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West Bengal Election: आरजी कर केस की गूंज चुनाव में, पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ पानीहाटी से आगे

RATNA DEBNATH

HIGHLIGHTS: पानीहाटी सीट पर रत्ना देबनाथ आगे RG Kar केस बना बड़ा चुनावी मुद्दा TMC के तीर्थंकर घोष से सीधा मुकाबला महिला सुरक्षा पर केंद्रित रहा प्रचार भावनात्मक कैंपेन का दिखा असर   West Bengal Election: कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में BJP की स्थिति मजबूत नजर आ रही है, लेकिन इस बीच कुछ सीटें काफी चर्चा में हैं। इन्हीं में से एक है उत्तर 24 परगना की पानीहाटी सीट, जहां RG Kar केस की गूंज चुनावी मुद्दा बन गई है। इस सीट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि यहां मुकाबला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी बन गया है। West Bengal Election: ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंजा BJP मुख्यालय, कोलकाता में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न रत्ना देबनाथ पानीहाटी से आगे रत्ना देबनाथ जो आरजी कर रेप-मर्डर पीड़िता की मां हैं, पानीहाटी विधानसभा सीट से आगे चल रही हैं। चुनाव आयोग के रुझानों के मुताबिक वह अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी तीर्थंकर घोष से बढ़त बनाए हुए हैं। इस सीट पर उनकी बढ़त को BJP के लिए अहम माना जा रहा है। WEST BENGAL ELECTION: पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों ने TMC का साथ छोड़ा, मतगणना के बीच शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान हाई-प्रोफाइल मुकाबला बना पानीहाटी पानीहाटी सीट इस बार सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो गई है। तीर्थंकर घोष, जो पांच बार के विधायक के परिवार से आते हैं, और रत्ना देबनाथ के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। यह सीट दमदम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और यहां का चुनावी माहौल काफी संवेदनशील बना हुआ है। WEST BENGAL ELECTION: चुनाव में दिखा ‘झालमुड़ी फैक्टर, झाड़ग्राम में बीजेपी की मजबूत पकड़ महिला सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा चुनाव प्रचार के दौरानरत्ना देबनाथ ने अपनी बेटी के मामले को प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने महिला सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके इस भावनात्मक और मजबूत कैंपेन का असर अब रुझानों में भी दिखता नजर आ रहा है। west bengal election 2026: पश्चिम बंगाल में 1 बजे तक 60% से ज्यादा मतदान, तमिलनाडु थोड़ा पीछे, देंखे अब तक के आंकड़े भावनाओं से जुड़ा चुनावी संदेश रत्ना देबनाथ ने प्रचार के दौरान कहा था कि उन्होंने अपनी बेटी को खोया है, लेकिन अब वह समाज की सेवा करना चाहती हैं। उनका यह संदेश मतदाताओं के बीच गहराई से जुड़ा और चुनाव को एक अलग दिशा दे गया। पानीहाटी सीट अब सिर्फ एक राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश का केंद्र बन चुकी है।

Jio का बड़ा झटका! 209 रुपये वाला प्लान बंद, सस्ता 1GB डेटा खत्म अब ज्यादा पैसे देकर ही मिलेगा इंटरनेट

नई दिल्ली। Jio यूजर्स के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। कंपनी ने अपना लोकप्रिय 209 रुपये वाला प्रीपेड प्लान बंद कर दिया है, जिसमें रोजाना 1GB डेटा और 22 दिन की वैलिडिटी मिलती थी। यह प्लान खासतौर पर उन यूजर्स के बीच काफी लोकप्रिय था, जिन्हें कम डेटा लेकिन ज्यादा कॉलिंग की जरूरत होती थी। इस प्लान के बंद होने के बाद अब यूजर्स के पास रोजाना 1GB डेटा वाला कोई विकल्प नहीं बचा है। अब अगर किसी यूजर को लगभग समान वैलिडिटी वाला प्लान चाहिए, तो उसे 239 रुपये खर्च करने होंगे। इस प्लान में रोजाना 1.5GB डेटा और 22 दिन की वैलिडिटी मिलती है, यानी पहले के मुकाबले करीब 14% ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। अगर यूजर्स सस्ता विकल्प चुनना चाहते हैं, तो 198 रुपये और 199 रुपये के प्लान मौजूद हैं। 198 रुपये वाले प्लान में 14 दिन की वैलिडिटी के साथ रोज 2GB डेटा मिलता है, जबकि 199 रुपये के प्लान में 18 दिन के लिए रोज 1.5GB डेटा दिया जा रहा है। हालांकि, इन दोनों प्लान में वैलिडिटी कम है, जिससे लंबे समय के लिए ये उतने फायदेमंद नहीं माने जा रहे। दूसरी तरफ, जिन यूजर्स को लंबी वैलिडिटी चाहिए, उनके लिए 299 रुपये का प्लान बेहतर विकल्प बनकर सामने आता है। इसमें 28 दिन तक रोज 1.5GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग मिलती है। हालांकि, यह प्लान 209 रुपये वाले पुराने प्लान के मुकाबले काफी महंगा है। टेलीकॉम सेक्टर में यह बदलाव ऐसे समय पर आया है जब रिचार्ज प्लान महंगे होने की चर्चा पहले से ही चल रही थी। माना जा रहा है कि कंपनियां अब धीरे-धीरे सस्ते प्लान हटाकर ज्यादा कीमत वाले प्लान्स पर फोकस कर रही हैं। कुल मिलाकर, Jio का 209 रुपये वाला प्लान बंद होना उन यूजर्स के लिए झटका है जो कम खर्च में बेसिक इंटरनेट और कॉलिंग का फायदा उठाना चाहते थे। अब उन्हें या तो ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे या कम वैलिडिटी के साथ समझौता करना पड़ेगा।

Amazon की समर सेल में धमाका! Galaxy S25 Ultra ₹25,000 सस्ता, जानें किन फोन्स पर मिल रहा भारी डिस्काउंट

नई दिल्ली। Amazon की बहुप्रतीक्षित Great Summer Sale 2026 का ऐलान हो गया है और इस बार ग्राहकों के लिए बड़े-बड़े ऑफर्स तैयार हैं। यह मेगा सेल 8 मई 2026 से शुरू होगी, जबकि 5 मई से प्राइम यूजर्स के लिए अर्ली एक्सेस लाइव हो जाएगा। खास बात यह है कि इस सेल में प्रीमियम से लेकर मिड-रेंज स्मार्टफोन्स तक पर भारी छूट मिलने वाली है। इस सेल का सबसे बड़ा आकर्षण Samsung Galaxy S25 Ultra है, जिसे करीब ₹25,000 तक सस्ते में खरीदा जा सकेगा। जहां इसकी मौजूदा कीमत लगभग ₹1,19,999 है, वहीं सेल में यह फोन ₹94,999 में उपलब्ध होगा। यानी फ्लैगशिप फोन खरीदने का शानदार मौका मिल रहा है। सिर्फ सैमसंग ही नहीं, OnePlus 13s पर भी तगड़ा डिस्काउंट देखने को मिलेगा। इस फोन की कीमत अभी ₹51,999 है, लेकिन बैंक ऑफर्स के साथ इसे ₹46,999 में खरीदा जा सकेगा। यह उन यूजर्स के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है जो प्रीमियम फीचर्स के साथ थोड़ा बजट बचाना चाहते हैं। गेमिंग के शौकीनों के लिए iQOO 15R एक बढ़िया डील बनकर सामने आ रहा है। इसकी शुरुआती कीमत ₹57,999 है, लेकिन सेल में यह फोन ₹42,999 तक मिल सकता है। दमदार प्रोसेसर और परफॉर्मेंस के चलते यह मोबाइल गेमर्स के लिए खास आकर्षण रहेगा। वहीं, फोल्डेबल स्मार्टफोन खरीदने वालों के लिए भी यह सेल खास है। Samsung Galaxy Z Fold 7 को ₹10,000 की छूट के साथ ₹1,64,999 में खरीदा जा सकेगा, जो कि बैंक ऑफर्स के बाद की कीमत होगी। कुल मिलाकर, Amazon की यह समर सेल स्मार्टफोन खरीदने का शानदार मौका साबित हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय से फ्लैगशिप या हाई-परफॉर्मेंस फोन लेने का इंतजार कर रहे थे। भारी डिस्काउंट, बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज डील्स के साथ यह सेल टेक लवर्स के लिए किसी फेस्टिवल से कम नहीं है।

महाराष्ट्र दिवस पर शेयर बाजार बंद, सेंसेक्स-निफ्टी में आज नहीं होगा कारोबार..

नई दिल्ली। महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर आज भारतीय शेयर बाजार में कारोबार पूरी तरह से बंद रहा। देश के प्रमुख दोनों स्टॉक एक्सचेंजों पर किसी भी प्रकार की खरीद-बिक्री नहीं हुई, जिससे निवेशकों को एक दिन का इंतजार करना पड़ा। इस अवकाश के चलते इक्विटी, डेरिवेटिव्स और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) जैसे सभी प्रमुख सेगमेंट में ट्रेडिंग रुकी रही। सामान्य कारोबार अब अगले सत्र में शुरू होगा, जिससे बाजार में गतिविधियां फिर से तेज होने की उम्मीद है। कमोडिटी मार्केट में आंशिक रूप से गतिविधि देखने को मिली, जहां सुबह के सत्र में कारोबार बंद रहा, जबकि शाम के सत्र में सीमित समय के लिए ट्रेडिंग जारी रही। इससे कमोडिटी निवेशकों को आंशिक राहत मिली। महाराष्ट्र दिवस के साथ-साथ इस दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई देशों में अवकाश रहा, जिसके चलते वैश्विक बाजारों में भी कारोबार प्रभावित हुआ। कई एशियाई और यूरोपीय बाजार बंद रहे, जिससे अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग गतिविधियां कम हो गईं। इससे पहले कारोबारी सत्र में भारतीय बाजार दबाव में बंद हुआ था। वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी, और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए थे। लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हलचल देखने को मिली थी। कुछ सेक्टर में खरीदारी रही, जबकि कई प्रमुख स्टॉक्स में बिकवाली का दबाव बना रहा।

Xiaomi ला रहा दो धांसू 5G फोन, 50MP कैमरा और पावरफुल चिपसेट से मिड-रेंज में मचेगा धमाल!

नई दिल्ली। Xiaomi एक बार फिर स्मार्टफोन मार्केट में हलचल मचाने की तैयारी में है। कंपनी जल्द ही अपनी पॉपुलर Civi सीरीज के तहत दो नए 5G स्मार्टफोन—Xiaomi Civi 6 और Xiaomi Civi 6 Pro लॉन्च करने वाली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये दोनों डिवाइस प्रीमियम मिड-रेंज सेगमेंट में दमदार फीचर्स के साथ एंट्री करेंगे और यूजर्स को फ्लैगशिप जैसा अनुभव देने की कोशिश करेंगे। लीक्स और रिपोर्ट्स की मानें तो Xiaomi Civi 6 सीरीज का फोकस इस बार स्लिम डिजाइन, बेहतर कैमरा क्वालिटी और बैलेंस्ड परफॉर्मेंस पर रहेगा। खास बात यह है कि दोनों ही स्मार्टफोन्स में 1.5K रिज़ॉल्यूशन वाली हाई-क्वालिटी डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है, जो विजुअल एक्सपीरियंस को और शानदार बनाएगी। Xiaomi Civi 6 की बात करें तो इसमें करीब 6.59-इंच की डिस्प्ले दी जा सकती है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें MediaTek Dimensity 8500 चिपसेट मिलने की संभावना है, जो स्मूद और तेज एक्सपीरियंस देगा। कैमरा सेगमेंट में भी बड़ा अपग्रेड देखने को मिल सकता है—फोन में 50MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस दिया जा सकता है, जो 5x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट करेगा। वहीं, Xiaomi Civi 6 Pro को और ज्यादा पावरफुल बनाया जा सकता है। इसमें 6.83-इंच की बड़ी डिस्प्ले के साथ MediaTek Dimensity 9500 प्रोसेसर मिलने की उम्मीद है, जो हैवी यूज और गेमिंग के लिए बेहतर साबित हो सकता है। कैमरा सेटअप में Pro मॉडल भी 50MP पेरिस्कोप लेंस के साथ आ सकता है, जिससे फोटोग्राफी का अनुभव और बेहतर होगा। लॉन्च टाइमलाइन की बात करें तो फिलहाल कंपनी ने आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया है, लेकिन टिपस्टर्स के अनुसार यह सीरीज जल्द ही चीन में पेश की जा सकती है। माना जा रहा है कि यह नई सीरीज पुराने Xiaomi Civi 5 Pro को रिप्लेस करेगी। कुल मिलाकर, Xiaomi की यह नई Civi 6 सीरीज उन यूजर्स के लिए खास हो सकती है, जो स्टाइलिश डिजाइन, दमदार कैमरा और पावरफुल परफॉर्मेंस एक साथ चाहते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि लॉन्च के बाद ये स्मार्टफोन्स मार्केट में कितना असर छोड़ पाते हैं।

राउटर पर सिक्का रखने से बढ़ती है स्पीड? सच जानकर चौंक जाएंगे, फायदा नहीं नुकसान ज्यादा!

नई दिल्ली। इन दिनों सोशल मीडिया और टेक टिप्स के नाम पर एक अजीब ट्रिक तेजी से वायरल हो रही हैWi-Fi राउटर पर सिक्का रखने से इंटरनेट स्पीड बढ़ जाती है। कई लोग इस “जुगाड़” को आजमा भी रहे हैं, लेकिन क्या वाकई यह तरीका काम करता है? एक्सपर्ट्स की मानें तो यह सिर्फ एक भ्रम है, जिसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। असल में Wi-Fi राउटर रेडियो फ्रीक्वेंसी पर काम करता है। इसके अंदर मौजूद एंटीना बेहद सटीक इंजीनियरिंग के साथ बनाए जाते हैं, जो इलेक्ट्रिकल सिग्नल को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स में बदलते हैं। यही वेव्स आपके मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिवाइसेज तक इंटरनेट पहुंचाती हैं। ऐसे में अगर कोई सिक्का राउटर की प्लास्टिक बॉडी के ऊपर रखा जाता है, तो उसका इन सिग्नल्स या एंटीना पर कोई असर पड़ना लगभग नामुमकिन है। तकनीकी रूप से देखें तो सिक्का सिर्फ एक धातु का छोटा टुकड़ा होता है, जो न तो सिग्नल को बढ़ा सकता है और न ही उसकी दिशा बदल सकता है। यानी यह ट्रिक वैज्ञानिक आधार पर पूरी तरह फेल साबित होती है। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स इसे “मिथक” मानते हैं, न कि कोई उपयोगी उपाय। इतना ही नहीं, यह ट्रिक आपके राउटर को नुकसान भी पहुंचा सकती है। राउटर के ऊपर सिक्का रखने से उसके वेंटिलेशन स्लॉट्स ब्लॉक हो सकते हैं, जिससे अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। इससे राउटर ओवरहीट हो सकता है, जिसकी वजह से इंटरनेट स्पीड और भी धीमी हो सकती है या बार-बार कनेक्शन कटने की समस्या आ सकती है। लंबे समय तक ऐसा करने से राउटर खराब होने का भी खतरा रहता है। अगर आप सच में अपने Wi-Fi की स्पीड बढ़ाना चाहते हैं, तो सही तरीका अपनाना जरूरी है। राउटर को हमेशा घर के बीचों-बीच रखें, ताकि सिग्नल हर दिशा में बराबर फैल सके। इसे जमीन पर रखने की बजाय थोड़ी ऊंचाई पर लगाना बेहतर होता है। साथ ही, राउटर को टीवी, माइक्रोवेव या बड़ी धातु की चीजों के पास रखने से बचें, क्योंकि ये सिग्नल को कमजोर कर सकते हैं। साफ शब्दों में कहें तो राउटर पर सिक्का रखने की ट्रिक सिर्फ एक इंटरनेट मिथ है, जो काम नहीं करती। अगर आप बेहतर स्पीड चाहते हैं, तो सही सेटअप और सही जगह का चुनाव ही सबसे बड़ा “हैक” है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बावजूद सोना-चांदी में गिरावट, बाजार में दबाव कायम..

नई दिल्ली।अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बावजूद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है, जिसके चलते कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। सोने के वायदा बाजार में कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई और कीमतें पिछली क्लोजिंग से नीचे स्तर पर खुलीं। दिनभर के कारोबार में भी सोने में बहुत ज्यादा मजबूती नहीं देखी गई और यह सीमित दायरे में ही बना रहा। चांदी की कीमतों में भी गिरावट का रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में चांदी कमजोर खुली और पूरे सत्र के दौरान दबाव में बनी रही। बाजार में खरीदारी कमजोर रहने के कारण इसमें कोई बड़ी रिकवरी नहीं दिखी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दोनों में नरमी दर्ज की गई है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश से हटकर अन्य विकल्पों की ओर देख रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं की मांग पर असर पड़ा है। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन बाजार ने इस पर सीमित प्रतिक्रिया दी है। ऊर्जा बाजार और वैश्विक आर्थिक संकेतों के बीच निवेशक फिलहाल इंतजार की स्थिति में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिलती, तब तक सोना और चांदी में बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना कम है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक बड़े फैसलों से बच रहे हैं।

होर्मुज में टकराव चरम पर: ईरानी जहाज छोड़ा, US का रेस्क्यू मिशन शुरू, क्या बढ़ेगा युद्ध का खतरा?

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और चीन से जुड़ी घटनाओं ने वैश्विक राजनीति और समुद्री सुरक्षा को बेहद संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। हाल ही में अमेरिका ने जब्त किए गए ईरानी जहाज ‘टूस्का’ को पाकिस्तान के हवाले कर दिया है, जिससे इस पूरे विवाद में नया मोड़ आ गया है। अब इस जहाज को उसके क्रू मेंबर्स के साथ ईरान भेजा जाएगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब होर्मुज स्ट्रेट में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। दरअसल, अमेरिका ने 21 अप्रैल को इस जहाज को उस वक्त कब्जे में लिया था, जब यह चीन से लौट रहा था। अमेरिकी अधिकारियों का दावा था कि जहाज पर हथियार बनाने से जुड़ा सामान मौजूद था, जिसे ईरान ने सिरे से खारिज करते हुए इस कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ करार दिया था। अब जहाज की रिहाई को कई जानकार कूटनीतिक संकेत के तौर पर भी देख रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के तहत होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि कई देशों ने मदद मांगी है और अमेरिका इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए सोमवार से ऑपरेशन शुरू करेगा। ट्रम्प ने यह भी साफ कर दिया कि अगर इस मिशन में ईरान ने कोई रुकावट डाली, तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा। हालांकि, ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी नेवी ने होर्मुज में प्रवेश करने की कोशिश की, तो उस पर हमला किया जाएगा। IRGC के पूर्व कमांडर मोहसिन रजाई ने तो यहां तक कह दिया कि यह क्षेत्र अमेरिकी सेना की “कब्रगाह” बन सकता है। तनाव की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि Strait of Hormuz में इस समय करीब 2,000 जहाज फंसे हुए हैं। इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, इन जहाजों पर करीब 20,000 नाविक मौजूद हैं, जो लगातार बिगड़ती स्थिति के बीच फंसे हुए हैं। खाने-पीने का सामान, ईंधन और जरूरी संसाधनों की कमी तेजी से बढ़ रही है। स्थिति को और जटिल बनाते हुए, हाल के दिनों में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं। छोटे नावों के जरिए कार्गो शिप पर हमला किया गया, जबकि अब तक कम से कम 49 जहाज अपने रास्ते बदल चुके हैं। इससे वैश्विक सप्लाई चेन और तेल बाजार पर भी असर पड़ा है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़कर 4.45 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं। इस पूरे संकट के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सेना ने एक ईरानी कंटेनर जहाज से 22 क्रू मेंबर्स को पाकिस्तान के हवाले किया है, जिन्हें बाद में ईरान भेजा जाएगा। इसे मानवीय पहल के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इससे तनाव पूरी तरह कम होता नजर नहीं आ रहा। उधर, वैश्विक कूटनीति भी तेजी से सक्रिय हो गई है। Xi Jinping और Donald Trump के बीच 14-15 मई को संभावित मुलाकात पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। यह बैठक पहले अप्रैल में होनी थी, लेकिन युद्ध जैसे हालात के कारण टाल दी गई थी। चीन इस बैठक को बेहद अहम मान रहा है, क्योंकि इससे दोनों महाशक्तियों के बीच लंबे समय के लिए स्थिर संबंध बन सकते हैं। हालांकि, चीन के लिए सबसे बड़ी चिंता भी होर्मुज ही है, जहां से वह अपनी करीब एक-तिहाई तेल और गैस की जरूरत पूरी करता है। अगर यह समुद्री रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर, होर्मुज स्ट्रेट इस वक्त दुनिया का सबसे संवेदनशील फ्लैशपॉइंट बन चुका है, जहां एक छोटी सी चूक भी बड़े युद्ध का कारण बन सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि कूटनीति हालात संभालती है या यह संकट और गहराता है।

BHEL स्टॉक में जोरदार रफ्तार, बेहतर मुनाफे ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा..

नई दिल्ली। सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के शेयरों में सोमवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कंपनी के चौथी तिमाही के नतीजों के बाद निवेशकों का रुझान अचानक बढ़ गया और स्टॉक में भारी खरीदारी शुरू हो गई। कारोबार के दौरान BHEL का शेयर 10 प्रतिशत की तेजी के साथ अपर सर्किट पर पहुंच गया, जिससे यह साफ संकेत मिला कि बाजार ने कंपनी के नतीजों को सकारात्मक रूप में लिया है। निवेशकों के बीच इस प्रदर्शन को लेकर उत्साह का माहौल बन गया। चौथी तिमाही में कंपनी का मुनाफा पिछले साल की तुलना में दोगुना से अधिक हो गया, जिससे बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। इसके साथ ही कंपनी की कुल आय में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई, जो इसके बिजनेस में सुधार को दर्शाता है। ऑपरेशनल स्तर पर भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। मुनाफे के साथ-साथ कमाई के अन्य मानकों में भी सुधार देखा गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी की कार्यक्षमता मजबूत हो रही है। निवेशकों के लिए एक और सकारात्मक पहलू यह रहा कि कंपनी ने डिविडेंड देने की सिफारिश की है, जिससे शेयरधारकों को अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना बढ़ गई है। पिछले एक साल में भी BHEL के शेयर ने बाजार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है और मजबूत रिटर्न दिया है। इसी वजह से निवेशकों का भरोसा इस स्टॉक पर बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी के मजबूत नतीजे और बेहतर ऑर्डर स्थिति आने वाले समय में शेयर को सपोर्ट दे सकते हैं, हालांकि ऊंचे मूल्यांकन को देखते हुए सावधानी भी जरूरी है।

बंगाल में BJP की बढ़त से बांग्लादेश में बढ़ी बेचैनी, ‘घुसपैठ’ पर क्या शुरू होगा नया विवाद?

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बढ़त ने भारत के साथ-साथ बांग्लादेश में भी सियासी हलचल तेज कर दी है। चुनाव परिणामों पर नजर रख रहे बांग्लादेश के नेताओं ने पहले ही संभावित स्थिति को लेकर चिंता जताई थी, जो अब फिर चर्चा में है। सवाल उठ रहा है कि अगर बंगाल में BJP सरकार बनाती है, तो क्या अवैध प्रवासियों यानी कथित ‘घुसपैठियों’ पर कार्रवाई तेज होगी और इससे भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। दरअसल, बांग्लादेश की राजनीति में यह मुद्दा पहले ही उठ चुका है। बांग्लादेश की एक पार्टी के सांसद अख्तर हुसैन ने संसद में आशंका जताई थी कि अगर पश्चिम बंगाल में BJP सत्ता में आती है, तो भारत में रह रहे बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा जा सकता है। उनके मुताबिक, ऐसा होने पर बांग्लादेश को एक बड़े शरणार्थी संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि “प्रवासियों का सैलाब” देश में लौट सकता है, जिससे हालात बिगड़ सकते हैं। भारत में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। BJP लगातार इस मुद्दे को उठाती रही है और अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करती रही है। ऐसे में बंगाल में उसकी संभावित जीत को इस नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि जमीनी स्तर पर यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2001 में भारत में करीब 1.2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी प्रवासी होने का अनुमान था। वहीं, कुछ स्वतंत्र रिपोर्ट्स के अनुसार यह संख्या 2026 तक 1.5 से 2 करोड़ के बीच हो सकती है। पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण 24 परगना में जनसंख्या बदलाव को अक्सर इस मुद्दे से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन असली चुनौती इन लोगों की पहचान को लेकर है। बड़ी संख्या में लोग फर्जी दस्तावेजों के जरिए खुद को भारतीय नागरिक साबित कर चुके हैं, जिससे उन्हें चिन्हित करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, अगर भारत इन्हें वापस भेजना चाहता है, तो बांग्लादेश की सहमति जरूरी होगी। अगर ढाका इन लोगों को अपना नागरिक मानने से इनकार करता है, तो यह मामला और जटिल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल कानून या प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है। बांग्लादेश इस मुद्दे को अपनी संप्रभुता और सम्मान से जोड़कर देखता है, जबकि भारत इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन के नजरिए से देखता है। 2024 के बाद बांग्लादेश की राजनीति में आए बदलाव के चलते वहां की सरकार पर घरेलू दबाव भी बढ़ा है कि वह भारत के प्रति सख्त रुख अपनाए। हालांकि, नई सरकार की ओर से भारत के साथ संबंध सामान्य रखने के संकेत भी दिए गए हैं, लेकिन ‘घुसपैठ’ का मुद्दा दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील और संभावित विवाद का कारण बन सकता है। ऐसे में बंगाल चुनाव के नतीजे सिर्फ एक राज्य की सत्ता तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इसके असर क्षेत्रीय राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह मुद्दा सियासी बयानबाजी तक सीमित रहता है या वास्तव में किसी बड़े कूटनीतिक टकराव का रूप लेता है।