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नर्मदापुरम में चोरी का तांडव: शराब दुकान में धावा, तवा पुल से माल चोरी में पूर्व कर्मचारी पकड़ा गया

मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में चोरी की दो अलग-अलग घटनाओं ने पुलिस की गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां सोहागपुर में स्थित शराब दुकान में चोरों ने टीन उखाड़कर अंदर घुसकर नकदी और शराब पर हाथ साफ किया, वहीं दूसरी ओर माखननगर क्षेत्र में निर्माणाधीन तवा पुल से सरिए चोरी के मामले में पुलिस ने एक पूर्व कर्मचारी और कबाड़ी को गिरफ्तार किया है। पहली घटना सोहागपुर शहर की है, जहां मुख्य मार्ग पर स्थित शराब दुकान को चोरों ने निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि चोरों ने दुकान की छत का टीन उखाड़कर अंदर प्रवेश किया और गल्ले में रखे लगभग 25 हजार रुपए नकद तथा शराब की कई बोतलें चुरा लीं। यह वारदात पूरी तरह से सुनियोजित लग रही है क्योंकि चोरों ने बिना किसी को भनक लगे बड़ी आसानी से घटना को अंजाम दिया। अगली सुबह जब सेल्समैन दुकान खोलने पहुंचे तो उन्हें ताला टूटा हुआ मिला, जिसके बाद पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेन रोड पर स्थित दुकान में हुई इस तरह की वारदात ने रात्रिकालीन पुलिस गश्त की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी घटना माखननगर थाना क्षेत्र की है, जहां निर्माणाधीन तवा पुल से सरिए चोरी का मामला सामने आया। इस मामले में निर्माण कंपनी के इंजीनियर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि लगातार सरिए गायब हो रहे हैं। जांच के दौरान शक की सुई एक पूर्व कर्मचारी बैनी प्रसाद उर्फ राजा कहार पर गई, जिसने पहले इसी निर्माण कार्य में मजदूरी की थी और कुछ समय पहले ही नौकरी छोड़ दी थी। पुलिस जांच में सामने आया कि बैनी प्रसाद ने अपने परिचित कबाड़ी अंशुल साहू के साथ मिलकर इस चोरी की योजना बनाई थी। जानकारी के अनुसार, 16 मई की रात दोनों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर ऑटो की मदद से सरिए लादे और उन्हें कबाड़ी को बेच दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चोरी किए गए सरिए बरामद कर लिए और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों मामलों में जांच जारी है और सोहागपुर की शराब दुकान में हुई चोरी के आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय मुखबिरों की मदद से आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण स्थलों की निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि इस तरह की वारदातों पर अंकुश लगाया जा सके और स्थानीय व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

एमपी में सड़क सुरक्षा पर सख्ती, सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने 48 घंटे में गड्ढे भरने के दिए निर्देश

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सहित देशभर में सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। कमेटी ने कहा है कि सड़कों पर बने गड्ढों, खुले नालों और जलभराव वाले खतरनाक स्थानों को गंभीरता से लिया जाए और ऐसी जगहों पर तत्काल सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। निर्देशों के अनुसार, किसी भी गड्ढे या सड़क खामी की सूचना मिलने के बाद 48 घंटे के भीतर उसकी मरम्मत करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही खुले मैनहोल, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों में मजबूत बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टिव टेप और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करनी होगी, ताकि रात के समय दुर्घटनाओं को रोका जा सके। कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार ही किए जाएं। लापरवाही बरतने वाले राज्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दो महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जिला सड़क सुरक्षा समितियां नियमित ऑडिट करें और पिछले पांच वर्षों में गड्ढों और खराब सड़कों के कारण हुए हादसों का पूरा डेटा तैयार करें। इसमें मौतों और घायलों की जानकारी भी शामिल करने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने अपने पत्र में कहा है कि खराब सड़कें, बिना रोशनी वाले जलभराव क्षेत्र और खुले नाले लगातार जानलेवा हादसों का कारण बन रहे हैं, जिन्हें तुरंत सुधारा जाना जरूरी है। इससे पहले भी वर्ष 2018 में सड़क सुरक्षा सुधार को लेकर इसी तरह के निर्देश जारी किए गए थे।

हाईलिंक सिटी बायपास पर कहर: भीषण हादसे में दो बच्चों सहित मां की मौत, पिता गंभीर

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। हाईलिंक सिटी बायपास पर हुए इस भीषण हादसे में एक परिवार की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं, जब तेज रफ्तार टैंकर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में मां और उनके दो मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पिता गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में उनका इलाज जारी है। जानकारी के अनुसार अशोक अपनी पत्नी अनीता और दो छोटे बच्चों के साथ बाइक से अपने गांव की ओर जा रहे थे। परिवार सामान्य यात्रा पर था और किसी को अंदेशा नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। जैसे ही वे हाईलिंक सिटी बायपास के पास पहुंचे, उसी समय एक तेज रफ्तार टैंकर ने अचानक उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार परिवार सड़क पर गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे का दृश्य बेहद भयावह था। अनीता और उनके दो छोटे बच्चे—दो वर्षीय बेटी संतोषी और मात्र एक वर्ष के बेटे रोहन—ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग भी घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी और तीनों की जान नहीं बचाई जा सकी। दुर्घटना में परिवार के मुखिया अशोक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत नाजुक बनी हुई है और उन्हें गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया है। इस हादसे ने एक ही पल में पूरे परिवार को उजाड़ दिया है, जिससे स्थानीय लोग भी गहरे सदमे में हैं। घटना के बाद टैंकर चालक मौके पर वाहन छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही फरार चालक की तलाश भी तेज कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि हादसे के समय टैंकर की गति कितनी थी और क्या चालक की लापरवाही इस दुर्घटना का मुख्य कारण थी। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। परिवार की एक छोटी सी यात्रा जिस तरह एक भयावह त्रासदी में बदल गई, उसने पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

भोपाल में आज कला, संस्कृति और विज्ञान का संगम, बाल फिल्म समारोह से लेकर एस्ट्रो नाइट तक कई आयोजन

भोपाल । भोपाल में रविवार को संस्कृति, कला और विज्ञान से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बाल फिल्म समारोह से लेकर एस्ट्रो नाइट तक शामिल हैं। शहर के अलग-अलग हिस्सों में सुबह से ही गतिविधियां शुरू हो गई हैं और लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। भारत भवन में शाम 6:30 बजे बाल फिल्म समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बच्चों और परिवारों के लिए विशेष फिल्मों का प्रदर्शन होगा। आयोजकों के अनुसार शहर के कई स्कूलों के छात्र भी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं, जिससे बच्चों को सिनेमा और सामाजिक संदेशों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं मानव संग्रहालय की पहाड़ी पर शाम 6 बजे से एस्ट्रो नाइट का आयोजन किया जाएगा। यहां दूरबीनों की मदद से लोगों को आकाशीय घटनाओं, ग्रहों और तारों की जानकारी दी जाएगी। मौसम साफ रहने पर चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों के अवलोकन की भी व्यवस्था रहेगी, जिससे विज्ञान के प्रति लोगों की रुचि बढ़ेगी। इसी के साथ संग्रहालय परिसरों में भी दिनभर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। दुष्टांत संग्रहालय में “विभाजित विश्व को एक करते संग्रहालय” विषय पर विशेष सत्र दोपहर 12 बजे से शुरू हुआ, जबकि मानव संग्रहालय में ‘माह का प्रदर्श’ कार्यक्रम भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जनजातीय संग्रहालय की लिखन्दरा दीर्घा में 73 शलाका चित्रों की प्रदर्शनी भी कला प्रेमियों और छात्रों को आकर्षित कर रही है। उधर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिन भी व्यस्त कार्यक्रमों से भरा रहेगा। सुबह 9:30 बजे वे समत्व भवन में मंत्रियों के साथ वन-टू-वन समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें विभागीय कार्यों और योजनाओं की प्रगति पर चर्चा होगी। इसके बाद वे अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं प्रशासन संस्थान में नव नियुक्त निगम-मंडल अध्यक्षों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होंगे। दोपहर बाद मुख्यमंत्री भोपाल से रायपुर और फिर जगदलपुर के लिए रवाना होंगे, जहां वे मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे, जिसमें मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। भोपाल में मंत्रियों की लगातार चल रही समीक्षा बैठकों को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज है। सूत्रों के अनुसार सरकार और संगठन दोनों स्तर पर कामकाज का फीडबैक लिया जा रहा है और आने वाले समय में प्रशासनिक व राजनीतिक फैसलों में तेजी देखने को मिल सकती है।

इंजीनियरिंग छात्रों की शर्मनाक हरकत: पार्टी के बाद हॉस्टल में जमकर तोड़फोड़, प्रशासन सख्त

मध्‍य प्रदेश/इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में फाइनल ईयर छात्रों की कथित हरकतों ने पूरे शैक्षणिक माहौल को सवालों के घेरे में ला दिया है। कोर्स पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक पार्टी उस समय विवादों में आ गई जब कुछ छात्रों ने हॉस्टल परिसर में जमकर हंगामा और तोड़फोड़ कर दी। इस घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए छात्रों के रिजल्ट रोकने और प्लेसमेंट प्रक्रिया को होल्ड करने का निर्णय लिया है। जानकारी के अनुसार रामानुजन हॉस्टल में बीटेक फाइनल ईयर के छात्रों द्वारा पार्टी का आयोजन किया गया था। शुरुआत में यह आयोजन सामान्य जश्न के रूप में देखा गया, जिसमें संगीत, नृत्य और उत्सव का माहौल था। लेकिन देर रात तक चले इस कार्यक्रम ने धीरे-धीरे उग्र रूप ले लिया। आरोप है कि इस दौरान कुछ छात्रों ने नशे की हालत में हॉस्टल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो फुटेज के अनुसार, छात्रों ने हॉस्टल के फर्नीचर, खिड़कियों के शीशे और पानी के स्टोरेज टैंक तक को क्षतिग्रस्त कर दिया। कई जगहों पर कुर्सियां और टेबल टूटे हुए पाए गए, जबकि परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यह उत्पात देर रात से लेकर तड़के लगभग चार बजे तक चलता रहा, जिससे हॉस्टल प्रशासन को स्थिति संभालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। घटना के बाद जब विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी जानकारी मिली तो तुरंत जांच के आदेश दिए गए। आईईटी निदेशक ने मौके पर पहुंचकर हॉस्टल का निरीक्षण किया, जहां व्यापक स्तर पर नुकसान के संकेत मिले। कई कमरों की खिड़कियां टूटी हुई पाई गईं और परिसर में पार्टी से जुड़ी सामग्री जैसे डीजे उपकरण और सजावट के सामान भी बिखरे हुए मिले। प्रशासन का कहना है कि यह घटना न केवल अनुशासनहीनता का गंभीर उदाहरण है बल्कि शैक्षणिक संस्थान की मर्यादा को भी ठेस पहुंचाने वाली है। इसी के चलते प्रारंभिक कार्रवाई के तहत छात्रों के रिजल्ट रोकने और प्लेसमेंट प्रक्रिया को अस्थायी रूप से होल्ड करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही शासकीय संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए जुर्माना लगाने की भी तैयारी की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की पूरी जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही छात्रों के अभिभावकों को भी इस घटना की जानकारी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि स्थिति की गंभीरता को समझा जा सके। इस घटना ने एक बार फिर कॉलेज परिसरों में अनुशासन, नशे के प्रभाव और जिम्मेदार व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर छात्र अपने शैक्षणिक जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव पर हैं, वहीं इस तरह की घटनाएं उनके भविष्य पर भी गहरा असर डाल सकती हैं। प्रशासन अब पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है और आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।

भोपाल में निगम-मंडल पदाधिकारियों की विशेष ट्रेनिंग, CM मोहन यादव देंगे जिम्मेदारियों का पाठ

भोपाल। भोपाल में हाल ही में निगम, मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में नियुक्त किए गए अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के लिए सोमवार को एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम राजधानी स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में सुबह 9 बजे शुरू होगा, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होकर पदाधिकारियों को संबोधित करेंगे। इस ट्रेनिंग में कुल 63 गैर-सरकारी पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं, जिन्हें मंत्री दर्जा प्राप्त है। कार्यक्रम दोपहर लगभग 2 बजे तक चलेगा, जिसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी प्रशासनिक कामकाज, वित्तीय प्रबंधन, शासन व्यवस्था, अधिकार क्षेत्र और विभागीय समन्वय जैसे विषयों पर प्रस्तुति देंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस प्रशिक्षण का उद्देश्य नए पदाधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों और प्रशासनिक सीमाओं की स्पष्ट समझ देना है, ताकि भविष्य में किसी तरह का टकराव या भ्रम की स्थिति न बने। हाल के दिनों में कुछ निगम-मंडल पदाधिकारियों द्वारा शक्ति प्रदर्शन और रैलियों को लेकर संगठन स्तर पर नाराजगी भी सामने आई थी, जिसके बाद सरकार ने अनुशासन पर विशेष जोर देने का फैसला लिया है। इस ट्रेनिंग को केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन और बेहतर समन्वय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे शासन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

मध्यप्रदेश में सनसनीखेज वारदात: जमीन विवाद में एक दर्जन से अधिक लोगों ने चलाई गोलियां

मध्यप्रदेश के डबरा क्षेत्र से एक गंभीर और सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां जमीनी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और गांव में अचानक गोलियों की गूंज से दहशत फैल गई। पिछोर थाना क्षेत्र के ग्राम सहोना में हुई इस घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है, जहां एक पक्ष के एक दर्जन से अधिक लोगों ने गांव में घुसकर ताबड़तोड़ फायरिंग की। जानकारी के अनुसार यह विवाद लंबे समय से जमीन के स्वामित्व को लेकर चल रहा था, जो समय के साथ इतना बढ़ गया कि स्थिति पूरी तरह हिंसक हो गई। घटना वाले दिन आरोप है कि हथियारों से लैस कई लोग गांव में पहुंचे और बिना किसी चेतावनी के फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई गोलीबारी से गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। फायरिंग के दौरान कई घरों को भी निशाना बनाया गया, जिससे लगभग 10 से 15 मकानों की दीवारों पर गोलियों के निशान देखे गए हैं। इस हमले में कई लोगों को छर्रे लगे हैं, जबकि कुछ लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना में एक राजनीतिक रूप से सक्रिय व्यक्ति भी घायल हुआ है, जिससे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर पूरी तैयारी के साथ गांव में आए थे और उन्होंने सीधे तौर पर निशाना बनाकर गोलियां चलाईं। अचानक हुई इस घटना से गांव में भय का माहौल बन गया है और लोग अपने घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। बच्चों और महिलाओं में विशेष रूप से दहशत का माहौल देखा जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रण में लिया। पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में कुछ नाम सामने आए हैं, जिन पर फायरिंग करने का आरोप लगाया जा रहा है। पुलिस ने इनमें से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की जांच की जा रही है। जमीन विवाद से जुड़ी पुरानी रंजिशों को भी खंगाला जा रहा है ताकि घटना के पीछे की असली वजह सामने आ सके। साथ ही गांव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति दोबारा न बने। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में जमीन विवादों के बढ़ते तनाव और उसके हिंसक रूप लेने की समस्या को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों की मांग है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और क्षेत्र में शांति बहाल हो सके।

भोपाल बहू सुसाइड केस में नया मोड़: रिटायर्ड जज सास ने ट्विशा को बताया ड्रग एडिक्ट, परिजन ने जांच पर उठाए सवाल

भोपाल। भोपाल के कटारा हिल्स स्थित बागमुगालिया एक्सटेंशन में रिटायर्ड महिला जज की बहू ट्विशा शर्मा की आत्महत्या का मामला लगातार उलझता जा रहा है। घटना के छह दिन बाद भी परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया है, जबकि आरोपी सास को मिली जमानत के बाद विवाद और गहरा गया है। इसी बीच केस में नया मोड़ तब आया जब आरोपी सास गिरीबाला सिंह की जमानत याचिका के कुछ हिस्से सामने आए। याचिका में उन्होंने बहू ट्विशा को ड्रग एडिक्ट बताया है और दावा किया है कि उसे नशे की लत थी, नशा न मिलने पर उसके व्यवहार में बदलाव आता था। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि ट्विशा मानसिक रूप से अस्थिर थी और उसका इलाज मनोचिकित्सक व काउंसलर से चल रहा था। जमानत आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्विशा 17 अप्रैल को दिल्ली गई थी और करीब 12 घंटे तक लापता रही थी, लेकिन उसने इस बारे में किसी को जानकारी नहीं दी। इसके अलावा सास की ओर से दावा किया गया है कि बहू को हर महीने उसकी जरूरत के हिसाब से 5 हजार से 50 हजार रुपये तक ऑनलाइन पैसे दिए जाते थे, जिसके ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड भी कोर्ट में पेश किए गए हैं। वहीं परिजनों ने इन दावों को खारिज करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में लापरवाही बरती जा रही है और आरोपी पति समर्थ की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। परिजनों ने एम्स में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने और बाहरी एजेंसी से जांच की मांग की है। पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसीपी मिसरोद के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी है, जिसमें छह सदस्य शामिल हैं। टीम मामले के हर पहलू की जांच कर रही है, जबकि आरोपी पति की तलाश जारी है।

मध्यप्रदेश: राज्यमंत्रियों की भूमिका होगी और मजबूत, अहम विभागों की मिल सकती है अतिरिक्त जिम्मेदारी

मध्यप्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हाल ही में हुई सत्ता और संगठन की समीक्षा बैठकों के बाद यह संकेत सामने आए हैं कि राज्य के राज्यमंत्रियों की भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है। इसके तहत उन्हें केवल सीमित कार्यों तक सीमित रखने के बजाय विभागीय स्तर पर अतिरिक्त अधिकार और जिम्मेदारियां देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज को अधिक गति देना और विभागों में निर्णय प्रक्रिया को तेज करना है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन विभागों में जहां कैबिनेट मंत्रियों के साथ राज्यमंत्री कार्यरत हैं, वहां राज्यमंत्रियों को और अधिक स्वतंत्र जिम्मेदारियां देने की योजना पर चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि इससे विभागीय कामकाज में न केवल तेजी आएगी बल्कि फाइलों के निपटारे में भी सुधार देखने को मिलेगा। बताया जा रहा है कि जिन राज्यमंत्रियों को अब तक सीमित कार्य या केवल समन्वय की भूमिका दी गई थी, उन्हें अब कुछ अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकार दिए जा सकते हैं। इनमें विभागीय निर्णयों में भागीदारी, योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी और कुछ स्तर तक स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति शामिल हो सकती है। इससे राज्यमंत्रियों की भूमिका केवल औपचारिक न रहकर अधिक सक्रिय और प्रभावशाली हो जाएगी। सूत्र यह भी बताते हैं कि स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन और पंचायत जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत राज्यमंत्रियों को इस बदलाव का अधिक लाभ मिल सकता है। इन विभागों में काम का दायरा बड़ा होने के कारण प्रशासनिक दबाव भी अधिक रहता है, ऐसे में अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिलने से कार्यों के बेहतर संचालन की उम्मीद की जा रही है। वर्तमान व्यवस्था में कई राज्यमंत्रियों के पास केवल सीमित कार्यों की जिम्मेदारी है, जबकि कुछ को केवल कर्मचारी स्तर के तबादलों या छोटे प्रशासनिक निर्णयों तक ही सीमित रखा गया है। नए प्रस्ताव के तहत इस संरचना में बदलाव कर उन्हें विभागीय कार्यप्रणाली में अधिक सक्रिय भूमिका देने की तैयारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सरकार की उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसके तहत प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे जहां एक ओर विभागीय कामकाज में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर मंत्रियों और राज्यमंत्रियों के बीच जिम्मेदारियों का बेहतर संतुलन भी स्थापित हो सकेगा। हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है, लेकिन चर्चा के स्तर पर इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इसे लागू किया जाता है तो मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली और अधिक गतिशील और परिणामोन्मुख बन सकती है।

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में खुले, ग्लोबल टेंशन से निवेशकों में घबराहट

कमजोर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसल गया और निफ्टी में भी तेज गिरावट देखी गई। Keywords:stock market, Sensex fall, Nifty down, global market impact, crude oil prices भारतीय शेयर बाजार सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में भारी दबाव के साथ खुला, जहां वैश्विक संकेतों की कमजोरी का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह 75,000 के स्तर के नीचे फिसल गया। निफ्टी भी कमजोर रुख के साथ खुला और इसमें भी महत्वपूर्ण अंकों की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों के बीच सतर्कता और चिंता का माहौल बन गया। सुबह के समय बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए, जिनमें ऑटो, रियल्टी, बैंकिंग, मीडिया और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे सेक्टर शामिल थे। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ हुआ कि दबाव केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर बाजार प्रभावित हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है, जो आयात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय माना जाता है। इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी बाजारों में गिरावट ने भी निवेशकों के भरोसे को कमजोर किया है। एशियाई बाजारों में भी मिलाजुला रुख देखने को मिला, जहां कई प्रमुख बाजार लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए बिकवाली का रास्ता चुना। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया, जहां लगातार बिकवाली का रुझान देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी में आई इस गिरावट ने यह संकेत दिया है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है और वैश्विक घटनाक्रम आने वाले दिनों में भी निवेश धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।