IPL 2026: मुंबई इंडियंस की प्लेऑफ उम्मीदें जिंदा, LSG पर जीत के बाद बढ़ी हलचल

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और हर मैच के साथ प्लेऑफ की तस्वीर साफ होती जा रही है। ऐसे में 5 बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस ने एक बार फिर अपने फैंस को उम्मीद की वजह दी है। वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में मुंबई ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को 6 विकेट से हराकर प्लेऑफ की रेस में खुद को जीवित रखा है। हार्दिक पांड्या की कप्तानी वाली मुंबई इंडियंस इस सीजन में अब तक उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी है। टीम ने 10 मैचों में सिर्फ 3 जीत दर्ज की हैं और 7 मैचों में हार का सामना किया है। फिलहाल टीम अंक तालिका में 7 अंकों के साथ 9वें स्थान पर मौजूद है। खराब शुरुआत ने बिगाड़ा गणित, लेकिन उम्मीद बाकीसीजन की शुरुआत मुंबई के लिए बेहद निराशाजनक रही थी। लगातार हार ने टीम को अंक तालिका में नीचे धकेल दिया। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही विभागों में अस्थिरता देखने को मिली, जिससे टीम को लगातार दबाव झेलना पड़ा।हालांकि लखनऊ के खिलाफ मिली यह जीत टीम के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी दिखाई और गेंदबाजों ने भी अहम मौकों पर विकेट निकालकर मैच को मुंबई की झोली में डाल दिया। प्लेऑफ का पूरा गणित क्या कहता है?मुंबई इंडियंस के लिए प्लेऑफ की राह आसान नहीं है। टीम को अपने बाकी बचे सभी मुकाबले जीतने होंगे और साथ ही नेट रन रेट (NRR) पर भी ध्यान देना होगा। इसके अलावा अन्य टीमों के परिणाम भी मुंबई के पक्ष में आने जरूरी हैं।IPL के इतिहास में कई बार ऐसा हुआ है कि 12 से 14 अंकों वाली टीमें भी टॉप-4 में जगह बनाने में सफल रही हैं। ऐसे में अगर मुंबई अपने अगले मैचों में लगातार जीत दर्ज करती है, तो वह 13-15 अंकों तक पहुंच सकती है, जो प्लेऑफ की दौड़ में उन्हें मजबूती दे सकता है। आगे का सफर होगा निर्णायकमुंबई इंडियंस के लिए अब हर मैच ‘करो या मरो’ जैसा होगा। टीम को न सिर्फ जीत दर्ज करनी होगी, बल्कि बड़े अंतर से जीतकर रन रेट भी सुधारना होगा। कप्तान हार्दिक पांड्या पर अब रणनीति और टीम संयोजन को सही करने का बड़ा दबाव रहेगा।फैंस को उम्मीद है कि मुंबई इंडियंस एक बार फिर अपने पुराने चैंपियन अंदाज में वापसी करेगी और प्लेऑफ की दौड़ को रोमांचक बनाए रखेगी।
MP: गेहूं ऊपार्जन के लिए तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर किया गया रात 10 बजे तक

भोपाल। मध्य प्रदेश में अभी तक 7 लाख 48 हजार किसानों से 39 लाख 2 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। वहीं गेहूं उपार्जन के लिए तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। यह जानकारी सोमवार को प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने दी। उन्होंने बताया कि अभी तक 14 लाख 75 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है। मंत्री राजपूत ने बताया कि किसानों को 6490.56 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। उन्होंने बताया कि किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ पीपी एचडीपी बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।
बंगाल में ममता का अभेद्य दुर्ग ढहाया….BJP की इस प्रचंड जीत का UP पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली। बंगाल और असम (Bengal and Assam) में बीजेपी (BJP) की यह प्रचंड जीत 2026 की राजनीति का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट (Turning point) है. 4 मई 2026 के ये नतीजे न केवल पूर्वी भारत का भूगोल बदल रहे हैं, बल्कि इनका सीधा असर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सियासी समीकरणों पर पड़ना तय है. पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के अभेद्य दुर्ग को ढहाने के बाद ‘भगवा’ खेमे में जो उत्साह है, उसकी गूंज अब लखनऊ के सियासी गलियारों तक भी सुनाई दे रही है? पश्चिम बंगाल में बीजेपी की यह ‘ऐतिहासिक’ जीत महज एक राज्य की जीत नहीं है बल्कि यह 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए एक ‘लॉन्चपैड’ तैयार कर दिया है. बीजेपी ने जिस तरह बंगाल में ममता बनर्जी को मात दी है, उससे अखिलेश यादव के चैलेंज से निपटने में नई ऊर्जा मिलेगी। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए फॉर्मूले से बीजेपी को तगड़ा झटका दिया था. बीजेपी ने दो साल में कमबैक किया है. ऐसे में बंगाल में ममता की हार विपक्ष के लिए बड़ा झटका है तो बीजेपी के लिए यूपी में ‘बुस्टर डोज’ की तरह है, जो सपा-कांग्रेस के लिए किसी सियासी टेंशन से कम नहीं है? बंगाल में ममता का सियासी किला ध्वस्तबंगाल चुनाव में अखिलेश यादव की पूरी तरह ममता बनर्जी के पक्ष में खड़े थे. यही वजह है कि बंगाल चुनाव के नतीजों को यूपी की सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है. क्योंकि अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं. बंगाल जैसे कठिन राज्य में जीत ने बीजेपी कैडर को यह संदेश दिया है कि ‘अजेय’ कुछ भी नहीं है। सियासत में कॉन्फिडेंस जरूरी है, लेकिन ओवर-कॉन्फिडेंस अक्सर घातक साबित होते हैं. अखिलेश यादव के लिए संकेत है कि उन्हें चुनावी आकलन में अधिक संतुलन और सतर्कता बरतनी होगी. 2024 के लोकसभा चुनाव में 37 लोकसभा सीटें जीतने के बाद अखिलेश यादव, उत्साह और आत्मविश्वास से लबरेज हैं, लेकिन कई बार उनका आत्मविश्वास, अतिआत्मविश्वास में बदलता दिखता है. बंगाल में ममता बनर्जी का ओवर-कॉन्फिडेंस ही महंगा पड़ा है। बंगाल चुनाव का यूपी की सियासत पर असर? बंगाल में मिली सफलता के बाद योगी आदित्यनाथ अब 2027 के लिए और भी अधिक आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेंगे. बंगाल के नतीजों ने साबित कर दिया कि बीजेपी का ‘हिंदुत्व कार्ड’ ने विपक्ष के सारे समीकरण को ध्वस्त कर दिया है। बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बहुल सीटों पर सेंधमारी ने ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ वाले नैरेटिव को धार देने के लिए ‘धार्मिक ध्रुवीकरण’ की बिसात बिछाई. इसका नतीजा था कि 30 फीसदी मुस्लिम बंगाल में होने के बाद भी बीजेपी जीतने में सफल रही है. बीजेपी अब सपा के ‘सामाजिक न्याय’ के जवाब में ‘सांस्कृतिक एकीकरण’ को और मजबूती से पेश करेगी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, जो अक्सर ममता बनर्जी को अपनी ‘बड़ी बहन’ और आदर्श मानते रहे हैं, उनके लिए बंगाल में टीएमसी की हार यह बड़ा झटका है. उत्तर प्रदेश में भाजपा उसी सियासी मॉडल को और आक्रामक तरीके से 2027 के विधानसभा चुनाव मैदान में उतर सकती है। सपा का पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूला से 2024 में बीजेपी को मात देने में सफल रहे थे. बंगाल चुनाव के बाद बीजेपी यूपी में सपा के पीडीए फॉर्मूले को काउंटर करने के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण के लिए बंगाल मॉडल को आजमाने का दांव चल सकती है। धार्मिक ध्रवीकरण के दांव से पीडीए को मातबीजेपी उत्तर प्रदेश में 2014 के बाद से लेकर लगातार जीतती आ रही थी, लेकिन उसे 2024 में अखिलेश ने बड़ा झटका दिया था. ऐसे में बीजेपी के लिए सत्ता की हैट्रिक लगाना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन पीएम मोदी की अगुवाई में जिस तरह पार्टी कमबैक कर रही है, उससे यूपी में भी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को सियासी हौसला मिला है। बंगाल में बीजेपी ने जिस तरह घुसपैठ के मुद्दे को हिंदुत्व के साथ जोड़ा, वो सियासी संजीवनी बना. अब वही फॉर्मूला यूपी में 2027 के लिए ‘ब्लूप्रिंट’ बनेगा।
विजय थलापति की निजी जिंदगी पर चर्चा तेज: कौन हैं संगीता सोर्नालिंगम और क्यों उड़ी अफेयर की अफवाहें?

नई दिल्ली। विजय थलापति की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम मूल रूप से श्रीलंकाई तमिल परिवार से ताल्लुक रखती हैं और यूनाइटेड किंगडम में पली-बढ़ी हैं। दोनों की मुलाकात एक फिल्म सेट के दौरान हुई थी, जब संगीता खुद विजय की बड़ी फैन थीं। साल 1999 में दोनों ने शादी की और उनके दो बच्चे हैं बेटा जेसन संजय और बेटी दिव्या साशा। शादी के बाद संगीता हमेशा लाइमलाइट से दूर रही हैं और परिवार को प्राथमिकता देती रही हैं। तलाक की अर्जी और रिश्ते में दरार की खबररिपोर्ट्स के अनुसार, संगीता ने चेन्नई के चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की है। इसमें कथित तौर पर विवाह में दूरी, भावनात्मक तनाव और उपेक्षा को कारण बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पिछले कुछ समय से अलग रह रहे हैं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी साथ नजर नहीं आते। तृषा कृष्णन के साथ अफेयर की चर्चा क्यों?अफवाहों की जड़ में एक्ट्रेस तृषा कृष्णन का नाम सामने आ रहा है। फिल्म ‘लियो’ के बाद से दोनों के बीच नजदीकियों की चर्चा तेज हो गई थी। हाल ही में तृषा को विजय के घर और मंदिर में प्रार्थना करते देखा गया, जिससे सोशल मीडिया पर अटकलें और बढ़ गईं। हालांकि दोनों कलाकारों ने कभी भी अपने रिश्ते को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है और हमेशा इसे दोस्ती बताया है। राजनीतिक सफलता के बीच निजी जीवन पर सवालविजय थलापति हाल ही में अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की जीत के बाद राजनीति में मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। ऐसे समय में उनकी निजी जिंदगी को लेकर उठे सवालों ने उनके समर्थकों को भी हैरान कर दिया है। अफवाह या सच्चाई? अब भी सस्पेंस कायमअब तक न तो विजय और न ही संगीता की ओर से तलाक या रिश्ते में दरार की आधिकारिक पुष्टि की गई है। ऐसे में यह मामला फिलहाल अफवाहों और अटकलों के बीच ही बना हुआ है। स्टारडम और निजी जिंदगी की उलझनविजय थलापति की लोकप्रियता जहां राजनीति और सिनेमा दोनों में बढ़ रही है, वहीं उनकी निजी जिंदगी पर उठे सवाल लगातार चर्चा में बने हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर उनका रुख ही स्थिति को साफ करेगा।
उत्तर-पश्चिम भारत में बदला मौसम, आंधी-तूफान के साथ हुई झमाझम बारिश.. आज इन राज्यों में अलर्ट

नई दिल्ली। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India.) के पहाड़ी इलाकों और आसपास के मैदानी क्षेत्रों में सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली। आंधी-तूफान (Thunderstorms) के साथ कहीं हल्की तो कहीं झमाझम बारिश (Light to heavy rain) हुई। कुछ क्षेत्रों में धूल भरी आंधी और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को भी उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में छिटपुट से लेकर कई स्थानों पर गरज और चमक के साथ बारिश होने, 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और ओलावृष्टि की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में आंधी-तूफान के साथ झमाझम बारिश और ओलावृष्टि हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छिटपुट स्थानों पर 11-20 सेमी तक वर्षा दर्ज की गई है। कुछ जगहों पर 60-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में ओले गिरे। इसके अलावा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम, ओडिशा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम तथा त्रिपुरा में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई है। मौसम में बदलाव से अधिकतम तापमान में 3-5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल के गंगा किनारे वाले क्षेत्रों, उप-हिमालयी पश्चिमी बंगाल और सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से कम दर्ज किया गया। विदर्भ, तटीय आंध्र प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, राजस्थान में अधिकतम तापमान 36-40 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। सबसे अधिक तेलंगाना के आदिलाबाद में 45.3 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। आज भी आंधी-पानी का अलर्टमौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फरबाद और हिमाचल प्रदेश में 6 मई तक और उत्तराखंड में 8 मई तक छिटपुट से लेकर हल्की बारिश और बर्फबारी होने, गरज और बिजली की कड़क के साथ 30-50 किमी प्रति घंटा की गति से हवाएं चलने की संभावना है। मंगलवार को राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और बिहार में भी बारिश हो सकती है। इससे गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है। दिल्ली समेत एनसीआर के गाजियाबाद, नोएडा और हापुड़ में बिजली कड़कने, तेज आंधी और ओले गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।
IPL 2026 ऑरेंज कैप रेस में बड़ा उलटफेर: रियान रिकेल्टन ने कोहली को पछाड़ा, केएल राहुल बन सकते हैं नंबर-1

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में बल्लेबाजों के बीच रन बनाने की होड़ अपने चरम पर पहुंच गई है। हर मैच के साथ ऑरेंज कैप की स्थिति बदल रही है और टॉप ऑर्डर में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। रिकेल्टन की धमाकेदार छलांग, कोहली पीछेमुंबई इंडियंस के युवा बल्लेबाज रियान रिकेल्टन ने लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ 83 रनों की शानदार पारी खेलकर बड़ा असर डाला। इस पारी के बाद वह रन बनाने वालों की सूची में विराट कोहली से आगे निकल गए हैं। हालांकि वे अभी भी टॉप-5 से बाहर हैं, लेकिन सिर्फ कुछ रनों से पीछे रह गए हैं। मुंबई इंडियंस के इस बल्लेबाज ने अब तक 8 मैचों में 380 रन बनाए हैं। वहीं विराट कोहली 379 रनों के साथ उनसे पीछे खिसक गए हैं। रोहित शर्मा की दमदार वापसी, लेकिन रेस से बाहरएलएसजी के खिलाफ लंबे समय बाद वापसी करने वाले रोहित शर्मा ने 84 रनों की शानदार पारी खेली, लेकिन ऑरेंज कैप की दौड़ में वह काफी पीछे हैं। वे फिलहाल 28वें स्थान पर मौजूद हैं, जिससे साफ है कि उनकी फॉर्म वापसी तो हुई है, लेकिन रैंकिंग में सुधार अभी बाकी है। टॉप-5 बल्लेबाजों की स्थितिफिलहाल ऑरेंज कैप की रेस में ये खिलाड़ी आगे हैं: अभिषेक शर्मा – 440 रनकेएल राहुल – 433 रनहेनरिक क्लासेन – 425 रनवैभव सूर्यवंशी – 404 रनसाई सुदर्शन – 385 रन केएल राहुल अब सिर्फ 7 रनों के अंतर से नंबर-1 बनने के बेहद करीब हैं। आज बदल सकता है नंबर-1 का समीकरणआज के मुकाबले में केएल राहुल के पास बड़ा मौका है। अगर वह सिर्फ 8 रन और बना लेते हैं, तो वे अभिषेक शर्मा को पीछे छोड़कर ऑरेंज कैप अपने नाम कर सकते हैं। वहीं अभिषेक शर्मा भी अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे। अभिषेक शर्मा और राहुल के बीच यह टक्कर अब टूर्नामेंट की सबसे रोमांचक रेस बन चुकी है। पर्पल कैप की जंग भी दिलचस्पगेंदबाजी में भी मुकाबला कड़ा है। भुवनेश्वर कुमार 17 विकेट के साथ पर्पल कैप पर कब्जा जमाए हुए हैं, लेकिन अंशुल कंबोज भी बराबरी पर पहुंच चुके हैं। आज का दिन यहां भी बड़ा बदलाव ला सकता है। हर मैच बदल रहा है समीकरणइंडियन प्रीमियर लीग 2026 में ऑरेंज कैप की दौड़ बेहद रोमांचक हो चुकी है। रिकेल्टन की एंट्री से जहां कोहली पीछे हुए हैं, वहीं राहुल और अभिषेक की टक्कर ने टॉप पोजिशन को और दिलचस्प बना दिया है। आने वाले मैच तय करेंगे कि इस सीजन का असली रन किंग कौन बनेगा।
MP: भोजशाला मामले में HC बोला- ASI सर्वे की वीडियोग्राफी पर मुस्लिम पक्ष 3 दिन में दर्ज कराएं आपत्तियां

इंदौर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ (Indore Bench) ने धार के विवादित भोजशाला परिसर (Disputed Bhojshala complex) के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी पर मुस्लिम पक्ष को 3 दिन के भीतर अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील ने तकनीकी समस्याओं के कारण वीडियोग्राफी नहीं देख पाने की बात कही। इसके बाद अदालत ने आईटी विभाग को तुरंत एक्सेस देने और वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) के साथ इसे साझा करने का आदेश दिया। उधर, एएसआई ने स्पष्ट किया कि 1904 से यह स्मारक उनके संरक्षण में है। एएसआई ने दो-टूक कहा कि 1935 के ‘मस्जिद’ घोषित करने वाले दावे की अब कोई कानूनी मान्यता नहीं है। भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है। धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील तौसीफ वारसी ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के सामने तकनीकी समस्याओं का हवाला दिया। तौसीफ वारसी ने कहा कि उन्हें इस परिसर में एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान की गई वीडियोग्राफी तक पहुंच नहीं मिल सकी है। उधर, एएसआई के एक वकील ने कहा कि अदालत के निर्देशानुसार इस वीडियोग्राफी को गूगल ड्राइव पर उपलब्ध कराया गया था। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील को उसका एक्सेस भी दे दिया गया था। खंडपीठ ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद वारसी को वीडियोग्राफी देखने की सुविधा उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए और इसके लिए हाई कोर्ट के आईटी अनुभाग को जरूरी व्यवस्था करने के लिए कहा। अदालत ने यह भी कहा कि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद के ई-मेल पते पर अतिरिक्त पहुंच उपलब्ध कराते हुए उनसे वीडियोग्राफी जल्द से जल्द साझा की जाए। पेश कीं दलीलेंखंडपीठ ने निर्देश दिया कि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी इस वीडियोग्राफी पर 7 मई तक अपनी लिखित आपत्तियां प्रस्तुत करे। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने ASI की ओर से धार के विवादित परिसर के संरक्षण के इतिहास के बारे में दलीलें पेश कीं। मुस्लिम पक्ष का दावा- मस्जिद घोषित था स्मारकअतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने कहा कि यह परिसर साल 1904 से एक संरक्षित स्मारक है। यह एएसआई के नियामकीय नियंत्रण में रहा है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में मुस्लिम पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि 1935 में तत्कालीन धार रियासत के दरबार ने 11वीं सदी के इस स्मारक को मस्जिद घोषित किया था। 5 मई को भी जारी रहेंगी दलीलेंअतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने मुस्लिम पक्ष के दावे को काटते हुए कहा कि यह ऐलान ASI संरक्षित स्मारकों से जुड़े प्रावधानों के कारण निष्प्रभावी हो चुका है। इसे कोई कानूनी मान्यता हासिल नहीं है। सुनील कुमार जैन की दलीलें 5 मई को भी जारी रहेंगी। अदालत ने भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर 4 याचिकाओं और एक रिट अपील पर 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है।
मेक्सिकन नेवी हेलिकॉप्टर उड़ान भरते ही लड़खड़ाकर जमीन पर गिरा… कैमरे में कैद हुई घटना

मेक्सिको। सोशल मीडिया (Social media) पर इस समय एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक मेक्सिकन नेवी का हेलिकॉप्टर (Mexican Navy Helicopter Crash) उड़ान भरते ही अचानक लड़खड़ा कर गिर जाता है. इस वीडियो ने मेक्सिकन नौसेना (Mexican Navy) को झकझोर कर रख दिया है. दावा किया जा रहा है कि यह वायरल वीडियो मेक्सिको के मिशोआकान (Michoacan) राज्य में लाजारो कार्डेनास (Lazaro Cardenas) बंदरगाह से लगभग 370 किमी दक्षिण-पश्चिम में समुद्र के बीचों-बीच हुआ है. फिलहाल इसकी अभी कोई पुष्टि नहीं हो पाई है। कैसे हुआ यह हादसा?वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे एक मेक्सिकन नौसेना (Mexican Navy) का हेलिकॉप्टर आराम से हेलिपैड पर खड़ा रहता है. इसके बाद वह उड़ान भरने के लिए तैयार होता है. उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद हेलिकॉप्टर अनियंत्रित होकर जमीन पर गिर जाता है. यह हादसा तब हुआ जब हेलिकॉप्टर महज कुछ मीटर की ऊंचाई पर ही था. इस हादसे की मुख्य वजह इंजन का पावर फेलियर बताया जा रहा है. वीडियो में दिख रहा है कि हेलिकॉप्टर के उड़ान भरते ही पायलट नियंत्रण खो बैठा और हेलिकॉप्टर ड्रॉप डेड (सीधे नीचे गिरना) की स्थिति में जमीन से टकरा गया। घटना कहां और कब हुई?इसकी कोई आधिकारिक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है. लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि यह हादसा मेक्सिको के मिशोआकान (Michoacan) राज्य में लाजारो कार्डेनास (Lazaro Cardenas) बंदरगाह से लगभग 370 किमी दक्षिण-पश्चिम में कहीं हुआ है. बताया जा रहा है कि हेलिकॉप्टर एक गश्त पर जाने के लिए उड़ान भर रहा था, लेकिन टेक-ऑफ के कुछ ही सेकंड बाद वह अनियंत्रित होकर जमीन पर गिर गया. फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। कैमरे में कैद हुई घटनावायरल वीडियो में हेलिकॉप्टर के रोटर्स को घूमते हुए और फिर अचानक विमान को डगमगाते हुए देखा जा सकता है. जमीन से टकराते ही धूल का गुबार उठा और वहां मौजूद लोग मदद के लिए दौड़ते नजर आए. आधिकारिक तौर पर अभी तक घायलों या नुकसान की कोई सटीक संख्या या जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि, इतनी कम ऊंचाई से गिरने के कारण बड़े विस्फोट की संभावना कम रही, जो चालक दल के लिए राहत की बात हो सकती है। जांच के आदेशमेक्सिकन नौसेना ने इस दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है. शुरुआती कयासों में इंजन फेलियर या ‘पायलट एरर’ को संभावित कारण माना जा रहा है।
बंगाल : घर की दहलीज से विधानसभा तक पहुंचीं रत्ना देवनाथ, बेटी को खोने का दर्द बना ताकत

कोलकाता । पश्चिम बंगाल में इस बार राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया। जहां एक ओर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी ओर आरजी कर मामले की पीड़िता की मां रत्ना देवनाथ ने अपनी पहली ही चुनावी पारी में बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार तीर्थंकर घोष को 28 हजार से अधिक वोटों से हराया। कौन हैं रत्ना देवनाथरत्ना देवनाथ का राजनीति से कोई लंबा अनुभव नहीं था, लेकिन जीवन की एक बड़ी त्रासदी ने उन्हें जनता के बीच खड़ा कर दिया। 54 वर्षीय रत्ना देवनाथ, पति रंजन देवनाथ के साथ रहती हैं और चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास लगभग 74 लाख रुपये की संपत्ति है। बेटी के साथ हुई दर्दनाक घटना ने उन्हें व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मजबूर किया। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समाज में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया और इसी उद्देश्य के साथ राजनीति में कदम रखा। घर की दहलीज से चुनाव के मैदान तकसाल 2024 में आरजी कर अस्पताल में मेडिकल छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। इस घटना के बाद सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठे। इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी ने महिला सुरक्षा को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल किया और रत्ना देवनाथ को पानीहाट सीट से उम्मीदवार बनाया। यह कदम उनके जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ। रत्ना के लिए पीएम मोदी ने की रैलीचुनाव प्रचार के दौरान रत्ना देवनाथ ने खुलकर कहा कि उनका संघर्ष मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से है, क्योंकि पीड़िता के मामले में न्याय की उम्मीदें कमजोर पड़ीं। नामांकन के समय पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी मौजूद रहीं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को पानीहाट में रैली कर उनके समर्थन में जनसभा की। चुनाव परिणामइस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। 293 सीटों में से बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया, जबकि टीएमसी केवल 80 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 2 और लेफ्ट फ्रंट को भी 2 सीटें मिलीं। ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट भी नहीं बचा पाईं।
90 दिन जंक फूड से दूरी ने बदली जिंदगी, शरीर ने खुद संभाला हेल्थ का बैलेंस..

नई दिल्ली।25 साल की पूजा की जिंदगी शहर में आने के बाद काफी बदल चुकी थी। पढ़ाई और नौकरी के बीच बाहर का खाना उसकी रोजमर्रा की आदत बन गया था। पिज्जा, बर्गर और फ्राइड फूड उसके लिए सामान्य विकल्प थे, क्योंकि तेज रफ्तार जिंदगी में यही सबसे आसान रास्ता लगता था। शुरुआत में उसे इस पर कोई खास ध्यान नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे शरीर ने संकेत देने शुरू कर दिए। लगातार एसिडिटी, पेट में भारीपन, थकान और चेहरे की चमक कम होने जैसी समस्याएं उसे परेशान करने लगीं। इन बदलावों को महसूस करने के बाद उसने अपने खाने की आदतों पर ध्यान देना शुरू किया और एक दिन खुद को चुनौती दी कि वह 90 दिनों तक पूरी तरह जंक फूड से दूरी बनाए रखेगी। यह फैसला उसके लिए आसान नहीं था, क्योंकि यह उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। शुरुआत के दिन काफी कठिन रहे, जब बार-बार बाहर का स्वादिष्ट खाना खाने की इच्छा होती थी और पुरानी आदतें उसे बार-बार आकर्षित करती थीं। पहले हफ्ते में सबसे बड़ी चुनौती क्रेविंग्स थीं। शाम के समय खासकर तला-भुना या मसालेदार खाना खाने की इच्छा इतनी बढ़ जाती थी कि वह कई बार अपने निर्णय पर दोबारा सोचने लगती थी। लेकिन उसने खुद को व्यस्त रखने और घर के खाने पर ध्यान देने का तरीका अपनाया। धीरे-धीरे उसने घर पर ही हेल्दी और स्वादिष्ट विकल्प तैयार करने शुरू किए, जिससे उसका मन भी संतुष्ट रहने लगा और शरीर को भी बेहतर पोषण मिलने लगा। तीसरे हफ्ते तक पहुंचते-पहुंचते उसके शरीर में बदलाव दिखने लगे। पाचन पहले से बेहतर हो गया और पेट की समस्याएं काफी हद तक कम हो गईं। जो असहजता और भारीपन पहले रोज महसूस होता था, वह धीरे-धीरे खत्म होने लगा। इसके साथ ही उसकी ऊर्जा में भी सुधार आने लगा और वह पहले से ज्यादा हल्का महसूस करने लगी। एक महीने के बाद सबसे बड़ा बदलाव उसकी खाने की इच्छा में देखा गया। जो फूड पहले उसे बहुत आकर्षित करता था, अब उसकी क्रेविंग्स काफी कम हो चुकी थीं। उसे खुद भी आश्चर्य हुआ कि बिना जंक फूड के भी वह पूरी तरह संतुलित और सामान्य महसूस कर रही थी। धीरे-धीरे उसका शरीर नए पैटर्न के अनुसार ढल गया और पुरानी आदतें कमजोर पड़ने लगीं। 90 दिनों का यह अनुभव उसके लिए सिर्फ एक डाइट चैलेंज नहीं रहा, बल्कि पूरी जीवनशैली बदलने वाली प्रक्रिया बन गया। इस दौरान उसने समझा कि शरीर को अगर सही पोषण और संतुलन मिले तो वह खुद ही अपने आप को बेहतर तरीके से संभाल सकता है। अब उसकी आदतें पहले से ज्यादा स्वस्थ हो चुकी थीं और वह अपनी दिनचर्या में अधिक ऊर्जा और संतुलन महसूस कर रही थी।