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PM मोदी का UAE दौरा: अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मुद्दों पर अहम चर्चा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचे, जहां अबू धाबी एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनका भव्य स्वागत किया। पीएम मोदी को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता शुरू हुई। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ खड़ा है और दोनों देश आने वाले समय में हर क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति पर भी चिंता जताई गई, जहां दोनों नेताओं ने संयम और संवाद को ही समाधान बताया। इस दौरे को लेकर सबसे अहम घटनाक्रम में दोनों देशों के बीच ऊर्जा और निवेश से जुड़े कई समझौते हुए। LPG सप्लाई, स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व, रक्षा सहयोग और वडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर जैसे क्षेत्रों में MoU साइन किए गए। रिपोर्ट्स के अनुसार UAE ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर, RBL बैंक और सम्मान कैपिटल में लगभग 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा भी की है। इसके अलावा UAE ने अपनी क्रूड ऑयल उत्पादन क्षमता को 2027 तक 50 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस कदम को वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अहम माना जा रहा है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में यह दौरा भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। भारत और UAE के बीच पहले से ही गहरा व्यापारिक संबंध है। UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और दोनों देशों के बीच 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होता है। भारत पेट्रोलियम प्रोडक्ट, जेम्स-ज्वेलरी, टेक्सटाइल, फूड आइटम, मशीनरी और केमिकल्स का बड़ा निर्यातक है। कुल मिलाकर यह दौरा ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ता नजर आ रहा है।

ईंधन संकट गहराया: क्रूड 120 डॉलर पार, भारत में पेट्रोल-डीजल 3 रुपये महंगा..

नई दिल्ली ।  वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का सीधा असर भारत पर देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बाद देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वृद्धि ने आम उपभोक्ताओं से लेकर परिवहन और व्यापार क्षेत्र तक सभी को प्रभावित किया है। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनावपूर्ण हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को अस्थिर कर दिया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में किसी भी तरह की बाधा या खतरे की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में घबराहट बढ़ा दी है, जिसका असर सीधे तेल की कीमतों पर पड़ा है। तेल विपणन कंपनियों ने बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लागत और आपूर्ति संकट को देखते हुए घरेलू ईंधन कीमतों में संशोधन किया है। नई दरों के लागू होने के बाद देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्पष्ट वृद्धि देखी गई है। इस बदलाव के कारण परिवहन लागत बढ़ने की संभावना है, जिससे आने वाले समय में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन कीमतों में यह उछाल केवल अस्थायी नहीं हो सकता और अगर वैश्विक तनाव जारी रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए अतिरिक्त आर्थिक चुनौती पैदा करती हैं, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इससे न केवल आयात बिल बढ़ता है बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव पड़ता है। इस बीच, सरकार ने भी जनता से ऊर्जा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की है। बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच ईंधन की बचत और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के वैश्विक संकट के समय घरेलू खपत और आयात नीति दोनों पर संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक हो जाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा का असर सीधे वैश्विक आपूर्ति पर पड़ता है, जिससे कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक है। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में अस्थिरता ने ऊर्जा बाजार को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति बाधाएं मिलकर एक ऐसे आर्थिक दबाव का निर्माण कर रही हैं जिसका असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और ऊर्जा बाजार की स्थिरता पर निर्भर करेगा।

एलिना स्वितोलिना का कमाल: इगा स्वियातेक को हराकर फाइनल का टिकट

नई दिल्ली ।  इटैलियन ओपन 2026 में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहां दो बार की पूर्व चैंपियन एलिना स्वितोलिना ने मौजूदा तीन बार की विजेता इगा स्वियातेक को रोमांचक मुकाबले में हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। सेमीफाइनल मुकाबले में स्वितोलिना ने शानदार खेल दिखाते हुए स्वियातेक को 6-2, 4-6, 6-2 से मात दी। यह मुकाबला लगभग 2 घंटे 14 मिनट तक चला, जिसमें दोनों खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला। पहले सेट में स्वितोलिना ने आक्रामक शुरुआत करते हुए आसानी से 6-2 से बढ़त बनाई। दूसरे सेट में स्वियातेक ने वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया, लेकिन निर्णायक तीसरे सेट में स्वितोलिना ने बेहतरीन मानसिक मजबूती दिखाते हुए 6-2 से सेट और मैच अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ही एलिना स्वितोलिना ने 2017-18 के बाद पहली बार इटैलियन ओपन के फाइनल में जगह बनाई है। वह इससे पहले इस टूर्नामेंट में दो बार खिताब जीत चुकी हैं और अब तीसरी बार ट्रॉफी पर कब्जा जमाने से सिर्फ एक जीत दूर हैं। फाइनल में उनका सामना अमेरिकी स्टार कोको गॉफ से होगा, जो लगातार दूसरी बार इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची हैं। यह मुकाबला न केवल खिताबी होगा, बल्कि दोनों खिलाड़ियों के लिए सीजन का पहला WTA 1000 खिताब जीतने का मौका भी होगा। स्वितोलिना और गॉफ के बीच अब तक 5 मुकाबले हो चुके हैं, जिनमें स्वितोलिना 3-2 से आगे हैं। इस सीजन में भी स्वितोलिना ने गॉफ को दो बार हराया है, जिससे उनका आत्मविश्वास और मजबूत नजर आ रहा है। सेमीफाइनल में स्वितोलिना का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने 16 में से 11 ब्रेक पॉइंट्स बचाए और निर्णायक सेट में सभी 5 ब्रेक पॉइंट्स को सफलतापूर्वक डिफेंड किया। यह उनकी मानसिक मजबूती और दबाव में खेल को संभालने की क्षमता को दर्शाता है। दूसरी ओर, कोको गॉफ लगातार शानदार फॉर्म में हैं और वह 1998-99 के बाद लगातार इटैलियन ओपन फाइनल में पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की अमेरिकी खिलाड़ी बन गई हैं। यह मुकाबला अनुभव और युवा ऊर्जा के बीच एक रोमांचक टकराव माना जा रहा है। उम्र के अंतर की बात करें तो दोनों खिलाड़ियों के बीच लगभग 9 साल 182 दिन का फर्क है, जो इस टूर्नामेंट के इतिहास में 1990 के बाद सबसे बड़ा अंतर माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें फाइनल मुकाबले पर हैं, जहां स्वितोलिना तीसरी बार खिताब जीतने के इरादे से उतरेंगी, जबकि कोको गॉफ पहली बार इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी को अपने नाम करने की कोशिश करेंगी।

Jio vs Airtel ₹349 Plan: डेटा, वैलिडिटी और बेनिफिट्स में कौन देता है ज्यादा फायदा?

नई दिल्ली। Jio और Airtel दोनों ही भारत की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां हैं, जो 349 रुपये की कीमत में किफायती प्रीपेड प्लान ऑफर करती हैं। दोनों प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की है, लेकिन डेटा और अतिरिक्त बेनिफिट्स के मामले में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। Jio ₹349 प्रीपेड प्लानJio के 349 रुपये वाले प्लान में यूजर्स को 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ रोजाना 2GB डेटा मिलता है, यानी कुल 56GB इंटरनेट। इसके साथ अनलिमिटेड कॉलिंग और प्रतिदिन 100 SMS की सुविधा भी दी जाती है।इस प्लान का सबसे बड़ा आकर्षण इसके डिजिटल बेनिफिट्स हैं, जिसमें JioHotstar मोबाइल का 3 महीने का फ्री सब्सक्रिप्शन, 50GB JioAI क्लाउड स्टोरेज, JioTV और AI आधारित सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा यूजर्स को Google Gemini Pro जैसे AI टूल्स का एक्सेस भी ऑफर किया जाता है, जो इसे एक फीचर-रिच पैक बनाता है। Airtel ₹349 प्रीपेड प्लानAirtel का 349 रुपये वाला प्लान भी 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है। इसमें यूजर्स को रोजाना 1.5GB डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और 100 SMS मिलते हैं। साथ ही चुनिंदा सर्कल्स में 5G नेटवर्क पर अनलिमिटेड डेटा का लाभ भी दिया जाता है।हालांकि Airtel अपने यूजर्स को 399 रुपये वाले प्लान की ओर अपग्रेड करने का विकल्प भी देता है, जिसमें अनलिमिटेड डेटा, JioHotstar, Adobe Express Premium और बेहतर सिक्योरिटी फीचर्स जैसे स्पैम प्रोटेक्शन शामिल हैं। कौन सा प्लान बेहतर है?अगर आप ज्यादा डेटा और एंटरटेनमेंट के साथ AI और क्लाउड स्टोरेज जैसी डिजिटल सर्विसेज चाहते हैं तो Jio का 349 रुपये वाला प्लान बेहतर विकल्प है।वहीं अगर आपका फोकस स्टेबल नेटवर्क, 5G अनलिमिटेड एक्सेस और बेसिक डेटा यूसेज पर है, तो Airtel का प्लान ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है।

टी20 कप्तानी पर चर्चा तेज: शास्त्री ने गिनाई संजू सैमसन की खास खूबियां

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर कप्तानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। टीम इंडिया के पूर्व मुख्य कोच और दिग्गज क्रिकेटर रवि शास्त्री ने विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन को लेकर बड़ा बयान दिया है। शास्त्री का मानना है कि आने वाले समय में संजू सैमसन भारत की टी20 टीम के कप्तान बनने के सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल हो सकते हैं। शास्त्री ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि वर्तमान कप्तान सूर्यकुमार यादव के बाद भारतीय टी20 टीम को एक नए नेतृत्व की आवश्यकता पड़ सकती है और उस भूमिका के लिए संजू सैमसन का नाम सबसे आगे है। उन्होंने कहा कि सैमसन के पास न केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव है, बल्कि उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी करके अपनी नेतृत्व क्षमता भी साबित की है। रवि शास्त्री के अनुसार, सैमसन एक ऐसे खिलाड़ी हैं जिनमें टॉप ऑर्डर में आकर तेज और आक्रामक बल्लेबाजी करने की क्षमता है। साथ ही वह दबाव की परिस्थितियों में शांत रहकर मैच को बदलने का दम रखते हैं। शास्त्री ने कहा कि यही गुण किसी भी सफल कप्तान की पहचान होते हैं। सैमसन के हालिया प्रदर्शन की सराहना करते हुए शास्त्री ने कहा कि टी20 विश्व कप 2026 में उनके प्रदर्शन ने सभी का ध्यान खींचा। उन्होंने टूर्नामेंट के सेमीफाइनल और फाइनल जैसे बड़े मुकाबलों में महत्वपूर्ण पारियां खेलकर भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। इस शानदार प्रदर्शन के चलते उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ भी चुना गया था। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी करते हुए भी सैमसन ने अपनी नेतृत्व क्षमता दिखाई है। उनकी कप्तानी में टीम 2022 में फाइनल तक पहुंची थी, जो उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। शास्त्री ने कहा कि यह अनुभव उन्हें भविष्य में भारतीय टीम की कमान संभालने के लिए और मजबूत उम्मीदवार बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सैमसन को लेकर पहले कई सवाल उठते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन करके अपने आलोचकों को जवाब दिया है। अब वह केवल एक प्रतिभाशाली बल्लेबाज नहीं बल्कि एक परिपक्व और जिम्मेदार खिलाड़ी के रूप में उभर चुके हैं। शास्त्री ने यह भी जोड़ा कि अगले दो से तीन वर्षों में सैमसन का प्रदर्शन और निखर सकता है और वह टीम इंडिया की लीडरशिप रेस में सबसे आगे नजर आ सकते हैं। उनके मुताबिक, यदि सैमसन इसी तरह फॉर्म और निरंतरता बनाए रखते हैं तो वह भारतीय टी20 क्रिकेट के भविष्य के कप्तान साबित हो सकते हैं।

गल्फ जायंट्स को मिला नया कोच: साइमन हेल्मोट की हुई ILT20 2026 टीम में एंट्री

नई दिल्ली । यूएई की इंटरनेशनल लीग टी20 (ILT20) 2026 सीजन से पहले अदाणी स्पोर्ट्सलाइन ने अपनी टीम गल्फ जायंट्स के लिए बड़ा बदलाव करते हुए अनुभवी ऑस्ट्रेलियाई कोच साइमन हेल्मोट को नया हेड कोच नियुक्त किया है। हेल्मोट के पास दो दशकों से अधिक का अंतरराष्ट्रीय और फ्रेंचाइजी क्रिकेट अनुभव है। वे लंबे समय से इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में सनराइजर्स हैदराबाद के साथ जुड़े रहे हैं और कई बड़ी टी20 लीगों में टीमों को सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं। कोचिंग करियर में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, कैरेबियन और यूएई की कई टीमों के साथ काम किया है। हाल ही में उन्होंने विमेंस बिग बैश लीग में मेलबर्न रेनेगेड्स को 2024 में पहला खिताब जिताने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नियुक्ति के बाद साइमन हेल्मोट ने कहा कि वे गल्फ जायंट्स के साथ जुड़कर बेहद उत्साहित हैं और टीम के दीर्घकालिक विकास व प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन पर काम करेंगे। वहीं अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अदाणी ने कहा कि हेल्मोट का अनुभव और नेतृत्व क्षमता टीम के भविष्य के विजन के अनुरूप है और उनसे आगामी सीजन में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद है। गल्फ जायंट्स ने पूर्व हेड कोच जोनाथन ट्रॉट का भी धन्यवाद किया और उनके योगदान की सराहना की।

पैपराजी की बदसलूकी और सितारों की चुप्पी: आयुष्मान खुराना, सारा और रकुल पर क्यों भड़क गए फैंस?

नई दिल्ली ।  बॉलीवुड के गलियारों में अक्सर सितारों और पैपराजी के बीच नोकझोंक की खबरें आती रहती हैं, लेकिन कभी-कभी ये घटनाएं सोशल मीडिया पर बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं। हाल ही में फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ की स्टार कास्ट-आयुष्मान खुराना, सारा अली खान, वामिका गब्बी और रकुल प्रीत सिंह-एक वीडियो की वजह से लोगों के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, फिल्म के प्रमोशन के दौरान सितारों के साथ मैशबल इंडिया के मशहूर होस्ट सिद्धार्थ आलमबायन भी मौजूद थे। सभी मिलकर वड़ा पाव का लुत्फ उठा रहे थे, तभी वहां मौजूद कुछ फोटोग्राफर्स सिद्धार्थ पर भद्दे कमेंट्स करने लगे क्योंकि वे स्टार्स की फोटो के बीच में आ रहे थे। वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि पैपराजी सितारों को कैप्चर करने के चक्कर में सिद्धार्थ को वहां से हटने के लिए चिल्ला रहे थे। हद तो तब हो गई जब एक फोटोग्राफर ने उन्हें ‘वड़ा पाव’ कहकर संबोधित किया और वहां से हटने को कहा। शुरुआत में सिद्धार्थ ने इन कमेंट्स को नजरअंदाज किया, लेकिन जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो उन्होंने कड़े लहजे में जवाब देते हुए कहा कि ‘प्यार से बोलो भाई, ऐ-ऐ मत करो।’ हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वहां मौजूद बड़े सितारे चुप्पी साधे रहे, जिसे देख सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा। इंटरनेट पर लोग इस बात को लेकर सबसे ज्यादा नाराज हैं कि आयुष्मान खुराना, रकुल प्रीत सिंह और सारा अली खान जैसे स्थापित कलाकारों ने उस वक्त सिद्धार्थ का बचाव क्यों नहीं किया। कमेंट सेक्शन में लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब आपके सामने किसी सह-कर्मी या होस्ट का अपमान हो रहा हो, तो एक स्टार के तौर पर आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप उसे रोकें। कई यूजर्स ने लिखा कि ये सितारे स्क्रीन पर तो बड़ी-बड़ी नैतिकता की बातें करते हैं, लेकिन असल जिंदगी में अपने साथ खड़े शख्स के लिए आवाज तक नहीं उठा पाए। इस ‘साइलेंट रिएक्शन’ की वजह से कलाकारों को ‘क्लास’ लगाई जा रही है और उनकी संवेदनशीलता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ 15 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। मुदस्सर अजीज के निर्देशन में बनी यह फिल्म साल 2019 की सुपरहिट फिल्म ‘पति पत्नी और वो’ का सीक्वल है। फिल्म को लेकर पहले से ही यह चर्चा थी कि क्या यह बेवफाई जैसे विषयों को बढ़ावा दे रही है, जिस पर आयुष्मान ने स्पष्ट किया था कि उनका किरदार ‘प्रजापति पांडे’ एक पूरी तरह से समर्पित और पत्नी से प्यार करने वाला व्यक्ति है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया था कि वे कभी किसी गलत संदेश वाली फिल्म का हिस्सा नहीं बनेंगे। बहरहाल, फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन और क्रिटिक्स की प्रतिक्रिया के बीच इस प्रमोशनल विवाद ने फिल्म की टीम के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। जहाँ फिल्म की रिलीज का इंतजार काफी समय से हो रहा था, वहीं इस घटना ने सितारों की छवि पर थोड़ा दाग जरूर लगाया है। अब देखना यह होगा कि क्या आयुष्मान या फिल्म की बाकी टीम इस बढ़ते गुस्से पर कोई सफाई देती है या नहीं। फिलहाल, सोशल मीडिया पर सिद्धार्थ आलमबायन के समर्थन में लोग खड़े नजर आ रहे हैं और पैपराजी के व्यवहार की कड़ी निंदा कर रहे हैं।

राजस्थान की गर्म हवाओं का असर: सागर में पारा 43°C पार, लू का अलर्ट

नई दिल्ली । सागर शहर इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। राजस्थान की ओर से आ रही गर्म हवाओं ने पूरे वातावरण को और अधिक तप्त बना दिया है, जिससे दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म महसूस की जा रही हैं। शुक्रवार को सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखने को मिला। दोपहर तक हालात ऐसे हो गए कि बाजारों में सन्नाटा पसर गया और लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हो गए। मौसम विभाग के अनुसार सागर का अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सक्रिय मौसमीय सिस्टम और ट्रफ लाइन की वजह से हवा भट्टी जैसी गर्म हो रही है। राजस्थान से आने वाली गर्म हवाएं स्थिति को और गंभीर बना रही हैं, जिससे लू चलने की संभावना भी बढ़ गई है। अनुमान है कि रात का तापमान भी 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दोपहर 12 से 3 बजे के बीच विशेष सावधानी बरतने, पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है।

सागर में बिजली संकट: दो ट्रांसफार्मर जलकर खाक, पूरे इलाके में अफरा-तफरी

नई दिल्ली। सागर शहर में गुरुवार देर रात एक के बाद एक दो बिजली ट्रांसफार्मरों में आग लगने से हड़कंप मच गया। सिविल लाइन क्षेत्र में लगे ट्रांसफार्मर में अचानक धमाके के साथ आग भड़क उठी, जिससे आसपास का इलाका दहल गया। इसके कुछ ही समय बाद इतवारा बाजार के कचेरन कुआं क्षेत्र में भी एक अन्य ट्रांसफार्मर में आग लगने की घटना सामने आई। दोनों जगहों पर आग लगने से बिजली आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई इलाकों में अंधेरा छा गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और बिजली विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची दमकल टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद करीब एक घंटे में आग पर काबू पाया। इस दौरान ट्रांसफार्मरों में लगातार धमाके और चिंगारियां निकलती रहीं, जिससे लोग दहशत में आ गए। आग के कारण दर्जनों घरों की बिजली सप्लाई ठप हो गई। गर्मी के मौसम में बिजली गुल होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह करीब 6 बजे तक मरम्मत कार्य के बाद आपूर्ति बहाल की जा सकी। बिजली विभाग की टीम फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक अनुमान में ओवरलोड या तकनीकी खराबी को वजह माना जा रहा है।

सिर्फ एक फिल्म नहीं, आतंकवाद के खिलाफ एक आंदोलन थी 'सरफरोश': बजट से चार गुना कमाई और उस दौर का सबसे बड़ा विवाद

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1999 एक ऐसा मोड़ था, जब पर्दे पर देशभक्ति को एक नई और यथार्थवादी परिभाषा मिली। उस दौर में जहाँ बॉलीवुड मुख्य रूप से रोमांटिक कहानियों में व्यस्त था, निर्देशक जॉन मैथ्यू माथन एक ऐसी कहानी लेकर आए जिसने न केवल दर्शकों को झकझोर दिया, बल्कि सेंसर बोर्ड के पसीने छुड़ा दिए। फिल्म ‘सरफरोश’ को आज एक क्लासिक का दर्जा प्राप्त है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी रिलीज का रास्ता कांटों भरा था। यह पहली बार था जब किसी मुख्यधारा की भारतीय फिल्म ने सीधे तौर पर पड़ोसी देश पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई का नाम लेकर उन्हें भारत में हो रही आतंकवादी घटनाओं का जिम्मेदार ठहराया था। फिल्म की यही निर्भीकता इसके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गई थी। उस समय भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक रिश्ते एक नाजुक मोड़ पर थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शांति की पहल करते हुए दिल्ली से लाहौर के बीच बस सेवा शुरू कर रहे थे। एक तरफ जहाँ सरकार दोस्ती का हाथ बढ़ा रही थी, वहीं दूसरी तरफ ‘सरफरोश’ जैसी फिल्म सेंसर बोर्ड के पास पहुंची जिसमें आतंकवाद को सीधे तौर पर पाकिस्तान से जोड़कर दिखाया गया था। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएसई) के सदस्यों को डर था कि फिल्म के संवाद और चित्रण दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत की प्रक्रिया को बिगाड़ सकते हैं। बोर्ड ने फिल्म को सर्टिफिकेट देने से साफ इनकार कर दिया और शर्त रखी कि फिल्म से ‘पाकिस्तान’ और ‘आईएसआई’ जैसे शब्दों को पूरी तरह से हटा दिया जाए। निर्देशक जॉन मैथ्यू माथन अपनी फिल्म की सच्चाई और रिसर्च को लेकर इतने आश्वस्त थे कि उन्होंने बोर्ड की शर्तों के आगे झुकने से मना कर दिया। जॉन का तर्क था कि फिल्म में जो दिखाया गया है, वह वास्तविकता पर आधारित है और इसे बदलने का मतलब फिल्म की आत्मा को मारना होगा। जब विवाद काफी बढ़ गया और सेंसर बोर्ड अपनी जिद पर अड़ा रहा, तो जॉन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए बोर्ड को चेतावनी दी कि वे इस मामले को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। निर्देशक के इस सख्त तेवर और कानूनी लड़ाई की धमकी के आगे आखिरकार सेंसर बोर्ड को झुकना पड़ा। फिल्म को बिना किसी बड़े बदलाव के पास किया गया और 30 अप्रैल 1999 को यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई। आमिर खान के करियर के लिए ‘सरफरोश’ एक गेम-चेंजर साबित हुई। एसीपी अजय सिंह राठौड़ के किरदार में उन्होंने एक ऐसे पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई, जो अपने निजी दुख को देश की सेवा के जज्बे में बदल देता है। फिल्म की पटकथा इतनी मजबूत थी कि दर्शक शुरू से अंत तक बंधे रहे। लगभग 8 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया और भारत में करीब 30.37 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया। फिल्म की सफलता केवल व्यावसायिक नहीं थी, बल्कि इसे साल 2000 में ‘बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग व्होलसम एंटरटेनमेंट’ की श्रेणी में प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया। फिल्म की सफलता में इसके संगीत और अन्य कलाकारों का भी बड़ा योगदान था। सोनाली बेंद्रे के साथ आमिर की केमिस्ट्री और जगजीत सिंह की आवाज में सजी गजल ‘होश वालों को खबर क्या’ आज भी लोगों की जुबान पर है। वहीं, नसीरुद्दीन शाह ने पाकिस्तानी गजल गायक और जासूस ‘गुलफाम हसन’ के किरदार में जो जान फूंकी, उसने फिल्म को एक अलग ऊंचाई पर पहुंचा दिया। आज के दौर में जब ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों में आतंकवाद की जड़ें दिखाई जा रही हैं, तब ‘सरफरोश’ की याद आना स्वाभाविक है, क्योंकि यह वह पहली फिल्म थी जिसने कूटनीति की परवाह किए बिना सच बोलने का साहस दिखाया था। 8.1 की आईएमडीबी रेटिंग वाली यह फिल्म आज भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली देशभक्ति फिल्मों में से एक है।