बॉलीवुड के सबसे अनुशासित अभिनेता अक्षय कुमार ने कराई आई सर्जरी, फिल्म की शूटिंग खत्म होते ही सेहत पर दिया ध्यान।

नई दिल्ली। बॉलीवुड में अनुशासन और समय की पाबंदी के प्रतीक माने जाने वाले अक्षय कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनके लिए काम और कर्तव्य सर्वोपरि है। ताजा जानकारी के अनुसार, फिल्म जगत के इस ‘खिलाड़ी’ ने अपनी आगामी फिल्म के एक कठिन और लंबे शेड्यूल को सफलतापूर्वक पूरा करने के तुरंत बाद अपनी आँखों की सर्जरी कराई है। सूत्रों का कहना है कि वे पिछले काफी समय से आँखों से संबंधित किसी समस्या से जूझ रहे थे, लेकिन उन्होंने इस परेशानी को अपने काम के आड़े नहीं आने दिया। जैसे ही फिल्म के निर्देशक ने आखिरी शॉट के बाद ‘कट’ बोला, अक्षय ने तुरंत चिकित्सीय सलाह ली और सर्जरी की प्रक्रिया को अंजाम दिया। एक कलाकार के तौर पर अक्षय कुमार की यह निष्ठा नई नहीं है, लेकिन आँखों जैसी संवेदनशील समस्या के साथ घंटों तेज लाइट और कैमरों के सामने काम करना उनकी सहनशक्ति को दर्शाता है। शूटिंग के दौरान सेट पर मौजूद किसी भी व्यक्ति को इस बात का आभास तक नहीं हुआ कि अभिनेता किसी शारीरिक कष्ट से गुजर रहे हैं। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, फिल्म बिरादरी और प्रशंसकों के बीच उनकी इस कार्यक्षमता की चर्चा होने लगी। डॉक्टरों के अनुसार, यह एक आवश्यक प्रक्रिया थी जिसे और अधिक समय तक टाला नहीं जा सकता था। सर्जरी सफल रही है और वर्तमान में अभिनेता को पूरी तरह से आराम करने और तेज रोशनी से दूर रहने की हिदायत दी गई है। अक्षय कुमार की जीवनशैली हमेशा से ही प्रेरणादायक रही है। वे अपनी सुबह की शुरुआत और रात के आराम के लिए जाने जाते हैं, और शायद यही कारण है कि उनकी रिकवरी बहुत तेजी से हो रही है। इस सर्जरी के चलते उनके आने वाले कुछ प्रोजेक्ट्स के शेड्यूल में मामूली बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि उन्हें पूरी तरह से ठीक होने का समय मिल सके। उनके करीबियों का कहना है कि वे इस ब्रेक का उपयोग अपने परिवार के साथ समय बिताने और अपनी सेहत को पुनर्जीवित करने में कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके चाहने वालों ने संदेशों की झड़ी लगा दी है, जिसमें उनके जल्द से जल्द पर्दे पर वापसी की कामना की जा रही है। फिल्मी पर्दे पर एक्शन और स्टंट करने वाले अक्षय असल जिंदगी में भी अपनी समस्याओं का सामना उतनी ही मजबूती से करते हैं। इस घटना ने एक बार फिर सिनेमाई दुनिया के उस सच को उजागर किया है, जहाँ सितारे अक्सर अपनी तकलीफों को छिपाकर दर्शकों का मनोरंजन करते रहते हैं। यह सर्जरी महज एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनकी पेशेवर ईमानदारी का प्रमाण है। उम्मीद है कि कुछ ही दिनों के विश्राम के बाद, वे फिर से उसी ऊर्जा और चमक के साथ सेट पर लौटेंगे जिसके लिए उन्हें जाना जाता है। फिलहाल, पूरा फिल्म उद्योग और उनके करोड़ों प्रशंसक उनकी आँखों की नई रोशनी और बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
बांग्लादेश पर चीन का बड़ा दांव! वांग यी ने भारत-अमेरिका को दिया साफ संदेश

नई दिल्ली। चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ती नजदीकियों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बीजिंग दौरे पर पहुंचे बांग्लादेश के विदेश मंत्री Khalilur Rahman ने चीनी विदेश मंत्री Wang Yi से मुलाकात की, जिसके बाद चीन ने ऐसा बयान दिया जिसे भारत और अमेरिका के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है। वांग यी ने साफ कहा कि दक्षिण एशियाई देशों के साथ चीन के संबंध किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं और न ही इन रिश्तों पर किसी बाहरी देश का असर होना चाहिए। माना जा रहा है कि यह इशारा India और United States की ओर था। बांग्लादेश की नई सरकार और चीन की सक्रियताफरवरी में नई बीएनपी सरकार बनने के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री की यह पहली चीन यात्रा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले महीने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री Tarique Rahman भी चीन दौरे पर जा सकते हैं। बैठक के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। चीन ने बांग्लादेश को हरसंभव समर्थन देने की बात कही। बेल्ट एंड रोड परियोजना पर जोरवांग यी ने कहा कि चीन बांग्लादेश के विकास में सबसे भरोसेमंद साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने चीन की महत्वाकांक्षी Belt and Road Initiative परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। ताइवान मुद्दे पर चीन को मिला समर्थनबांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने “वन चाइना पॉलिसी” का समर्थन करते हुए कहा कि ताइवान चीन का हिस्सा है और बीजिंग ही पूरे चीन की वैध सरकार है। इसे चीन के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। दक्षिण एशिया में बदल रहे समीकरणविशेषज्ञों का मानना है कि चीन लगातार दक्षिण एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बांग्लादेश के साथ बढ़ती नजदीकियां भारत और अमेरिका दोनों के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकती हैं।
सुरों के सरताज मोहम्मद रफी का वो कालजयी गीत, जिसे गाने के लिए महमूद ने बुलावाया था असली किन्नरों को, आज भी ताजा हैं यादें।

नई दिल्ली। भारतीय संगीत के स्वर्ण युग में जब भी सादगी और प्रतिभा के संगम की बात होती है, तो मोहम्मद रफी का नाम सबसे ऊपर आता है। संगीत जगत के इस महान गायक से जुड़े अनगिनत किस्से आज भी लोगों की आँखों में चमक और दिल में सम्मान भर देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प और भावुक कर देने वाला वाकया मशहूर कॉमेडियन और अभिनेता महमूद की एक फिल्म के दौरान घटित हुआ था। उस दौर में महमूद अपनी फिल्मों में नवीनता लाने के लिए जाने जाते थे, और उन्होंने एक गीत के फिल्मांकन के लिए कुछ ऐसा करने का निर्णय लिया जो उस समय के सिनेमा के लिए बेहद अनूठा था। उन्होंने तय किया कि एक विशेष गीत के चित्रण में किसी कलाकार के बजाय असली किन्नरों को शामिल किया जाएगा, ताकि उस दृश्य की संवेदनशीलता और वास्तविकता को पर्दे पर जीवंत किया जा सके। जब इस गीत की रिकॉर्डिंग की बात आई, तो सुरों के सम्राट मोहम्मद रफी ने अपनी जादुई आवाज से उसे इस तरह सजाया कि हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया। रिकॉर्डिंग स्टूडियो से लेकर फिल्म के सेट तक, रफी साहब का व्यवहार उन सभी लोगों के प्रति इतना सहज और सम्मानजनक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति उनकी विनम्रता का कायल हो गया। सेट पर जब असली किन्नरों ने रफी साहब के गाये उस गीत पर अपनी प्रस्तुति दी, तो माहौल पूरी तरह से भावनात्मक हो गया। उस समय के चश्मदीदों का कहना है कि रफी साहब ने न केवल अपनी आवाज का जादू बिखेरा, बल्कि उन कलाकारों के साथ बेहद आत्मीयता से बातचीत भी की, जिससे उन्हें कभी यह महसूस नहीं हुआ कि वे सिनेमा की चकाचौंध वाली दुनिया से अलग हैं। यह किस्सा न केवल मोहम्मद रफी की महान गायकी को दर्शाता है, बल्कि उनके उस व्यक्तित्व को भी उजागर करता है जहाँ ऊंच-नीच या सामाजिक भेदभाव की कोई जगह नहीं थी। महमूद, जो खुद एक मंझे हुए कलाकार थे, रफी साहब के इस समर्पण और व्यवहार को देखकर दंग रह गए थे। इस गीत के माध्यम से समाज के एक ऐसे वर्ग को मुख्यधारा के सिनेमा में सम्मान के साथ पेश किया गया, जिन्हें अक्सर हाशिये पर रखा जाता था। रफी साहब की आवाज में जो दर्द और रूहानियत थी, उसने उस गीत को कालजयी बना दिया। आज दशकों बाद भी जब इस गाने की चर्चा होती है, तो लोग केवल उसकी धुन को ही नहीं, बल्कि उसके पीछे की इस मानवीय कहानी को भी याद करते हैं। फिल्मी गलियारों में यह बात आज भी मिसाल के तौर पर दी जाती है कि कैसे एक महान कलाकार अपनी कला के जरिए सामाजिक दूरियों को मिटा सकता है। मोहम्मद रफी ने अपनी पूरी जिंदगी में हजारों गाने गाए, लेकिन कुछ चुनिंदा काम ऐसे थे जिन्होंने उन्हें ‘फरिश्ता’ इंसान की छवि दी। इस विशेष अनुभव ने साबित किया कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती और जब इसे सच्चे दिल से गाया जाए, तो यह हर आत्मा को छू लेता है। महमूद और रफी साहब की इस जुगलबंदी ने सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा अध्याय जोड़ दिया, जो आज की पीढ़ी के कलाकारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। सादगी, सम्मान और सुरों का यह अद्भुत मेल भारतीय सिनेमा की उन धरोहरों में से एक है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
प्रभास की फिल्म 'फौजी' के सेट पर बड़ा हादसा: एक क्रू मेंबर की मौत और कई घायल, शूटिंग पर लगा अनिश्चितकालीन ब्रेक।

नई दिल्ली। सिनेमाई पर्दे पर भव्यता बिखेरने की तैयारियों के बीच फिल्म उद्योग से एक अत्यंत दुखद खबर आई है। सुपरस्टार प्रभास की आगामी फिल्म ‘फौजी’ के सेट पर एक भीषण दुर्घटना ने पूरी फिल्म बिरादरी को स्तब्ध कर दिया है। बताया जा रहा है कि फिल्म के एक महत्वपूर्ण शेड्यूल की शूटिंग के दौरान हुए इस दर्दनाक हादसे में चालक दल के एक सक्रिय सदस्य की मृत्यु हो गई है, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस हृदयविदारक घटना के तुरंत बाद फिल्म के निर्माण कार्य को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना अचानक और भयानक था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। सेट पर मौजूद सुरक्षा और तकनीकी इंतजामों के बावजूद यह अनहोनी घटित हो गई, जिसने पूरे प्रोडक्शन हाउस को गहरे शोक में डाल दिया है। दुर्घटना के तुरंत बाद फिल्म की टीम ने राहत कार्य शुरू किया और सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया। डॉक्टरों ने एक सदस्य को मृत घोषित कर दिया, जो कि फिल्म की यूनिट के लिए एक अपूरणीय क्षति है। बाकी घायल सदस्यों का इलाज चल रहा है, जिनमें से कुछ की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। इस घटना ने एक बार फिर फिल्म निर्माण के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा व्यवस्थाओं और तकनीकी खामियों पर सवालिया निशान लगा दिया है। बड़े बजट और बड़े सितारों वाली फिल्मों के सेट पर जहाँ हर कदम पर सावधानी बरती जाती है, वहाँ ऐसी जानलेवा चूक होना बेहद चिंताजनक है। फिल्म के मुख्य अभिनेता प्रभास और पूरी कास्ट ने इस दुखद घड़ी में मृतक के प्रति संवेदना व्यक्त की है और शूटिंग को पूरी तरह रोक देने का निर्णय लिया है। वर्तमान में फिल्म का सेट पूरी तरह शांत है और वहाँ केवल जांच दल की हलचल देखी जा रही है। हादसे के सही कारणों का पता लगाने के लिए गहन छानबीन की जा रही है कि क्या यह कोई यांत्रिक विफलता थी या फिर मानवीय चूक। फिल्म के निर्माण से जुड़ी संस्थाओं का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता घायलों का उचित उपचार सुनिश्चित करना और पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करना है। इस तरह के हादसों से न केवल फिल्म का शेड्यूल प्रभावित होता है, बल्कि वहां काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा आघात पहुँचता है। मनोरंजन जगत के कई दिग्गजों ने इस घटना पर शोक जताया है और मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए फिल्म सेट पर सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त बनाया जाए। प्रभास की ‘फौजी’ एक बड़े पैमाने पर बनाई जा रही फिल्म है, जिससे दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं, लेकिन इस त्रासदी ने फिलहाल फिल्म के उत्साह को गम में बदल दिया है। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती और सुरक्षा के सभी मानकों को फिर से सुनिश्चित नहीं कर लिया जाता, तब तक कैमरे दोबारा शुरू होने की संभावना कम ही नजर आती है। फिल्म जगत इस समय एकजुट होकर उस परिवार के साथ खड़ा है जिसने अपने सदस्य को खोया है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि फिल्म की टीम इस सदमे से उबरकर दोबारा काम पर कब लौटती है, लेकिन फिलहाल पूरा फोकस केवल मानवीय संवेदनाओं और घायलों की सुरक्षा पर टिका हुआ है।
तमिलनाडु बना आर्थिक ग्रोथ का नया पावरहाउस, मैन्युफैक्चरिंग से सर्विस सेक्टर तक तेज रफ्तार विकास

नई दिल्ली। तमिलनाडु आज भारत की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है। राज्य ने मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और एक्सपोर्ट सेक्टर में लगातार मजबूत प्रदर्शन करते हुए आर्थिक विकास की रफ्तार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इसी वजह से इसे देश का एक प्रमुख ग्रोथ इंजन माना जा रहा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार राज्य ने लगातार दो वर्षों तक डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। इसकी कुल अर्थव्यवस्था भी तेजी से बढ़ते हुए लाखों करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुकी है। यह प्रदर्शन बताता है कि तमिलनाडु केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्य की इस सफलता के पीछे कई मजबूत कारण हैं। सबसे बड़ा कारण इसका विविध औद्योगिक आधार है, जहां चेन्नई, कोयंबटूर, होसुर और मदुरै जैसे शहर अलग-अलग उद्योगों के केंद्र के रूप में विकसित हुए हैं। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग में राज्य की मजबूत पकड़ इसे अन्य राज्यों से अलग बनाती है। इसके अलावा तमिलनाडु ने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी लगातार ध्यान दिया है। बेहतर सड़क नेटवर्क, बंदरगाहों का विस्तार और बिजली आपूर्ति में सुधार ने निवेशकों के लिए माहौल को और आकर्षक बनाया है। यही वजह है कि देश-विदेश की बड़ी कंपनियां यहां निवेश को प्राथमिकता देती हैं। शिक्षित और स्किल्ड वर्कफोर्स भी राज्य की बड़ी ताकत है। उच्च शिक्षा में भागीदारी और तकनीकी कौशल के कारण यहां उद्योगों को प्रशिक्षित श्रमिक आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। यह कारक भी औद्योगिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाता है। तमिलनाडु इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट के क्षेत्र में भी देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए सेक्टर्स में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य तमिलनाडु को एक बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए लगातार निवेश आकर्षित करने और ग्लोबल कंपनियों को जोड़ने पर काम किया जा रहा है। औद्योगिक नीतियों और निवेश अनुकूल माहौल के कारण राज्य भविष्य में और तेजी से विकास की ओर बढ़ने की क्षमता रखता है।
लिपुलेख विवाद पर फिर गरमाए भारत-नेपाल संबंध! क्या ओली की राह पर चल रहे हैं बालेन शाह?

नई दिल्ली। नेपाल की नई सरकार ने सत्ता में आने के कुछ ही महीनों बाद एक बार फिर India के साथ पुराने सीमा विवाद को हवा दे दी है। प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख मार्ग खोले जाने पर आपत्ति जताते हुए भारत और China को राजनयिक नोट भेजा है। नेपाल का दावा है किलिपुलेख दर्रा उसका हिस्सा है और इस मार्ग का इस्तेमाल उसकी सहमति के बिना नहीं किया जा सकता। वहीं भारत का कहना है कि लिपुलेख ऐतिहासिक रूप से भारतीय क्षेत्र का हिस्सा रहा है और लंबे समय से इसका उपयोग व्यापार और तीर्थ यात्रा के लिए होता आया है। फिर क्यों उठा विवाद?लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को लेकर भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सीमा विवाद चला आ रहा है। नेपाल की राजनीति में यह मुद्दा अक्सर घरेलू असंतोष और राजनीतिक दबाव से ध्यान हटाने के लिए इस्तेमाल होता रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli ने इस मुद्दे को काफी आक्रामक तरीके से उठाया था। अब बालेन शाह सरकार भी उसी राह पर चलती नजर आ रही है, हालांकि उनका राजनीतिक उदय भ्रष्टाचार और आंतरिक अव्यवस्था के खिलाफ आंदोलन से हुआ था। भारत के लिए क्यों अहम है लिपुलेख?कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सामरिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अहम क्षेत्र है। भारत इस इलाके को अपनी प्रशासनिक सीमा का हिस्सा मानता है और यहां लंबे समय से उसका नियंत्रण रहा है। घरेलू राजनीति का दबावविशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल में भारत के प्रति नरम रुख अपनाना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा माना जाता है। यही वजह है कि नई सरकार भी सीमा विवाद पर सख्त रुख दिखाने की कोशिश कर रही है। हालांकि नेपाल के विदेश मंत्रालय का बयान अपेक्षाकृत संयमित माना जा रहा है और उसमें सीधे टकराव की भाषा से बचा गया है। चीन भी बना समीकरण का हिस्साइस पूरे विवाद में चीन की भूमिका भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि कैलाश मानसरोवर यात्रा और व्यापार मार्ग सीधे तिब्बत क्षेत्र से जुड़े हैं। हालांकि बीजिंग ने अब तक संप्रभुता के मुद्दे पर खुलकर कोई पक्ष नहीं लिया है, लेकिन नेपाल-भारत संबंधों में यह मुद्दा एक बार फिर संवेदनशील बन गया है।
होर्मुज स्ट्रेट संकट खत्म होने के करीब! अमेरिका-ईरान समझौते से भारत समेत दुनिया को मिल सकती है बड़ी राहत

नई दिल्ली। होरमुज़ जलसंधि में जारी तनाव अब कम होता नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम समझौते पर सहमति बन गई है, जिसके बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे फिर से शुरू हो सकती है। इससे भारत समेत दुनिया भर को तेल और गैस संकट से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को चरणबद्ध तरीके से हटाएगा, जबकि ईरान बदले में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलेगा। माना जा रहा है कि आने वाले घंटों में वहां फंसे सैकड़ों जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है। दुनिया भर में मचा था तेल और गैस संकटअमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में पाबंदियां बढ़ा दी थीं। इसके कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी सप्लाई पर असर पड़ा। भारत समेत कई देशों में ऊर्जा संकट और महंगे ईंधन की चिंता बढ़ गई थी।होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई होती है। ट्रंप ने भी दिए समझौते के संकेतअमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी हाल में संकेत दिए थे कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच वार्ता अच्छी रही है और संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है। फ्रांस ने भी की हस्तक्षेप की अपीलइमैनुएल मैक्रों ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से बातचीत के बाद सभी पक्षों से बिना शर्त नाकेबंदी हटाने की अपील की। फ्रांस ने समुद्री सुरक्षा और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए बहुराष्ट्रीय मिशन का भी सुझाव दिया है। परमाणु समझौते पर भी बन सकती है बातरिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान युद्ध खत्म करने के साथ-साथ परमाणु संवर्धन और प्रतिबंधों को लेकर भी समझौते के करीब पहुंच गए हैं। अगर यह डील पूरी होती है तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ी राहत मिल सकती है।
पेट्रोल-डीजल के दाम में नहीं हुआ कोई बदलाव, 7 मई को भी ईंधन कीमतें स्थिर

नई दिल्ली। देशभर में 7 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं देखा गया। लगातार कई दिनों से ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर इसका असर तुरंत दिखाई नहीं दे रहा है। भारत में ईंधन की कीमतें रोजाना आधार पर तय की जाती हैं, लेकिन हाल के समय में इनमें स्थिरता बनी हुई है। इसका मुख्य कारण वैश्विक बाजार में संतुलन और घरेलू टैक्स संरचना का स्थिर रहना माना जा रहा है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों के आधार पर रेट तय करती हैं, लेकिन फिलहाल बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले की तरह ही बनी हुई हैं। वहीं मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास या उससे ऊपर बनी हुई हैं। डीजल की कीमतें अधिकतर शहरों में अभी भी 100 रुपये के नीचे हैं। महानगरों में ईंधन की कीमतों में अंतर टैक्स और परिवहन लागत की वजह से देखने को मिलता है। कुछ शहरों में पेट्रोल की कीमतें अपेक्षाकृत अधिक हैं, जबकि छोटे शहरों में यह दरें थोड़ी कम बनी हुई हैं। पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव कम देखने को मिले हैं। टैक्स में बदलाव के बाद से कीमतें एक सीमित दायरे में स्थिर बनी हुई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, डॉलर-रुपया विनिमय दर, टैक्स और लॉजिस्टिक्स लागत शामिल हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में किसी भी बदलाव का असर धीरे-धीरे घरेलू कीमतों पर पड़ता है।
कर्मचारियों की सैलरी पर बड़ा मंथन, 8वें वेतन आयोग में 10 साल की बजाय 5 साल रिव्यू की मांग तेज

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों से जुड़े 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा लगातार तेज हो रही है। इसी बीच कर्मचारी यूनियनों ने एक अहम मांग उठाई है कि वेतन आयोग की समीक्षा हर 10 साल की बजाय हर 5 साल में की जानी चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा समय में जिस तेजी से महंगाई बढ़ रही है, उसके मुकाबले वेतन में होने वाली बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं रह जाती। यूनियनों का मानना है कि लंबे अंतराल में वेतन संरचना असंतुलित हो जाती है। निचले स्तर के कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों के वेतन के बीच अंतर समय के साथ और ज्यादा बढ़ता जाता है, जिससे असमानता की स्थिति बनती है। इसका सीधा असर आम कर्मचारियों की जीवनशैली और उनकी क्रय शक्ति पर पड़ता है। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जब वेतन में बढ़ोतरी होती है, तो वह प्रतिशत के आधार पर तय होती है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिलता। कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अपेक्षाकृत कम फायदा होता है, जबकि अधिक वेतन पाने वालों को उसी अनुपात में अधिक लाभ मिल जाता है। यूनियनों का सुझाव है कि अगर वेतन आयोग की समीक्षा छोटे अंतराल पर की जाए, तो महंगाई और वेतन के बीच संतुलन बनाए रखना आसान हो सकता है। इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में स्थिरता आएगी और उनकी वास्तविक आय पर सकारात्मक असर पड़ेगा। इस बीच वेतन आयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे की चर्चाओं के लिए बैठकों का दौर भी जारी है। इन बैठकों में कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, जिसमें वेतन, पेंशन और भत्तों जैसे विषय शामिल हैं। फिलहाल 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों की उम्मीदें और मांगें दोनों बढ़ गई हैं। आने वाले समय में इस पर क्या फैसला होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
चीन की नई चाल से बढ़ी टेंशन! पाकिस्तान को मिल सकता है जे-35 स्टील्थ जेट, भारत के एस-400 पर मंडराया खतरा

नई दिल्ली। चीन एक बार फिर पाकिस्तान के जरिए भारत के खिलाफ अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन पाकिस्तान को अपना अत्याधुनिक जे-35एई स्टील्थ फाइटर जेट देने की तैयारी कर रहा है, जिसे अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन F-35 लाइटनिंग II का मुकाबला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का दावा है कि यह फाइटर जेट भारत के एयर डिफेंस सिस्टम, खासकर S-400 Triumf के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी हलचलरिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें Noor Khan Airbase का नाम भी शामिल रहा। भारतीय लड़ाकू विमानों और ब्रह्मोस मिसाइलों की क्षमता ने पाकिस्तान और चीन दोनों को सतर्क कर दिया। क्या है चीन का जे-35एई?शेनयांग जे-35 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे रडार से बच निकलने में सक्षम माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान 40 जे-35 खरीद सकता है। चीन इसे वैश्विक बाजार में अमेरिकी एफ-35 के विकल्प के रूप में पेश करना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील्थ तकनीक की वजह से यह विमान दुश्मन के वायु रक्षा सिस्टम के बेहद करीब पहुंचकर हमला कर सकता है। यही कारण है कि इसे भारत के एस-400 सिस्टम के लिए संभावित खतरे के तौर पर देखा जा रहा है। परमाणु सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंतारिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान को जे-35 मिलता है तो वह लंबी दूरी तक सटीक हमले करने में ज्यादा सक्षम हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक चीन पाकिस्तान को सैटेलाइट और निगरानी सहायता भी दे रहा है, जिससे भारतीय वायु रक्षा की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो सकता है। हालांकि भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता मजबूत कर रहा है। भारतीय सेना पहले से दसाल्ट राफेल, एस-400 और ब्रह्मोस जैसी आधुनिक प्रणालियों से लैस है और नए वायु रक्षा सिस्टम पर भी तेजी से काम चल रहा है। एशिया में बढ़ सकती है सैन्य प्रतिस्पर्धाविशेषज्ञों का मानना है कि चीन द्वारा पाकिस्तान को अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान देने से दक्षिण एशिया में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।