पोषण देती हैं और उन्हें मजबूत, मुलायम और चमकदार बनाती हैं। दही में मौजूद प्रोटीन बालों की जड़ों को मजबूत करता है और डैंड्रफ की समस्या को कम करता है। वहीं एलोवेरा स्कैल्प को ठंडक देता है और बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देता है। इसके अलावा शहद बालों में नमी बनाए रखता है, जिससे बाल ड्राई और फ्रिज़ी नहीं होते। इस हेयर मास्क को बनाना बेहद आसान है। इसके लिए 2 चम्मच दही लें, उसमें 1 चम्मच एलोवेरा जेल और 1 चम्मच शहद मिलाएं। सभी चीजों को अच्छी तरह मिक्स करके एक स्मूद पेस्ट तैयार करें। अब इस मास्क को लगाने से पहले अपने बालों को हल्का गीला कर लें। इसके बाद इस मिश्रण को स्कैल्प से लेकर बालों की लंबाई तक अच्छे से लगाएं। हल्के हाथों से मसाज करें ताकि यह जड़ों तक पहुंच सके। मास्क को लगभग 30 से 40 मिनट तक बालों में लगा रहने दें। इसके बाद माइल्ड शैम्पू से बालों को धो लें। हफ्ते में 1 से 2 बार इसका इस्तेमाल करने से बालों की क्वालिटी में साफ फर्क नजर आने लगता है। नियमित उपयोग से बालों का टूटना कम होता है, रूखापन दूर होता है और बाल अधिक शाइनी और स्मूद बनते हैं। साथ ही यह स्कैल्प की हेल्थ को भी बेहतर बनाता है। हालांकि, अगर किसी को किसी भी सामग्री से एलर्जी है तो पहले पैच टेस्ट जरूर करें। जरूरत से ज्यादा मात्रा में या बहुत बार इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए। कुल मिलाकर, दही, एलोवेरा और शहद से बना यह घरेलू हेयर मास्क एक आसान, सस्ता और असरदार उपाय है, जो बिना महंगे प्रोडक्ट्स के भी बालों को खूबसूरत बना सकता है।
इंदौर में ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ा भारी: 210 चालकों के लाइसेंस होंगे सस्पेंड

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी अब महंगी पड़ने वाली है। शहर की ट्रैफिक पुलिस ने लगातार नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 210 लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ट्रैफिक विभाग के अनुसार, जिन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, वे पिछले तीन महीनों में बार-बार गंभीर नियमों का उल्लंघन करते पाए गए। इनमें रेड सिग्नल जंप करना, रॉन्ग साइड वाहन चलाना और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना जैसे खतरनाक व्यवहार शामिल हैं, जो सड़क पर अन्य लोगों की जान को जोखिम में डालते हैं। राजेश त्रिपाठी (डीसीपी ट्रैफिक) ने बताया कि ऐसे चालकों की पहचान वाहन नंबर और रजिस्ट्रेशन के आधार पर की गई है। इनकी सूची परिवहन विभाग को भेज दी गई है, जहां से लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि यह कदम सड़क हादसों को कम करने और लोगों में नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए उठाया गया है। लगातार नियम तोड़ने वालों पर निगरानी और सख्ती आगे भी जारी रहेगी। ट्रैफिक पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें, ताकि खुद की और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। नियमों की अनदेखी न सिर्फ कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती है।
स्ट्रेस और बेचैनी से पाना है छुटकारा? भ्रामरी प्राणायाम है आसान और असरदार उपाय

नई दिल्ली आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक थकान आम समस्या बन चुकी है। काम का दबाव, लगातार स्क्रीन टाइम और बदलती लाइफस्टाइल के कारण लोग अक्सर बेचैनी और दिमागी अशांति महसूस करते हैं। ऐसे में Ministry of AYUSH ने एक आसान और असरदार उपाय सुझाया है भ्रामरी प्राणायाम। मंत्रालय के अनुसार, यह प्राणायाम मन को शांत करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में बेहद कारगर है। खासकर जब मन में बहुत ज्यादा विचार चल रहे हों या बेचैनी महसूस हो रही हो, तब भ्रामरी प्राणायाम तुरंत राहत देने में मदद करता है। International Day of Yoga से पहले भी मंत्रालय लोगों को इस प्राणायाम के फायदे बता रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकें। योग विशेषज्ञों के मुताबिक, भ्रामरी प्राणायाम एक विशेष श्वास तकनीक है, जिसमें सांस छोड़ते समय भौंरे की तरह “हम्म्म” की ध्वनि निकाली जाती है। इस ध्वनि से मस्तिष्क में हल्का कंपन होता है, जो तनावग्रस्त नसों को शांत करता है। इससे न केवल स्ट्रेस कम होता है, बल्कि गुस्सा, चिंता और नींद से जुड़ी समस्याओं में भी राहत मिलती है। इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। जो लोग अक्सर चिंता या ओवरथिंकिंग का शिकार रहते हैं, उनके लिए यह एक सरल और प्राकृतिक उपाय है। भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका भी बेहद आसान है। सबसे पहले किसी शांत जगह पर आराम से सीधे बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। अब अपने अंगूठों से दोनों कानों को हल्के से बंद करें। इसके बाद गहरी सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए “हम्म” की आवाज निकालें। कोशिश करें कि यह ध्वनि लंबी और स्थिर हो। इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहराएं। विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना सुबह या शाम के समय इसका अभ्यास करने से मन की अशांति धीरे-धीरे कम होने लगती है। साथ ही, इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। कहना है कि यह प्राणायाम पूरी तरह सुरक्षित है और इसे घर पर बिना किसी उपकरण के आसानी से किया जा सकता है। जो लोग लगातार मानसिक थकान या तनाव से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह एक प्रभावी और प्राकृतिक समाधान है। कुल मिलाकर, भ्रामरी प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम उठा सकते हैं।
सर्वाइकल कैंसर जांच में बड़ा बदलाव: मप्र में ‘डीएनए किट’ से होगी स्क्रीनिंग, महिलाएं खुद दे सकेंगी सैंपल

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक अहम पहल सामने आई है। अब प्रदेश में सर्वाइकल कैंसर की जांच पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक डीएनए किट के जरिए की जाएगी। इसका उद्देश्य जांच के दौरान होने वाली झिझक को खत्म करना और ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को स्क्रीनिंग से जोड़ना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी कर रहा है। योजना के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की जांच डीएनए आधारित किट से की जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट जुलाई से शुरू हो सकता है, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तार दिया जाएगा। नई तकनीक में महिलाओं को खुद सैंपल देने की सुविधा मिलेगी। किट में दिए गए स्वैब और विशेष कंटेनर की मदद से नमूना लेकर उसे लैब में भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया से शारीरिक जांच की जरूरत कम होगी, जिससे महिलाएं बिना झिझक जांच करवा सकेंगी। इससे स्क्रीनिंग का दायरा भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। इस जांच के जरिए सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारण मानव पेपिलोमा वायरस (HPV) की पहचान की जाएगी। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो आगे की जांच और उपचार तुरंत शुरू किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर पहचान होने से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 30 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है। अब तक पारंपरिक जांच पद्धतियां खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बाधा बनती थीं, लेकिन डीएनए आधारित तकनीक से शुरुआती स्तर पर संक्रमण पकड़ना आसान हो जाएगा। साथ ही, प्रदेश टीकाकरण के मामले में भी आगे है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए उपलब्ध वैक्सीन के तहत मध्य प्रदेश में करीब 92% किशोरियों को टीका लगाया जा चुका है। आंकड़ों के अनुसार, हर साल प्रदेश में 4 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं, जबकि करीब 2100 महिलाओं की इस बीमारी से मौत हो जाती है। कुल मिलाकर, यह नई पहल न केवल महिलाओं की झिझक को खत्म करेगी, बल्कि समय पर पहचान और इलाज के जरिए हजारों जिंदगियां बचाने में भी मददगार साबित हो सकती है।
इंजीनियरिंग एडमिशन में बड़ा बदलाव: अब साल में दो बार मिलेगा मौका, जुलाई और जनवरी से शुरू होंगे सत्र

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से तकनीकी शिक्षा को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब साल में दो बार एडमिशन की व्यवस्था लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) गाइडलाइन तैयार कर रहा है, जबकि तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था के तहत एक शैक्षणिक सत्र जुलाई में शुरू होगा, जबकि दूसरा सत्र जनवरी से प्रारंभ किया जाएगा। जुलाई सत्र में सभी सीटों पर एडमिशन के लिए सेंट्रलाइज्ड काउंसलिंग कराई जाएगी। इसके बाद जो सीटें खाली रह जाएंगी, उन्हें जनवरी सत्र में भरा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सीटें खाली रहने की समस्या खत्म होगी और एडमिशन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी। फिलहाल स्थिति यह है कि एडमिशन प्रक्रिया सितंबर-अक्टूबर तक खिंच जाती है और कई बार सीटों को लेकर विवाद कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। नई व्यवस्था से इस देरी पर रोक लगेगी और एकेडमिक कैलेंडर भी तय समय पर लागू किया जा सकेगा। हालांकि, इस बदलाव को लेकर शिक्षा विशेषज्ञों ने कुछ चिंताएं भी जताई हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, जनवरी सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों को सीधे दूसरे सेमेस्टर से पढ़ाई शुरू कराई जा सकती है। बाद में वे पहले सेमेस्टर की पढ़ाई करेंगे। इसी तरह आगे भी सेमेस्टर का क्रम उलट-पुलट तरीके से चल सकता है जैसे चौथा सेमेस्टर पहले और तीसरा बाद में। विशेषज्ञों का कहना है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई में विषय आपस में जुड़े होते हैं। ऐसे में बेसिक विषयों से पहले एडवांस विषय पढ़ना छात्रों की समझ को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा प्लेसमेंट पर भी असर पड़ने की आशंका है। जनवरी सत्र में एडमिशन लेने वाले छात्र फरवरी-मार्च के आसपास पासआउट होंगे, जबकि अधिकांश कंपनियां दिसंबर तक पास होने वाले छात्रों को ही भर्ती करती हैं। ऐसे में उनके लिए अलग प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करनी पड़ सकती है। लेटरल एंट्री के छात्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है। अभी डिप्लोमा के बाद दूसरे वर्ष में प्रवेश के लिए जो सीटें बचती हैं, वे अगले सत्र में भरी जाती हैं। लेकिन साल में दो बार एडमिशन होने से इन सीटों की उपलब्धता कम हो सकती है। सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से विश्वविद्यालय पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और दो अलग-अलग ग्रुप बनाकर पढ़ाई सुचारु रूप से चलाई जा सकेगी। कंपनियां भी अपने प्लेसमेंट शेड्यूल में बदलाव कर सकती हैं। कुल मिलाकर, यह नई व्यवस्था जहां एक ओर एडमिशन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और लचीला बनाएगी, वहीं छात्रों और संस्थानों के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकती है। आने वाले समय में इसका वास्तविक असर साफ तौर पर देखने को मिलेगा।
Samsung India में बड़ा बदलाव: 18 साल बाद राजू पुल्लन ने दिया इस्तीफा, मोबाइल बिजनेस की कमान किसके हाथ?

नई दिल्ली। सैमसंग इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मोबाइल एक्सपीरियंस डिवीजन के प्रमुख राजू एंटनी पुल्लन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने खुद लिंक्डइन पर इसकी जानकारी साझा की, जिससे टेक इंडस्ट्री में हलचल मच गई। करीब दो दशक तक सैमसंग के साथ जुड़े रहने के बाद उनका यह फैसला कंपनी के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। पुल्लन ने साल 2008 में सैमसंग इंडिया जॉइन किया था और धीरे-धीरे कंपनी में कई अहम पदों पर काम किया। उन्होंने सेल्स, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल बिजनेस जैसे कई क्षेत्रों में नेतृत्व संभाला। जनवरी 2022 से वे मोबाइल एक्सपीरियंस डिवीजन के प्रमुख के तौर पर काम कर रहे थे, जहां उन्होंने भारत में गैलेक्सी स्मार्टफोन्स की पहुंच को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। अब कौन संभालेगा मोबाइल बिजनेस?रिपोर्ट्स के मुताबिक, आदित्य बब्बर को सैमसंग इंडिया के मोबाइल बिजनेस की नई जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि कंपनी की तरफ से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। आदित्य बब्बर फिलहाल सैमसंग इंडिया में वाइस प्रेसिडेंट और प्रोडक्ट मार्केटिंग व ई-कॉमर्स हेड के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में कंपनी के स्मार्टफोन पोर्टफोलियो और ऑनलाइन सेल्स नेटवर्क को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है। भारत में सैमसंग के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?भारत दुनिया के सबसे बड़े स्मार्टफोन बाजारों में से एक है और सैमसंग यहां दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी बनी हुई है। ऐसे में मोबाइल डिवीजन के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव कंपनी की भविष्य की रणनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। राजू पुल्लन के नेतृत्व में सैमसंग ने भारतीय बाजार में अपनी पकड़ को और मजबूत किया था। अब देखना होगा कि नया नेतृत्व कंपनी को किस दिशा में आगे ले जाता है।
भोपाल की सफाई पर बड़ा सवाल: क्या सच में देश का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर है ग्राउंड रियलिटी?

*]:pointer-events-auto [content-visibility:auto] supports-[content-visibility:auto]:[contain-intrinsic-size:auto_100lvh] R6Vx5W_threadScrollVars scroll-mb-[calc(var(–scroll-root-safe-area-inset-bottom,0px)+var(–thread-response-height))] scroll-mt-[calc(var(–header-height)+min(200px,max(70px,20svh)))]” dir=”auto” data-turn-id=”request-WEB:2afa145b-fb13-4810-8cf2-774c759b68ed-1″ data-testid=”conversation-turn-4″ data-scroll-anchor=”false” data-turn=”assistant”> नई दिल्ली। देश के सबसे साफ शहरों की सूची में लगातार ऊंचा स्थान पाने वाला भोपाल एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है स्वच्छता सर्वे का बदला हुआ तरीका और शहर की वास्तविक सफाई व्यवस्था को लेकर उठते सवाल। अब केवल ऑनलाइन वोटिंग के आधार पर रैंकिंग तय नहीं होगी, बल्कि अधिकारी खुद लोगों के बीच जाकर उनकी राय लेंगे। ऐसे में असली तस्वीर सामने आने की उम्मीद बढ़ गई है। अब तक माना जाता रहा है कि भोपाल की साफ-सफाई व्यवस्था काफी बेहतर है, लेकिन जब जमीनी स्तर पर लोगों से बात की गई तो कई अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोग शहर की सफाई व्यवस्था से संतुष्ट नजर आए। उनका कहना है कि नियमित कचरा उठान, सड़कों की सफाई और सार्वजनिक जगहों पर स्वच्छता का स्तर पहले से बेहतर हुआ है। खासतौर पर मुख्य सड़कों और वीआईपी इलाकों में सफाई स्पष्ट दिखाई देती है। हालांकि, दूसरी तरफ कई नागरिकों ने सफाई व्यवस्था में खामियां भी गिनाईं। लोगों का कहना है कि अंदरूनी कॉलोनियों और पुराने इलाकों में अभी भी कचरा जमा रहता है और सफाई नियमित नहीं होती। कुछ जगहों पर डस्टबिन की कमी और कचरा प्रबंधन में लापरवाही भी देखने को मिलती है। इससे साफ जाहिर होता है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में सफाई का स्तर एक जैसा नहीं है। स्वच्छता सर्वे के नए फॉर्मेट में अब नागरिकों की सीधी भागीदारी बढ़ा दी गई है। अधिकारी घर-घर जाकर फीडबैक ले रहे हैं, जिससे केवल डिजिटल वोटिंग के बजाय वास्तविक अनुभव को महत्व मिलेगा। इससे यह तय होगा कि रैंकिंग सिर्फ आंकड़ों पर आधारित है या वास्तव में जमीनी हकीकत भी उतनी ही मजबूत है। भोपाल के लिए यह एक अहम मौका है, जहां उसे अपनी छवि को बनाए रखने के साथ-साथ उन कमियों को भी दूर करना होगा, जो अब तक नजरअंदाज होती रही हैं। अगर शहर प्रशासन इन फीडबैक को गंभीरता से लेता है, तो आने वाले समय में भोपाल न केवल रैंकिंग में, बल्कि वास्तविक सफाई व्यवस्था में भी एक मिसाल बन सकता है।
कमर्शियल गैस महंगी: भोपाल में बाहर खाना पड़ेगा और महंगा, 30% तक बढ़ सकते हैं दाम

नई दिल्ली। देश के दूसरे सबसे स्वच्छ शहर भोपाल में अब महंगाई की नई लपट देखने को मिल रही है। कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी ने होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार की कमर तोड़ दी है। पिछले डेढ़ महीने से गैस की कमी झेल रहे कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी किसी झटके से कम नहीं है। जानकारी के मुताबिक, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2081 रुपए से बढ़कर सीधे 3074 रुपए हो गई है। यानी करीब 993 रुपए की बढ़ोतरी ने ईंधन लागत को डेढ़ गुना तक बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर अब खाने-पीने की कीमतों पर पड़ने वाला है। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि अब मेन्यू के दाम 25 से 30 फीसदी तक बढ़ाना मजबूरी हो गया है। कारोबारियों के अनुसार, पहले जहां गैस पर मासिक खर्च करीब 2 लाख रुपए होता था, अब यह बढ़कर 3 से सवा 3 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। छोटे कारोबारियों की हालत और भी खराब है। 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर (छोटू) की कीमत 585 रुपए से बढ़कर 827 रुपए हो गई है, जिससे हॉकर और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं पर सीधा असर पड़ा है। इस बढ़ोतरी का असर शादी-विवाह जैसे आयोजनों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कैटरर्स का कहना है कि पहले से बुक किए गए ऑर्डर्स में उन्हें नुकसान झेलना पड़ेगा, क्योंकि पुराने रेट पर ही काम करना होगा। एक शादी में औसतन 10 सिलेंडर खर्च होते हैं, जिससे प्रति इवेंट करीब 10 हजार रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। आने वाले ऑर्डर्स में प्रति प्लेट 50 रुपए तक बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, 500 लोगों के एक आयोजन का 5 लाख रुपए का बजट अब 45 से 50 हजार रुपए तक बढ़ सकता है। इससे साफ है कि महंगाई की यह मार सिर्फ कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी असर डालेगी। आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 अप्रैल 2025 के बाद से अब तक कमर्शियल सिलेंडर के दाम 16 बार बदले जा चुके हैं। इनमें 8 बार बढ़ोतरी और 6 बार कमी दर्ज की गई है। सबसे बड़ी बढ़ोतरी 1 मई को हुई, जिसने बाजार का पूरा संतुलन बिगाड़ दिया। कुल मिलाकर, गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने भोपाल के फूड इंडस्ट्री सेक्टर को मुश्किल में डाल दिया है। आने वाले दिनों में बाहर खाना अब पहले से काफी महंगा हो सकता है, जिसका सीधा असर आम जनता के बजट पर पड़ेगा।
शनिवार विशेष: इन मंत्रों के जाप से पाएं शनि देव की कृपा, घर में आएंगी खुशियां और बरकत

नई दिल्ली। शनिवार का दिन शनि देव की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और मंत्रों का जाप करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष होता है, उनके लिए यह दिन और भी अधिक प्रभावशाली माना जाता है। सही तरीके से पूजा करने से न केवल बाधाएं दूर होती हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और तरक्की के द्वार भी खुलते हैं। शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद शनि मंदिर जाना शुभ माना जाता है। मंदिर में जाकर शनि देव के दर्शन करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा के दौरान काले वस्त्र धारण करना विशेष लाभकारी होता है, क्योंकि काला रंग शनि देव को प्रिय है। पूजा में सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस दिन मंत्र जाप का भी विशेष महत्व है। “ॐ शं शनिश्चराय नमः” मंत्र का नियमित जाप मानसिक शांति देता है और जीवन में स्थिरता लाता है। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र “ॐ त्रयम्बकं यजामहे…” का जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। शनि महामंत्र “ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्…” का उच्चारण करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कठिनाइयों में राहत मिलती है। शनि गायत्री मंत्र “ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोदयात्” का जाप करने से बुद्धि और निर्णय क्षमता में सुधार आता है। वहीं वैदिक मंत्र “ॐ शन्नो देवीरभिष्टय…” का जाप सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और वातावरण को शुद्ध बनाता है। यदि आप सच्चे मन से इन मंत्रों का जाप करते हैं और नियमपूर्वक पूजा करते हैं, तो शनि देव की कृपा से जीवन की परेशानियां कम होने लगती हैं। घर में सुख-शांति बनी रहती है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार आता है। शनिवार का यह दिन आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक श्रेष्ठ अवसर हो सकता है।