Gwalior Pakistani Cyber Network: पाकिस्तानी साइबर ठगों का भंडाफोड़, ग्वालियर के कैलाश विहार में चल रहा था अड्डा

HIGHLIGHTS: ग्वालियर में साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश होटल के कमरे से चल रहा था नेटवर्क पाकिस्तान के नंबरों से मिल रहे थे निर्देश चार आरोपी गिरफ्तार, कई दस्तावेज जब्त म्यूल अकाउंट के जरिए होती थी ठगी Gwalior Pakistani Cyber Network: मध्यप्रदेश। ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए शहर के पॉश इलाके कैलाश विहार स्थित होटल एचजी से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी होटल के कमरे को कंट्रोल रूम बनाकर देशभर में साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे। मुखबिर से सूचना मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने दबिश दी और मौके से संदिग्ध गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे लैपटॉप, मोबाइल और अन्य दस्तावेज बरामद किए। लखनऊ की सियासत में हलचल तेज, योगी सरकार में नए चेहरों की एंट्री लगभग तय.. पाकिस्तान से मिल रहे थे निर्देश जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि आरोपियों के मोबाइल पर पाकिस्तान के कंट्री कोड (+92) वाले नंबरों से कॉल और व्हाट्सएप मैसेज आ रहे थे। पुलिस के अनुसार पाकिस्तान में बैठा हैंडलर ही इन्हें निर्देश देता था कि किस खाते में ठगी की रकम मंगानी है और उसे आगे कहां ट्रांसफर करना है। गिरफ्तार आरोपियों में दो ग्वालियर, एक मुरैना और एक राजस्थान के धौलपुर का रहने वाला बताया गया है। कोलकाता समारोह में भावनात्मक क्षण, पीएम मोदी ने बुजुर्ग कार्यकर्ता को मंच पर दिया विशेष सम्मान म्यूल अकाउंट नेटवर्क से करते थे ठगी पूछताछ में सामने आया कि आरोपी म्यूल अकाउंट नेटवर्क ऑपरेट कर रहे थे। इस नेटवर्क में ठग सीधे अपने खाते में पैसे नहीं मंगाते, बल्कि कमीशन देकर दूसरे लोगों के बैंक खाते इस्तेमाल करते हैं। इन्हीं खातों में ठगी की रकम जमा कराई जाती थी और बाद में उसे क्रिप्टो या डार्क वेब के जरिए विदेश भेजा जाता था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। सिर्फ गिफ्ट्स नहीं, इस मदर्स डे मां को भेजें दिल छू लेने वाले ये खास मैसेज, शब्दों में छिपा प्यार कर देगा भावुक मोबाइल, सिम और बैंक दस्तावेज जब्त क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पासबुक और चेकबुक बरामद किए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया और कितनी रकम का ट्रांजैक्शन किया गया। साथ ही ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में इनके अन्य मददगारों की भी जांच की जा रही है।
नेपाल यात्रा अचानक टली: लिपुलेख विवाद या बालेन शाह की नई रणनीति, भारत-नेपाल रिश्तों में बढ़ी हलचल!

नई दिल्ली। भारत और नेपाल के रिश्तों के बीच एक बार फिर सियासी और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की प्रस्तावित नेपाल यात्रा अचानक टाल दिए जाने के बाद दोनों देशों के संबंधों को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले के पीछे लिपुलेख विवाद और नेपाल की नई राजनीतिक नेतृत्व शैली बड़ी वजह हो सकती है। जानकारी के मुताबिक, विक्रम मिस्री को 11 मई से दो दिवसीय नेपाल दौरे पर जाना था। इस यात्रा का उद्देश्य नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण देना और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की जमीन तैयार करना था। हालांकि अंतिम समय में यह दौरा स्थगित कर दिया गया। नेपाल सरकार ने भी इसकी पुष्टि की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख क्षेत्र को लेकर तनाव बढ़ा है। भारत ने कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख मार्ग को सक्रिय किया है, जबकि नेपाल इस इलाके पर अपना दावा जताता रहा है। काठमांडू का कहना है कि यह क्षेत्र उसकी सीमा का हिस्सा है। इसी मुद्दे को लेकर नेपाल के भीतर राजनीतिक माहौल भी गर्म बना हुआ है। सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विक्रम मिस्री से मुलाकात को लेकर सकारात्मक संकेत नहीं दिए थे। इसके बाद यात्रा को टालने का फैसला लिया गया। हालांकि आधिकारिक स्तर पर किसी टकराव की पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि इस दौरे की रूपरेखा मॉरीशस में नेपाल के विदेश मंत्री और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच हुई बातचीत के दौरान तैयार की गई थी। भारत की कोशिश थी कि नई नेपाली सरकार के साथ रिश्तों को मजबूत किया जाए और दोनों देशों के बीच रुकी हुई द्विपक्षीय वार्ताओं को फिर से गति दी जाए। राजनयिक सूत्रों का मानना है कि नेपाल की नई सरकार फिलहाल संतुलित विदेश नीति अपनाने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि वह भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकातों में सावधानी बरत रही है। हालांकि भारत की ओर से साफ किया गया है कि नेपाल के साथ संबंध सामान्य और सकारात्मक बने हुए हैं। भारत फिलहाल नेपाल में चल रही अपनी विकास परियोजनाओं और निवेश कार्यक्रमों पर भी नजर बनाए हुए है। दोनों देशों के बीच व्यापार, जल संसाधन, सुरक्षा सहयोग और सीमा प्रबंधन जैसे कई अहम मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत-नेपाल संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं। ऐसे में किसी एक यात्रा के टलने को रिश्तों में बड़ी दरार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन यह जरूर संकेत देता है कि नेपाल की नई राजनीतिक दिशा और क्षेत्रीय मुद्दे आने वाले समय में दोनों देशों की कूटनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
शुभेंदु के शपथ ग्रहण पर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने पुराने-नए बयानों से उठाए सवाल

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जहां एक ओर समर्थकों में उत्साह देखा गया, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस ने एक वीडियो साझा कर केंद्र की राजनीति और भारतीय जनता पार्टी पर सीधा हमला बोला है, जिससे राज्य की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सामने आए इस राजनीतिक घटनाक्रम ने चर्चा को और तेज कर दिया। कांग्रेस की ओर से साझा किए गए वीडियो में दो अलग-अलग समय की राजनीतिक झलकियों को जोड़ा गया है। एक दृश्य में हालिया शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री का शुभेंदु अधिकारी के साथ गर्मजोशी से मिलना दिखाया गया है, जबकि दूसरे दृश्य में पुराने समय का एक राजनीतिक बयान शामिल है, जिसे मौजूदा परिस्थिति से जोड़कर सवाल खड़े किए गए हैं। इसी तुलना के आधार पर कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की कि समय के साथ राजनीतिक रिश्तों और रुख में बड़ा बदलाव आया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे राजनीतिक परिपक्वता और बदलते समय की आवश्यकता बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे अवसरवादी राजनीति का उदाहरण मान रहा है। “वो साल दूसरा था, ये साल दूसरा है” जैसे संदेश के जरिए कांग्रेस ने राजनीतिक परिवर्तन और कथित विरोधाभास को उजागर करने की कोशिश की है, जिससे बहस और अधिक गहराती जा रही है। इसी बीच शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। कुछ वर्ष पहले तक वे एक अलग राजनीतिक दल से जुड़े हुए थे, लेकिन बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और धीरे-धीरे राज्य की राजनीति में एक मजबूत चेहरा बनकर उभरे। उनके राजनीतिक फैसलों और चुनावी रणनीतियों ने पश्चिम बंगाल की सत्ता समीकरणों को कई बार प्रभावित किया है। 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में मिली जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति में केंद्रीय भूमिका में ला खड़ा किया था। इसके बाद आने वाले वर्षों में उन्होंने लगातार राजनीतिक सक्रियता बनाए रखी और कई महत्वपूर्ण आंदोलनों और घटनाओं में प्रमुख भूमिका निभाई। 2026 के चुनावों में भी उनका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिसने राजनीतिक दिशा को पूरी तरह बदल दिया। हाल के चुनाव परिणामों ने राज्य की सत्ता संरचना को नया रूप दिया है। लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जिसके बाद नई सरकार का गठन हुआ। इस बदलाव ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर नई उम्मीदें जगाई हैं, बल्कि राजनीतिक टकराव को भी और बढ़ा दिया है। अब जब नई सरकार ने कार्यभार संभाल लिया है, तो विपक्ष की भूमिका और अधिक सक्रिय हो गई है। कांग्रेस द्वारा उठाए गए इस नए मुद्दे ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति और अधिक बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और रणनीतिक टकराव से भरी रहने वाली है।
कार की चाबी पर क्यों लपेट रहे लोग एल्युमिनियम फॉइल? जानिए कैसे बचा सकती है आपकी लाखों की गाड़ी

नई दिल्ली। कीलेस एंट्री फीचर वाली कारें आज लोगों की पहली पसंद बनती जा रही हैं, लेकिन यही आधुनिक सुविधा अब वाहन चोरी का नया हथियार भी बन रही है। यही वजह है कि इन दिनों कई लोग अपनी कार की चाबी को एल्युमिनियम फॉइल में लपेटकर रखने लगे हैं। सुनने में यह तरीका भले अजीब लगे, लेकिन इसके पीछे कार सुरक्षा से जुड़ा बड़ा तकनीकी कारण है। दरअसल, कीलेस एंट्री सिस्टम वाली कारें वायरलेस सिग्नल के जरिए अपनी स्मार्ट चाबी से कनेक्ट रहती हैं। जैसे ही कार मालिक चाबी लेकर वाहन के पास पहुंचता है, कार अपने आप लॉक या अनलॉक हो जाती है। इसी तकनीक का फायदा उठाकर चोर अब “रिले अटैक” नाम की डिजिटल चोरी को अंजाम दे रहे हैं। इस तकनीक में चोर खास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मदद से कार की चाबी से निकलने वाले सिग्नल को दूर से पकड़ लेते हैं और उसे कार तक पहुंचा देते हैं। कार को लगता है कि असली चाबी पास में ही मौजूद है और वह बिना किसी नुकसान के खुल जाती है। कई मामलों में चोर कुछ ही सेकंड में गाड़ी स्टार्ट करके फरार हो जाते हैं। ऐसे में एल्युमिनियम फॉइल कार मालिकों के लिए एक आसान और सस्ता सुरक्षा उपाय बनकर सामने आया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एल्युमिनियम फॉइल “फैराडे केज” सिद्धांत पर काम करती है। यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल्स को ब्लॉक कर देती है, जिससे चाबी का वायरलेस सिग्नल बाहर नहीं जा पाता। अगर चाबी को फॉइल में अच्छी तरह लपेट दिया जाए, तो रिले अटैक करने वाले चोर सिग्नल को कैच नहीं कर पाते और कार सुरक्षित रहती है। हालांकि, सिर्फ फॉइल पर निर्भर रहना पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जाता। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि कार की चाबी को घर के मुख्य दरवाजे या खिड़की के पास रखने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि चाबी को किसी दराज या घर के अंदर सुरक्षित स्थान पर रखा जाए, ताकि सिग्नल बाहर तक न पहुंच सके। इसके अलावा बाजार में खास “फैराडे पाउच” या सिग्नल ब्लॉकिंग कवर भी उपलब्ध हैं, जो फॉइल की तुलना में ज्यादा टिकाऊ और प्रभावी माने जाते हैं। कई ऑटोमोबाइल कंपनियां अब मोशन सेंसर और एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स वाली स्मार्ट चाबियां भी लॉन्च कर रही हैं, जो लंबे समय तक इस्तेमाल न होने पर सिग्नल भेजना बंद कर देती हैं। तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, अपराधी भी उतने ही आधुनिक तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में कार मालिकों के लिए जरूरी है कि वे केवल हाईटेक फीचर्स पर भरोसा न करें, बल्कि सुरक्षा के छोटे-छोटे उपाय भी अपनाएं। एक साधारण एल्युमिनियम फॉइल भी आपकी लाखों की कार को डिजिटल चोरी से बचाने में मददगार साबित हो सकती है।
लखनऊ की सियासत में हलचल तेज, योगी सरकार में नए चेहरों की एंट्री लगभग तय..

नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों एक बार फिर तेजी से बदलते घटनाक्रमों की गवाह बन रही है, जहां कैबिनेट विस्तार को लेकर माहौल पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है। राजधानी लखनऊ में राजनीतिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और सत्ता के गलियारों में नई नियुक्तियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राज्यपाल से प्रस्तावित मुलाकात को इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम चरण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से लंबित कैबिनेट विस्तार अब अंतिम निर्णय की ओर बढ़ रहा है। राज्य सरकार के भीतर प्रशासनिक और राजनीतिक संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल किए जाने की तैयारी की जा रही है। इस बदलाव को केवल सामान्य विस्तार के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे आने वाले राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि इस बार कई ऐसे नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है, जिन्होंने हाल के समय में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कुछ नाम ऐसे भी सामने आ रहे हैं जो पहले दूसरे राजनीतिक समूहों से जुड़े रहे हैं और अब सत्ता पक्ष के साथ आए हैं। इन संभावित बदलावों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और कई नेताओं की सक्रियता अचानक बढ़ गई है। इस संभावित विस्तार में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को भी प्रमुखता दी जा रही है। सरकार का प्रयास है कि अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर प्रशासनिक ढांचे को और अधिक मजबूत और व्यापक बनाया जाए। इसी वजह से मंत्रिमंडल में नए और अनुभवी दोनों तरह के चेहरों को शामिल करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही कुछ अनुभवी नेताओं की वापसी या पुनः शामिल होने की संभावनाएं भी चर्चा में हैं, जिनके पास संगठन और शासन दोनों का अनुभव रहा है। माना जा रहा है कि ऐसे नेताओं के शामिल होने से सरकार को निर्णय लेने की प्रक्रिया में मजबूती मिलेगी। वहीं कुछ नए चेहरों को भी अवसर दिया जा सकता है ताकि सरकार में नई ऊर्जा और दृष्टिकोण जुड़ सके। राजनीतिक माहौल में सबसे अधिक उत्सुकता इस बात को लेकर है कि अंतिम सूची में किन नामों को स्थान मिलेगा। मुख्यमंत्री और राज्यपाल की मुलाकात के बाद इस पूरे मामले पर अंतिम मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद शपथ ग्रहण की तारीख और समय को लेकर आधिकारिक घोषणा हो सकती है, जिससे पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो जाएंगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह पूरी प्रक्रिया आने वाले कुछ दिनों में पूरी हो सकती है, जिसके बाद नया मंत्रिमंडल आकार लेगा। इस बदलाव को आगामी राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जिससे सरकार अपने कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकेगी।
बिहार के 19 साल के लड़के ने AI की दुनिया में मचाई सनसनी, 11 लाख खर्च कर तैयार किया देसी मल्टीमॉडल मॉडल

नई दिल्ली। बिहार के एक 19 वर्षीय युवक ने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी चर्चा अब इंटरनेट और टेक्नोलॉजी की दुनिया में तेजी से हो रही है। आनंद नाम के इस युवा ने करीब 11 लाख रुपये खर्च कर एक मल्टीमॉडल AI मॉडल तैयार करने का दावा किया है। खास बात यह है कि यह पूरा प्रोजेक्ट बिना किसी बड़ी कंपनी या निवेशक की मदद के तैयार किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आनंद का AI मॉडल टेक्स्ट, इमेज और स्पीच जैसे कई फॉर्मेट में काम करने में सक्षम है। दावा किया गया है कि यह मॉडल 512×512 रेजोल्यूशन तक इमेज जनरेट कर सकता है और 24kHz क्वालिटी की स्पीच आउटपुट देने की क्षमता भी रखता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इसकी तुलना दुनिया की बड़ी AI कंपनियों जैसे OpenAI और Google के मॉडल्स से की जा रही है। मध्यवर्गीय परिवार से आने वाले आनंद ने बताया कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर अपनी बचत और रनपॉड जैसी सेवाओं से मिले ग्रांट्स के सहारे काम किया। उनके पिता सरकारी अधिकारी हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। बताया जा रहा है कि केवल GPU कंप्यूटिंग पर ही परिवार के करीब 64 हजार रुपये खर्च हुए, जो एक सामान्य परिवार के लिए बड़ी रकम मानी जाती है। आनंद का कहना है कि भारत को भी अपना स्वदेशी AI सिस्टम विकसित करना चाहिए, ताकि देश विदेशी तकनीकों पर पूरी तरह निर्भर न रहे। उनका मानना है कि जैसे अमेरिका और चीन अपने AI मॉडल तैयार कर रहे हैं, वैसे ही भारत को भी तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस AI मॉडल ने OmniDocBench V1.5 टेस्टिंग में 93.45 का स्कोर हासिल किया है। इससे पहले आनंद अपने लैपटॉप पर टेक्स्ट-टू-वीडियो सिस्टम पर भी काम कर चुके हैं। अब वह अपने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 35 हजार डॉलर की फंडिंग जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर जहां बड़ी संख्या में लोग आनंद की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स इस प्रोजेक्ट की क्षमताओं और दावों पर सवाल भी उठा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इतनी कम उम्र में इतने बड़े AI मॉडल पर काम करना बड़ी उपलब्धि है, जबकि कुछ यूजर्स इसे AI-जनरेटेड कोड या “वाइब कोडिंग” का परिणाम बता रहे हैं। इन तमाम चर्चाओं के बीच आनंद अपने लक्ष्य पर पूरी तरह फोकस बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि वह भविष्य में अपने मॉडल के वेट्स को Hugging Face पर जारी करना चाहते हैं और बाद में पूरे कोडबेस को ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म GitHub पर उपलब्ध कराने की योजना बना रहे हैं। बिहार के इस युवा की कहानी अब उन लाखों छात्रों और युवाओं के लिए प्रेरणा बनती जा रही है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
कोलकाता समारोह में भावनात्मक क्षण, पीएम मोदी ने बुजुर्ग कार्यकर्ता को मंच पर दिया विशेष सम्मान

नई दिल्ली । कोलकाता में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक ऐसा क्षण सामने आया जिसने पूरे कार्यक्रम की दिशा ही बदल दी और उसे एक भावनात्मक याद में बदल दिया। मंच पर चल रहे औपचारिक कार्यक्रम के बीच अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 98 वर्षीय वरिष्ठ कार्यकर्ता माखनलाल सरकार के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके पैर छुए और उन्हें गले लगाया। यह दृश्य इतना सहज और अप्रत्याशित था कि कुछ ही क्षणों में वहां मौजूद लोगों के बीच भावनात्मक माहौल बन गया। यह पूरा घटनाक्रम कैमरों में कैद हो गया और देखते ही देखते यह तस्वीर और वीडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। समारोह में मौजूद लोग भी इस पल को देखकर कुछ देर के लिए भावुक हो उठे और तालियों की गूंज से पूरे वातावरण को भर दिया। मंच पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के चेहरे पर भी इस सम्मानजनक दृश्य का प्रभाव साफ देखा जा सकता था। जानकारी के अनुसार, माखनलाल सरकार पश्चिम बंगाल में लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। वे उन वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में शामिल हैं जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा सामाजिक और राजनीतिक विचारधारा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में लगाया है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका उत्साह और समर्पण कार्यकर्ताओं के बीच प्रेरणा का कारण बना हुआ है। समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने पहले उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इसके बाद उन्होंने झुककर उनके चरण स्पर्श किए और फिर उन्हें गले लगाकर आशीर्वाद लिया। यह पूरा दृश्य पूरी तरह से सहज और आत्मीय था, जिसने मंच पर मौजूद लोगों के साथ-साथ वहां उपस्थित हजारों लोगों को भी भावुक कर दिया। कुछ ही पलों में यह दृश्य पूरे कार्यक्रम का सबसे चर्चित क्षण बन गया। माखनलाल सरकार का नाम उन पुराने दौर के आंदोलनों से भी जुड़ा बताया जाता है, जिनमें राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए कई संघर्ष देखने को मिले थे। बताया जाता है कि वे अपने शुरुआती वर्षों से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे और कई महत्वपूर्ण आंदोलनों का हिस्सा भी बने। उनके अनुभव और योगदान को संगठन के भीतर आज भी अत्यधिक सम्मान के साथ देखा जाता है। इस घटना के बाद यह स्पष्ट हो गया कि शपथ ग्रहण जैसे औपचारिक राजनीतिक आयोजनों में भी मानवीय भावनाओं और सम्मान की परंपरा कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह दृश्य केवल एक क्षण नहीं रहा, बल्कि यह पीढ़ियों के बीच सम्मान और जुड़ाव का प्रतीक बन गया। कार्यक्रम के दौरान जहां एक ओर नई सरकार की जिम्मेदारियों और भविष्य की योजनाओं की चर्चा हो रही थी, वहीं यह भावुक क्षण लोगों के दिलों में अलग ही जगह बना गया। सोशल मीडिया पर भी यह दृश्य तेजी से फैल गया और लोगों ने इसे सम्मान और संस्कार की एक मिसाल के रूप में देखा।
योगी आदित्यनाथ का भगवा गमछा और शुभेंदु अधिकारी, राजनीतिक संदेश या वायरल दावा?

नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर इन दिनों एक राजनीतिक दावा तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने पश्चिम बंगाल के नेता Shubhendu Adhikari को भगवा गमछा पहनाया और इसे एक विशेष वैचारिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इस कथित दृश्य को लेकर राजनीतिक हलकों और आम जनता के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं, जहां कुछ लोग इसे हिंदुत्व की राजनीति और प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे केवल एक वायरल और अपुष्ट जानकारी मान रहे हैं। इस पूरे मामले में दावा यह भी किया जा रहा है कि यह घटना किसी बड़े राजनीतिक आयोजन के दौरान सामने आई, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की उपस्थिति की बात भी जोड़ी जा रही है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इस प्रकार की किसी भी घटना की आधिकारिक पुष्टि अभी तक उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति को भी इस चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां वर्तमान में मुख्यमंत्री के रूप में Mamata Banerjee कार्यरत हैं और राज्य की राजनीति पहले से ही तीव्र प्रतिस्पर्धा और विचारधारात्मक मतभेदों के लिए जानी जाती है। वायरल दावों में जिस भगवा गमछे का उल्लेख किया जा रहा है, उसे केवल एक वस्त्र नहीं बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे यह चर्चा और अधिक बढ़ गई है। दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज के डिजिटल युग में किसी भी तस्वीर, वीडियो या कथित घटना को तेजी से बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जा सकता है, जिससे वास्तविक और काल्पनिक जानकारी के बीच अंतर करना कठिन हो जाता है। शुभेंदु अधिकारी का नाम पहले भी बंगाल की राजनीति में कई महत्वपूर्ण मोड़ों पर चर्चा में रहा है, खासकर नंदीग्राम और विधानसभा चुनावों के दौरान, लेकिन इस वायरल दावे में जो संदर्भ दिया जा रहा है वह पूरी तरह से सोशल मीडिया पर आधारित प्रतीत होता है। वहीं योगी आदित्यनाथ को लेकर भी यह दावा राजनीतिक प्रतीकवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां भगवा रंग और उससे जुड़े संदेशों को वैचारिक पहचान के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राजनीतिक प्रतीकों का उपयोग किस प्रकार से जनमत को प्रभावित करने और चर्चा को दिशा देने में किया जाता है। साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि बिना पुष्टि वाली जानकारी किस तरह तेजी से फैलकर राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल इस वायरल दावे को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, इसलिए इसे केवल एक अपुष्ट और सोशल मीडिया आधारित राजनीतिक चर्चा के रूप में ही देखा जाना उचित माना जा रहा है।
कोलकाता में राजनीतिक इतिहास का नया अध्याय: शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार का शपथ ग्रहण

नई दिल्ली ।कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में आयोजित एक विशाल और भव्य समारोह ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी। हजारों की भीड़ और राजनीतिक हलचल के बीच शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। इस अवसर ने राज्य की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव का संकेत दिया और राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से नई दिशा में मोड़ दिया। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए पांच प्रमुख विधायकों को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी। यह पूरा समारोह राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया, जिसमें संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व परिवर्तन की स्पष्ट झलक दिखाई दी। मंत्रिमंडल में शामिल प्रमुख चेहरों में दिलीप घोष का नाम सबसे अधिक चर्चित रहा। लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे दिलीप घोष को उनके अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के आधार पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। राजनीतिक गलियारों में उन्हें सरकार का मजबूत स्तंभ माना जा रहा है, जो प्रशासनिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर भूमिका निभा सकते हैं। इसके साथ ही अग्निमित्रा पॉल ने भी मंत्री पद की शपथ ली, जो हाल के वर्षों में महिला नेतृत्व के रूप में तेजी से उभरी हैं। फैशन डिजाइनिंग की दुनिया से राजनीति में कदम रखने वाली पॉल ने अपने क्षेत्र में लगातार मजबूत पकड़ बनाई है। उनकी भूमिका से सरकार में युवा और महिला प्रतिनिधित्व को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अशोक कीर्तनिया को भी इस नई टीम में शामिल किया गया है, जो लंबे समय से सामाजिक और सामुदायिक मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। विशेष रूप से मतुआ समुदाय से जुड़े मुद्दों पर उनकी पकड़ को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। खुदीराम टुडू, जो पहली बार विधायक बने हैं, इस मंत्रिमंडल का सबसे नया चेहरा हैं। एक शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले टुडू अब आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में सरकार का हिस्सा बने हैं। उनका चयन सामाजिक संतुलन और प्रतिनिधित्व की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। निशीथ प्रमाणिक का नाम भी इस सूची में शामिल है, जिनका राजनीतिक अनुभव राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है। उनकी प्रशासनिक समझ और संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए उन्हें भी मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इस पूरे समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आए राजनीतिक प्रतिनिधियों, सामाजिक नेताओं और बड़ी संख्या में आम लोगों की मौजूदगी ने इसे एक विशाल राजनीतिक आयोजन में बदल दिया। ब्रिगेड मैदान में उमड़ी भीड़ ने इस नए राजनीतिक दौर की शुरुआत को और भी भव्य और ऐतिहासिक बना दिया। नई सरकार के गठन के साथ ही अब राज्य में प्रशासनिक नीतियों और विकास योजनाओं की दिशा पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह मंत्रिमंडल अपने फैसलों और कार्यशैली से राज्य की राजनीति में नई परिभाषा गढ़ेगा।
GWALIOR LOK ADALAT: ग्वालियर में नेशनल लोक अदालत, पुराने बिल जमा कराने पहुंचे लोग

HIGHLIGHTS: ग्वालियर में साल 2026 की दूसरी नेशनल लोक अदालत आयोजित बिजली और जलकर मामलों के लिए उमड़ी भीड़ सर्वर समस्या के बावजूद भुगतान प्रक्रिया जारी रही छूट कम मिलने पर उपभोक्ताओं ने जताई नाराजगी दिव्यांग उपभोक्ता ने पानी और बिल व्यवस्था पर उठाए सवाल GWALIOR LOK ADALAT: मध्यप्रदेश। ग्वालियर के जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में शनिवार को साल 2026 की दूसरी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। बता दें कि लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से आयोजित इस लोक अदालत में जिलेभर से बड़ी संख्या में वादी-प्रतिवादी और उपभोक्ता पहुंचे। नगर निगम, बिजली विभाग और जलकर से जुड़े मामलों की संख्या सबसे अधिक रही। पुराने प्रकरणों का निपटारा कराने के लिए सुबह से ही न्यायालय परिसर में लोगों की भीड़ देखने को मिली। सिर्फ गिफ्ट्स नहीं, इस मदर्स डे मां को भेजें दिल छू लेने वाले ये खास मैसेज, शब्दों में छिपा प्यार कर देगा भावुक सर्वर समस्या के बावजूद नहीं रुकी भुगतान प्रक्रिया पिछली लोक अदालत में सर्वर डाउन होने से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी थी। इस बार प्रशासन ने पहले से तैयारी करते हुए उपभोक्ताओं का डेटा मशीनों में अपलोड कर दिया था। इसी वजह से तकनीकी दिक्कत आने के बावजूद भुगतान प्रक्रिया जारी रही । उपभोक्ताओं ने आसानी से अपने पुराने बिजली बिल, संपत्ति कर और जलकर जमा किए। लोक अदालत में कई पुलिसकर्मी भी अपने लंबित बिजली बिल भरने पहुंचे। Mother’s Day 2026: मां सिर्फ रिश्ता नहीं, जिंदगी की सबसे खूबसूरत ताकत है छूट के नाम पर उपभोक्ताओं में नाराजगी हालांकि लोक अदालत में मिलने वाली छूट को लेकर कई उपभोक्ताओं ने नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि राहत के नाम पर बहुत कम छूट दी जा रही है, जिससे उन्हें अपेक्षित फायदा नहीं मिल रहा। उपभोक्ताओं का कहना था कि बड़ी रकम के पुराने बकाया पर अधिक राहत मिलनी चाहिए थी ताकि आर्थिक बोझ कम हो सके। विजय देवरकोंडा की किस्मत बदली एक छोटी फिल्म ने, बन गए सुपरस्टार.. दिव्यांग उपभोक्ता ने सुनाई अपनी परेशानी सागरताल स्थित सरकारी मल्टी में रहने वाले दिव्यांग कपिल राठौर भी जलकर का बकाया जमा करने लोक अदालत पहुंचे। उन्होंने बताया कि करीब दो साल तक नियमित बिल नहीं भेजे गए और अब एक साथ 3441 रुपए का बिल थमा दिया गया। कपिल ने कहा कि यदि हर महीने बिल मिलता तो भुगतान आसान रहता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मल्टी में पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है और उन्हें अलग से पानी खरीदना पड़ता है।