निफ्टी में कंसोलिडेशन जारी, ऑटो-एनर्जी स्टॉक्स में तेजी से बाजार में दिखी खरीदारी की दिलचस्पी

नई दिल्ली। शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत मजबूती के साथ हुई, जहां प्रमुख इंडेक्स में शुरुआती बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 50 ने दिन की शुरुआत 24400 के स्तर के आसपास की और कुछ समय के लिए इस स्तर को पार भी किया। वहीं सेंसेक्स भी तेजी के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में अच्छी बढ़त दर्ज की। हालांकि बाजार में शुरुआती तेजी के बाद निफ्टी एक सीमित दायरे में फंसता नजर आया और ऊपरी स्तर पर कंसोलिडेशन का माहौल बन गया। इंडेक्स लगातार 24300 से 24400 के बीच ट्रेड करता दिखा, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार फिलहाल अगली बड़ी चाल के लिए रुककर स्थिति का आकलन कर रहा है। इस बीच सेक्टर वाइज मूवमेंट काफी दिलचस्प रहा। ऑटो सेक्टर में निवेशकों की रुचि लगातार बनी हुई है और लार्जकैप ऑटो कंपनियों में खरीदारी देखने को मिल रही है। कई प्रमुख ऑटो स्टॉक्स में हल्की से मध्यम तेजी दर्ज की गई, जिससे यह सेक्टर बाजार में मजबूती का केंद्र बना रहा। मेटल सेक्टर में भी खरीदारी का रुझान देखने को मिला। कुछ प्रमुख मेटल कंपनियों के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक इस सेक्टर में रिकवरी की उम्मीद के साथ एंट्री कर रहे हैं। इसके अलावा एनर्जी सेक्टर में भी धीरे-धीरे निवेश बढ़ता हुआ दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय निवेशक उन सेक्टर्स की ओर रुख कर रहे हैं जहां हाल ही में रिकवरी के संकेत मिले हैं या जहां स्टॉक्स ने निचले स्तर से वापसी दिखाई है। यही वजह है कि ऑटो, मेटल और एनर्जी जैसे सेक्टर फोकस में बने हुए हैं। तकनीकी स्तर पर निफ्टी ने पहले जिस स्तर को रेजिस्टेंस माना जा रहा था, उसे पार करने की कोशिश की है, लेकिन अब वह स्तर सपोर्ट के रूप में काम कर रहा है। फिलहाल 24300 से 24250 का क्षेत्र बाजार के लिए मजबूत खरीदारी का दायरा माना जा रहा है। अगर बाजार इस जोन में आता है, तो वहां से फिर से खरीदारी देखने की संभावना बनी रहती है, जिससे निफ्टी एक बार फिर ऊपरी स्तरों की ओर बढ़ सकता है। कुल मिलाकर बाजार फिलहाल संतुलन की स्थिति में है, जहां न तो तेज गिरावट दिख रही है और न ही मजबूत ब्रेकआउट, बल्कि निवेशक अगले बड़े ट्रेंड का इंतजार कर रहे हैं।
चीन की टेंशन बढ़ाएगा अमेरिका का ‘लिथियम खजाना’, पहाड़ों के नीचे मिला इतना बड़ा भंडार कि 300 साल नहीं पड़ेगी आयात की जरूरत

नई दिल्ली। संयुक्त राज्य अमेरिका में वैज्ञानिकों ने लिथियम का एक विशाल भंडार खोजा है, जिसे ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भंडार इतना बड़ा है कि अमेरिका करीब 300 साल तक लिथियम आयात पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है। इस खोज को चीन के रेयर अर्थ और बैटरी मटेरियल बाजार में दबदबे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार यह विशाल लिथियम भंडार अपलाचियन पर्वत के नीचे मौजूद है। यह मुख्य रूप से North Carolina, South Carolina, Maine और New Hampshire में फैला हुआ है। वैज्ञानिकों ने इलाके में लिथियम से समृद्ध 18 अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान की है। 65 अरब डॉलर का ‘सफेद सोना’रिपोर्ट के मुताबिक इस भंडार में करीब 2.5 करोड़ मीट्रिक टन लिथियम मौजूद हो सकता है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 65 अरब डॉलर आंकी गई है। माना जा रहा है कि यह खोज अमेरिका को बैटरी निर्माण और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में फिर से मजबूत बना सकती है। क्यों इतना अहम है लिथियम?लिथियम को आधुनिक दौर का “सफेद सोना” कहा जाता है। इसका इस्तेमाल: इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों में स्मार्टफोन और लैपटॉप में ऊर्जा भंडारण सिस्टम में एयरोस्पेस और डिफेंस उपकरणों में सबसे ज्यादा होता है। दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ने के साथ लिथियम की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। चीन का दबदबा पड़ सकता है कमजोरफिलहाल China रेयर अर्थ और लिथियम रिफाइनिंग सेक्टर में सबसे ताकतवर देश माना जाता है। वहीं Australia दुनिया में सबसे ज्यादा लिथियम सप्लाई करता है। ऐसे में अमेरिका की यह खोज वैश्विक सप्लाई चेन का समीकरण बदल सकती है। जापान ने भी खोजा समुद्र के नीचे खजानाइधर Japan ने भी समुद्र की गहराई में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का विशाल भंडार खोजने का दावा किया है। बताया जा रहा है कि यह भंडार टोक्यो से करीब 2000 किलोमीटर दूर समुद्री इलाके में मौजूद है। अनुमान है कि वहां 160 लाख टन से ज्यादा रेयर अर्थ संसाधन हो सकते हैं, जो चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे।
सरकारी हिस्सेदारी बिक्री के बाद बना रिटर्न का इतिहास, 1 लाख बना 14 करोड़, कंपनी ने दिया 1400 गुना फायदा

नई दिल्ली। पिछले कुछ दशकों में शेयर बाजार ने कई ऐसे उदाहरण दिए हैं, जिन्होंने निवेशकों की सोच पूरी तरह बदल दी है। ऐसी ही एक कंपनी है जिसने लंबे समय में निवेशकों को असाधारण रिटर्न देकर मल्टीबैगर बनने की पहचान हासिल की है। समय के साथ इस कंपनी का प्रदर्शन इतना मजबूत रहा कि शुरुआती निवेशकों की पूंजी कई गुना बढ़कर करोड़ों में बदल गई। साल 2002 के आसपास अगर किसी निवेशक ने इस कंपनी में सिर्फ 1 लाख रुपये लगाए होते, तो आज वह राशि बढ़कर करीब 14 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी होती। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि सही कंपनी और लंबे समय तक निवेश कितना बड़ा फर्क पैदा कर सकता है। इस कंपनी की कहानी एक बड़े बदलाव से शुरू होती है, जब सरकार ने अपनी हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेची थी। इसके बाद कंपनी के संचालन और रणनीति में कई अहम बदलाव हुए, जिसने इसके विकास की रफ्तार को तेज कर दिया। धीरे-धीरे कंपनी ने अपने कारोबार को मजबूत किया और बाजार में अपनी पकड़ बनानी शुरू की। पिछले 24 वर्षों में इस कंपनी ने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है और निवेशकों को लगभग 1400 गुना तक का रिटर्न दिया है। समय के साथ इसकी सालाना ग्रोथ भी स्थिर और प्रभावशाली बनी रही, जिससे यह बाजार में एक भरोसेमंद स्टॉक के रूप में उभरी। कंपनी का कारोबार भी समय के साथ काफी विस्तृत हुआ है। जहां पहले यह सीमित क्षेत्र में काम करती थी, वहीं अब यह कई नए सेगमेंट्स में तेजी से आगे बढ़ रही है। खासकर मेटल और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में इसका फोकस लगातार बढ़ रहा है, जिससे भविष्य की संभावनाएं और मजबूत हो रही हैं। इसके अलावा कंपनी ने सिल्वर जैसे अहम मेटल के उत्पादन में भी बड़ा विस्तार किया है। यह धातु अब सिर्फ एक कीमती संसाधन नहीं रह गई है, बल्कि आधुनिक तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कंपनी की अहमियत और भी बढ़ गई है। मजबूत उत्पादन क्षमता, कम लागत में संचालन और लगातार बढ़ते प्रॉफिट ने इस कंपनी को निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना दिया है। लंबे समय में इसका प्रदर्शन यह दिखाता है कि धैर्य और सही निवेश रणनीति से बाजार में बड़ा वेल्थ क्रिएशन संभव है।
Jio-Airtel लाएंगे VIP 5G! क्या अब सुपरफास्ट इंटरनेट के लिए चुकाने होंगे ज्यादा पैसे जानिए क्या है Network Slicing?

नई दिल्ली। भारत में 5G लॉन्च होने के बाद यूजर्स को उम्मीद थी कि इंटरनेट पहले से ज्यादा तेज और स्मार्ट होगा। अब देश की बड़ी टेलिकॉम कंपनियां Jio और Airtel 5G को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों कंपनियां जल्द “Premium 5G” सर्विस ला सकती हैं, जो आम 5G से अलग और ज्यादा तेज होगी। इस नई तकनीक को “Network Slicing” कहा जा रहा है। दरअसल, कंपनियों ने 5G नेटवर्क तैयार करने में हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं। अब वे उसी निवेश से ज्यादा कमाई के नए रास्ते तलाश रही हैं। ऐसे में नेटवर्क स्लाइसिंग को 5G का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। क्या है Network Slicing?आसान भाषा में समझें तो Network Slicing का मतलब है एक ही 5G नेटवर्क को कई हिस्सों में बांटना। हर हिस्से यानी “स्लाइस” को अलग जरूरत के हिसाब से तैयार किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर एक स्लाइस हाई-स्पीड गेमिंग के लिए बनाया जा सकता है।दूसरा 4K या 8K वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए।तीसरा फैक्ट्री ऑटोमेशन या स्मार्ट मशीनों के लिए।वहीं अस्पतालों और एंटरप्राइज कंपनियों के लिए अलग सुपर-स्टेबल नेटवर्क दिया जा सकता है।यानी एक ही 5G नेटवर्क पर अलग-अलग क्वालिटी और स्पीड की सर्विस मिलेगी। क्या आम यूजर्स को होगा फायदा?अगर यह तकनीक लागू होती है तो प्रीमियम यूजर्स को ज्यादा स्थिर और तेज इंटरनेट मिल सकता है। गेमिंग, लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो कॉलिंग जैसी सेवाएं पहले से ज्यादा स्मूद हो सकती हैं। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि क्या इसके लिए लोगों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे? माना जा रहा है कि कंपनियां “VIP 5G” या “Premium 5G” नाम से महंगे प्लान ला सकती हैं। ऐसे में हाई-स्पीड और लो-लेटेंसी नेटवर्क सिर्फ ज्यादा कीमत देने वाले ग्राहकों को मिल सकता है। बिजनेस सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदारिपोर्ट्स के अनुसार Network Slicing का सबसे बड़ा फायदा बिजनेस और एंटरप्राइज सेक्टर को होगा। फैक्ट्रियों, अस्पतालों, क्लाउड कंपनियों और ऑटोमेशन इंडस्ट्री को ऐसा नेटवर्क चाहिए होता है जिसमें कोई रुकावट न आए और डेटा ट्रांसफर बेहद तेज हो।ऐसे में कंपनियां उन्हें डेडिकेटेड 5G नेटवर्क उपलब्ध करा सकती हैं, जिससे मशीनें और सिस्टम बिना लैग के काम कर सकें। भारत में क्यों फंसा है मामला?हालांकि चीन और फिनलैंड जैसे देशों में स्पीड बेस्ड इंटरनेट प्लान पहले से मौजूद हैं, लेकिन भारत में मामला इतना आसान नहीं है। मौजूदा नियमों के तहत अलग-अलग स्पीड या प्राथमिकता देना “नेटवर्क भेदभाव” माना जा सकता है। यही वजह है कि ट्राई और दूरसंचार विभाग (DoT) की मंजूरी के बिना कंपनियां इसे लागू नहीं कर सकतीं। फिलहाल Jio और Airtel सरकार से स्पष्ट नियमों का इंतजार कर रहे हैं। यूजर्स के लिए चिंता या मौका?अगर प्रीमियम 5G आता है तो कुछ यूजर्स को शानदार इंटरनेट अनुभव मिलेगा, लेकिन इससे इंटरनेट सेवाएं महंगी होने का डर भी बढ़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय ग्राहक बेहतर स्पीड और एक्सक्लूसिव नेटवर्क के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार होते हैं या नहीं।
पाम ऑयल संकट से हिल सकता है FMCG सेक्टर, साबुन-शैंपू की कीमतों पर बढ़ा दबाव..

नई दिल्ली। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले साबुन, शैंपू और अन्य FMCG उत्पादों की कीमतों पर आने वाले समय में असर देखने को मिल सकता है। वजह है पाम ऑयल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई में आई दिक्कतें, जो अब भारतीय बाजार तक पहुंच चुकी हैं। यह वही कच्चा माल है जिसका इस्तेमाल न सिर्फ खाने के तेल में बल्कि साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, बिस्किट और कई पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में बड़े पैमाने पर किया जाता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पाम ऑयल का आयात इंडोनेशिया और मलेशिया से करता है। लेकिन वैश्विक स्तर पर सप्लाई में बाधा, बायोडीजल की बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक तनाव के कारण इसकी कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है जो बड़े पैमाने पर FMCG उत्पाद बनाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां सीधे तौर पर कीमतें बढ़ाने से बच सकती हैं, लेकिन इसका असर प्रोडक्ट के साइज या पैकेजिंग पर दिख सकता है। यानी साबुन का साइज छोटा हो सकता है या शैंपू की मात्रा पहले से कम हो सकती है, जिससे उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से बोझ बढ़ेगा। HUL और गोदरेज जैसी बड़ी FMCG कंपनियों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि इनका प्रोडक्शन काफी हद तक पाम ऑयल पर निर्भर करता है। कच्चे माल की बढ़ती लागत से इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बन सकता है, जिससे उनकी मुनाफे की स्थिति प्रभावित हो सकती है। पाम ऑयल का इस्तेमाल सिर्फ खाने के तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दैनिक उपयोग के कई उत्पादों का अहम हिस्सा है। ऐसे में इसकी कीमतों में किसी भी तरह का उतार-चढ़ाव सीधे आम उपभोक्ता की जेब पर असर डालता है। फिलहाल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और रणनीति के तहत धीरे-धीरे बदलाव करने की योजना बना सकती हैं ताकि अचानक कीमत बढ़ाने से बचा जा सके। लेकिन अगर पाम ऑयल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर बाजार में साफ तौर पर दिखाई दे सकता है।
OnePlus Nord CE6 सीरीज लॉन्च: 8000mAh बैटरी, 144Hz डिस्प्ले और AI फीचर्स के साथ मचा धमाल, 2 साल बाद लौटा Lite मॉडल

नई दिल्ली। वनप्लस ने भारतीय बाजार में अपनी नई OnePlus Nord CE6 सीरीज लॉन्च कर दी है। कंपनी ने इस सीरीज के तहत दो नए स्मार्टफोन OnePlus Nord CE6 और OnePlus Nord CE6 Lite पेश किए हैं। खास बात यह है कि करीब दो साल बाद कंपनी ने ‘Lite’ मॉडल की वापसी कराई है, जिसे मिड-रेंज यूजर्स को ध्यान में रखकर उतारा गया है। नई सीरीज में बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले, AI फीचर्स और फ्लैगशिप लेवल गेमिंग एक्सपीरियंस देने का दावा किया गया है। वनप्लस नॉर्ड CE6 की सेल 8 मई 2026 से शुरू होगी, जबकि Nord CE6 Lite को 12 मई से खरीदा जा सकेगा। दोनों स्मार्टफोन Amazon, OnePlus की ऑफिशियल वेबसाइट और ऑफलाइन स्टोर्स पर उपलब्ध होंगे। OnePlus Nord CE6: दमदार बैटरी और फ्लैगशिप गेमिंग का दावावनप्लस नॉर्ड CE6 में Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर दिया गया है। कंपनी का कहना है कि यह फोन हाई-परफॉर्मेंस गेमिंग के लिए तैयार किया गया है। इसमें OnePlus 15 सीरीज वाला Dedicated Touch Reflex Chip भी दिया गया है, जिससे गेमिंग के दौरान टच रिस्पॉन्स बेहतर मिलेगा। फोन में 6.78 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है। इसके साथ Aqua Touch 2.0 टेक्नोलॉजी भी मिलती है, जिससे गीले हाथों से भी स्क्रीन आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है। इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 8000mAh की विशाल बैटरी है। कंपनी का दावा है कि यह एक बार चार्ज करने पर करीब ढाई दिन तक चल सकती है। फोन में 80W SUPERVOOC फास्ट चार्जिंग और 27W रिवर्स चार्जिंग सपोर्ट भी दिया गया है, यानी यह दूसरे डिवाइसेज को पावर बैंक की तरह चार्ज कर सकता है। फोटोग्राफी के लिए इसमें OIS सपोर्ट वाला 50MP का प्राइमरी कैमरा और 32MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। फोन को IP66, IP68, IP69 और IP69K जैसी हाई-लेवल प्रोटेक्शन रेटिंग्स मिली हैं। साथ ही MIL-STD-810H मिलिट्री ग्रेड सर्टिफिकेशन भी दिया गया है। OnePlus Nord CE6 Lite: 20 हजार की रेंज में AI फीचर्सकरीब दो साल बाद कंपनी ने Nord CE6 Lite को बाजार में उतारा है। यह स्मार्टफोन MediaTek Dimensity 7400 Apex चिपसेट के साथ आता है और 144FPS गेमिंग सपोर्ट करने का दावा करता है। फोन में 6.72 इंच का FHD+ 144Hz Sunlight Display दिया गया है। इसमें 7000mAh बैटरी और 45W SUPERVOOC चार्जिंग सपोर्ट मिलता है। बेहतर कूलिंग के लिए बड़ा वेपर चेंबर भी दिया गया है। यह फोन गूगल जेमिनी आधारित AI फीचर्स के साथ आता है, जो इस प्राइस रेंज में इसे खास बनाते हैं। कैमरा सेटअप की बात करें तो इसमें 50MP का मेन कैमरा और 2MP डेप्थ सेंसर दिया गया है। फोन 4K वीडियो रिकॉर्डिंग को भी सपोर्ट करता है। कीमत और ऑफर्सवनप्लस नॉर्ड CE6 के 8GB+128GB वेरिएंट की कीमत 29,999 रुपये रखी गई है, जबकि 8GB+256GB मॉडल 32,999 रुपये में मिलेगा। बैंक डिस्काउंट के बाद इसकी शुरुआती कीमत 27,999 रुपये हो जाएगी। वहीं वनप्लस नॉर्ड CE6 Lite की शुरुआती कीमत 20,999 रुपये है। बैंक ऑफर के बाद इसे 18,999 रुपये में खरीदा जा सकेगा।दोनों स्मार्टफोन OxygenOS 16 पर चलते हैं और कंपनी ने इनमें 6 साल तक सॉफ्टवेयर अपडेट देने का वादा किया है।
JioCarSync लॉन्च: अब बिना तार के चलेगा CarPlay और Android Auto, जियो लाया सस्ता वायरलेस एडॉप्टर

नई दिल्ली। रिलायंस जियो की IoT कंपनी जियोथिंग्स ने भारतीय बाजार में नया JioCarSync 2-in-1 वायरलेस एडॉप्टर लॉन्च कर दिया है। यह डिवाइस उन कार यूजर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो हर बार फोन को USB केबल से जोड़ने की परेशानी से जूझते हैं। अब कार में Apple CarPlay और Android Auto को बिना तार के इस्तेमाल किया जा सकेगा। कंपनी के मुताबिक JioCarSync कार के मौजूदा वायर्ड CarPlay और Android Auto सिस्टम को वायरलेस में बदल देता है। यानी यूजर अब बिना केबल लगाए सीधे अपने स्मार्टफोन को कार से कनेक्ट कर पाएंगे। यह डिवाइस खासतौर पर उन कारों के लिए तैयार किया गया है, जिनमें पहले से फैक्ट्री फिटेड Wired CarPlay या Android Auto मौजूद है। जियो का दावा है कि यह एडॉप्टर करीब 5 सेकंड में ऑटो-कनेक्ट हो जाता है। इसमें Bluetooth 5.3 और 5GHz Wi-Fi सपोर्ट दिया गया है, जिससे नेविगेशन, कॉलिंग और म्यूजिक स्ट्रीमिंग के दौरान तेज और स्थिर कनेक्टिविटी मिलती है। डिवाइस कार के स्टीयरिंग कंट्रोल, टचस्क्रीन और इनबिल्ट माइक्रोफोन को भी सपोर्ट करता है। JioCarSync का डिजाइन काफी कॉम्पैक्ट और हल्का रखा गया है। इसका वजन करीब 20 ग्राम है और इसमें एल्यूमिनियम यूनिबॉडी डिजाइन दिया गया है। कंपनी ने इसे Plug-and-Play सिस्टम के साथ पेश किया है, जिससे इंस्टॉलेशन बेहद आसान हो जाता है। यह डिवाइस iOS 12 या उससे ऊपर वाले iPhone और Android 11 या उससे ऊपर वाले स्मार्टफोन्स को सपोर्ट करता है। साथ ही USB Type-C पोर्ट वाली कारों के लिए बॉक्स में Type-C डॉन्गल भी दिया गया है। कीमत की बात करें तो JioCarSync की कीमत फिलहाल करीब 2500 रुपये रखी गई है। कंपनी इस पर एक साल की वारंटी भी दे रही है। माना जा रहा है कि यह डिवाइस पुरानी कारों को भी वायरलेस स्मार्ट कनेक्टिविटी का नया अनुभव देने वाला बड़ा अपग्रेड साबित हो सकता है।
एक पासवर्ड से चलेगा देशभर का Wi-Fi! सरकार ला रही नया सिस्टम, हर हॉटस्पॉट पर OTP की छुट्टी

नई दिल्ली। देशभर में पब्लिक Wi-Fi इस्तेमाल करने वालों के लिए जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। केंद्र सरकार ऐसा नया सिस्टम तैयार कर रही है, जिसमें यूजर्स को हर बार अलग-अलग हॉटस्पॉट पर OTP डालकर लॉगिन नहीं करना पड़ेगा। एक बार लॉगिन करने के बाद यूजर देशभर के करीब 4 लाख पब्लिक Wi-Fi हॉटस्पॉट्स से आसानी से इंटरनेट चला सकेंगे। सरकार का मकसद इंटरनेट एक्सेस को आसान, तेज और ज्यादा सुरक्षित बनाना है। यह नई तैयारी PM-WANI योजना के सीमित असर के बाद की जा रही है। सरकार और TRAI अब ऐसा मॉडल लाने पर काम कर रहे हैं, जो आम लोगों के लिए सुविधाजनक होने के साथ ऑपरेटर्स के लिए भी फायदेमंद साबित हो। इसके लिए टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने कंसल्टेशन पेपर जारी कर लोगों से सुझाव मांगे हैं। नई व्यवस्था में सुरक्षा पर भी खास फोकस रहेगा। इसके तहत WPA3 जैसे एडवांस सिक्योरिटी स्टैंडर्ड लागू किए जाएंगे, जिससे पब्लिक नेटवर्क पर UPI और डिजिटल पेमेंट ज्यादा सुरक्षित हो सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे साइबर फ्रॉड और डेटा चोरी के मामलों में भी कमी आएगी। सरकार गांवों के लिए कम लागत वाला कम्यूनिटी Wi-Fi मॉडल भी तैयार कर रही है, ताकि ग्रामीण इलाकों में सस्ता और बेहतर इंटरनेट उपलब्ध कराया जा सके। अभी भारत में सिर्फ करीब 2% लोग पब्लिक Wi-Fi का इस्तेमाल करते हैं, जबकि कई विकसित देशों में यह आंकड़ा 50% से 80% तक है। विशेषज्ञों के मुताबिक नया Wi-Fi फ्रेमवर्क मोबाइल डेटा नेटवर्क पर बढ़ते दबाव को कम करेगा और वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड सर्विस, AI आधारित सेवाओं व ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देगा। सरकार को उम्मीद है कि सस्ते और आसान इंटरनेट से डिजिटल इंडिया मिशन को नई मजबूती मिलेगी।
बंगाल हत्या कांड पर गरमाई सियासत, AAP ने अमित शाह से पूछा—कहां गई केंद्रीय सुरक्षा व्यवस्था?

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है। इस घटना को लेकर आम आदमी पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और केंद्र सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने इस हत्या की निंदा करते हुए इसे राज्य की कानून व्यवस्था और केंद्रीय सुरक्षा तंत्र की बड़ी विफलता बताया है। AAP की ओर से कहा गया है कि जब राज्य में पहले से ही भारी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, तो इसके बावजूद इस तरह की हत्या होना कई सवाल खड़े करता है। पार्टी ने पूछा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में तैनात सुरक्षा बलों के बावजूद यह गोलीबारी कैसे हुई और जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी। इस मामले को लेकर AAP प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला करते हुए सवाल उठाया है कि क्या गृह मंत्री इस घटना की जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी बड़े राजनीतिक नेता के करीबी को ही सुरक्षा नहीं मिल पा रही है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा। पार्टी ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए देश की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई है। यह घटना उस समय हुई जब चंद्रनाथ रथ अपनी कार से यात्रा कर रहे थे और अज्ञात हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। गोलीबारी में उनकी मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। पुलिस ने इसे सुनियोजित हमला मानते हुए जांच शुरू कर दी है और कई एंगल से मामले की पड़ताल की जा रही है। हत्या के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अलग-अलग राजनीतिक दल इस घटना को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। कुछ इसे कानून व्यवस्था की विफलता बता रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक साजिश का हिस्सा मान रहे हैं। इस बीच इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार जांच में जुटी है। AAP ने अपने बयान में यह भी कहा है कि अगर देश में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती, तो इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं। पार्टी ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल पुलिस और प्रशासन इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह घटना अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है।
भारतीय मूल के रणनीतिक विशेषज्ञ एशले जे. टेलिस को अमेरिकी अदालत से बड़ी राहत, जासूसी कानून के तहत मामला खारिज

नई दिल्ली। अमेरिकी अदालत ने भारतीय मूल के प्रसिद्ध रणनीतिक विशेषज्ञ एशले जे. टेलिस के खिलाफ दर्ज जासूसी कानून से जुड़े मामले को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया है। यह फैसला अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीय दस्तावेजों से जुड़े मामलों में चल रही सख्ती के बीच आया है। अदालत का अहम फैसलावर्जीनिया स्थित अमेरिकी संघीय अदालत के जज माइकल एस. नाचमैनॉफ ने 16 अप्रैल को दिए आदेश में टेलिस के खिलाफ मामला खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने गलत कानूनी प्रावधान के तहत आरोप लगाए थे, इसलिए मामला आगे नहीं चल सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह खारिजी “बिना पूर्वाग्रह” (without prejudice) की गई है, यानी कानूनी प्रक्रिया के आधार पर भविष्य में अलग धारा के तहत मामला फिर से दायर किया जा सकता है। क्या था पूरा मामला?एशले जे. टेलिस अमेरिका की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति के प्रमुख विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन पर आरोप था कि उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग और रक्षा तंत्र से जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज अपने निजी आवास में रखे थे। अभियोजन पक्ष का दावा था कि टेलिस के पास लगभग 11 संवेदनशील फाइलें थीं, जिनमें हजारों पन्नों की जानकारी शामिल थी। इनमें से कुछ दस्तावेजों को टॉप सीक्रेट श्रेणी में रखा गया था, और कुछ चीन की सैन्य व परमाणु क्षमताओं से संबंधित बताए गए थे। बचाव पक्ष की दलीलटेलिस की कानूनी टीम ने अदालत में कहा कि सरकार ने जासूसी अधिनियम (Espionage Act) की गलत धारा 793(e) के तहत मामला दर्ज किया। वकीलों का तर्क था कि यह धारा उन मामलों में लागू होती है जहां दस्तावेज अवैध रूप से रखे गए हों, जबकि टेलिस के पास उच्च स्तरीय सुरक्षा मंजूरी (security clearance) थी और उन्हें यह दस्तावेज आधिकारिक रूप से सौंपे गए थे। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सरकार ने यह साबित नहीं किया कि टेलिस ने दस्तावेज चोरी किए या अनधिकृत तरीके से हासिल किए, बल्कि वे उनके आधिकारिक कार्यक्षेत्र का हिस्सा थे। सरकार की दलील और चिंताअमेरिकी अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि टेलिस के पास अत्यंत संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेजों तक पहुंच थी और उन्होंने इन्हें अपने निजी घर में रखा, जो सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है। सरकार ने यह भी कहा था कि टेलिस के पास हजारों पन्नों की गोपनीय जानकारी थी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता था। इसी आधार पर उनकी जमानत का भी विरोध किया गया था।अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने गलत कानूनी आधार चुना, इसलिए मौजूदा आरोप टिक नहीं पाए। इसके बाद अदालत ने मामला खारिज कर दिया और टेलिस ने अपनी जमानत राशि वापस करने की मांग भी रखी, जिस पर सरकार ने आपत्ति नहीं जताई। क्यों अहम है यह मामला?यह मामला अमेरिका में गोपनीय दस्तावेजों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बढ़ते विवादों की पृष्ठभूमि में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। हाल के वर्षों में अमेरिका में कई पूर्व और वर्तमान अधिकारियों पर संवेदनशील दस्तावेजों के गलत उपयोग के आरोप लगे हैं।एशले जे. टेलिस लंबे समय से अमेरिकी सरकार के रणनीतिक सलाहकार रहे हैं और इंडो-पैसिफिक नीति व भारत-अमेरिका संबंधों पर उनकी विशेषज्ञता को महत्वपूर्ण माना जाता है।