अटलांटिक में क्रूज शिप पर हंता वायरस का कहर: 3 मौतें, भारत के लिए कितना खतरा

नई दिल्ली। अटलांटिक महासागर में केप वर्डे के पास एक डच क्रूज शिप पर हंता वायरस के मामलों ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जहाज पर इस संक्रमण से अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य यात्री बीमार हैं। बताया जा रहा है कि ‘एमवी होंडियस’ नाम का यह जहाज 1 अप्रैल को अर्जेंटीना के उशुआइया से अंटार्कटिका और दक्षिण अटलांटिक द्वीपों की यात्रा के लिए रवाना हुआ था। जहाज पर कुल 147 लोग (88 यात्री और 59 क्रू सदस्य) सवार थे। 6 से 28 अप्रैल के बीच संक्रमण के मामले सामने आए। एक मरीज की हालत गंभीर है, जबकि कुछ में हल्के लक्षण पाए गए हैं। क्या है हंता वायरस? हंता वायरस संक्रमण एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के मूत्र, मल या लार के संपर्क से फैलता है। यह वायरस फेफड़ों को प्रभावित कर गंभीर श्वसन समस्या पैदा कर सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, उल्टी, दस्त और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं। WHO के मुताबिक, इस घटना में मानव-से-मानव संक्रमण की आशंका भी जताई गई है, जो आमतौर पर बहुत कम देखने को मिलता है, लेकिन दक्षिण अमेरिका के कुछ मामलों में ऐसा पाया गया है। जहाज पर हालात और वैश्विक प्रतिक्रिया केप वर्डे ने स्वास्थ्य सुरक्षा कारणों से जहाज को अपने बंदरगाह पर रुकने की अनुमति नहीं दी है। WHO विभिन्न देशों-नीदरलैंड, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन-के साथ मिलकर हालात पर नजर बनाए हुए है। मेडिकल टीमें जहाज पर पहुंचकर जांच और उपचार कर रही हैं। यात्रियों और क्रू को आइसोलेशन में रहने, मास्क पहनने, हाथों की सफाई रखने और दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। जहाज को आगे स्पेन के कैनरी द्वीपों की ओर ले जाने पर भी विचार चल रहा है। भारत के लिए कितना खतरा? विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हंता वायरस संक्रमण के मामले बेहद दुर्लभ हैं। फिलहाल यह घटना भारत के लिए सीधा खतरा नहीं मानी जा रही, क्योंकि संक्रमण सीमित क्षेत्र और जहाज तक ही केंद्रित है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय यात्रा को देखते हुए सतर्कता जरूरी है। स्वास्थ्य एजेंसियों को खासकर दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका से आने वाले यात्रियों की निगरानी बढ़ाने की सलाह दी गई है। घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत WHO ने इस घटना को लेकर वैश्विक जोखिम को फिलहाल कम बताया है। भारत जैसे देश, जिन्होंने कोविड जैसी महामारी का सामना किया है, ऐसी परिस्थितियों से निपटने में सक्षम माने जाते हैं। हंता वायरस गंभीर जरूर है, लेकिन इसका फैलाव सीमित होता है। सही सावधानी, जागरूकता और निगरानी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है-इसलिए घबराने के बजाय सतर्क रहना ज्यादा जरूरी है।
समुद्र मंथन से प्रकट हुईं देवी अलक्ष्मी: क्यों जुड़ा है उनसे क्लेश और दरिद्रता का संबंध, जानिए विवाह की कथा

नई दिल्ली । हिंदू पौराणिक मान्यताओं में जहां मां लक्ष्मी को धन, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है, वहीं उनकी बड़ी बहन देवी अलक्ष्मी को दरिद्रता, कलह और अशुभता का प्रतीक बताया गया है। मान्यता है कि दोनों देवियां समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, लेकिन स्वभाव और प्रभाव में एक-दूसरे के विपरीत हैं। अलक्ष्मी का प्राकट्य और स्वरूप पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले देवी अलक्ष्मी प्रकट हुईं, जिनके हाथ में मदिरा थी। उनका स्वरूप दुर्बल, लाल आंखों वाला और अस्वच्छ बताया गया है। कहा जाता है कि जहां गंदगी, झगड़ा, अधर्म और नकारात्मकता होती है, वहीं उनका वास होता है। लक्ष्मी-विवाह से जुड़ी शर्त इसके बाद मां लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने की इच्छा जताई। विष्णु भी इस विवाह के लिए तैयार थे, लेकिन एक शर्त आ गई—लक्ष्मी ने कहा कि पहले उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी का विवाह होगा, तभी वे स्वयं विवाह करेंगी। अलक्ष्मी का विवाह किससे हुआ? अलक्ष्मी के स्वरूप और स्वभाव के कारण कोई भी उनसे विवाह को तैयार नहीं था। तब विष्णु के आदेश पर उद्दालक ऋषि ने अलक्ष्मी से विवाह किया। विवाह के बाद जब ऋषि उन्हें अपने आश्रम ले गए, तो अलक्ष्मी ने वहां रहने से इनकार कर दिया, क्योंकि वहां अत्यधिक पवित्रता और यज्ञ की सुगंध थी। कहां करती हैं निवास? अलक्ष्मी ने स्वयं बताया कि उन्हें वही स्थान प्रिय है जहां गंदगी, कलह, अधर्म, झूठ और मांस-मदिरा का सेवन होता हो। इसके बाद उद्दालक ऋषि उन्हें अस्थायी रूप से पीपल के पेड़ के नीचे बैठाकर उचित स्थान खोजने चले गए, लेकिन लौटकर नहीं आए। कथा के अनुसार, तब भगवान विष्णु ने कहा कि पीपल वृक्ष उनका ही स्वरूप है, इसलिए अलक्ष्मी वहां निवास कर सकती हैं। तभी से माना जाता है कि अलक्ष्मी पीपल के पेड़ के नीचे रहती हैं। मान्यता और संदेश ऐसी मान्यता है कि जो लोग पीपल के वृक्ष की पूजा करते हैं, उन्हें अलक्ष्मी के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है। यह कथा प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश देती है कि जहां स्वच्छता, सत्य और सदाचार होता है, वहां लक्ष्मी का वास होता है, जबकि गंदगी और अधर्म अलक्ष्मी को आकर्षित करते हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदलेगा समीकरण, तीस्ता जल विवाद सुलझने की उम्मीद..

ढाका। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद इसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। इस राजनीतिक बदलाव ने भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से लंबित जल विवादों के समाधान को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं। बांग्लादेश की सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भाजपा को जीत पर बधाई देते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। पार्टी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के प्रदर्शन की सराहना की और उम्मीद जताई कि इससे दोनों पक्षों के रिश्ते और मजबूत होंगे। बीएनपी का मानना है कि नई राजनीतिक परिस्थिति से ढाका और कोलकाता के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर तीस्ता नदी जल बंटवारा समझौते को लेकर नई प्रगति की संभावना जताई गई है। तीस्ता विवाद पर ममता पर आरोपबीएनपी ने अपने बयान में ममता बनर्जी और उनकी सरकार को तीस्ता समझौते में देरी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का आरोप है कि पिछली राज्य सरकार के रुख के कारण यह संधि लंबे समय से अटकी हुई है। अब बीएनपी को उम्मीद है कि भाजपा सरकार केंद्र के साथ समन्वय कर इस समझौते को आगे बढ़ाएगी। उनका कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद तीस्ता बैराज परियोजना को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। पुराना है जल बंटवारे का मुद्दाभारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां साझा हैं, लेकिन अब तक सिर्फ दो जल समझौते ही हो सके हैं—गंगा जल संधि और कुशियारा नदी संधि। 1996 की गंगा जल संधि के तहत फरक्का बैराज पर पानी के बंटवारे को नियंत्रित किया जाता है, हालांकि बांग्लादेश समय-समय पर कम पानी मिलने की शिकायत करता रहा है। तीस्ता नदी को लेकर 1983 में एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36% और भारत को 39% पानी देने की बात कही गई थी, लेकिन यह पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। बाद में 2011 में मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के दौरान नए प्रस्ताव पर चर्चा हुई, लेकिन राज्य सरकार के विरोध के चलते यह समझौता भी अधूरा रह गया। वैचारिक अंतर के बावजूद सहयोग की उम्मीदबीएनपी नेता हेलाल ने यह भी कहा कि भले ही बीएनपी और भाजपा के बीच वैचारिक अंतर हो, लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि तीस्ता जल विवाद और द्विपक्षीय संबंध जैसे मुद्दों पर दोनों पक्ष सहयोग कर सकते हैं। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तेजी आने की संभावना है, जिससे लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान का रास्ता साफ हो सकता है।
दुनिया में भारत का जलवा: विदेशों से आया रिकॉर्ड पैसा, रेमिटेंस में फिर नंबर-1

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर भारतीयों की मेहनत और कौशल का असर एक बार फिर दिखा है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशों में काम कर रहे भारतीयों ने अपने देश को रिकॉर्ड स्तर पर पैसा भेजकर नया इतिहास रच दिया है। इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन की ‘वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, साल 2024 में भारत को करीब 137 बिलियन डॉलर (लगभग 11.4 लाख करोड़ रुपये) का रेमिटेंस मिला। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और भारत लगातार एक दशक से इस सूची में शीर्ष पर बना हुआ है। 00 बिलियन डॉलर पार करने वाला इकलौता देश रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का पहला और इकलौता देश बन गया है जिसने रेमिटेंस में 100 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया है। इससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर भारतीयों की आर्थिक भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है। दूसरे देशों से काफी आगे भारत रेमिटेंस के मामले में भारत के बाद मेक्सिको दूसरे, फिलीपींस तीसरे और फ्रांस चौथे स्थान पर हैं। हालांकि इनमें से कोई भी देश अभी तक 100 बिलियन डॉलर के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है। लगातार बढ़ता ग्राफ अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2010 में भारत को करीब 53.48 बिलियन डॉलर, 2015 में 68.91 बिलियन डॉलर और 2020 में 83.15 बिलियन डॉलर का रेमिटेंस मिला था। पिछले चार वर्षों में इसमें तेज उछाल दर्ज किया गया है। किन देशों से आता है ज्यादा पैसा? रेमिटेंस भेजने वाले देशों में अमेरिका सबसे आगे है, जहां से 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का आउटफ्लो दर्ज किया गया। इसके अलावा सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और जर्मनी भी प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं। छात्रों की भी मजबूत मौजूदगी आर्थिक योगदान के साथ-साथ भारतीय छात्र भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों में चीन पहले और भारत दूसरे स्थान पर है। 2022 तक 6.20 लाख से अधिक भारतीय छात्र विदेशों में उच्च शिक्षा ले रहे थे। रेमिटेंस के क्षेत्र में भारत की यह उपलब्धि न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि दुनियाभर में भारतीयों की भूमिका कितनी अहम हो चुकी है। लगातार बढ़ता यह आंकड़ा आने वाले समय में भारत की आर्थिक ताकत को और मजबूत कर सकता है।
कब है शनि जयंती ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष अमावस्या को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव और छाया के संयोग से शनिदेव का जन्म हुआ था। इसलिए यह दिन उनकी पूजा-अर्चना और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष महत्व रखता है। साल 2026 में शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी। इस दिन विधि-विधान से पूजा और उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है। शुभ मुहूर्तद्रिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5:11 बजे से प्रारंभ होगी और 17 मई को रात 1:30 बजे समाप्त होगी। ऐसे में 16 मई को ही शनि जयंती और शनि अमावस्या मनाना शुभ रहेगा। पूजा विधिशनि जयंती के दिन संध्या काल को पूजा के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। इस दौरान श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। – संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।– पश्चिम दिशा की ओर मुख करके शनिदेव का ध्यान करें।– शनि मंत्र या शनि स्तोत्र का पाठ करें।– पूजा के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।– जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। क्या रखें ध्यान?इस दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं, जिसे अपनी आस्था के अनुसार रखा जा सकता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा जीवन की बाधाओं को कम करती है और शनिदेव की कृपा दिलाती है।
गजकेसरी राजयोग: मई में चंद्रमा और गुरु की युति से इन राशियों को मिलेगा धन और तरक्की का लाभ

नई दिल्ली। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार मई का महीना विशेष महत्व रखता है। इस माह के मध्य में चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक 18 मई को चंद्रमा मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही देवगुरु बृहस्पति स्थित हैं। इस प्रकार चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी योग बनेगा। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है। इसके प्रभाव से पुराने तनाव कम हो सकते हैं, प्रगति के नए अवसर मिल सकते हैं और जीवन में मानसिक शांति के साथ आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिल सकता है। आइए जानते हैं किन राशियों पर इसका शुभ प्रभाव पड़ेगा। वृषभ राशिइस राशि के लोगों को राहत महसूस हो सकती है। पुराने विवाद सुलझने लगेंगे और पारिवारिक माहौल बेहतर होगा। युवाओं की मानसिक उलझनें कम होंगी। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की संभावना है, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। कर्क राशिकर्क राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। आय में वृद्धि से घरेलू जरूरतें आसानी से पूरी होंगी। इस दौरान यात्रा के योग भी बन सकते हैं। युवाओं को आत्मचिंतन का अवसर मिलेगा, जिससे मानसिक संतुलन बेहतर होगा। कन्या राशिकन्या राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और रिश्तों दोनों में सकारात्मक परिणाम देने वाला हो सकता है। अविवाहित लोगों के लिए नए संबंध बनने की संभावना है। नौकरी और व्यवसाय में आय बढ़ने के संकेत हैं। निवेश के अवसर भी मिल सकते हैं, जो भविष्य में लाभदायक रहेंगे। तुला राशितुला राशि वालों के जीवन में स्थिरता आने के संकेत हैं। लंबे समय से चल रही परेशानियां धीरे-धीरे कम होंगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा और रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। यह समय संतुलन और शांति का अनुभव कराएगा। मीन राशिमीन राशि के लोगों के लिए यह समय आत्मविश्लेषण और समझ को बढ़ाने वाला रहेगा। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। पुराने विवाद सुलझ सकते हैं और मानसिक हल्कापन महसूस होगा। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की संभावना है।
एमपी में मौसम के दो सिस्टम सक्रिय, 28 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, कई जिलों में चलेंगी तेज हवाएं

भोपाल। मध्य प्रदेश में इस समय मौसम के दो सिस्टम सक्रिय हैं, जिसके चलते प्रदेश के करीब आधे हिस्से यानी 28 जिलों में बुधवार को तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कई इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है। बुधवार को ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में आंधी-बारिश का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, शाम के समय मौसम में बदलाव ज्यादा स्पष्ट होगा, हालांकि कुछ जिलों में दिन के दौरान भी आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं, प्रदेश के कुछ हिस्सों में दिन के समय गर्मी का असर बना रहेगा। इनमें भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, गुना, शिवपुरी और अशोकनगर शामिल हैं। मंगलवार को प्रदेश में लगातार पांचवें दिन भी आंधी-बारिश का सिलसिला जारी रहा। ग्वालियर, छतरपुर, धार, बड़वानी, डिंडौरी और बालाघाट सहित कई जिलों में सुबह से ही मौसम बदला रहा, जबकि रात में भोपाल समेत अन्य क्षेत्रों में तेज हवाएं चलीं। तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख शहरों में भोपाल का अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री, इंदौर 37.6 डिग्री, ग्वालियर 34.7 डिग्री, उज्जैन 38 डिग्री और जबलपुर 37 डिग्री सेल्सियस रहा। खरगोन सबसे गर्म रहा, जहां पारा 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा खंडवा में 41.5 डिग्री और नरसिंहपुर में 41.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। वहीं, नौगांव में सबसे कम 33.5 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। अन्य शहरों में भी तापमान सामान्य से कम रहा। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में फिलहाल आंधी-बारिश का दौर कुछ दिन और जारी रह सकता है। वर्तमान में एक चक्रवाती परिसंचरण प्रदेश के मध्य भाग में सक्रिय है, जबकि दूसरा ऊपरी हिस्से में बना हुआ है। इसके साथ ही पूर्वी हिस्से से एक ट्रफ लाइन गुजर रही है, जिसके कारण मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। साथ ही 10 मई से एक नया सिस्टम भी सक्रिय होने की संभावना है।
GWALIOR NAGAR NIGAM ACTION: सफाई व्यवस्था बिगड़ी तो एक्शन तय, ग्वालियर नगर निगम ने 9 अफसरों से मांगा जवाब

HIGHLIGHTS: 9 वार्ड हेल्थ ऑफिसरों को कारण बताओ नोटिस हाजिरी रिकॉर्ड समय पर जमा न करने पर कार्रवाई मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी ने जताई सख्ती सफाई व्यवस्था में लापरवाही पर नाराजगी समयसीमा का पालन न करने पर मांगा स्पष्टीकरण GWALIOR NAGAR NIGAM ACTION: मध्य्रप्रदेश। ग्वालियर नगर निगम प्रशासन ने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। बता दें कि आउटसोर्स सफाई कर्मियों की हाजिरी समय पर प्रस्तुत न करने के मामले में 9 वार्ड हेल्थ ऑफिसरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इस कार्रवाई से निगम की मंशा साफ है कि सफाई व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मध्य प्रदेश के तवा जलाशय में दिखे लुप्तप्राय इंडियन स्किमर पक्षी तय समयसीमा का उल्लंघन पड़ा भारी मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वैभव श्रीवास्तव द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड एजेंसी के माध्यम से निर्धारित समयसीमा में जमा करना अनिवार्य है। इसके बावजूद कई वार्डों में इस नियम का पालन नहीं किया गया, जिसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कार्रवाई की गई है। टोल प्लाजा हटेंगे…. देश में शुरू होगा नया GPS बेस्ड ऑटोमैटिक सिस्टम इन अधिकारियों पर गिरी गाज जिन अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें वार्ड 3 के रवि सिहोते, वार्ड 8 के गलबल, वार्ड 21 के वीर सिंह, वार्ड 29 के देवेंद्र, वार्ड 30 के रविन्द्र करोसिया, वार्ड 32 के विकल जाटव, वार्ड 47 के अरुण खरे, वार्ड 51 के हरिप्रसाद और वार्ड 60 के विक्रम शामिल हैं। फ़िलहाल सभी से निर्धारित समय में स्पष्टीकरण मांगा गया है। टोल प्लाजा हटेंगे…. देश में शुरू होगा नया GPS बेस्ड ऑटोमैटिक सिस्टम जिम्मेदारी निभाने के निर्देश नगर निगम प्रशासन ने साफ कहा है कि सफाई व्यवस्था शहर की प्राथमिक सेवाओं में शामिल है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें और समयसीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
मध्य प्रदेश के तवा जलाशय में दिखे लुप्तप्राय इंडियन स्किमर पक्षी

भोपाल। मध्य प्रदेश के तवा जलाशय में लुप्तप्राय पक्षी इंडियन स्किमर (Rynchops albicollis) की मौजूदगी दर्ज की गई है। बोट गश्ती के दौरान वन विभाग के स्टाफ को कुल 8 इंडियन स्कीमर दिखाई पड़े, जिनकी तस्वीर मढ़ई रेंजर द्वारा ली गई है। जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व बाघों का उत्कृष्ट प्राकृतिक आवास (हैबिटेट) माना जाता है। इसी रिजर्व में स्थित तवा जलाशय में इंडियन स्कीमर की उपस्थिति से यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए एक आदर्श और सुरक्षित आवास के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उन्होंने बताया कि इंडियन स्किमर भारत के अत्यंत संकटग्रस्त नदी-आधारित पक्षियों में शामिल है, जिसकी संख्या लगातार घट रही है। यह पक्षी अपनी विशिष्ट लंबी निचली चोंच के लिए जाना जाता है, जिसके माध्यम से यह पानी की सतह को चीरते हुए मछलियों का शिकार करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रजाति केवल स्वच्छ जल, प्रचुर मछली संसाधन और निर्बाध रेतीले तटों वाले क्षेत्रों में ही अपना आवास बनाती है। इस लुप्तप्राय पक्षी की उपस्थिति से सतपुड़ा को विशिष्ट पहचान मिलेगी। तवा जलाशय के आवास में इंडियन स्किमर की उपस्थिति इस क्षेत्र के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। वन विभाग के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का संरक्षित क्षेत्र न केवल बाघों के संरक्षण में अग्रणी है, बल्कि यह अन्य संवेदनशील वन्यजीव प्रजातियों के लिए भी एक पूरी तरह से अनुकूल और सुरक्षित आवास प्रदान कर रहा है।
मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू

भोपाल। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने मध्य प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सनोफी इंडिया लिमिटेड के साथ मंगलवार को एक महत्वपूर्ण एमओयू किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उनकी शीघ्र पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करना और दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों को बेहतर सहयोग प्रदान करना है। एमओयू पर एनएचएम मध्य प्रदेश की मिशन डायरेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना और सनोफी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक अरोड़ा द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी एवं संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित थे। एनएचएम एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल विशेष रूप से दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से लोगों को उनके क्षेत्र में ही निःशुल्क जांच, उपचार और डॉक्टरों से टेली-परामर्श की सुविधा मिलेगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य गैर-संचारी रोगों के लिए जागरूकता, प्रारंभिक जोखिम पहचान और रेफरल सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुर्लभ रोगों के लिए शीघ्र पहचान, निःशुल्क जांच और बेहतर उपचार व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे मरीजों को समय पर उचित देखभाल मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल स्तर पर बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली से संबंधित सही जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे स्वयं स्वस्थ आदतें अपनाने के साथ अपने परिवार और समुदाय में भी जागरूकता फैला सकें। सनोफी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अरोड़ा ने भारत में बढ़ते एनसीडी के दृष्टिगत शीघ्र पहचान की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सनोफी स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाने और मरीजों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की साझेदारियों के प्रति प्रतिबद्ध है। यह साझेदारी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करेगी। इस अवसर पर बताया कि एमओयू के तहत दुर्लभ रोगों के निदान और उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण, उन्नत तकनीकों के माध्यम से शीघ्र पहचान तथा चयनित बीमारियों की निःशुल्क जांच की सुविधा चिन्हित संस्थानों में उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य एनसीडी के लिए प्रारंभिक जोखिम पहचान, जागरूकता अभियान और रेफरल सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, जिसमें राज्यभर में तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत “किड्स एंड डायबिटीज इन स्कूल्स (KiDS)” जैसे अभियानों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ एवं सामुदायिक कार्यकर्ताओं के लिए क्षमता निर्माण के तहत संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। एमओयू के तहत सिंगरौली, बालाघाट और अनूपपुर जिलों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की तैनाती की जाएगी, जिससे दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकेंगी। इन यूनिट्स के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मुख कैंसर जैसी बीमारियों की निःशुल्क जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रत्येक यूनिट में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहेंगे तथा डॉक्टरों से टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। प्रारंभिक चरण में यह सेवा इन तीन जिलों में शुरू की जाएगी और आवश्यकता अनुसार अन्य जिलों में भी विस्तार किया जाएगा।