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डिहाइड्रेशन में रामबाण उपाय ओआरएस, शरीर में तुरंत बहाल करता है पानी और नमक का संतुलन

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन जाती है। खासकर जब किसी व्यक्ति को दस्त, उल्टी या ज्यादा पसीना आने जैसी स्थिति होती है, तब शरीर तेजी से जरूरी तरल पदार्थ और नमक खोने लगता है। इस स्थिति में सही समय पर ध्यान न दिया जाए तो कमजोरी, चक्कर आना और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे हालात में स्वास्थ्य विशेषज्ञ ओआरएस को सबसे सरल और प्रभावी उपाय मानते हैं। ओआरएस यानी ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम और पोटैशियम की कमी को तेजी से पूरा करने में मदद करता है। यह शरीर को तुरंत हाइड्रेट करने का काम करता है और मरीज की हालत को बिगड़ने से रोकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब दस्त या उल्टी शुरू होती है, तो केवल पानी पीना पर्याप्त नहीं होता क्योंकि उससे सिर्फ प्यास बुझती है, लेकिन शरीर में खोए हुए नमक और मिनरल्स की भरपाई नहीं हो पाती। ओआरएस इसी कमी को पूरा करता है और शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। ओआरएस का इस्तेमाल बहुत आसान माना जाता है। इसे एक लीटर साफ पानी में घोलकर छोटे-छोटे घूंट में पिया जाता है, जिससे शरीर धीरे-धीरे हाइड्रेट होता रहता है। यह बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों सभी के लिए सुरक्षित माना जाता है, खासकर तब जब शरीर कमजोर हो रहा हो। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी के दिनों में यह समस्या और बढ़ जाती है क्योंकि पसीने के जरिए भी शरीर से काफी मात्रा में पानी और नमक बाहर निकल जाता है। ऐसे में ओआरएस शरीर को तुरंत राहत देने में मदद करता है और अस्पताल जाने की जरूरत को भी कई मामलों में कम कर सकता है।  ओआरएस को एक ऐसा सरल और प्रभावी उपाय माना जाता है जो डिहाइड्रेशन जैसी समस्या से तेजी से राहत देने में मदद करता है और शरीर के जरूरी संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

रतलाम से किडनैप कर उज्जैन में युवक की हत्या, शराब पार्टी के बाद गला घोंटा; आरोपियों के घरों में आगजनी से तनाव

नई दिल्ली। रतलाम जिले में हुए एक सनसनीखेज अपहरण और हत्या के मामले ने पूरे क्षेत्र में तनाव फैला दिया है। 22 वर्षीय मनीष माली को घर से किडनैप कर लगभग 90 किलोमीटर दूर उज्जैन ले जाया गया, जहां उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई।  शराब पार्टी के बाद हत्यापुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पहले शराब पी और फिर पुरानी रंजिश के चलते विवाद हुआ। इसी दौरान मनीष की गला दबाकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपियों ने शव को एक कमरे में लॉक कर दिया और मौके से फरार हो गए। पुरानी रंजिश बनी वजहजानकारी के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पुराना विवाद इस हत्या की जड़ में बताया जा रहा है। एक लड़की को लेकर हुए विवाद के बाद दोनों पक्षों में तनाव बना हुआ था, जो बाद में जानलेवा वारदात में बदल गया। पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारीपुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी भी शामिल हैं। मामले में अपहरण के बाद हत्या की धाराएं जोड़ी गई हैं और जांच जारी है।  गुस्साई भीड़ का प्रदर्शनहत्या की खबर के बाद परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने शव रखकर चक्काजाम किया और आरोपियों के घरों में तोड़फोड़ की। कुछ जगहों पर आगजनी की भी घटना हुई, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और कई स्थानों पर अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई भी की गई।  स्थिति पर नजररतलाम और उज्जैन दोनों क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात है और हालात पर नजर रखी जा रही है ताकि आगे कोई अप्रिय घटना न हो। यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि पुरानी रंजिश और व्यक्तिगत विवाद कैसे गंभीर अपराध में बदल सकते हैं, जिससे पूरे इलाके की शांति प्रभावित हो जाती है।

उज्जैन शिक्षा विभाग में ‘लड्डू-मिठाई’ कोड से उगाही का खुलासा, WhatsApp चैटिंग वायरल

उज्जैन के जिला शिक्षा केंद्र में इंजीनियरों से कथित उगाही और वित्तीय अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां कुछ इंजीनियरों के बीच WhatsApp ग्रुप में “लड्डू” और “मिठाई” जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल कर पैसों की मांग और लेन-देन की बातचीत की जा रही थी। जानकारी के मुताबिक, जिला शिक्षा केंद्र उज्जैन के अंतर्गत कार्यरत इंजीनियरों के ग्रुप में कई ऐसे मैसेज सामने आए हैं, जिनमें मान्यता की फाइलों को आगे बढ़ाने, डीपीसी निर्देशों और अन्य कार्यों के नाम पर रकम की मांग की बात की गई है। WhatsApp चैटिंग में क्या सामने आया? वायरल चैट्स में कथित तौर पर- “भोपाल मिठाई भेजने” के नाम पर पैसे मांगने की बात “लड्डू के लिए शेयर कलेक्ट” जैसे कोड वर्ड का उपयोग UPI स्कैनर भेजकर ऑनलाइन भुगतान की मांग एक दिन में 200 से ज्यादा फाइलों के निपटारे का दावा इन मैसेजों ने विभागीय कामकाज और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंजीनियरों का पक्ष कुछ इंजीनियरों ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि “लड्डू” या “मिठाई” के नाम पर किसी तरह की वसूली नहीं की गई है और न ही ऐसा कोई निर्देश दिया गया था। वहीं, मामले में शामिल नामों पर स्पष्टीकरण देने की बात भी कही गई है। प्रशासन की प्रतिक्रिया जिला परियोजना समन्वयक (DPC) ने मामले पर हैरानी जताते हुए कहा है कि अगर किसी ने उनके नाम का दुरुपयोग कर पैसे मांगे हैं, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच के संकेत मामले के सामने आने के बाद अब विभागीय स्तर पर जांच की संभावना बढ़ गई है। चैटिंग और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सबूतों की जांच की जा सकती है। उज्जैन में सामने आया यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें इस पर हैं कि जांच में क्या सच सामने आता है और क्या कार्रवाई होती है।

मोबाइल पर डांट से नाराज नाबालिग 18 दिन बाद मिली, पुलिस ने सुरक्षित परिजनों को सौंपा

नई दिल्ली। उज्जैन जिले के बड़नगर थाना क्षेत्र से लापता हुई 16 वर्षीय नाबालिग को पुलिस ने 18 दिन बाद बदनावर क्षेत्र से सुरक्षित बरामद कर लिया है। परिजनों ने 14 अप्रैल 2026 को उसके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित की और तकनीकी जांच शुरू की। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और सीसीटीवी फुटेज की मदद से जांच आगे बढ़ाई गई। इसके साथ ही मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया ताकि जल्द से जल्द नाबालिग का पता लगाया जा सके। लगातार तलाश के बाद 2 मई को पुलिस को सूचना मिली कि नाबालिग चंपेलिया गांव में मौजूद है। सूचना मिलते ही टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और उसे सुरक्षित बरामद कर लिया।  पूछताछ में सामने आया कारणपुलिस पूछताछ में नाबालिग ने बताया कि मोबाइल चलाने को लेकर मां की डांट और मोबाइल छीन लिए जाने से वह नाराज हो गई थी। इसी कारण वह बिना बताए घर से निकल गई और बस से सीधे बदनावर पहुंच गई, जहां वह एक परिचित के घर रुकी थी।  पुलिस की पुष्टिजांच में यह साफ हुआ कि इस दौरान उसके साथ किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने उसे सुरक्षित परिजनों को सौंप दिया। यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि बच्चों के साथ संवाद और समझदारी से व्यवहार करना कितना जरूरी है, ताकि छोटी-छोटी बातों से ऐसे गंभीर मामले न बनें।

उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती: दिव्य श्रृंगार में सजे बाबा, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

नई दिल्ली। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान दिव्य और भव्य दृश्य देखने को मिला। भगवान महाकाल का विधि-विधान से पंचामृत पूजन कर आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसमें भांग, चंदन, बिल्वपत्र और रजत आभूषणों से बाबा को राजा स्वरूप में सजाया गया। भोर की पहली आरती के साथ ही मंदिर परिसर “हरिओम” के जयघोष और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया, जिसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद पारंपरिक रूप से भस्म अर्पित की गई, जिसे महाकाल पूजा का सबसे विशेष और पवित्र क्षण माना जाता है। भस्म अर्पण के दौरान महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से विशेष भस्म चढ़ाई गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी क्षण भगवान महाकाल अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।  नई दिल्ली। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान दिव्य और भव्य दृश्य देखने को मिला। भगवान महाकाल का विधि-विधान से पंचामृत पूजन कर आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसमें भांग, चंदन, बिल्वपत्र और रजत आभूषणों से बाबा को राजा स्वरूप में सजाया गया। भोर की पहली आरती के साथ ही मंदिर परिसर “हरिओम” के जयघोष और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया, जिसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद पारंपरिक रूप से भस्म अर्पित की गई, जिसे महाकाल पूजा का सबसे विशेष और पवित्र क्षण माना जाता है। भस्म अर्पण के दौरान महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से विशेष भस्म चढ़ाई गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी क्षण भगवान महाकाल अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके बाद शेषनाग का रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला, रजत मुण्डमाल और सुगंधित पुष्पों से बाबा का दिव्य श्रृंगार किया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों से सजे महाकाल का स्वरूप अत्यंत मनमोहक दिखाई दिया। आरती के दौरान भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने बड़े श्रद्धा भाव से देखा। इस पावन अवसर पर देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भस्म आरती के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान महाकाल की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था और ऊर्जा का अद्वितीय अनुभव है, जो हर भक्त के मन को भक्ति से भर देता है।

जनगणना में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई: 289 कर्मचारियों को नोटिस, FIR तक की चेतावनी

नई दिल्ली।  इंदौर में जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। निगम कमिश्नर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी क्षितिज सिंघल ने कुल 289 अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई उन कर्मचारियों के खिलाफ की गई है जो 1 मई से लगातार सूचना दिए जाने के बावजूद ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुए। प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कहा है कि यह मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है।  सख्त कार्रवाई की चेतावनीनोटिस में स्पष्ट किया गया है कि अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच प्रस्तावित की गई है। साथ ही जनगणना अधिनियम 1948 के तहत एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी तत्काल ड्यूटी पर लौटें और अपना जवाब 4 मई शाम 5:30 बजे तक प्रस्तुत करें। तय समय सीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर एकतरफा कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का सख्त संदेशअधिकारियों ने साफ किया है कि जनगणना कार्य जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह देश की नीतियों और योजनाओं के लिए बेहद जरूरी डेटा संग्रह प्रक्रिया है। इंदौर प्रशासन की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी कार्यों में अनुशासन सर्वोपरि है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि कर्मचारी समय पर जवाब देते हैं या उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है।

Instagram का बड़ा एक्शन: कॉपी-पेस्ट कंटेंट पर सख्ती, अब सिर्फ ओरिजिनल क्रिएटर्स को मिलेगी रीच

नई दिल्ली। इंस्टाग्राम पर अब “कॉपी-पेस्ट” कंटेंट का खेल ज्यादा दिन नहीं चलने वाला। Instagram ने साफ कर दिया है कि जो अकाउंट लगातार दूसरों की पोस्ट रिपोस्ट करते हैं, उन्हें अब प्लेटफॉर्म के रिकमेंडेशन सिस्टम में जगह नहीं मिलेगी। यानी ऐसे क्रिएटर्स की पोस्ट भले ही उनके फॉलोवर्स तक पहुंच जाए, लेकिन नए दर्शकों तक उनकी एंट्री लगभग बंद हो जाएगी। कंपनी का यह कदम सीधे तौर पर उन अकाउंट्स पर असर डालेगा जो सिर्फ वायरल वीडियो उठाकर रीपोस्ट करते हैं। अब डिस्कवरी फीचर में वही कंटेंट आगे बढ़ेगा, जिसमें कुछ नया, कुछ ओरिजिनल होगा। इंस्टाग्राम का साफ संदेश है“रीच चाहिए तो मेहनत करो, कॉपी नहीं।” हालांकि, यहां एक ट्विस्ट भी है। अगर कोई क्रिएटर किसी ट्रेंडिंग टेम्पलेट, क्लिप या रील में अपना नया एंगल, एडिटिंग या क्रिएटिव इनपुट जोड़ता है, तो उसे ओरिजिनल कंटेंट माना जाएगा। यानी पूरी तरह से रोक नहीं, बल्कि “क्रिएटिविटी को बढ़ावा” देने की रणनीति है। वहीं, इंस्टाग्राम ने यह भी साफ कर दिया है कि किन चीजों को ओरिजिनल नहीं माना जाएगा। दूसरों के वीडियो पर सिर्फ वाटरमार्क लगाना, स्पीड बदल देना, या स्क्रीनशॉट लेकर पोस्ट करना। ऐसे जुगाड़ वाले कंटेंट को अब एल्गोरिद्म पहचान लेगा और नई ऑडियंस तक पहुंचने से रोक देगा। यूजर्स के लिए क्या बदलेगा? कंपनी का कहना है कि आप जिन अकाउंट्स को फॉलो करते हैं, उनका कंटेंट पहले की तरह ही आपकी फीड में आता रहेगा। लेकिन जो पेज सिर्फ रीपोस्ट पर चल रहे हैं, उनकी रीच धीरे-धीरे गिरती जाएगी। मकसद साफ है फीड को ज्यादा रिलेटेबल और क्वालिटी कंटेंट से भरना। दरअसल, ये बदलाव ऐसे समय में आया है जब Meta के प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स से करीब 2 करोड़ डेली एक्टिव यूजर्स कम हुए हैं। कई यूजर्स का कहना है कि उनकी फीड पर दिखने वाला कंटेंट न तो काम का होता है और न ही उनकी पसंद से जुड़ा होता है। ऐसे में इंस्टाग्राम का यह नया दांव साफ संकेत देता हैअब प्लेटफॉर्म “वायरल” नहीं, बल्कि ओरिजिनल कंटेंट के दम पर वापसी करना चाहता है।

भारत के ‘रियल पैडमैन’ नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित, अक्षय कुमार निभा चुके रोल

नई दिल्ली। महिलाओं की स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले भारत के प्रसिद्ध सोशल एंटरप्रेन्योर अरुणाचलम मुरुगनाथम को एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि मिली है। ‘पैडमैन’ के नाम से पहचान बनाने वाले मुरुगनाथम ने रविवार को बताया कि उन्हें वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। तमिलनाडु के एक छोटे से गांव से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचने का उनका सफर देश के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उनके जीवन संघर्ष और सामाजिक योगदान को बॉलीवुड में भी सराहा गया, जहां पैडमैन फिल्म के जरिए उनकी कहानी को बड़े पर्दे पर दिखाया गया। इस फिल्म में अक्षय कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई थी। नामांकन पर क्या बोले मुरुगनाथम?अपनी इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए अरुणाचलम मुरुगनाथम ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि शुरुआत में उन्हें इस खबर पर विश्वास ही नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि नोबेल पुरस्कार के लिए कोई व्यक्ति खुद या उसके करीबी नामांकन नहीं भेज सकते, बल्कि यह प्रक्रिया किसी तीसरे पक्ष द्वारा की जाती है। उनके अनुसार, पुडुचेरी स्थित अरविंद आई हॉस्पिटल के एक डीन और वहां कार्यरत अमेरिकी टीमों ने उनका नाम प्रस्तावित किया, जिसे 24 घंटे के भीतर स्वीकार कर लिया गया। नोबेल शांति पुरस्कार 2026 की स्थितिआधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 के लिए कुल 287 उम्मीदवारों को नामांकित किया गया है। इनमें 208 व्यक्ति और 79 संगठन शामिल हैं। इस सूची में मुरुगनाथम का नाम शामिल होना उनके काम की वैश्विक अहमियत को दर्शाता है। हालांकि, अंतिम चयन प्रक्रिया काफी जटिल और बहु-स्तरीय होती है। कैसे होता है चयन?नोबेल समिति नामांकन के बाद विशेषज्ञों से विस्तृत मूल्यांकन कराती है। इसमें संबंधित क्षेत्र के विद्वानों, शोधकर्ताओं और अकादमिक विशेषज्ञों की राय ली जाती है। साथ ही उम्मीदवार के कार्यों से जुड़े रिसर्च पेपर और दस्तावेजों की गहन समीक्षा की जाती है, ताकि योग्य व्यक्ति या संस्था को ही यह सम्मान मिल सके। कौन हैं ‘रियल पैडमैन’?अरुणाचलम मुरुगनाथम ने ग्रामीण भारत में महिलाओं को सस्ते और सुरक्षित सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने एक कम लागत वाली मशीन विकसित की, जिससे स्थानीय स्तर पर पैड तैयार किए जा सकते हैं। इस पहल ने हजारों महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार किया। सिनेमा से समाज तक असरउनकी प्रेरणादायक कहानी को निर्देशक आर. बाल्की ने फिल्म पैडमैन के जरिए दर्शाया। 2018 में रिलीज हुई इस फिल्म में अक्षय कुमार के साथ राधिका आप्टे और सोनम कपूर भी नजर आई थीं। फिल्म ने समाज में मासिक धर्म और स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात करने का माहौल बनाया और राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हासिल की। आज वही ‘रियल पैडमैन’ वैश्विक मंच पर भारत का नाम रोशन करते हुए नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में शामिल हो चुके हैं।

MP में 6 साल बाद महिला आयोग को मिला अध्यक्ष, रेखा यादव की नियुक्ति से तेज हुई राजनीतिक नियुक्तियों की रफ्तार

नई दिल्ली।  मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला एक बार फिर तेज हो गया है। राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां करते हुए प्रशासनिक ढांचे को सक्रिय किया है। सबसे अहम फैसला राज्य महिला आयोग को लेकर सामने आया है, जहां रेखा यादव को नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति लगभग 6 साल बाद हुई है, जिससे आयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही साधना स्थापक को महिला आयोग का सदस्य बनाया गया है। हालांकि, आयोग में अभी भी पूर्ण कोरम नहीं बन पाया है क्योंकि कुल 6 पदों में से 4 सदस्य पद खाली हैं। इससे आयोग के कामकाज की गति पर असर पड़ सकता है।  समीक्षा की नियुक्ति पर ब्रेकग्वालियर की पूर्व महापौर साधना गुप्ता को सदस्य बनाए जाने का प्रस्ताव था, लेकिन ग्वालियर से पहले ही अधिक नियुक्तियों और आंतरिक विरोध के चलते उनका नाम फिलहाल रोक दिया गया है। जल्द ही एक और सदस्य की नियुक्ति की संभावना जताई जा रही है। अन्य अहम नियुक्तियांसरकार ने विभिन्न निगमों और बोर्डों में भी नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं— रवि मालवीय को पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया हैकई अन्य प्रमुख संस्थानों में भी नई नियुक्तियां की गई हैं, जिनमें राज्य वन विकास निगम, पशुधन निगम, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड और लघु उद्योग निगम शामिल हैं प्रमुख नियुक्तियों की सूचीअनुसूचित जनजाति आयोग – रामलाल रौतेलअनुसूचित जाति आयोग – कैलाश जाटवराज्य महिला आयोग – रेखा यादवयुवा आयोग – प्रवीण शर्मायोग आयोग – राघवेंद्र शर्माखादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड – पंकज जोशी  राजनीतिक संकेतइन नियुक्तियों को प्रशासनिक पुनर्गठन के साथ-साथ राजनीतिक संतुलन की दिशा में भी देखा जा रहा है। विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। मध्य प्रदेश में की गई ये नियुक्तियां आने वाले समय में कई बोर्डों और आयोगों के कामकाज को गति दे सकती हैं। हालांकि महिला आयोग में खाली पदों के कारण अभी भी पूर्ण सक्रियता आने में समय लग सकता है।

भीषण गर्मी में बढ़ा प्रेग्नेंसी रिस्क, समय से पहले डिलीवरी और लो बर्थ वेट का खतरा तेज..

नई दिल्ली। भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका गंभीर प्रभाव गर्भवती महिलाओं और उनके अजन्मे बच्चों पर भी देखने को मिल रहा है। देश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है, जिससे गर्म हवाएं और लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, इस तरह की अत्यधिक गर्मी शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे गर्भवती महिलाओं में कई प्रकार की जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। शरीर में पानी की कमी और गर्मी से होने वाला तनाव कई बार समय से पहले प्रसव का कारण बन सकता है। यह स्थिति मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरी मानी जाती है। गर्मी का असर केवल प्रसव प्रक्रिया तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को भी प्रभावित करता है। जब शरीर में पर्याप्त पोषण और रक्त प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता, तो बच्चे का वजन जन्म के समय सामान्य से कम हो सकता है। यह स्थिति आगे चलकर नवजात के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। इसके अलावा, लंबे समय तक तेज धूप और गर्म वातावरण में रहने से गर्भवती महिलाओं में रक्तचाप बढ़ने का खतरा भी रहता है। यह स्थिति शरीर में कमजोरी, थकान और अन्य जटिलताओं को जन्म दे सकती है, जो प्रेग्नेंसी के दौरान अधिक खतरनाक साबित हो सकती हैं। विशेषज्ञ इस समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखना चाहिए। हल्का और संतुलित आहार तथा ठंडे वातावरण में आराम इस दौरान बेहद जरूरी माना जा रहा है।