मुंबई में CNG हुआ महंगा, बढ़े दाम, ऑटो-टैक्सी किराया बढ़ने की आशंका

नई दिल्ली। महंगाई का असर एक बार फिर आम जनता की जेब पर पड़ा है। सोना और दूध के बाद अब सीएनजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो गई है। इसका सीधा असर सबसे पहले मुंबई में देखने को मिला है, जहां CNG के दाम 2 रुपये प्रति किलो बढ़ा दिए गए हैं। Mahanagar Gas Limited ने कीमतों में संशोधन करते हुए सीएनजी का रेट 82 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 84 रुपये प्रति किलो कर दिया है। यह नई दरें 14 मई से मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई सहित पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र में लागू हो गई हैं। कंपनी के अनुसार, यह बढ़ोतरी वैश्विक परिस्थितियों के कारण हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, गैस खरीद लागत में इजाफा, रुपये में गिरावट और सप्लाई चेन बाधित होने जैसे कारणों को इस मूल्य वृद्धि के पीछे जिम्मेदार बताया गया है। सीएनजी की कीमत बढ़ने का सीधा असर परिवहन व्यवस्था पर पड़ने की संभावना है। मुंबई में बड़ी संख्या में वाहन सीएनजी पर चलते हैं, जिनमें ऑटो, टैक्सी और निजी वाहन शामिल हैं। बढ़ी हुई कीमतों के बाद परिवहन लागत में इजाफा तय माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई में ऑटो यूनियनों ने किराया बढ़ाने की मांग भी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि सीएनजी की कीमत 2 रुपये बढ़ने से प्रति किलोमीटर संचालन लागत में बढ़ोतरी होगी, जिसका बोझ यात्रियों पर पड़ेगा। आंकड़ों के अनुसार, मुंबई महानगर क्षेत्र में लाखों वाहन सीएनजी पर चलते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी शामिल हैं। इसके अलावा सीएनजी बसों पर भी इस बढ़ोतरी का सीधा असर देखने को मिलेगा। यूनियनों और प्रशासन के बीच किराया संशोधन को लेकर जल्द बैठक होने की संभावना है। आने वाले दिनों में यदि फैसला होता है, तो मुंबई में ऑटो और टैक्सी का सफर भी महंगा हो सकता है।
इजरायल की स्थापना की ऐतिहासिक कहानी: कैसे 1948 में बना यहूदी राष्ट्र और बदला पश्चिम एशिया का नक्शा

नई दिल्ली। 14 मई 1948 को तेल अवीव में यहूदी एजेंसी के अध्यक्ष डेविड बेन-गुरियन ने इजरायल की स्वतंत्रता की घोषणा की। इसके साथ ही लगभग 2,000 वर्षों के बाद यहूदियों का एक स्वतंत्र राष्ट्र अस्तित्व में आया और बेन-गुरियन देश के पहले प्रधानमंत्री बने। उसी दिन ब्रिटिश शासन की समाप्ति के बाद क्षेत्र में तनाव और संघर्ष की स्थिति भी तेजी से बढ़ गई। घोषणा के तुरंत बाद ही कई अरब देशों और यहूदी समुदायों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। उसी शाम मिस्र की ओर से हवाई हमले की खबरें सामने आईं, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए। हालांकि तेल अवीव में बिजली संकट और युद्ध की आशंका के बावजूद यहूदी समुदाय ने अपने नए राष्ट्र के जन्म को ऐतिहासिक क्षण के रूप में मनाया। आधुनिक इजरायल की नींव 19वीं सदी के अंत में शुरू हुए ज़ायोनिस्ट आंदोलन से जुड़ी मानी जाती है। 1896 में ऑस्ट्रियाई पत्रकार थियोडोर हर्ज़ल ने अपनी पुस्तक द ज्यूइश स्टेट में यहूदी राष्ट्र की अवधारणा को मजबूत किया और 1897 में स्विट्जरलैंड में पहला ज़ायोनिस्ट कांग्रेस आयोजित किया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद ओटोमन साम्राज्य के पतन के साथ ब्रिटेन ने फिलिस्तीन पर नियंत्रण स्थापित किया। 1917 की बाल्फोर घोषणा के जरिए ब्रिटेन ने यहूदी मातृभूमि के समर्थन का संकेत दिया, जिसे बाद में लीग ऑफ नेशंस के शासनादेश में शामिल किया गया। इसके बाद 1920 और 1930 के दशक में फिलिस्तीन में यहूदियों और अरबों के बीच तनाव बढ़ता गया। ब्रिटिश शासन ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश में यहूदी आप्रवासन पर कई बार रोक लगाने का प्रयास किया, लेकिन संघर्ष लगातार बढ़ता रहा। द्वितीय विश्व युद्ध और होलोकॉस्ट के बाद यहूदी प्रवासन में तेजी आई। युद्ध के बाद ब्रिटेन ने मामला संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिया, जहां 1947 में फिलिस्तीन के विभाजन का प्रस्ताव पारित हुआ। इसके तहत यहूदी और अरब क्षेत्रों का अलग-अलग विभाजन तय किया गया। 14 मई 1948 को ब्रिटिश शासन की समाप्ति के साथ ही इजरायल राज्य की आधिकारिक घोषणा की गई। अगले ही दिन मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, लेबनान और इराक की सेनाओं ने इजरायल पर हमला कर दिया, जिससे पहला अरब-इजरायल युद्ध शुरू हुआ। कम संसाधनों के बावजूद इजरायली सेना ने संघर्ष जारी रखा और बाद में कई क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। 1949 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ, जिसके बाद इजरायल की सीमाओं को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली। इसके बाद 1967 के छह दिवसीय युद्ध में इजरायल ने अपने क्षेत्र का और विस्तार किया। 1979 में मिस्र के साथ ऐतिहासिक शांति समझौता हुआ, जिसके तहत सिनाई प्रायद्वीप वापस किया गया। 1993 में इजरायल और फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) के बीच भी शांति समझौते की शुरुआत हुई, हालांकि क्षेत्र में तनाव और संघर्ष पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। आज भी इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, जो पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक कूटनीति को लगातार प्रभावित करता रहा है।
RCB vs KKR: विराट कोहली ने रचा इतिहास, रोहित और धोनी को छोड़ा पीछे, IPL में बनाए कई रिकॉर्ड

रायपुर। आईपीएल 2026 में बुधवार (13 मई) को रायपुर में खेले गए मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bengaluru) और कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders) के बीच स्टार बल्लेबाज Virat Kohli ने मैदान पर उतरते ही इतिहास रच दिया। इस मुकाबले में उन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए और आईपीएल इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। विराट कोहली अब आईपीएल इतिहास में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। यह मुकाबला उनके IPL करियर का 279वां मैच रहा, जिसके साथ उन्होंने MS Dhoni और Rohit Sharma को पीछे छोड़ दिया, जो इससे पहले 278-278 मैचों के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष पर थे। मैच में कोहली ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 60 गेंदों पर नाबाद 105 रन बनाए। उनकी इस पारी में 11 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। यह उनके आईपीएल करियर का 9वां शतक था, जबकि टी20 करियर का 10वां शतक। उनकी पारी की बदौलत आरसीबी ने यह मुकाबला 6 विकेट से जीत लिया। टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने के मामले में कोहली अब 10 शतकों के साथ सूची में शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। आईपीएल में भी उनके नाम अब 9 शतक दर्ज हो चुके हैं, जिससे वह इस लीग के सबसे सफल शतक बनाने वाले बल्लेबाजों में एक बन गए हैं। इसके अलावा कोहली ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। वह आईपीएल इतिहास में एक ही फ्रेंचाइजी के लिए सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए हैं, क्योंकि उन्होंने अपने पूरे आईपीएल करियर में सिर्फ आरसीबी का प्रतिनिधित्व किया है। आईपीएल में सबसे ज्यादा 400+ रन वाले सीजन के मामले में भी कोहली सबसे आगे हैं। उन्होंने 12 सीजन में 400 या उससे ज्यादा रन बनाए हैं, जो किसी भी बल्लेबाज से अधिक है। मैच के दौरान कोहली ने टी20 क्रिकेट में 14,000 रन का आंकड़ा भी सबसे तेज पार किया, जिसमें उन्होंने अन्य दिग्गजों की तुलना में कम पारियां खेलीं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने एक और बड़ा माइलस्टोन हासिल किया। आरसीबी की प्लेऑफ की उम्मीदों के बीच कोहली का यह फॉर्म टीम के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि आने वाले मैचों में वह अपने रिकॉर्ड को और कितनी ऊंचाई तक ले जाते हैं।
ज्योतिषीय बदलाव: बुधादित्य राजयोग से शनि जयंती पर बदल सकता है भाग्य का खेल

नई दिल्ली। शनि जयंती के अवसर पर बनने वाला बुधादित्य राजयोग कई राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आ रहा है। इस खगोलीय संयोग को ज्योतिष में बेहद प्रभावशाली माना जाता है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव, आर्थिक सुधार और नए अवसरों के योग बनते हैं। माना जा रहा है कि इस अवधि में रुके हुए कार्यों में तेजी आएगी और आय के नए स्रोत भी खुल सकते हैं। जानकारी के अनुसार, 15 मई को सूर्य और बुध का वृषभ राशि में एक साथ प्रवेश होगा, जिससे बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा। ज्योतिषियों के मुताबिक इसका प्रभाव शनि जयंती के आसपास और अधिक मजबूत होगा। 16 मई से 29 मई तक का समय कई जातकों के लिए विशेष रूप से अनुकूल माना जा रहा है। इस दौरान नए कार्यों की शुरुआत भी लाभकारी साबित हो सकती है। इस योग का सबसे अधिक प्रभाव कुछ चुनिंदा राशियों पर पड़ने की संभावना है। मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और व्यवसाय में नए अवसर लेकर आ सकता है। नौकरी बदलने या बेहतर ऑफर मिलने के योग बन रहे हैं। व्यापार में लाभ की स्थिति मजबूत होगी और विदेश से जुड़े अवसर भी मिल सकते हैं। सिंह राशि के लिए यह योग आर्थिक दृष्टि से काफी लाभकारी माना जा रहा है। आय में बढ़ोतरी के संकेत हैं और रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना बन सकती है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि देखने को मिल सकती है। कन्या राशि वालों के लिए यह समय उपलब्धियों से भरा रह सकता है। नौकरी में प्रगति, लाभकारी सौदे और संपत्ति या वाहन से जुड़े फायदे मिलने के योग बन रहे हैं। धार्मिक या आध्यात्मिक यात्राओं के अवसर भी बन सकते हैं। कुंभ राशि के जातकों के लिए भी यह योग सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जा रहा है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और आय के विभिन्न स्रोत बन सकते हैं। निवेश से लाभ और पैतृक संपत्ति से जुड़े फायदे मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। कुल मिलाकर यह खगोलीय संयोग कई राशियों के लिए नए अवसर, आर्थिक मजबूती और जीवन में स्थिरता का संकेत लेकर आ रहा है।
यूपी सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी दफ्तरों में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम, AC और यात्रा नियमों में भी बदलाव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कई अहम फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा बचत, खर्चों में कटौती और डिजिटल कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नई व्यवस्थाएं लागू करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हुई पहली बैठक में इन फैसलों पर सहमति बनी। नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी कार्यालयों में एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच ही रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे बिजली की अनावश्यक खपत कम होगी और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने सचिवालय और निदेशालय स्तर से इसकी शुरुआत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही लिफ्ट और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल केवल जरूरत पड़ने पर करने को कहा गया है। सरकार ने कार्यसंस्कृति में बदलाव लाते हुए 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में सप्ताह में कम से कम दो दिन वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया है। इसके साथ ही प्रशासनिक बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और समिति बैठकों को हाइब्रिड या डिजिटल मोड में आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों से सार्वजनिक परिवहन को अपनाने की अपील की है। उन्होंने सप्ताह में कम से कम एक दिन मेट्रो, बस, ई-रिक्शा, कारपूलिंग या साइकिल जैसे साधनों के उपयोग का सुझाव दिया। उनका कहना है कि जब मंत्री और अधिकारी खुद उदाहरण पेश करेंगे, तभी जनता तक सकारात्मक संदेश पहुंचेगा। इसके अलावा मंत्रियों को अपनी वाहन फ्लीट 50 प्रतिशत तक कम करने की सलाह भी दी गई है। बैठक में विदेश यात्राओं को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले छह महीनों तक अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी विदेश यात्राओं से बचें। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में ऊर्जा और ईंधन बचाना केवल आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है। सरकार ने राज्य में सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में भी नई योजनाओं पर जोर दिया है। सरकारी भवनों, रिहायशी कॉलोनियों, स्कूलों और कॉलेजों में सौर ऊर्जा के अधिक उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नई नीति तैयार करने की बात भी कही गई है। मुख्यमंत्री ने सामाजिक आयोजनों में सादगी और मितव्ययिता अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शादी-विवाह जैसे कार्यक्रमों में स्थानीय स्थलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिससे स्थानीय कारोबार और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार ने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए मंत्रियों को केवल उत्तर प्रदेश में निर्मित उत्पादों को उपहार के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इसके अलावा एलपीजी की जगह पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, तिलहन उत्पादन बढ़ाने और वर्षा जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने सोने के अनावश्यक आयात को कम करने की आवश्यकता बताते हुए विदेशी मुद्रा पर दबाव घटाने की बात भी कही।
सोने पर चीन का बड़ा दांव: लगातार खरीदारी से ग्लोबल मार्केट और डॉलर सिस्टम में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली। चीन की आक्रामक गोल्ड खरीदारी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक खिलाड़ियों में शामिल चीन अब वैश्विक गोल्ड मार्केट में भी मजबूत ताकत बनकर उभर रहा है। चीन का केंद्रीय बैंक लगातार 18वें महीने बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहा है, जिससे ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम और डॉलर आधारित व्यवस्था को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने अप्रैल 2026 में करीब 8 टन सोना खरीदा। इसके बाद चीन का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व बढ़कर 7 करोड़ 28 लाख ट्रॉय औंस तक पहुंच गया है। मार्च 2026 के अंत तक इन भंडारों की अनुमानित कीमत लगभग 342.76 अरब डॉलर आंकी गई है। जानकारों के अनुसार, चीन की यह रणनीति केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे दीर्घकालिक आर्थिक और भू-राजनीतिक सोच जुड़ी हुई है। बीजिंग लगातार अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा सोने में तब्दील कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों और वैश्विक अनिश्चितताओं ने चीन को अपनी वित्तीय रणनीति बदलने के लिए प्रेरित किया है। चीन के लिए सोना ऐसा सुरक्षित एसेट माना जा रहा है, जिसे किसी भी बाहरी प्रतिबंध के जरिए नियंत्रित या फ्रीज नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि वह इसे भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के रूप में देख रहा है। इसके अलावा, चीन अपनी मुद्रा युआन को वैश्विक व्यापार में मजबूत स्थिति दिलाने की कोशिश भी कर रहा है। माना जा रहा है कि बड़े गोल्ड रिजर्व चीन की आर्थिक विश्वसनीयता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में युआन की स्वीकार्यता को मजबूती दे सकते हैं। गौरतलब है कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद चीन की खरीदारी लगातार जारी है। इससे संकेत मिलता है कि बीजिंग अल्पकालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक रणनीतिक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन फिलहाल बाजार में हलचल मचाने के बजाय धीरे-धीरे मजबूत और सुरक्षित गोल्ड रिजर्व तैयार करने की नीति पर काम कर रहा है। हालांकि, उसकी लगातार बढ़ती मांग का असर अब वैश्विक गोल्ड मार्केट में साफ दिखाई देने लगा है। चीन के साथ आम निवेशकों की बढ़ती खरीदारी भी सोने की कीमतों को मजबूती दे रही है।
एमपी में गर्मी का कहर तेज, इंदौर-उज्जैन में लू का ऑरेंज अलर्ट, भोपाल-जबलपुर भी होंगे प्रभावित

भोपाल । मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को मालवा-निमाड़ क्षेत्र समेत इंदौर और उज्जैन संभाग के कई शहर तेज गर्मी और लू की चपेट में रहे। छतरपुर के खजुराहो में सबसे अधिक 45.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक प्रदेश के लगभग आधे हिस्से में हीट वेव का असर बना रहेगा। गुरुवार को इंदौर, उज्जैन, धार और रतलाम में तेज लू को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में दिन के साथ रात का तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे वॉर्म नाइट की स्थिति बनेगी। गर्म हवाओं का असर झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, देवास, सीहोर, शाजापुर, आगर-मालवा और राजगढ़ में भी देखने को मिलेगा। भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी गुरुवार को तेज गर्मी पड़ने के आसार हैं। शाजापुर, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, टीकमगढ़ और छतरपुर जैसे जिलों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। बुधवार को प्रदेश के 12 शहरों में तापमान 44 डिग्री से अधिक दर्ज किया गया। खजुराहो सबसे गर्म रहा, जबकि रतलाम में 45.2 डिग्री और धार में 45 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। शाजापुर में 44.7 डिग्री, गुना में 44.6 डिग्री, श्योपुर और सागर में 44.4 डिग्री, खरगोन और रायसेन में 44.2 डिग्री, खंडवा में 44.1 डिग्री तथा दमोह में 44 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। प्रदेश के प्रमुख शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 44.7 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, भोपाल में 43.2 डिग्री, इंदौर में 43.6 डिग्री, ग्वालियर में 42 डिग्री और जबलपुर में 42.7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले चार दिनों तक प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर जारी रहेगा। खासतौर पर इंदौर और उज्जैन संभाग में गर्मी का असर अधिक रहेगा, इसलिए यहां ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में भी लू चलने की चेतावनी दी गई है। 17 मई तक प्रदेश के कई जिलों में हीट वेव का असर बना रह सकता है। हालांकि, मई की शुरुआत में प्रदेश में लगातार मौसम बदला हुआ रहा। 30 अप्रैल से शुरू हुआ आंधी-बारिश का सिलसिला 10 मई तक जारी रहा। पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवात और ट्रफ सिस्टम के कारण मई के पहले सप्ताह में कई जिलों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि देखने को मिली। 11 मई को मौसम साफ हुआ, लेकिन 12 और 13 मई को फिर बदलाव देखने को मिला। इस तरह मई के 13 दिनों में से 11 दिन प्रदेश में कहीं न कहीं बारिश, आंधी या ओलावृष्टि का असर रहा। गुरुवार के लिए फिलहाल बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
दूध हुआ और महंगा: अमूल के बाद मदर डेयरी ने भी बढ़ाई कीमतें, जानिए नया रेट

नई दिल्ली। महंगाई का असर एक बार फिर आम जनता की रसोई पर साफ दिखाई देने लगा है। अमूल के बाद अब प्रमुख डेयरी ब्रांड Mother Dairy ने भी दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। कंपनी ने 14 मई 2026 से पूरे दिल्ली-एनसीआर और अन्य बाजारों में दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने का फैसला किया है। कंपनी के अनुसार, यह निर्णय बढ़ती उत्पादन लागत और किसानों से दूध खरीदने की बढ़ी हुई कीमतों को संतुलित करने के लिए लिया गया है। पिछले एक साल में दूध उत्पादन की लागत में लगभग 6 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर कंपनियों के खर्चों पर पड़ा है। नई दरों के बाद अब उपभोक्ताओं को फुल क्रीम दूध के लिए 72 रुपये प्रति लीटर चुकाने होंगे, जबकि टोंड दूध की कीमत 60 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं, गाय के दूध की कीमत भी बढ़कर 62 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। डबल टोंड दूध 54 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध रहेगा। कंपनी ने बताया कि वह अपने कुल रेवेन्यू का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे किसानों को भुगतान करती है। ऐसे में जब कच्चे दूध की खरीद कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका असर अंतिम उत्पाद की कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक हो जाता है। Mother Dairy का कहना है कि यह मूल्य वृद्धि केवल आंशिक है और उपभोक्ताओं पर बोझ को न्यूनतम रखने की कोशिश की गई है। कंपनी प्रतिदिन दिल्ली-एनसीआर में लाखों लीटर दूध की आपूर्ति करती है, जिससे यह बदलाव बड़े पैमाने पर उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा। गौरतलब है कि इसी समय देश की एक और बड़ी डेयरी कंपनी Amul ने भी दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। दोनों प्रमुख ब्रांडों द्वारा एक साथ कीमतें बढ़ाने से बाजार में दूध महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर घरेलू बजट और महंगाई पर पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, पशु आहार, ईंधन, पैकेजिंग सामग्री और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत ने डेयरी सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया है। यही कारण है कि कंपनियां कीमतें बढ़ाने को मजबूर हुई हैं। दूसरी ओर, उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव चिंता का विषय बन गया है क्योंकि दूध रोजमर्रा की जरूरत का अहम हिस्सा है और इसकी कीमत बढ़ने से मासिक खर्च में सीधा इजाफा होता है। कुल मिलाकर, Mother Dairy और Amul दोनों के फैसलों ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में डेयरी उत्पादों की कीमतें और महंगी हो सकती हैं।
बड़ा कानूनी कदम: रॉबर्ट वाड्रा ने HC का दरवाजा खटखटाया, समन पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। नई दिल्ली में एक बार फिर चर्चित जमीन सौदे से जुड़ा मामला सुर्खियों में है। इस बार मामला Robert Vadra की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका को लेकर है। वाड्रा ने निचली अदालत द्वारा जारी समन को चुनौती देते हुए अदालत से राहत की मांग की है। यह पूरा मामला हरियाणा के गुरुग्राम जिले के शिकोहपुर (अब सेक्टर 83) में हुए एक जमीन सौदे से जुड़ा है, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दायरे में रखा गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस सौदे में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने कम कीमत पर जमीन खरीदकर बाद में भारी मुनाफे में उसे बेचा। जानकारी के अनुसार, यह सौदा 2008 में हुआ था, जब कंपनी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से लगभग 3.5 एकड़ जमीन करीब 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। उस समय Robert Vadra इस कंपनी के डायरेक्टर थे। इसके बाद 2012 में वही जमीन रियल एस्टेट कंपनी DLF को लगभग 58 करोड़ रुपये में बेच दी गई। इस लेनदेन को लेकर बाद में गंभीर सवाल उठे और मामला जांच एजेंसियों तक पहुंच गया। इस केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 2012 में आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने इस जमीन के म्यूटेशन को रद्द कर दिया था। उन्होंने इसे भूमि चकबंदी नियमों और प्रक्रियात्मक उल्लंघन से जुड़ा मामला बताते हुए कार्रवाई की थी। इसके बाद यह सौदा विवादों के घेरे में आ गया। प्रवर्तन निदेशालय ने बाद में इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाते हुए आरोपपत्र दाखिल किया। ईडी का कहना है कि इस सौदे से जुड़े दस्तावेजों और शुरुआती जांच में पर्याप्त सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई जरूरी है। इसी आरोपपत्र के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने 15 अप्रैल को समन जारी किया था और वाड्रा सहित अन्य आरोपियों को 16 मई को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। इसी आदेश को अब Robert Vadra ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। दिल्ली हाईकोर्ट में यह याचिका जस्टिस मनोज जैन की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई है, जिस पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है। वाड्रा की तरफ से दलील दी गई है कि निचली अदालत का समन कानूनी प्रक्रिया और तथ्यों के आधार पर सही नहीं है, इसलिए इसे रद्द किया जाए। वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों का दावा है कि यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है और इसकी गहन जांच जरूरी है। फिलहाल अदालत का अगला फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि हाईकोर्ट इस समन को बरकरार रखता है या इसे रोकने का आदेश देता है।
RCB का सपना फिर टूटा-16 पॉइंट्स के बाद भी बाहर, जानिए पूरा गणित

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में डिफेंडिंग चैंपियन Royal Challengers Bengaluru ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 12 में से 8 मुकाबले जीतकर 16 अंक हासिल कर लिए हैं। आमतौर पर माना जाता है कि 16 पॉइंट्स मिलते ही कोई भी टीम प्लेऑफ के लिए लगभग क्वालीफाई कर लेती है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। वजह यह है कि इस सीजन में प्लेऑफ की रेस बेहद कड़ी हो गई है और कई टीमें अभी भी बराबरी या उससे ज्यादा अंकों तक पहुंचने की स्थिति में हैं। यही कारण है कि 16 अंक होने के बावजूद भी आरसीबी का टिकट अभी तक पक्का नहीं हुआ है। इस समय पॉइंट्स टेबल में स्थिति ऐसी है कि कम से कम 8 टीमें प्लेऑफ की दौड़ में बनी हुई हैं। इनमें से कई टीमें अभी भी 16, 18 और यहां तक कि 20 अंकों तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं। यही वजह है कि गणित पूरी तरह खुला हुआ है। उदाहरण के तौर पर, गुजरात टाइटंस 16 अंकों तक पहुंच चुकी है और उसके अभी 2 मैच बाकी हैं। इसका मतलब है कि वह अधिकतम 20 अंक तक जा सकती है। इसी तरह सनराइजर्स हैदराबाद और चेन्नई सुपर किंग्स जैसे टीमें 18 अंकों तक पहुंचने की स्थिति में हैं। वहीं पंजाब किंग्स 19 अंकों तक जा सकती है और राजस्थान रॉयल्स भी 18 अंकों तक पहुंचने की क्षमता रखती है। इस जटिल स्थिति के कारण Royal Challengers Bengaluru को यह इंतजार करना पड़ रहा है कि अन्य टीमें अपने मैचों में कैसा प्रदर्शन करती हैं। जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि कौन-सी 4 टीमें टॉप पर रहेंगी, तब तक किसी भी टीम का प्लेऑफ में प्रवेश तय नहीं माना जा सकता। असल में इस बार की स्थिति पिछले सीजनों से अलग है, क्योंकि यहां कई टीमें 16 से 20 अंकों के बीच फंसी हुई हैं। यही कारण है कि 18 अंक भी सुरक्षित नहीं माने जा रहे हैं और समीकरण अंतिम चरण तक उलझा हुआ है। आरसीबी के पास अभी भी 2 मैच बचे हैं और अगर वह दोनों जीतती है तो वह 20 अंकों तक पहुंच सकती है। लेकिन फिर भी उसे अन्य टीमों के परिणामों पर निर्भर रहना पड़ेगा। प्लेऑफ का फाइनल गणित तभी साफ होगा जब लीग चरण पूरी तरह खत्म हो जाएगा और केवल 4 टीमें ही 16+ या 18+ अंकों के साथ शीर्ष पर बचेंगी। कुल मिलाकर, इस बार आईपीएल 2026 में प्लेऑफ की दौड़ बेहद रोमांचक और अनिश्चित हो गई है, जहां हर मैच सीधे क्वालीफिकेशन पर असर डाल रहा है।