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ASHOKNAGAR CRIMES: नाबालिग बेटियों के लापता होने के मामलों, दो आरोपी गिरफ्तार

ASHOKNAGAR CRIMES

HIGHLIGHTS: पिपरई पुलिस ने दो नाबालिग बालिकाओं को किया बरामद दोनों मामलों में आरोपी गिरफ्तार तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर से मिली मदद एक बालिका विदिशा से हुई दस्तयाब पुलिस टीम की त्वरित कार्रवाई से मिली सफलता   ASHOKNAGAR CRIMES: मध्यप्रदेश। अशोकनगर जिले की पिपरई थाना पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में लापता नाबालिग बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब कर लिया है। बता दें कि पुलिस ने दोनों मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया है। लू और तेज धूप से बचने का देसी तरीका, सत्तू शरबत देगा शरीर को तुरंत ठंडक और ताकत विदिशा से बरामद हुई पहली नाबालिग पहला मामला 1 फरवरी का है, जब एक महिला ने अपनी 17 साल की बेटी के अपहरण की शिकायत पिपरई थाने में दर्ज कराई थी। महिला ने बताया था कि कोई अज्ञात व्यक्ति उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया है। थाना प्रभारी निरीक्षक ओमप्रकाश मिश्रा के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने विदिशा जिले के गंजबासौदा स्थित बंजारी माता, आजाद नगर क्षेत्र से बालिका को सकुशल बरामद कर लिया। मामले में आरोपी राम सिंह सहरिया को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। MORENA ILLEGAL MINING ACTION: चंबल की रेत पर सख्ती, मुरैना में 27 एम-सेण्ड खदानों को मिली मंजूरी दूसरे मामले में भी पुलिस को मिली सफलता दूसरा मामला 1 मई का है, जिसमें एक फरियादी ने अपनी 17 वर्षीय बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने लगातार तलाश और तकनीकी मदद से बालिका को सुरक्षित बरामद कर लिया। इस मामले में आरोपी दीपक अहिरवार (24), निवासी ग्राम सोनाखेड़ी, थाना मुंगावली को गिरफ्तार किया गया। GWALIOR HIGH COURT: सिर्फ बरी होना काफी नहीं; हाईकोर्ट बोला- पुलिस भर्ती में चरित्र सबसे अहम पुलिस टीम की अहम भूमिका इन दोनों मामलों में पिपरई थाना पुलिस की सक्रियता अहम रही। निरीक्षक ओमप्रकाश मिश्रा, उपनिरीक्षक मंदाकिनी पटेल और अन्य पुलिसकर्मियों ने लगातार कार्रवाई कर दोनों बालिकाओं को सुरक्षित वापस लाने में सफलता हासिल की।

Rampur Segregation Shed Grabbed: गांव के सेग्रीगेशन सेंटर पर दबंगों ने किया कब्जा

Rampur Segregation Shed Grabbed

HIGHLIGHTS: स्वच्छता मिशन के शेड पर दबंगों का कब्जा तीन लाख की लागत से बना था सेग्रीगेशन सेंटर शेड में रखे गोबर के कंडे और भूसा ग्रामीणों ने CM हेल्पलाइन पर की शिकायत प्रशासन ने जांच टीम बनाई   Rampur Segregation Shed Grabbed: मध्यप्रदेश। मुरैना जिले के रामपुर क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत रुनघान खालसा के गांव सिमरौदा अहीर में स्वच्छता मिशन के तहत बनाया गया सेग्रीगेशन शेड अब ग्रामीणों के बजाय दबंगों के कब्जे में है। शासन ने करीब तीन लाख रुपए की लागत से यह शेड गांव के कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था के लिए बनवाया था, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने इसे निजी उपयोग में ले लिया। MORENA ILLEGAL MINING ACTION: चंबल की रेत पर सख्ती, मुरैना में 27 एम-सेण्ड खदानों को मिली मंजूरी कुटी मशीन, भूसा और कंडों से भरा शेड ग्रामीणों का आरोप है कि रामदयाल कुशवाह, मुकेश कुशवाह और राजेंद्र कुशवाह ने शेड पर कब्जा कर वहां कुटी काटने की मशीन, गोबर के कंडे और भूसा भर दिया है। इतना ही नहीं, शेड के बाहर बाइक खड़ी कर इसे निजी पार्किंग की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे गांव के लोगों को कचरा डालने और स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने में परेशानी हो रही है। लू और तेज धूप से बचने का देसी तरीका, सत्तू शरबत देगा शरीर को तुरंत ठंडक और ताकत शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई ग्रामीण हिमांशु कुशवाह के मुताबिक गांव के लोगों ने पंचनामा बनाकर कई बार स्थानीय अधिकारियों को शिकायत दी। इसके अलावा सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि शेड कब्जा मुक्त नहीं होने से गांव की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो रही है। Apple iPhone 18 Pro में मिलेगा बड़ा बदलाव! नई बैटरी, प्रीमियम डिजाइन और दमदार AI फीचर्स के साथ होगा लॉन्च प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश मामले में एसडीएम मेघा तिवारी ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायत मिली है और जांच टीम गठित कर दी गई है। टीम मौके पर जाकर स्थिति की जांच करेगी। यदि कब्जा पाया जाता है तो शेड खाली कराया जाएगा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी की जाएगी।

लू और तेज धूप से बचने का देसी तरीका, सत्तू शरबत देगा शरीर को तुरंत ठंडक और ताकत

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में जब तेज धूप और लू शरीर को थका देती है, तब शरीर को ठंडक और ऊर्जा देने वाले पेय की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में सत्तू का नमकीन शरबत एक बेहद सरल और प्रभावी देसी विकल्प बनकर सामने आता है। यह न सिर्फ शरीर को तुरंत राहत देता है बल्कि लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखने में भी मदद करता है। सत्तू, जिसे भुने हुए चने से तैयार किया जाता है, भारतीय घरों में एक पारंपरिक और पौष्टिक सामग्री के रूप में जाना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। गर्मियों में इसका सेवन पाचन को बेहतर बनाने के साथ-साथ शरीर की गर्मी को भी संतुलित करता है। यही कारण है कि इसे देसी एनर्जी ड्रिंक भी कहा जाता है। इस शरबत को तैयार करना बेहद आसान है। सबसे पहले सत्तू को ठंडे पानी में अच्छी तरह घोलकर स्मूद मिश्रण बनाया जाता है ताकि कोई गांठ न रहे। इसके बाद इसमें भुना जीरा, काला नमक और साधारण नमक मिलाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है। चाहें तो इसमें नींबू का रस, बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च भी मिलाई जा सकती है, जिससे इसका स्वाद चटपटा और ताजगी भरा हो जाता है। तैयार मिश्रण को कुछ देर ठंडा करने के बाद इसे परोसा जाता है। ऊपर से हरा धनिया डालकर इसका स्वाद और भी बढ़ाया जा सकता है। बर्फ मिलाकर इसे और अधिक ठंडा बनाया जा सकता है, जिससे गर्मी में तुरंत राहत महसूस होती है। सत्तू का नमकीन शरबत न केवल शरीर को ठंडक देता है, बल्कि यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है। इससे अनावश्यक भूख कम लगती है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। यही वजह है कि यह ड्रिंक खासकर गर्मियों में बहुत उपयोगी माना जाता है। देसी और प्राकृतिक होने के कारण यह बाजार के ठंडे पेयों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है। इसे रोजाना की डाइट में शामिल करके गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है और शरीर को तरोताजा रखा जा सकता है।

MORENA ILLEGAL MINING ACTION: चंबल की रेत पर सख्ती, मुरैना में 27 एम-सेण्ड खदानों को मिली मंजूरी

MORENA ILLEGAL SAND MINING

HIGHLIGHTS: मुरैना में 5 रेत भंडारण केंद्र मंजूर 27 एम-सेण्ड खदानों को मिली स्वीकृति चंबल नदी में रेत खनन पर सख्ती सिंध नदी की रेत का होगा भंडारण निर्माण कार्यों में कृत्रिम रेत को बढ़ावा   MORENA ILLEGAL MINING ACTION: मुरैना। चंबल नदी में लगातार हो रहे अवैध रेत खनन को रोकने के लिए मुरैना जिला प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की है। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने जिले में 5 रेत भंडारण केंद्र और 27 एम-सेण्ड खदानों को मंजूरी दे दी है। प्रशासन का कहना है कि इससे लोगों, सरकारी विभागों और निर्माण एजेंसियों को आसानी से रेत और उसके विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे। कमजोर और सूखे नाखूनों की समस्या: जानिए कैसे वापस पा सकते हैं मजबूत और चमकदार नाखून सिंध नदी की रेत का होगा उपयोग प्रशासन के मुताबिक चंबल नदी से रेत निकालना पूरी तरह अवैध है और जिले में कोई दूसरी नदी इतनी रेत उपलब्ध नहीं करा सकती। ऐसे में अब सिंध नदी की रेत का भंडारण कर लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही पत्थर से तैयार होने वाले एम-सेण्ड यानी कृत्रिम रेत को भी निर्माण कार्यों में बढ़ावा दिया जाएगा। साउथ इंडिया की इन हसीन जगहों पर बिताएं गर्मियों की छुट्टी, ठंडा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता कर देगी मंत्रमुग्ध पांच रेत भंडारण केंद्रों को मिली मंजूरी सबलगढ़ के मुरवई, बानमौर के उरहाना, सिकरोदा और बमरौली समेत पांच स्थानों पर रेत भंडारण केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। यहां से आमजन, सरकारी विभाग, निर्माण कंपनियां और ठेकेदार जरूरत के अनुसार रेत खरीद सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे अवैध रेत कारोबार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। साउथ इंडिया की इन हसीन जगहों पर बिताएं गर्मियों की छुट्टी, ठंडा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता कर देगी मंत्रमुग्ध कई गांवों में चलेंगी एम-सेण्ड खदानें जिले में 27 एम-सेण्ड खदानों को भी मंजूरी दी गई है। ये खदानें बिसेठा, रंचोली, अरदोनी, पढ़ावली, उरहाना, बड़वारी, खेरिया चुन्हेटी और मलखानपुरा जैसे गांवों में संचालित होंगी। यहां तैयार होने वाला एम-सेण्ड निर्माण कार्यों में प्राकृतिक रेत के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

गर्मी में घड़े का पानी क्यों है सबसे बेहतर? एक्सपर्ट्स ने बताए सेहत से जुड़े बड़े फायदे

नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच शरीर को हाइड्रेट और संतुलित रखने के लिए सही पानी का चुनाव बेहद जरूरी हो जाता है। आमतौर पर लोग ठंडक पाने के लिए फ्रिज का पानी पीते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी के घड़े यानी मटके का पानी ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी होता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, फ्रिज का बहुत ठंडा पानी गले और पाचन तंत्र पर बुरा असर डाल सकता है। इससे कई बार गले में खराश, सर्दी-जुकाम और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसके विपरीत, मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है। मिट्टी के घड़े में रखा पानी न सिर्फ ठंडक देता है, बल्कि इसमें हल्की प्राकृतिक सुगंध भी होती है, जो इसे और अधिक ताजगी भरा बनाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी पानी में मौजूद अशुद्धियों को अपने अंदर सोख लेती है और कुछ हद तक उसे शुद्ध करने में मदद करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, मटके का पानी पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है और इम्युनिटी को मजबूत करता है। इसके अलावा यह शरीर के पीएच लेवल को संतुलित रखने में भी मदद करता है, जिससे कई मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। आयुर्वेद में भी मिट्टी के घड़े के पानी को बेहद लाभकारी माना गया है। इसे प्राकृतिक और शुद्ध जल का स्रोत माना जाता है, जो शरीर को भीतर से ठंडक और ऊर्जा प्रदान करता है। आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मटके का पानी फ्रिज के पानी की तुलना में अधिक सुरक्षित विकल्प है, खासकर गर्मियों के मौसम में। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मटके का पानी पूरी तरह केमिकल-फ्री होता है और इसमें प्राकृतिक मिनरल्स मौजूद रहते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। यह बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए भी सुरक्षित माना जाता है। गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए मटके का पानी एक सस्ता, प्राकृतिक और प्रभावी उपाय माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि घर में मिट्टी का घड़ा जरूर रखा जाए और नियमित रूप से इसका पानी पिया जाए, ताकि शरीर को प्राकृतिक ठंडक मिलती रहे और स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।

असम-बंगाल चुनाव परिणाम पर कांग्रेस असमंजस में, शर्मनाक हार के बाद नेतृत्व पर उठे सवाल

नई दिल्ली।  हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। केरल को छोड़कर असम और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जिसके बाद अब संगठन के भीतर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। असम और पश्चिम बंगाल में मिली हार के बाद पार्टी ने समीक्षा बैठक बुलाने का निर्णय लिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन हारों की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी। संगठन के भीतर अभी तक किसी भी स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं हो पाई है, जिससे असंतोष और बढ़ता जा रहा है।असम में हार के बाद प्रदेश प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन पार्टी हाईकमान ने अभी तक उस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि हार की विस्तृत समीक्षा के बाद ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में लगातार चुनावी असफलताओं के बावजूद संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारी तय न किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं की गई, तो जमीनी स्तर पर सुधार मुश्किल होगा। इसी संदर्भ में पार्टी के अंदर चल रहे संगठन सृजन कार्यक्रम पर भी चर्चा हो रही है, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2025 में अहमदाबाद अधिवेशन के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य जिला स्तर पर नेतृत्व को मजबूत करना और जवाबदेही तय करना था, लेकिन अब तक इसका प्रभाव सीमित ही दिखाई दिया है।कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पहले भी कहा था कि जिला अध्यक्षों और स्थानीय नेतृत्व को स्थायी पद नहीं माना जाएगा और प्रदर्शन के आधार पर ही उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। हालांकि जमीनी स्तर पर इस व्यवस्था का प्रभाव अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो सका है। इसी बीच, आगामी 2027 के चुनावों को देखते हुए पार्टी पर प्रदर्शन सुधारने का दबाव बढ़ रहा है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संगठन को पुनर्गठित किए बिना चुनावी स्थिति में सुधार संभव नहीं है।वहीं दूसरी ओर, केरल में पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को मिली सफलता के बाद वहां सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के भीतर कई नामों पर चर्चा चल रही है, जिनमें वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल प्रमुख बताए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने अभी अंतिम फैसला हाईकमान पर छोड़ दिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि संगठन में निर्णय प्रक्रिया अब भी केंद्रीकृत बनी हुई है। कुल मिलाकर, असम और बंगाल में हार के बाद कांग्रेस एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां समीक्षा तो शुरू हो चुकी है, लेकिन जवाबदेही तय करने और संगठन में वास्तविक सुधार की दिशा अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है।

Apple iPhone 18 Pro में मिलेगा बड़ा बदलाव! नई बैटरी, प्रीमियम डिजाइन और दमदार AI फीचर्स के साथ होगा लॉन्च

नई दिल्ली। Apple इस साल सितंबर में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max लॉन्च कर सकती है। लीक्स के मुताबिक नए iPhone में बड़ी बैटरी, A20 Pro चिपसेट, बेहतर कैमरा और नया प्रीमियम डिजाइन देखने को मिल सकता है। Apple इस साल सितंबर में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max लॉन्च कर सकती है। लीक्स के मुताबिक नए iPhone में बड़ी बैटरी, A20 Pro चिपसेट, बेहतर कैमरा और नया प्रीमियम डिजाइन देखने को मिल सकता है। iPhone 18 Pro Series: Apple के नए फ्लैगशिप फोन को लेकर बढ़ा उत्साहटेक दुनिया की सबसे चर्चित स्मार्टफोन सीरीज में शामिल Apple iPhone का नया मॉडल लॉन्च होने से पहले ही सुर्खियों में आ गया है। रिपोर्ट्स और लीक्स के मुताबिक, Apple इस साल सितंबर में अपनी नई iPhone 18 Pro Series लॉन्च कर सकती है। इस सीरीज में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max शामिल होंगे। कहा जा रहा है कि इस बार कंपनी डिजाइन, बैटरी, कैमरा और AI फीचर्स के मामले में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। लीक्स के अनुसार Apple इस बार अपने नए प्रो मॉडल्स को प्रीमियम और यूनिक कलर ऑप्शन के साथ पेश कर सकती है। कंपनी फिलहाल लाइट ब्लू, डार्क चेरी, डार्क ग्रे और सिल्वर जैसे रंगों पर काम कर रही है। इनमें डार्क चेरी कलर को सबसे खास माना जा रहा है, जो iPhone को नया और प्रीमियम लुक दे सकता है। परफॉर्मेंस की बात करें तो iPhone 18 Pro मॉडल्स में नया A20 Pro चिपसेट मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रोसेसर 2nm टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा, जिससे फोन की स्पीड, गेमिंग और AI परफॉर्मेंस पहले से ज्यादा बेहतर हो सकती है। माना जा रहा है कि यह Apple के अब तक के सबसे पावरफुल मोबाइल चिप्स में से एक होगा। कैमरा सेक्शन में भी इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लीक्स में दावा किया गया है कि iPhone 18 Pro सीरीज में 48MP ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा। सबसे खास फीचर Variable Aperture हो सकता है, जिसकी मदद से यूजर्स फोटो क्लिक करते समय बेहतर लाइट कंट्रोल कर पाएंगे। इससे खासकर लो-लाइट फोटोग्राफी और प्रोफेशनल शॉट्स की क्वालिटी में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी Dynamic Island का साइज भी छोटा कर सकती है। इससे फोन का फ्रंट डिजाइन ज्यादा क्लीन और प्रीमियम दिखाई देगा। वहीं कैमरा कंट्रोल बटन में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। मौजूदा मॉडल्स में दिए गए टच कंट्रोल फीचर को लेकर मिले यूजर फीडबैक के बाद Apple इसे आसान या पूरी तरह अलग डिजाइन में पेश कर सकती है। बैटरी के मामले में भी iPhone 18 Pro Max बड़ा अपग्रेड साबित हो सकता है। लीक्स के अनुसार इस मॉडल में Apple अब तक की सबसे बड़ी बैटरी दे सकती है। इससे फोन का बैटरी बैकअप और गेमिंग एक्सपीरियंस बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि बड़ी बैटरी के चलते फोन का साइज थोड़ा बड़ा हो सकता है। इसके अलावा Apple अपने नए इन-हाउस C2 मॉडम का इस्तेमाल भी कर सकती है। यह मॉडम बेहतर 5G कनेक्टिविटी और कम पावर कंजम्प्शन के लिए डिजाइन किया गया है। इससे नेटवर्क स्पीड और बैटरी एफिशिएंसी दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक iPhone 18 Pro Series को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन लगातार सामने आ रही लीक्स ने Apple फैंस के बीच उत्साह बढ़ा दिया है। अब सभी की नजर सितंबर में होने वाले Apple लॉन्च इवेंट पर टिकी हुई है।

15 मई के बाद अचानक क्यों तेज हो जाती है गर्मी, वृषभ गोचर और रोहिणी नक्षत्र से जुड़ा है खास कारण

नई दिल्ली। मई महीने के मध्य के बाद उत्तर भारत समेत उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में गर्मी अचानक तेज महसूस होने लगती है। दिन जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, सूरज की तपिश और अधिक तीखी हो जाती है और वातावरण शुष्क होता जाता है। इसी समय को वृषभ संक्रांति से जोड़कर देखा जाता है, जब सूर्य मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करता है। माना जाता है कि इस परिवर्तन के बाद गर्मी अपने अगले और अधिक तीव्र चरण में पहुंच जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश धरती के तापमान और वातावरण पर गहरा प्रभाव डालता है। इस राशि का संबंध स्थिरता और तीव्र ऊर्जा से माना जाता है, और जब सूर्य इसमें प्रवेश करता है तो उसकी उष्मा का प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो जाता है। इसी समय दिन लंबे होने लगते हैं और सूर्य की किरणें धरती पर अधिक सीधी पड़ती हैं, जिससे गर्मी का स्तर तेजी से बढ़ता है। इसके साथ ही रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव भी इस अवधि को और महत्वपूर्ण बनाता है। परंपरागत मान्यताओं में इसे अत्यधिक गर्मी का संकेत माना गया है, जहां सूर्य की किरणें धरती को अधिक तीव्रता से प्रभावित करती हैं। ग्रामीण मान्यताओं में इस समय को ‘नौतपा’ से भी जोड़ा जाता है, जो भीषण गर्मी के चरम समय का संकेत देता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इस समय पृथ्वी का उत्तरी हिस्सा सूर्य की ओर अधिक झुका होता है, जिसके कारण सूर्य की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं। सीधी किरणें जमीन और वातावरण को तेजी से गर्म करती हैं और पहले से जमा गर्मी भी इसमें शामिल हो जाती है। यही कारण है कि मई के मध्य के बाद तापमान में तेजी से वृद्धि देखने को मिलती है। इस अवधि में हवा में नमी कम हो जाती है और वातावरण अधिक शुष्क हो जाता है, जिससे दिन के समय तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है। रात के समय भी गर्मी का असर कम नहीं होता और वातावरण में ठंडक का अभाव महसूस होता है। मौसम विशेषज्ञ इस स्थिति को गर्मी के लगातार जमा होने का प्रभाव मानते हैं, जो धीरे-धीरे चरम पर पहुंच जाता है।

साउथ इंडिया की इन हसीन जगहों पर बिताएं गर्मियों की छुट्टी, ठंडा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता कर देगी मंत्रमुग्ध

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही लोग ऐसी जगहों की तलाश करने लगते हैं जहां तेज धूप और गर्म हवाओं से राहत मिल सके। शहरों की भागदौड़ और बढ़ते तापमान के बीच सुकून भरी छुट्टियां बिताने का सबसे अच्छा विकल्प साउथ इंडिया के हिल स्टेशन और प्राकृतिक डेस्टिनेशन माने जाते हैं। यहां की ठंडी हवा, हरियाली से भरे पहाड़, चाय और कॉफी के बागान तथा शांत वातावरण यात्रियों को एक अलग ही दुनिया का अनुभव कराते हैं। साउथ इंडिया में मुन्नार और वायनाड जैसी जगहें गर्मियों की छुट्टियों के लिए बेहद लोकप्रिय हैं। मुन्नार अपनी खूबसूरत चाय की बगानों की घाटियों और बादलों से ढकी पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। यहां का मौसम इतना सुहावना होता है कि हर सुबह एक नई ताजगी का एहसास कराती है। वहीं वायनाड घने जंगलों, झीलों और एडवेंचर ट्रेकिंग स्पॉट्स के कारण यात्रियों के बीच खास पहचान रखता है। यहां प्रकृति के बीच बिताए गए पल लंबे समय तक याद रहते हैं। कर्नाटक की बात करें तो कूर्ग और चिकमगलूर उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं जो शांति और प्राकृतिक सुंदरता के बीच समय बिताना चाहते हैं। कूर्ग को अक्सर “भारत का स्कॉटलैंड” कहा जाता है, जहां कॉफी के बागान और पहाड़ियों की हरियाली मन को सुकून देती है। हल्की बारिश और ठंडी हवा यहां के वातावरण को और भी आकर्षक बना देती है। दूसरी ओर चिकमगलूर अपने शानदार ट्रेकिंग रूट्स, झरनों और खूबसूरत सूर्यास्त दृश्यों के लिए जाना जाता है, जो हर ट्रैवलर को आकर्षित करता है। अगर कोई पहाड़ों से अलग समुद्र किनारे का अनुभव लेना चाहता है तो केरल की एलेप्पी और वर्कला जैसी जगहें बेहतरीन विकल्प हैं। एलेप्पी अपने हाउसबोट और शांत बैकवॉटर के लिए मशहूर है, जहां पानी के बीच तैरती नावों में यात्रा करना एक अलग ही अनुभव देता है। वहीं वर्कला बीच, योग और आयुर्वेदिक अनुभवों के लिए जाना जाता है। यहां समुद्र की लहरों के साथ बैठकर ठंडी हवा का आनंद लेना यात्रियों को मानसिक सुकून देता है। साउथ इंडिया के ये सभी डेस्टिनेशन गर्मियों में न सिर्फ ठंडा मौसम देते हैं बल्कि प्रकृति के बेहद करीब ले जाते हैं। यहां की हर जगह अपनी अलग पहचान रखती है और हर ट्रिप को यादगार बना देती है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में लोग गर्मियों में इन खूबसूरत स्थानों की ओर रुख करते हैं।

GWALIOR HIGH COURT: सिर्फ बरी होना काफी नहीं; हाईकोर्ट बोला- पुलिस भर्ती में चरित्र सबसे अहम

GWALIOR HIGHCOURT ACTION

HIGHLIGHTS: हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति पर दिया अहम फैसला पुलिस नौकरी के लिए “ससम्मान बरी” होना जरूरी समझौते या गवाह मुकरने पर मिली राहत पर्याप्त नहीं योगेश शर्मा की रिट अपील खारिज चोरी और मारपीट को माना गंभीर नैतिक अपराध   GWALIOR HIGH COURT: मध्यप्रदेश। ग्वालियर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ किसी आपराधिक मामले से बरी हो जाना पुलिस सेवा के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यदि आरोपी को गवाहों के मुकर जाने, सबूतों की कमी या समझौते के आधार पर राहत मिली है, तो उसे ससम्मान दोषमुक्ति नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि पुलिस जैसे अनुशासित विभाग में नियुक्ति के लिए चरित्र और विश्वसनीयता सबसे अहम है। कड़वा खीरा घर लाने से बचना है तो जान लें ये सीक्रेट तरीका, मीठे खीरे की पहचान मिनटों में आरक्षक भर्ती में खारिज हुई याचिकाकर्ता की अपील यह फैसला जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने योगेश शर्मा की रिट अपील खारिज करते हुए दिया। योगेश के पिता पुलिस विभाग में कार्यरत थे और सेवा के दौरान उनका निधन हो गया था। इसके बाद योगेश ने अनुकंपा नियुक्ति के तहत आरक्षक पद के लिए आवेदन किया था। लेकिन चरित्र सत्यापन में उसके खिलाफ चोरी और गंभीर मारपीट समेत तीन आपराधिक मामले सामने आए। पुलिस विभाग ने 11 जुलाई 2017 को आवेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि वह तकनीकी आधार पर बरी हुआ है। कमजोर और सूखे नाखूनों की समस्या: जानिए कैसे वापस पा सकते हैं मजबूत और चमकदार नाखून सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया हवाला खंडपीठ ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर पाता या गवाह बयान बदल देते हैं, तो आरोपी को केवल संदेह का लाभ मिलता है। ऐसी स्थिति में उसे पूरी तरह निर्दोष नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि ससम्मान बरी होने और तकनीकी आधार पर छूटने में बड़ा अंतर है। बलूचिस्तान में अपहरण के नए मामले, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल, PAK सेना पर आरोप पात्रता और उपयुक्तता में अंतर समझाया हाईकोर्ट ने कहा कि किसी पद के लिए पात्र होना और उस पद के लिए उपयुक्त होना दो अलग-अलग बातें हैं। अदालत चयन प्रक्रिया की वैधता की समीक्षा कर सकती है, लेकिन विभाग के निर्णय में दखल नहीं दे सकती कि कौन व्यक्ति पुलिस सेवा के लिए उपयुक्त है। कोर्ट ने चोरी और मारपीट जैसे अपराधों को नैतिक अधमता से जुड़ा गंभीर मामला माना।