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दुर्लभ महीना जो देता है महापुण्य लाभ-लेकिन छोटी सी भूल बढ़ा सकती है पाप

नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार हर कुछ वर्षों में एक विशेष महीना आता है, जिसे Adhik Maas या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यह महीना सामान्य 12 महीनों से अलग होता है और इसे अतिरिक्त (13वां) महीना माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पवित्र महीना 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह का संबंध सीधे भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि जब इस अतिरिक्त महीने को कोई नाम नहीं मिल पाया, तब स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर ‘पुरुषोत्तम मास’ बनाया। इसी कारण यह महीना विष्णु भक्ति, साधना और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस अवधि में किए गए जप, तप, पूजा-पाठ और दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। इसे “अक्षय पुण्य” प्राप्त करने वाला समय भी कहा जाता है। इसलिए भक्तजन इस महीने में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने का प्रयास करते हैं। हालांकि, जितना यह महीना पुण्यदायी माना गया है, उतना ही इसमें कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कुछ कार्यों से बचना चाहिए, अन्यथा उसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इस महीने में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश या किसी नए कार्य की शुरुआत को शुभ नहीं माना जाता। इसी तरह, नए निर्माण कार्य या बड़े निवेश से भी बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, इस अवधि में शारीरिक और मानसिक पवित्रता का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है। ब्रह्मचर्य का पालन और संयमित जीवनशैली अपनाना इस माह का मुख्य नियम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन और नशीले पदार्थों का सेवन इस महीने में वर्जित माना गया है। ऐसा करने से आध्यात्मिक पुण्य कम होने की बात कही जाती है। इसी तरह झूठ बोलना, धोखा देना, किसी का धन हड़पना या बुरे कर्म करना इस महीने में कई गुना पाप का कारण बन सकता है। इसलिए इस समय को आत्ममंथन और सुधार का अवसर माना जाता है। दान-पुण्य को इस महीने में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है, लेकिन यह भी कहा गया है कि दान का दिखावा नहीं करना चाहिए और न ही अशुद्ध या खराब वस्तुओं का दान करना चाहिए। कांसे के बर्तन में भोजन करने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसे भी शास्त्रीय नियमों के विरुद्ध माना गया है। कुल मिलाकर Adhik Maas को आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का महीना माना गया है, जिसमें सही आचरण व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।

दिमाग के नकारात्मक विचारों को रोकने का आसान उपाय- बस पढ़ लें ये शक्तिशाली मंत्र

नई दिल्ली।  आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में तनाव, चिंता और नकारात्मक विचार आम समस्या बन चुके हैं। कई बार बिना किसी कारण के मन में डर, असफलता का खौफ या बेचैनी पैदा होने लगती है, जिससे व्यक्ति का आत्मविश्वास भी प्रभावित होता है। ज्योतिष शास्त्र और आध्यात्मिक मान्यताओं में ऐसे समय में कुछ मंत्रों को बेहद प्रभावी माना गया है, जो मन को शांत करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं। मान्यता है कि नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करने से मानसिक संतुलन बेहतर होता है और व्यक्ति भीतर से मजबूत महसूस करता है। सबसे पहले आता है दुर्गा मंत्र  “ॐ दुं दुर्गायै नमः”। यह मंत्र मां दुर्गा को समर्पित है और इसे नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि इसका जाप करने से मन का डर कम होता है और आसपास की नकारात्मकता भी दूर होती है। यह व्यक्ति के भीतर एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। इसके बाद आता है प्रसिद्ध गायत्री मंत्र  “ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्”। यह मंत्र मानसिक शुद्धि और एकाग्रता बढ़ाने के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि इसका नियमित जाप करने से मन शांत होता है और सोचने-समझने की क्षमता मजबूत होती है। तीसरा मंत्र है हनुमान मंत्र -“ॐ हनु हनुमते नमो नमः”। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए बताया गया है जिन्हें किसी काम से पहले घबराहट या डर महसूस होता है। ऐसा कहा जाता है कि यह मंत्र आत्मविश्वास बढ़ाता है और नकारात्मक विचारों को दूर करता है। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम्…” को भी अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। यह भगवान शिव को समर्पित मंत्र है और इसे भय, चिंता और मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है। श्रद्धा के अनुसार, यह मंत्र जीवन में सकारात्मकता और सुरक्षा की भावना को मजबूत करता है। अंत में आता है हनुमान चालीसा, जिसका पाठ हिंदू धर्म में अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से मन मजबूत होता है और नकारात्मक ऊर्जा पास नहीं आती। हालांकि, मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी माना जाता है कि किसी भी प्रकार का मंत्र या ध्यान व्यक्ति को फोकस करने, सांसों को नियंत्रित करने और मानसिक स्थिरता पाने में मदद करता है। इस तरह, जब भी मन में बार-बार नकारात्मक विचार आएं, तो कुछ देर रुककर शांत मन से इन मंत्रों का जप या पाठ करने से मानसिक राहत और सुकून महसूस किया जा सकता है।

50 गुना फीस की डिमांड और फिर पलटी बाजी: जब ‘मुगल-ए-आज़म’ के गाने में आया ट्विस्ट

नई दिल्ली।  भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य और ऐतिहासिक फिल्मों में गिनी जाने वाली Mughal-e-Azam सिर्फ अपनी कहानी और भव्य सेट्स के लिए ही नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी दिलचस्प कहानियों के लिए भी मशहूर है। इस फिल्म के एक खास गाने को लेकर जो घटनाक्रम हुआ, वह आज भी फिल्म इतिहास में एक प्रेरणादायक किस्सा माना जाता है। कहा जाता है कि जब फिल्म में तानसेन की तरह एक शास्त्रीय संगीत आधारित गीत को सलीम और अनारकली पर फिल्माया जाना था, तब सवाल उठा कि इस गाने को आखिर गाएगा कौन। संगीत निर्देशक नौशाद और निर्देशक के. आसिफ ने तय किया कि अगर अतीत में तानसेन ने यह परंपरा निभाई थी, तो आज के दौर में उनकी आत्मा को जीवंत करने के लिए सबसे उपयुक्त आवाज उस्ताद Ustad Bade Ghulam Ali Khan की होगी। लेकिन जब टीम उस्ताद साहब के पास पहुंची, तो उन्होंने गाने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उन्होंने पहले कभी फिल्मी गाना नहीं गाया और न ही आगे गाने का इरादा है। उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसके बाद भी के. आसिफ हार नहीं माने। उन्होंने लगातार उस्ताद साहब को मनाने की कोशिश की। इस बीच उस्ताद बड़े गुलाम अली खान ने एक तरह से मजाक या परीक्षा लेते हुए ऐसी फीस मांगी, जो उस समय के हिसाब से सामान्य गायक की फीस से लगभग 50 गुना ज्यादा थी—यानी करीब 25 हजार रुपये, जबकि उस दौर में गायक 400-500 रुपये लेते थे। उम्मीद के विपरीत, के. आसिफ ने इस मांग को तुरंत स्वीकार कर लिया और कहा कि “आप अनमोल हैं, कीमत की बात ही नहीं है।” यह सुनकर उस्ताद साहब भी हैरान रह गए और धीरे-धीरे सहमत हो गए। हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जब रिकॉर्डिंग की बात आई, तो उस्ताद साहब ने शर्त रख दी कि वह गाना तभी गाएंगे जब उन्हें पूरा सीन दिखाया जाएगा, जिस पर यह गीत फिल्माया जाना है। उस समय सीन पूरी तरह तैयार भी नहीं था। के. आसिफ ने तुरंत व्यवस्था की और Mughal-e-Azam के सलीम और अनारकली वाले रोमांटिक दृश्य को विशेष रूप से शूट करवाया। दिलीप कुमार और मधुबाला के बीच फिल्माए गए इस दृश्य को एडिट कर तुरंत उस्ताद साहब को दिखाया गया। सीन देखने के बाद उस्ताद साहब प्रभावित हुए और उन्होंने गाना रिकॉर्ड करने के लिए हामी भर दी। इतना ही नहीं, उन्होंने इस गाने को तीन बार रिकॉर्ड किया ताकि सबसे बेहतरीन वर्जन चुना जा सके। इस पूरी प्रक्रिया ने साबित किया कि Mughal-e-Azam सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उस दौर की कलात्मक पराकाष्ठा थी, जिसमें संगीत, अभिनय और निर्देशन तीनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। फिल्म के निर्माण में भी भव्यता का कोई मुकाबला नहीं था। देशभर से कारीगर, ज्वेलरी डिजाइनर, टेलर और कलाकार बुलाए गए थे। विशाल युद्ध दृश्यों के लिए हजारों घोड़े, ऊंट और सैनिकों का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी और भव्य परियोजनाओं में से एक बन गई। आज भी जब यह किस्सा दोहराया जाता है, तो यह साफ हो जाता है कि जुनून, सम्मान और कला के प्रति समर्पण ही किसी रचना को अमर बनाता है।

‘ओम शांति ओम’ के ये सीन थे पूरी तरह VFX-मेकिंग देखकर घूम जाएगा दिमाग

नई दिल्ली। साल 2007 की ब्लॉकबस्टर फिल्म Om Shanti Om के कुछ बेहद खास सीन्स में ऐसा VFX इस्तेमाल किया गया था, जिसे दर्शक पकड़ ही नहीं पाए। पुराने बॉलीवुड क्लासिक फुटेज को मॉर्फ कर नए सीन में बदलने की यह तकनीक आज भी फिल्ममेकिंग का शानदार उदाहरण मानी जाती है। साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म Om Shanti Om न सिर्फ अपने गानों और कहानी के लिए याद की जाती है, बल्कि इसके शानदार VFX और तकनीकी प्रयोगों ने भी दर्शकों को खूब प्रभावित किया था। शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण स्टारर इस फिल्म ने उस समय बॉलीवुड में विजुअल इफेक्ट्स के इस्तेमाल को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया था। फिल्म में कई ऐसे सीन थे जो देखने में बेहद साधारण लगे, लेकिन असल में उन्हें तैयार करने में भारी VFX और एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। सबसे चर्चित सीन वह था जिसमें दीपिका पादुकोण पुराने जमाने के दिग्गज कलाकारों जैसे राजेश खन्ना, सुनील दत्त और जीतेंद्र के साथ स्क्रीन शेयर करती नजर आती हैं। दर्शकों को लगा कि यह सब साधारण एडिटिंग है, लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा जटिल थी। दरअसल, मेकर्स ने पुराने फिल्मों की फिजिकल रील्स को डिजिटल फॉर्मेट में कन्वर्ट किया। इसके बाद उन क्लिप्स को बेहद बारीकी से एडिट कर नए सीन में फिट किया गया। इस प्रक्रिया में पुराने एक्टर्स को उनके ओरिजिनल फुटेज से अलग कर डिजिटल कंपोजिटिंग के जरिए नए सीन में जोड़ा गया, जिसमें दीपिका पादुकोण को पूरी तरह से नए तरीके से प्लेस किया गया था। सबसे बड़ी चुनौती थी कि पुराने फुटेज की लाइटिंग, कैमरा एंगल और मूवमेंट को नए सेट के साथ पूरी तरह मैच किया जाए। यदि जरा भी गड़बड़ी होती, तो सीन नकली लग सकता था। यही वजह थी कि टीम को पुराने क्लिप्स की हर डिटेल कॉस्ट्यूम से लेकर एक्सप्रेशन तक का गहराई से अध्ययन करना पड़ा। इसके अलावा एक नया सेट भी तैयार किया गया ताकि बैकग्राउंड और वातावरण पूरी तरह से पुराने दौर जैसा लगे। VFX टीम ने इस बात का विशेष ध्यान रखा कि दर्शकों को यह महसूस ही न हो कि वे दो अलग-अलग समय की फुटेज को एक साथ देख रहे हैं। फिल्म की खासियत यह रही कि इतने जटिल तकनीकी काम के बावजूद यह सब इतना सहज दिखा कि दर्शकों ने इसे नोटिस भी नहीं किया। यही Om Shanti Om की सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है कि उसने मनोरंजन के साथ-साथ तकनीकी नवाचार का भी शानदार मिश्रण पेश किया। आज के समय में जब VFX फिल्मों का अहम हिस्सा बन चुका है, तब भी इस फिल्म के ये सीन भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर माने जाते हैं। ‘ओम शांति ओम’ ने साबित किया कि अगर तकनीक और क्रिएटिविटी सही तरीके से मिल जाए, तो पुरानी और नई दुनिया को एक ही फ्रेम में जोड़ा जा सकता है।

जब एक गाना बना इतिहास: 105 बार री-राइट कर बना हिंदी सिनेमा का सबसे महंगा ट्रैक

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने बने हैं जिन्होंने समय को पीछे छोड़ दिया, लेकिन फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ का गाना ‘प्यार किया तो डरना क्या’ आज भी अपनी भव्यता और परफेक्शन के लिए याद किया जाता है। इस गाने को सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि एक आर्टवर्क की तरह तैयार किया गया था, जिसमें हर शब्द, हर दृश्य और हर धुन पर बारीकी से काम किया गया।  105 बार री-राइट: परफेक्शन की हइस गाने की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिरिक्स को 105 बार दोबारा लिखा गया।मकसद सिर्फ एक था हर शब्द को इतना परफेक्ट बनाना कि उसमें कोई कमी न रह जाए।इस गाने को मशहूर शायर शकील बदायूंनी ने लिखा था और इसे स्वर दिया था स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने, जिससे इसकी भावनात्मक गहराई और भी बढ़ गई। उस दौर का सबसे महंगा गानाजब हिंदी फिल्मों का बजट लाखों में होता था, तब इस एक गाने पर लगभग 15 लाख रुपये खर्च किए गए थे।आज के हिसाब से यह रकम करोड़ों में मानी जाती है। इस भारी-भरकम खर्च की वजह थी भव्य सेट, बारीक डिजाइन और परफेक्शन के लिए किया गया अत्यधिक प्रोडक्शन वर्क। शीश महल जैसा भव्य सेइस गाने को फिल्माने के लिए मुंबई के मोहन स्टूडियो में एक शानदार सेट तैयार किया गया था।सेट को इस तरह डिजाइन किया गया कि वह असली शीश महल जैसा दिखे।बेल्जियम के असली शीशों का इस्तेमालफिरोजाबाद के कारीगरों की महीन कारीगरीमहीनों तक चली सेट डिजाइनिंगइस भव्यता ने गाने को ऐतिहासिक दृश्य बना दिया। ‘मुगल-ए-आजम’: एक ड्रीम प्रोजेक्साल 1960 में रिलीज हुई फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ उस समय की सबसे महंगी और आइकॉनिक फिल्मों में से एक थी।निर्देशक: के. आसिफकुल बजट: लगभग 1.5 करोड़ रुपये (उस समय के अनुसार विशाल राशि)IMDb रेटिंग: 8.1उपलब्धता: ZEE5 परफिल्म के हर हिस्से में भव्यता और परफेक्शन की झलक मिलती है, लेकिन यह गाना उसका सबसे चमकदार हिस्सा माना जाता है। ‘प्यार किया तो डरना क्या’ सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की क्रिएटिविटी, लगन और परफेक्शन का प्रतीक है। 105 बार लिखे गए लिरिक्स, भव्य सेट और लता मंगेशकर की आवाज ने इसे अमर बना दिया। यही वजह है कि आज भी इसे हिंदी सिनेमा का सबसे महंगा और सबसे आइकॉनिक गाना माना जाता है।

SC की बड़ी टिप्पणी, कहा- आज्ञाकारी पत्नी बनने के लिए महिलाएं क्यों दे अपने करियर की बलि?

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान शादी के बाद महिलाओं (Women) के अधिकारों को लेकर कुछ अहम टिप्पणियां की हैं। SC ने इस बात पर जोर दिया है कि एक पढ़ी-लिखी और कामकाजी महिला (Working Woman) से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह शादी (Marriage) के बाद अपनी पहचान और करियर की बलि दे दे। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि अगर कोई महिला अपने करियर के लिए पति से अलग रह रही है, तो उसे क्रूरता नहीं माना जा सकता। SC में एक डेंटिस्ट पत्नी और एक आर्मी ऑफिसर के बीच चल रहे विवाद पर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सिर्फ महिला से त्याग माने जाने की सोच को दकियानूसी बताया। पीठ ने कहा, “यह उम्मीद करना कि महिला हमेशा अपने करियर का त्याग करे और एक ‘आज्ञाकारी पत्नी’ की पारंपरिक छवि में सिमट कर रहे, यह एक पुरानी और दकियानूसी सोच है।” पीठ ने कहा कि महिला अपने पति के घर का महज एक हिस्सा नहीं है। उसकी अपनी बौद्धिक और पेशेवर आकांक्षाएं हैं, जिनका सम्मान होना चाहिए। क्या है पूरा मामला?बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस जोड़े की शादी 2009 में हुई थी। पति सेना में अधिकारी था। वहीं पत्नी ने अहमदाबाद में अपना डेंटल क्लिनिक शुरू किया था। शादी के बाद पति और ससुराल वालों ने आरोप लगाए कि महिला ने अपने परिवार के बजाय करियर को चुना और पति के साथ रहने से इनकार कर दिया। अर्जी के बाद फैमिली कोर्ट ने पत्नी के इस फैसले को ‘क्रूरता’ माना था। कोर्ट ने कहा था कि पत्नी ने पति को बिना बताए अपना क्लिनिक शुरू किया और अहमदाबाद में रहने के दौरान ससुराल के बजाय अपने मायके में रुकना पसंद किया, जो सही नहीं है। वहीं गुजरात हाईकोर्ट ने भी 2024 में फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। तलाक को दे दी मंजूरीसुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के नजरिए को रूढ़िवादी बताया। SC ने तीखे शब्दों में कहा, “आज की दुनिया में जहां महिलाएं लंबी छलांगे लगा रही हैं। सिर्फ इसलिए कि पति एक आर्मी ऑफिसर है, यह उम्मीद करना कि पत्नी अपने करियर के बारे में सोच भी नहीं सकती, एक सामंती मानसिकता को दर्शाता है।” फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महिला के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को रिकॉर्ड से हटा दिया। हालांकि, पति ने दूसरी शादी कर ली है और दोनों के बीच रिश्ते सुधरने की गुंजाइश नहीं थी, इसलिए कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दे दी।

IEA की चेतावनी…. वैश्विक तेल भंडार में रिकॉर्ड गिरावट, कीमतों में आ सकता है भारी उछाल

वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव और होर्मुज संकट (Hormuz Crisis.) के बीच अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency.- IEA) ने बुधवार को गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि प्रमुख समुद्री मार्गों में एक होर्मुज के 10 सप्ताह से अधिक समय से प्रभावी रूप से अवरुद्ध रहने के कारण वैश्विक तेल भंडार में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की जा रही है। एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि 2026 तक वैश्विक तेल आपूर्ति में 39 लाख बैरल प्रतिदिन की भारी कमी आ सकती है। आईईए ने कहा कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट के लंबे समय तक बंद रहने से विश्व के तेल भंडार ‘अभूतपूर्व’ और ‘रिकॉर्ड’ गति से समाप्त हो रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति ठप्प होने के कारण वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में बड़ा बदलाव आ रहा है, जो भविष्य में तेल कीमतों में भारी उछाल और जेट ईंधन की कमी का कारण बन सकता है। एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार अस्थिरता के चलते 2026 तक वैश्विक तेल आपूर्ति में 3.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD) की कमी आने की आशंका है। हालांकि आर्थिक मंदी के कारण मांग में कुछ कमी आने की उम्मीद है, लेकिन आईईए ने स्पष्ट किया कि मांग में गिरावट आपूर्ति की भारी कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण उत्पन्न इस आपूर्ति संकट से निपटने के लिए विभिन्न देशों ने अपने वाणिज्यिक और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों का आक्रामक दोहन शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आकंड़ों के अनुसार, मार्च में 129 मिलियन बैरल की कमी के बाद अप्रैल में अकेले 117 मिलियन बैरल का रिकॉर्ड नुकसान हुआ है। वहीं, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आईईए के सदस्य देशों ने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने की योजना बनाई है, जिसमें से लगभग 164 मिलियन बैरल पहले ही बाजार में पहुंच चुका है। हालांकि एजेंसी ने माना कि स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। उच्च कीमतें, बिगड़ता आर्थिक माहौल और मांग घटाने के उपाय वैश्विक तेल खपत पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं। गौरतलब है कि होर्मुज मार्ग के बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र एक संकट के मोड़ पर पहुंच गया है, ठीक उसी समय जब गर्मियों का पीक ट्रैवल सीजन शुरू हो रहा है। एयरलाइंस पहले ही जेट ईंधन की संभावित कमी को लेकर चिंतित हैं। आईईए ने चेतावनी दी है कि यह संकट जितना लंबा चलेगा, वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों में उतनी ही अधिक अस्थिरता फैलेगी।

‘नो एंट्री’ से एक और बड़ा नाम आउट: वरुण धवन की जगह अब नए चेहरे होंगे शामिल

नई दिल्ली। साल 2005 की सुपरहिट कॉमेडी फिल्म ‘नो एंट्री’ के सीक्वल ‘नो एंट्री में एंट्री’ को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चल रही थीं। शुरुआत में इस फिल्म के लिए वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अर्जुन कपूर की तिकड़ी को फाइनल माना जा रहा था, लेकिन अब लगातार बदलावों ने फैंस को चौंका दिया है। पहले दिलजीत दोसांझ हुए बाहरसबसे पहले इस प्रोजेक्ट से दिलजीत दोसांझ के बाहर होने की खबर सामने आई थी।प्रोड्यूसर बोनी कपूर ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि दिलजीत अब फिल्म का हिस्सा नहीं हैं। इसके बाद से ही फिल्म की कास्टिंग को लेकर असमंजस बढ़ गया था।  अब वरुण धवन भी नहीं होंगे हिस्साताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक अब वरुण धवन भी इस फिल्म से बाहर हो गए हैं।सूत्रों के अनुसार, वरुण का फिल्म से जुड़ना फिलहाल संभव नहीं है क्योंकि वह अपने दूसरे प्रोजेक्ट्स और प्रमोशन में व्यस्त हैं। बोनी कपूर की प्लानिंग में बदलावनिर्माता बोनी कपूर पहले ही संकेत दे चुके थे कि वह इस सीक्वल को एक फ्रेश और यंग कास्ट के साथ बनाना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि पुरानी स्टारकास्ट की झलक किसी न किसी रूप में शामिल की जा सकती है। नई कास्ट पर टिकी नजरेंअब जबकि दो बड़े नाम फिल्म से बाहर हो चुके हैं, ‘नो एंट्री 2’ की नई कास्टिंग पर सभी की नजरें टिकी हैं।फैंस यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर इस कॉमेडी फ्रेंचाइजी को कौन नया चेहरा मिलेगा। वरुण धवन के अपकमिंग प्रोजेक्ट्सफिल्म से बाहर होने के बावजूद वरुण धवन के पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं।वे जल्द ही ‘है जवानी तो इश्क होना है’ और ‘भेड़िया 2’ जैसी फिल्मों में नजर आएंगे। ‘नो एंट्री 2’ की कास्टिंग में लगातार हो रहे बदलावों ने फिल्म को चर्चा में बनाए रखा है। हालांकि फाइनल स्टारकास्ट को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है, लेकिन इतना तय है कि फिल्म में एक नई और फ्रेश टीम देखने को मिलेगी।

कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान ने फिर लिया कर्जा …, IMF ने दी 1.32 अरब डॉलर की नई किस्त को मंजूरी

इस्लामाबाद। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान (Pakistan) की हालत दिन-पर-दिन खराब होती जा रही है। उसकी भीख मांगने की आदत अब भी नहीं गई है। अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund.- IMF) ने पाकिस्तान को बड़ा कर्ज दिया है। IMF बोर्ड ने मौजूदा कर्ज कार्यक्रमों के तहत करीब 1.32 अरब डॉलर की नई किस्त को मंजूरी दे दी। इसमें एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (Extended Fund Facility.- EFF) के तहत लगभग 1.1 अरब डॉलर और जलवायु संबंधी रेजिलियंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी के तहत करीब 22 करोड़ डॉलर शामिल हैं। IMF का कहना है कि पाकिस्तान ने आर्थिक सुधारों की दिशा में कुछ प्रगति दिखाई है और कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश की है। हालांकि यह मदद ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और विदेशी मुद्रा की भारी कमी से जूझ रहा है। मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल की बढ़ती कीमतों ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उछाल का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, जिसके चलते केंद्रीय बैंक को अचानक ब्याज दरें बढ़ाने जैसा कदम उठाना पड़ा। विदेशी मुद्रा भंडार लगातार दबाव में हैं और आयात बिल बढ़ने से हालात और खराब हुए हैं। पाकिस्तान को अस्थायी राहत तब मिली जब सऊदी ने 3 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता का भरोसा दिया। वहीं यूएई ने अपने पुराने कर्ज की वापसी का दबाव भी बढ़ा दिया, जिससे इस राहत का बड़ा हिस्सा संतुलन बनाने में ही खर्च होने की आशंका है। IMF ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि उसे इस संस्था की ‘एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी’ (EFF) के तहत लगभग $1.1 बिलियन और जलवायु पर केंद्रित ‘रेजिलियंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी’ के तहत लगभग $220 मिलियन मिलने की उम्मीद है। IMF ने अपने बयान में आगे कहा, “EFF व्यवस्था के तहत पाकिस्तान के नीतिगत प्रयासों से अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और एक चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल, जिसमें मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध भी शामिल है, के बीच भरोसा फिर से कायम करने में काफी प्रगति हुई है।” तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है, जिसके चलते केंद्रीय बैंक को कीमतों पर बढ़ते दबाव से निपटने के लिए एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ीं। मित्र देशों के सामने हाथ फैलाता रहता है PAKपिछले कुछ सालों में पाकिस्तान बार-बार आईएमएफ, सऊदी अरब, चीन और अन्य मित्र देशों के सामने आर्थिक मदद के लिए हाथ फैलाता रहा है। आलोचकों का कहना है कि वहां की सरकारें स्थायी आर्थिक सुधारों की बजाय कर्ज लेकर संकट टालने की नीति अपनाती रही हैं। कमजोर टैक्स व्यवस्था, राजनीतिक अस्थिरता, बढ़ता रक्षा खर्च और निर्यात में अपेक्षित बढ़ोतरी न होना पाकिस्तान की सबसे बड़ी आर्थिक चुनौतियां बनी हुई हैं। यही कारण है कि हर कुछ वर्षों में देश भुगतान संकट में फंस जाता है और उसे बाहरी मदद की जरूरत पड़ती है। इससे नहीं खत्म होंगी आर्थिक समस्याएंएक्सपर्ट्स का मानना है कि IMF की यह नई किस्त पाकिस्तान को कुछ समय के लिए राहत जरूर दे सकती है, लेकिन इससे उसकी मूल आर्थिक समस्याएं खत्म नहीं होंगी। यदि पाकिस्तान ने उद्योग, निर्यात, कर संग्रह और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधार नहीं किए तो वह भविष्य में भी विदेशी कर्ज और बेलआउट पैकेज पर निर्भर रहेगा। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए फिर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और मित्र देशों की मदद पर टिका हुआ नजर आ रहा है।

Makeup Tips: गलत मेकअप से बिगड़ सकता है चेहरा, जानें सही करने का तरीका

नई दिल्ली। आज के समय में मेकअप सिर्फ एक जरूरत ही नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुका है। शादी, पार्टी या रोजमर्रा की जिंदगी में लोग अक्सर मेकअप का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अगर मेकअप सही तरीके से न किया जाए, तो यह आपकी स्किन को नुकसान भी पहुंचा सकता है और प्राकृतिक निखार धीरे-धीरे कम हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मेकअप से जुड़ी सबसे बड़ी गलती उसे बिना हटाए सो जाना है। दिनभर की थकान के बाद अगर मेकअप चेहरे पर ही छोड़ दिया जाए, तो यह स्किन के पोर्स को बंद कर देता है। रात के समय त्वचा खुद को रिपेयर करती है, लेकिन मेकअप की परत के कारण यह प्रक्रिया रुक जाती है, जिससे पिंपल्स, ब्लैकहेड्स और डल स्किन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। एक और आम गलती जल्दबाजी में सीधे फाउंडेशन या बेस लगाना है। ऐसा करने से केमिकल्स सीधे त्वचा पर असर डालते हैं। स्किन एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि मेकअप से पहले हमेशा मॉइस्चराइजर और प्राइमर का इस्तेमाल करें। इससे त्वचा और मेकअप के बीच एक प्रोटेक्टिव लेयर बनती है और स्किन को नुकसान कम होता है। इसके अलावा, मेकअप ब्रश और ब्यूटी ब्लेंडर की सफाई न करना भी एक बड़ी गलती मानी जाती है। गंदे ब्रश में बैक्टीरिया और डेड स्किन सेल्स जमा हो जाते हैं, जो चेहरे पर इस्तेमाल करने से पिंपल्स और स्किन इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं। इसलिए इनकी नियमित सफाई बेहद जरूरी है। मेकअप हटाने के लिए सिर्फ फेस वॉश पर निर्भर रहना भी सही नहीं है। पहले किसी अच्छे मेकअप रिमूवर, क्लींजिंग बाम या नारियल तेल जैसे प्राकृतिक विकल्प से मेकअप को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। इसके बाद ही स्किन टाइप के अनुसार फेस वॉश का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि चेहरा पूरी तरह साफ हो सके। अगर इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो मेकअप आपकी खूबसूरती बढ़ाने का काम करेगा, न कि स्किन को नुकसान पहुंचाने का।