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क्षतिग्रस्त पुल का काम खिंचा, बीहर नदी पर यातायात बहाली अभी टली

नई दिल्ली ।  रीवा के बायपास मार्ग स्थित बीहर नदी पर बने क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत का कार्य अभी भी धीमी गति से चल रहा है, जिससे यातायात बहाल होने की उम्मीदें टलती नजर आ रही हैं। पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अब यह स्पष्ट नहीं है कि इसे कब तक पूरी तरह से सुरक्षित किया जा सकेगा। मौके पर स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। गर्डर उठाने की प्रक्रिया के दौरान एलाइनमेंट बिगड़ने से तकनीकी समस्याएं और बढ़ गई हैं। वहीं, पिलरों के बीच गैप बढ़ने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे संरचना की मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, मरम्मत कार्य में लगी डीजीसी इंफ्रा की टीम ने प्रारंभिक तौर पर सुझाव दिया था कि पुल को पूरी तरह तोड़कर नए सिरे से निर्माण करना अधिक सुरक्षित विकल्प होगा। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय जिला प्रशासन को लेना है और फिलहाल मरम्मत का काम ही जारी है। एमपीआरडीसी के अधिकारी इस मामले में स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं। वहीं, इंजीनियरों का मानना है कि जल्दबाजी में यातायात बहाल करना जोखिम भरा हो सकता है। अनुमान है कि पुल को सुरक्षित बनाने में अभी एक महीने से अधिक समय लग सकता है। गौरतलब है कि प्रशासन ने पहले 10 मई तक पुल पर यातायात बहाल करने का दावा किया था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी काम अधूरा है। इससे लोगों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच भारी वाहनों को शहर के भीतर से गुजरना पड़ रहा है, जिससे ट्रैफिक जाम, धूल और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है और स्थानीय लोगों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है।

4000 करोड़ की 'रामायण' और अयोध्या में प्रीमियम प्रॉपर्टी,भगवान राम का किरदार निभाने से पहले रणबीर ने शहर में किया बड़ा निवेश

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के गलियारों में इन दिनों सुपरस्टार रणबीर कपूर का नाम न केवल उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ के लिए, बल्कि अयोध्या में किए गए एक बड़े रियल एस्टेट निवेश के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही भव्य फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाने जा रहे रणबीर कपूर ने असल जिंदगी में भी अयोध्या से अपना नाता जोड़ लिया है। हालिया जानकारी के मुताबिक, अभिनेता ने अयोध्या के सरयू नदी के तट पर स्थित एक बेहद प्रीमियम प्रोजेक्ट ‘द सरयू’ में जमीन खरीदी है। ‘द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ के इस प्रोजेक्ट में रणबीर ने लगभग 2,134 वर्ग फीट का प्लॉट अपने नाम किया है, जिसकी कीमत तकरीबन ₹3.31 करोड़ बताई जा रही है। अयोध्या में इस निवेश को लेकर रणबीर कपूर ने बेहद भावुक और आध्यात्मिक संदेश साझा किया है। उनका मानना है कि अयोध्या ने उन्हें खुद चुना है और यह निवेश उनके लिए केवल एक वित्तीय सौदा नहीं, बल्कि उनके परिवार की विरासत का एक हिस्सा है। सरयू नदी के किनारे स्थित यह 75 एकड़ का विशाल प्रोजेक्ट आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक मूल्यों का एक अनूठा संगम है। यहाँ न केवल एक भव्य क्लबहाउस और 35 से ज्यादा लाइफस्टाइल सुविधाएं होंगी, बल्कि पांच एकड़ में फैला एक शुद्ध शाकाहारी लग्जरी होटल भी बनाया जाएगा, जिसका संचालन प्रसिद्ध होटल श्रृंखला ‘द लीला’ द्वारा किया जाएगा। रणबीर के अनुसार, डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से इस डील को पूरा करना उनके लिए बेहद पारदर्शी और सुखद अनुभव रहा। रणबीर कपूर की इस डील के साथ ही उनकी आगामी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी दर्शकों का उत्साह चरम पर है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की अब तक की सबसे महंगी फिल्म मानी जा रही है, जिसका कुल बजट लगभग 4000 करोड़ रुपये बताया गया है। इस महाकाव्य को दो हिस्सों में रिलीज किया जाएगा, जिसका पहला भाग इसी साल दिवाली के शुभ अवसर पर सिनेमाघरों में दस्तक देगा। फिल्म में रणबीर कपूर के साथ दक्षिण भारतीय अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी, जबकि सुपरस्टार यश रावण की भूमिका को जीवंत करेंगे। फिल्म की स्टार कास्ट काफी प्रभावशाली है, जिसमें हनुमान के रूप में सनी देओल और लक्ष्मण के रूप में रवि दुबे जैसे कलाकार शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि रणबीर कपूर ने शुरुआत में इस चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाने से मना कर दिया था। अभिनेता ने एक सार्वजनिक मंच पर स्वीकार किया कि वे इस महान चरित्र के साथ न्याय करने को लेकर संशय में थे। हालांकि, उनके जीवन में बेटी राहा के आगमन और उसी समय इस किरदार का प्रस्ताव दोबारा आने को उन्होंने एक सुखद संयोग माना और अंततः इसे स्वीकार किया। रणबीर का मानना है कि ‘राम’ का किरदार निभाना उनकी अभिनय यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। अयोध्या में जमीन खरीदने के उनके फैसले को फिल्म की रिलीज से पहले एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है, जो उनकी इस भूमिका के प्रति गहरी निष्ठा को दर्शाता है। अयोध्या इस समय वैश्विक स्तर पर निवेश और पर्यटन के केंद्र के रूप में उभर रहा है। रणबीर कपूर जैसे बड़े सितारों का यहाँ जमीन खरीदना शहर की बढ़ती ब्रांड वैल्यू और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे ‘रामायण’ की रिलीज की तारीख नजदीक आ रही है, प्रशंसकों की नजरें रणबीर के अभिनय और उनकी इस नई प्रॉपर्टी पर टिकी हुई हैं। कुल मिलाकर, रणबीर कपूर के लिए यह साल न केवल पेशेवर रूप से मील का पत्थर साबित होने वाला है, बल्कि अयोध्या में अपनी जड़ें जमाने के कारण यह उनके व्यक्तिगत जीवन के लिए भी अत्यंत विशेष बन गया है। अब दुनिया को इंतजार है तो बस पर्दे पर उस भव्यता को देखने का, जिसे नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी की टीम ने करोड़ों के बजट के साथ तैयार किया है।

पर्यावरण संदेश के साथ प्रशासनिक दौरा: उज्जैन महापौर ने कार छोड़ अपनाया ई-रिक्शा

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल के संयमित उपयोग की अपील का असर अब उज्जैन में दिखाई देने लगा है। शहर के महापौर मुकेश टटवाल ने एक नई पहल करते हुए हर शुक्रवार को कार का उपयोग न करने और उसकी जगह ई-रिक्शा, पैदल या इलेक्ट्रिक वाहनों से सफर करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को महापौर अटल पार्क पहुंचे, जहां उन्होंने ई-रिक्शा से वार्डों का निरीक्षण किया और आम नागरिकों से मुलाकात कर ईंधन बचत का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल-डीजल का संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है। महापौर ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि इसे लंबे समय तक जारी रखने की योजना है, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों और पार्षदों से भी सप्ताह में कम से कम एक दिन ई-रिक्शा, इलेक्ट्रिक वाहन या पैदल चलने की अपील की। उनका कहना है कि यदि सभी अधिकारी मिलकर यह प्रयास करें तो हर सप्ताह सैकड़ों लीटर पेट्रोल की बचत संभव है। इस पहल को शहर में ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

किसी की मुस्कुराहटों पे निसार होने वाले 'शंकरदास' के 'शैलेंद्र' बनने और बेमन से मैकेनिक की नौकरी करने का पूरा सच

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सादगी और गहराई से भरे गीतों का जिक्र होगा, गीतकार शैलेंद्र का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिया जाएगा। ‘किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार’ जैसे कालजयी गीत लिखने वाले इस कलाकार का जीवन किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। पाकिस्तान के रावलपिंडी में जन्मे शंकरदास केसरीलाल, जिन्हें दुनिया ने बाद में शैलेंद्र के नाम से पूजा, के पूर्वज मूलतः बिहार के आरा जिले से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता ब्रिटिश मिलिट्री अस्पताल में ठेकेदार थे, लेकिन पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों के चलते उन्हें रावलपिंडी छोड़कर मथुरा बसना पड़ा। शैलेंद्र बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मथुरा के ही एक सरकारी स्कूल से पूरी की। उनकी मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंटरमीडिएट की परीक्षा में उन्होंने पूरे उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। पढ़ाई में अव्वल होने के बावजूद घर की आर्थिक तंगी ने उन्हें अपनी पसंद का रास्ता चुनने की इजाजत नहीं दी। परिवार की जिम्मेदारी कंधे पर आई तो उन्होंने रेलवे की परीक्षा पास की और मुंबई में बतौर मैकेनिक यानी अप्रेंटिस की नौकरी शुरू कर दी। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जिस शख्स ने शब्दों से संवेदनाओं की दुनिया बुनी, उसके पास मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा था और वेल्डिंग जैसे कठोर काम में उनकी विशेषज्ञता थी। मुंबई के रेलवे यार्ड में पसीने और लोहे की गूँज के बीच शैलेंद्र बेमन से अपना काम करते थे, क्योंकि उनका मन तो कविता और साहित्य की दुनिया में बसता था। इस नौकरी के दौरान ही उनके भीतर का कवि जाग उठा और वे खाली समय में कागज के टुकड़ों पर अपनी भावनाओं को उकेरने लगे। रेलवे की इस नौकरी के दौरान शैलेंद्र का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। आर्थिक तंगी का आलम यह था कि शादी होने के बावजूद वे अपनी पत्नी को मुंबई नहीं ला पा रहे थे। विरह का यही दर्द और अपनों से दूर रहने की तड़प उनके बाद के गीतों में साफ झलकती है। कहा जाता है कि जब वे अपनी कविताओं के जरिए भारतीय जन नाट्य संघ यानी इप्टा से जुड़े, तब उनकी मुलाकात राज कपूर से हुई। राज कपूर उनकी प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने शैलेंद्र को फिल्मों के लिए लिखने का प्रस्ताव दिया, लेकिन शुरुआत में स्वाभिमानी शैलेंद्र ने इसे ठुकरा दिया था। हालांकि, बाद में अपनी घरेलू जरूरतों और आर्थिक तंगहाली के कारण उन्होंने फिल्मी दुनिया का रुख किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शैलेंद्र और राज कपूर की जोड़ी ने भारतीय सिनेमा को ‘आवारा हूं’, ‘मेरा जूता है जापानी’ और ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’ जैसे न भूलने वाले गाने दिए। शैलेंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे जटिल से जटिल दार्शनिक बातों को बहुत ही सरल शब्दों में पिरो देते थे। उन्होंने जो कुछ भी अपनी निजी जिंदगी में झेला, चाहे वह मैकेनिक की नौकरी की मजबूरी हो या गरीबी का दंश, उसे उन्होंने अपनी रचनाओं में ईमानदारी से उतारा। उनके गीतों में आम आदमी का दर्द और उसकी छोटी-छोटी खुशियां साफ दिखाई देती थीं। यही वजह है कि उनके लिखे गीत आज भी उतने ही प्रासंगिक और ताजे महसूस होते हैं जितने दशकों पहले थे। मात्र 43 साल की छोटी सी उम्र में शैलेंद्र इस दुनिया को अलविदा कह गए। यह एक अजीब संयोग था कि जिस 14 दिसंबर को उनके सबसे अजीज दोस्त राज कपूर का जन्मदिन होता था, उसी दिन हिंदी सिनेमा के इस चमकते सितारे का निधन हुआ। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ, उसे आज तक कोई भर नहीं पाया है। एक मैकेनिक के रूप में करियर शुरू करने वाले इस इंसान ने साबित कर दिया कि अगर दिल में जज्बा हो और कलम में सच्चाई, तो लोहे के कारखानों में काम करते हुए भी दुनिया को प्रेम और भाईचारे का संगीत सुनाया जा सकता है। आज भी जब कोई ‘सजन रे झूठ मत बोलो’ या ‘सब कुछ सीखा हमने’ सुनता है, तो उसे उस महान आत्मा की याद आती है जिसने अपनी पूरी जिंदगी शब्दों की साधना में लगा दी।

सिंहस्थ तैयारियों पर नजर: मुख्यमंत्री ने उज्जैन में किया निरीक्षण और लिया धार्मिक आशीर्वाद

नई दिल्ली । उज्जैन दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को जय गुरुदेव आश्रम में पहुंचकर गुरुदेव उमाकांत महाराज से आशीर्वाद लिया और उनके प्रवचनों का श्रवण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि संतों और आश्रमों से मिलने वाली शिक्षा समाज को सही दिशा देती है और मानवता के प्रति समर्पण का मार्ग दिखाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 महापर्व के लिए स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई धार्मिक स्थलों से जुड़े विकास कार्य जनभागीदारी से आगे बढ़ रहे हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। आश्रम में गुरुदेव उमाकांत महाराज ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारियों के बावजूद वे निरंतर आध्यात्मिक जुड़ाव बनाए हुए हैं और जनसेवा के कार्यों में सक्रिय हैं। आश्रम से निकलने के बाद मुख्यमंत्री रामघाट पहुंचे, जहां उन्होंने सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए चल रहे निर्माण और विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने घाट क्षेत्र के सौंदर्यीकरण, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य समयसीमा और गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार उज्जैन को न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद फिर चर्चा में, प्रवचन रोकने का लगाया आरोप

नई दिल्ली । उज्जैन के लक्ष्मीपुरा में आयोजित सात दिवसीय देवी प्रवचन कार्यक्रम का समापन इस बार विवादों में घिर गया। मॉडल से संन्यास लेकर साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ स्वामी हर्षानंद गिरि ने मंच से आरोप लगाया कि कुछ संत उनके प्रवचन को रोकने और उसका समय घटाने की कोशिश कर रहे थे। हर्षानंद ने कहा कि शुरुआती दिनों में कार्यक्रम सामान्य रहा, लेकिन जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी, उनके प्रवचन के समय को सीमित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने दावा किया कि विरोध के बावजूद श्रद्धालुओं की उपस्थिति लगातार बढ़ती रही और पंडाल तक बढ़ाना पड़ा। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से युवतियों को ‘लव जिहाद’ से सतर्क रहने की शपथ दिलाई। इसके साथ ही युवतियों को तलवारबाजी, घुड़सवारी और शस्त्र प्रशिक्षण सीखने की सलाह भी दी गई। करणी सेना की ओर से कार्यक्रम में युवतियों को तलवारें भी वितरित की गईं। आयोजन के समापन पर करीब 11 युवतियों को प्रतीकात्मक रूप से तलवारें सौंपी गईं, जबकि लक्ष्य 101 तलवारें बांटने का था। हर्षानंद ने यह भी कहा कि वे मां भगवती की कृपा से इस कार्यक्रम में डटी रहीं और कोई भी उन्हें रोक नहीं सका। करीब एक माह पहले उन्होंने उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में संन्यास लेकर नया नाम “स्वामी हर्षानंद गिरि” अपनाया था। संन्यास से पहले वे मॉडलिंग और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में सक्रिय थीं और अब धार्मिक प्रवचनों के जरिए चर्चा में रहती हैं।

चीनी बाजार में स्थिरता की उम्मीद: निर्यात प्रतिबंध से कीमतों पर नियंत्रण, व्यापारियों ने बताया उपभोक्ता हित में कदम

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को सुनिश्चित करने और कीमतों में अस्थिरता को नियंत्रित करने के उद्देश्य से चीनी के निर्यात पर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 30 सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस निर्णय को लेकर राजस्थान के श्रीगंगानगर और सीकर के चीनी व्यापारियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और इसे उपभोक्ताओं के हित में उठाया गया कदम बताया है। सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखना बताया जा रहा है। हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही थी कि निर्यात बढ़ने से घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप करते हुए यह प्रतिबंध लागू किया है, ताकि स्थानीय उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की कमी या महंगाई का सामना न करना पड़े। श्रीगंगानगर के व्यापारिक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे बाजार में संतुलन बना रहेगा और कीमतों में अचानक होने वाली वृद्धि पर रोक लगेगी। व्यापारियों का मानना है कि जब उत्पादन देश के भीतर ही उपलब्ध रहेगा तो उपभोक्ताओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कई व्यापारिक प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि यह कदम बाजार में स्थिरता लाने में सहायक साबित होगा और आम लोगों के लिए चीनी की उपलब्धता आसान होगी। व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ समय से वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई थी। ऐसे में सरकार का यह निर्णय घरेलू हितों को प्राथमिकता देने वाला माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे भविष्य में कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी पर नियंत्रण रहेगा और आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत होगी। सीकर के स्थानीय व्यापारियों ने भी केंद्र सरकार के इस कदम को सराहनीय बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से उपभोक्ता हित में है और इससे घरेलू बाजार को मजबूती मिलेगी। व्यापारियों के अनुसार, पहले जो चीनी निर्यात के लिए निर्धारित की गई थी, उसका अधिकांश हिस्सा पहले ही भेजा जा चुका है, जबकि शेष मात्रा अब देश के भीतर उपलब्ध रहेगी। इससे स्थानीय बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ेगी और मांग-आपूर्ति के बीच संतुलन बेहतर होगा। कुछ व्यापारियों ने यह भी बताया कि सरकार ने पहले चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, जिसके तहत बड़ी मात्रा में चीनी विदेशों में भेजी गई थी। लेकिन अब बदलते हालात और घरेलू जरूरतों को देखते हुए निर्यात पर रोक लगाना आवश्यक हो गया था। उनका कहना है कि इस निर्णय से न केवल कीमतें स्थिर रहेंगी, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी। कुल मिलाकर, व्यापारिक समुदाय ने सरकार के इस फैसले को सकारात्मक कदम बताते हुए उम्मीद जताई है कि इससे आने वाले समय में बाजार स्थिर रहेगा और आम लोगों पर महंगाई का दबाव कम होगा। सरकार की यह नीति घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर और सशक्त, वैश्विक चुनौतियों का प्रभाव सीमित : गौरव वल्लभ का दावा

नई दिल्ली । देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान अर्थशास्त्री और भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह मजबूत और स्थिर बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि देश को किसी प्रकार की आर्थिक घबराहट की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भारत ने पिछले वर्षों में मजबूत आर्थिक आधार तैयार किया है और वैश्विक झटकों को सहने की क्षमता विकसित की है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में दुनिया तीन बड़े भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है, जिनमें पश्चिम एशिया का तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक व कमोडिटी से जुड़े तनाव शामिल हैं। इन परिस्थितियों का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा है, लेकिन भारत अपनी नीतियों और आर्थिक संरचना के कारण इन प्रभावों को काफी हद तक संतुलित करने में सफल रहा है। गौरव वल्लभ ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुकी है और पिछले एक दशक से अधिक समय में देश ने आर्थिक विकास की मजबूत यात्रा तय की है। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में विभिन्न सरकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और स्टार्टअप एवं स्वरोजगार के क्षेत्र में भी देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की आयात निर्भरता, विशेष रूप से कच्चे तेल और सोने जैसे क्षेत्रों में, एक चुनौती है, लेकिन सरकार इस दिशा में संतुलन बनाए रखने का प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि देश के नागरिक ऊर्जा और संसाधनों की खपत में थोड़ी बचत करें तो विदेशी मुद्रा भंडार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और आर्थिक स्थिरता और मजबूत हो सकती है। विदेशी मुद्रा भंडार, राजकोषीय घाटा और आर्थिक विकास दर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की वित्तीय स्थिति संतोषजनक है और आने वाले समय में देश की विकास दर और भी बेहतर हो सकती है। उनके अनुसार, भारत की आर्थिक नीति का मूल उद्देश्य स्थिरता के साथ विकास को आगे बढ़ाना है, जिससे वैश्विक अस्थिरताओं का असर कम से कम हो सके। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत की आपूर्ति प्रणाली मजबूत है और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश में आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं हुई है। भारत की विदेश नीति और रणनीतिक संबंधों ने भी इस स्थिरता को बनाए रखने में मदद की है। राजनीतिक सवालों के जवाब में उन्होंने विपक्ष पर भी टिप्पणी की और कहा कि देशहित के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की प्रगति सभी नागरिकों के सहयोग से ही संभव है और हर वर्ग को मिलकर देश की आर्थिक मजबूती में योगदान देना चाहिए। अंत में उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक मजबूत स्थिति में उभरेगा और विकास की गति को बनाए रखते हुए दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करेगा।

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर फाइलिंग शुरू, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जारी की एक्सेल यूटिलिटीज

नई दिल्ली । देश में टैक्सपेयर्स के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है, क्योंकि असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। इनकम टैक्स विभाग ने ई-फाइलिंग पोर्टल पर आईटीआर-1 और आईटीआर-4 फॉर्म के लिए एक्सेल आधारित यूटिलिटीज जारी कर दी हैं, जिससे करदाताओं को रिटर्न दाखिल करने में सुविधा मिलेगी। यह कदम टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को अधिक सरल, डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है। विभाग के अनुसार, करदाता अब आईटीआर-1 और आईटीआर-4 के लिए न केवल ऑनलाइन फाइलिंग विकल्प का उपयोग कर सकते हैं, बल्कि ऑफलाइन यूटिलिटी के माध्यम से भी अपना रिटर्न तैयार कर सकते हैं। ऑफलाइन प्रक्रिया में उपयोगकर्ता डेटा भरकर JSON फाइल जनरेट कर सकते हैं, जिसे बाद में ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड किया जा सकता है। इससे उन लोगों को भी राहत मिलेगी जो सीधे ऑनलाइन प्रक्रिया से सहज नहीं हैं या जिन्हें तकनीकी सहायता की आवश्यकता होती है। आईटीआर-1, जिसे सहज के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य रूप से उन निवासी व्यक्तियों के लिए है जिनकी वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी आय वेतन, एक घर संपत्ति और अन्य स्रोतों से आती है। वहीं आईटीआर-4, जिसे सुगम कहा जाता है, उन व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों और कुछ छोटे व्यवसायों के लिए लागू होता है जिनकी आय 50 लाख रुपये तक होती है और जो अनुमानित कराधान योजना के अंतर्गत आते हैं। इनकम टैक्स विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में सात अलग-अलग प्रकार के आईटीआर फॉर्म उपलब्ध हैं, जिन्हें करदाता अपनी आय के प्रकार और श्रेणी के अनुसार चुन सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग आय वर्गों के लिए टैक्स फाइलिंग को अधिक व्यवस्थित और आसान बनाना है, ताकि हर वर्ग का करदाता बिना किसी जटिलता के अपना रिटर्न दाखिल कर सके। इससे पहले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आईटीआर फॉर्म में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन भी किए थे। इन संशोधनों में पूंजीगत लाभ की विस्तृत रिपोर्टिंग, शेयर बायबैक से होने वाले नुकसान की जानकारी और कुछ विशेष व्यापारिक लेन-देन से जुड़े नए प्रकटीकरण नियम शामिल किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और गलत रिपोर्टिंग को कम करना बताया गया है। सरकार लगातार टैक्स सिस्टम को डिजिटल और सरल बनाने पर जोर दे रही है, जिससे करदाता बिना किसी कठिनाई के समय पर अपना रिटर्न दाखिल कर सकें। ई-फाइलिंग सिस्टम के विस्तार और नई यूटिलिटीज के आने से उम्मीद है कि इस वर्ष टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया पहले से अधिक सुचारु और तेज होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर रिटर्न फाइलिंग न केवल करदाताओं के लिए आवश्यक है, बल्कि इससे देश की वित्तीय व्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। नॉन-ऑडिट करदाताओं के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई है, ऐसे में टैक्सपेयर्स को सलाह दी जा रही है कि वे समय रहते अपने दस्तावेज तैयार कर फाइलिंग प्रक्रिया पूरी कर लें।

गर्मी से हाहाकार: शाजापुर-नौगांव सबसे गर्म, MP में मौसम विभाग का अलर्ट

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश एक बार फिर भीषण गर्मी की चपेट में आ गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए राज्य के करीब 40 जिलों में लू और गर्म हवाओं का अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे लोगों को दिन के समय सतर्क रहने की सलाह दी गई है। शाजापुर और छतरपुर के नौगांव में गुरुवार को अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक तापमान रहा। इसके अलावा खरगोन, खंडवा, रतलाम, खजुराहो और अन्य जिलों में भी पारा 44 डिग्री के आसपास रहा। राज्य के प्रमुख शहरों की बात करें तो उज्जैन में 44 डिग्री, भोपाल में 43.4 डिग्री, जबलपुर में 43.3 डिग्री, इंदौर में 43 डिग्री और ग्वालियर में 41.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच गर्मी का असर सबसे ज्यादा रहेगा। इस दौरान लोगों को घरों से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। इंदौर, उज्जैन, रतलाम, देवास और धार जैसे जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां तेज लू के साथ रात में भी गर्मी का असर यानी ‘वॉर्म नाइट’ देखने को मिल सकता है। हालांकि, पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में फिलहाल लू का असर कम है, लेकिन वहां भी तेज गर्मी बनी हुई है। मौसम में यह बदलाव लंबे समय से चल रहे बारिश और आंधी के दौर के बाद आया है। मई महीने के शुरुआती दिनों में लगातार बारिश के कारण तापमान सामान्य बना हुआ था, लेकिन अब अचानक मौसम ने करवट ली है और गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है।