सतना में ट्रक ड्राइवर-क्लीनर पर हमला: चोरी का विरोध करने पर चाकू से वार

मध्य प्रदेश ।सतना के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के बगहा इलाके में बुधवार तड़के ट्रक में चोरी के इरादे से घुसे बदमाश ने ड्राइवर और क्लीनर पर चाकू से हमला कर दिया। घटना में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ निवासी मोहम्मद राशिद (25) और मुर्शीद (28) ट्रक को सड़क किनारे खड़ा कर सो रहे थे। सुबह करीब 3 बजे एक अज्ञात बदमाश चोरी की नीयत से ट्रक में घुसा, जिससे दोनों की नींद खुल गई। बताया गया कि पकड़े जाने के डर से आरोपी ने दोनों पर चाकू से हमला कर दिया। हमले के बाद वह ट्रक से कूदकर भागने लगा। घायल ड्राइवर और क्लीनर ने उसे पकड़ने की कोशिश भी की, लेकिन वह अपनी बाइक मौके पर छोड़कर फरार हो गया। घटना की सूचना मिलने पर डायल 112 पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने मौके से छोड़ी गई बाइक (MP 19 MF 7376) जब्त कर ली है और आरोपी की पहचान व गिरफ्तारी के लिए जांच शुरू कर दी है।
पीएम मोदी से सवाल के बाद बड़ा सियासी विवाद, नॉर्वे की पत्रकार ने राहुल गांधी से इंटरव्यू मांगा, भारत में गरमाई बहस

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान सवाल पूछने के बाद विवादों में आई नॉर्वे की पत्रकार हेल्ले लिंग एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला और आगे बढ़ गया है क्योंकि उन्होंने अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी से फोन पर इंटरव्यू के लिए संपर्क साधा है। उनके इस कदम के बाद भारत की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। यह पूरा विवाद उस घटना के बाद शुरू हुआ जब ओस्लो में आयोजित एक संयुक्त मीडिया इवेंट के दौरान हेल्ले लिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने की कोशिश की थी। इस दौरान उनके सवाल और उसे पूछने के तरीके को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़ा, जबकि कई लोगों ने इसे अनुचित और राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम बताया। इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई और विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाया। वहीं अब जब पत्रकार ने सीधे राहुल गांधी से इंटरव्यू का अनुरोध किया है, तो मामला और अधिक राजनीतिक रंग ले चुका है। उनके इस कदम को लेकर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और इसे भारत की छवि से जोड़कर भी देखा जा रहा है। राहुल गांधी की ओर से पीएम मोदी पर सवालों से बचने का आरोप लगाने के बाद यह मुद्दा और गरमा गया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह भी कहा था कि जब नेता सवालों का सामना नहीं करते तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़ा करता है। इसी बीच पत्रकार का राहुल गांधी से संपर्क करना इस पूरे घटनाक्रम को एक नए मोड़ पर ले आया है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है और इसे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित करने की कोशिश बताया गया है। पार्टी का कहना है कि विदेशी मंचों पर इस तरह की घटनाएं अक्सर चयनात्मक तरीके से प्रस्तुत की जाती हैं, जिससे गलत संदेश जाता है। वहीं दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर भारी बहस चल रही है। कुछ लोग इसे मीडिया की स्वतंत्रता और सवाल पूछने के अधिकार के रूप में देख रहे हैं, जबकि कई लोग इसे राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर आलोचना कर रहे हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर भारत की राजनीति, अंतरराष्ट्रीय मीडिया की भूमिका और नेताओं की सार्वजनिक जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राहुल गांधी इस इंटरव्यू अनुरोध पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है।
महिला की सतर्कता से टला बड़ा हादसा: युवक नवजात छोड़कर फरार

मध्य प्रदेश । सतना के सरदार वल्लभभाई पटेल अस्पताल में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात नवजात बच्चे को चुराने की कोशिश का मामला सामने आया। एक अज्ञात युवक गायनिक वार्ड से एक दिन के नवजात को झोले में डालकर ले जा रहा था, लेकिन एक महिला की सतर्कता के कारण उसकी योजना नाकाम हो गई और बच्चा सुरक्षित बच गया। जानकारी के मुताबिक, माडा टोला निवासी शिवानी चौधरी ने मंगलवार सुबह बच्चे को जन्म दिया था। रात करीब 10 बजे एक अज्ञात युवक उनके पास पहुंचा और बच्चे को दूध पिलाकर सुलाने की बात कही। इसके बाद वह वार्ड के आसपास संदिग्ध तरीके से घूमता रहा और महिला के सो जाने का इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद उसने मौका पाकर नवजात को झोले में डाल लिया और डिलीवरी रूम से बाहर निकलने लगा। तभी वहां मौजूद नई बस्ती निवासी अभिलाषा तिवारी को झोले से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। शक होने पर उन्होंने झोले को देखा तो अंदर बच्चे के पैर नजर आए। महिला ने तुरंत युवक को रोककर पूछताछ शुरू की, लेकिन घबराकर आरोपी भागने लगा। अभिलाषा तिवारी ने शोर मचाते हुए उसका पीछा किया, जिसके बाद आरोपी झोला और बच्चे को वहीं छोड़कर फरार हो गया। शोर सुनकर नर्स और अन्य लोग मौके पर पहुंचे और नवजात को सुरक्षित उसकी मां को सौंप दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस अस्पताल पहुंची और बयान दर्ज किए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपी की पहचान की जा सके।
रोम दौरे के बाद बदलता वैश्विक समीकरण, चीन की बेचैनी और पाकिस्तान की चिंता बढ़ी, IMEC बना नया कूटनीतिक हथियार

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया रोम यात्रा को वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। इस दौरे के दौरान भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और विशेष रूप से India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC) को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। इस रणनीतिक पहल को लेकर चीन और पाकिस्तान दोनों की प्रतिक्रिया सुर्खियों में है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और कनेक्टिविटी नेटवर्क का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रोम में हुए कूटनीतिक संवाद और यूरोपीय देशों के साथ बढ़ती साझेदारी ने इस संदेश को और मजबूत किया है कि भारत अब यूरोप और पश्चिम एशिया के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को नए स्तर पर ले जाना चाहता है। चीन की चिंता का मुख्य कारण IMEC को माना जा रहा है, जिसे कई विश्लेषक चीन के बहुचर्चित Belt and Road Initiative (BRI) के विकल्प या चुनौती के रूप में देखते हैं। यह प्रस्तावित कॉरिडोर भारत से शुरू होकर मध्य पूर्व के देशों से होते हुए यूरोप तक एक नया व्यापारिक मार्ग विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। चीन को आशंका है कि यह नया नेटवर्क उसके मौजूदा वैश्विक व्यापार प्रभाव को कमजोर कर सकता है। इसके साथ ही, इटली जैसे यूरोपीय देशों की बढ़ती रुचि ने भी बीजिंग की रणनीतिक चिंता बढ़ा दी है। पहले जो देश चीन के साथ आर्थिक परियोजनाओं में जुड़े थे, वे अब भारत के साथ सहयोग की संभावनाओं को अधिक गंभीरता से देखने लगे हैं। यही बदलाव चीन की कूटनीतिक रणनीति के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान की चिंता का कारण भी यही कॉरिडोर है। पाकिस्तान लंबे समय से अपनी भौगोलिक स्थिति को क्षेत्रीय व्यापार में एक महत्वपूर्ण संपत्ति के रूप में प्रस्तुत करता रहा है, लेकिन IMEC के आने से यह समीकरण बदलते दिख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह नया मार्ग सफल होता है तो पाकिस्तान की पारंपरिक ट्रांजिट भूमिका प्रभावित हो सकती है। पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक दबाव और कर्ज संकट का सामना कर रहा है, और ऐसे में वैश्विक व्यापार मार्गों में बदलाव उसकी रणनीतिक स्थिति को और कमजोर कर सकता है। यही वजह है कि वहां की राजनीतिक और आर्थिक चर्चाओं में भारत की विदेश नीति और IMEC का प्रभाव लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, चीन की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि किसी भी नए कॉरिडोर को प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग के रूप में देखा जाना चाहिए, लेकिन रणनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि वैश्विक व्यापार मार्गों में यह बदलाव आने वाले वर्षों में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
सुरक्षा पर जोर: एसी बसों का 3 महीने में मेंटेनेंस और स्टाफ को प्रशिक्षण जरूरी

मध्य प्रदेश । सागर में मंगलवार देर शाम क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में बस संचालकों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें हाल ही में यात्री बसों में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए सख्त सुरक्षा निर्देश जारी किए गए। अधिकारियों ने सभी बस ऑपरेटरों को तय समयसीमा में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। बैठक में निर्देश दिया गया कि सभी एसी बसों के एसी सिस्टम की नियमित जांच की जाए और हर तीन महीने में उनका मेंटेनेंस व साफ-सफाई अनिवार्य रूप से कराई जाए। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि खराब रखरखाव के कारण एसी कम्प्रेसर ओवरहीट होकर शॉर्ट सर्किट और आग जैसी घटनाओं का कारण बन सकता है। सभी यात्री बसों में निर्धारित मानक के फायर एक्सटिंग्विशर रखना अनिवार्य किया गया है, साथ ही ड्राइवर और कंडक्टर को इसका उपयोग करने का प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में आग पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि बसों में किसी भी प्रकार के ज्वलनशील पदार्थ जैसे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन या विस्फोटक सामग्री का परिवहन सख्ती से प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा सभी एसी बसों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS) लगाने और स्लीपर कोच बसों को AIS-119 मानकों के अनुसार तैयार करने को कहा गया है। जिन बस संचालकों को पहले नोटिस जारी किए गए थे, उन्हें 25 मई तक क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में वाहनों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ड्राइवर और कंडक्टरों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर सुरक्षा संबंधी सूचनाएं साझा करने की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है।
अस्पताल में अफरातफरी: रीवा में आग के बीच मरीजों और परिजनों से बदसलूकी

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के रीवा शहर स्थित नेशनल हॉस्पिटल में मंगलवार शाम आग लगने के बाद हालात बेकाबू हो गए। अस्पताल में अफरा-तफरी के बीच बाहर निकलने की कोशिश कर रहे मरीजों और उनके परिजनों के साथ कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। बुधवार को सामने आए वीडियो में कई कर्मचारी मिलकर मरीजों और परिजनों पर लाठी-डंडों से हमला करते नजर आ रहे हैं, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। आग के बाद भगदड़, बाहर निकलने का रास्ता बना बाधाजानकारी के अनुसार, आग लगने के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया। मरीज और परिजन संकरे इमरजेंसी एग्जिट से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वहां कबाड़ रखा होने के कारण रास्ता बाधित था। इसी दौरान विवाद बढ़ा और मामला मारपीट तक पहुंच गया। पीड़िता का आरोप: 50 हजार लेने के बाद भी पिटाईघायल पीड़िता सुनीता मिश्रा ने आरोप लगाया कि इलाज के नाम पर उनसे 50 हजार रुपये से अधिक लिए गए, इसके बावजूद अस्पताल कर्मचारियों ने उनके परिवार के साथ मारपीट की। उन्होंने कहा कि आग लगने के बाद भी उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया गया और महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधारअस्पताल प्रशासन की ओर से डॉक्टर अखिलेश पटेल ने आग लगने की घटना की पुष्टि की है, लेकिन मारपीट के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रबंधन का कहना है कि स्थिति को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। पुलिस जांच में जुटी, अस्पताल सुरक्षा पर सवालसमान थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित परिवार का आवेदन प्राप्त हुआ है और सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। अस्पताल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालइस घटना के बाद रीवा के निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार कई अस्पताल बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं और आपात स्थिति के लिए पर्याप्त निकासी व्यवस्था भी नहीं है। रीवा अस्पताल की यह घटना न केवल लापरवाही बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षा मानकों की गंभीर कमी को उजागर करती है। आग जैसी आपात स्थिति में मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन यहां हालात इसके बिल्कुल विपरीत नजर आए।
अमरनाथ यात्रा को लेकर बड़ा अपडेट, रजिस्ट्रेशन ने पकड़ी रफ्तार; सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर

नई दिल्ली । अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है और इसका असर रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। अब तक 3.5 लाख से अधिक भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि इस वर्ष यात्रा को लेकर आस्था और उत्साह दोनों चरम पर हैं। यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी और यह 57 दिनों तक चलेगी, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ओर से यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यात्रा मार्गों पर बर्फ हटाने और ट्रैक बहाली का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें बालटाल और पहलगाम दोनों प्रमुख मार्गों पर कई किलोमीटर तक बर्फ हटाई जा चुकी है। हालांकि अभी भी कुछ ऊंचाई वाले हिस्सों में भारी बर्फ जमा है, जिसे हटाने का काम जारी है। अधिकारियों का मानना है कि जून के मध्य तक दोनों मार्ग पूरी तरह से यात्रा के लिए तैयार कर दिए जाएंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार कई नए यात्री निवास तैयार किए गए हैं, जहां हजारों यात्रियों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जा रही है। पहलगाम, बालटाल, सोनमर्ग और बिजबेहड़ा जैसे प्रमुख स्थानों पर सुविधाओं को बेहतर बनाया गया है ताकि यात्रा के दौरान किसी भी तरह की असुविधा न हो। इसके साथ ही मेडिकल सुविधा, पेयजल, बिजली और संचार व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। यात्रा मार्गों के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की योजना बनाई गई है और निगरानी व्यवस्था को भी और मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि जो लोग अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए हैं, वे जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करें ताकि अंतिम समय में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही यात्रियों को मौसम और स्वास्थ्य से जुड़ी सभी आवश्यक सावधानियों का पालन करने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह यात्रा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से होकर गुजरती है। बदलते मौसम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों को देखते हुए प्रशासन ने सभी तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम तेज कर दिया है। कुल मिलाकर, इस बार अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह और प्रशासन की तैयारियां दोनों ही उच्च स्तर पर हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि यह यात्रा अब तक की सबसे व्यवस्थित और सुरक्षित यात्राओं में से एक होगी।
ब्रिज निर्माण में देरी पर सख्ती: संभागायुक्त ने लगाया 5 लाख का जुर्माना

उज्जैन । उज्जैन में सिंहस्थ 2028 महापर्व को देखते हुए शिप्रा नदी के तट पर भीड़ नियंत्रण और सुगम यातायात व्यवस्था के लिए नए ब्रिजों का निर्माण किया जा रहा है। संत महात्माओं और करोड़ों श्रद्धालुओं के स्नान को ध्यान में रखते हुए यह कार्य तेजी से कराया जा रहा है। संभागायुक्त और कलेक्टर ने किया निरीक्षणबुधवार को संभाग आयुक्त और सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह तथा कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने शिप्रा तट पर चल रहे ब्रिज निर्माण की प्रगति की जानकारी ली। अंगारेश्वर–सिद्धवट ब्रिज पर नाराजगीश्री अंगारेश्वर मंदिर से सिद्धवट मंदिर को जोड़ने वाले ब्रिज निर्माण की गति धीमी पाए जाने पर संभागायुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्माण एजेंसी पर 5 लाख रुपये की पेनल्टी लगाने के निर्देश दिए। क्वालिटी कंट्रोल लैब का निरीक्षणनिरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्माण स्थल पर मौजूद क्वालिटी कंट्रोल लैब का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि निर्माण सामग्री की जांच कर रिपोर्ट नियमित रूप से रजिस्टर में दर्ज की जाए। अन्य निर्माण कार्यों की समीक्षाकलेक्टर और मेला अधिकारी ने इंदौर रोड स्थित डी मार्ट के सामने रोड निर्माण और त्रिवेणी हिल्स से सिकंदरी के बीच शिप्रा तट पर चल रहे ब्रिज निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सभी कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
केरल में ‘वंदे मातरम्’ पर सियासी संग्राम, शपथ समारोह से शुरू हुआ विवाद पहुंचा राष्ट्रवाद बनाम सेक्युलरिज्म तक

नई दिल्ली । केरल की राजनीति एक बार फिर तीखी बहस के केंद्र में आ गई है, जब राज्य में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूरे ‘वंदे मातरम्’ के बजने पर विवाद खड़ा हो गया। यह मामला अब केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की राजनीतिक विचारधाराओं के बीच गहरी खाई को उजागर करता दिख रहा है। विवाद में मुख्य रूप से Communist Party of India (Marxist) और Bharatiya Janata Party आमने-सामने आ गए हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व वाली राज्य व्यवस्था भी इस बहस के दायरे में आ गई है। पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण बजाया गया। इसके बाद CPM ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में केवल वही हिस्सा उपयोग किया जाना चाहिए जिसे आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया है। पार्टी का तर्क है कि गीत के कुछ हिस्सों में धार्मिक प्रतीकात्मकता का उल्लेख है, जो धर्मनिरपेक्ष परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जाता। दूसरी ओर, BJP ने इस आपत्ति को सख्ती से खारिज करते हुए इसे राष्ट्रीय भावनाओं का अपमान बताया है। पार्टी का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक रहा है और इसके पूरे स्वरूप का सम्मान किया जाना चाहिए। BJP नेताओं ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार देते हुए विपक्ष पर वोट बैंक को साधने का आरोप लगाया है। विवाद के केंद्र में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी समारोहों में किसी गीत के केवल सीमित हिस्से को ही अनुमति दी जानी चाहिए या पूरे गीत का उपयोग किया जाना चाहिए। CPM का दावा है कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति और बाद में संवैधानिक प्रक्रियाओं के दौरान यह माना गया था कि केवल प्रारंभिक हिस्से को ही औपचारिक रूप से मान्यता दी गई है। पार्टी यह भी कहती है कि भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर आधारित है और इसलिए ऐसे प्रतीकों का उपयोग सावधानीपूर्वक होना चाहिए। वहीं BJP का कहना है कि इस तरह की व्याख्याएं राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रेरित हैं और इससे राष्ट्रीय एकता पर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है। पार्टी नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी राष्ट्रीय गीत का कोई हिस्सा विवादित माना जा सकता है। इस मुद्दे ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक व्यापक बहस को जन्म दे दिया है। राज्य प्रशासन ने इस विवाद से दूरी बनाते हुए कहा है कि शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन एक अलग संस्था द्वारा किया गया था और इसमें सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। हालांकि इसके बावजूद राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है और मामला और अधिक संवेदनशील होता जा रहा है। अब यह विवाद केवल केरल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य राज्यों में भी इस तरह की बहसों के संकेत दिखाई देने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगे चलकर राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और सांस्कृतिक पहचान की व्यापक बहस को और तेज कर सकता है।
सिंहस्थ 2028 से पहले बड़ी तैयारी: गढ़कालिका मंदिर में बढ़ेंगी श्रद्धालु सुविधाएं

नई दिल्ली । धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित ऐतिहासिक गढ़कालिका मंदिर के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए 15.50 करोड़ रुपए की विस्तृत परियोजना तैयार की गई है। इस योजना का उद्देश्य सिंहस्थ 2028 से पहले मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और बढ़ती श्रद्धालु भीड़ को बेहतर तरीके से संभालना है। उज्जैन स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इस कार्य के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही चयनित एजेंसी को काम सौंपा जाएगा। गढ़कालिका मंदिर को उज्जैन की उत्तरी सीमा का रक्षक और एक प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नई परियोजना के तहत मंदिर परिसर की क्षमता को मौजूदा 3 से 5 हजार श्रद्धालुओं से बढ़ाकर 10 से 12 हजार श्रद्धालुओं तक किया जाएगा। वहीं सिंहस्थ 2028 के दौरान लगभग 50 हजार लोगों की भीड़ को संभालने की व्यवस्था की जाएगी। आधुनिक सुविधाओं से सजेगा मंदिर परिसरपरियोजना के अंतर्गत मंदिर के शिखर और संरचना की मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पुराने चूना प्लास्टर का नवीनीकरण किया जाएगा और मंदिर के अग्रभाग को आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए छायादार प्रतीक्षालय, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय और आधुनिक कतार प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। प्रवेश-निकास और पार्किंग व्यवस्था में सुधारमंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए जाएंगे, जिससे दर्शन व्यवस्था अधिक सुचारु हो सके। इसके साथ ही लगभग 50 वाहनों की पार्किंग सुविधा विकसित की जाएगी। दिव्यांगजनों के लिए रैंप और विशेष पत्थर मार्ग भी बनाए जाएंगे ताकि सभी श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन का लाभ मिल सके। रोशनी और सौंदर्यीकरण पर भी जोरमंदिर परिसर को रात के समय आकर्षक बनाने के लिए “वॉर्म एम्बर” थीम आधारित लाइटिंग की जाएगी, जिससे गढ़कालिका मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक भव्यता और अधिक निखरेगी। एक साल में पूरा होगा प्रोजेक्टउज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के अनुसार, चयनित एजेंसी को एक वर्ष के भीतर परियोजना पूरा करने का लक्ष्य दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस विकास कार्य के बाद गढ़कालिका मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बनेगा, बल्कि उज्जैन के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। `