Chambalkichugli.com

ग्वालियर के सरकारी अस्पताल में कमाल: जटिल सर्जरी से महिला की बच्चेदानी बचाई, फाइब्रॉइड गांठ हटाकर दी नई जिंदगी

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं ने एक बार फिर अपनी क्षमता और भरोसे को साबित किया है। सिविल अस्पताल हजीरा के डॉक्टरों ने एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 28 वर्षीय महिला की बच्चेदानी को सुरक्षित बचा लिया। यह मामला इटावा निवासी ज्योति सिंह का है, जो लंबे समय से बच्चेदानी में बड़ी फाइब्रॉइड गांठ की समस्या से जूझ रही थीं। अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर पेट दर्द के कारण उनकी दिनचर्या प्रभावित हो चुकी थी। कई निजी अस्पतालों में उन्हें बच्चेदानी निकालने की सलाह दी गई थी, लेकिन आर्थिक कारणों से वे उपचार नहीं करा पा रही थीं। इसके बाद उन्होंने सिविल अस्पताल हजीरा में संपर्क किया। यहां प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रशांत नायक के मार्गदर्शन में विशेषज्ञ टीम ने विस्तृत जांच के बाद ऑपरेशन की योजना बनाई। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक बड़ी फाइब्रॉइड गांठ को सफलतापूर्वक हटा दिया और बच्चेदानी को सुरक्षित रखा। इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में डॉ. राहुल श्रीवास्तव और डॉ. अनुपम कुलश्रेष्ठ सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञ निगरानी में पूरी तरह सुरक्षित तरीके से संपन्न की गई। डॉक्टरों की इस उपलब्धि से न केवल मरीज को नई जिंदगी मिली, बल्कि सरकारी अस्पतालों की सेवाओं पर लोगों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। मरीज और उनके परिजनों ने अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों का आभार जताते हुए कहा कि यहां बेहतर इलाज और समर्पित सेवाएं मिलना सराहनीय है। अस्पताल प्रशासन ने भी आम लोगों से अपील की है कि वे आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम का लाभ उठाएं, क्योंकि यहां कई जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं।

बेसन फेस पैक का कमाल: हफ्ते में 2 बार लगाएं, महीने भर में निखरेगी त्वचा

नई दिल्ली । आज के समय में हर कोई साफ, चमकदार और हेल्दी त्वचा चाहता है, लेकिन महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स हर किसी के लिए संभव नहीं होते। ऐसे में घरेलू नुस्खे एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आते हैं। उन्हीं में से एक है बेसन, जो सदियों से स्किन केयर में इस्तेमाल होता आ रहा है। बेसन न सिर्फ आपकी त्वचा को गहराई से साफ करता है, बल्कि उसे प्राकृतिक चमक भी देता है। अगर इसे हफ्ते में दो बार सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो एक महीने के अंदर ही त्वचा में साफ फर्क नजर आने लगता है। सबसे पहले बात करते हैं बेसन फेस पैक के फायदों की। यह त्वचा से अतिरिक्त तेल (ऑयल) को हटाने में मदद करता है, जिससे पिंपल्स और एक्ने की समस्या कम होती है। इसके अलावा, यह स्किन के डेड सेल्स को हटाकर त्वचा को मुलायम और साफ बनाता है। बेसन में मौजूद प्राकृतिक गुण त्वचा की रंगत निखारने में भी मदद करते हैं। नियमित इस्तेमाल से टैनिंग कम होती है और चेहरा फ्रेश और ग्लोइंग नजर आता है। यह स्किन पोर्स को साफ करता है और ब्लैकहेड्स व व्हाइटहेड्स की समस्या को भी कम करता है। अब जानिए इसे इस्तेमाल करने का सही तरीका। बेसन फेस पैक बनाने के लिए 2 चम्मच बेसन लें और उसमें गुलाब जल या दही मिलाएं। आप चाहें तो इसमें एक चुटकी हल्दी भी मिला सकते हैं, जो एंटीसेप्टिक का काम करती है। इन सभी चीजों को अच्छे से मिलाकर एक स्मूद पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाएं और 15-20 मिनट तक सूखने दें। इसके बाद हल्के हाथों से मसाज करते हुए गुनगुने पानी से धो लें। इससे त्वचा की गहराई से सफाई होती है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। इस फेस पैक को हफ्ते में दो बार इस्तेमाल करने से त्वचा में धीरे-धीरे निखार आने लगता है। एक महीने के अंदर ही आप अपनी स्किन में साफ बदलाव महसूस कर सकते हैं। हालांकि, जिन लोगों की स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है, उन्हें पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। साथ ही, फेस पैक को ज्यादा देर तक चेहरे पर न छोड़ें, क्योंकि इससे त्वचा सूखी हो सकती है। कुल मिलाकर, बेसन फेस पैक एक सस्ता, आसान और असरदार घरेलू उपाय है, जो आपकी त्वचा को प्राकृतिक रूप से खूबसूरत बना सकता है।

राज की जमानत खारिज, शिलॉन्ग कोर्ट का बड़ा फैसला: राजा रघुवंशी हत्याकांड में अन्य आरोपियों ने भी लगाई अर्जी

नई दिल्ली। चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। मेघालय के शिलॉन्ग की अदालत ने आरोपी राज कुशवाहा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला लंबे समय से चल रही जांच और कई आरोपियों की भूमिका को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने जमानत याचिका को “तकनीकी आधार” पर खारिज किया है। बताया गया कि आवेदन में पिछली जमानत याचिका का उल्लेख नहीं किया गया था, जिसे अदालत ने गंभीर त्रुटि माना। हालांकि, यह फैसला मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर आधारित नहीं था। आरोपी के वकील के अनुसार, अब सोमवार को नई जमानत याचिका दायर की जाएगी। इस मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को हाल ही में जमानत मिल चुकी है और वह फिलहाल शिलॉन्ग के एक होटल में ठहरी हुई है। जमानत मिलने के बाद अब अन्य आरोपी विशाल चौहान, आनंद कुर्मी और आकाश राजपूत ने भी अदालत में राहत के लिए अर्जी दाखिल कर दी है। सोनम के मामले में पुलिस ने मेघालय हाईकोर्ट में जमानत को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस का दावा है कि वह इस हत्याकांड की मास्टरमाइंड हो सकती है और उसकी रिहाई से जांच और गवाहों पर असर पड़ सकता है। शिलॉन्ग एसपी विवेक सियेम ने कहा है कि जांच प्रक्रिया कानून के अनुसार जारी रहेगी और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इधर, सोनम फिलहाल जमानत के बाद होटल में रह रही है और उसने शिलॉन्ग से बाहर जाने की अनुमति के लिए भी आवेदन करने की तैयारी की है। सुरक्षा कारणों का हवाला देकर यह अर्जी दाखिल की जा सकती है। इंदौर निवासी राजा रघुवंशी की हत्या के इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) पिछले 10 महीनों से जांच कर रहा है। अदालत ने पहले जमानत देते समय जांच में कुछ खामियों और सही धाराएं न लगाए जाने जैसी बातों की ओर इशारा किया था। साथ ही, सभी गवाहों के बयान अभी तक पूरी तरह दर्ज नहीं किए जा सके हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में आने वाले दिनों में कोर्ट की सुनवाई और जांच एजेंसियों की कार्रवाई और भी महत्वपूर्ण मोड़ ले सकती है।

मेथी दाने का सही सेवन जानिए, वरना गर्मियों में बढ़ सकती हैं समस्याएं.

नई दिल्ली। भारतीय रसोई में मौजूद मसालों को केवल स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत सुधारने के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण मसाला है मेथी दाना, जिसे आयुर्वेद में एक प्रभावशाली औषधि माना गया है। इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है, रक्त शर्करा नियंत्रित रहती है और शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं। हालांकि, गर्मियों के मौसम में इसके सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार मेथी दाना उष्ण प्रकृति का होता है, यानी इसकी तासीर गर्म होती है। यह सामान्य रूप से शरीर में वात और कफ को संतुलित करने में सहायक होता है, लेकिन गर्मियों के दौरान शरीर में पित्त का स्तर पहले से ही बढ़ा रहता है। ऐसे में यदि मेथी दाने का सेवन अधिक मात्रा में किया जाए, तो यह शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है। कई लोगों को इसके कारण पेट में जलन, एसिडिटी, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों में मेथी दाने का सेवन पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसके सेवन के तरीके में बदलाव करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। सबसे अच्छा तरीका यह माना जाता है कि मेथी दानों को रातभर पानी में भिगो दिया जाए और सुबह उस पानी को छानकर पी लिया जाए। इस प्रक्रिया से इसकी गर्म तासीर कुछ हद तक कम हो जाती है और शरीर को इसके लाभ भी मिलते रहते हैं। इसके अलावा मेथी दाने का पाउडर बनाकर उसे दही या छाछ के साथ लेना भी एक बेहतर विकल्प माना जाता है। छाछ और दही की ठंडी तासीर मेथी के गर्म प्रभाव को संतुलित करती है, जिससे पाचन तंत्र को राहत मिलती है और शरीर में गर्मी नहीं बढ़ती। यह तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिन्हें पेट से जुड़ी समस्याएं रहती हैं। गर्मियों में मेथी दाने की मात्रा को सीमित रखना भी बेहद जरूरी है। अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, इसे खाली पेट लेने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। भोजन के बाद इसका सेवन करना ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी माना जाता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में सावधानी बरतना और भी जरूरी हो जाता है। मधुमेह के मरीज, लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं मेथी दाने का सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लें। ऐसा इसलिए क्योंकि यह शरीर के शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है।

इंदौर में दर्दनाक हादसा: ई-रिक्शा की टक्कर से 12 साल के बच्चे की मौत, महिला ड्राइवर अस्पताल से फरार

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। हीरानगर क्षेत्र में 12 साल के बच्चे की ई-रिक्शा की टक्कर से मौत हो गई। हादसे के बाद घायल बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, मृतक बच्चे की पहचान करण डामोर के रूप में हुई है। वह अपने घर के पास स्थित ग्लोवर गार्डन में खेलने के लिए जा रहा था। इसी दौरान सड़क पार करते समय एक ई-रिक्शा ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसा दोपहर करीब 4 बजे हुआ। स्थानीय लोगों ने तुरंत बच्चे को उठाकर एमवाय अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल में मौत की सूचना मिलते ही ई-रिक्शा चला रही महिला वहां से फरार हो गई। पुलिस के अनुसार, ई-रिक्शा (MP09-AT5741) को एक महिला चला रही थी, जिसकी तलाश की जा रही है। मामले की जांच हीरानगर थाना क्षेत्र पुलिस कर रही है। परिजनों ने बताया कि करण मूल रूप से झाबुआ का रहने वाला था और उसका परिवार मजदूरी करता है। उसके परिवार में एक छोटा भाई भी है। हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने वाहन जब्त कर चालक की तलाश शुरू कर दी है। इसी बीच शहर में एक और दुखद घटना सामने आई है। इंदौर के तेजाजी नगर इलाके में स्थित एक यूनिवर्सिटी हॉस्टल में इंजीनियरिंग के छात्र ने आत्महत्या कर ली। शुरुआती जांच में पुलिस को डिप्रेशन की आशंका जताई जा रही है, हालांकि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है और संबंधित परिवारों से संपर्क किया जा रहा है।

उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती: पंचामृत से अभिषेक, भांग-चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शनिवार तड़के परंपरा अनुसार भस्म आरती का आयोजन भव्य रूप से किया गया। सुबह लगभग 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए और विधिवत पूजा-अर्चना की शुरुआत हुई। सबसे पहले भगवान महाकाल का जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद पंडे-पुजारियों ने दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया। साथ ही “हरि ओम” का जल अर्पित कर विशेष पूजा संपन्न कराई गई। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। इस दौरान उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित फूलों की मालाएं अर्पित की गईं। भांग और चंदन से किया गया श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। भस्म अर्पण के बाद भगवान को ड्रायफ्रूट का भोग लगाया गया और पुनः कपूर आरती की गई। मोगरा और गुलाब के फूलों से सजे बाबा महाकाल का अलौकिक रूप देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। परंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़ा की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए और उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। यह आरती न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

Parag Agrawal की नई AI कंपनी Parallel: ट्विटर के बाद 19020 करोड़ का डिजिटल साम्राज्य

नई दिल्ली। ट्विटर के (अब X) के पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई विवाद नहीं बल्कि उनकी नई कामयाबी है। एलन मस्क द्वारा ट्विटर अधिग्रहण के बाद कंपनी से बाहर किए गए अग्रवाल ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में एक मजबूत पहचान बना ली है। उन्होंने Parallel Web Systems नाम की AI स्टार्टअप की स्थापना की है, जिसने हाल ही में 100 मिलियन डॉलर (लगभग ₹835 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग के बाद कंपनी की कुल वैल्यूएशन लगभग 2 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹19,020 करोड़ पहुंच गई है। यह आंकड़ा इसे तेजी से उभरते AI स्टार्टअप्स में शामिल करता है। क्या करती है Parag Agrawal की कंपनी?Parallel Web Systems कोई साधारण टेक कंपनी नहीं है। यह AI एजेंट्स के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करती है, यानी ऐसे सिस्टम जो इंसानों की तरह खुद निर्णय लेकर ऑनलाइन काम कर सकते हैं। ये AI एजेंट्स केवल पहले से मौजूद डेटा पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि: लाइव इंटरनेट से जानकारी खोजते हैं रियल-टाइम डेटा प्रोसेस करते हैं और जटिल डिजिटल कामों को ऑटोमेट करते हैं कंपनी ऐसे API टूल्स देती है जिनकी मदद से AI सिस्टम वेबसाइट्स से डेटा निकाल सकते हैं, रिसर्च कर सकते हैं और अलग-अलग ऑनलाइन वर्कफ्लो को पूरा कर सकते हैं। किन क्षेत्रों में हो रहा है इस्तेमाल?Parallel की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अब कई अहम सेक्टर्स में हो रहा है: निवेश (Investment) रिसर्च इंश्योरेंस क्लेम प्रोसेसिंग लीगल एनालिसिस सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंटइसका मतलब है कि AI अब सिर्फ चैटबॉट तक सीमित नहीं, बल्कि असली दुनिया के बड़े और जटिल कामों को भी संभालने लगा है। ट्विटर से AI तक का सफरपराग अग्रवाल 2021-22 तक ट्विटर के CEO रहे। एलन मस्क के 44 बिलियन डॉलर के अधिग्रहण के बाद उन्हें कंपनी से बाहर कर दिया गया था। लेकिन इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और AI सेक्टर में अपनी नई शुरुआत की।आज उनकी नई कंपनी तेजी से बढ़ते AI बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बनती जा रही है

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के बीच मंदिर शिफ्टिंग की चुनौती: हनुमान मंदिर पीछे होगा, गणेश मंदिर के लिए नई जगह की तलाश

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उज्जैन में चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्यों के बीच मंदिरों की शिफ्टिंग एक बार फिर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। कंठाल से सतीगेट मार्ग के चौड़ीकरण के दौरान कई धार्मिक स्थल प्रभावित हो रहे हैं, जिससे निर्माण कार्य की गति पर असर पड़ सकता है। नगर निगम ने इस बार पहले से योजना बनाकर काम शुरू किया है, लेकिन कई जगहों पर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। पिछले अनुभवों को देखते हुए प्रशासन इस बार समय रहते समाधान करने की कोशिश कर रहा है, ताकि सड़क निर्माण कार्य बीच में न रुके। कंठाल-सतीगेट चौड़ीकरण मार्ग पर दो प्रमुख मंदिर प्रभावित हो रहे हैं। योजना के अनुसार हनुमान मंदिर को पीछे की ओर स्थानांतरित किया जाएगा, जबकि गणेश मंदिर के लिए आसपास किसी नई उपयुक्त जगह की तलाश की जा रही है। हालांकि, स्थान चयन को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इसके साथ ही कंठाल क्षेत्र में नाले के ऊपर बने एक मंदिर को लेकर स्थानीय स्तर पर विवाद भी सामने आया है। स्थानीय निवासी अरविंद मैदावाला ने संभागायुक्त को आवेदन देकर अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने और प्रशासन की योजना पर जानकारी मांगी है। इसी तरह बियाबानी चौड़ीकरण मार्ग पर भी एक मंदिर को शिफ्ट करने की तैयारी की गई है, जिसके लिए पास में ही नया स्थान चिन्हित किया गया है। ढाबारोड क्षेत्र में चल रहे चौड़ीकरण में भी श्रीनाथजी की हवेली का हिस्सा प्रभावित हो रहा है, जिस पर अभी अंतिम निर्णय लंबित है। प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते मंदिरों की शिफ्टिंग पूरी नहीं हुई, तो सड़क चौड़ीकरण कार्य प्रभावित हो सकता है। इसका असर आगामी बड़े आयोजन सिंहस्थ पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कुल मिलाकर, विकास कार्य और धार्मिक संरचनाओं के संतुलन को बनाए रखना इस समय नगर निगम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

उज्जैन सीवरेज प्रोजेक्ट में देरी: काम 12 हिस्सों में बांटा गया, अब टाटा के साथ अन्य कंपनियां भी संभालेंगी जिम्मेदारी

नई दिल्ली।  मध्य प्रदेश के उज्जैन में लंबे समय से चल रहे सीवरेज प्रोजेक्ट में एक बार फिर देरी सामने आई है। शहर की सीवरेज व्यवस्था सुधारने के लिए शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट में अब तक तय समय सीमा के बावजूद हजारों घरों में कनेक्शन नहीं हो सके हैं। प्रोजेक्ट का काम देख रही टाटा कंपनी को 31 मार्च तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन अब भी करीब 30 हजार से अधिक हाउसहोल्ड कनेक्शन बाकी हैं। धीमी प्रगति को देखते हुए नगर निगम ने अब बड़ा कदम उठाते हुए पूरे काम को 12 हिस्सों में बांट दिया है। अब इस प्रोजेक्ट में केवल टाटा कंपनी ही नहीं, बल्कि अन्य एजेंसियों को भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए नए टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें से तीन कंपनियों के रेट स्वीकृत कर लिए गए हैं, जबकि तीन के रेट अधिक होने के कारण खारिज कर दिए गए हैं। नगर निगम के अपर आयुक्त पवनकुमार सिंह के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और फिलहाल उनका विश्लेषण किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि इस साल के अंत तक सीवरेज प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सके। यह प्रोजेक्ट वर्ष 2017 में शुरू हुआ था और शुरुआत में इसे 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन कई बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद काम अधूरा रह गया। इससे पहले भी टाटा प्रोजेक्ट्स को 10 से अधिक बार एक्सटेंशन दिया जा चुका है। प्रशासन ने लापरवाही को देखते हुए कंपनी को पिछले चार महीने पहले आगे के तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट भी कर दिया था, हालांकि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। वर्तमान स्थिति यह है कि कंपनी प्रतिदिन तय लक्ष्य के अनुसार 300 कनेक्शन भी नहीं कर पा रही है। जबकि यदि रोजाना 1000 कनेक्शन भी किए जाएं, तब भी निर्धारित समय में काम पूरा करना मुश्किल माना जा रहा है। अब देखना होगा कि नए टेंडर और अन्य कंपनियों की भागीदारी से यह लंबे समय से अटका हुआ प्रोजेक्ट कितनी तेजी से पूरा हो पाता है।

महावीर जन्म कल्याणक विवाद: इंदौर में 50 लाख का मानहानि नोटिस, 7 दिन में माफी की मांग

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में महावीर जन्म कल्याणक के मौके पर आयोजित नवकारसी कार्यक्रम अब कानूनी विवाद में बदल गया है। इस मामले में 50 लाख रुपए का मानहानि नोटिस भेजा गया है, जिसमें श्वेताम्बर जैन महासंघ न्यास के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नोटिस अक्षय जैन की ओर से उनके अधिवक्ता के माध्यम से जारी किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि महासंघ द्वारा जारी स्पष्टीकरण में आधिकारिक लेटरहेड का दुरुपयोग करते हुए निराधार और अपमानजनक टिप्पणियां प्रकाशित की गईं, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। नोटिस के अनुसार, यह पत्र केवल संस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में व्यापक रूप से प्रसारित हुआ और व्हाट्सएप सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी वायरल हुआ। इससे संबंधित पक्ष की सार्वजनिक छवि को ठेस पहुंची है। दावा किया गया है कि पिछले 40 वर्षों से व्यापार और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय अक्षय जैन की साख को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। विवाद की जड़ में महावीर जन्म कल्याणक के दिन हुए नवकारसी आयोजन का एक घटनाक्रम है, जिसमें ट्रैक्टर खड़ा होने को लेकर विवाद हुआ था। नोटिस में कहा गया है कि इस घटना के लिए इवेंट कंपनी के संचालक ने पहले ही लिखित रूप से अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांग ली थी। इसके बावजूद करीब 29 दिन बाद आरोपों के साथ पत्र जारी करना दुर्भावनापूर्ण बताया गया है। इसके अलावा 29 अप्रैल को हुई बैठक के मिनट्स पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि संस्था के मंच का इस्तेमाल कर व्यक्तिगत आरोपों को संस्थागत रूप दिया गया, जिससे न केवल संस्था की गरिमा प्रभावित हुई, बल्कि एक व्यक्ति विशेष के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया गया। नोटिस में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 356 (मानहानि) और धारा 61 (आपराधिक साजिश) का हवाला देते हुए इसे दंडनीय कृत्य बताया गया है। साथ ही इसे दीवानी क्षति के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है। नोटिस में 15 दिनों के भीतर 50 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति, 25 हजार रुपए विधिक खर्च, और 7 दिनों के भीतर बिना शर्त लिखित माफी जारी करने की मांग की गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने और भविष्य में ऐसे कृत्यों से बचने की भी शर्त रखी गई है। स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि तय समयसीमा में मांगें पूरी नहीं होने पर संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा और अलग से दीवानी वाद भी दायर किया जाएगा।