ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, बोला- तेल टैंकरों पर हमला हुआ तो US ठिकानों और जहाजों पर बरसेंगी मिसाइलें

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर फारस की खाड़ी या Strait of Hormuz में ईरानी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर बड़ा हमला किया जाएगा। IRGC की नौसेना इकाई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर दावा किया कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी जहाज अब ईरानी मिसाइलों और ड्रोन की रेंज में हैं। इसके बाद IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने भी कहा कि उनके ड्रोन और मिसाइल सिस्टम अमेरिकी ठिकानों पर “लॉक” किए जा चुके हैं और अब सिर्फ आदेश का इंतजार है। इस बीच The Wall Street Journal की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान को 14 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भेजा है, जिस पर तेहरान के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने उम्मीद जताई थी कि जल्द जवाब मिल सकता है, लेकिन ईरान ने फिलहाल किसी समयसीमा को मानने से इनकार कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा जारी है और जवाब “उचित समय” पर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी बाहरी दबाव या समयसीमा के तहत फैसला नहीं करेगा। उधर, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। दक्षिणी Lebanon में इजराइली हमलों और Hezbollah की जवाबी कार्रवाई ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार भी प्रभावित हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। कुवैत ने भी अपने एयरस्पेस में संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की पुष्टि की है, जबकि कतर से पाकिस्तान जा रहे एक गैस जहाज के होर्मुज स्ट्रेट पार करने के दौरान कुछ समय तक उसका सिग्नल गायब रहने से क्षेत्र में चिंता और बढ़ गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
वर्कआउट से लेकर सेलिब्रेशन तक, रश्मिका ने दिखाया परफेक्ट बर्थडे डे, विजय के लिए लिखा दिल छू लेने वाला संदेश,

नई दिल्ली । साउथ फिल्म इंडस्ट्री के चर्चित कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंड़ा एक बार फिर चर्चा में हैं, इस बार वजह बना है विजय का जन्मदिन जिसे रश्मिका ने बेहद खास और भावनात्मक अंदाज में सेलिब्रेट किया। शादी के बाद यह विजय का पहला बर्थडे था, और इसी कारण यह दिन दोनों के लिए और भी ज्यादा यादगार बन गया। रश्मिका ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पूरे दिन की झलक साझा करते हुए अपने पति के प्रति प्यार और अपनापन खुलकर जाहिर किया। रश्मिका द्वारा साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में पूरे दिन की गतिविधियां नजर आईं, जहां दोनों की साथ बिताई गई छोटी-छोटी लेकिन खास यादें देखने को मिलीं। दिन की शुरुआत जिम और वर्कआउट से हुई, जहां दोनों ने फिटनेस रूटीन को साथ निभाया। इसके बाद दिन आगे बढ़ा और यह एक खास सेलिब्रेशन में बदल गया, जिसमें उनके करीबी दोस्त भी शामिल हुए। अपने पोस्ट में रश्मिका ने बताया कि जब विजय किसी मीटिंग के लिए बाहर थे, तब उन्होंने अपना समय कार्डियो एक्सरसाइज में लगाया। इसके बाद दोनों अपने फैंस से मिले, जो विजय को बर्थडे विश करने पहुंचे थे। रश्मिका के अनुसार पूरा दिन बेहद खास और संतुलित रहा, जिसमें काम, फिटनेस और प्यार तीनों का खूबसूरत मिश्रण देखने को मिला। पोस्ट के अंत में रश्मिका ने बेहद प्यारे अंदाज में विजय को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें “विज्जू” कहकर संबोधित किया। उनका यह रोमांटिक अंदाज फैंस के बीच तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने दोनों की जोड़ी को खूब सराहा। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे साउथ इंडस्ट्री का सबसे प्यारा कपल मोमेंट बताया। विजय देवरकोंड़ा ने भी अपने जन्मदिन के मौके पर फैंस और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोगों का प्यार और समर्थन उन्हें हमेशा बेहतर काम करने की प्रेरणा देता है। उनके अनुसार फैंस उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं हैं और यही उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत है। गौरतलब है कि रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंड़ा ने इसी साल फरवरी में शादी की थी, जिसके बाद से ही दोनों की जोड़ी लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। उनकी प्रेम कहानी पहले भी काफी चर्चा में रही है और अब शादी के बाद उनकी केमिस्ट्री को फैंस और भी ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
हंतावायरस का खतरा बढ़ा: साधारण बुखार समझने की गलती पड़ सकती है भारी, डॉक्टरों ने दी गंभीर चेतावनी

नई दिल्ली। Hantavirus Infection को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ती जा रही है। हाल के मामलों में कई लोगों की मौत के बाद डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में यह गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआत में मरीज को बुखार, थकान, सिरदर्द, शरीर दर्द, ठंड लगना, उल्टी और पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि कई लोग इसे डेंगू, फ्लू या सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अमृता अस्पताल फरीदाबाद के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप बजाद के मुताबिक यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और कृन्तकों के यूरिन, लार और मल के संपर्क से फैलता है। लंबे समय से बंद कमरों, गोदामों या स्टोर रूम की सफाई के दौरान धूल के जरिए वायरस शरीर में पहुंच सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि असली खतरा तब शुरू होता है जब संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित करने लगता है। मरीज को सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, सूखी खांसी और ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। गंभीर मामलों में फेफड़ों में पानी भर सकता है और मरीज को ICU या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका सबसे खतरनाक रूप Hantavirus Pulmonary Syndrome माना जाता है, जिसकी मृत्यु दर गंभीर मामलों में 35 से 40 प्रतिशत तक बताई गई है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि घरों और गोदामों में चूहों की संख्या नियंत्रित रखें, सफाई के दौरान मास्क और दस्ताने पहनें तथा बंद कमरों में उचित वेंटिलेशन बनाए रखें। शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत मेडिकल जांच कराना बेहद जरूरी माना जा रहा है
नई उड़ान की तैयारी: भारतीय रिसर्च और स्टार्टअप्स जुड़ेंगे दुनिया के बड़े अंतरिक्ष और तकनीकी भागीदारों से

नई दिल्ली । भारत के शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आकार ले रहा है, जहां अब उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे वैश्विक नवाचार और अंतरिक्ष तकनीक के केंद्र के रूप में उभरेंगे। इस नई पहल का उद्देश्य देश के शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और तकनीकी विशेषज्ञों को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ना है, ताकि उनके विचार और तकनीक दुनिया के सामने पहुंच सकें। इस योजना के तहत भारतीय विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और स्टार्टअप्स को एक साझा वैश्विक मंच पर लाया जाएगा, जहां वे अपने शोध और नवाचार प्रस्तुत करेंगे। यह मंच उन्हें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े संगठनों और वैश्विक तकनीकी विशेषज्ञों के साथ सीधा संवाद करने का अवसर देगा। इससे भारत के युवा वैज्ञानिकों और उद्यमियों को नई दिशा और वैश्विक पहचान मिलेगी। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों ने शोध और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब ये संस्थान केवल शैक्षणिक केंद्र नहीं रहे, बल्कि उन्नत तकनीक विकसित करने वाले नवाचार केंद्र बनते जा रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तकनीक, डेटा साइंस और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में भारतीय शोध लगातार आगे बढ़ रहा है। नई पहल के तहत 100 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप्स और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों को एक साथ जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना और नवाचार को वैश्विक स्तर पर ले जाना है। इससे भारतीय स्टार्टअप्स को न केवल निवेश के अवसर मिलेंगे, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी प्राप्त होगा। इस पूरी प्रक्रिया में अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े स्टार्टअप्स और कंपनियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। ये संस्थान उपग्रह निर्माण, अंतरिक्ष उपकरण, और उन्नत सैटेलाइट तकनीक जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनके द्वारा विकसित तकनीकें अब वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना रही हैं, जिससे भारत की अंतरिक्ष क्षमता को नई पहचान मिल रही है। कुछ भारतीय तकनीकी कंपनियां पहले ही अपने उत्पाद और सेवाएं कई देशों तक पहुंचा चुकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति में है। ये कंपनियां उपग्रह आधारित समाधान, पृथ्वी निगरानी और रणनीतिक तकनीकों के विकास में सक्रिय हैं, जो आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यह पूरी पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सोच को आगे बढ़ाती है, जिसमें शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के बीच मजबूत संबंध बनाने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे युवा तैयार करना है जो केवल नौकरी खोजने वाले न होकर, नए समाधान और तकनीक विकसित करने वाले नवप्रवर्तक बनें। भारत अब उस दिशा में आगे बढ़ रहा है जहां उसका तकनीकी और वैज्ञानिक विकास वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके। उच्च शिक्षा संस्थानों और स्टार्टअप्स का यह संयुक्त प्रयास देश को नवाचार और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। यह केवल एक शैक्षणिक पहल नहीं बल्कि भारत की भविष्य की तकनीकी शक्ति को मजबूत करने की एक रणनीतिक दिशा है।
कांग्रेस की राजनीति पर पीएम मोदी का निशाना, कहा-अकड़ और धोखे से कमजोर हुई पार्टी

नई दिल्ली । बेंगलुरु में आयोजित एक बड़ी जनसभा के दौरान देश की राजनीति को लेकर तीखे और सीधे संदेश सामने आए, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी राजनीति पर कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस पार्टी को अपने निशाने पर रखा। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में कांग्रेस की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है और इसका मुख्य कारण उसकी राजनीतिक सोच और कार्यशैली में जमी हुई “अकड़” है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि एक समय देश की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत मानी जाने वाली पार्टी अब लगातार चुनावी संघर्ष का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता ने पिछले कुछ वर्षों में बार-बार अपना रुझान स्पष्ट किया है और सत्ता के समीकरण बदलते रहे हैं। इसके बावजूद पार्टी अपनी हार की समीक्षा करने के बजाय दूसरों पर दोष मढ़ती रही है। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में हार और जीत स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन हार को स्वीकार न कर दूसरों पर आरोप लगाना राजनीतिक परिपक्वता की कमी को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दल अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए संस्थाओं और व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए सही संकेत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान सरकार का ध्यान विकास, जनकल्याण और स्थिर प्रशासन पर केंद्रित है। सरकार की नीतियों का उद्देश्य देश के गरीब और मध्यम वर्ग को सशक्त बनाना है। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं और विकास योजनाओं का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंचा है। प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों की सरकारों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि कई राज्यों में राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक विवादों के कारण विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में आने के बाद कई बार वादों और वास्तविकता के बीच अंतर दिखाई देता है, जिससे जनता में निराशा पैदा होती है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक गठबंधन केवल सत्ता तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उनमें आपसी विश्वास और जिम्मेदारी भी होनी चाहिए। उन्होंने यह संकेत दिया कि कई बार राजनीतिक रिश्ते समय के साथ बदल जाते हैं और इसका असर प्रशासनिक स्थिरता पर भी पड़ता है। अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की जनता अब अधिक जागरूक हो चुकी है और वह विकास, स्थिरता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में राजनीति का केंद्र केवल आरोप-प्रत्यारोप नहीं बल्कि ठोस विकास कार्य और जनता की भलाई होना चाहिए। पूरा संबोधन राजनीतिक रूप से बेहद सख्त और आक्रामक स्वर में रहा, जिसमें प्रधानमंत्री ने विपक्षी राजनीति पर कई सवाल उठाए और सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा।
बेंगलुरु में आध्यात्मिक मंच से पीएम मोदी का संदेश: समाज और युवा शक्ति ही भारत की असली ताकत

नई दिल्ली । बेंगलुरु में आयोजित एक आध्यात्मिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विकास, समाज की भूमिका और युवाओं की शक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। यह अवसर केवल एक सार्वजनिक आयोजन नहीं था, बल्कि विचारों और संस्कृति के संगम का एक ऐसा मंच बन गया जहां भारत के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक दृष्टिकोण सामने आया। पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल शांत, आध्यात्मिक और ऊर्जा से भरा हुआ दिखाई दिया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब किसी कार्य के पीछे स्पष्ट उद्देश्य और सेवा की भावना होती है, तो उसके परिणाम हमेशा सकारात्मक होते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की असली ताकत उसकी सरकार नहीं, बल्कि उसका समाज होता है। समाज जितना अधिक सक्रिय और जागरूक होता है, देश उतनी ही तेजी से प्रगति करता है। अपने विचार रखते हुए उन्होंने युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि आज का भारत तेजी से बदल रहा है और इस बदलाव के केंद्र में युवा हैं। विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में जो नए अवसर बन रहे हैं, उनमें भारतीय युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। देश कई क्षेत्रों में केवल भागीदारी ही नहीं कर रहा, बल्कि नेतृत्व की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने भारत की विविधता को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं होते हुए भी भारत एकता के सूत्र में बंधा हुआ है। यह एकता किसी दबाव से नहीं, बल्कि एक साझा सोच और भावना से बनी है, जिसमें दूसरों के लिए जीने की प्रवृत्ति प्रमुख है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक समय में भारत ने तकनीकी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। डिजिटल क्रांति ने देश को नई दिशा दी है और आज भारत डिजिटल भुगतान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। इसके साथ ही स्टार्टअप संस्कृति तेजी से बढ़ रही है और युवा उद्यमी नए विचारों के साथ आगे आ रहे हैं। अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जहां युवा वैज्ञानिक नई उपलब्धियों को हासिल कर रहे हैं। यह सब इस बात का संकेत है कि देश एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहां तकनीक और मानव संसाधन दोनों मिलकर विकास की गति को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने समाज की भागीदारी को किसी भी बड़े परिवर्तन की नींव बताया। उन्होंने कहा कि जब लोग स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी लेते हैं, तभी कोई भी आंदोलन या विकास सफल हो सकता है। इसलिए समाज की सक्रिय भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कार्यक्रम में आध्यात्मिकता और आधुनिक विकास का अनोखा संगम देखने को मिला, जहां एक ओर परंपरा और संस्कृति का संदेश था, वहीं दूसरी ओर भविष्य की तकनीकी दिशा का संकेत भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। यह आयोजन इस विचार को मजबूत करता है कि भारत का विकास केवल आर्थिक या तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
असम में फिर मजबूत नेतृत्व की वापसी, हिमंता बिस्वा सरमा को मिला एनडीए विधायक दल का नेतृत्व, भाजपा

नई दिल्ली । असम की राजनीति में एक बार फिर नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है, जहां हिमंता बिस्वा सरमा को सर्वसम्मति से एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया है। इस निर्णय के बाद देश के कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में स्थिरता और विकास की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्रियों की ओर से आए संदेशों में असम में पिछले वर्षों में हुए विकास कार्यों और प्रशासनिक सुधारों की सराहना की गई है। कई नेताओं ने इसे जनता के विश्वास और लगातार मिल रहे समर्थन का परिणाम बताया है। साथ ही यह भी कहा गया कि आने वाले समय में राज्य की विकास यात्रा और मजबूत होगी तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में और तेजी आएगी। हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व को लेकर राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यह फैसला केवल संगठनात्मक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। एनडीए के भीतर एकजुटता और स्थिर नेतृत्व का संदेश इस चयन के जरिए स्पष्ट रूप से सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य में चल रही विकास योजनाओं को नई गति मिल सकती है और केंद्र व राज्य के बीच समन्वय और बेहतर होगा। असम में पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे, सामाजिक योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसे इस नेतृत्व परिवर्तन के बाद और आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है। जनता के लगातार समर्थन को भी इस निर्णय के पीछे एक बड़ा कारण माना जा रहा है, जिसने राजनीतिक स्थिरता को मजबूत किया है। इसी बीच राष्ट्रीय स्तर पर एक अन्य कार्यक्रम में देश के विकास, संस्कृति और नेतृत्व को लेकर सकारात्मक संदेश भी सामने आए, जहां विभिन्न क्षेत्रों में हुए बदलावों और प्रगति का उल्लेख किया गया। इसमें स्वच्छता, शिक्षा, योग और आर्थिक विकास जैसे विषयों को प्रमुखता से रखा गया, जिससे देश के बदलते स्वरूप की झलक मिली। कुल मिलाकर असम में हिमंता बिस्वा सरमा को दोबारा नेतृत्व मिलना और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों का समर्थन इस बात का संकेत है कि वर्तमान राजनीतिक माहौल स्थिरता और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नेतृत्व राज्य की विकास यात्रा को किस गति से आगे ले जाता है।
छत नहीं तो क्या हुआ! अब बालकनी में लगाएं सोलर पैनल, बिजली बिल में होगी बड़ी बचत

नई दिल्ली। बढ़ते बिजली बिलों के बीच अब बिना बड़ी छत वाले घरों में भी Solar Energy का इस्तेमाल आसान होता जा रहा है। दुनिया के कई देशों की तरह अब छोटे फ्लैट और किराए के घरों में रहने वाले लोग भी बालकनी सोलर सिस्टम या प्लग-इन सोलर सिस्टम की मदद से बिजली बचाने लगे हैं। बालकनी सोलर सिस्टम छोटे आकार का सोलर सेटअप होता है, जिसमें सोलर पैनल, माइक्रो इन्वर्टर और प्लग सिस्टम शामिल होता है। यह सूर्य की रोशनी से बिजली बनाकर सीधे घर के इलेक्ट्रिक सॉकेट से जुड़ सकता है। इसकी खास बात यह है कि इसे लगाने के लिए भारी निर्माण कार्य या जटिल वायरिंग की जरूरत नहीं पड़ती। विशेषज्ञों के अनुसार यह सिस्टम खास तौर पर फ्लैट, छोटे घर और किराए के मकानों में रहने वालों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। अगर बालकनी में पर्याप्त धूप आती है, तो इससे पंखा,लाइट इमिटिंग डायोड लाइट, टीवी, वाई-फाई राउटर, मोबाइल चार्जर और छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आसानी से चलाए जा सकते हैं। सोलर पैनल लगाने के लिए सबसे पहले ऐसी जगह चुननी होती है जहां दिनभर अच्छी धूप आती हो। इसके बाद पैनल को मजबूत स्टैंड या रेलिंग पर फिट किया जाता है और माइक्रो इन्वर्टर के जरिए घर के पावर सॉकेट से जोड़ा जाता है। जरूरत पड़ने पर बैटरी स्टोरेज भी लगाया जा सकता है ताकि रात में भी सोलर बिजली इस्तेमाल हो सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक 800 से 1200 वॉट तक का छोटा बालकनी सोलर सिस्टम हर महीने बिजली बिल में अच्छी बचत करा सकता है। बचत की वास्तविक राशि शहर की बिजली दर और मिलने वाली धूप पर निर्भर करती है। यूरोप, खासकर जर्मनी में बालकनी सोलर सिस्टम तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। भारत में भी दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे धूप वाले राज्यों में इसकी मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में छोटे Plug-in Solar सिस्टम घरेलू बिजली बचत का बड़ा विकल्प बन सकते हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर पुतिन का बड़ा संकेत, बोले- जंग अंत के करीब; जेलेंस्की से बातचीत के लिए भी छोड़े दरवाजे खुले

नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बड़ा बयान दिया है। पुतिन ने संकेत दिए हैं कि तीन साल से ज्यादा समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बातचीत करना चाहते हैं तो मॉस्को आने का रास्ता खुला है। मीडिया से बातचीत में पुतिन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जेलेंस्की के साथ किसी औपचारिक बैठक का प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन वह ऐसी मुलाकात से इनकार भी नहीं कर रहे हैं। उनके इस बयान को युद्ध खत्म करने की संभावित कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी टीम की भी तारीफ की। पुतिन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन यूक्रेन संकट को समाप्त कराने और शांति समझौते की दिशा में ईमानदारी से प्रयास कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि रूस ने युद्धविराम बढ़ाने और युद्धबंदियों की अदला-बदली जैसे प्रस्तावों को तुरंत स्वीकार किया था। पुतिन ने यूक्रेन पर आरोप लगाते हुए कहा कि विक्ट्री डे से पहले कीव प्रशासन कैदियों की अदला-बदली के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि रूस किसी देश के साथ रिश्ते खराब नहीं करना चाहता, लेकिन उकसावे वाली घटनाओं के कारण हालात और तनावपूर्ण हो सकते थे। युद्ध की शुरुआत पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि यूक्रेन के यूरोपीय संघ की ओर बढ़ते कदम, राजनीतिक उथल-पुथल और क्रीमिया विवाद के बाद हालात बिगड़ते गए, जिसके बाद रूस ने सैन्य अभियान शुरू किया। गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी यह युद्ध अब चौथे साल में पहुंच चुका है। इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। दुनिया के कई देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार युद्ध समाप्त कराने और शांति बहाल करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
CTC बनाम इन-हैंड सैलरी: ₹62 लाख की Google नौकरी से ज्यादा बचत कर रहा ₹36 लाख वाला WFH प्रोफेशनल!

नई दिल्ली। बड़ी सैलरी सुनते ही अक्सर लोगों को लगता है कि हर महीने मोटी कमाई हाथ में आती होगी, लेकिन टेक इंडस्ट्री की हकीकत कई बार इससे बिल्कुल अलग होती है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक उदाहरण चर्चा में आया, जिसमें Google में ₹62 लाख CTC पाने वाले कर्मचारी की तुलना एक वर्क फ्रॉम होम कॉन्ट्रैक्टर से की गई, जिसकी सालाना कमाई ₹36 लाख बताई गई। स्टार्टअप Wavelength के फाउंडिंग इंजीनियर देवांश भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि Google के कर्मचारी के पैकेज में बेसिक सैलरी, बोनस और RSU यानी स्टॉक ग्रांट शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ₹62 लाख के पैकेज में करीब ₹22 लाख बेसिक सैलरी, ₹35 लाख RSU और ₹5 लाख बोनस शामिल है। हालांकि RSU तुरंत कैश के रूप में नहीं मिलते, बल्कि कई वर्षों में हिस्सों में जारी किए जाते हैं। इसी वजह से टैक्स कटने के बाद कर्मचारी की मासिक इन-हैंड सैलरी लगभग ₹1.5 लाख से ₹1.8 लाख तक रह जाती है। वहीं दूसरी ओर रिमोट कॉन्ट्रैक्टर की अधिकतर कमाई सीधे कैश में होती है। साथ ही आयकर कानून की धारा 44ADA के तहत टैक्स छूट का फायदा मिलने से उसकी टैक्सेबल इनकम कम हो जाती है। ऐसे में रिपोर्ट के अनुसार टैक्स के बाद उसकी इन-हैंड कमाई करीब ₹2.7 लाख प्रति माह तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि CTC और इन-हैंड सैलरी में बड़ा अंतर सैलरी स्ट्रक्चर की वजह से होता है। बड़ी कंपनियां बोनस, स्टॉक और अन्य बेनिफिट्स को CTC में जोड़ देती हैं, जबकि कॉन्ट्रैक्ट या रिमोट जॉब में भुगतान अधिकतर सीधे कैश में मिलता है। हालांकि केवल इन-हैंड सैलरी के आधार पर नौकरी का मूल्यांकन करना सही नहीं माना जाता। बड़ी कंपनियों में नौकरी की स्थिरता, हेल्थ बेनिफिट्स, ब्रांड वैल्यू और लंबी अवधि की करियर ग्रोथ जैसे फायदे भी महत्वपूर्ण होते हैं, जबकि रिमोट जॉब में ज्यादा कैश फ्लो और कम खर्च का लाभ मिलता है।