बुधवार को सामने आए वीडियो में कई कर्मचारी मिलकर मरीजों और परिजनों पर लाठी-डंडों से हमला करते नजर आ रहे हैं, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।
आग के बाद भगदड़, बाहर निकलने का रास्ता बना बाधा
जानकारी के अनुसार, आग लगने के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया। मरीज और परिजन संकरे इमरजेंसी एग्जिट से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वहां कबाड़ रखा होने के कारण रास्ता बाधित था। इसी दौरान विवाद बढ़ा और मामला मारपीट तक पहुंच गया।
पीड़िता का आरोप: 50 हजार लेने के बाद भी पिटाई
घायल पीड़िता सुनीता मिश्रा ने आरोप लगाया कि इलाज के नाम पर उनसे 50 हजार रुपये से अधिक लिए गए, इसके बावजूद अस्पताल कर्मचारियों ने उनके परिवार के साथ मारपीट की। उन्होंने कहा कि आग लगने के बाद भी उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया गया और महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधार
अस्पताल प्रशासन की ओर से डॉक्टर अखिलेश पटेल ने आग लगने की घटना की पुष्टि की है, लेकिन मारपीट के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रबंधन का कहना है कि स्थिति को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
पुलिस जांच में जुटी, अस्पताल सुरक्षा पर सवाल
समान थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित परिवार का आवेदन प्राप्त हुआ है और सभी तथ्यों की जांच की जा रही है।
अस्पताल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना के बाद रीवा के निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार कई अस्पताल बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं और आपात स्थिति के लिए पर्याप्त निकासी व्यवस्था भी नहीं है।
रीवा अस्पताल की यह घटना न केवल लापरवाही बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षा मानकों की गंभीर कमी को उजागर करती है। आग जैसी आपात स्थिति में मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन यहां हालात इसके बिल्कुल विपरीत नजर आए।