मनोरंजन का डबल डोज: 15 मई को रिलीज होंगी 4 फिल्में और 5 ओटीटी सीरीज

नई दिल्ली। 15 मई को मनोरंजन की दुनिया में बड़ा धमाका होने जा रहा है। ओटीटी और सिनेमाघरों में कुल 9 नई फिल्में और सीरीज रिलीज हो रही हैं, जिनमें स्पाई थ्रिलर, क्राइम, हॉरर-कॉमेडी और म्यूजिकल फिल्में शामिल हैं। यह वीकेंड दर्शकों के लिए पूरी तरह एंटरटेनमेंट से भरपूर रहने वाला है। 15 मई रिलीज बम: ओटीटी और थिएटर में बड़ा धमाकमनोरंजन प्रेमियों के लिए 15 मई का दिन बेहद खास रहने वाला है। इस दिन दर्शकों को एक साथ 9 नई फिल्में और सीरीज देखने को मिलेंगी। इनमें से 5 ओटीटी प्लेटफॉर्म पर और 4 फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज हो रही हैं। अलग-अलग जॉनर की ये कहानियां दर्शकों को रोमांच, सस्पेंस और कॉमेडी का पूरा डोज देंगी। ओटीटी रिलीज की पूरी लिस्ट1. धुरंधर 2 (स्पाई थ्रिलर) जॉनर: जासूसी और एक्शन से भरपूर कहानीकहानी: एक भारतीय जासूस अंडरकवर मिशन पर कराची के अंडरवर्ल्ड में घुसपैठ करता है और आतंक की साजिश को खत्म करने की कोशिश करता है। 2. एग्जाम: द सिस्टम एक्सपोज्डजॉनर: सोशल ड्रामा / थ्रिलरकहानी: एक स्टूडेंट एग्जाम लीक घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए सिस्टम के खिलाफ लड़ाई लड़ती है। 3. थिम्माराजुपल्ली टीवीजॉनर: मिस्ट्री ड्रामाकहानी: 1996 में गांव के इकलौते टीवी की चोरी से शुरू हुआ रहस्य एक बड़े सस्पेंस में बदल जाता है। 4. कर्तव्यजॉनर: क्राइम ड्रामाकहानी: परिवार और जिम्मेदारी के बीच फंसे एक शख्स की भावनात्मक और कठिन जर्नी। 5. इंस्पेक्टर अविनाश: सीजन जॉनर: क्राइम एक्शनकहानी: एक पुलिस अफसर अपने टूटते परिवार और कर्तव्य के बीच संघर्ष करता है। थिएटर रिलीज की धमाकेदार फिल्में 6. पति पत्नी और वो दोजॉनर: रोमांटिक कॉमेडीकहानी: एक फॉरेस्ट ऑफिसर की जिंदगी में तीन महिलाओं के आने से मची हलचल और कॉमेडी। 7. आखरी सवालजॉनर: इतिहास और राजनीतिकहानी: आरएसएस के 100 साल के सफर और ऐतिहासिक घटनाओं में उसकी भूमिका पर आधारित फिल्म। 8. I.I.Z: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जॉम्बीजॉनर: हॉरर-कॉमेडीकहानी: एक इंजीनियरिंग कॉलेज में जॉम्बीज का हमला और छात्रों की मजेदार जंग। 9. बिली इलिश: हिट मी हार्ड एंड सॉफ्ट – द टूर (3D)जॉनर: म्यूजिकल कॉन्सर्ट फिल्मकहानी: ग्लोबल पॉप स्टार बिली इलिश के लाइव वर्ल्ड टूर का शानदार 3D अनुभव। वीकेंड प्लान तैयार करे15 मई का यह दिन दर्शकों के लिए एक मिनी एंटरटेनमेंट फेस्टिवल साबित होने वाला है। जहां एक तरफ ओटीटी पर थ्रिल और ड्रामा का मजा मिलेगा, वहीं थिएटर में बड़े पर्दे का ग्लैमर दर्शकों को आकर्षित करेगा।
तला-भुना खाना कितना खतरनाक? जानें कैसे कम तेल से सुधर सकती है आपकी हेल्थ

नई दिल्ली । आज के समय में तला-भुना और ज्यादा तेल वाला खाना लोगों की डाइट का एक आम हिस्सा बन चुका है। भारतीय रसोई में तड़के से लेकर डीप फ्राई डिशेज तक तेल का इस्तेमाल काफी अधिक होता है, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स लगातार यह चेतावनी दे रहे हैं कि जरूरत से ज्यादा तेल का सेवन शरीर के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। ज्यादा ऑयली खाना सबसे पहले पाचन तंत्र पर असर डालता है। ऐसे भोजन को पचाने में शरीर को अधिक समय और ऊर्जा लगती है, जिससे कई लोगों को पेट भारी लगना, एसिडिटी, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याएं होने लगती हैं। धीरे-धीरे यह आदत पाचन क्षमता को कमजोर कर सकती है। इसके अलावा, ज्यादा तला हुआ खाना मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। प्रोसेस्ड और डीप फ्राइड फूड में मौजूद अनहेल्दी फैट्स शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं, जिसका सीधा संबंध दिमाग के कामकाज और मूड से भी जोड़ा जाता है। कुछ रिसर्च में ऐसे खान-पान को तनाव और मानसिक अस्थिरता से भी जोड़ा गया है। लंबे समय तक अधिक तेल वाला भोजन करने से वजन बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। फ्राइड फूड में कैलोरी अधिक होती है, जबकि पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम होते हैं, जिससे शरीर में फैट जमा होने लगता है और मोटापा बढ़ सकता है। यही स्थिति आगे चलकर कई अन्य बीमारियों की वजह बन सकती है। दिल की सेहत पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव देखा जाता है। अधिक तेल वाला भोजन बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है और गुड कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकता है। इससे धमनियों में ब्लॉकेज बनने का खतरा बढ़ जाता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियों को जन्म दे सकता है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ज्यादा ऑयली डाइट का असर लिवर और ब्लड शुगर पर भी पड़ सकता है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाकर टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है, साथ ही फैटी लिवर जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकता है। हालांकि अच्छी बात यह है कि छोटे-छोटे बदलावों से सेहत में बड़ा सुधार लाया जा सकता है। डीप फ्राइड खाने की जगह ग्रिल्ड या बेक्ड विकल्प अपनाना, साथ ही डाइट में फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करना शरीर को संतुलित और स्वस्थ रखने में मदद करता है।
Weekend Getaway: दिल्ली के आसपास ये खास जगहें जरूर घूमें, यादगार बन जाएगा ट्रिप

नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में अगर आप दिल्ली के पास किसी ठंडी और खूबसूरत जगह की तलाश में हैं, तो उत्तर भारत में कई ऐसे हिल स्टेशन मौजूद हैं जो कम दूरी में शानदार अनुभव देते हैं। यहां आप भीड़भाड़ से दूर प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिता सकते हैं। चकराता (उत्तराखंड)दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर दूर स्थित चकराता एक शांत और कम भीड़ वाला हिल स्टेशन है। यह जगह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। यहां का प्रसिद्ध टाइगर फॉल्स पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। गर्मियों में यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है, जहां तापमान सामान्यतः 15 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। भीड़भाड़ से दूर शांति पसंद करने वालों के लिए यह एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। कसौल (हिमाचल प्रदेश)हिमाचल प्रदेश का कसौल युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। पार्वती नदी के किनारे स्थित यह जगह अपने शांत और खूबसूरत वातावरण के लिए जानी जाती है। यहां बैठकर नदी की आवाज और ठंडी हवाओं का आनंद लेना एक अलग ही अनुभव देता है। एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए खीरगंगा ट्रेक भी एक बेहतरीन विकल्प है। यहां का मौसम ठंडा रहता है, इसलिए हल्की जैकेट साथ रखना बेहतर होता है। औली (उत्तराखंड)औली भारत के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशनों में से एक माना जाता है, जो स्कीइंग के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि गर्मियों में यहां की हरी-भरी घास और बर्फ से ढकी पहाड़ियां बेहद आकर्षक लगती हैं। चारों तरफ फैला प्राकृतिक नजारा और ठंडी हवा यहां आने वालों को सुकून देती है। औली में केबल कार की सवारी भी एक खास अनुभव देती है। मई-जून में यहां का मौसम लगभग 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, जो घूमने के लिए आदर्श है। अगर आप इस गर्मी में दिल्ली के आसपास कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो ये तीनों जगहें आपकी ट्रिप को यादगार बना सकती हैं।
खाने में नखरे करने वाले बच्चों के लिए 7 असरदार टिप्स, माता-पिता की टेंशन होगी कम

नई दिल्ली । बच्चों का खाने के समय नखरे करना आजकल बहुत आम समस्या बन गई है। कई माता-पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा ठीक से खाना नहीं खाता और जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सही तरीका अपनाकर और धैर्य रखकर इस आदत को आसानी से बदला जा सकता है। छोटे बच्चों का स्वाद समय-समय पर बदलता रहता है, इसलिए किसी भी नए खाने को तुरंत पसंद कर लेना उनके लिए जरूरी नहीं होता। ऐसे में माता-पिता को लगातार प्रयास करते रहना चाहिए और छोटे-छोटे बदलावों के साथ उन्हें नए स्वाद से परिचित कराना चाहिए। सबसे पहले जरूरी है कि बच्चे को बार-बार नए खाने का स्वाद चखने का मौका दिया जाए। कई बार किसी चीज को स्वीकार करने में समय लगता है, इसलिए एक ही बार में हार मान लेना सही नहीं है। नए खाने को उनकी पसंदीदा चीजों के साथ मिलाकर देना भी एक अच्छा तरीका हो सकता है। इसके साथ ही बच्चों को अलग-अलग तरह का पौष्टिक भोजन देने पर ध्यान देना चाहिए। फल, सब्जियां, अनाज, दालें और डेयरी उत्पाद जैसे खाद्य पदार्थ उनके रोज के आहार का हिस्सा बनने चाहिए। खाने में रंग, स्वाद और बनावट की विविधता बच्चों को आकर्षित करती है और उनकी रुचि बढ़ाती है। बच्चों को खाने की प्रक्रिया में शामिल करना भी बेहद प्रभावी तरीका माना जाता है। जब बच्चे खुद सब्जियां चुनते हैं या खाना बनाने में मदद करते हैं तो उनका खाने के प्रति उत्साह बढ़ जाता है। इससे वे खाने को एक जिम्मेदारी और मजेदार गतिविधि के रूप में देखने लगते हैं। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों पर खाने का दबाव नहीं डालना चाहिए। जब तक बच्चा स्वस्थ है और उसका विकास सामान्य है, तब तक उसे उसकी भूख के अनुसार खाने देना बेहतर होता है। जबरदस्ती करने से अक्सर खाने के प्रति नकारात्मक सोच विकसित हो सकती है। खाने की मात्रा भी उम्र के अनुसार संतुलित होनी चाहिए। छोटे हिस्सों में भोजन देना बच्चों के लिए अधिक आसान और स्वीकार्य होता है। साथ ही, अच्छे खाने की आदतों के लिए तारीफ करना भी उन्हें प्रोत्साहित करता है। खाने को इनाम या सजा से जोड़ना भी सही नहीं माना जाता, क्योंकि इससे बच्चे भोजन को गलत तरीके से समझने लगते हैं। इसके बजाय स्वस्थ खाने को रोजमर्रा की सामान्य आदत बनाना जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं। अगर घर में सभी लोग मिलकर संतुलित और पौष्टिक भोजन करते हैं, तो बच्चे भी धीरे-धीरे उसी आदत को अपनाने लगते हैं।
Romantic Travel: मई में पार्टनर के साथ जाने के लिए ये खूबसूरत जगहें हैं परफेक्ट

नई दिल्ली। मई का महीना घूमने के लिए बेहद खास होता है। इस समय देश की कई हिल स्टेशन और शांत वादियां कपल्स के लिए परफेक्ट रोमांटिक डेस्टिनेशन बन जाती हैं। जानिए ऐसी खूबसूरत जगहें जहां आप पार्टनर के साथ यादगार पल बिता सकते हैं। गर्मी के मौसम में अगर आप अपने पार्टनर के साथ कहीं सुकून और रोमांस से भरा समय बिताना चाहते हैं, तो भारत में कई ऐसी डेस्टिनेशन हैं जो इस मौसम में और भी खूबसूरत हो जाती हैं। अलेप्पी (केरल)केरल का अलेप्पी अपनी बैकवाटर और हाउसबोट एक्सपीरियंस के लिए मशहूर है। शांत नहरें, हरे-भरे ताड़ के पेड़ और पानी पर तैरती नावें कपल्स को एक अलग ही रोमांटिक एहसास देती हैं। इसे “पूरब का वेनिस” भी कहा जाता है। चोपता (उत्तराखंड)अगर आपको नेचर और ट्रेकिंग पसंद है तो चोपता एक बेहतरीन विकल्प है। बुरांश के फूलों से सजी वादियां और तुंगनाथ मंदिर तक की ट्रेक इस जगह को और भी खास बना देती हैं। मनाली (हिमाचल प्रदेश)मनाली कपल्स के लिए हमेशा से पसंदीदा जगह रही है। रोहतांग और आस-पास की बर्फीली चोटियां, ठंडी हवाएं और एडवेंचर स्पोर्ट्स इसे परफेक्ट रोमांटिक डेस्टिनेशन बनाते हैं। डलहौज़ी (हिमाचल प्रदेश)भीड़ से दूर शांत माहौल में समय बिताना चाहते हैं तो डलहौज़ी बेस्ट है। देवदार के जंगल, झरने और खज्जियार जैसी जगहें इसे बेहद रोमांटिक बनाती हैं। यूसमार्ग (जम्मू-कश्मीर)यूसमार्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। हरे मैदान, ठंडी हवाएं और शांत वातावरण कपल्स के लिए एक यादगार अनुभव बनाते हैं। मई का महीना कपल्स के लिए ट्रैवल और रोमांस दोनों का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है। सही जगह चुनकर आप अपने रिश्ते को और भी खास बना सकते हैं।
पानी बचाने के आसान तरीके: लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव से दूर होगी गर्मियों की किल्लत

नई दिल्ली ।गर्मी का मौसम शुरू होते ही कई इलाकों में पानी की कमी एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आने लगती है। बढ़ते तापमान, घटते भूजल स्तर और पानी के अनियंत्रित उपयोग के कारण आने वाले समय में यह संकट और गहरा हो सकता है। ऐसे में केवल प्रशासनिक प्रयास ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की छोटी-छोटी आदतें भी इस समस्या को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि पानी बचाने के लिए बड़े और कठिन बदलाव करने होंगे, लेकिन वास्तविकता यह है कि दैनिक जीवन में कुछ सरल सुधार करके भी बड़ी मात्रा में पानी की बचत की जा सकती है। यदि इन आदतों को नियमित रूप से अपनाया जाए तो गर्मी के मौसम में पानी की कमी की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे पहले ध्यान देने योग्य बात यह है कि ब्रश या शेविंग करते समय नल को लगातार खुला नहीं छोड़ना चाहिए। अक्सर अनजाने में बहने वाला यह पानी हर दिन कई लीटर की बर्बादी का कारण बनता है। जरूरत पड़ने पर ही पानी का उपयोग करना और तुरंत नल बंद कर देना एक बेहद प्रभावी तरीका है। इसके अलावा नहाने की आदत में बदलाव भी पानी की बचत में बड़ी भूमिका निभा सकता है। शॉवर की बजाय बाल्टी और मग का उपयोग करने से पानी की खपत काफी कम हो जाती है। यह एक पारंपरिक लेकिन बेहद उपयोगी तरीका है, जिसे अपनाकर हर घर में पानी की बचत संभव है। घर में उपयोग होने वाले आरओ सिस्टम और कूलर से निकलने वाले अतिरिक्त पानी को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, जबकि इसका उपयोग पोछा लगाने, पौधों को पानी देने या सफाई जैसे कार्यों में आसानी से किया जा सकता है। इसी तरह यह पानी कई घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो सकता है। पौधों की देखभाल के समय भी समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। सुबह या शाम के समय पौधों को पानी देने से नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जबकि दोपहर की तेज धूप में पानी तेजी से वाष्पित हो जाता है, जिससे उसकी बर्बादी बढ़ जाती है। घर में किसी भी तरह की पानी की लीकेज को नजरअंदाज करना भी एक बड़ी गलती साबित हो सकती है। टपकते नल या पाइपलाइन की छोटी सी खराबी भी समय के साथ बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी का कारण बनती है। इसलिए ऐसी समस्याओं को तुरंत ठीक कराना बेहद जरूरी है। कुल मिलाकर, पानी की बचत केवल एक आदत नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसे अपनाकर हम आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं। यदि हर व्यक्ति इन छोटे-छोटे कदमों को अपनाए, तो गर्मियों में पानी की किल्लत को काफी हद तक कम किया जा सकता है और एक बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है।
Business Horoscope 14 May: कारोबार में बढ़ेगा विस्तार, लेकिन निवेश फैसलों में रखें ध्यान

नई दिल्ली। 14 मई, गुरुवार का दिन व्यापार और व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण संकेत लेकर आ सकता है। ज्योतिषीय और सामान्य व्यावसायिक दृष्टि से यह दिन उन लोगों के लिए बेहतर माना जा रहा है, जो अपने कामकाज में विस्तार, नेटवर्किंग और नई डील्स पर फोकस कर रहे हैं। हालांकि, यह दिन पूरी तरह बिना जोखिम वाला नहीं रहेगा, इसलिए सोच-समझकर कदम उठाना आवश्यक होगा। व्यापार जगत में इस दिन नए अवसर सामने आ सकते हैं। खासकर वे लोग जो मार्केटिंग, सेल्स, सर्विस सेक्टर या पार्टनरशिप बिज़नेस से जुड़े हैं, उन्हें नए क्लाइंट्स से बातचीत आगे बढ़ाने में सफलता मिल सकती है। लंबे समय से रुके हुए प्रोजेक्ट्स या अटके हुए सौदे भी इस दिन गति पकड़ सकते हैं, जिससे व्यवसाय में हलचल बढ़ेगी और गतिविधियां तेज होंगी। नेटवर्किंग के लिहाज से भी यह दिन काफी उपयोगी साबित हो सकता है। व्यापारियों को नए लोगों से मिलने और अपने संपर्क बढ़ाने का मौका मिलेगा, जो भविष्य में लाभकारी साबित हो सकता है। बिज़नेस मीटिंग्स और बातचीत में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा। हालांकि, इस दिन एक बात का विशेष ध्यान रखना जरूरी है कि कोई भी बड़ा आर्थिक निर्णय जल्दबाजी में न लिया जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, 14 मई को बड़े निवेश या भारी धन लेन-देन में थोड़ा जोखिम रह सकता है। पार्टनरशिप में गलतफहमी या दस्तावेजों को लेकर असावधानी नुकसान का कारण बन सकती है, इसलिए हर एग्रीमेंट और कागजी काम को ध्यान से पढ़ना जरूरी होगा। व्यापारियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खर्चों पर नियंत्रण रखें और केवल उन्हीं योजनाओं में पैसा लगाएं, जिनकी पूरी जानकारी हो। इस दिन छोटे-छोटे कदम आगे चलकर बड़े फायदे का कारण बन सकते हैं, इसलिए रणनीति बनाकर काम करना अधिक लाभकारी रहेगा। बाजार की स्थिति की बात करें तो स्थिरता के बीच हल्की तेजी देखी जा सकती है, जिससे व्यापारियों को नए अवसर मिल सकते हैं। जो लोग धैर्य और योजना के साथ काम करेंगे, उनके लिए यह दिन सकारात्मक परिणाम दे सकता है।कुल मिलाकर, 14 मई गुरुवार का दिन व्यापार के लिए मध्यम से अच्छा माना जा सकता है। यह दिन उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेगा जो समझदारी से फैसले लेते हैं और जोखिम को नियंत्रित रखते हैं।
सुबह या शाम कब करें वॉकिंग? गर्मियों में हेल्थ एक्सपर्ट्स की अहम सलाह

नई दिल्ली । गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए वॉकिंग को सबसे आसान और प्रभावी व्यायामों में से एक माना जाता है, लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही समय पर किया जाए। गलत समय पर की गई वॉकिंग शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है और कई बार यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के दौरान दिन के समय तापमान काफी अधिक हो जाता है, जिससे शरीर जल्दी थक जाता है और पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए वॉकिंग के लिए समय का सही चयन बेहद जरूरी माना जाता है। आमतौर पर सुबह और शाम का समय सबसे सुरक्षित और फायदेमंद होता है। सुबह के समय, खासकर 5 बजे से 7 बजे के बीच का समय वॉकिंग के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा होता है और हवा भी साफ होती है, जिससे शरीर को ताजगी मिलती है। इस दौरान की गई वॉक न केवल शरीर को ऊर्जा देती है बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करने में मदद करती है। इसके अलावा सुबह के समय प्रदूषण का स्तर भी कम होता है, जिससे सांस लेने में आसानी रहती है और फेफड़ों पर दबाव कम पड़ता है। अगर किसी कारणवश सुबह वॉक करना संभव न हो, तो शाम का समय एक अच्छा विकल्प माना जाता है। शाम 6:30 बजे के बाद तापमान धीरे-धीरे कम होने लगता है और धूप का असर भी खत्म हो जाता है। इस समय की गई वॉक शरीर को रिलैक्स करने में मदद करती है और दिनभर की थकान को कम करती है। हालांकि बहुत देर रात तक वॉक करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे नींद का पैटर्न प्रभावित हो सकता है। दिन के समय, खासकर 11 बजे से 4 बजे के बीच वॉकिंग करना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इस दौरान तेज धूप और गर्म हवाएं शरीर के तापमान को तेजी से बढ़ा सकती हैं, जिससे हीट स्ट्रोक, सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह समय और भी अधिक खतरनाक माना जाता है, इसलिए इस अवधि में बाहर निकलने से बचना चाहिए। गर्मी में वॉकिंग के दौरान शरीर से पसीना अधिक निकलता है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसलिए वॉक से पहले और बाद में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। नारियल पानी और नींबू पानी जैसे पेय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकते हैं और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखते हैं। इसके अलावा वॉकिंग के दौरान हल्के और ढीले कपड़े पहनना भी जरूरी माना जाता है। हल्के रंग के कपड़े शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं और गर्मी का असर कम महसूस होता है। धूप से बचाव के लिए टोपी और सनग्लासेस का उपयोग भी फायदेमंद हो सकता है।
पानी पीने का सही नियम क्या है? रिसर्च में सामने आया दिनभर की जरूरत का सच

नई दिल्ली। पानी जीवन का आधार है और शरीर के हर अंग के सही तरीके से काम करने के लिए इसकी जरूरत होती है। अक्सर कहा जाता है कि हर व्यक्ति को रोजाना 2 लीटर या 8 गिलास पानी पीना चाहिए, लेकिन हाल की रिसर्च इस धारणा को पूरी तरह सामान्य नियम मानने से इनकार करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार पानी की जरूरत हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है और इसे एक तय मात्रा में बांधना सही नहीं है। क्या सच में 2 लीटर पानी जरूरी है?लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि 2 लीटर पानी रोजाना पीना सेहत के लिए अच्छा है, लेकिन रिसर्च बताती है कि यह सिर्फ एक औसत गाइडलाइन है, कोई सख्त नियम नहीं। शरीर की जरूरत कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति। यानी हर इंसान के लिए पानी की मात्रा अलग हो सकती है और इसे एक तय नियम की तरह नहीं अपनाया जा सकता। रिसर्च में क्या सामने आया?यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन सहित कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में यह पाया गया कि:23 देशों के हजारों लोगों पर किए गए अध्ययन में 2 लीटर का नियम सभी पर लागू नहीं पाया गयागर्म और आर्द्र (humid) क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अधिक पानी की आवश्यकता होती हैजो लोग ज्यादा शारीरिक गतिविधि करते हैं, उन्हें भी अधिक पानी पीना चाहिएउम्र बढ़ने के साथ पानी की जरूरत धीरे-धीरे कम हो सकती हैइसका मतलब साफ है कि शरीर की जरूरत परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है। डॉक्टरों की सामान्य सलाहब्रिटिश हेल्थ गाइडलाइंस के अनुसार एक सामान्य वयस्क के लिए:रोजाना लगभग 6 से 8 गिलास पानी (1.5 से 2 लीटर) पर्याप्त माना जा सकता हैलेकिन इसे “फिक्स नियम” नहीं कहा जा सकताडॉक्टर भी यही सलाह देते हैं कि पानी की मात्रा शरीर की जरूरत के अनुसार तय करनी चाहिए। किन लोगों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है?कुछ लोगों को सामान्य से ज्यादा पानी पीने की आवश्यकता होती है:जो लोग ज्यादा एक्सरसाइज या मेहनत करते हैंगर्म और सूखे मौसम में रहने वाले लोगगर्भवती महिलाएंस्तनपान कराने वाली महिलाएंभारी शारीरिक काम करने वाले लोगइन सभी परिस्थितियों में शरीर तेजी से पानी खोता है, इसलिए अधिक पानी जरूरी हो जाता है। पानी कम या ज्यादा होने का असरकम पानी पीने के नुकसान:डिहाइड्रेशनसिर दर्द और थकानकिडनी पर दबावशरीर में कमजोरीज्यादा पानी पीने के नुकसान:इलेक्ट्रोलाइट असंतुलनकमजोरी और चक्करशरीर में मिनरल्स का संतुलन बिगड़ना
बृहस्पतिवार पर पीला रंग पहनने का महत्व, जानें कैसे बढ़ती है खुशहाली और सकारात्मकता

नई दिल्ली। हिंदू मान्यताओं में गुरुवार को पीले वस्त्र पहनना बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की कृपा मिलती है, जिससे जीवन में तरक्की, धन और मानसिक शांति आती है। सनातन परंपरा में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित माना गया है। गुरुवार यानी बृहस्पतिवार का संबंध भगवान विष्णु और देवताओं के गुरु बृहस्पति से माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन पूजा-पाठ, व्रत और पीले रंग के विशेष महत्व का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करना शुभ फलदायी माना जाता है और इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ज्योतिष शास्त्र में पीले रंग को ज्ञान, समृद्धि, सुख और सौभाग्य का प्रतीक बताया गया है। यह रंग मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला माना जाता है। भोपाल के ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, गुरुवार को पीले कपड़े पहनने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक सोच विकसित होती है और नकारात्मकता दूर होती है। यही वजह है कि धार्मिक अनुष्ठानों, विवाह और शुभ कार्यों में पीले रंग का विशेष उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि गुरुवार के दिन पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। जिन लोगों के जीवन में बार-बार बाधाएं आती हैं या काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, उनके लिए भी यह उपाय लाभकारी माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का इंटरव्यू, परीक्षा, व्यापारिक सौदा या कोई महत्वपूर्ण काम गुरुवार को हो, तो पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इससे मन शांत रहता है और सफलता की संभावना बढ़ती है। वहीं मानसिक तनाव, डर और चिंता से परेशान लोगों के लिए भी पीला रंग सकारात्मक प्रभाव डालने वाला माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में विवाह में देरी या रिश्तों में बाधा आने पर भी गुरुवार के उपाय करने की सलाह दी जाती है। खासतौर पर अविवाहित लड़कियों को हर गुरुवार पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे विवाह के योग मजबूत होते हैं और योग्य जीवनसाथी मिलने की संभावना बढ़ती है। अगर किसी कारणवश पीले कपड़े पहनना संभव न हो, तो हल्दी का तिलक लगाना या कपड़ों पर हल्दी का स्पर्श करना भी शुभ माना जाता है। हल्दी को स्वयं शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार गुरुवार के दिन पीले रंग के साथ चने की दाल, हल्दी, केला और पीले फूलों का दान करना भी बेहद पुण्यकारी माना जाता है। इससे गुरु ग्रह मजबूत होता है और व्यक्ति को करियर, शिक्षा, विवाह और धन से जुड़े मामलों में लाभ मिलने लगता है।