तीस्ता जल विवाद में बड़ा भू-राजनीतिक ट्विस्ट: चीन की एंट्री से बदला पूरा समीकरण, भारत की टेंशन बढ़ी

नई दिल्ली। बांग्लादेश में तीस्ता नदी परियोजना को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। ढाका में विदेश मंत्रालय के एक बयान के बाद यह चर्चा और बढ़ गई है कि भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से अटका तीस्ता जल-बंटवारा विवाद अब नए राजनीतिक हालात में आगे बढ़ सकता है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने उम्मीद जताई है कि भारत के साथ तीस्ता समझौते पर जल्द प्रगति हो सकती है। उन्होंने कहा कि पहले यह मुद्दा भारत के अंदर राज्यों की राजनीतिक स्थिति के कारण अटका हुआ था, लेकिन अब हालात बदलने से बातचीत आगे बढ़ने की संभावना है। उनके बयान के बाद इस मुद्दे ने एक बार फिर सुर्खियां पकड़ ली हैं। तीस्ता नदी, जो सिक्किम से निकलकर पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है, दोनों देशों के लिए कृषि और सिंचाई का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। वर्षों से इसके पानी के बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच कोई स्थायी समझौता नहीं हो पाया है, जिससे यह मुद्दा संवेदनशील बना हुआ है। इसी बीच चीन की भूमिका भी लगातार चर्चा में है। बांग्लादेश ने तीस्ता नदी पर एक बड़े जलाशय और बांध परियोजना की योजना बनाई है, जिसके लिए चीन ने वित्तीय और तकनीकी सहायता देने की पेशकश की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन की एक्सिम बैंक इस परियोजना को फंड कर सकती है। इससे इस परियोजना का भू-राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। भारत के लिए यह मामला सिर्फ जल प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा के नजरिए से भी अहम है। जिस क्षेत्र में यह परियोजना प्रस्तावित है, वह भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब है, जिसे “चिकन नेक” कहा जाता है। यह संकरा गलियारा भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस क्षेत्र में किसी बाहरी शक्ति, खासकर चीन की भागीदारी बढ़ती है, तो यह भारत की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा सकता है। इसी वजह से भारत इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। फिलहाल स्थिति यह है कि तीस्ता विवाद पर भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन चीन की बढ़ती रुचि ने इस मुद्दे को केवल जल बंटवारे से आगे बढ़ाकर एक बड़े भू-राजनीतिक सवाल में बदल दिया है।
तीन साल के प्रेम प्रसंग के बाद विवाद: भाई ने लगाया जबरन कीटनाशक पिलाने का गंभीर आरोप

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के सागर जिले के जरुआखेड़ा पुलिस चौकी क्षेत्र से एक गंभीर और दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां 20 वर्षीय युवती के साथ मारपीट और उसे कथित रूप से जबरन कीटनाशक पिलाने का आरोप लगाया गया है। गंभीर हालत में युवती को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। पीड़िता के परिजनों के अनुसार, युवती का पिछले तीन वर्षों से नीलेश कुशवाहा नामक युवक के साथ प्रेम संबंध था। आरोप है कि युवक ने पहले शादी का वादा किया था, लेकिन बाद में उसने किसी अन्य लड़की से विवाह कर लिया। इसी बात को लेकर जब युवती ने बातचीत करने की कोशिश की, तो उसे युवक द्वारा अपने घर बुलाया गया। आरोप है कि घर पहुंचने पर युवक और उसके परिजनों ने युवती के साथ मारपीट की। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब युवती के भाई ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर आरोपियों ने उसे जबरन कीटनाशक पिला दिया, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। परिजनों का कहना है कि हालत बिगड़ने के बाद आरोपियों ने ही युवती को अस्पताल में भर्ती कराया और वहां से फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और लोगों में आक्रोश का माहौल है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और अस्पताल में पीड़िता के बयान दर्ज किए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की बात कही है। फिलहाल युवती की हालत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। यह मामला प्रेम संबंध से शुरू होकर हिंसक विवाद में बदलने का गंभीर उदाहरण माना जा रहा है, जिस पर पुलिस की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका-डेनमार्क की गुप्त रणनीतिक चाल: बिना युद्ध बढ़ रहा सैन्य दबदबा

नई दिल्ली। अमेरिका और डेनमार्क के बीच ग्रीनलैंड को लेकर रणनीतिक बातचीत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका यहां तीन नए सैन्य अड्डे बनाने की योजना पर काम कर रहा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर यह प्रक्रिया अभी केवल कूटनीतिक चर्चा के स्तर पर है और किसी भी तरह का अंतिम समझौता नहीं हुआ है। ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, लंबे समय से अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका कारण इसका आर्कटिक क्षेत्र में स्थित होना है, जहां से उत्तरी अटलांटिक महासागर और यूरोप-उत्तर अमेरिका के बीच के समुद्री मार्गों पर नजर रखी जा सकती है। अमेरिका पहले से ही यहां थुले एयर बेस के जरिए अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है, जो शीत युद्ध के समय से सक्रिय है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और डेनमार्क के बीच हाल के महीनों में उच्च स्तरीय बातचीत हुई है, जिसमें ग्रीनलैंड के दक्षिणी हिस्से में अतिरिक्त सैन्य ढांचे विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई है। माना जा रहा है कि इन प्रस्तावित अड्डों का उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा, खासकर रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखना है। अमेरिका की रणनीति आर्कटिक क्षेत्र में अपनी निगरानी और सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की है। इस क्षेत्र में बर्फ पिघलने के कारण नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं और प्राकृतिक संसाधनों की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं, जिससे वैश्विक शक्तियों की रुचि बढ़ गई है। इसी वजह से अमेरिका इस इलाके को अपने रक्षा नेटवर्क का अहम हिस्सा मानता है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि डेनमार्क एक संप्रभु राष्ट्र है और ग्रीनलैंड उसकी स्वायत्त इकाई है, इसलिए किसी भी प्रकार के सैन्य विस्तार या नई तैनाती के लिए दोनों देशों की सहमति जरूरी होती है। डेनमार्क की सरकार ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन उन्होंने किसी भी “सीक्रेट डील” या कब्जे जैसे दावों को स्पष्ट रूप से खारिज नहीं किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा मामला भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है, न कि किसी तत्काल सैन्य कब्जे की योजना। अमेरिका का लक्ष्य नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना है, ताकि भविष्य की किसी भी सुरक्षा चुनौती का सामना किया जा सके। फिलहाल स्थिति यह है कि बातचीत जारी है और किसी भी अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में “बिना गोली चले कब्जा” जैसी बातें अधिकतर राजनीतिक और मीडिया व्याख्याओं का हिस्सा मानी जा रही हैं, जबकि वास्तविकता अभी कूटनीतिक स्तर पर ही सीमित है।
इंदौर जैसी जनहानि का डर: सतना में पानी की गुणवत्ता को लेकर लोगों में असमंजस

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के सतना नगर निगम क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के वार्ड क्रमांक 1 (अमौधा और बगहा) तथा वार्ड 3 (गढ़िया टोला) में पिछले एक महीने से नलों से झागयुक्त और बदबूदार पानी की आपूर्ति हो रही है। इस स्थिति ने स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि लगातार दूषित पानी की आपूर्ति से स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है और संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है। लोगों ने कई बार सीएम हेल्पलाइन और नगर निगम में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में इंदौर जैसी किसी बड़ी जनहानि का डर भी देखने को मिल रहा है, जहां दूषित पानी के कारण गंभीर घटनाएं सामने आई थीं। इसी आशंका के चलते लोग प्रशासन से तुरंत पाइपलाइन और सीवर व्यवस्था सुधारने की मांग कर रहे हैं। इस मामले में स्थानीय पार्षद अभिषेक तिवारी ने नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह से लापरवाह हो चुके हैं और जनता की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। सबसे विवादित स्थिति गढ़िया टोला इलाके में सामने आई, जहां सप्लाई हो रहे हरे रंग के पानी का निरीक्षण करने पहुंची टीम ने इसे पीने योग्य घोषित कर दिया। इस रिपोर्ट के बाद स्थानीय लोग भड़क उठे और जांच टीम के साथ तीखी बहस भी हुई। लोगों का आरोप है कि जांच प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। फिलहाल पूरे इलाके में पेयजल संकट और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर नाराजगी बनी हुई है। नागरिकों ने मांग की है कि जल्द से जल्द उच्च स्तरीय जांच कर समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि लोगों की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
वैश्विक संकट का असर जारी, कच्चा तेल 100 डॉलर के आसपास रहने की संभावना

नई दिल्ली । वैश्विक ऊर्जा बाजार एक बार फिर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता की बजाय उतार-चढ़ाव का दबाव बना हुआ है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रह सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही रणनीतिक समुद्री मार्गों में कुछ राहत मिले, लेकिन वैश्विक बाजार पर इसका तात्कालिक असर सीमित रहेगा। विश्लेषकों के अनुसार, शिपिंग व्यवस्था, रिफाइनरी संचालन और टैंकरों की उपलब्धता पर पड़ रहे दबाव के कारण तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य नहीं हो पा रही है। इन बाधाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है और बड़े सुधार की संभावना फिलहाल कमजोर दिखाई दे रही है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि आने वाले समय में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत लगभग 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकती है। इसका मतलब है कि ऊर्जा बाजार को मध्यम अवधि में सप्लाई की कमी और भू-राजनीतिक तनाव दोनों का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है, क्योंकि तेल की कीमतों का सीधा असर परिवहन, उत्पादन और महंगाई पर पड़ता है। हाल के दिनों में तेल बाजार में तेजी भी देखी गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रही है, जबकि अन्य बेंचमार्क भी इसी स्तर के आसपास मजबूती दिखा रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़त केवल मांग और आपूर्ति के असंतुलन का परिणाम नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता की भी अहम भूमिका है। इसके अलावा, उत्पादन में भी गिरावट देखने को मिली है। प्रमुख तेल उत्पादक समूह द्वारा हाल के महीनों में उत्पादन में कटौती के कारण वैश्विक आपूर्ति और सीमित हो गई है। उत्पादन में इस कमी ने कीमतों को और अधिक मजबूती दी है और बाजार में अस्थिरता को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सिर्फ समुद्री मार्गों के सामान्य होने से बाजार तुरंत स्थिर नहीं होगा। लॉजिस्टिक चुनौतियां, सप्लाई चेन की बाधाएं और उत्पादन में असंतुलन आने वाले महीनों तक जारी रह सकते हैं। इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर देखने को मिलेगा। कुल मिलाकर, कच्चे तेल का बाजार फिलहाल एक संवेदनशील दौर से गुजर रहा है, जहां हर भू-राजनीतिक घटना कीमतों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। जब तक वैश्विक स्तर पर तनाव और आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं पूरी तरह हल नहीं होतीं, तब तक तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद कम ही दिखाई देती है।
Portable TV: अब टीवी आपके साथ चलेगा! बैटरी वाला स्मार्ट टीवी बना नया टेक ट्रेंड, जानिए फीचर्स, कीमत और फायदे-नुकसान

नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी की दुनिया में अब टीवी सिर्फ घर की दीवार तक सीमित नहीं रहा। एक नया इनोवेशन सामने आया है जिसे पोर्टेबल स्मार्ट टीवी (Portable Smart TV) कहा जाता है। यह ऐसा टीवी है जिसे आप अपने स्मार्टफोन या टैबलेट की तरह कहीं भी आसानी से ले जा सकते हैं। क्या है पोर्टेबल टीवी?पोर्टेबल टीवी एक बैटरी से चलने वाला स्मार्ट डिस्प्ले है, जिसे खास तौर पर मोबाइलिटी के लिए डिजाइन किया गया है। यह 32 इंच या उससे छोटे साइज में आता है और इसमें इनबिल्ट बैटरी होती है, जो एक बार चार्ज करने पर लगभग 8 से 11 घंटे तक चल सकती है। फीचर्स जो इसे खास बनाते हैंबैटरी ऑपरेटेड (बिजली पर निर्भर नहीं)टचस्क्रीन और रोटेटिंग डिस्प्ले (कुछ मॉडल्स में)एंड्रॉयड सपोर्ट, ऐप्स और गेम्स की सुविधावाई-फाई और ब्लूटूथ कनेक्टिविटीटीवी + टैबलेट + मॉनिटर का कॉम्बो अनुभववायरलेस कीबोर्ड/माउस से मिनी कंप्यूटर जैसा इस्तेमाल कहां काम आता है?पोर्टेबल टीवी को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा गया है। इसका इस्तेमाल:घर के किसी भी कोने में मूवी देखनेकिचन में रेसिपी देखनेगार्डन या आउटडोर में मैच देखनेऑफिस प्रेजेंटेशन और सेकेंडरी मॉनिटर के रूप मेंट्रैवल और कैंपिंग के दौरान किया जा सकता है कीमत कितनी है?भारत में पोर्टेबल टीवी की कीमत लगभग 20,000 रुपये से 50,000 रुपये तक शुरू होती है। वहीं हाई-एंड और एडवांस मॉडल्स की कीमत 1 लाख रुपये या उससे ज्यादा भी हो सकती है। फायदे और नुकसानफायदे:वायरलेस और पोर्टेबल सुविधामल्टी-यूज डिवाइस (टीवी + टैबलेट + मॉनिटर)आउटडोर यूज के लिए बेहतरीन नुकसानकीमत अभी भी ज्यादाभारत में सीमित लोकप्रियता बड़े टीवी जितना पावरफुल व्यूइंग अनुभव नहींपोर्टेबल टीवी आने वाले समय में टेक्नोलॉजी का बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं। हालांकि फिलहाल यह प्रीमियम सेगमेंट में हैं, लेकिन जैसे-जैसे डिमांड बढ़ेगी, ये आम लोगों की पहुंच में भी आ सकते हैं।अब टीवी सिर्फ घर में नहीं, आपकी जेब और बैग में भी होगा! क्या आपको खरीदना चाहिए पोर्टेबल TV?यह टीवी हर किसी के लिए नहीं है। अगर आप बेहतरीन पिक्चर क्वालिटी और बड़े स्क्रीन वाले थिएटर अनुभव की तलाश में हैं, तो पोर्टेबल टीवी आपको निराश कर सकते हैं क्योंकि इनका रेजोल्यूशन अक्सर 1080p या QHD तक ही सीमित होता है।हालांकि, अगर आप कम जगह वाले अपार्टमेंट में रहते हैं, बार-बार सफर करते हैं या एक ऐसा ऑल-इन-वन डिवाइस चाहते हैं जो टीवी, मॉनिटर और टैबलेट तीनों का काम करे, तो यह एक बेहतरीन गैजेट साबित हो सकता है।
16 कंपनियां करेंगी भर्ती: सीहोर रोजगार मेले में युवाओं के लिए बड़े अवसर

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। 12 मई को ‘युवा संगम रोजगार, स्वरोजगार एवं अप्रेंटिसशिप मेला’ का आयोजन किया जाएगा। यह मेला महिला आईटीआई संस्थान, सीहोर में सुबह 11 बजे से शुरू होगा। इस रोजगार मेले का आयोजन रोजगार विभाग द्वारा किया जा रहा है, जिसमें कुल 16 कंपनियां भाग लेंगी। इन कंपनियों द्वारा लगभग 1610 से अधिक पदों पर योग्य युवाओं की भर्ती की जाएगी। यह मेला स्थानीय युवाओं के साथ-साथ प्रदेश और अन्य राज्यों के उम्मीदवारों के लिए भी रोजगार का बड़ा अवसर लेकर आया है। मेले में विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां शामिल होंगी, जो अलग-अलग योग्यता और कौशल के आधार पर युवाओं का चयन करेंगी। इससे बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी पाने का सुनहरा मौका मिलेगा। इसके साथ ही जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहेगा। यह केंद्र स्वरोजगार योजनाओं के तहत युवाओं को मार्गदर्शन देगा और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में सहायता करेगा। साथ ही नए आवेदन तैयार करने की प्रक्रिया में भी सहयोग प्रदान किया जाएगा। आईटीआई विभाग की ओर से भी इस मेले में विशेष भूमिका निभाई जाएगी। विभाग द्वारा युवाओं को अप्रेंटिसशिप के अवसरों के लिए चयनित किया जाएगा, जिससे उन्हें प्रशिक्षण के साथ रोजगार पाने का मौका मिलेगा। यह रोजगार मेला न केवल नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने वालों के लिए भी एक बड़ा मंच साबित होगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ा जा सके।
सीहोर में कॉन्ट्रैक्टर के घर से 7 लाख नकद और जेवर चोरी, पुलिस अब तक खाली हाथ

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की अवधपुरी कॉलोनी में हुई 32 लाख रुपए की बड़ी चोरी का मामला 15 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अनसुलझा है। इस सनसनीखेज वारदात ने पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना कॉन्ट्रैक्टर दीपक जाधव के घर में हुई, जहां से चोरों ने करीब 7 लाख रुपए नकद और भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवरात चोरी कर लिए। चोरी गए सामान में लगभग 10 लाख रुपए का रानी हार, मंगलसूत्र, सोने की कटोरी, 20 सोने के मोती और चांदी के सिक्के शामिल बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, घटना के समय दीपक जाधव का परिवार महाराष्ट्र गया हुआ था। 27 जून को जब वे वापस लौटे तो घर के ताले टूटे मिले और पूरा घर बिखरा पड़ा था। अलमारी खोलने पर नकदी और कीमती जेवर गायब थे, जिससे परिवार के होश उड़ गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस कॉलोनी में यह वारदात हुई, उसके आसपास पुलिसकर्मियों के आवास भी स्थित हैं। इसके बावजूद चोरों ने आसानी से घर को निशाना बनाया और फरार हो गए। इस घटना ने स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। घटना के बाद एफएसएल टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए थे और पुलिस ने कई सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी खंगाले। कुछ संदिग्धों से पूछताछ भी की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है। थाना प्रभारी ने जल्द खुलासे का दावा किया था, लेकिन 15 दिन से ज्यादा समय बीतने के बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ पाई है। पीड़ित परिवार लगातार पुलिस थाने के चक्कर लगा रहा है और उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है।इस बड़ी चोरी के मामले में पुलिस की सुस्ती और अब तक कोई सफलता न मिलने से आम जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोग सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं और जल्द खुलासे की मांग कर रहे हैं।
State Bar Council Elections: स्टेट बार काउंसिल चुनाव के लिए वोटिंग शुरू, 6298 अधिवक्ता आज करेंगे मतदान

HIGHLIGHTS: ग्वालियर में स्टेट बार काउंसिल चुनाव की वोटिंग शुरू 6298 अधिवक्ता आज करेंगे मतदान चुनाव मैदान में 12 प्रत्याशी, 4 महिला उम्मीदवार शामिल जिला न्यायालय में बनाए गए 6 मतदान बूथ पहचान पत्र या सनद दिखाकर कर सकेंगे मतदान State Bar Council Elections: मध्यप्रदेश। ग्वालियर जिला न्यायालय परिसर में मंगलवार को मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। मतदान सुबह 10 बजे से शुरू हुआ, जो शाम 5 बजे तक चलेगा। चुनाव को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए प्रशासन और चुनाव अधिकारियों ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। डैंड्रफ और खुजली से परेशान हैं? अपनाएं ये आसान घरेलू हर्बल शैम्पू रेसिपी 6298 अधिवक्ता करेंगे मताधिकार का उपयोग ग्वालियर जिले में कुल 6298 अधिवक्ता मतदाता हैं, जो अपने प्रतिनिधियों के चयन के लिए वोट डालेंगे। चुनाव को लेकर अधिवक्ताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। मतदान केंद्र जिला न्यायालय भवन स्थित हनुमान मंदिर के सामने बने सुभाषचंद्र बोस बार कक्ष में बनाया गया है, जहां छह मतदान बूथ तैयार किए गए हैं। मंगलवार के दिन करें हनुमान मंत्रों का जाप, हर संकट से मिलेगी बड़ी राहत 12 प्रत्याशी मैदान में, चार महिला उम्मीदवार भी इस चुनाव में ग्वालियर से कुल 12 प्रत्याशी मैदान में हैं। खास बात यह है कि इनमें चार महिला प्रत्याशी भी शामिल हैं। इसे बार काउंसिल चुनाव में महिला भागीदारी के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। प्रत्याशियों ने मतदान से पहले अधिवक्ताओं से समर्थन की अपील भी की। वट सावित्री व्रत 2026: नए व्रतियों के लिए आसान पूजा विधि और जरूरी नियम पहचान पत्र और सनद से होगा मतदान मतदान केंद्र पर पहुंचने वाले अधिवक्ताओं को सबसे पहले हेल्प डेस्क से मतदान पर्ची दी जा रही है। इसके बाद वे निर्धारित बूथ पर जाकर मतदान करेंगे। चुनाव अधिकारियों के अनुसार मतदान के लिए पहचान पत्र या सनद साथ लाना जरूरी है। साथ ही भीड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग रास्ते तय किए गए हैं।
पाकिस्तान के नोमान अली का कमाल, टेस्ट क्रिकेट में 100 विकेट लेकर रचा इतिहास

नई दिल्ली । बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच खेली जा रही दो टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में पाकिस्तान के बाएं हाथ के स्पिनर Noman Ali ने इतिहास रच दिया। मैच के पांचवें दिन उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपने 100 विकेट पूरे करते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की और इस फॉर्मेट में यह कारनामा करने वाले सबसे उम्रदराज गेंदबाज बन गए। नोमान अली ने इस मैच की पारी में 3 विकेट हासिल किए। उनका ऐतिहासिक 100वां विकेट बांग्लादेश के बल्लेबाज मेहदी हसन मिराज के रूप में आया। उन्होंने 39 साल 217 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर इंग्लैंड के दिग्गज बॉबी पील का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने 39 साल 180 दिन की उम्र में 100 विकेट पूरे किए थे। इस सूची में अन्य महान गेंदबाजों में रे इलिंगवर्थ, क्लैरी ग्रिमेट और सिडनी बार्न्स जैसे नाम भी शामिल हैं, लेकिन नोमान अली ने इस उम्र में पहुंचकर नया इतिहास लिख दिया है। पाकिस्तान क्रिकेट में भी वह सबसे तेजी से 100 विकेट पूरे करने वाले गेंदबाजों की सूची में संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने यह उपलब्धि 22 टेस्ट मैचों में हासिल की है, जो उनकी निरंतरता और क्षमता को दर्शाता है। पाकिस्तान के अन्य महान गेंदबाजों में यासिर शाह, सईद अजमल और वकार युनुस उनसे आगे हैं, लेकिन नोमान का यह प्रदर्शन उन्हें विशेष स्थान दिलाता है। मैच की बात करें तो बांग्लादेश ने पहली पारी में 413 रन बनाए, जबकि पाकिस्तान की पहली पारी 386 रन पर समाप्त हुई। बांग्लादेश ने दूसरी पारी 9 विकेट पर 240 रन पर घोषित कर पाकिस्तान को 268 रनों का लक्ष्य दिया। अब पाकिस्तान को जीत के लिए 76 ओवरों में यह लक्ष्य हासिल करना होगा, जिससे मुकाबला रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। नोमान अली की यह ऐतिहासिक उपलब्धि पाकिस्तान क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण है और उनके नाम अब टेस्ट क्रिकेट इतिहास में एक खास रिकॉर्ड दर्ज हो गया है।