महाराष्ट्र में Ola-Uber-Rapido पर संकट, ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश, बाइक टैक्सी नियमों को लेकर बड़ा विवाद

नई दिल्ली। महाराष्ट्र सरकार ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी राइड-हेलिंग कंपनियों की बाइक टैक्सी सेवाओं पर सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने आरोप लगाया है कि ये कंपनियां बिना आवश्यक मंजूरी और नियमों के बाइक टैक्सी सेवाएं चला रही हैं, जिससे मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन हो रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र साइबर विभाग ने IT एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत Google और Apple को नोटिस भेजकर इन ऐप्स को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। परिवहन विभाग का आरोप है कि इन ऐप्स पर चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं में ड्राइवर वेरिफिकेशन, इंश्योरेंस और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम जैसी जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाओं में खामियां पाई गई हैं। हाल ही में हुई कुछ घटनाओं और सुरक्षा चिंताओं के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए। सरकार का यह भी कहना है कि राज्य में बाइक टैक्सी केवल तय नियमों के तहत और ईवी (Electric Vehicle) नीति के अनुसार ही चल सकती है। कंपनियों को जरूरी दस्तावेज और अनुपालन के लिए समय दिया गया था, लेकिन पर्याप्त जवाब न मिलने पर यह सख्त कार्रवाई की गई। हालांकि, फिलहाल Ola, Uber और Rapido के ऐप्स पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और Google Play Store तथा Apple App Store पर उपलब्ध हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर कैब और अन्य सेवाएं भी सामान्य रूप से जारी हैं। विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि Rapido ऐप कुछ समय के लिए ऐप स्टोर से गायब भी हुआ था, हालांकि बाद में यह फिर से उपलब्ध हो गया। अब मामला इस बात पर टिका है कि क्या कंपनियां सरकार की शर्तों को मानकर अपने ऑपरेशन में बदलाव करती हैं या फिर यह विवाद और आगे बढ़ता है। फिलहाल यह मुद्दा राइड-हेलिंग सेक्टर और डिजिटल ट्रांसपोर्ट पॉलिसी के बीच बड़ा टकराव बनता जा रहा है।
जून 2026 से यूपी में प्रीपेड मीटर का नया सिस्टम लागू, SMS-WhatsApp पर मिलेगा बिजली बिल, UPPCL ऐप से आसान पेमेंट

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जून 2026 से प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं को भी अब पोस्टपेड सिस्टम की तरह बिजली बिल जारी किया जाएगा। बिजली विभाग इस नई व्यवस्था को लेकर लगातार उपभोक्ताओं को जागरूक कर रहा है। नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को उनका बिजली बिल SMS और WhatsApp के जरिए प्राप्त होगा। इसके बाद वे आसानी से डिजिटल माध्यमों से भुगतान कर सकेंगे। विभाग का कहना है कि इस सिस्टम का उद्देश्य बिलिंग प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सरल बनाना है। सबसे आसान और सुरक्षित तरीका UPPCL के आधिकारिक ऐप्स को माना जा रहा है। उपभोक्ता UPPCL SMART ऐप, UPPCL Consumer ऐप और PVVNL Smart ऐप के जरिए सीधे अपना बिल देख और जमा कर सकेंगे। विभाग के अनुसार, इन ऐप्स से पेमेंट करने पर राशि तुरंत सर्वर पर अपडेट हो जाती है और किसी अतिरिक्त शुल्क की संभावना भी नहीं रहती। UPPCL SMART ऐप के जरिए पेमेंट करने के लिए उपभोक्ता को ऐप में लॉग इन करना होगा, जहां होम स्क्रीन पर बिल की राशि दिखाई देगी। इसके बाद “Pay Now” पर क्लिक करके कैप्चा भरना होगा और UPI, डेबिट या क्रेडिट कार्ड के जरिए भुगतान पूरा किया जा सकेगा। वहीं UPPCL Consumer ऐप पर उपभोक्ता सीधे “Pay Bill/Recharge” विकल्प पर जाकर अपने अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर या मीटर नंबर दर्ज कर बिल देख और भुगतान कर सकते हैं। भुगतान पूरा होने के बाद डिजिटल रसीद भी उपलब्ध होगी, जिसे सुरक्षित रखना जरूरी है। इसके अलावा PhonePe, BHIM UPI और अन्य थर्ड पार्टी ऐप्स से भी बिजली बिल का भुगतान किया जा सकेगा। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन ऐप्स से भुगतान के बाद अपडेट होने में थोड़ा समय लग सकता है, जबकि आधिकारिक UPPCL ऐप्स से भुगतान अधिक तेज और सुरक्षित माना जाता है। बिजली विभाग का कहना है कि यह नई व्यवस्था डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा प्रदान करेगी।
इंटरनेट की ‘तीसरी आंख’ से कैसे बचाएं अपना डेटा, स्कैमर्स और डेटा लीक से सुरक्षा के 4 सबसे असरदार तरीके

नई दिल्ली। आज के डिजिटल युग में डेटा लीक और ऑनलाइन स्कैम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जरा सी लापरवाही से आपकी निजी जानकारी हैकर्स और साइबर अपराधियों के हाथ लग सकती है, जिसका इस्तेमाल ठगी, अकाउंट हैकिंग और पहचान चोरी जैसे अपराधों में किया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऑनलाइन दुनिया में आपकी हर एक्टिविटी पर नजर रखी जा सकती है, इसलिए डेटा सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है। कुछ स्मार्ट डिजिटल आदतें अपनाकर इन खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे पहले, पुराने मोबाइल या लैपटॉप को बेचने या फेंकने से पहले पूरा डेटा सुरक्षित तरीके से डिलीट करना जरूरी है। इसके लिए फैक्टरी रीसेट करने के साथ-साथ अकाउंट से लॉगआउट करना और जरूरत हो तो सर्टिफाइड ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग सेंटर की मदद लेना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। दूसरा महत्वपूर्ण कदम VPN (Virtual Private Network) का उपयोग है। VPN आपकी इंटरनेट एक्टिविटी को एन्क्रिप्ट कर देता है और एक सुरक्षित टनल के जरिए डेटा ट्रांसफर करता है, जिससे हैकर्स के लिए आपकी जानकारी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। तीसरा, इंटरनेट ट्रैकिंग से बचाव बेहद जरूरी है। कई वेबसाइट्स कुकीज और ट्रैकिंग टूल्स के जरिए आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री, लोकेशन और रुचियों से जुड़ा डेटा इकट्ठा करती हैं। इसे सीमित करने के लिए ब्राउज़र सेटिंग्स में ट्रैकिंग प्रोटेक्शन ऑन रखना और थर्ड पार्टी कुकीज को ब्लॉक करना फायदेमंद होता है। चौथा और सबसे जरूरी उपाय है मजबूत अकाउंट सिक्योरिटी। इसके लिए हर अकाउंट में यूनिक और स्ट्रॉन्ग पासवर्ड का इस्तेमाल करें, पासवर्ड मैनेजर का उपयोग करें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को हमेशा एक्टिव रखें। इसके साथ ही समय-समय पर यह जांचते रहें कि आपके अकाउंट में कोई अनजान डिवाइस लॉगिन तो नहीं कर रहा है। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिजिटल दुनिया में पूरी तरह सुरक्षित रहना संभव नहीं है, लेकिन सही सावधानियों और स्मार्ट आदतों के जरिए आप अपने डेटा को काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं।
AI Kill Switch: इमरजेंसी में एक बटन से बंद हो सकेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्रिटेन और अमेरिका में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव और संभावित खतरों को देखते हुए अब इसे नियंत्रित करने के लिए “किल स्विच” यानी आपातकालीन शटडाउन सिस्टम की मांग तेज हो गई है। ब्रिटेन और अमेरिका में इस दिशा में नीतिगत चर्चा शुरू हो चुकी है। ब्रिटेन में लेबर पार्टी के सांसद एलेक्स सॉबेल समेत 11 अन्य सांसदों ने सरकार को एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें कहा गया है कि गंभीर आपात स्थिति में टेक्नोलॉजी सेक्रेटरी को यह अधिकार होना चाहिए कि वह AI सिस्टम और डेटा सेंटर को तुरंत बंद कर सकें। प्रस्ताव के मुताबिक, अगर AI सिस्टम से मानव जीवन, राष्ट्रीय सुरक्षा या महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को खतरा पैदा होता है, तो उसे “इमरजेंसी स्थिति” माना जाएगा और ऐसे हालात में सिस्टम को तत्काल बंद करने की अनुमति होनी चाहिए। अगर यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो कंपनियों को ऐसे तकनीकी सिस्टम विकसित करने होंगे जिससे सरकारी आदेश पर डेटा सेंटर तुरंत बंद किए जा सकें। इस बीच अमेरिका में भी इसी तरह की चर्चा तेज हो गई है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई नेताओं ने AI को नियंत्रित करने के लिए “किल स्विच” की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि AI के तेजी से बढ़ते विकास को बिना नियंत्रण छोड़ना भविष्य के लिए खतरा बन सकता है। ट्रंप और कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि AI पर पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए तो यह स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है कि मानवता के अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा हो जाए। हाल के समय में AI तकनीक बेहद तेजी से विकसित हुई है। कुछ नए मॉडल्स को लेकर यह भी दावा किया गया है कि वे सिस्टम और सॉफ्टवेयर तक को प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण बड़ी टेक कंपनियां फिलहाल इन्हें सीमित या नियंत्रित तरीके से ही इस्तेमाल कर रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, AI के बढ़ते प्रभाव के बीच “सेफ्टी बैलेंस” सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। सरकारें अब इस दिशा में कानून और तकनीकी नियंत्रण दोनों पर काम कर रही हैं, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।
प्यार, परिवार और सरप्राइज: कटरीना कैफ ने विक्की के जन्मदिन पर शेयर की खास तस्वीरें

नई दिल्ली । बॉलीवुड के चर्चित कपल कटरीना कैफ और विक्की कौशल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है विक्की कौशल का जन्मदिन, जिसे कटरीना कैफ ने बेहद खास और भावनात्मक अंदाज में मनाया। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए इस पोस्ट ने फैंस का ध्यान खींच लिया है, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें उनके बेटे विहान की पहली झलक भी देखने को मिली। कटरीना कैफ ने अपने पोस्ट में लिखा कि पिछले कुछ सालों में उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है और अब वह और विक्की अपने बेटे के साथ एक नई और खूबसूरत जिंदगी जी रहे हैं। उन्होंने भावुक शब्दों में बताया कि यह समय उनके लिए बेहद खास है और वह इस परिवारिक खुशी के लिए खुद को बेहद भाग्यशाली महसूस करती हैं। कटरीना ने विक्की को अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा बताते हुए कहा कि वह उनके जीवन में प्यार, रोशनी और ताकत का स्रोत हैं। पोस्ट में शेयर की गई तस्वीरों में कपल बेहद खुश नजर आया। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस तस्वीर की हो रही है, जिसमें दोनों अपने बेटे विहान के साथ दिखाई दिए। हालांकि कपल ने अपने बेटे का चेहरा पूरी तरह से सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन फिर भी यह झलक फैंस के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं रही। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है और लोगों में इसे देखने को लेकर उत्साह साफ नजर आ रहा है। कटरीना ने अपने पोस्ट में विक्की कौशल की खूबियों का भी मजेदार अंदाज में जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि विक्की अब कई विषयों के जानकार बन चुके हैं और उनके हर सवाल का धैर्यपूर्वक जवाब देते हैं। कटरीना के मुताबिक, यह छोटी-छोटी बातें ही उनके रिश्ते को और मजबूत बनाती हैं और उन्हें विक्की से और ज्यादा जुड़ाव महसूस होता है। उन्होंने अपने पोस्ट के अंत में एक हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी लिखा कि वह चाहती हैं कि विक्की को सुबह की शुरुआत में थोड़ी शांति और आराम मिले, ताकि वह दिन की शुरुआत सुकून के साथ कर सकें। उनका यह मजाकिया संदेश भी फैंस को काफी पसंद आया और सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया जा रहा है। विक्की कौशल और कटरीना कैफ ने दिसंबर 2021 में राजस्थान में शाही अंदाज में शादी की थी। शादी के बाद से ही दोनों बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय और पसंदीदा जोड़ियों में शामिल हैं। पिछले साल उनके बेटे विहान के जन्म ने उनके जीवन में नई खुशियां जोड़ दीं और अब यह परिवार अपने निजी और खूबसूरत पलों को नए अंदाज में जी रहा है। विक्की के जन्मदिन पर कटरीना का यह प्यार भरा संदेश न सिर्फ उनके रिश्ते की मजबूती को दिखाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि स्टारडम के बीच भी वे एक सामान्य और भावनात्मक पारिवारिक जीवन को प्राथमिकता देते हैं।
बिना NOC चल रहा था प्लांट? प्रदूषण और फायर सेफ्टी पर उठे सवाल

जबलपुर । जबलपुर के गोसलपुर क्षेत्र में स्थित इको फ्यूल बायोमास प्लांट में शुक्रवार शाम लगी भीषण आग को 48 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो नुकसान का अंतिम पंचनामा तैयार हुआ है और न ही किसी की स्पष्ट जिम्मेदारी तय हो सकी है। यह हादसा अब केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता नजर आ रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्लांट के संचालन के लिए आवश्यक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और फायर सेफ्टी एनओसी तक मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद प्लांट लंबे समय से संचालित हो रहा था, जिससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी का बड़ा मामला उजागर हुआ है। घटना उस समय हुई जब गेहूं की नरवाई (फसल अवशेष) के बड़े-बड़े बंडल खुले मैदान में रखे थे। अचानक लगी आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि आग पास स्थित इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप और बीपीसीएल के गैस गोदाम तक नहीं पहुंची, वरना स्थिति और भी भयावह हो सकती थी। प्रशासन की तत्परता के बावजूद घटना के 24 घंटे बाद तक नरवाई के ढेरों में धुआं और सुलगन जारी रही। दमकल दल लगातार कूलिंग में जुटे रहे, जबकि अधिकारी मौके पर निरीक्षण करते रहे। जानकारी के अनुसार, प्लांट का संचालन ग्राम पंचायत से सामान्य एनओसी लेकर शुरू किया गया था, जबकि बड़े औद्योगिक संचालन के लिए जरूरी अनुमति प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि पहले भी यहां आग लगने की छोटी घटनाएं हो चुकी थीं, लेकिन सुरक्षा उपायों में सुधार नहीं किया गया। करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से बने इस प्लांट के लिए बैंक से ऋण भी लिया गया था और शासन से सब्सिडी मिलने की बात भी सामने आई है। ऐसे में बिना मानक सुरक्षा व्यवस्था के इतने संवेदनशील प्लांट का संचालन अब कई सवाल खड़े कर रहा है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि इतने बड़े औद्योगिक यूनिट के पास स्थित पेट्रोल पंप और गैस गोदाम जैसे हाई-रिस्क क्षेत्र में भी किसी भी स्तर पर आपत्ति दर्ज नहीं की गई। फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है, लेकिन दो दिन बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर आग कैसे लगी और इसके लिए वास्तविक जिम्मेदार कौन है।
महिमा चौधरी ने अजय देवगन को बताया सच्चा इंसान, हादसे के वक्त की मदद का किया खुलासा

नई दिल्ली । अभिनेत्री Mahima Chaudhry ने अपने करियर के शुरुआती दौर में हुए एक दर्दनाक हादसे को फिर से याद करते हुए उस समय की भावनात्मक परिस्थितियों और सहयोग को साझा किया है, जिसमें उन्होंने विशेष रूप से Ajay Devgn को न केवल एक बेहतरीन अभिनेता बल्कि एक बेहद संवेदनशील और मददगार इंसान के रूप में याद किया। महिमा के अनुसार यह घटना वर्ष 1999 के दौरान फिल्म ‘दिल क्या करे’ की शूटिंग के समय बेंगलुरु में हुई थी, जब उनकी कार एक ट्रक से टकरा गई थी और इस दुर्घटना में उन्हें चेहरे पर गंभीर चोटें आई थीं, यहां तक कि कांच के कई टुकड़े उनके चेहरे में धंस गए थे, जिससे स्थिति काफी नाजुक हो गई थी और उस समय उनके करियर और भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता का माहौल बन गया था। इस फिल्म में उनके साथ Kajol और Chandrachur Singh भी प्रमुख भूमिकाओं में थे, जबकि फिल्म के निर्माण से जुड़े Veeru Devgan और Veena Devgan का भी योगदान रहा, और निर्देशन की जिम्मेदारी Prakash Jha ने संभाली थी। महिमा चौधरी ने एक टीवी कार्यक्रम में बातचीत के दौरान बताया कि उस कठिन समय में सबसे बड़ी चिंता उन्हें अपने करियर को लेकर थी, क्योंकि उन्हें डर था कि अगर इस दुर्घटना की खबर सार्वजनिक हो गई तो उनका फिल्मी सफर समाप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि उस समय Ajay Devgn ने न केवल एक प्रोड्यूसर के तौर पर जिम्मेदारी निभाई बल्कि एक इंसान के रूप में भी उनका पूरा साथ दिया और उन्हें सही इलाज के लिए अच्छे प्लास्टिक सर्जन तक पहुंचाया। महिमा के अनुसार अजय ने उन्हें हिम्मत दी और सही दिशा में इलाज कराने पर जोर दिया, जबकि अन्य लोग केवल औपचारिक सलाह देकर आगे बढ़ सकते थे, लेकिन अजय ने व्यक्तिगत रूप से उनकी मदद की और पूरे इलाज की प्रक्रिया में सहयोग बनाए रखा। महिमा ने यह भी कहा कि उन्होंने और फिल्म के निर्देशक ने उनकी प्राइवेसी का पूरा सम्मान किया और इस दुर्घटना की खबर को बाहर नहीं आने दिया, ताकि उनके करियर पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। इस घटना ने महिमा के जीवन में गहरा प्रभाव छोड़ा और उन्होंने इसे हमेशा अपने जीवन का एक कठिन लेकिन महत्वपूर्ण अनुभव माना है। आज भी वह उस समय को याद करते हुए अजय देवगन की संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार को सराहती हैं और उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखती हैं जो सिर्फ पर्दे पर ही नहीं बल्कि वास्तविक जीवन में भी जिम्मेदारी और इंसानियत का उदाहरण पेश करते हैं।
वैश्विक अनिश्चितता का असर: भारतीय शेयर बाजार की टॉप कंपनियों की संपत्ति में तेज गिरावट..

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह निवेशकों के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा माहौल देखने को मिला, जहां लगातार बिकवाली के दबाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण देश की शीर्ष कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, देश की टॉप 10 कंपनियों में से नौ के मार्केटकैप में कमी आने के चलते कुल मिलाकर 3.12 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति बाजार से कम हो गई, जो निवेशकों की धारणा में आए बदलाव और वैश्विक संकेतों के कमजोर होने का परिणाम माना जा रहा है। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे बाजार में नकारात्मक रुझान और गहरा गया। 11 से 15 मई के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स में लगभग 2,090 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी 532 अंकों की कमजोरी के साथ नीचे आ गया, जिससे पूरे इक्विटी बाजार पर दबाव स्पष्ट दिखाई दिया। इस दौरान केवल एक ही कंपनी ऐसी रही जिसने बाजार में सकारात्मक प्रदर्शन दर्ज किया, जबकि बाकी सभी प्रमुख कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट देखने को मिली। भारती एयरटेल ने इस कठिन माहौल में भी मजबूती दिखाई और इसके मार्केटकैप में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह निवेशकों के बीच एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरी। दूसरी ओर, बैंकिंग और आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस के बाजार मूल्यांकन में भारी गिरावट देखी गई, जिसने पूरे बाजार की दिशा को प्रभावित किया। वित्तीय क्षेत्र में आई कमजोरी का मुख्य कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये पर बने दबाव को माना जा रहा है, जिससे जोखिम लेने की क्षमता में कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार से पूंजी निकालनी शुरू कर दी, जिसका सीधा असर बड़े और मिडकैप शेयरों पर पड़ा है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक संकेतकों में कमजोरी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। आने वाला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे जारी होने वाले हैं, जो बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार पर असर डाल सकती हैं। निवेशकों की नजर अब आर्थिक आंकड़ों और कॉर्पोरेट नतीजों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि बाजार में स्थिरता लौटेगी या उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा।
वैश्विक सहयोग की दिशा में बड़ा कदम: भारत–नीदरलैंड ने बढ़ाई रणनीतिक साझेदारी और किए कई MoU

नई दिल्ली । भारत और यूरोप के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है, जब भारत और नीदरलैंड ने अपने द्विपक्षीय रिश्तों को और अधिक मजबूत और संरचनात्मक बनाने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लिया। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने पर सहमति व्यक्त की, जिससे भविष्य में सहयोग के नए आयाम खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस अवसर पर दोनों पक्षों ने संयुक्त बयान जारी करते हुए व्यापार, रक्षा, तकनीक, शिक्षा, जल प्रबंधन, ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और आपसी समझ का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है, जिसमें वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने की रणनीति भी शामिल है। इस बैठक के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच व्यापक स्तर पर वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही नीदरलैंड के शाही परिवार के साथ हुई मुलाकातों ने इस दौरे को और भी विशेष बना दिया, जहां आपसी संबंधों को सांस्कृतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी मजबूती देने पर जोर दिया गया। इस बातचीत में दोनों देशों ने स्वीकार किया कि वैश्विक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव हो रहा है और ऐसे समय में मजबूत साझेदारी अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनका दायरा काफी व्यापक रहा। इनमें सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। इसके अलावा रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर भी दोनों देशों ने अपनी साझेदारी को मजबूत करने का निर्णय लिया है, जिससे समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों को मजबूती मिलेगी। जल प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने संयुक्त रूप से काम करने की योजना बनाई है, जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा परिवर्तन जैसे विषय प्रमुख हैं। कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में भी सहयोग को एक नई दिशा दी गई है, जिसमें प्रशिक्षण और तकनीकी आदान-प्रदान के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी कई विश्वविद्यालयों और संस्थानों के बीच समझौते हुए हैं, जिससे छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है, विशेष रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में। कुल मिलाकर यह दौरा और उसके दौरान हुए समझौते भारत और नीदरलैंड के बीच संबंधों को एक नई दिशा और गति देने वाले साबित हो सकते हैं। यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें सहयोग, नवाचार और साझा जिम्मेदारी की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
तेजस प्रोजेक्ट में नई हलचल: टली समीक्षा बैठक, अब जून में तय हो सकती है डिलीवरी टाइमलाइन

नई दिल्ली । भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे तेजस मार्क 1ए फाइटर जेट प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर समयसीमा में बदलाव की स्थिति बन गई है। भारतीय वायुसेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच लंबे समय से चल रहे इस प्रोजेक्ट की डिलीवरी को लेकर अब निगाहें आगामी जून में होने वाली रिव्यू मीटिंग पर टिक गई हैं। यह बैठक पहले मई में प्रस्तावित थी, लेकिन तकनीकी और मूल्यांकन संबंधी कारणों से इसे आगे बढ़ा दिया गया है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इसी बैठक में विमान की डिलीवरी की संभावित तारीख पर अंतिम दिशा मिल सकती है। तेजस मार्क 1ए के लिए भारतीय वायुसेना ने कुल 180 विमानों का बड़ा ऑर्डर दिया है, जिसका उद्देश्य लड़ाकू स्क्वॉड्रन की कमी को पूरा करना है। मौजूदा समय में वायुसेना के पास आवश्यक संख्या से कम स्क्वॉड्रन हैं, जिसके चलते यह प्रोजेक्ट रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि अब तक एक भी विमान की औपचारिक डिलीवरी नहीं हो पाई है, जिससे प्रक्रिया की गति पर सवाल उठते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, रडार प्रदर्शन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और कुछ अन्य तकनीकी पहलुओं में सुधार की आवश्यकता के कारण पिछले मूल्यांकन चरणों में देरी हुई। इन बिंदुओं पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड लगातार काम कर रहा है और कई तकनीकी परीक्षण भी पूरे किए जा चुके हैं। बताया जा रहा है कि कुछ विमान पहले से तैयार हैं और उनका परीक्षण भी विभिन्न चरणों में किया गया है, लेकिन वायुसेना की सख्त परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार अंतिम मंजूरी अभी बाकी है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विस्तृत तकनीकी परीक्षण और ऑपरेशनल क्वालिटी जांच भी शामिल है। वायुसेना किसी भी तरह की समझौता आधारित डिलीवरी के पक्ष में नहीं है और सभी आवश्यक मानकों को पूरा करने के बाद ही विमान को बेड़े में शामिल किया जाएगा। इसी वजह से समीक्षा बैठक का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि इसमें सभी लंबित तकनीकी मुद्दों पर अंतिम चर्चा होने की संभावना है। इस परियोजना में देरी का एक बड़ा कारण इंजन सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां भी रही हैं। अब धीरे-धीरे इंजन उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे उत्पादन प्रक्रिया में गति आने की उम्मीद है। इसके अलावा प्रोजेक्ट के अन्य वेरिएंट्स जैसे उन्नत संस्करण और ट्रेनर एयरक्राफ्ट पर भी काम जारी है, जो भविष्य में वायुसेना की ताकत को और मजबूत करेंगे। वायुसेना की दीर्घकालिक योजना के तहत लड़ाकू स्क्वॉड्रन की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसी भी सुरक्षा चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। तेजस मार्क 1ए इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन इसकी डिलीवरी में लगातार हो रही देरी ने रणनीतिक योजना को कुछ हद तक प्रभावित किया है। अब सभी की निगाहें जून में होने वाली रिव्यू मीटिंग पर हैं, जहां यह तय किया जा सकता है कि तकनीकी मानकों की स्थिति क्या है और पहली डिलीवरी कब संभव होगी। यदि सभी आवश्यक शर्तें पूरी हो जाती हैं तो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है, अन्यथा इसमें और समय लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।