रविवार के वास्तु उपाय: आज करें ये आसान उपाय, सूर्य देव की कृपा से मिलेगी सफलता

नई दिल्ली। रविवार का दिन सूर्य भगवान को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, उन्हें जीवन में सफलता, आत्मविश्वास और सम्मान मिलता है। वहीं सूर्य कमजोर होने पर कार्यों में बाधाएं, आत्मविश्वास की कमी और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में आज के दिन कुछ खास वास्तु उपाय अपनाकर सूर्य देव की कृपा पाई जा सकती है। सबसे पहला और महत्वपूर्ण उपाय है सूर्य देव की पूजा। सुबह स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य को जल अर्पित करें। इसके साथ ही घर में सूर्य देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करना भी शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि यह चित्र पूर्व दिशा में ही लगाया जाए और वह खंडित या टूटा हुआ न हो, वरना इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।अगर आप आर्थिक तंगी या रुकावटों से परेशान हैं, तो रविवार के दिन एक खास उपाय किया जा सकता है। इस दिन तीन झाड़ू खरीदकर घर में रखें और अगले दिन यानी सोमवार को इन्हें किसी मंदिर में दान कर दें। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। वास्तु के अनुसार सूर्य देव का संबंध लाल और नारंगी रंग से होता है। इसलिए घर की सजावट में इन रंगों का उपयोग करना शुभ माना जाता है। आप चाहें तो घर में लाल रंग के फूल या पौधे भी लगा सकते हैं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वातावरण ऊर्जावान बना रहता है। इसके अलावा, घर को साफ-सुथरा रखना और पूर्व दिशा को अव्यवस्थित न होने देना भी बेहद जरूरी है। यह दिशा सूर्य की मानी जाती है, इसलिए यहां स्वच्छता और रोशनी बनाए रखना लाभकारी होता है। इन छोटे-छोटे उपायों को अपनाकर न सिर्फ आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं, बल्कि आत्मविश्वास और सफलता की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं। नियमित रूप से इन उपायों का पालन करने से जीवन में स्थिरता और प्रगति दोनों संभव हो सकती हैं।
Census 2027: अब घर बैठे खुद भरें जनगणना फॉर्म, जानिए पूरा ऑनलाइन प्रोसेस

नई दिल्ली। देश में पहली बार Census 2027 को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है। इस बार नागरिकों को Self Enumeration यानी खुद से ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा दी गई है। इससे अब जनगणना अधिकारी के घर आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा आप खुद ही घर बैठे अपनी और परिवार की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया आसान, सुरक्षित और समय बचाने वाली है, जिसे पूरा करने में करीब 15 से 20 मिनट का समय लगता है। सरकार ने इसके लिए एक आधिकारिक पोर्टल लॉन्च किया है, जहां से आप पूरी प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। बाद में अधिकारी इस जानकारी का सत्यापन करेंगे। ऐसे करें Census 2027 का ऑनलाइन फॉर्म भरना सबसे पहले आधिकारिक जनगणना पोर्टल पर जाएं। वहां अपना राज्य चुनें और स्क्रीन पर दिए गए कैप्चा को भरकर आगे बढ़ें। इसके बाद घर के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें। मोबाइल नंबर पर आए OTP से वेरिफिकेशन पूरा करना होगा। OTP वेरिफिकेशन के बाद आपको अपनी पसंद की भाषा चुननी होगी। फिर एड्रेस डिटेल भरनी होगी, जिसमें जिला, पिन कोड और लोकेशन जैसी जानकारी शामिल होती है। अगले चरण में आपको अपने घर से जुड़ी जानकारी देनी होगी जैसे मकान पक्का है या कच्चा, दीवार और छत किस प्रकार की है आदि। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों की डिटेल भरनी होगी, जिसमें उम्र, लिंग, शिक्षा और अन्य आवश्यक जानकारी शामिल होती है। इसके अलावा आपको घर में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी देनी होगी, जैसे पानी, बिजली, शौचालय, इंटरनेट, टीवी, वाहन आदि। यह डेटा सरकार को सामाजिक और आर्थिक योजनाएं बनाने में मदद करेगा। सबमिट करने से पहले इन बातों का रखें ध्यानफॉर्म पूरा भरने के बाद सभी जानकारी को एक बार ध्यान से जरूर जांच लें। कोई भी गलती आगे परेशानी का कारण बन सकती है। जब आप पूरी तरह संतुष्ट हों, तब ही फाइनल सबमिट करें। सबमिट करने के बाद आपको एक रेफरेंस आईडी मिलेगी, जिसे सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। इसी आईडी के जरिए आगे आपकी जानकारी को ट्रैक और वेरिफाई किया जाएगा। क्यों खास है यह डिजिटल जनगणना?इस नई डिजिटल प्रक्रिया का उद्देश्य डेटा को ज्यादा सटीक, तेज और पारदर्शी तरीके से इकट्ठा करना है। इससे सरकार को योजनाएं बनाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी। साथ ही, यह नागरिकों के लिए भी सुविधाजनक है क्योंकि वे अपनी जानकारी खुद और सही तरीके से दर्ज कर सकते हैं।
ग्वालियर में वर्दी की साख पर सवाल: नशे में धुत होमगार्ड सिपाही सड़क पर बेसुध

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में शनिवार दोपहर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने वर्दीधारी सुरक्षा बलों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के सिटी सेंटर इलाके में एक होमगार्ड सिपाही शराब के नशे में इस कदर धुत मिला कि वह सड़क पर ही बेसुध होकर गिर पड़ा। राहगीरों ने जब यह दृश्य देखा तो हैरान रह गए, वहीं एक युवक ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बताया जा रहा है कि घटना दोपहर करीब 2 से 3 बजे के बीच की है। वर्दी पहने यह सिपाही सड़क पर लोटपोट होता नजर आया और खुद को संभालने की स्थिति में नहीं था। राहगीरों ने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन वह खड़ा भी नहीं हो पा रहा था। वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक युवक उससे उसका नाम और स्थिति पूछने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सिपाही ठीक से बोल भी नहीं पा रहा—सिर्फ इशारे करता और बड़बड़ाता नजर आता है। सबसे हैरानी की बात यह है कि सिपाही की वर्दी से नेम प्लेट भी गायब बताई जा रही है, जिससे उसकी पहचान अब तक नहीं हो सकी है। यही वजह है कि मामला और गंभीर हो गया है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और होमगार्ड विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक यह मामला पहुंच गया है, जिससे महकमे में हलचल मच गई है। इस घटना ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं क्या सिपाही ड्यूटी पर था? अगर नहीं, तो वर्दी में इस हालत में सार्वजनिक स्थान पर कैसे पहुंचा? और यदि ड्यूटी पर था, तो यह अनुशासनहीनता किस स्तर की है? साथ ही, नेम प्लेट का गायब होना भी संदेह को और गहरा करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ विभाग की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी कमजोर करती हैं। फिलहाल, प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है, लेकिन माना जा रहा है कि वीडियो के आधार पर जल्द ही संबंधित सिपाही की पहचान कर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। यह घटना फिलहाल पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
पत्रकारिता की आज़ादी या जिम्मेदारी? लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर बड़ा सवाल

लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनावों से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से भी होती है कि समाज में सच कितनी निर्भीकता से सामने आ पाता है। इसी संदर्भ में प्रेस को हमेशा लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया है। इसकी भूमिका केवल खबरें देने तक सीमित नहीं, बल्कि सत्ता और समाज के बीच पारदर्शिता बनाए रखने की भी है। लेकिन आज एक बड़ा सवाल हमारे सामने खड़ा हैक्या पत्रकारिता की स्वतंत्रता अपने मूल उद्देश्य से भटक रही है? क्यों मनाया जाता है विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस?हर साल 3 मई को ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित करनापत्रकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान दिलानाऔर यह सुनिश्चित करना कि मीडिया बिना किसी दबाव के अपना कार्य कर सके। कलम को तलवार से अधिक शक्तिशाली माना गया है, क्योंकि इसी ने समय-समय पर बड़े-बड़े घोटालों का पर्दाफाश किया है। कई शक्तिशाली लोगों को सत्ता के शिखर से नीचे लाने में पत्रकारिता की निर्णायक भूमिका रही है। सच की कीमत: जब पत्रकारों को चुकानी पड़ती है जानइतिहास गवाह है कि सच लिखना और दिखाना हमेशा आसान नहीं रहा।दुनियाभर में कई पत्रकारों को केवल इसलिए अपनी जान गंवानी पड़ी क्योंकि वे सच्चाई को सामने लाना चाहते थे। आज भी पत्रकारों पर तीन तरह के खतरे सबसे ज्यादा हैं राजनीतिक दबाव आपराधिक गिरोह और आतंकी संगठन भारत भी इस चुनौती से अछूता नहीं है। गिरती रैंकिंग: क्या कहती हैं वैश्विक रिपोर्ट्स?पेरिस स्थित संस्था ‘रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स’ (RSF) हर साल ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ जारी करती है। यह रिपोर्ट दुनिया भर में प्रेस की स्थिति का आकलन करती है।हाल के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं2026 में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर पहुंच गया2025 में यह रैंक 151 थी2024 में 159, 2023 में 161 और 2022 में 150यानी, उतार-चढ़ाव के बावजूद समग्र स्थिति स्थिर नहीं है और कई बार गिरावट भी दर्ज की गई है।दिलचस्प बात यह है कि नॉर्वे जैसे छोटे देश लगातार शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं, जबकि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र को इस मामले में संघर्ष करना पड़ रहा है। क्या खो रहा है संतुलन?प्रेस की स्वतंत्रता में गिरावट का सीधा असर लोकतंत्र की आत्मा—अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता—पर पड़ता है। एक समय था जब मीडिया जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देता था, लेकिन आज विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कुछ हिस्सों में टीआरपी की होड़ ने खबरों की गुणवत्ता को प्रभावित किया है।बिना पूरी जांच-पड़ताल के सनसनीखेज खबरें परोसना अब आम होता जा रहा है। इसका परिणाम क्या है? जनता का मीडिया पर भरोसा कम हो रहा है लोग तेजी से सोशल मीडिया की ओर बढ़ रहे हैं सोशल मीडिया और एआई: नई चुनौतीसोशल मीडिया ने जहां सूचना को आसान बनाया है, वहीं फेक न्यूज की समस्या को भी बढ़ा दिया है।अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने से यह चुनौती और गंभीर हो गई है, क्योंकि झूठी खबरों को और ज्यादा विश्वसनीय बनाकर पेश किया जा सकता है।ऐसे में जिम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। संविधान और प्रेस की स्वतंत्रताभारतीय संविधान में प्रेस को अलग से स्वतंत्रता नहीं दी गई है, बल्कि यह नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में ही शामिल है।हालांकि, देश की एकता और अखंडता के हित में इस स्वतंत्रता पर कुछ सीमाएं भी लगाई जा सकती हैं। लेकिन जब बिना किसी स्पष्ट खतरे के भी पत्रकारों के लिए काम करना कठिन होता जाए, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय बन जाता है। समाधान: स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरीप्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि,पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाए जाएं! मीडिया संस्थानों पर अनावश्यक दबाव न डाला जाए और पत्रकार बिना भय के काम कर सकें! लेकिन इसके साथ ही एक और सच्चाई को स्वीकार करना होगा! स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी आती है।मीडिया को अपनी मर्यादाओं का ध्यान रखते हुए निष्पक्ष, सत्य और संतुलित खबरें प्रस्तुत करनी चाहिए। प्रेस केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा का प्रतिबिंब है।यदि यह स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार रहेगा, तो लोकतंत्र भी मजबूत रहेगा।इसलिए आज जरूरत केवल प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा की नहीं, बल्कि उसे सही दिशा में उपयोग करने की भी है। -योगेश कुमार गोयल
इंदौर में IPL सट्टा गिरोह का भंडाफोड़: घर से वेबसाइट के जरिए चला रहा था खेल, सूदखोरी का भी खुलासा

नई दिल्ली। इंदौर में आईपीएल मैचों के दौरान अवैध सट्टेबाजी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां क्राइम ब्रांच ने एक युवक को उसके घर से गिरफ्तार किया। आरोपी अपने घर में बैठकर टीवी पर मैच देखते हुए मोबाइल फोन और वेबसाइट के जरिए सट्टा संचालित कर रहा था। पुलिस ने मौके से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित नकदी बरामद की है और अब पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। मामले का खुलासा करते हुए राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी, जिसके बाद धर्मराज कॉलोनी स्थित घर पर दबिश दी गई। यहां से शुभम उर्फ मोनू यादव को पकड़ा गया, जो उस समय लाइव आईपीएल मैच पर सट्टा लगवा रहा था। पुलिस के अनुसार, आरोपी दो मोबाइल फोन के जरिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सट्टेबाजी करवा रहा था। मौके से दो मोबाइल, एक एलईडी टीवी और करीब एक लाख रुपए का सामान जब्त किया गया है। मोबाइल फोन की जांच में लाखों रुपए के लेन-देन के सबूत भी मिले हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सट्टे का यह नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी “Allpanelexch9.co.website” नाम की साइट के जरिए लोगों को सट्टा खेलने के लिए आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराता था। इसके बदले वह तय रकम वसूलता था। इतना ही नहीं, वह लोगों को सट्टा खेलने के लिए पैसे उधार भी देता था और उस पर ब्याज वसूलता था, जिससे सूदखोरी का एंगल भी इस मामले में जुड़ गया है। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी शहर के कई लोगों को गेमिंग के लिए कॉइन्स उपलब्ध कराता था, जिससे वे ऑनलाइन सट्टा खेल सकें। पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, ट्रांजेक्शन और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आईपीएल जैसे बड़े आयोजनों के दौरान इस तरह की अवैध गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिन पर नजर रखने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। क्राइम ब्रांच अब इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
इंदौर नवकारसी विवाद गरमाया: सोशल मीडिया पर ‘कोल्ड वॉर’, संतों की एंट्री के बाद भी नहीं थमा टकराव

नई दिल्ली। इंदौर में महावीर जन्म कल्याणक के अवसर पर आयोजित नवकारसी कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद अब गहराता जा रहा है। लगभग एक महीने बाद भी यह मामला शांत होने के बजाय और उलझता नजर आ रहा है। श्वेतांबर जैन समाज के विभिन्न गुटों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं और यह विवाद अब सोशल मीडिया तक फैल गया है, जहां आरोप-प्रत्यारोप और प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। विवाद को और हवा तब मिली जब महासंघ की ओर से 29 दिन बाद जारी स्पष्टीकरण को समाज के कई वर्गों ने असंतोषजनक बताया। लोगों का मानना है कि इस बयान में संतुलन और संवेदनशीलता की कमी रही, जिससे स्थिति साफ होने के बजाय और अधिक सवाल खड़े हो गए। इस बीच, मानहानि नोटिस दिए जाने से मामला और अधिक गंभीर हो गया है। विवाद को शांत करने के प्रयास में जैन संत आचार्य मुक्तिसागर सूरि ने हस्तक्षेप किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से समाज के दोनों पक्षों से संयम और संवाद बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के सिद्धांत—क्षमा, सहिष्णुता और अहिंसा ही इस स्थिति से बाहर निकलने का मार्ग दिखा सकते हैं। उनका सवाल था कि “आखिर कब तक हम इस तरह आपस में उलझते रहेंगे?” आचार्य ने अपने संदेश में यह भी कहा कि मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उसका समाधान टकराव नहीं बल्कि संवाद और समझ से होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे शरीर के अंग आपस में टकराने पर भी हम उन्हें दंडित नहीं करते, उसी तरह समाज में भी सहनशीलता जरूरी है। उन्होंने सभी जैन संप्रदायों से भविष्य में एकजुट होकर आयोजन करने का सुझाव दिया, ताकि समाज में एकता का संदेश जाए।दरअसल, यह पूरा विवाद नवकारसी कार्यक्रम के दौरान ट्रैक्टर खड़े होने से शुरू हुआ था, जिसे बाद में इवेंट कंपनी की गलती बताया गया। कंपनी संचालक ने लिखित में माफी भी मांग ली थी, लेकिन इसके बावजूद मामला शांत नहीं हुआ। उल्टा, बाद में जारी पत्र और आरोपों को लेकर नई बहस छिड़ गई। इस बीच, श्री नाकोड़ा जैन कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अक्षय जैन द्वारा महासंघ को 50 लाख रुपए का मानहानि नोटिस भेजे जाने से विवाद और बढ़ गया है। समाज के कई वरिष्ठों का मानना है कि यह विवाद कुछ लोगों के अहंकार और नेतृत्व में समन्वय की कमी के कारण इतना लंबा खिंच गया। समाज के भीतर गुटबाजी और आंतरिक राजनीति की चर्चा भी अब खुलकर होने लगी है। कई लोग इसे संगठनात्मक वर्चस्व की लड़ाई बता रहे हैं, जिससे सामाजिक समरसता प्रभावित हो रही है। वरिष्ठ नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने भी दोनों पक्षों से अपील की है कि वे अहंकार छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाएं। उनका कहना है कि यह विवाद केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब पूरे जैन समाज की एकता और सौहार्द पर असर डाल रहा है।फिलहाल, संतों की अपील के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा, लेकिन उम्मीद अब भी बनी हुई है कि संवाद और समझ के जरिए समाधान निकलेगा और समाज एक बार फिर एकजुट होकर आगे बढ़ेगा।
आधे मध्यप्रदेश में मौसम का कहर: बारिश के साथ 50 Km/घंटा तक आंधी, 27 जिलों में अलर्ट

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। प्रदेश के आधे हिस्से में आज तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। खासतौर पर ग्वालियर और जबलपुर समेत 27 जिलों में मौसम को लेकर विशेष चेतावनी जारी की गई है। रविवार को कई इलाकों में बादल छाने के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर तेज बारिश और ओले गिरने की भी संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय सिस्टम के सक्रिय होने के कारण हो रहा है, जिसका असर पूरे मध्यप्रदेश के बड़े हिस्से में देखने को मिलेगा। तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और ट्रैफिक प्रभावित होने की संभावना है। ग्रामीण इलाकों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है, वहीं शहरी क्षेत्रों में भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से खुले स्थानों, कमजोर निर्माण और बिजली के खंभों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। हालांकि, इस मौसम बदलाव से भीषण गर्मी से कुछ राहत जरूर मिलेगी। पिछले कई दिनों से तापमान 40 डिग्री के पार बना हुआ था, जिससे लोग परेशान थे। बारिश के बाद तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे मौसम सुहावना हो सकता है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक बाहर निकलने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों और कृषि उपकरणों को सुरक्षित स्थानों पर रखें। कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज जहां एक ओर गर्मी से राहत देगा, वहीं दूसरी ओर तेज आंधी और ओलावृष्टि के कारण सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
NEET UG 2026: इंदौर में 23 हजार स्टूडेंट्स की परीक्षा आज, 57 केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा और खास इंतज़ाम

नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश की सबसे बड़ी परीक्षा NEET (UG) 2026 आज रविवार, 3 मई को इंदौर में आयोजित की जा रही है। इस बार जिले में कुल 57 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां 23,160 परीक्षार्थी अपने भविष्य की दिशा तय करने के लिए परीक्षा देंगे। पिछले साल आई व्यवस्थागत चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस बार जिला प्रशासन ने व्यापक और सख्त तैयारियां की हैं, ताकि परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए आईसीटीएसएल की विशेष बस सेवा सुबह 9 बजे से शुरू की गई है, जो शहर के प्रमुख बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से संचालित हो रही हैं। चार प्रमुख रूट तय किए गए हैं सांवेर, आईआईटी सिमरोल, आईआईएम और महू ताकि छात्रों को समय पर उनके केंद्रों तक पहुंचाया जा सके। परीक्षा समाप्ति के बाद शाम 5 बजे से वापसी के लिए भी बसों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। सभी परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है और संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। हर केंद्र पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनुचित गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। साथ ही, परीक्षा केंद्रों के आसपास अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं।स्वास्थ्य सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। सभी केंद्रों पर मेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है, जबकि पांच प्रमुख केंद्रों पर एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध रहेगी। दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, जिससे उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो। बिजली आपूर्ति को लेकर भी इस बार खास तैयारी की गई है। यदि किसी केंद्र पर बिजली बाधित होती है, तो तत्काल जनरेटर बैकअप उपलब्ध रहेगा। अभिभावकों के लिए केंद्रों के बाहर टेंट और पेयजल की व्यवस्था भी की गई है, ताकि उन्हें गर्मी में राहत मिल सके।पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू बनी रहे, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाए और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों की सतत मॉनिटरिंग की जाए। इसके लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट और उड़नदस्ते लगातार मैदान में रहेंगे और समय-समय पर निरीक्षण करेंगे। गौरतलब है कि पिछले वर्ष खराब मौसम, तेज आंधी और बिजली कटौती के कारण कई परीक्षार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। इस बार उन्हीं अनुभवों से सीख लेते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत और सख्त बनाया है। जिला प्रशासन ने सभी परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे समय पर अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंचें और किसी भी भ्रामक जानकारी या अफवाहों पर ध्यान न दें। यह परीक्षा न केवल उनके करियर, बल्कि उनके सपनों की दिशा तय करने वाली है और इस बार इंदौर पूरी तैयारी के साथ इसके लिए तैयार है।
प्रेग्नेंसी में योगासन के फायदे: मां और बच्चे दोनों की सेहत को मिलता है मजबूत सपोर्ट

नई दिल्ली। गर्भावस्था में योग से शरीर और मन दोनों को फायदा मिलता है। आयुष मंत्रालय ने बताया कि योग करने से प्रसव आसान होता है, तनाव कम होता है और मां-बच्चे की सेहत बेहतर रहती है। गर्भावस्था हर महिला के जीवन का एक बेहद खास और संवेदनशील समय होता है, जहां शरीर में कई शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं। इस दौरान सही देखभाल और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयुष मंत्रालय लगातार गर्भवती महिलाओं को योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देता रहा है। मंत्रालय के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित योग करने से न केवल शरीर मजबूत और लचीला बनता है, बल्कि मानसिक शांति भी बनी रहती है। यह समय अक्सर महिलाओं के लिए तनाव, चिंता और थकान से भरा हो सकता है, लेकिन योग इन सभी समस्याओं को काफी हद तक कम करने में मदद करता है। गर्भावस्था में महिलाओं को अक्सर पीठ दर्द, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में कठिनाई और नींद की समस्या जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हल्के और सुरक्षित योगासन इन समस्याओं से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। योग शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है, जिससे ऊर्जा बनी रहती है और थकान कम महसूस होती है। आयुष मंत्रालय के विशेषज्ञों के अनुसार, योग न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है बल्कि यह मानसिक संतुलन भी बनाए रखता है। गर्भवती महिला जब शांत और तनावमुक्त रहती है, तो उसका सीधा सकारात्मक असर बच्चे के विकास पर भी पड़ता है। यही कारण है कि योग को मां और बच्चे दोनों के लिए लाभकारी माना गया है। योग का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह प्रसव प्रक्रिया को आसान बनाता है। नियमित अभ्यास से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और लचीलापन बढ़ता है, जिससे डिलीवरी के समय शरीर बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया देता है। साथ ही प्रसव के बाद रिकवरी भी तेज होती है। आयुष मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि गर्भावस्था के हर चरण में योग अलग-अलग तरीके से लाभ देता है। शुरुआती महीनों में हल्के प्राणायाम और स्ट्रेचिंग, जबकि बाद के महीनों में डॉक्टर की सलाह से ही सरल और सुरक्षित योगासन करने चाहिए। मंत्रालय ने मदर्स डे (10 मई) के मौके पर खास अपील की है कि हर गर्भवती महिला योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाए। उनका कहना है कि “एक स्वस्थ मां ही एक स्वस्थ बच्चे की पहली नींव होती है।” विशेषज्ञों की राय है कि योग को बिना विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर महिला की स्थिति अलग होती है। सही मार्गदर्शन के साथ किया गया योग न केवल सुरक्षित होता है, बल्कि यह मां और बच्चे दोनों के लिए एक मजबूत और स्वस्थ भविष्य की नींव भी रखता है।
इंदौर में ज़हरीला पानी: भागीरथपुरा कांड के बाद भी नहीं थमा संकट, देवगुराड़िया में हालात भयावह

नई दिल्ली। इंदौर में भागीरथपुरा जलकांड की भयावह यादें अभी ताज़ा ही हैं, लेकिन इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में दूषित पानी का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा। अब देवगुराड़िया पंचायत क्षेत्र में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं, जहां भीषण गर्मी के बीच लोगों को न सिर्फ पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि जो पानी उपलब्ध है वह भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र के ट्रेंचिंग ग्राउंड और सीएनजी प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी जमीन में रिसकर भूजल को प्रदूषित कर रहा है। नतीजा यह है कि बोरिंग से निकलने वाला पानी बदबूदार, पीले रंग का और डीजल जैसी परत वाला हो गया है। यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही दैनिक उपयोग के लिए सुरक्षित। कई घरों में तो इस पानी से बर्तन तक पीले पड़ रहे हैं और उनमें मोटी परत जम रही है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग अब त्वचा रोगों और बाल झड़ने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि उनके बाल तेजी से गिर रहे हैं, जबकि पुरुषों में भी यही समस्या देखी जा रही है। बच्चों में खुजली, चकत्ते और एलर्जी जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का मानना है कि पानी में टीडीएस (घुले ठोस पदार्थ) की मात्रा अत्यधिक होने के कारण यह समस्याएं हो रही हैं। स्थानीय निवासी अनिल चौधरी बताते हैं कि घरों में लगे आरओ फिल्टर भी दो-तीन महीने में खराब हो जा रहे हैं। वहीं, कई लोगों का कहना है कि पानी गर्म करने पर बर्तनों में मोटी परत जम जाती है और दाल तक ठीक से नहीं पकती। कुछ मामलों में तो बोरिंग के पानी में ड्रेनेज का पानी मिलने की शिकायत भी सामने आई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। पानी की इस गंभीर समस्या के बीच टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। लेकिन टैंकर भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो रहे, जिससे लोगों को 600 से 700 रुपये तक खर्च कर पानी मंगवाना पड़ रहा है। यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरा जलाने और गंदे अपशिष्ट के गलत निपटान से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। मवेशियों की मौत और पर्यावरण प्रदूषण भी चिंता का विषय बन चुके हैं। कई इलाकों देवगुराड़िया, पत्थर मुंडला, मानसरोवर और श्रीजी वैली में पानी की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। हालात से नाराज़ लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे जन आंदोलन करेंगे और सड़क जाम जैसे कदम उठाने पर मजबूर होंगे। वहीं, पंचायत और प्रशासन के बीच जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी असमंजस बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ड वाटर में मौजूद खनिज त्वचा और बालों के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। इससे त्वचा में जलन, रूखापन, एलर्जी और बालों की कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। फिलहाल लोगों को अस्थायी राहत के तौर पर पानी को शुद्ध करने या फिटकरी के उपयोग की सलाह दी जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान अभी भी दूर नजर आ रहा है।