छोटे बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें, समझिए बेबी प्रूफिंग का महत्व और जरूरी टिप्स

नई दिल्ली । हर माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चे की सुरक्षा होती है। छोटे बच्चे स्वभाव से बेहद जिज्ञासु होते हैं और अपने आसपास की हर चीज को छूने, समझने और कभी-कभी मुंह में डालने की कोशिश करते हैं। यही जिज्ञासा उनके विकास का हिस्सा होती है, लेकिन इसी कारण वे कई बार अनजाने में चोट या दुर्घटना का शिकार भी हो सकते हैं। ऐसे में घर को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाना बेहद जरूरी हो जाता है, जिसे ‘बेबी प्रूफिंग’ कहा जाता है। बेबी प्रूफिंग का मतलब है घर के वातावरण में ऐसे बदलाव करना जिससे बच्चे को किसी भी तरह की चोट, जलन, गिरने, डूबने या जहरीले पदार्थों के संपर्क में आने का खतरा कम हो जाए। इसका उद्देश्य बच्चे की जिज्ञासा को रोकना नहीं बल्कि उसे एक सुरक्षित माहौल देना होता है, जहां वह स्वतंत्र रूप से सीख और खेल सके। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, घर में संभावित खतरे भी बदलते रहते हैं, इसलिए समय-समय पर सुरक्षा उपायों की समीक्षा करना जरूरी है। छोटे बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा जलने या झुलसने से जुड़ा होता है। गर्म पेय पदार्थ, स्टोव और गर्म पानी से उन्हें दूर रखना चाहिए। रसोई में बर्तनों के हैंडल अंदर की तरफ रखने और गर्म चीजों को किनारे से हटाकर रखने की सलाह दी जाती है। नहाने के पानी का तापमान भी सावधानी से जांचना चाहिए ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे। इसके साथ ही माचिस, लाइटर और अन्य ज्वलनशील चीजों को बच्चों की पहुंच से दूर रखना जरूरी है। दूसरा बड़ा खतरा दम घुटने या गला अटकने का होता है। छोटे बच्चे अक्सर छोटी चीजों को मुंह में डाल लेते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटना हो सकती है। इसलिए छोटे खिलौने, सिक्के, बैटरी और कुछ खाद्य पदार्थों को बच्चों से दूर रखना चाहिए। बच्चों के सोने की जगह को भी सुरक्षित बनाना जरूरी है, जहां ढीले तकिए या भारी कंबल न हों। डूबने का खतरा भी बेहद गंभीर माना जाता है क्योंकि बच्चे बहुत कम पानी में भी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। नहाने के दौरान बच्चों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए और घर में पानी से भरे बर्तन तुरंत खाली कर देने चाहिए। इसी तरह गिरने से बचाव के लिए सीढ़ियों, खिड़कियों और ऊंची जगहों पर सुरक्षा उपाय अपनाना आवश्यक होता है। जहरीले पदार्थों और रसायनों से सुरक्षा भी बेबी प्रूफिंग का अहम हिस्सा है। दवाइयों, डिटर्जेंट और अन्य केमिकल्स को हमेशा बंद अलमारी में रखना चाहिए ताकि बच्चे उनकी पहुंच से दूर रहें। इसके अलावा घर के फर्नीचर के नुकीले किनारों को ढकना और बिजली के सॉकेट को सुरक्षित करना भी जरूरी होता है। कुल मिलाकर बेबी प्रूफिंग सिर्फ एक सावधानी नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है, जो बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए अपनाई जाती है। थोड़ी सी जागरूकता और तैयारी से माता-पिता अपने घर को बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित बना सकते हैं और उन्हें बिना डर के सीखने और बढ़ने का अवसर दे सकते हैं।
भोजशाला फैसले पर सियासी बयानबाज़ी तेज, ‘न्यायपालिका के जरिए सनातनियों की जीत’ पर गरमाई बहस

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर दिए गए फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। अदालत के इस निर्णय के बाद विभिन्न पक्षों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। फैसले के बाद कुछ जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने इसे सत्य की विजय बताया और कहा कि लंबे समय से चल रहे विवाद पर अब स्थिति स्पष्ट हुई है। उनके अनुसार, यह निर्णय आस्था और परंपरा से जुड़े मुद्दे पर न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि वर्षों से जिस स्थान को लेकर विवाद था, अब उस पर न्यायिक दृष्टिकोण से स्पष्टता आ गई है, जिससे स्थानीय लोगों में संतोष का माहौल देखा जा रहा है। इसी क्रम में कुछ जनप्रतिनिधियों ने बयान दिया कि यह निर्णय समाज में आस्था से जुड़े विषयों पर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता को समाप्त करता है। उनके अनुसार, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों को लेकर जो विवाद थे, वे अब न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से एक दिशा में आगे बढ़े हैं। उन्होंने इसे सामाजिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया। वहीं याचिकाकर्ताओं और पक्षकारों ने भी फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इससे उनके लंबे संघर्ष को न्याय मिला है। उन्होंने यह दावा किया कि भोजशाला का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बहुत पुराना है और इससे जुड़े कई साक्ष्य पहले से मौजूद हैं। उनके अनुसार, अब इस स्थल के संरक्षण और पुनर्स्थापना को लेकर आगे की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाएगा। कुछ याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर इस स्थान की वास्तविक पहचान को लेकर उनकी ओर से अदालत में दलीलें पेश की गई थीं। अब फैसले के बाद वे आगे की योजना पर काम करेंगे, जिसमें धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं से जुड़े पहलुओं को पुनर्स्थापित करने की बात कही गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में चर्चा और बहस का माहौल बना हुआ है। अलग-अलग पक्ष अपने-अपने नजरिए से इस निर्णय की व्याख्या कर रहे हैं। जहां एक ओर इसे न्यायिक प्रक्रिया की जीत बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
सूर्यकुमार यादव बने पिता: बेबी शावर में पत्नी देविशा का ट्रेडिशनल और रॉयल लुक वायरल

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव के घर 7 मई 2026 को खुशियों ने दस्तक दी, जब उनकी पत्नी देविशा शेट्टी ने एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम रिद्धिमा रखा गया है। बेटी के जन्म के बाद परिवार में जश्न का माहौल देखने को मिला और इस खास मौके पर बेबी शावर की खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। बेबी शावर में दिखा प्यार और साथ का खूबसूरत अंदाजबेबी शावर फंक्शन में सूर्यकुमार यादव और देविशा का प्यार भरा अंदाज फैंस को खूब पसंद आ रहा है।तस्वीरों में सूर्यकुमार अपनी पत्नी पर प्यार लुटाते दिखे। कभी उनके बालों में गजरा लगाते नजर आए तो कभी उन्हें प्यार से खाना खिलाते हुए दिखाई दिए। वहीं देविशा अपने मॉम टू बी ग्लो और पारंपरिक साड़ी लुक में बेहद खूबसूरत नजर आईं। देविशा का ट्रेडिशनल साड़ी लुक बना आकर्षणदेविशा ने इस खास मौके पर गोल्डन और ऑरेंज टोन की कांजीवरम साड़ी पहनी, जो साउथ इंडियन रॉयल लुक दे रही थी। साड़ी में गोल्डन जरी वर्क और ग्रीन बॉर्डरनीट ड्रेपिंग के साथ बेबी बंप फ्लॉन्ट ऑरेंज हैवी एम्ब्रॉयडरी ब्लाउज उनका पूरा लुक बेहद ग्रेसफुल और एलिगेंट नजर आया। ज्वेलरी और मेकअप ने बढ़ाया ग्लैमरदेविशा ने अपने लुक को पारंपरिक साउथ इंडियन टच दिया: लेयर्ड नेकलेस और ग्रीन स्टोन चोकर झुमके, मांग टीका और कमरबंध मेहंदी लगे हाथ और सॉफ्ट वेवी हेयरस्टाइल बालों में लगा गजरा, जिसे सूर्यकुमार ने खुद सजाया मेकअप को उन्होंने सॉफ्ट और नेचुरल रखा, जिससे उनका प्रेग्नेंसी ग्लो और भी उभरकर सामने आया। सूर्यकुमार यादव का सिंपल लेकिन स्टाइलिश लुकसूर्यकुमार यादव ने इस मौके पर ऑफ-व्हाइट एथनिक लुक चुना।उन्होंने टेक्सचर्ड बंदगला जैकेट को मैचिंग कुर्ता और पैंट के साथ पेयर किया, जो देविशा के हैवी ट्रेडिशनल लुक के साथ शानदार कॉन्ट्रास्ट बना रहा था। कपल गोल्स बने सूर्यकुमार और देविशादोनों का यह बेबी शावर लुक सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है।जहां एक तरफ देविशा का रॉयल ट्रेडिशनल अंदाज नजर आया, वहीं सूर्यकुमार का सिंपल और एलीगेंट लुक उन्हें परफेक्ट कपल बनाता दिखा। सूर्यकुमार यादव और देविशा की यह खास झलक सिर्फ एक फैमिली मोमेंट नहीं, बल्कि प्यार, साथ और नए जीवन की शुरुआत का खूबसूरत उत्सव है, जिसने फैंस का दिल जीत लिया है।
ऑफिस डेली कम्यूट के लिए बेस्ट 5 हाइब्रिड कारें: 28 km तक माइलेज, पेट्रोल-डीजल की टेंशन खत्म

नई दिल्ली। बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों और इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग से जुड़ी परेशानियों के बीच हाइब्रिड कारें अब एक स्मार्ट और किफायती विकल्प बनकर उभर रही हैं। ये कारें पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर के कॉम्बिनेशन से चलती हैं, जिससे बेहतर माइलेज और कम फ्यूल खर्च मिलता है। खासकर रोजाना ऑफिस आने-जाने वाले लोगों के लिए ये गाड़ियां 2026 में एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रही हैं। इस सेगमेंट में मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा सबसे लोकप्रिय हाइब्रिड SUV में से एक है। इसमें 1.5 लीटर पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर मिलकर लगभग 27.97 kmpl तक का माइलेज देती है। शहर के ट्रैफिक में यह अधिकतर इलेक्ट्रिक मोड पर चलती है, जिससे ईंधन की बचत होती है। इसकी कीमत करीब 16.63 लाख रुपये से शुरू होती है। टोयोटा अर्बन क्रूजर हायराइडर भी इसी तकनीक पर आधारित एक भरोसेमंद SUV है, जो लगभग समान माइलेज देती है और अपने प्रीमियम डिजाइन व मजबूत बिल्ड क्वालिटी के लिए जानी जाती है। यह भी 27.97 kmpl तक का माइलेज देने में सक्षम है और इसकी शुरुआती कीमत लगभग 16.77 लाख रुपये है। होंडा सिटी e:HEV उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जो सेडान पसंद करते हैं। यह कार लगभग 27.1 kmpl का माइलेज देती है और इसमें एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स जैसे ADAS भी शामिल हैं। इसका साइलेंट हाइब्रिड ड्राइविंग एक्सपीरियंस इसे खास बनाता है और इसकी कीमत करीब 19.99 लाख रुपये से शुरू होती है। बड़ी फैमिली के लिए टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस एक प्रीमियम MPV है, जो 23.24 kmpl तक का माइलेज देती है। इसमें आरामदायक केबिन, बड़ी सनरूफ और लंबी दूरी की यात्रा के लिए बेहतरीन कम्फर्ट मिलता है। इसकी कीमत लगभग 26.76 लाख रुपये से शुरू होती है। मारुति सुजुकी इनविक्टो इसी मॉडल का प्रीमियम वर्जन है, जो समान माइलेज और फीचर्स के साथ आता है। यह उन ग्राहकों के लिए बेहतर विकल्प है जो मारुति के सर्विस नेटवर्क के साथ लग्जरी हाइब्रिड MPV चाहते हैं। इसकी कीमत करीब 24.97 लाख रुपये से शुरू होती है। कुल मिलाकर, हाइब्रिड कारें उन लोगों के लिए एक परफेक्ट विकल्प बन रही हैं जो कम खर्च में बेहतर माइलेज, आरामदायक ड्राइव और भविष्य की टेक्नोलॉजी का फायदा उठाना चाहते हैं।
पेट्रोल-डीजल महंगे होने का असर: क्या बढ़ेंगे मोबाइल रिचार्ज के दाम?

नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने सिर्फ ट्रांसपोर्ट सेक्टर ही नहीं, बल्कि टेलीकॉम इंडस्ट्री पर भी असर डालने की आशंका बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोबाइल टावर चलाने की कुल लागत का बड़ा हिस्सा ईंधन और बिजली पर खर्च होता है, जिससे कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। लागत का बड़ा हिस्सा ईंधन और बिजली पर खर्च होता है, जिससे कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। टेलीकॉम सेक्टर पर कैसे पड़ेगा असर?रिपोर्ट्स के अनुसार, मोबाइल टावर को चलाने में आने वाला लगभग 40% खर्च बिजली और डीजल पर निर्भर करता है।पेट्रोल-डीजल महंगा होने से: टावर ऑपरेशन की लागत बढ़ेगी डीजल जेनरेटर का खर्च बढ़ जाएगा बिजली बिल भी कंपनियों पर भारी पड़ेगा इसका सीधा असर टेलीकॉम कंपनियों की कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट पर पड़ेगा। कंपनियों पर कितना बढ़ेगा खर्च?जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया जैसी बड़ी कंपनियों को: हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है खासकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में जहां डीजल बैकअप ज्यादा इस्तेमाल होता है 5G टावरों में ऊर्जा खपत और भी अधिक होती है, जिससे लागत बढ़ जाती है क्या महंगे होंगे मोबाइल रिचार्ज?विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लागत लगातार बढ़ती रही तो: टेलीकॉम कंपनियां टैरिफ बढ़ा सकती हैं रिचार्ज प्लान पहले से महंगे हो सकते हैं डेटा और कॉलिंग पैक की कीमतों में बदलाव संभव है हालांकि, कंपनियां अभी सीधे तौर पर कीमतें बढ़ाने से बचने की कोशिश कर रही हैं। पहले से चल रही थी टैरिफ बढ़ोतरी की तैयारीटेलीकॉम सेक्टर पहले से ही: नेटवर्क अपग्रेड (4G से 5G) स्पेक्ट्रम लागत इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश जैसे कारणों से टैरिफ बढ़ाने पर विचार कर रहा था। अब ईंधन महंगाई ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब टेलीकॉम सेक्टर तक पहुंचता दिख रहा है। अगर ऑपरेटिंग कॉस्ट लगातार बढ़ती रही, तो आने वाले समय में मोबाइल रिचार्ज प्लान महंगे हो सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसला कंपनियों की रणनीति और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
झटपट बनाएं Instant आम का अचार: फीकी दाल-रोटी को दें चटपटा ट्विस्ट, मिनटों में तैयार स्वादिष्ट रेसिपी

नई दिल्ली । गर्मियों के मौसम में आम का अचार हर भारतीय रसोई की खास पहचान होता है। यह सिर्फ एक साइड डिश नहीं बल्कि खाने के स्वाद को पूरी तरह बदल देने वाला स्वादिष्ट व्यंजन है। आमतौर पर पारंपरिक तरीके से अचार बनाने में कई दिन या हफ्तों का समय लगता है, जिसमें धूप में सुखाना और मसालों को अच्छे से पकने देना शामिल होता है। लेकिन आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हर कोई जल्दी और आसान विकल्प चाहता है, इसलिए इंस्टेंट आम का अचार एक बेहतरीन समाधान बनकर सामने आता है। इस झटपट रेसिपी की खास बात यह है कि इसमें न तो लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है और न ही किसी खास मौसम या धूप की जरूरत होती है। कुछ ही सरल स्टेप्स में आप घर पर ही बाजार जैसा चटपटा और तीखा आम का अचार तैयार कर सकते हैं, जिसे तुरंत खाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस रेसिपी के लिए सबसे पहले कच्चे आमों को अच्छी तरह धोकर सुखाया जाता है ताकि उनमें बिल्कुल भी नमी न रहे। फिर इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। इसके बाद मसालों का स्वाद तैयार किया जाता है, जिसमें सौंफ और मेथी दाने को हल्का भूनकर दरदरा पीसा जाता है ताकि उनका असली फ्लेवर निकल सके। इसके बाद सरसों के तेल को अच्छी तरह गर्म किया जाता है, जब तक उसमें हल्का धुआं न निकलने लगे। तेल को थोड़ा ठंडा करने के बाद उसमें हींग, कलौंजी, हल्दी, लाल मिर्च और तैयार मसाला डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है। यह मिश्रण अचार को उसका खास स्वाद और सुगंध देता है। अब इस मसालेदार तेल में कटे हुए आम के टुकड़े और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। सभी चीजों को अच्छे से मिक्स किया जाता है ताकि हर आम के टुकड़े पर मसाले की परत चढ़ जाए। इस स्टेप के बाद अचार तुरंत खाने के लिए तैयार हो जाता है। अगर आप खट्टे-मीठे स्वाद पसंद करते हैं तो इसमें थोड़ी मात्रा में गुड़ भी मिलाया जा सकता है, जिससे इसका स्वाद और भी अलग और आकर्षक बन जाता है। यह इंस्टेंट अचार न सिर्फ समय बचाता है बल्कि खाने के स्वाद को भी दोगुना कर देता है। कुल मिलाकर यह रेसिपी उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो बिना लंबा इंतजार किए घर पर ही ताजा और स्वादिष्ट आम का अचार बनाना चाहते हैं। थोड़ी सी मेहनत और सही मसालों के साथ आप किसी भी साधारण भोजन को खास बना सकते हैं।
IPO मार्केट में हलचल, SEBI की मंजूरी के बाद 3 कंपनियां लाएंगी पब्लिक ऑफर, निवेशकों की नजर

नई दिल्ली । बाजार नियामक SEBI ने तीन कंपनियों को अपने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी IPO लाने की मंजूरी दे दी है, जिससे प्राथमिक बाजार में नई हलचल देखने को मिल रही है। ये कंपनियां Neolite ZKW Lightings, SS Retail और Aspri Spirits हैं, जो मिलकर बाजार से 1,200 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की योजना पर काम कर रही हैं। इन सभी कंपनियों ने पिछले साल अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जमा किए थे, जिन पर अब SEBI की ओर से अंतिम स्वीकृति मिल चुकी है। इन तीनों कंपनियों के IPO आने से निवेशकों के लिए नए अवसर खुलेंगे और विभिन्न सेक्टर्स में भागीदारी का मौका मिलेगा। ये कंपनियां स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होने के बाद अपनी बाजार मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन IPOs के जरिए जुटाई जाने वाली राशि का उपयोग विस्तार योजनाओं, कर्ज चुकाने और कारोबारी जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। Neolite ZKW Lightings, जो ऑटोमोबाइल लाइटिंग सेक्टर में काम करती है, इस IPO के जरिए करीब 600 करोड़ रुपये जुटाने की योजना में है। कंपनी का एक हिस्सा नए शेयर जारी कर पूंजी जुटाएगा, जबकि मौजूदा निवेशक ऑफर फॉर सेल के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। कंपनी इस फंड का इस्तेमाल उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए प्लांट स्थापित करने में करेगी। वहीं SS Retail, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल रिटेल सेक्टर में काम करती है, करीब 500 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। कंपनी इस पूंजी का उपयोग नए स्टोर्स खोलने और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगी। इसका कारोबार कई राज्यों के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिससे इसकी ग्रोथ की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं। तीसरी कंपनी Aspri Spirits अल्कोहल और पेय पदार्थों के डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में सक्रिय है और इस लिस्ट में सबसे प्रमुख नामों में शामिल है। कंपनी अपने बड़े ब्रांड पोर्टफोलियो के साथ बाजार में मजबूत स्थिति रखती है। IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी कर्ज चुकाने और विस्तार योजनाओं में करने की योजना बना रही है। कुल मिलाकर, SEBI की इस मंजूरी के बाद IPO बाजार में नई गतिविधियां तेज हो गई हैं। निवेशकों के लिए यह आने वाले दिनों में नए निवेश विकल्पों का संकेत माना जा रहा है, जबकि कंपनियों के लिए यह अपने कारोबार को विस्तार देने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।
चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

नई दिल्ली । भारत में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच एक और महत्वाकांक्षी परियोजना सुर्खियों में है, जो देश के दक्षिण और मध्य हिस्सों की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से विकसित किया जा रहा बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर हाईस्पीड एक्सप्रेसवे एक ऐसा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है, जो न केवल यात्रा को तेज बनाएगा बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा। यह लगभग 1100 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे चार प्रमुख राज्यों से होकर गुजरेगा, जिनमें कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं। इस मार्ग में आने वाले प्रमुख शहरों में नागपुर, हिंगनघाट, आदिलाबाद, निजामाबाद, हैदराबाद, कुरनूल, अनंतपुर और चिक्काबल्लापुर जैसे महत्वपूर्ण केंद्र शामिल हैं। यह कॉरिडोर इन क्षेत्रों को सीधे एक हाईस्पीड नेटवर्क से जोड़ देगा, जिससे व्यापार और आवागमन दोनों में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा। वर्तमान समय में महाराष्ट्र के नागपुर से कर्नाटक के बेंगलुरु तक की यात्रा में लगभग 23 से 24 घंटे का समय लग जाता है। लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद यही सफर घटकर लगभग 11 से 12 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इसे 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित और तेज हो जाएगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 35 हजार करोड़ रुपये है। शुरुआत में इसे 6-लेन एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसे भविष्य में बढ़ते यातायात को देखते हुए 8 या 12 लेन तक विस्तारित करने की योजना भी शामिल है। यह एक एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा, जिसमें प्रवेश और निकास के लिए सीमित स्थान निर्धारित किए जाएंगे, जिससे ट्रैफिक फ्लो सुचारू और नियंत्रित रहेगा। इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता इसके आसपास विकसित होने वाली औद्योगिक संरचना है। इसके किनारे विशेष आर्थिक क्षेत्र और औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और रियल एस्टेट तथा व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। हाल ही की प्रगति के अनुसार, परियोजना के कई हिस्सों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर काम तेजी से चल रहा है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि पर्यावरणीय मंजूरियों के कारण कुछ चरणों में देरी देखने को मिली, लेकिन अब परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह हाईस्पीड एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि एक व्यापक विकास मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और आर्थिक ढांचे को एक नई गति प्रदान करेगा।
काजू कतली की रोचक कहानी: 400 साल पुरानी इस मिठाई की शुरुआत कैसे हुई और कैसे बनी भारत की फेवरेट स्वीट

नई दिल्ली । काजू कतली सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि स्वाद और इतिहास का एक दिलचस्प मेल है। आज यह भारत की सबसे पसंदीदा और प्रीमियम मिठाइयों में गिनी जाती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके पीछे सदियों पुरानी एक रोचक कहानी छिपी हुई है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत लगभग 400 साल पहले हुई थी, जब काजू भारत में नया-नया उपयोग में आने लगा था और शाही रसोई में नए प्रयोग किए जा रहे थे। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, काजू कतली का विकास दक्षिण भारत के दक्कन क्षेत्र में हुआ। उस समय मराठा साम्राज्य के राजघरानों में नए-नए व्यंजन बनाने की होड़ रहती थी। शाही रसोइयों ने काजू को पीसकर और उसे चीनी की चाशनी के साथ मिलाकर एक नई तरह की मिठाई बनाने की कोशिश की, जिसका मकसद कुछ ऐसा तैयार करना था जो स्वाद में अलग हो और शाही परिवार को पसंद आए। कहा जाता है कि उस समय काजू को बारीक पीसकर उसका पेस्ट बनाया गया और उसमें घी और चीनी मिलाकर एक चिकना मिश्रण तैयार किया गया। इस मिश्रण को पतली परत के रूप में फैलाया गया और ठंडा होने के बाद इसे हीरे के आकार में काटा गया। इसकी खास बात इसकी पतली बनावट और मुंह में घुल जाने वाला स्वाद था, जिसने इसे बाकी मिठाइयों से अलग पहचान दी। एक अन्य मान्यता के अनुसार, मुगल काल के दौरान भी इस तरह की मिठाई का उल्लेख मिलता है, जब शाही दावतों और जश्न के अवसरों पर काजू, घी और चीनी से बनी मिठाइयों को खास तौर पर तैयार किया जाता था। धीरे-धीरे यह मिठाई अलग-अलग क्षेत्रों में फैलती गई और समय के साथ इसका स्वरूप और नाम भी लोकप्रिय होता गया। काजू कतली की खासियत यह है कि यह देखने में जितनी आकर्षक लगती है, स्वाद में उतनी ही हल्की और मुलायम होती है। इसमें दूध का उपयोग नहीं होता, जिससे यह लंबे समय तक खराब भी नहीं होती। यही कारण है कि यह त्योहारों और खास मौकों पर सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली मिठाइयों में शामिल है। समय के साथ काजू कतली ने भी बदलाव देखे हैं। आज बाजार में इसके कई नए रूप उपलब्ध हैं, जिनमें केसर, पिस्ता, चॉकलेट और अन्य फ्लेवर शामिल हैं। इसके बावजूद इसका पारंपरिक स्वाद आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।
मासिक शिवरात्रि 15 मई 2026: महत्व, पूजा विधि, फल और परंपरा की पूरी जानकारी

15 मई 2026 को मासिक शिवरात्रि का पावन व्रत मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत विशेष माना जाता है। हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है, लेकिन इस दिन की आध्यात्मिक शक्ति और शिव कृपा प्राप्त करने का महत्व अत्यधिक माना गया है। मासिक शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?मासिक शिवरात्रि का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव की उपासना करके जीवन के कष्टों से मुक्ति पाना और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करना है। मान्यता है कि इस दिन शिव और शक्ति का दिव्य मिलन हुआ था, इसलिए यह तिथि बेहद शुभ और शक्तिशाली मानी जाती है। भक्त इस दिन व्रत रखकर अपने पापों से मुक्ति, मन की शुद्धि और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो मानसिक तनाव, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति चाहते हैं। मासिक शिवरात्रि की शुरुआत कब हुई?मासिक शिवरात्रि की शुरुआत किसी एक ऐतिहासिक घटना से नहीं जुड़ी है, बल्कि यह वैदिक काल से चली आ रही परंपरा है। शिव उपासना का उल्लेख वेदों और पुराणों में मिलता है, विशेषकर शिव पुराण में इस व्रत का महत्व विस्तार से बताया गया है। मान्यता है कि यह परंपरा हजारों वर्षों से हिंदू धर्म में चली आ रही है, जहां भक्त हर महीने शिवरात्रि के दिन उपवास और रात्रि जागरण करते हैं। मासिक शिवरात्रि का क्या फल मिलता है?मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से कई आध्यात्मिक और मानसिक लाभ मिलते हैं: मन की शांति और तनाव से मुक्ति मिलती है जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है पापों का क्षय और आत्मा की शुद्धि मानी जाती है विवाह और जीवन की बाधाओं में कमी आती है भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है मोक्ष प्राप्ति की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण साधना मानी जाती है मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि क्या है?इस दिन भक्त प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं। दिनभर उपवास रखा जाता है और रात में भगवान शिव की पूजा की जाती है। पूजा में निम्न चीजें विशेष मानी जाती हैं: शिवलिंग पर जल और दूध से अभिषेक बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करना “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप रातभर जागरण (जागरण को बहुत शुभ माना जाता है) शिव पुराण का पाठ या शिव कथा सुनना आज के समय में इसका महत्वआज की व्यस्त जीवनशैली में मासिक शिवरात्रि लोगों को आध्यात्मिकता से जोड़ने का माध्यम बन गई है। यह दिन आत्मचिंतन, संयम और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देता है। लोग इसे मानसिक शांति और जीवन में संतुलन पाने के लिए भी महत्वपूर्ण मानते हैं।मासिक शिवरात्रि केवल एक व्रत नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। 15 मई 2026 की यह शिवरात्रि भक्तों के लिए विशेष मानी जा रही है, जिसमें पूजा और भक्ति से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।