‘धुरंधर 3’ की तैयारी के संकेत? मेकर्स ने साल के अंत में बड़े सरप्राइज की दी झलक, बढ़ी अटकलें

नई दिल्ली। बॉलीवुड की चर्चित फिल्म फ्रेंचाइज़ ‘धुरंधर’ एक बार फिर सुर्खियों में है। इसके पहले दो हिस्सों की जबरदस्त सफलता के बाद अब तीसरे पार्ट को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर ‘धुरंधर 3’ की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मेकर्स की हालिया टिप्पणी ने फैंस की उम्मीदों को जरूर बढ़ा दिया है। फिल्म की प्रोड्यूसर ज्योति देशपांडे ने एक इंटरव्यू में संकेत दिया है कि इस साल के अंत तक दर्शकों के लिए एक बड़ा सरप्राइज तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “धुरंधर पर अभी हमारा काम खत्म नहीं हुआ है, साल के अंत में कुछ खास आने वाला है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अटकलें तेज हो गई हैं कि यह सरप्राइज कहीं ‘धुरंधर 3’ की आधिकारिक घोषणा तो नहीं है। फैंस लंबे समय से इस फ्रेंचाइज़ के अगले भाग का इंतजार कर रहे हैं, खासकर तब जब इसके पिछले दोनों हिस्सों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया था। फिल्म के दोनों भागों में मुख्य भूमिका निभाने वाले रणवीर सिंह के किरदार को दर्शकों से काफी सराहना मिली है, और यही वजह है कि तीसरे भाग को लेकर उत्साह और भी बढ़ गया है। फिलहाल फिल्म के निर्देशक आदित्य धर की ओर से भी तीसरे भाग को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पहले यह माना जा रहा था कि फ्रेंचाइज़ का विस्तार पूरी तरह से उनकी योजना पर निर्भर करेगा।‘धुरंधर’ के पहले दो भागों ने बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता दर्ज की थी। पहला भाग 2025 में रिलीज हुआ था और इसने भारत सहित दुनियाभर में शानदार कमाई की थी। वहीं दूसरा भाग और भी बड़े पैमाने पर सफल रहा और इसे पैन इंडिया हिट माना गया। इसी सफलता के चलते फैंस लगातार तीसरे भाग की मांग कर रहे हैं। हालांकि मेकर्स ने अभी इसे लेकर कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं की है, लेकिन “सरप्राइज” शब्द ने चर्चा को और तेज कर दिया है। फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि यदि ‘धुरंधर 3’ बनती है तो यह भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फ्रेंचाइज़ में से एक बन सकती है। बड़े बजट, स्टार कास्ट और विजुअल स्पेक्ट्रम के कारण इस फ्रेंचाइज़ ने पहले ही एक अलग पहचान बना ली है। फिलहाल सभी की नजरें साल के अंत में आने वाले उस “सरप्राइज” पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि ‘धुरंधर’ का तीसरा अध्याय वाकई शुरू होने वाला है या नहीं।
कड़वा खीरा घर लाने से बचना है तो जान लें ये सीक्रेट तरीका, मीठे खीरे की पहचान मिनटों में

नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में खीरा एक ऐसी सब्जी है जो हर घर में लगभग रोज इस्तेमाल होती है। यह न सिर्फ शरीर को ठंडक पहुंचाता है बल्कि पानी की कमी को भी पूरा करने में मदद करता है। लेकिन कई बार लोगों को बाजार से खीरा खरीदते समय यह समस्या हो जाती है कि वह कड़वा निकल आता है, जिससे पूरा स्वाद खराब हो जाता है। ऐसे में सही खीरे की पहचान करना बहुत जरूरी हो जाता है ताकि घर लाकर किसी तरह की परेशानी न हो। खीरे की पहचान करने का पहला तरीका उसके रंग और छिलके से जुड़ा होता है। अगर खीरे का रंग हल्का हरा हो और उसका छिलका समान रूप से साफ दिखे तो ऐसे खीरे अक्सर मीठे और ताजे होते हैं। वहीं जिन खीरों का रंग ज्यादा गहरा या बीच-बीच में पीला दिखाई देता है, उनमें कड़वाहट आने की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा खुरदुरे या दानेदार छिलके वाले खीरे भी स्वाद में बेहतर माने जाते हैं। खीरे का आकार भी उसकी गुणवत्ता को दर्शाता है। बहुत बड़े या असामान्य रूप से छोटे खीरे अक्सर स्वाद में अच्छे नहीं होते। मध्यम आकार के सीधे और संतुलित खीरे आमतौर पर ज्यादा ताजे और मीठे होते हैं। टेढ़े-मेढ़े या असमान आकार वाले खीरों में कड़वाहट की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए इन्हें चुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए। खीरे की कठोरता भी उसकी ताजगी का एक महत्वपूर्ण संकेत होती है। ताजा खीरा हल्का सख्त और मजबूत महसूस होता है। अगर खीरा बहुत ज्यादा नरम या दबाने पर पिचका हुआ लगे तो वह पुराना हो सकता है और उसका स्वाद खराब होने की संभावना रहती है। इसलिए हमेशा ऐसे खीरे चुनने चाहिए जो संतुलित रूप से कड़े हों। खीरे के सिरों पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। अगर खीरे का डंठल वाला हिस्सा ज्यादा सूखा हुआ या गहरे रंग का दिखे तो उसमें कड़वाहट आने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं ताजा और हल्के रंग वाले सिरे वाले खीरे आमतौर पर ज्यादा मीठे और खाने में बेहतर होते हैं। अगर कभी गलती से कड़वा खीरा घर आ भी जाए तो उसे फेंकने की जरूरत नहीं होती। उसका छिलका उतारकर और सिरों को काटकर कड़वाहट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कई लोग पारंपरिक तरीके से खीरे के सिरे को हल्का रगड़कर भी उसकी कड़वाहट कम करने की कोशिश करते हैं, जिससे उसका स्वाद बेहतर हो जाता है। इन आसान तरीकों को अपनाकर कोई भी व्यक्ति बाजार से अच्छे और स्वादिष्ट खीरे की पहचान आसानी से कर सकता है और गर्मियों में अपने भोजन को और भी हेल्दी और ताजा बना सकता है।
कमजोर और सूखे नाखूनों की समस्या: जानिए कैसे वापस पा सकते हैं मजबूत और चमकदार नाखून

नई दिल्ली। नाखून हमारी पर्सनैलिटी का एक अहम हिस्सा होते हैं। साफ, मजबूत और चमकदार नाखून जहां हाथों की खूबसूरती बढ़ाते हैं, वहीं टूटते और सूखे नाखून अक्सर स्वास्थ्य से जुड़ी कमियों की ओर इशारा करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नाखून मुख्य रूप से केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं, और जब शरीर में पोषण या नमी की कमी होती है, तो ये कमजोर होने लगते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार साबुन, डिटर्जेंट और केमिकल के संपर्क में आने से नाखूनों की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है। इससे वे सूखे, भुरभुरे और जल्दी टूटने लगते हैं। इसके अलावा पानी की कमी भी नाखूनों की सेहत पर सीधा असर डालती है। नाखूनों को मजबूत बनाने के आसान उपायविशेषज्ञों के अनुसार, नाखूनों की सही देखभाल से उनकी सेहत को दोबारा बेहतर किया जा सकता है। सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेट रखना। पर्याप्त पानी पीने से नाखूनों की बनावट बेहतर होती है और वे मजबूत बने रहते हैं। हाथ धोने के बाद मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना भी बेहद जरूरी है। इससे नाखूनों के आसपास की त्वचा में नमी बनी रहती है और सूखापन कम होता है। रात के समय नाखूनों की देखभाल और भी ज्यादा असरदार मानी जाती है। सोने से पहले नारियल तेल, पेट्रोलियम जेली या मॉइस्चराइजिंग क्रीम लगाने से नाखूनों में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे टूटने की समस्या कम होती है। विटामिन और तेलों का महत्वविशेषज्ञ विटामिन ई को नाखूनों के लिए बेहद फायदेमंद मानते हैं। यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो नाखूनों को अंदर से मजबूत बनाता है। विटामिन ई ऑयल से हल्की मालिश करने पर ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और नाखूनों को पर्याप्त पोषण मिलता है। जैतून का तेल भी नाखूनों की देखभाल में कारगर माना जाता है। इसमें मौजूद हेल्दी फैट्स नाखूनों की सूखी परत को मुलायम बनाते हैं और उनकी टूटने की संभावना को कम करते हैं। सही डाइट भी है जरूरीडॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि अंदरूनी पोषण भी बेहद जरूरी है। प्रोटीन, बायोटिन, आयरन, जिंक और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व नाखूनों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। हरी सब्जियां, अंडे, दालें, मेवे और फल नाखूनों की सेहत को बेहतर बनाते हैं। साथ ही, जरूरत से ज्यादा नेल पॉलिश रिमूवर या नकली नाखूनों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये नाखूनों को कमजोर कर सकते हैं।
बलूचिस्तान में अपहरण के नए मामले, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल, PAK सेना पर आरोप

इस्लामाबाद। बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में पांच और नागरिकों का अपहरण कर लिया है। इन घटनाओं ने प्रांत में पहले से जारी अस्थिरता और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। मानवाधिकार संगठन ‘पांक’, जो बलूच नेशनल मूवमेंट ह्यूमन राइट्स डिपार्टमेंट (PANK) से जुड़ा है, ने बताया कि दो शिक्षकों 45 वर्षीय अब्दुल हमीद और 36 वर्षीय नासिर अली को 5 मई को पंजगुर जिले के पारूम क्षेत्र से फ्रंटियर कोर के कर्मियों द्वारा उठाया गया। संगठन ने कहा कि शिक्षकों को निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है और यह क्षेत्र में मनमानी हिरासत और मानवाधिकार उल्लंघनों के बढ़ते पैटर्न को दर्शाता है। इसके अलावा 27 वर्षीय अल्ताफ हुसैन बलूच को 2 मई को हब चौकी से आतंकवाद निरोधक विभाग (CTD) के कर्मियों द्वारा कथित रूप से उठाया गया। उसी दिन एक और घटना में 40 वर्षीय जान खान और उनके 20 वर्षीय बेटे अब्दुल सत्तार को क्वेटा में उनके घर से कथित रूप से अगवा किया गया। मानवाधिकार संगठन ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं और इससे परिवार लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता में रहते हैं। संगठन ने पाकिस्तान सरकार से सभी लापता व्यक्तियों को तुरंत अदालत में पेश करने या रिहा करने की मांग की है।मानवाधिकार संगठन ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं और इससे परिवार लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता में रहते हैं। संगठन ने पाकिस्तान सरकार से सभी लापता व्यक्तियों को तुरंत अदालत में पेश करने या रिहा करने की मांग की है। क्वेटा में विरोध प्रदर्शन जारीइधर, प्रांतीय राजधानी क्वेटा में बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) के नेतृत्व में प्रदर्शन लगातार जारी है। छात्र बोलन मेडिकल कॉलेज के बाहर धरना दे रहे हैं, जो अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी खदीजा बलूच की रिहाई की मांग कर रहे हैं, जिन्हें 21 अप्रैल को बीएमसी महिला छात्रावास से सुरक्षा बलों द्वारा उठाए जाने का आरोप है। बीवाईसी के अनुसार, प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रदर्शनकारियों और परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बलूचिस्तान में लंबे समय से जबरन गायब किए जाने और कथित गैर-न्यायिक हत्याओं के मामलों को लेकर तनाव बना हुआ है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह स्थिति क्षेत्र में सामाजिक ताने-बाने को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।
एमपी में शादी के दौरान रेबीज वैक्सीनेशन कैंप, बारातियों को बुलाकर लगाया गया इंजेक्शन, उठे सवाल

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शादी समारोह के दौरान शामिल हुए बारातियों को बाद में घर-घर बुलाकर रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए। यह पूरा मामला भैंसादंड गांव का है, जिसने पूरे इलाके में चिंता और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है। जानकारी के अनुसार, शादी समारोह में मेहमानों को जो मट्ठा (छाछ) परोसा गया था, वह एक ऐसी गाय के दूध से बनाया गया था, जिसमें रेबीज जैसे गंभीर लक्षण पाए गए थे। बाद में जांच में सामने आया कि संबंधित गाय को कुछ दिन पहले एक कुत्ते ने काट लिया था और उसी के बाद उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। मंगलवार को जब गाय की हालत अचानक गंभीर हुई, तब गांव में यह जानकारी फैली कि उसी दूध से बने मट्ठे का उपयोग शादी में किया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग तुरंत हरकत में आया और संभावित संक्रमण के खतरे को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने उप स्वास्थ्य केंद्र भैंसादंड में तत्काल कैंप लगाकर टीकाकरण अभियान शुरू किया। अब तक करीब 200 से 250 लोगों को रेबीज के एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। विभाग की टीम लगातार लोगों की पहचान कर उन्हें बुला रही है और टीकाकरण सुनिश्चित कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम पूरी तरह सावधानी के तौर पर उठाया गया है, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण या जोखिम से बचा जा सके। क्योंकि रेबीज एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो संक्रमित जानवरों के संपर्क या उनके दूध/लार से फैलने की आशंका में भी जोखिम पैदा कर सकती है। गांव में स्वास्थ्य टीम की तैनाती की गई है और सभी बारातियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। जिन लोगों ने शादी में भोजन और पेय पदार्थों का सेवन किया था, उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शादी समारोह में बड़ी संख्या में मेहमान शामिल हुए थे, इसलिए अब सभी को ट्रैक कर टीकाकरण किया जा रहा है। अचानक हुई इस कार्रवाई से लोग पहले तो घबरा गए, लेकिन बाद में स्वास्थ्य विभाग की समझाइश के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है कि क्या वास्तव में दूध या मट्ठे से किसी प्रकार का संक्रमण फैलने का खतरा था या यह पूरी तरह एहतियाती कदम है। यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता की आवश्यकता को भी उजागर करती है, ताकि भविष्य में ऐसे हालात से बचा जा सके।
गर्मी में कूलर की गर्म हवा से परेशान? ये 2 आसान उपाय बना सकते हैं कमरे को AC जैसा ठंडा

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में जब तापमान लगातार बढ़ता है तो घरों में कूलर ही सबसे बड़ा सहारा बनता है। लेकिन कई बार लोगों को यह समस्या परेशान करती है कि कूलर ठंडी हवा देने के बजाय गर्म हवा फेंकने लगता है। ऐसे में लगता है कि अब राहत मिलना मुश्किल है, लेकिन कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से कूलर की कूलिंग को फिर से बेहतर किया जा सकता है और कमरे में ठंडक का असर बढ़ाया जा सकता है। कूलर की हवा को ठंडा बनाने के लिए सबसे सरल तरीका पानी में सेंधा नमक का उपयोग माना जाता है। जब कूलर के टैंक में पानी भरते समय उसमें थोड़ी मात्रा में सेंधा नमक मिलाया जाता है तो पानी जल्दी गर्म नहीं होता और लंबे समय तक ठंडा बना रहता है। इससे कूलर की हवा का असर बेहतर हो जाता है और कमरे में ठंडक महसूस होती है। यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनके घर में लगातार गर्म हवा की समस्या आती रहती है। इसके अलावा फिटकरी का उपयोग भी कूलर की कूलिंग को सुधारने में मदद करता है। जब कूलर के पानी में फिटकरी डाली जाती है तो यह पानी को साफ रखने में मदद करती है और उसमें मौजूद गंदगी और बदबू को कम करती है। साफ और शुद्ध पानी के कारण कूलर की हवा ज्यादा ताजगी भरी और ठंडी महसूस होती है, जिससे कमरे का वातावरण काफी हद तक बेहतर हो जाता है। कूलर की कूलिंग को और बढ़ाने के लिए कुछ अन्य घरेलू उपाय भी अपनाए जा सकते हैं। जैसे टैंक में सामान्य पानी की जगह ठंडा पानी या बर्फ डालने से तुरंत ठंडक महसूस होती है और कमरे का तापमान तेजी से कम होता है। यह तरीका खासकर तब ज्यादा असरदार होता है जब बाहर का तापमान बहुत ज्यादा हो। इसके साथ ही कूलर की घास या कूलिंग पैड की स्थिति भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। अगर यह पुराना या खराब हो जाए तो कूलर की हवा गर्म आने लगती है। इसलिए समय-समय पर इसकी सफाई या बदलाव जरूरी होता है ताकि हवा का फ्लो सही बना रहे और कूलिंग बेहतर मिले। कमरे में कूलर का असर बढ़ाने के लिए वेंटिलेशन का ध्यान रखना भी जरूरी है। अगर कमरे की खिड़कियां और दरवाजे सही तरीके से खुले रहें तो हवा का सही प्रवाह बना रहता है और कूलर की ठंडी हवा पूरे कमरे में फैल जाती है। इससे कमरा जल्दी ठंडा होता है और लंबे समय तक ठंडक बनी रहती है। इसके अलावा कूलर में जरूरत से ज्यादा पानी भरने से बचना चाहिए क्योंकि इससे हवा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। सही मात्रा में पानी और नियमित सफाई कूलर की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाए रखती है और गर्मी में राहत दिलाने में मदद करती है।
मप्र में अब तक 9.09 लाख किसानों से 53.40 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन

भोपाल। मध्य प्रदेश में अभी तक 9 लाख 9 हजार किसानों से 53 लाख 40 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है। तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। यह जानकारी गुरुवार को प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने दी। उन्होंने बताया कि अभी तक 14 लाख 81 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है। मंत्री राजपूत ने बताया कि किसानों को 9525.70 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। उन्होंने बताया कि किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।
बंगाल का नया CM कौन…. आज MLAs संग अमित शाह की बैठक पर सभी की नजरें

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) के नतीजों के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य की कमान किसके हाथों में होगी। भारतीय जनता पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सस्पेंस बरकरार है। इसी गुत्थी को सुलझाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज कोलकाता में नवनिर्वाचित विधायकों के साथ एक हाई-प्रोफाइल बैठक करने वाले हैं। बैठक के बाद जल्द ही राज्य के अगले सीएम के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा। अमित शाह और मोहन चरण माझी को अहम जिम्मेदारीपार्टी आलाकमान ने विधायक दल के नेता के चुनाव की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए वरिष्ठ केंद्रीय नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। पश्चिम बंगाल के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मुख्य पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) की जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सह-पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे। बैठक में कैसे तय होगा विधायक दल का नेता?आज होने वाली इस बैठक में दोनों पर्यवेक्षक सभी नवनिर्वाचित विधायकों के साथ विस्तार से चर्चा करेंगे। सूत्रों के अनुसार, शाह व्यक्तिगत स्तर पर और सामूहिक रूप से विधायकों से बात करेंगे ताकि मुख्यमंत्री के नाम पर आम सहमति बनाई जा सके। विधायकों की राय जानने के बाद विधायक दल के नेता और अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। माना जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता शमिक भट्टाचार्य बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम का प्रस्ताव रख सकते हैं, जिसके बाद इस फैसले को आधिकारिक रूप दिया जाएगा। 9 मई को होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोहनए मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी। इस बीच राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 मई को नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंच रहे हैं। पीएम मोदी की मौजूदगी पश्चिम बंगाल की राजनीति में होने जा रहे इस बड़े बदलाव को और भी खास बनाएगी। रेस में और कौन?नंदीग्राम के बाद भवानीपुर में भी जीत का परचम लहराने वाले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे शुभेंदु अधिकारी का नाम इस रेस में सबसे आगे चल रहा है। हालांकि बीजेपी अक्सर अपने फैसलों से चौंकाती रही है। शुभेंदु के अलावा कुछ अन्य नामों पर भी चर्चा गर्म है। सुकांत मजूमदार: प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनके शांत स्वभाव और आरएसएस (RSS) के साथ उनके गहरे जुड़ाव को देखते हुए उन्हें एक ‘डार्क हॉर्स’ माना जा रहा है। दिलीप घोष: पार्टी को जमीनी स्तर पर खड़ा करने वाले दिलीप घोष का नाम भी चर्चा से बाहर नहीं है। उनका आक्रामक अंदाज कार्यकर्ताओं में जोश भरता है। महिला कार्ड या नया चेहरा: महिला वोटरों को साधने के लिए बीजेपी किसी महिला विधायक या फिर केंद्र से किसी अनुभवी चेहरे को भी बंगाल की कमान सौंप सकती है। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर लिया, जिससे राज्य में टीएमसी के लगातार 15 वर्षों के शासन का अंत हो गया। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने 80 सीटों पर जीत दर्ज की।
47 रीटेक के बाद तैयार हुआ ऐसा जोशीला गीत, मोहम्मद रफी की आवाज सुनकर आज भी भर आते हैं आंखें

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में कुछ गाने ऐसे हैं जो समय के साथ और भी गहरे हो जाते हैं, और उनमें सबसे खास नाम है फिल्म गाइड का गीत “दिल ढल जाए”। इस गीत को अपनी आवाज से अमर बनाने वाले थे महान पार्श्वगायक मोहम्मद रफी, जिनकी गायकी ने दशकों से लोगों के दिलों को छुआ है। इस गीत की खासियत सिर्फ इसका संगीत या शब्द नहीं थे, बल्कि उसमें भरा हुआ भावनात्मक दर्द था, जिसे रफी साहब ने अपनी आवाज से जीवंत कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि इस गाने को रिकॉर्ड करते समय रफी साहब पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने इसे परफेक्ट बनाने के लिए 47 रीटेक लिए थे। फिल्म गाइड के इस गीत के संगीतकार थे एस.डी. बर्मन और इसके बोल लिखे थे शैलेंद्र ने। यह गीत दिल टूटने और भावनात्मक संघर्ष को दर्शाता है, जिसे देव आनंद और वहीदा रहमान पर फिल्माया गया था। एस.डी. बर्मन ने पहले ही टेक में रफी की आवाज को पसंद कर लिया था, लेकिन रफी साहब को लगा कि वह अभी उस भावनात्मक गहराई तक नहीं पहुंचे हैं, जिसकी जरूरत इस गीत को थी। इसी वजह से उन्होंने बार-बार प्रयास किया और 47 बार गाने को दोहराया, ताकि हर शब्द में सही दर्द और भावना उतर सके। कहा जाता है कि जब अंतिम टेक पूरा हुआ, तब एस.डी. बर्मन ने रफी साहब को गले लगाकर कहा था कि उन्होंने हिंदी सिनेमा को एक अमर गीत दे दिया है। यह वही पल था जिसने इस गीत को इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज कर दिया। फिल्म गाइड न सिर्फ एक कलात्मक फिल्म थी, बल्कि तकनीकी और संगीत के स्तर पर भी बेहद खास मानी जाती है। इस फिल्म का संगीत तैयार करना आसान नहीं था। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके संगीत निर्माण में देर रात तक काम चलता था और कई बार स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद टीम ने काम जारी रखा। इस फिल्म की एक और खास बात यह है कि यह हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में बनी थी, जो उस दौर में एक बड़ा प्रयोग था। हालांकि अंग्रेजी संस्करण को भारत में ज्यादा लोकप्रियता नहीं मिली, लेकिन बाद में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।देव आनंद की यह फिल्म उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक मानी जाती है, और इसका संगीत आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। मोहम्मद रफी ने अपने पूरे करियर में हजारों गीत गाए, लेकिन “दिल ढल जाए” जैसा भावनात्मक गाना उनकी कला की पराकाष्ठा माना जाता है। उनकी आवाज की खासियत यही थी कि वह हर भावना को इतनी गहराई से व्यक्त करती थी कि श्रोता खुद को उस स्थिति में महसूस करने लगते थे। आज भी जब यह गीत सुना जाता है, तो उसकी गहराई और दर्द लोगों की आंखों को नम कर देता है। यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय संगीत इतिहास की एक अमर विरासत बन चुका है।
ईरान युद्ध से भड़के तेल के दाम… जानें दुनिया में कहां मिल रहा सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल?

नई दिल्ली। ईरान युद्ध (Iran war) से दुनिया भर में तेल के दाम (Oil prices) में उछाल देखने को मिल है। इस बीच पूरी दुनिया में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत कहीं 2.25 रुपये है तो कहीं 394.95 रुपये। यानी पेट्रोल की कीमत कही भारत से 44 गुना सस्ता है तो कहीं करीब चार गुना महंगा। आइए जानें दुनिया में सबसे सस्ता और महंगा पेट्रोल और डीजल (Petrol Diesel Prices) कहां मिलता है? सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाले देशसबसे पहले बात दुनिया में सबसे महंगे पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देशों की। इस लिस्ट में सबसे ऊपर हांगकांग का नाम है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत करीब 400 रुपये है। इसके बाद मलावी का नाम आता है। यहां पेट्रोल का रेट 364.27 रुपये प्रति लीटर है। इजरायल में पेट्रोल जहां, 269.19 रुपये लीटर है वहीं, डेनमार्क में 265.74 रुपये। नीदरलैंड में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 260.15 रुपये है। ग्रीस में 231.57 और अल्बानिया में 231.49 रुपये लीटर है। स्विट्जरलैंड में पेट्रोल की कीमत 231.12 और सिंगापुर में 230.02 रुपये लीटर है। दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देशदुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल लीबिया में है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 2.25 रुपये है। इसके बाद ईरान का नंबर है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 3.32 रुपये है। इसके बाद अंगोला में 31.08, कुवैत में 32.41, अल्जीरिया में 33.75 और तुर्कमेनिस्तान में 40.78 रुपये लीटर है। आठवें नंबर इजिप्ट है। यहां पेट्रोल की कीमत 42.78 रुपये है। नौवें पर कतर है, जहां पेट्रोल की कीमत 54.62 रुपये लीटर है। 10वें नंबर पर सऊदी अरब है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 59.62 रुपये है। किस देश में सबसे सस्ता डीजलसबसे सस्ता डीजल वेनेजुएला में मिलता है। यहां 1 लीटर डीजल की कीमत महज 39 पैसे है। इसके बाद ईरान में 54 पैसे और लीबिया में 2.25 रुपये लीटर। अल्जीरिया में एक लीटर डीजल की कीमत 22.26 रुपये है। तुर्कमेनिस्तान में डीजल 27.19 रुपये प्रति लीटर है तो कुवैत में 35.50 रुपये। इजिप्ट में डीजल का रेट 36.36 रुपये लीटर है तो अंगोला में 41.44 रुपये लीटर। सऊदी अरब में एक लीटर डीजल की कीमत 45.37 रुपये और कतर में 53.32 रुपये। हांगकांग में 446 रुपये लीटर है डीजलदुनिया में सबसे महंगा डीजल हांगकांग में 446 रुपये लीटर है। एक लीटर डीजल की कीमत मलावी में 365, सिंगापुर में 310.49, डेनमार्क में 273.16, स्विट्जरलैंड में 262.09, नीदरलैंड में 257 रुपये लीटर है। इजरायल में जहां एक लीटर डीजल 255.60 रुपये है तो फिनलैंड में 255.59 रुपये।