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भोजशाला मामले में सामने आईं ऐतिहासिक तस्वीरें, हिंदू पक्ष ने बताए मंदिर से जुड़े प्रमाण

नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हालिया फैसले में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर हिंदू पक्ष के दावों को महत्वपूर्ण आधार दिया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि भोजशाला राजा भोज द्वारा स्थापित मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है। यह विवाद 1990 के दशक से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। पूजा और नमाज के अधिकार को लेकर कई बार तनाव की स्थिति भी बनी। प्रशासन ने हालात को संभालने के लिए अलग-अलग दिनों में पूजा और नमाज की व्यवस्था लागू की थी। मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति दी जाती थी, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष नमाज अदा करता था। मामले ने नया मोड़ तब लिया जब वर्ष 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराया। लंबे समय तक चली इस जांच में परिसर से कई ऐसे अवशेष मिले, जिन्हें हिंदू धार्मिक और स्थापत्य परंपरा से जुड़ा बताया गया। रिपोर्ट में देवी-देवताओं की आकृतियां, प्राचीन मूर्तिकला, स्तंभों पर उकेरी गई कलाकृतियां और संस्कृत शिलालेखों का उल्लेख सामने आया। हिंदू पक्ष का दावा है कि ये सभी प्रमाण स्पष्ट करते हैं कि भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी का मंदिर था, जिसे बाद में मस्जिद के रूप में उपयोग किया गया। ASI की रिपोर्ट में परिसर के कई स्तंभों और संरचनाओं को मंदिर वास्तुकला से जुड़ा बताया गया है। यही वजह है कि हाईकोर्ट का फैसला हिंदू पक्ष के लिए बड़ी कानूनी और धार्मिक जीत माना जा रहा है। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने ASI रिपोर्ट और अदालत में पेश किए गए कई तथ्यों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भोजशाला लंबे समय से मस्जिद के रूप में उपयोग होती रही है और धार्मिक स्वरूप को लेकर केवल एक पक्ष के दावों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार का तनाव न फैले। संवेदनशील इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। भोजशाला विवाद केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व का विषय बन चुका है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़े कानूनी और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन सकता है।

मध्य प्रदेश में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 5 की मौत, यूपी-बिहार के मजदूर थे शिकार

नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के देवास जिले के टोंककलां इलाके में गुरुवार सुबह हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। सुबह करीब 11:30 बजे हुए इस धमाके में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसा इतना भयावह था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे और फैक्ट्री की दीवारें पूरी तरह धराशायी हो गईं। आसपास के मकानों तक धमाके की कंपन महसूस की गई। मृतक मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के बताए जा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ब्लास्ट के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। झुलसे हुए मजदूर बदहवास हालत में बाहर भागते नजर आए। कई लोगों के कपड़े शरीर की त्वचा से चिपक गए थे। फैक्ट्री के बाहर जले हुए अवशेष, बाल और विस्फोटक सामग्री बिखरी पड़ी मिली। हादसे के बाद भी लंबे समय तक पटाखे फूटने की आवाजें आती रहीं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में दो केमिकल मिलाकर बारूद तैयार किया जा रहा था। आशंका है कि केमिकल का अनुपात बिगड़ने या मैग्नीशियम पाउडर के पानी के संपर्क में आने से विस्फोट हुआ। श्रम विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई कि बारूद की हैंडलिंग के दौरान स्टैटिक चार्ज बनने से ‘सेल्फ इग्निशन’ हुआ होगा। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से केमिकल के सैंपल जुटाए हैं। सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि जिस फैक्ट्री में विस्फोट हुआ, उसका निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था। बावजूद इसके वहां बड़े स्तर पर पटाखा निर्माण किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर निर्माणाधीन यूनिट में ही विस्फोटक सामग्री का उत्पादन शुरू कर दिया गया था। फैक्ट्री के पास विस्फोटक लाइसेंस तो था, लेकिन फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी पंजीकरण और सुरक्षा अनुमतियां नहीं ली गई थीं। पुलिस ने फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय को गिरफ्तार कर लिया है। उसके समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है। वहीं, उज्जैन संभाग कमिश्नर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच में फैक्ट्री के लाइसेंस, सुरक्षा इंतजाम और नियमों के पालन की पड़ताल की जाएगी। देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि घायलों का इलाज देवास, इंदौर के एमवाय, चोइथराम और अमलतास अस्पतालों में चल रहा है। कई मजदूर 80 से 90 प्रतिशत तक झुलस गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घायलों से मुलाकात कर मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में पहले भी मार्च 2026 में विस्फोट हो चुका था, लेकिन प्रशासन ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों के मुताबिक, यहां 400 से 500 मजदूर काम करते थे और रोज करीब 18 लाख रुपए का माल तैयार होता था।

ब्रिक्स सम्मेलन में जयशंकर का सख्त संदेश, सुधार अब पसंद नहीं बल्कि जरूरत : विदेश मंत्री

नई दिल्ली । वैश्विक मंच पर बदलते शक्ति संतुलन और बढ़ती जटिलताओं के बीच ब्रिक्स सम्मेलन 2026 का दूसरा दिन एक महत्वपूर्ण संदेश के साथ सामने आया, जहां भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को स्पष्ट और मजबूत तरीके से रखा। सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया जिस दौर से गुजर रही है, उसमें बदलाव अब किसी विकल्प या पसंद का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियां उस समय से काफी अलग हैं, जब मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की नींव रखी गई थी। समय के साथ दुनिया अधिक आपस में जुड़ी हुई, जटिल और बहु-ध्रुवीय हो गई है, लेकिन वैश्विक शासन की मौजूदा संरचना इस परिवर्तन के साथ कदम नहीं मिला पाई है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर निर्णय प्रक्रिया और उसकी प्रभावशीलता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। जयशंकर ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा प्रणाली में सुधार केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक संतुलन और न्याय से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व ही पर्याप्त रूप से नहीं हो पाता, तो निर्णयों की वैधता और स्वीकार्यता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। इसी कारण वैश्विक संस्थाओं को अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना जरूरी है। आज कई देशों को विकास, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन मौजूदा ढांचे इन चुनौतियों का समाधान करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। इसलिए सुधार की प्रक्रिया को तेज करना समय की मांग है। विदेश मंत्री ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक सदस्यता बढ़ने के बावजूद कई निर्णय लेने वाली संरचनाएं अब भी पुरानी दुनिया की तस्वीर दिखाती हैं, जिससे उभरते देशों और विकासशील क्षेत्रों को उचित स्थान नहीं मिल पाता। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों की भागीदारी को बढ़ाना आवश्यक है ताकि वैश्विक व्यवस्था अधिक संतुलित हो सके। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक वित्तीय प्रणाली की चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में सप्लाई चेन की अस्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव और संसाधनों तक असमान पहुंच जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों को और अधिक सक्षम और लचीला बनाना जरूरी है ताकि विकासशील देशों को समय पर और पर्याप्त सहायता मिल सके। व्यापार व्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार को निष्पक्ष और नियम-आधारित बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ गैर-न्यायसंगत प्रथाएं और आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता वैश्विक अर्थव्यवस्था को जोखिम में डाल रही हैं। इसलिए एक मजबूत और संतुलित व्यापार प्रणाली की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। अपने संबोधन के अंत में विदेश मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान समय का सबसे बड़ा संदेश सहयोग और सुधार है। उन्होंने कहा कि दुनिया को एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय ढांचे की आवश्यकता है जो अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक और न्यायपूर्ण हो, ताकि सभी देशों को समान अवसर मिल सके और वैश्विक चुनौतियों का समाधान सामूहिक रूप से किया जा सके।

MP SP Hitika Vasal: गुना SP हितिका वासल की महिलाओं से अपील: पति बिना हेलमेट जाए तो कह दो- आज रोटी नहीं मिलेगी

MP SP Hitika Vasal:

HIGHLIGHTS: गुना SP ने जन चौपाल में महिलाओं से की खास अपील हेलमेट और सीट बेल्ट को लेकर दिया जागरूकता संदेश मुंदोल गांव में ग्रामीणों से सीधा संवाद कर सुनी समस्याएं साइबर फ्रॉड, नशा और अपराध रोकने पर दिया जोर पुलिस और जनता के बेहतर तालमेल की बात कही   MP SP Hitika Vasal: गुना। हितिका वासल ने बमोरी थाना क्षेत्र के मुंदोल गांव में आयोजित जन चौपाल के दौरान महिलाओं को सड़क सुरक्षा को लेकर अनोखे अंदाज में जागरूक किया। बता दें कि उन्होंने कहा कि अगर पति हेलमेट लगाए बिना घर से निकलता है तो महिलाओं को कहना चाहिए कि आज रोटी नहीं मिलेगी। वहीं शराब पीकर घर आने वालों को भी खाना न देने की बात कही। SP ने कहा कि एक महिला पूरे परिवार का माहौल बदल सकती है और समाज में जागरूकता लाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। शाजापुर में गोदाम से 12 इलेक्ट्रिक पोल चोरी, ठेकेदार ने दर्ज कराई शिकायत ग्रामीणों से सीधा संवाद जन चौपाल के दौरान SP हितिका वासल ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और पुलिस-जनता के बेहतर तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था मजबूत बनाने के लिए आम लोगों का सहयोग बेहद जरूरी है। ग्रामीणों से अपील की गई कि क्षेत्र में होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अवैध कारोबार या अपराध की जानकारी तुरंत पुलिस को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। स्मार्टफोन की सेफ्टी के लिए जरूरी टिप्स: ये 5 चीजें फोन के साथ रखी तो हो सकता है भारी नुकसान साइबर अपराध और नशे पर जागरूकता कार्यक्रम में साइबर फ्रॉड, नशे की लत और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। SP ने ग्रामीणों को बताया कि ऑनलाइन ठगी और फर्जी कॉल से कैसे बचा जा सकता है। साथ ही युवाओं को नशे से दूर रहने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संदेश दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को हेल्पलाइन नंबर और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी भी दी। गर्मी का प्रचंड वार: शाजापुर में तापमान 45 डिग्री के करीब, लोगों की मुश्किलें बढ़ीं सड़क सुरक्षा पर विशेष जोर SP हितिका वासल ने सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि दोपहिया वाहन पर हेलमेट और चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाना बेहद जरूरी है। उन्होंने हैदराबाद के एक गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां बिना हेलमेट किसी को गांव में एंट्री नहीं दी जाती। इस दौरान SDOP विवेक अष्ठाना, TI दिलीप राजोरिया सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और ग्रामीण मौजूद रहे।

देवास ब्लास्ट केस में चौंकाने वाली बातें सामने आईं, सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी वजह

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के देवास जिले में टोंककलां स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट को लेकर श्रम विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में हादसे की दो बड़ी संभावित वजहों का खुलासा हुआ है, साथ ही फैक्ट्री प्रबंधन की गंभीर लापरवाहियां भी उजागर हुई हैं। श्रम मंत्री प्रह्लाद पटेल ने बताया कि तकनीकी जांच के अनुसार हादसे के पीछे मैग्नीशियम पाउडर की केमिकल रिएक्शन मुख्य कारण हो सकती है। आशंका है कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान मैग्नीशियम पानी के संपर्क में आ गया, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ। दूसरी संभावना यह जताई गई है कि बारूद की हैंडलिंग के दौरान स्टैटिक चार्ज बना और उससे ‘सेल्फ इग्निशन’ यानी स्वतः आग लग गई। गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे हुए इस विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया था। धमाके के बाद फैक्ट्री से लगातार पटाखे फूटने की आवाजें आती रहीं और कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। जांच रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि फैक्ट्री का निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था, लेकिन वहां पटाखा निर्माण शुरू कर दिया गया था। यानी जिस समय सुरक्षा व्यवस्था और ढांचे की टेस्टिंग होनी चाहिए थी, उस समय बारूद और विस्फोटक सामग्री के बीच मजदूरों से काम कराया जा रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, फैक्ट्री प्रबंधन के पास जिला कलेक्टर द्वारा जारी विस्फोटक लाइसेंस तो था, लेकिन फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी पंजीकरण और अन्य वैधानिक मंजूरियां नहीं ली गई थीं। बिना सुरक्षा मानकों और पर्याप्त इंतजामों के इस खतरनाक यूनिट का संचालन किया जा रहा था। श्रम विभाग ने फैक्ट्री में कई गंभीर खामियां पाई हैं, जिनमें अग्निशमन व्यवस्था का अभाव, इमरजेंसी प्लान तैयार न करना, श्रमिकों की हाजिरी और रिकॉर्ड न रखना, तथा मजदूरों को केमिकल सुरक्षा संबंधी जानकारी न देना शामिल है। इन सभी मामलों में फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। कई धाराओं के तहत 2 साल से लेकर 7 साल तक की सजा और लाखों रुपए के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी हादसे को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी और हादसे के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

देवास फैक्ट्री विस्फोट: साथियों ने कहा- बिलिंग रूम में आखिरी बार दिखे थे दोनों मजदूर

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के देवास जिले में टोंककलां स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। हादसे में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, वहीं अब दो और मजदूरों के लापता होने की खबर सामने आने से परिजनों और साथी मजदूरों की चिंता बढ़ गई है। घायल मजदूरों का कहना है कि ब्लास्ट के बाद से उनके साथी राजू और बाबुल का कोई पता नहीं चल पाया है। दोनों बिहार के अरहरिया जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं और कुछ महीने पहले ही रोज़गार की तलाश में देवास आए थे। देवास जिला अस्पताल में भर्ती घायल मजदूर शशि कुमार ने बताया कि हादसे से पहले उनकी दोनों साथियों से खाना खाते समय बातचीत हुई थी। इसके बाद वे आखिरी बार फैक्ट्री के बिलिंग रूम के पास दिखाई दिए। धमाके के बाद से दोनों न तो अस्पतालों में मिले और न ही किसी से संपर्क हो पाया। साथी मजदूरों को आशंका है कि कहीं दोनों भी हादसे का शिकार तो नहीं हो गए। मजदूर लगातार प्रशासन से घटना स्थल पर जाकर तलाश करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अस्पतालों, आसपास के इलाकों और रिश्तेदारों से संपर्क कर लिया, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं मिला। इस दर्दनाक हादसे में अब तक जिन मजदूरों की मौत हुई है, उनमें बिहार के सुमित, धीरज, अमर और गुड्डू शामिल हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी सनी की भी जान गई है। मृतकों के शव देर रात परिजनों को सौंप दिए गए। वहीं हादसे में घायल कई मजदूरों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। देवास जिला अस्पताल में 11 लोग भर्ती हैं, जबकि गंभीर घायलों को निजी अस्पतालों में रेफर किया गया है। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री पूरी तरह तैयार होने से पहले ही वहां पटाखा निर्माण शुरू कर दिया गया था। श्रम विभाग की रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि मैग्नीशियम पाउडर के पानी के संपर्क में आने या स्टैटिक चार्ज बनने से विस्फोट हुआ होगा। रिपोर्ट में सुरक्षा नियमों की भारी अनदेखी, फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी लाइसेंस का अभाव, अग्निशमन व्यवस्था में कमी और इमरजेंसी प्लान न होने जैसी गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। इन मामलों में फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

शाजापुर में गोदाम से 12 इलेक्ट्रिक पोल चोरी, ठेकेदार ने दर्ज कराई शिकायत

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के लालघाटी क्षेत्र में चोरी की एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जहां एक इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर के गोदाम से 12 लोहे के इलेक्ट्रिक पोल गायब हो गए। पीड़ित हेमकांत शर्मा, जो ग्वालियर के निवासी हैं और वर्तमान में शाजापुर में कार्यरत हैं, ने बताया कि उन्होंने ये सिल्वर रंग के लोहे के पोल निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के लिए गोदाम में सुरक्षित रखे थे। गुरुवार रात करीब 8 बजे तक सभी पोल मौजूद थे, लेकिन अगले दिन शुक्रवार सुबह 9:30 बजे जब वे गोदाम पहुंचे तो पूरा सामान गायब मिला। घटना के बाद आसपास के क्षेत्र में तलाश की गई, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कॉन्ट्रेक्टर ने आशंका जताई है कि यह चोरी किसी योजनाबद्ध तरीके से की गई है, क्योंकि पोल भारी और निर्माण कार्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामान थे। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित बिल और दस्तावेज इंजीनियर से लेकर जल्द पुलिस को उपलब्ध कराए जाएंगे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज तथा संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जा रही है।

साहसी सिनेमा की नई पहचान बनी ‘आखिरी सवाल’, तीखे सवालों से झकझोर देने वाली दमदार राजनीतिक ड्रामा फिल्म

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा में कभी-कभी कुछ ऐसी फिल्में सामने आती हैं जो केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहतीं, बल्कि समाज, इतिहास और राजनीति पर गहरे सवाल खड़े कर देती हैं। ऐसी ही एक फिल्म है ‘आखिरी सवाल’, जिसे एक साहसी राजनीतिक ड्रामा के रूप में देखा जा रहा है। यह फिल्म अपने तीखे विषयों, बेबाक प्रस्तुति और भावनात्मक गहराई के कारण दर्शकों के बीच चर्चा का केंद्र बन गई है। निर्देशक अभिजीत मोहन वरंग और निर्माता निखिल नंदा की यह फिल्म उस श्रेणी में रखी जा रही है, जो सुरक्षित रास्तों से हटकर सिनेमा को एक नई दिशा देने की कोशिश करती है। फिल्म उन विषयों को छूती है, जिन्हें अक्सर संवेदनशील या विवादित मानकर बड़े पर्दे पर सीमित रूप में ही दिखाया जाता है। इसमें ऐतिहासिक घटनाओं, सामाजिक धारणाओं और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े कई गंभीर सवालों को सामने रखा गया है, जो दर्शकों को सहज नहीं रहने देते बल्कि सोचने पर मजबूर करते हैं। फिल्म की कहानी उन मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है जिन पर लंबे समय से समाज में बहस होती रही है। इसमें इतिहास की कुछ प्रमुख घटनाओं और उनसे जुड़े विभिन्न दृष्टिकोणों को भी जगह दी गई है। कहानी का उद्देश्य किसी एक निष्कर्ष को थोपना नहीं, बल्कि दर्शकों को उन सवालों से रूबरू कराना है जिनके जवाब अक्सर अधूरे या विवादित रहे हैं। यही वजह है कि फिल्म को एक साहसी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अभिनय की बात करें तो संजय दत्त ने इस फिल्म में अपने करियर का एक अलग और गंभीर रूप प्रस्तुत किया है। उनका किरदार संयमित, भावनात्मक और भीतर से टूटे हुए व्यक्ति का है, जो अपने अतीत और सच्चाई के बीच उलझा हुआ नजर आता है। उनकी आंखों और संवादों में एक गहरी गंभीरता दिखाई देती है, जो फिल्म को मजबूती प्रदान करती है। इसके साथ ही नमाशी चक्रवर्ती ने भी अपने अभिनय से सभी को प्रभावित किया है। उनकी स्क्रीन उपस्थिति और भावनात्मक अभिव्यक्ति कहानी में एक नई ऊर्जा जोड़ती है। कई दृश्यों में उनका प्रदर्शन दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ता है और यह संकेत देता है कि वह एक उभरते हुए मजबूत कलाकार के रूप में अपनी पहचान बना सकते हैं। फिल्म का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसके संवाद और डिबेट वाले दृश्य हैं, जो बेहद तीव्र और वास्तविक महसूस होते हैं। न्यूजरूम और सार्वजनिक बहसों को जिस तरह से फिल्म में प्रस्तुत किया गया है, वह दर्शकों को सीधे कहानी से जोड़ देता है। ये दृश्य केवल स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं लगते, बल्कि वास्तविक समाज में चल रही विचारधाराओं की टकराहट को भी दर्शाते हैं। दृश्यात्मक रूप से भी फिल्म मजबूत पकड़ बनाए रखती है। हर फ्रेम में तनाव और उद्देश्य स्पष्ट दिखाई देता है। कहानी भले ही जटिल और बहुस्तरीय विषयों पर आधारित हो, लेकिन इसका नैरेटिव दर्शकों को लगातार बांधे रखता है। फिल्म का सबसे बड़ा गुण यह है कि यह उपदेश देने के बजाय सवाल पूछती है और दर्शकों को अपने निष्कर्ष खुद निकालने के लिए प्रेरित करती है। सहायक कलाकारों का प्रदर्शन भी फिल्म को और प्रभावशाली बनाता है, जिससे कहानी की भावनात्मक गहराई और बढ़ जाती है। पूरी फिल्म एक ऐसे संवाद की तरह महसूस होती है, जो समाज को आईना दिखाने का प्रयास करती है।

स्मार्टफोन की सेफ्टी के लिए जरूरी टिप्स: ये 5 चीजें फोन के साथ रखी तो हो सकता है भारी नुकसान

नई दिल्ली। आज के समय में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन छोटी-छोटी लापरवाहियां इसके लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकती हैं। अक्सर लोग अनजाने में फोन के साथ ऐसी चीजें रख लेते हैं जो इसकी स्क्रीन, बैटरी और इंटरनल पार्ट्स को खराब कर सकती हैं। सबसे पहले, चाबियां और सिक्के जैसे धातु के सामान फोन के साथ रखने से स्क्रीन और कैमरा लेंस पर गहरी खरोंच आ सकती है, जिससे फोन की लुक और परफॉर्मेंस दोनों प्रभावित होते हैं। वहीं, मजबूत मैग्नेट वाले डिवाइस या चुंबक फोन के सेंसर्स और कंपास जैसी तकनीक को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, पावर बैंक के साथ फोन को एक ही टाइट जगह पर चार्ज करते समय रखने से ओवरहीटिंग का खतरा बढ़ जाता है, जिससे बैटरी कमजोर हो सकती है या गंभीर मामलों में फटने का रिस्क भी बन सकता है। क्रेडिट और डेबिट कार्ड को फोन के कवर में रखना भी सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि फोन के मैग्नेटिक फील्ड से कार्ड की स्ट्रिप या चिप खराब हो सकती है। वहीं पानी की बोतल या किसी भी तरल पदार्थ के पास फोन रखने से रिसाव होने पर शॉर्ट-सर्किट का खतरा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन को हमेशा अलग और सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए और अच्छे क्वालिटी के केस व स्क्रीन प्रोटेक्टर का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि यह लंबे समय तक सुरक्षित रहे।

गर्मी का प्रचंड वार: शाजापुर में तापमान 45 डिग्री के करीब, लोगों की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में इन दिनों भीषण गर्मी और लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से पड़ रही तेज धूप और गर्म हवाओं ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। शुक्रवार को हालात और गंभीर हो गए, जब सुबह से ही तेज धूप के साथ लू चलने लगी। दोपहर होते-होते शहर के प्रमुख बाजार नई सड़क और चौक बाजार जहां आमतौर पर भीड़ रहती है, वहां पूरी तरह सन्नाटा पसर गया। लोग गर्मी से बचने के लिए घरों में दुबके रहे, जिससे सड़कों पर आवाजाही बेहद कम हो गई। तेज गर्मी से राहत पाने के लिए कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर हरी नेट और अस्थायी शेड लगाए हैं, ताकि थोड़ी ठंडक बनी रहे। वहीं, तेज लू के कारण सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है, जो धूप में सफर करने को मजबूर हैं। लोग अब हेलमेट के साथ-साथ टोपी, गमछा और चश्मे का सहारा ले रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। साथ ही पर्याप्त पानी पीने, हल्का भोजन करने और शरीर को हाइड्रेट रखने की सलाह दी गई है, ताकि लू से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके। ,शुक्रवार को जिले में अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज होने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 27 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि अगले दो दिनों तक राहत की कोई संभावना नहीं है और तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। भीषण गर्मी के चलते प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की है।