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मायानगरी में जुटेगा विश्व सिनेमा का हुजूम, डॉक्युमेंट्री और शॉर्ट फिल्मों के महाकुंभ के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू

नई दिल्ली ।  दक्षिण एशिया में गैर-फीचर फिल्मों के सबसे पुराने और सम्मानित मंच के रूप में अपनी पहचान बना चुका मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल एक बार फिर अपने 19वें संस्करण के साथ वापसी कर रहा है। जून महीने की 15 तारीख से शुरू होने वाले इस सात दिवसीय महोत्सव के लिए प्रतिनिधियों के पंजीकरण की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है। मुंबई के पेडर रोड स्थित ऐतिहासिक एनएफडीसी कॉम्प्लेक्स में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम दुनिया भर के फिल्मकारों, निर्देशकों और सिनेमा प्रेमियों को एक साझा मंच प्रदान करता है। यह फेस्टिवल केवल फिल्मों के प्रदर्शन का जरिया नहीं है, बल्कि यह उन कहानियों को आवाज देने का माध्यम है जो अक्सर व्यावसायिक सिनेमा की चकाचौंध में पीछे छूट जाती हैं। महोत्सव में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिनिधियों को आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण पूरा करना होगा। प्रक्रिया को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए इसे ऑनलाइन रखा गया है, जहां नए आवेदकों को अपना विवरण साझा कर प्रोफाइल तैयार करनी होगी। सामान्य प्रतिभागियों के लिए पंजीकरण शुल्क 500 रुपये तय किया गया है, लेकिन सिनेमा की बारीकियों को समझने के लिए उत्सुक छात्रों को बड़ी राहत देते हुए उनके लिए पंजीकरण पूरी तरह निशुल्क रखा गया है। आयोजकों का उद्देश्य अधिक से अधिक युवाओं को वैश्विक सिनेमाई दृष्टिकोण और आधुनिक फिल्म निर्माण की तकनीकियों से जोड़ना है। पुरस्कारों की दृष्टि से इस वर्ष का महोत्सव अत्यंत भव्य होने वाला है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करने वाली फिल्मों के लिए कुल 55 लाख रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। महोत्सव के दौरान प्रदान किए जाने वाले गोल्डन और सिल्वर कोंच अवॉर्ड्स फिल्म जगत में काफी प्रतिष्ठित माने जाते हैं। इसके साथ ही भारतीय सिनेमा के महान फिल्मकार के नाम पर दिया जाने वाला वी. शांताराम लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड इस साल भी चर्चा का केंद्र रहेगा। इसके अलावा नवाचार और तकनीकी कौशल को प्रोत्साहित करने के लिए प्रमोद पति अवॉर्ड, तकनीकी उत्कृष्टता पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक जैसे सम्मान भी प्रदान किए जाएंगे। फिल्मों के प्रदर्शन के साथ-साथ यह महोत्सव बौद्धिक चर्चाओं और कौशल विकास का भी केंद्र बनेगा। सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में रेड कार्पेट इवेंट्स, दिग्गज फिल्मकारों की मास्टरक्लास और पैनल डिस्कशन जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। इस वर्ष का एक मुख्य आकर्षण ‘वेव्स डॉक बाजार’ होगा, जिसमें पहली बार इमर्सिव मार्केट को पेश किया जा रहा है, जो फिल्म निर्माताओं को अपनी कृतियों के विपणन और नए निवेशकों से जुड़ने के आधुनिक अवसर प्रदान करेगा। यह आयोजन न केवल कला की सराहना करने का स्थान है, बल्कि यह भारतीय और वैश्विक फिल्म उद्योग के भविष्य की नई इबारत लिखने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरेगा।

iPhone Air पर Flipkart Sale में बड़ा ऑफर, करीब ₹24,000 तक की छूट के साथ मिल रहा प्रीमियम iPhone

नई दिल्ली। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart की Sasa Lele Sale में Apple का प्रीमियम स्मार्टफोन Apple iPhone Air भारी डिस्काउंट के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। यह सेल चुनिंदा यूजर्स के लिए शुरू हो चुकी है, जबकि बाकी ग्राहकों के लिए ऑफर कुछ दिनों में लाइव होगा। लॉन्च के समय iPhone Air की कीमत लगभग ₹1,19,900 थी, लेकिन सेल में यह फोन करीब ₹99,900 के आसपास लिस्ट किया गया है। इसके अलावा बैंक ऑफर और अतिरिक्त डिस्काउंट जोड़ने पर कुल मिलाकर लगभग ₹24,000 तक की बचत का फायदा मिल रहा है, जिससे इसकी प्रभावी कीमत और भी कम हो जाती है। iPhone Air को अब तक का सबसे स्लिम iPhone बताया जा रहा है, जिसकी मोटाई लगभग 5.6mm है। इसमें 6.5 इंच का डिस्प्ले, A19 Pro चिपसेट और टाइटेनियम फिनिश डिजाइन दिया गया है, जो इसे प्रीमियम लुक और फील देता है। कैमरा सेटअप की बात करें तो इसमें 48MP का रियर कैमरा और 18MP का फ्रंट कैमरा मिलता है, जो डेली फोटोग्राफी और सेल्फी के लिए बेहतर रिजल्ट देने का दावा करता है। वहीं रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें करीब 3149mAh बैटरी दी गई है। टेक मार्केट में यह ऑफर ऐसे समय आया है जब कई फ्लैगशिप स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ रही हैं, ऐसे में iPhone Air पर यह डील प्रीमियम फोन खरीदने वालों के लिए एक आकर्षक मौका माना जा रहा है।

दोस्ती के खातिर संसद पहुंचे थे बिग बी, लेकिन सियासी साजिशों और आरोपों ने तीन साल में ही करा दी ग्लैमर की दुनिया में वापसी।

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमिताभ बच्चन का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, लेकिन उनके जीवन का एक अध्याय ऐसा भी है जिसे वह अक्सर एक कड़वी याद की तरह देखते हैं। साल 1984 में जब देश एक बड़े राजनीतिक बदलाव से गुजर रहा था, तब अपनी गहरी दोस्ती और भावनात्मक जुड़ाव के कारण अमिताभ बच्चन ने फिल्मी पर्दे की चकाचौंध छोड़ राजनीति की ऊबड़-खाबड़ गलियों में कदम रखा था। उन्होंने अपने जन्मस्थान इलाहाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया और एक अनुभवी राजनेता को रिकॉर्ड मतों से शिकस्त देकर संसद में अपनी जगह बनाई। उस वक्त ऐसा लगा था कि जनता का यह अपार प्रेम उन्हें राजनीति के शिखर पर ले जाएगा, लेकिन जल्द ही उन्हें यह महसूस होने लगा कि फिल्म के सेट और संसद के गलियारों के बीच एक गहरी खाई है जिसे पार करना उनके बस की बात नहीं थी। राजनीति के उस छोटे से सफर में अमिताभ बच्चन ने जमीनी हकीकत को बहुत करीब से देखा। उन्होंने महसूस किया कि ग्रामीण भारत के लोग कितने सीधे और सरल हैं, जो अपने नेता को देवता की तरह पूजते हैं। हालांकि, व्यवस्था के भीतर की पेचीदगियों और हर तरफ से आने वाले सवालों ने उन्हें बेचैन करना शुरू कर दिया था। उनके लिए यह समझना मुश्किल हो रहा था कि किस तरफ बात करनी है और विरोधियों के तीखे हमलों का जवाब कैसे देना है। उन्होंने बाद के वर्षों में स्वीकार किया कि वह राजनीति के लिए बने ही नहीं थे और उनका वहां जाना पूरी तरह से एक भावुक निर्णय था। वह दो साल उनके जीवन के लिए बहुत कीमती रहे क्योंकि उन्होंने वहां से भारत की असली आत्मा को समझा, लेकिन इसके बदले उन्हें जो मानसिक शांति खोनी पड़ी, वह बहुत बड़ी कीमत थी। अमिताभ बच्चन के राजनीतिक करियर का दुखद अंत तब हुआ जब बोफोर्स घोटाले की आग ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया। इस विवाद में उनका नाम भी घसीटा गया, जिसने महानायक की बेदाग छवि को जनता की नजरों में संदिग्ध बना दिया। उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया था और विरोधियों के लगातार बढ़ते दबाव के बीच उन्होंने 1987 में अपने पद से इस्तीफा देना ही बेहतर समझा। यह मामला उनके जीवन पर एक काले साये की तरह करीब ढाई दशक तक मंडराता रहा। हालांकि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद साल 2012 में उन्हें पूरी तरह निर्दोष घोषित कर दिया गया, लेकिन यह न्याय मिलने में बहुत देर हो चुकी थी। उनके माता-पिता उनकी बेगुनाही देखे बिना ही दुनिया से चले गए, जिसका दुख आज भी उनके शब्दों में झलकता है। अपने उस दौर को याद करते हुए अमिताभ बच्चन ने इसे ‘नरक’ के समान बताया था। उन्होंने साझा किया कि किस तरह उन्हें और उनके परिवार को निशाना बनाया गया और कई बड़े नेताओं ने उन्हें अपनी जान के खतरे तक की चेतावनी दी थी। जिस इंसान ने कभी राजनीति में आने का सपना भी नहीं देखा था, उसे व्यवस्था के सबसे क्रूर रूप का सामना करना पड़ा। इस कड़वे अनुभव के बाद उन्होंने कसम खा ली कि वह फिर कभी सक्रिय राजनीति का हिस्सा नहीं बनेंगे। आज जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं, तो वह उन दो सालों को एक ऐसी सीख मानते हैं जिसने उन्हें यह समझा दिया कि हर सफल अभिनेता एक सफल राजनेता नहीं हो सकता और हर मैदान हर किसी के लिए नहीं बना होता।

अक्षय खन्ना ने खाने पर टोकने वालों को लताड़ा, बोले-दुआओं से बनती है फिल्म..

नई दिल्ली । सिनेमा की दुनिया में अक्षय खन्ना को एक ऐसे मंझे हुए कलाकार के रूप में जाना जाता है जो अपनी निजी जिंदगी और सेट पर अपने व्यवहार को लेकर बेहद अनुशासित रहते हैं। अक्सर खामोश रहने वाले अक्षय के बारे में कहा जाता है कि वह अपने काम से काम रखते हैं और फालतू की चर्चाओं से दूर रहते हैं। लेकिन हाल ही में उनके एक पुराने साथी कलाकार ने उस घटना का विवरण दिया है, जिसने अक्षय के एक अलग ही पहलू को दुनिया के सामने रखा है। यह वाकया उस समय का है जब एक फिल्म की शूटिंग चल रही थी और वहां एक ऐसा विवाद खड़ा हुआ जिसने शांत रहने वाले अक्षय को ‘ज्वालामुखी’ की तरह फटने पर मजबूर कर दिया। दरअसल, पूरा मामला एक सह-कलाकार के सम्मान और उसकी भूख से जुड़ा था, जिसे प्रोडक्शन टीम के कुछ लोगों ने बेहद तुच्छ समझा था। सेट पर मौजूद गवाहों के अनुसार, एक कैरेक्टर एक्टर जो उस फिल्म का हिस्सा थे, लंच के समय अक्षय के होटल में भोजन करने पहुंचे थे। वे किसी दूसरे होटल में ठहरे हुए थे, इसलिए तकनीकी नियमों का हवाला देकर वहां मौजूद प्रोड्यूसर के करीबियों या परिवार के सदस्यों ने उन पर आपत्ति जता दी। जैसे ही वह कलाकार भोजन का पहला निवाला लेने वाले थे, उन्हें टोक दिया गया और कहा गया कि वे वहां का खाना नहीं खा सकते। उस कलाकार को यह बात इतनी चुभ गई कि उन्होंने चुपचाप अपनी प्लेट किनारे रख दी और वहां से हटकर अकेले बैठ गए। अक्षय खन्ना दूर से यह सब देख रहे थे और उनसे एक कलाकार का यह सार्वजनिक अपमान बर्दाश्त नहीं हुआ। जो अक्षय कभी किसी के विवाद में नहीं पड़ते, उस दिन उन्होंने अपनी गरिमा और शांति को किनारे रखकर मोर्चा संभाल लिया। अक्षय खन्ना का गुस्सा उस दिन सातवें आसमान पर था। उन्होंने न केवल उस कलाकार का पक्ष लिया बल्कि पूरी यूनिट और प्रोड्यूसर के सामने अपना विरोध दर्ज कराया। बताया जाता है कि अक्षय इस कदर आक्रोशित थे कि उन्होंने प्रोड्यूसर और संबंधित क्रू मेंबर्स को जमकर लताड़ा और शब्दों की मर्यादा भी टूट गई। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा कि कोई भी फिल्म इस बात से सफल नहीं होती कि आपने सेट पर कितनी प्लेटें बचाईं या कितना राशन कम खर्च किया। अक्षय ने दहाड़ते हुए कहा कि फिल्में लोगों की दुआओं और उनके आशीर्वाद से बनती हैं, किसी भूखे का अपमान करके नहीं। उन्होंने साफ कर दिया कि अगर एक कलाकार के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो काम की गुणवत्ता का कोई मोल नहीं रह जाएगा। इस घटना ने सेट पर मौजूद हर शख्स को हैरान कर दिया था क्योंकि किसी ने भी अक्षय का ऐसा ‘रौद्र रूप’ पहले कभी नहीं देखा था। अक्षय ने उस दिन यह साबित कर दिया कि वे भले ही कम बोलते हों, लेकिन जब बात किसी के स्वाभिमान और मानवता की आती है, तो वे पीछे हटने वालों में से नहीं हैं। उनके इस कड़े रुख के बाद सेट का माहौल पूरी तरह बदल गया और प्रोडक्शन को अपनी गलती का अहसास हुआ। यह किस्सा आज भी फिल्म जगत के गलियारों में चर्चा का विषय रहता है क्योंकि यह दिखाता है कि पर्दे पर विलेन की भूमिका निभाने वाला यह कलाकार असल जिंदगी में कमजोरों और अपने साथियों के लिए किसी नायक से कम नहीं है। अक्षय की इस बेबाकी ने यह संदेश दिया कि फिल्म निर्माण केवल कैमरे और लाइट्स का खेल नहीं है, बल्कि यह एक परिवार की तरह है जहां हर सदस्य का सम्मान सर्वोपरि है।

AI के दौर में सुरक्षित करियर: लीडरशिप और इमोशनल स्किल्स पर नहीं पड़ेगा असर, नौकरी पर खतरा सीमित

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी Artificial Intelligence के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने नौकरी बाजार में बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार अगले 10 सालों में लगभग 25% नौकरियां ऑटोमेशन की वजह से प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन कुछ ऐसी महत्वपूर्ण स्किल्स हैं जिन्हें AI पूरी तरह रिप्लेस नहीं कर सकता। रिपोर्ट के मुताबिक, कोडिंग, डेटा एनालिसिस और कंटेंट जनरेशन जैसे कई तकनीकी कामों में AI इंसानों की जगह ले सकता है, लेकिन इसके बावजूद लीडरशिप, टीम मैनेजमेंट और इमोशनल स्किल्स पर इसका असर बेहद सीमित रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इंसानों की लीडरशिप क्षमता, टीम को प्रेरित करना, विवाद सुलझाना और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेना जैसी स्किल्स अभी भी पूरी तरह इंसानों पर निर्भर रहेंगी। AI इनसे जुड़े कुछ टास्क जरूर कर सकता है, लेकिन इंसानी समझ और भावनात्मक जुड़ाव की बराबरी नहीं कर सकता। रिपोर्ट में टीमवर्क को दूसरी सबसे मजबूत स्किल बताया गया है, क्योंकि इसमें भरोसा और लंबे समय तक रिश्ते बनाने की क्षमता शामिल होती है, जिसे मशीनें पूरी तरह समझ नहीं पातीं। इसके अलावा नेगोशिएशन, मेंटरिंग, पब्लिक स्पीकिंग और चेंज मैनेजमेंट जैसी स्किल्स भी AI के प्रभाव से काफी हद तक सुरक्षित मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में नौकरी का स्वरूप जरूर बदलेगा, लेकिन जो लोग मानव-केंद्रित और इमोशनल इंटेलिजेंस वाली स्किल्स विकसित करेंगे, उनके लिए AI खतरा नहीं बल्कि एक सहयोगी तकनीक साबित होगी।

Galaxy S25 Ultra Discount: फ्लैगशिप फोन पर भारी छूट, 1 लाख से कम में मिल रहा Samsung का धांसू स्मार्टफोन

नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स की सेल में इस समय सैमसंग गैलेक्सी S25 अल्ट्रा पर बड़ा डिस्काउंट ऑफर किया जा रहा है, जिससे यह प्रीमियम फ्लैगशिप फोन काफी कम कीमत में खरीदा जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैमसंग गैलेक्सी S25 अल्ट्रा जिसकी लॉन्च कीमत लगभग ₹1,29,999 थी, वह अब सेल में करीब ₹30,000 के फ्लैट डिस्काउंट के साथ ₹99,999 के आसपास उपलब्ध है। इसके अलावा बैंक ऑफर, कूपन और कैशबैक मिलाकर कुल मिलाकर करीब ₹35,000 से ज्यादा की बचत का फायदा भी ग्राहकों को मिल रहा है, जिससे इसकी प्रभावी कीमत ₹92,000 से नीचे आ जाती है। इस ऑफर को Amazon जैसी ई-कॉमर्स सेल में सीमित समय के लिए उपलब्ध बताया जा रहा है, जहां अलग-अलग बैंक कार्ड और कूपन ऑफर्स के जरिए अतिरिक्त छूट भी मिल रही है। फीचर्स की बात करें तो इस फोन में 6.9 इंच की QHD+ डायनामिक AMOLED 2X डिस्प्ले मिलती है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करती है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर और 12GB RAM का कॉम्बिनेशन दिया गया है, जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग को स्मूद बनाता है। कैमरा सेक्शन में 200MP का मेन सेंसर, 50MP अल्ट्रा-वाइड, 50MP टेलीफोटो और 10MP सपोर्ट लेंस दिया गया है, जबकि फ्रंट में 12MP का सेल्फी कैमरा मौजूद है। फोन में 5000mAh बैटरी के साथ 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी मिलता है। टेक मार्केट में यह ऑफर ऐसे समय आया है जब फ्लैगशिप स्मार्टफोन की कीमतें आमतौर पर ऊंची रहती हैं, ऐसे में यह डील प्रीमियम फोन चाहने वालों के लिए एक अच्छा मौका माना जा रहा है।

आईपीएल 2026 में इन 5 भारतीय सितारों को नहीं मिला मैदान पर उतरने का मौका..

नई दिल्ली । क्रिकेट के सबसे बड़े मंच पर जहाँ एक ओर युवाओं की नई पौध अपनी चमक बिखेर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे नामी खिलाड़ी भी हैं जिनका पूरा सीजन केवल डगआउट की सफेद कुर्सियों पर बैठकर बीत गया। इस सूची में सबसे ऊपर पृथ्वी शॉ का नाम आता है, जो कभी भारतीय बल्लेबाजी की अगली पीढ़ी के ध्वजवाहक माने जाते थे। दिल्ली की टीम ने उन्हें नीलामी में दोबारा अपने साथ जोड़ा तो था, लेकिन पूरे टूर्नामेंट के दौरान कप्तान और प्रबंधन ने उन्हें एक भी मैच की प्लेइंग इलेवन में जगह देना मुनासिब नहीं समझा। 75 लाख रुपये में बिकने वाले शॉ के लिए यह साल उनके करियर की सबसे बड़ी गिरावट के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि कभी उनकी गिनती टीम के सबसे महंगे और अनिवार्य खिलाड़ियों में होती थी। अब उनका पूरा सीजन बिना एक भी गेंद खेले खत्म होने की कगार पर है। अनुभवी तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा की स्थिति भी कुछ इसी तरह की रही। गुजरात की टीम ने उन्हें रिटेन कर उन पर भरोसा तो जताया, लेकिन मैदान की हकीकत कुछ और ही रही। युवा तेज गेंदबाजों की बढ़ती रफ्तार और टी-20 क्रिकेट की बदलती मांग के बीच ईशांत की अनुभव वाली रणनीति टीम के समीकरणों में फिट नहीं बैठ सकी। पिछले सीजन के महंगे इकोनॉमी रेट ने उनकी राह और मुश्किल कर दी, जिसके चलते वह पूरे सीजन केवल नेट प्रैक्टिस और ड्रेसिंग रूम तक ही सीमित रह गए। उनके साथ ही अर्जुन तेंदुलकर की चर्चा भी काफी रही, जो मुंबई से ट्रेड होकर लखनऊ की टीम में पहुंचे थे। सचिन तेंदुलकर के पुत्र होने के नाते उन पर हमेशा कैमरे की नजर रही, लेकिन मैदान पर वह अपनी गेंदबाजी का जौहर दिखाने को तरसते रहे। पिछले दो वर्षों से लगातार मौकों का इंतजार कर रहे अर्जुन के लिए यह सीजन पेशेवर तौर पर बेहद निराशाजनक साबित हुआ है। वहीं घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा करने वाले युवा मुशीर खान के लिए भी पंजाब की टीम का सफर केवल सीखने तक ही सीमित रहा। अपने भाई सरफराज खान की तरह आक्रामक बल्लेबाजी और स्पिन गेंदबाजी के लिए मशहूर मुशीर को इस साल एक भी मुकाबले में खुद को साबित करने की चुनौती नहीं मिली। टीम के पास मौजूद विदेशी विकल्पों और सीनियर ऑलराउंडर्स की मौजूदगी ने उन्हें बाउंड्री के बाहर ही रोके रखा। इसी फेहरिस्त में अनुभवी बल्लेबाज राहुल त्रिपाठी का नाम भी जुड़ गया है, जिनकी कोलकाता की टीम में वापसी तो हुई लेकिन वापसी का यह जश्न मैदान तक नहीं पहुंच सका। पिछले साल के खराब प्रदर्शन का असर उनके चयन पर साफ दिखा, जहाँ मैनेजमेंट ने उन पर भरोसा जताने के बजाय नए चेहरों के साथ जाना बेहतर समझा। इन पांचों खिलाड़ियों का भाग्य यह स्पष्ट करता है कि इस खेल के सबसे छोटे और ग्लैमरस प्रारूप में आपका नाम चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, तात्कालिक प्रदर्शन और टीम का संतुलन ही आपकी जगह तय करता है। करोड़ों के अनुबंध और प्रशंसकों की भारी उम्मीदों के बीच शुरू हुआ इन खिलाड़ियों का सफर अब प्लेऑफ के करीब आते-आते केवल डगआउट की यादों तक सीमित रह गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अगले सीजन की नीलामी से पहले ये खिलाड़ी खुद को मानसिक रूप से कैसे तैयार करते हैं, क्योंकि मैदान से दूर रहकर अपनी लय बनाए रखना किसी भी पेशेवर खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। फिलहाल, इनके लिए यह सीजन केवल एक लंबा इंतजार बनकर रह गया है।

भगवान शिव की आराधना का विशेष दिन: मासिक शिवरात्रि पर व्रत और पूजा का महत्व

नई दिल्ली । मई महीने की मासिक शिवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है, जो भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। पंचांग के अनुसार मई 2026 की मासिक शिवरात्रि 14 मई 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 13 मई की रात से होगी और इसका समापन अगले दिन तक रहेगा। इस दिन भक्त व्रत रखकर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे और मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की उपासना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से जो श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और पूरी श्रद्धा से शिवजी की पूजा करते हैं, उन्हें सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इस दिन पूजा का विशेष महत्व निशिता काल में माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मध्य रात्रि का समय भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ होता है। इसी समय शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान कर संकल्प लेते हैं और पूरे दिन उपवास रखते हैं। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य लाती है। मंदिरों में इस दिन विशेष सजावट की जाती है और भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। कई स्थानों पर रात्रि जागरण और भजन संध्या का भी आयोजन किया जाता है।

Google Chrome Privacy Update: अब वेबसाइट्स नहीं कर पाएंगी आपकी सटीक लोकेशन ट्रैक, मिलेगा यूजर्स को नया कंट्रोल फीचर

नई दिल्ली। गूगल क्रोम ने यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत बनाने के लिए एक नया अपडेट जारी किया है, जिसके बाद मोबाइल यूजर्स अब वेबसाइट्स को अपनी सटीक (Precise) लोकेशन की जगह अनुमानित (Approximate) लोकेशन शेयर कर सकेंगे। इस नए फीचर के तहत जब भी कोई वेबसाइट लोकेशन एक्सेस की अनुमति मांगेगी, यूजर के पास यह विकल्प होगा कि वह अपनी असली GPS लोकेशन साझा करे या केवल सामान्य एरिया की जानकारी दे। इसका मकसद यह है कि वेबसाइट्स को जरूरत से ज्यादा डिटेल्ड लोकेशन डेटा न मिल सके। अब तक होता यह था कि लोकेशन परमिशन देने पर वेबसाइट्स यूजर की बिल्कुल सटीक जगह तक पहुंच सकती थीं, जिससे कई बार प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ जाती थी। लेकिन नए अपडेट के बाद यह डेटा लिमिटेड रहेगा और सिर्फ क्षेत्रीय जानकारी ही शेयर होगी। हालांकि Google ने यह भी साफ किया है कि कुछ जरूरी सेवाओं जैसे नेविगेशन, कैब बुकिंग, फूड डिलीवरी या आसपास की सटीक लोकेशन खोजने वाले ऐप्स में Precise Location की जरूरत बनी रहेगी। ऐसे मामलों में यूजर को पहले की तरह पूरा लोकेशन एक्सेस देना होगा। कंपनी के मुताबिक इस बदलाव का उद्देश्य यूजर्स को ज्यादा कंट्रोल देना और अनावश्यक लोकेशन ट्रैकिंग को रोकना है। इससे उन वेबसाइट्स की मनमानी भी कम होगी जो बिना जरूरत यूजर्स का सटीक लोकेशन डेटा इकट्ठा करती थीं। फिलहाल यह फीचर मोबाइल यूजर्स के लिए शुरू किया गया है और आने वाले समय में इसे डेस्कटॉप वर्जन में भी लागू किए जाने की संभावना है।

गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही: दो सीबीएमओ को नोटिस, 15 दिन का अल्टीमेटम

नई दिल्ली । राजगढ़ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और स्वास्थ्य केंद्रों की खराब स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत दो सीबीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि कई कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है। जानकारी के अनुसार, नरसिंहगढ़ ब्लॉक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में खराब प्रदर्शन पर सीबीएमओ डॉ. राजेंद्र अहिरवार को नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा खिलचीपुर और राजगढ़ ब्लॉक के सीबीएमओ को बैठक में अनुपस्थित रहने पर कारण बताओ नोटिस दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के वेतन काटने की कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर गर्भवती महिलाओं का पंजीयन समय पर नहीं हो रहा है और उनकी नियमित जांच में लापरवाही बरती जा रही है। इस पर प्रशासन ने सख्त नाराजगी जताते हुए प्रत्येक ब्लॉक से सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले पांच सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और एएनएम को भी नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा ओपीडी सेवाओं और स्वास्थ्य शिविरों में तय लक्ष्य के अनुसार एक्स-रे जांच नहीं होने पर भी संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई गई है। प्रशासन ने इसे गंभीर सेवा लापरवाही मानते हुए सुधार के निर्देश दिए हैं। पोषण पुनर्वास केंद्रों की स्थिति भी समीक्षा में संतोषजनक नहीं पाई गई। यहां बच्चों की कम संख्या और समय से पहले डिस्चार्ज किए जाने के मामलों पर भी कार्रवाई की गई है। इस पर जिले के सभी छह फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. इच्छित गढ़पाले ने स्पष्ट कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों में जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखता है तो और भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।