हाईटेंशन लाइन के नीचे शिफ्टिंग का विरोध, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बंगले पहुंचे रहवासी

भोपाल । भोपाल के बावड़ियाकलां स्थित दीपक नगर झुग्गी बस्ती से 35 परिवारों को बाग मुगालिया एक्सटेंशन में शिफ्ट किए जाने का मामला अब विवादों में घिर गया है। नई जगह पर पुनर्वास का विरोध करते हुए सोमवार को स्थानीय रहवासी नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बंगले पहुंचे और उन्हें ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। रहवासियों और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि जिन परिवारों को बाग मुगालिया एक्सटेंशन में बसाया गया है, वह क्षेत्र ग्रीन बेल्ट के अंतर्गत आता है। इसके अलावा वहां से हाईटेंशन बिजली लाइन भी गुजर रही है, जिससे लोगों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ है। पर्यावरणविद् उमाशंकर तिवारी ने कहा कि इस तरह की शिफ्टिंग से न केवल हरियाली को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि वहां रहने वाले परिवारों की जिंदगी भी जोखिम में पड़ सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित और बेहतर स्थान पर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। मामले को लेकर रहवासियों ने भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से भी शिकायत की है। लोगों का कहना है कि बिना उचित सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था के परिवारों को वहां बसाना सही नहीं है। रहवासियों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से अपील की है कि पुनर्वास नीति को मानवीय और सुरक्षित तरीके से लागू किया जाए, ताकि लोगों को मूलभूत सुविधाओं के साथ सुरक्षित आवास मिल सके और शहर की हरियाली भी प्रभावित न हो।
गोल्ड खरीदारी को लेकर बदल रही सोच: सर्वे में सामने आया पीएम मोदी की अपील का प्रभाव

नई दिल्ली । देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने की खरीदारी को लेकर लोगों की सोच में बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए एक सर्वे में यह सामने आया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब आम लोगों के व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा है। बड़ी संख्या में भारतीयों ने अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की बात कही है। कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और अनावश्यक सोने की खरीद पर नियंत्रण रखने की अपील की थी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करना बताया गया था। अब एक सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि लोगों ने इस अपील को गंभीरता से लिया है और अपनी खरीदारी की आदतों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है। सर्वे में शामिल लोगों में से लगभग 61 प्रतिशत ने कहा कि वे अगले एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने का प्रयास करेंगे। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जो नियमित रूप से सोना खरीदते रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के चलते लोग अब खर्च को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं। भारत में सोने की खरीदारी केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और पारिवारिक महत्व भी काफी गहरा है। शादियों, त्योहारों और पारंपरिक आयोजनों में सोना खरीदना लंबे समय से भारतीय समाज का हिस्सा रहा है। इसके बावजूद सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों का सोना खरीदने को लेकर संयम दिखाना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बीते वित्तीय वर्ष में भारत का सोना आयात बिल काफी बढ़ गया। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल के कारण आयात की कुल लागत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। हालांकि आयात की मात्रा में बहुत ज्यादा वृद्धि नहीं हुई, लेकिन ऊंची कीमतों ने विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पैदा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग गैर-जरूरी सोना खरीदने में कमी करते हैं तो इससे देश की आर्थिक स्थिति को कुछ हद तक राहत मिल सकती है। विदेशी मुद्रा की बचत होने से आयात संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और आर्थिक दबाव कम किया जा सकेगा। हालांकि सर्वे में यह भी सामने आया कि सभी लोग अपनी पारंपरिक आदतें बदलने के लिए तैयार नहीं हैं। करीब 19 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे शादियों और पारिवारिक जरूरतों के लिए सोना खरीदना जारी रखेंगे। कई लोगों का यह भी मानना है कि आर्थिक अस्थिरता के दौर में सोना अब भी सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक है। इस सर्वे ने यह साफ कर दिया है कि देश में आर्थिक मुद्दों को लेकर लोगों की जागरूकता बढ़ रही है और सरकारी अपीलों का असर अब आम नागरिकों की सोच और फैसलों में भी दिखाई देने लगा है।
सासाराम स्टेशन पर बड़ा हादसा: जनरल बोगी में आग लगने से मची अफरा-तफरी, यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया

नई दिल्ली । सासाराम रेलवे स्टेशन पर सोमवार की सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब सासाराम-आरा-पटना पैसेंजर ट्रेन की जनरल बोगी में अचानक आग लग गई। यह घटना प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर उस समय हुई जब ट्रेन अपने निर्धारित समय से रवाना होने की तैयारी में खड़ी थी और यात्री उसमें सवार होकर सफर शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। अचानक बोगी से धुआं उठता देखा गया, जिसके बाद कुछ ही पलों में आग की तेज लपटें फैल गईं और पूरे कोच में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में बोगी के अंदर तेज जलने की गंध महसूस हुई, जिसे पहले यात्रियों ने गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन कुछ ही क्षणों में धुआं तेजी से फैलने लगा और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। जैसे ही आग की लपटें दिखाई दीं, यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सामान छोड़कर बाहर की ओर भागने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे कर्मचारियों, आरपीएफ और दमकल विभाग को तुरंत सूचना दी गई। सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा और यात्रियों को तेजी से सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत कार्य के दौरान आसपास की बोगियों को भी खाली कराया गया ताकि किसी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, आग पर नियंत्रण पाने के लिए लगभग 20 से अधिक कर्मचारी लगातार प्रयासरत रहे। रेलवे की पाइपलाइन और दमकल की सहायता से दोनों ओर से पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया गया। शुरुआती 30 मिनट में बाहरी हिस्से की आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया, लेकिन कोच के अंदर आग को पूरी तरह बुझाने में लगभग एक घंटे का समय लग गया। इस दौरान आग कई बार भड़कती रही, लेकिन कर्मचारियों ने स्थिति को नियंत्रित बनाए रखा। घटना के बाद संबंधित बोगी को ट्रेन से अलग कर दिया गया और पूरे स्टेशन परिसर को खाली कराया गया। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर प्रवेश भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी भी यात्री के घायल होने या जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि रेलवे प्रशासन ने विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि घटना की पूरी जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। इस घटना ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन समय रहते की गई त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। यात्रियों की सूझबूझ और रेलवे कर्मचारियों की तत्परता के कारण स्थिति नियंत्रण में आ सकी और एक बड़ा नुकसान होने से बच गया।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: जमानत अधिकार है, जेल अपवाद होना चाहिए; उमर खालिद मामले पर पुराने फैसले पर उठे सवाल

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद की जमानत को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए न्यायिक दृष्टिकोण पर नई बहस को जन्म दिया है। अदालत ने अपने ही पुराने रुख पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाते हुए कहा कि जमानत देना नियम होना चाहिए और किसी आरोपी को जेल में रखना केवल अपवाद के रूप में ही उचित माना जा सकता है। यह टिप्पणी उस समय सामने आई जब अदालत एक अन्य गंभीर मामले की सुनवाई कर रही थी, लेकिन इसके दौरान दिल्ली दंगा मामले और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कोर्ट की इस टिप्पणी ने न केवल कानूनी समुदाय बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि पहले दिए गए कुछ निर्णयों में सभी महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांतों पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया गया था। विशेष रूप से उन मामलों का उल्लेख किया गया जिनमें कठोर कानूनों के तहत लंबे समय तक आरोपी जेल में रहते हैं लेकिन उनके खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया धीमी होती है। अदालत ने यह भी माना कि जब किसी आरोपी के मौलिक अधिकारों का प्रश्न उठता है, तो अदालतों को अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और जमानत के सिद्धांत को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस संदर्भ में पूर्व के एक बड़े संवैधानिक फैसले का उल्लेख करते हुए यह कहा गया कि कठोर कानूनों के तहत भी जमानत देने की संभावना बनी रहनी चाहिए यदि परिस्थितियाँ उपयुक्त हों। दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद पर 2020 की हिंसा से जुड़े गंभीर आरोप हैं और वह लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं। इस मामले में उनकी जमानत याचिकाएं कई बार विभिन्न स्तरों पर खारिज की जा चुकी हैं। ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक अलग-अलग अवसरों पर उनकी याचिकाओं पर विचार हुआ, लेकिन किसी भी स्तर पर उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बावजूद हाल की न्यायिक टिप्पणी ने यह संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसे मामलों में जमानत के सिद्धांत को लेकर न्यायिक दृष्टिकोण और अधिक संतुलित हो सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बड़े न्यायिक पीठों द्वारा दिए गए फैसलों का पालन छोटी पीठों के लिए आवश्यक है, और किसी भी प्रकार की व्याख्या ऐसी नहीं होनी चाहिए जो मूल निर्णय की भावना को कमजोर करे। इस टिप्पणी ने न्यायिक अनुशासन और निर्णयों की व्याख्या को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है। साथ ही, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि कठोर कानूनों के तहत दर्ज मामलों में सजा दर और दोषसिद्धि के आंकड़ों पर भी विचार किया जाना चाहिए ताकि जमानत संबंधी निर्णय अधिक संतुलित और न्यायसंगत हो सकें। यह पूरा मामला केवल एक व्यक्ति की जमानत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय न्याय व्यवस्था में जमानत की अवधारणा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राज्य की शक्तियों के बीच संतुलन को लेकर एक व्यापक बहस को सामने लाता है। अदालत की हालिया टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि भविष्य में ऐसे मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण और अधिक स्पष्ट और अधिकार-आधारित हो सकता है, जहां स्वतंत्रता को प्राथमिकता देते हुए न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता को भी संतुलित रखा जाएगा।
NEET घोटाले में कार्रवाई तेज: महाराष्ट्र के कोचिंग संचालक गिरफ्तार, अब तक 10 आरोपी पकड़े गए

नई दिल्ली । NEET पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के लातूर स्थित केमिस्ट्री कोचिंग सेंटर के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो की इस कार्रवाई के बाद मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 10 तक पहुंच गई है, जिससे पूरे प्रकरण में शामिल नेटवर्क की परतें धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर है, जो लातूर सहित कई जिलों में संचालित एक कोचिंग सेंटर का संचालन करता है। CBI की टीम ने हाल ही में उसके ठिकानों पर छापेमारी की थी, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से NEET UG परीक्षा से जुड़ा कथित लीक पेपर मिलने की बात सामने आई है, जिसने मामले को और गंभीर बना दिया है। CBI के अनुसार, आरोपी एक संगठित गिरोह का हिस्सा था, जो परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी हासिल कर उसे आगे विभिन्न माध्यमों से छात्रों तक पहुंचाने में शामिल था। जांच एजेंसी का दावा है कि 23 अप्रैल को ही पेपर और आंसर की तक पहुंच बनाई गई थी, जिसे बाद में कई लोगों को साझा किया गया। इससे परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छापेमारी से पहले आरोपी से लंबी पूछताछ भी की गई थी, जिसमें कई अहम जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है। जांच के दौरान यह भी संदेह जताया गया है कि कोचिंग सेंटर में छात्रों को विशेष रूप से लीक हुए प्रश्नों के आधार पर तैयार कराया गया था, जिससे परीक्षा परिणामों को प्रभावित किया जा सके। इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े घोटाले की ओर इशारा किया है, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत होने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और पेपर लीक का यह सिलसिला कितने स्तरों तक फैला हुआ है। इस बीच शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है, जहां विपक्षी दलों ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं। वहीं सरकार की ओर से जांच एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता देने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। NEET जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में इस तरह की घटनाएं छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का कारण बन गई हैं। लाखों उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़े इस मामले में अब सभी की नजरें जांच के अगले कदम और आने वाले फैसलों पर टिकी हैं।
‘मेरी जिंदगी नर्क बन चुकी है… मुझे यहां से ले जाओ’, ट्विशा शर्मा की मां संग चैट आई सामने

भोपाल। भोपाल के चर्चित कटारा हिल्स संदिग्ध मौत मामले में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा सामने आया है। पूर्व जज की बहू ट्विशा शर्मा और उसकी मां के बीच हुई व्हाट्सएप चैट सार्वजनिक हुई है, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। इन चैट्स में ट्विशा ने अपनी शादीशुदा जिंदगी को “नर्क” बताते हुए मां से उसे वहां से ले जाने की गुहार लगाई थी। जानकारी के मुताबिक, 12 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिली 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा ने मौत से करीब पांच दिन पहले अपनी मां को कई भावुक मैसेज भेजे थे। चैट में ट्विशा लिखती है— “मेरी जिंदगी नर्क बन चुकी है… ये लोग बहुत क्रूर हैं… समर्थ मुझसे ठीक से बात तक नहीं करता… तुम यहां आओ और मुझे यहां से ले जाओ… ये लोग मुझे जीने नहीं देंगे।” इन चैट्स के सामने आने के बाद मृतका का परिवार इसे आत्महत्या नहीं बल्कि प्रताड़ना से जुड़ा मामला बता रहा है। परिवार का आरोप है कि शादी के कुछ ही महीनों बाद ट्विशा मानसिक रूप से टूट चुकी थी और लगातार दबाव में जी रही थी। इधर कोर्ट में आरोपी पक्ष की ओर से भी कई दावे किए गए हैं। ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह ने जमानत आवेदन में आरोप लगाया कि ट्विशा ड्रग एडिक्ट थी और उसे मूड स्विंग्स की समस्या थी। इस पर ट्विशा की मां ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब उनकी बेटी इस दुनिया में नहीं है, इसलिए उसके बारे में कुछ भी कहा जा रहा है। मामले में एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। परिवार के अनुसार ट्विशा करीब दो महीने की गर्भवती थी और उसके पति समर्थ सिंह ने उसके चरित्र पर सवाल उठाए थे। आरोप है कि समर्थ ने ट्विशा से बच्चे को लेकर आपत्तिजनक सवाल किए थे, जिससे वह मानसिक रूप से और ज्यादा परेशान हो गई थी। ट्विशा के चचेरे भाई आशीष शर्मा ने दावा किया है कि समर्थ खुद नशा करता था और जब ट्विशा ने इसका विरोध किया तो उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। परिवार का आरोप है कि आरोपी पक्ष प्रभावशाली होने के कारण पुलिस जांच प्रभावित हो रही है। इसी वजह से परिजन अब मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस एसआईटी के जरिए मामले की जांच कर रही है। वहीं ट्विशा की मौत से जुड़े हर नए खुलासे के बाद यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
कटारा हिल्स केस में नया खुलासा, ट्विशा शर्मा का आखिरी चैट आया सामने, मौत से पहले दोस्त को दी शादी न करने की सलाह

भोपाल। भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में पूर्व जज की बहू ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार गहराता जा रहा है। अब इस हाई-प्रोफाइल केस में मृतका का आखिरी इंस्टाग्राम चैट सामने आया है, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। ट्विशा ने मौत से पहले अपनी करीबी दोस्त मीनाक्षी को मैसेज कर लिखा था “मैं फंस गई हूं ब्रो… बस तुम मत फंसना। ज्यादा बात नहीं कर सकती, सही समय आने पर फोन करूंगी।” ट्विशा के इस मैसेज के जवाब में उसकी दोस्त ने चिंता जताते हुए लिखा था कि वह उसके साथ खड़ी है। हालांकि ट्विशा का वह फोन कभी नहीं आया और अगले ही दिन उसका शव घर की छत पर फंदे से लटका मिला। इस चैट के सामने आने के बाद परिवार ने दावा किया है कि ट्विशा मानसिक दबाव में थी और उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। मामले में यह भी सामने आया है कि ट्विशा करीब दो महीने की गर्भवती थी। बताया जा रहा है कि उसने अपनी दोस्त को शादी न करने की सलाह भी दी थी। परिवार का कहना है कि यह चैट साफ संकेत देता है कि ट्विशा किसी गंभीर तनाव और परेशानी से गुजर रही थी। घटना के बाद से मृतका का परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी के शव को सही तरीके से सुरक्षित नहीं रखा जा रहा। उनका दावा है कि उन्होंने शव को माइनस 4 डिग्री तापमान पर रखने की मांग की थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने ऐसा नहीं किया। परिवार का आरोप है कि सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। इसी मांग को लेकर परिवार मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर भी बैठा रहा। परिजनों ने कहा कि जब तक निष्पक्ष जांच और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती, वे शांत नहीं बैठेंगे। परिवार ने पुलिस जांच पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि ट्विशा की सास रिटायर्ड जज होने के कारण मामले में प्रभाव का इस्तेमाल किया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि घटना के दो दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई, जबकि मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह अब तक फरार है। मृतका के परिवार का यह भी दावा है कि ट्विशा के कान और हाथों पर चोट के निशान थे, जो मामले को संदिग्ध बनाते हैं। परिजन इसे आत्महत्या मानने को तैयार नहीं हैं और हत्या की आशंका जता रहे हैं। उन्होंने मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने और बाहरी एजेंसी से जांच की मांग की है। पुलिस की ओर से मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। टीम में महिला पुलिसकर्मियों समेत कई अधिकारियों को शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है। ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं। उन्होंने साउथ फिल्मों और मॉडलिंग में भी काम किया था। बाद में उन्होंने एमबीए करने के बाद निजी कंपनी में नौकरी शुरू की थी। डेटिंग एप के जरिए उनकी मुलाकात समर्थ सिंह से हुई थी, जिसके बाद दोनों ने परिवार की सहमति से शादी की थी। अब उनकी मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है।
स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर-सूरत को टक्कर देने मैदान में उतरा भोपाल, 106 नोडल अफसरों ने संभाला मोर्चा

नई दिल्ली। स्वच्छ सर्वेक्षण में देश के सबसे साफ शहरों की रेस अब और दिलचस्प हो गई है। इंदौर, सूरत और नवी मुंबई जैसे शहरों को चुनौती देने के लिए भोपाल नगर निगम ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी है। राजधानी भोपाल ने सुपर स्वच्छ लीग में एंट्री के बाद अपनी रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है और शहर को चमकाने के लिए 106 नोडल अधिकारियों को मैदान में उतार दिया गया है। नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन खुद इस अभियान की निगरानी कर रही हैं। उनके निर्देशन में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को युद्ध स्तर पर सुधारने का काम जारी है। खासतौर पर उन इलाकों पर फोकस किया जा रहा है, जहां पहले गंदगी और अव्यवस्था की शिकायतें सबसे ज्यादा आती थीं। भोपाल की तंग गलियों, सरकारी क्वार्टर्स के पीछे के हिस्सों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुबह-सुबह सफाई कर्मचारी सड़कों से धूल हटाने, कचरा साफ करने, गड्ढे भरने और दीवारों की पुताई करने में जुटे नजर आ रहे हैं। नगर निगम ने साफ कर दिया है कि स्वच्छता अभियान में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल ही में गंदगी मिलने पर दो अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया है, जबकि कई अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। निगम का कहना है कि संसाधन सीमित होने के बावजूद टीम पूरी मेहनत से काम कर रही है। अशोका गार्डन, गिन्नोरी, नारायण नगर और बिजली नगर जैसे इलाकों में अब साफ-सफाई का असर दिखाई देने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों पर कचरा कम हुआ है और दीवारों पर की गई पेंटिंग व सजावट से मोहल्लों की तस्वीर बदल रही है। इस बार उत्कृष्ट काम करने वाले सफाई कर्मचारियों और फील्ड वर्कर्स को विशेष सम्मान देने की भी तैयारी है। नगर निगम का लक्ष्य सिर्फ रैंकिंग सुधारना नहीं, बल्कि भोपाल को देश के सबसे स्वच्छ और सुंदर शहरों की सूची में मजबूत पहचान दिलाना है।
शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसला, वैश्विक संकेतों का असर

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई, जहां वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का सीधा असर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करते नजर आए, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। सुबह के सत्र में सेंसेक्स में करीब 850 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह 75,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। वहीं निफ्टी भी लगभग 250 अंकों की कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखा। बाजार में यह गिरावट चौतरफा बिकवाली के कारण देखने को मिली, जिसमें लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे। निफ्टी के सेक्टोरल इंडेक्स में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी सबसे ज्यादा नुकसान में रहे, जबकि मीडिया, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, पीएसयू बैंक, ऊर्जा और कंजप्शन जैसे सेक्टर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बाजार में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे व्यापक स्तर पर दबाव स्पष्ट नजर आया। सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में आईटी सेक्टर की कुछ कंपनियां जैसे इन्फोसिस और टीसीएस हल्की मजबूती में रहीं, लेकिन ज्यादातर बड़ी कंपनियां नुकसान में रहीं। पावर ग्रिड, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और अन्य प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। इससे बाजार में गिरावट और गहरी हो गई। वैश्विक बाजारों में भी इसी तरह का नकारात्मक रुख देखने को मिला। एशियाई बाजारों में टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक, हांगकांग और जकार्ता जैसे प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल सोल का बाजार हरे निशान में रहा। इससे यह संकेत मिला कि वैश्विक निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं। अमेरिकी बाजारों में भी पिछले सत्र में गिरावट दर्ज की गई थी, जहां प्रमुख सूचकांक डाओ जोन्स और नैस्डैक में एक प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखने को मिली। इसका असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी पड़ा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट के पीछे मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और आर्थिक दबाव की चिंता बढ़ गई है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है, जिससे इक्विटी बाजारों से पूंजी निकलने का दबाव बन रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है, जबकि घरेलू निवेशकों की गतिविधियां भी सीमित रहीं। कुल मिलाकर, कमजोर वैश्विक संकेतों, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय शेयर बाजार पर मिलकर दबाव बनाया है, जिससे निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है।
CISF बाउंड्री वॉल पर पैर फिसलने से किशोर के गले और जबड़े के आर-पार हुआ नुकीला सरिया, गंभीर हालत में इंदौर रेफर

बड़वाह (खरगोन)। मध्यप्रदेश के खरगोन जिला अंतर्गत आने वाले बड़वाह नगर में एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया है, जिसने पूरे इलाके के लोगों को स्तब्ध कर दिया है। यहां के जयंती माता रोड पर स्थित सुरक्षा बल की बाउंड्री वॉल पर खेल-खेल में चढ़ना एक मासूम किशोर के लिए काल के समान साबित हुआ। सड़क किनारे बनी इस बेहद ऊंची सुरक्षा दीवार के ऊपर सुरक्षा के लिहाज से नुकीले लोहे के सरिए लगाए गए थे, जो एक बच्चे के फिसलने के बाद उसकी जिंदगी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए। इस दर्दनाक घटना की खबर जैसे ही नगर में फैली, चारों तरफ हड़कंप मच गया और घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। घटनाक्रम के अनुसार, वार्ड क्रमांक दो के रहने वाले बलराम का 16 वर्षीय पुत्र टैटू अपने हमउम्र दोस्तों के साथ रोज की तरह जयंती माता मार्ग पर खेल रहा था। इसी दौरान खेल-खेल में एक बच्चे की चप्पल उछलकर सड़क किनारे बनी केंद्रीय सुरक्षा बल की ऊंची बाउंड्री वॉल के दूसरी तरफ चली गई। बच्चों की जिद और चप्पल वापस लाने के आग्रह पर टैटू दीवार लांघकर दूसरी तरफ उतर गया। उसने नीचे गिरी चप्पल को उठाकर वापस दीवार के इस पार सड़क पर फेंक दिया। इसके बाद जब वह खुद वापस आने के लिए उस ऊंची दीवार पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था, तभी अचानक उसका पैर फिसल गया और वह अपना संतुलन खो बैठा। संतुलन बिगड़ते ही वह सीधे दीवार के ऊपरी हिस्से पर लगे नुकीले सरियों पर जा गिरा। हादसा इतना भयावह था कि लोहे का एक नुकीला और मोटा सरिया उसके गले को पूरी तरह से चीरता हुआ जबड़े को फाड़कर मुंह के रास्ते बाहर निकल आया। बालक हवा में ही उस सरिए के सहारे लटक गया और असहनीय दर्द से तड़पने लगा। इस खौफनाक मंजर को देखकर वहां मौजूद अन्य बच्चों ने चीख-पुकार मचानी शुरू कर दी। बच्चों की आवाजें सुनकर आसपास के रहवासी तुरंत मौके की तरफ दौड़े। किशोर को इस तरह लहूलुहान और सरिए में फंसा देख एक बार तो लोगों के होश उड़ गए, लेकिन स्थानीय नागरिकों ने तुरंत हिम्मत दिखाई और बचाव कार्य में जुट गए। स्थानीय निवासियों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत बिजली से चलने वाली कटर मशीन का इंतजाम किया। इसके बाद बेहद सावधानी से करीब एक घंटे की भारी मशक्कत और सूझबूझ के साथ उस लोहे के सरिए को दीवार से काटकर अलग किया गया। इस दौरान किशोर जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा। सरिया काटने के तुरंत बाद मौके पर आपातकालीन पुलिस सेवा की गाड़ी पहुंची, जिसकी मदद से घायल अवस्था में बालक को लोहे के टुकड़े समेत तुरंत बड़वाह के सिविल अस्पताल ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों की टीम ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार देकर रक्तस्राव रोकने की कोशिश की। अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, सरिया गले और मुंह के बेहद संवेदनशील हिस्से के आर-पार हो चुका था, जिसके कारण अंदरूनी नसें और अंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। बालक की नाजुक हालत और लगातार बहते खून को देखते हुए प्राथमिक डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए तत्काल इंदौर के बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है, वहीं स्थानीय नागरिकों में इस तरह के नुकीले और खतरनाक सरियों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। फिलहाल घायल किशोर का इंदौर में सघन उपचार जारी है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने की हरसंभव कोशिश कर रही है।