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White Hair Solution: किचन इंग्रेडिएंट्स से पाएं काले और मजबूत बाल

नई दिल्ली । आज के समय में कम उम्र में सफेद बालों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली, तनाव और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स के बढ़ते उपयोग को इसका प्रमुख कारण माना जाता है। ऐसे में अधिकतर लोग तुरंत असर के लिए बाजार में मिलने वाले हेयर डाई का इस्तेमाल करने लगते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें मौजूद केमिकल्स बालों को लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी बीच आयुर्वेद आधारित घरेलू उपाय एक सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आ रहे हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे किचन में मौजूद आंवला, मेथी, कड़ी पत्ता, कॉफी, चायपत्ती और मेहंदी जैसी चीजें बालों को प्राकृतिक रूप से काला करने में मदद कर सकती हैं। ये न केवल बालों के रंग को सुधारते हैं, बल्कि जड़ों को मजबूत भी बनाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आंवला बालों के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करता है, जिसमें मौजूद विटामिन C बालों की जड़ों को मजबूत करता है और समय से पहले सफेद होने की प्रक्रिया को धीमा करता है। वहीं, कॉफी और चायपत्ती बालों को प्राकृतिक गहरा रंग देने में मदद करते हैं, और जब इन्हें मेहंदी के साथ मिलाया जाता है, तो बालों को सुंदर ब्राउन या ब्लैक शेड मिलता है। घरेलू हेयर कलर बनाने की प्रक्रिया भी काफी आसान है। इसके लिए पानी में आंवला पाउडर, कड़ी पत्ता, लौंग और थोड़ी कॉफी डालकर उबाला जाता है। फिर इसे छानकर मेहंदी मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है। कुछ घंटों तक रखने के बाद इस मिश्रण को बालों में लगाकर 2 से 3 घंटे तक छोड़ दिया जाता है और फिर धो लिया जाता है।यह नेचुरल तरीका बालों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि उन्हें पोषण देता है। जहां केमिकल डाई बालों को रूखा और कमजोर बना देती है, वहीं यह घरेलू नुस्खा बालों को मुलायम, घना और चमकदार बनाने में मदद करता है। इसके नियमित उपयोग से न केवल सफेद बालों की समस्या कम हो सकती है, बल्कि डैंड्रफ और हेयर फॉल जैसी समस्याओं में भी राहत मिलने की संभावना रहती है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपाय धीरे-धीरे असर दिखाता है लेकिन लंबे समय तक बालों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। कुल मिलाकर, केमिकल हेयर डाई की जगह प्राकृतिक और घरेलू उपाय अपनाना बालों के लिए अधिक सुरक्षित और लाभकारी विकल्प माना जा रहा है, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के बालों को प्राकृतिक सुंदरता प्रदान कर सकता है।

RO Filter Scam Alert: बिना जांच हर 6 महीने फिल्टर बदलवाना पड़ सकता है बड़ा नुकसान

नई दिल्ली। घर-घर में RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) वॉटर प्यूरीफायर आज एक जरूरत बन चुका है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है क्या हर 6 महीने में RO फिल्टर बदलना सच में जरूरी है या फिर यह एक सर्विस स्कैम है? कई बार सर्विस टेक्नीशियन बिना किसी जांच के फिल्टर बदलने की सलाह देते हैं और लोगों को डराते हैं कि पुराना फिल्टर इस्तेमाल करने से बीमारी हो सकती है। लेकिन सच्चाई यह है कि हर बार फिल्टर बदलना जरूरी नहीं होता, यह पूरी तरह पानी की क्वालिटी और मशीन की स्थिति पर निर्भर करता है। RO सिस्टम में मुख्य रूप से सेडिमेंट फिल्टर, कार्बन फिल्टर, RO मेम्ब्रेन और कभी-कभी UF फिल्टर लगे होते हैं। सेडिमेंट फिल्टर पानी में मौजूद धूल और मिट्टी के कण रोकता है, जबकि कार्बन फिल्टर गंध और क्लोरीन हटाता है। RO मेम्ब्रेन सबसे अहम हिस्सा होता है, जो पानी से घुले हुए साल्ट्स, भारी धातु और हानिकारक तत्व हटाता है। इन सभी की लाइफ अलग-अलग होती है और इन्हें समय से पहले बदलना हमेशा जरूरी नहीं होता। अक्सर देखा गया है कि कुछ कंपनियां या सर्विस एजेंट हर 5–6 महीने में पूरे फिल्टर सेट बदलने का दबाव बनाते हैं। अगर ग्राहक सवाल न करे तो अतिरिक्त पैसे वसूले जाते हैं। जबकि असलियत यह है कि फिल्टर बदलने का सही तरीका जांच पर आधारित होना चाहिए, न कि तय समय पर। आप खुद भी आसानी से जांच सकते हैं कि फिल्टर बदलने की जरूरत है या नहीं। इसके लिए सबसे जरूरी टूल है TDS मीटर। अगर RO से निकलने वाले पानी का TDS 50 से 150 के बीच है, तो इसका मतलब है कि मेम्ब्रेन ठीक काम कर रही है और पानी पीने योग्य है। ऐसे में तुरंत फिल्टर बदलने की कोई जरूरत नहीं होती। दूसरा तरीका है पानी के स्वाद और गंध को समझना। अगर पानी का स्वाद अचानक बदल जाए, उसमें बदबू आने लगे या रंग में बदलाव दिखे, तभी फिल्टर खराब होने की संभावना होती है। इसके अलावा अगर RO से पानी बहुत धीमी गति से आने लगे या टंकी भरने में ज्यादा समय लगे, तो यह सेडिमेंट फिल्टर या मेम्ब्रेन जाम होने का संकेत हो सकता है। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि सर्विस के दौरान हमेशा पुराने फिल्टर को खुद देखकर ही बदलने दें। अगर फिल्टर बहुत ज्यादा काला या जाम दिखे तभी उसे बदलना सही है। कई बार हल्के गंदे फिल्टर भी बदले जाते हैं, जो अभी काम कर सकते हैं। कंपनी के सर्विस मैनुअल में भी हर फिल्टर की लाइफ दी होती है। उसी के आधार पर फैसला लेना चाहिए। अगर कोई टेक्नीशियन बिना जांच के जल्दी-जल्दी बदलाव की सलाह दे रहा है, तो उससे सवाल जरूर करें। RO की लाइफ बढ़ाने के लिए समय-समय पर टैंक की सफाई करें, इनपुट पानी अगर ज्यादा गंदा है तो प्री-फिल्टर लगवाएं और मशीन को लगातार 24 घंटे चालू न रखें। इससे फिल्टर लंबे समय तक चलते हैं और अनावश्यक खर्च से बचा जा सकता है। निष्कर्ष यही है कि RO फिल्टर बदलना एक तकनीकी जरूरत है, न कि तय समय पर होने वाला नियम। सही जानकारी और थोड़ी सावधानी से आप फर्जी सर्विस और बेवजह खर्च से खुद को बचा सकते हैं।

QR कोड बनाम CAPTCHA: गूगल का नया वेरिफिकेशन सिस्टम कितना सुरक्षित, प्राइवेसी को लेकर उठे सवाल

नई दिल्ली। वेबसाइट्स पर अब तक इंसान और बॉट में फर्क करने के लिए CAPTCHA (जैसे कार, साइकिल पहचानना या कोड भरना) का इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन अब एक नए तरीके की चर्चा तेज हो गई है जिसमें QR कोड स्कैन करके यूजर को वेरिफाई किया जाएगा। इस नए सिस्टम में यूजर को अपने मोबाइल से QR कोड स्कैन करना होगा, जिसके बाद गूगल प्ले सर्विसेज के जरिए डिवाइस की जानकारी वेरीफिकेशन के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रक्रिया CAPTCHA की जगह एक आसान विकल्प के रूप में लाई जा सकती है, लेकिन इसके साथ प्राइवेसी को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि QR कोड स्कैन करने के बाद यूजर की डिवाइस और एक्टिविटी डेटा गूगल सिस्टम से लिंक हो सकता है, जिससे यह पता चल सकता है कि यूजर कौन सी वेबसाइट्स विजिट कर रहा है। हालांकि अभी तक गूगल की ओर से इस फीचर को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन टेक कम्युनिटी में चर्चा है कि इसके लिए एंड्रॉयड डिवाइस में गूगल प्ले सर्विस का अपडेटेड वर्जन जरूरी हो सकता है। इससे यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिस्टम वाकई सुरक्षा बढ़ाएगा या यूजर की प्राइवेसी पर असर डालेगा। कुल मिलाकर, यह नया सिस्टम अगर लागू होता है तो इंटरनेट सिक्योरिटी में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके साथ डेटा प्राइवेसी और ट्रैकिंग को लेकर बहस भी तेज होना तय है।

गुरु प्रदोष व्रत 2026: 14 मई को बन रहा शुभ योग, शिव कृपा से पूरी होंगी मनोकामनाएं, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

नई दिल्ली। मई 2026 का पहला प्रदोष व्रत 14 मई, गुरुवार को रखा जाएगा, जिसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ रहा है और इसका विशेष महत्व इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यह भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि 14 मई को दिन में लगभग 11:21 बजे शुरू होकर 15 मई सुबह 8:32 बजे तक रहेगी। लेकिन प्रदोष काल (संध्या समय) में तिथि होने के कारण व्रत 14 मई को ही रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:22 बजे से 7:04 बजे तक रहेगा, जो शिव आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय, मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता मिलती है। इसके साथ ही जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने से होती है। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर घी का दीपक जलाकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। दिनभर शिव नाम का जप और सात्त्विक विचार रखने की सलाह दी जाती है। शाम के समय शिव मंदिर में जाकर पंचामृत से अभिषेक, बेलपत्र अर्पण, चंदन और दीपदान करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के अंत में गुरु प्रदोष व्रत कथा का पाठ और आरती की जाती है। प्रसाद का वितरण परिवार में करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

राहु का महागोचर 2026! राजनीति से टेक्नोलॉजी तक दिखेगा असर, कई राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ तो कुछ की बढ़ेगी परेशानी

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में राहु को रहस्य, भ्रम, अचानक घटनाओं और अप्रत्याशित बदलावों का ग्रह माना जाता है। यही वजह है कि जब भी राहु राशि परिवर्तन करते हैं तो उसका प्रभाव केवल व्यक्ति के जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि देश-दुनिया, राजनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्रों तक दिखाई देता है। साल 2026 में राहु पूरे समय कुंभ राशि में प्रभाव बनाए रखेंगे और फिर 5 दिसंबर 2026 को शनि की राशि मकर में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह गोचर आने वाले समय में कई बड़े बदलावों का संकेत दे रहा है। माना जा रहा है कि राहु के मकर राशि में प्रवेश करते ही शासन-प्रशासन, आर्थिक नीतियों और वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो सकती है। कई देशों में सत्ता परिवर्तन, नीतिगत फेरबदल और प्रशासनिक स्तर पर बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं। वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और साइबर सेक्टर में अचानक तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि राहु भ्रम और अस्थिरता का भी कारक माना जाता है, इसलिए फेक न्यूज, डिजिटल धोखाधड़ी और अफवाहों जैसी स्थितियां भी बढ़ सकती हैं। मेष राशि वालों के लिए यह समय करियर में बदलाव और नई जिम्मेदारियां लेकर आ सकता है। अचानक यात्राओं के योग बनेंगे, लेकिन जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान पहुंचा सकता है। वृषभ राशि वालों को मानसिक तनाव और उलझनों का सामना करना पड़ सकता है, हालांकि विदेश, शिक्षा और लंबी यात्राओं से जुड़े मामलों में लाभ मिलने के संकेत हैं। मिथुन राशि वालों के करियर में नई चुनौतियां आ सकती हैं, इसलिए आर्थिक मामलों और साझेदारी में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। कर्क राशि वालों को लाभ के अवसर मिलेंगे, लेकिन रिश्तों और दांपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव महसूस हो सकता है। सिंह राशि वालों पर काम का दबाव बढ़ सकता है, जबकि कन्या राशि के लोगों को मेहनत का सकारात्मक परिणाम और आय में वृद्धि मिलने के योग हैं। तुला राशि वालों के लिए विवाह योग और शुभ समाचार के संकेत हैं, वहीं वृश्चिक राशि के लोगों को नए संपर्कों से लाभ मिल सकता है। धनु राशि वालों के लिए धन कमाने के नए रास्ते खुल सकते हैं, लेकिन खर्चों में भी तेजी आ सकती है। सबसे ज्यादा असर मकर राशि वालों पर देखने को मिलेगा, क्योंकि राहु इसी राशि में प्रवेश करेंगे। करियर, सोच और जीवनशैली में बड़ा बदलाव महसूस हो सकता है। कुंभ राशि वालों को मानसिक दबाव और भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, जबकि मीन राशि वालों के लिए करियर और सामाजिक जीवन में विस्तार के योग बन रहे हैं। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि राहु का यह गोचर कई लोगों के लिए अचानक सफलता, नई पहचान और बड़े अवसर लेकर आएगा, वहीं कुछ राशियों को धैर्य और समझदारी के साथ फैसले लेने की जरूरत होगी।

GUAN FARMER PROTEST: खाद न मिलने पर गुना में किसानों ने किया चक्काजाम, सड़क पर किया प्रदर्शन

GUNA FARMER PROTEST

HIGHLIGHTS: बागेरी डबल लॉक केंद्र पर किसानों ने लगाया जाम सर्वर डाउन होने से नहीं हो सका खाद वितरण टोकन एक्सपायर होने की चिंता में नाराज हुए किसान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लगी लंबी कतारें प्रशासन के आश्वासन के बाद खत्म हुआ चक्काजाम   GUAN FARMER PROTEST: मध्यप्रदेश। गुना जिले के बमोरी क्षेत्र के बागेरी स्थित डबल लॉक खाद केंद्र पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। बता दें कि खाद वितरण नहीं होने से नाराज किसानों ने सड़क पर चक्काजाम कर प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था कि उनके पास आज की तारीख के वैध टोकन थे, लेकिन सर्वर डाउन होने के कारण उन्हें खाद नहीं मिल सकी। वजन घटाने का सुपर ड्रिंक! चिया और सब्जा सीड्स का पानी तेजी से करेगा फैट बर्न ऑनलाइन व्यवस्था बनी परेशानी की वजह इस बार खाद वितरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। किसानों को पहले खुद टोकन जनरेट करना पड़ता है और तय तारीख पर खाद केंद्र पहुंचना होता है। लेकिन कई केंद्रों पर सर्वर डाउन और तकनीकी खराबी के कारण किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और कई बार तो बिना खाद लिए ही वापस लौटना पड़ता है। हरित ऊर्जा से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक, भारत के भविष्य को नई दिशा दे रहा अदाणी ग्रुप: गौतम अदाणी टोकन एक्सपायर होने का डर सोमवार सुबह बड़ी संख्या में किसान खाद लेने केंद्र पहुंचे थे। केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि सर्वर नहीं चल रहा है, इसलिए वितरण संभव नहीं है। इससे किसान नाराज हो गए और सड़क पर जाम लगा दिया। किसानों का कहना था कि यदि आज खाद नहीं मिली तो उनके टोकन एक्सपायर हो जाएंगे और उन्हें दोबारा पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। रोग पंचक 2026 का खतरे वाला दौर शुरू! 5 दिन तक इन कामों से रहें दूर, दक्षिण दिशा की यात्रा मानी गई अशुभ प्रशासन की समझाइश के बाद खत्म हुआ जाम चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर बमोरी पुलिस और स्थानीय तहसीलदार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनके मौजूदा टोकन मान्य रहेंगे और अगले दिन इन्हीं टोकनों पर खाद दी जाएगी। इसके बाद किसान शांत हुए और जाम समाप्त कर दिया।

बांग्लादेश बॉर्डर पर अब होगी लोहे की दीवार, BSF को जमीन देने के फैसले से तेज होगी फेंसिंग

नई दिल्ली। भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए अब पश्चिम बंगाल में बाड़ेबंदी का काम तेज होने जा रहा है। नई सरकार ने BSF को जमीन देने का फैसला लेते हुए 45 दिनों में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं, जिससे लंबे समय से अटकी फेंसिंग परियोजना को बड़ी रफ्तार मिलने की उम्मीद है। भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो देश की सबसे बड़ी जमीनी सीमा मानी जाती है। इस सीमा का बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और असम से होकर गुजरता है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 80 फीसदी सीमा पर फेंसिंग का काम पूरा हो चुका है, लेकिन सबसे ज्यादा बिना बाड़ वाला हिस्सा अब भी पश्चिम बंगाल में मौजूद है। सीमावर्ती इलाकों में घने जंगल, नदी, दलदल और पहाड़ी क्षेत्रों की वजह से कई जगहों पर पारंपरिक बाड़ लगाना मुश्किल रहा है। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण, स्थानीय विरोध और प्रशासनिक देरी भी फेंसिंग की रफ्तार धीमी होने की बड़ी वजह बनी। केंद्र सरकार लंबे समय से आरोप लगाती रही कि पश्चिम बंगाल में जमीन अधिग्रहण की धीमी प्रक्रिया के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा यह अहम प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ। कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी यह मुद्दा पहुंचा, जहां अदालतों ने सीमा सुरक्षा को गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने तो देरी पर अधिकारियों को फटकार लगाते हुए जुर्माना तक लगाया था। अब नई सरकार के फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि लंबित जमीन जल्द BSF को सौंपी जाएगी और सीमा पर सुरक्षा मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि फेंसिंग पूरी होने से अवैध घुसपैठ, मवेशी तस्करी और सीमा पार अपराधों पर लगाम लगेगी। वहीं कई संवेदनशील इलाकों में स्मार्ट फेंसिंग, सीसीटीवी कैमरे और मोशन सेंसर जैसे आधुनिक सुरक्षा उपकरण भी लगाए जाने की योजना है, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

नेचुरल ग्लो का सीक्रेट है हल्दी! चेहरे की कई समस्याओं में ऐसे करती है असर

नई दिल्ली। भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली हल्दी अब स्किनकेयर का भी अहम हिस्सा बन चुकी है। सदियों से आयुर्वेद में हल्दी का उपयोग त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। आज भी कई ब्यूटी एक्सपर्ट्स और स्किन केयर रूटीन में Turmeric यानी हल्दी को खास महत्व दिया जाता है। इसमें मौजूद करक्यूमिन नामक तत्व त्वचा को हेल्दी रखने और कई स्किन समस्याओं से बचाने में मदद कर सकता है। मुंहासों से दिला सकती है राहतहल्दी में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो पिंपल्स और एक्ने की समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। यह त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को कम करने और सूजन घटाने में असरदार मानी जाती है। त्वचा में लाती है नेचुरल ग्लोहल्दी का नियमित उपयोग स्किन को चमकदार बनाने में मदद कर सकता है। कई लोग फेस पैक में हल्दी मिलाकर इस्तेमाल करते हैं, जिससे त्वचा फ्रेश और ग्लोइंग नजर आती है। शादी-ब्याह में होने वाली हल्दी रस्म भी इसी वजह से खास मानी जाती है। दाग-धब्बे कम करने में मददगारहल्दी त्वचा के दाग-धब्बों और टैनिंग को कम करने में भी उपयोगी मानी जाती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को रिपेयर करने और रंगत सुधारने में मदद कर सकते हैं। बढ़ती उम्र के असर को कर सकती है कमविशेषज्ञों के मुताबिक हल्दी में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं। इससे झुर्रियां और फाइन लाइन्स जैसी एजिंग समस्याओं का असर कुछ हद तक कम हो सकता है। ऐसे करें इस्तेमालहल्दी को दही, बेसन, शहद या एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर फेस पैक बनाया जा सकता है। इसे चेहरे पर 10 से 15 मिनट तक लगाकर धोने से त्वचा फ्रेश महसूस हो सकती है। हालांकि ज्यादा मात्रा में हल्दी लगाने से स्किन पीली दिख सकती है, इसलिए सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। सावधानी भी जरूरीअगर आपकी स्किन बेहद संवेदनशील है या किसी चीज से एलर्जी होती है, तो हल्दी का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

वजन घटाने का सुपर ड्रिंक! चिया और सब्जा सीड्स का पानी तेजी से करेगा फैट बर्न

नई दिल्ली। बढ़ता वजन आजकल हर उम्र के लोगों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। ऐसे में लोग तेजी से वजन कम करने के लिए डाइटिंग, जिम और कई तरह के हेल्थ ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं। लेकिन अब एक बेहद आसान और नेचुरल तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक कई विशेषज्ञ और हार्वर्ड से जुड़े डॉक्टर सुबह खाली पेट चिया और सब्जा सीड्स का पानी पीने की सलाह देते हैं। माना जाता है कि यह ड्रिंक मेटाबॉलिज्म को तेज करने और वजन घटाने में काफी मदद करता है। चिया सीड्स और सब्जा सीड्स दोनों में फाइबर, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जब इन्हें पानी में भिगोया जाता है तो ये जेल जैसी बनावट ले लेते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग की समस्या कम हो सकती है। यही वजह है कि वजन घटाने वाले लोग इसे अपनी मॉर्निंग रूटीन में शामिल कर रहे हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, चिया और सब्जा सीड्स का पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है। गर्मियों में यह ड्रिंक शरीर को ठंडक पहुंचाने और एनर्जी बनाए रखने में फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। इसे बनाने का तरीका भी बेहद आसान है। एक गिलास पानी में एक चम्मच चिया सीड्स और एक चम्मच सब्जा सीड्स डालकर 20 से 30 मिनट तक भिगो दें। इसके बाद इसमें नींबू और शहद मिलाकर पिया जा सकता है। कुछ लोग स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें पुदीना या फल भी मिलाते हैं।हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी चीज का जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है। जिन लोगों को एलर्जी, पाचन संबंधी समस्या या कोई गंभीर बीमारी हो, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे नियमित रूप से लेना चाहिए। सिर्फ इस ड्रिंक पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार और नियमित एक्सरसाइज भी जरूरी है।

रोग पंचक 2026 का खतरे वाला दौर शुरू! 5 दिन तक इन कामों से रहें दूर, दक्षिण दिशा की यात्रा मानी गई अशुभ

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 10 मई 2026 से शुरू हुआ रोग पंचक 14 मई की रात 10 बजकर 34 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से गुजरता है। रविवार से शुरू होने के कारण इसे ‘रोग पंचक’ कहा जाता है, जिसे स्वास्थ्य, मानसिक तनाव और बाधाओं से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इन पांच दिनों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि छोटी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पंचक के दौरान नए मकान का निर्माण, नींव भरना, छत डालना या किसी स्थायी निर्माण कार्य की शुरुआत करना अशुभ माना जाता है। लकड़ी से जुड़े काम जैसे पलंग, मेज, कुर्सी या फर्नीचर बनवाने से भी बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि पंचक में शुरू किए गए कामों में रुकावट, नुकसान या मानसिक तनाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि शुभ और स्थायी कार्यों को इन दिनों टालने की परंपरा चली आ रही है। ज्योतिष शास्त्र में पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा को भी अशुभ बताया गया है। दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, इसलिए इन पांच दिनों तक इस ओर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। खासकर रोग पंचक में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका मानी जाती है। यदि यात्रा बहुत जरूरी हो तो पूजा-पाठ और शुभ उपाय करने के बाद ही निकलना बेहतर माना जाता है। पंचक के प्रकारों की बात करें तो रविवार का पंचक रोग पंचक, सोमवार का राज पंचक, मंगलवार का अग्नि पंचक, शुक्रवार का चोर पंचक और शनिवार का मृत्यु पंचक कहलाता है। इनमें राज पंचक को छोड़कर बाकी पंचकों को विशेष सावधानी वाला समय माना गया है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो अंतिम संस्कार रोका नहीं जाता। अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए कुश से बने पुतले का भी दाह संस्कार किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार पर आने वाले संकट और पंचक दोष का प्रभाव कम हो जाता है।