सीहोर में कुपोषण का बड़ा खुलासा: 605 बच्चे गंभीर स्थिति में

मध्यप्रदेश । सीहोर जिले में बच्चों के पोषण स्तर को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जिला अस्पताल में महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग द्वारा ‘एक कदम सुपोषण की ओर’ अभियान के तहत कुपोषित बच्चों को पोषण टोकरियां वितरित की गईं, लेकिन सरकारी आंकड़े ही इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिले में फिलहाल 605 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित (Severe Acute Malnutrition – SAM) श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें तत्काल विशेष पोषण और चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा सुपोषण सुधार के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, जमीनी हकीकत इससे काफी अलग नजर आती है। केंद्र सरकार के पोषण ट्रैकर ऐप पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों के वजन और ऊंचाई की नियमित एंट्री की जाती है, लेकिन इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर लक्ष्य पूरा करने के लिए आंकड़े वास्तविकता से अलग दर्ज किए जा रहे हैं। नतीजतन, कई बच्चे जो ऐप पर सामान्य या कम कुपोषित दिखाए जाते हैं, वे अस्पताल पहुंचने पर गंभीर कुपोषण की स्थिति में पाए जाते हैं। स्थिति और अधिक गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। संसाधनों की कमी, खराब या अनुपलब्ध मोबाइल उपकरण और दूरस्थ इलाकों में नेटवर्क की समस्या के कारण पोषण ट्रैकर ऐप पर सटीक डेटा एंट्री करना मुश्किल हो जाता है। इसके चलते कागजों पर स्थिति भले ही सुधरी हुई दिखती हो, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत रहती है। जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में लगातार कुपोषण और एनीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बनी हुई है, जो इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर सुधार की गति बेहद धीमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आंकड़ों के भरोसे स्थिति को बेहतर नहीं माना जा सकता, बल्कि वास्तविक पोषण और चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन 605 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को तत्काल उपचार और नियमित पोषण सपोर्ट की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इन बच्चों का स्वास्थ्य और अधिक बिगड़ सकता है। वहीं, महिला बाल विकास विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत समय-समय पर पोषण टोकरियां वितरित की जा रही हैं। शहरी बाल विकास परियोजना अधिकारी बीएल मालवीय ने बताया कि अभियान का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाना है और इस दौरान स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर मौजूद चुनौतियां और आंकड़ों की विसंगति यह संकेत देती हैं कि केवल वितरण कार्यक्रमों से कुपोषण जैसी गंभीर समस्या का समाधान संभव नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक डेटा पारदर्शिता, नियमित मॉनिटरिंग और ग्रामीण स्तर पर मजबूत स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित नहीं की जातीं, तब तक स्थिति में बड़ा बदलाव मुश्किल है।
राजनीतिक फैसलों की आलोचना पर रोक संभव नहीं, राघव चड्ढा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली । राजनीतिक आलोचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े एक अहम मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा की याचिका पर सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी राजनीतिक नेता के फैसलों की आलोचना को सीधे तौर पर व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्तियों के निर्णयों और राजनीतिक कदमों पर समाज में चर्चा और आलोचना स्वाभाविक प्रक्रिया है। अदालत ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए यह भी संकेत दिया कि पहले भी कार्टून और व्यंग्य के माध्यम से राजनीतिक व्यक्तित्वों पर टिप्पणी होती रही है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा रहा है। मामला तब सामने आया जब राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कथित एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो, छेड़छाड़ किए गए भाषणों और भ्रामक सामग्री को हटाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। याचिका में यह दावा किया गया था कि ऐसी सामग्री उनके व्यक्तिगत अधिकारों और छवि को प्रभावित कर रही है। हालांकि अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी विशेष वीडियो या सामग्री को लेकर आपत्ति है, तो उसके लिए अलग और विशिष्ट याचिका दायर की जानी चाहिए। व्यापक रूप से सभी सामग्री पर रोक लगाने की मांग को न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। इस टिप्पणी के बाद कानूनी हलकों में यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तित्व अधिकारों के बीच संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में एआई आधारित सामग्री और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच ऐसे मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। गौरतलब है कि राघव चड्ढा ने हाल ही में राजनीतिक बदलाव करते हुए एक नई पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया था, जिसके बाद उन पर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की टिप्पणियां और सामग्री सामने आई थी। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने अदालत का रुख किया था।
पुलवामा हमले के कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की हत्या: PoK में गोलीबारी से मौत

नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े बताए जा रहे हमजा बुरहान की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी है।कहा जा रहा है कि उस पर PoK क्षेत्र में कई राउंड फायरिंग की गई, जिसके बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई। कौन था हमजा बुरहान?रिपोर्ट्स और सुरक्षा एजेंसियों के दावों के अनुसार: असली नाम: अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ: हमजा बुरहान / “डॉक्टर” मूल रूप से: पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) का निवासी संगठन से जुड़ाव: आतंकी संगठन Al Badr उसे 2019 के पुलवामा हमले की साजिश में शामिल माना जाता था, जिसमें 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। भारत की कार्रवाई और दर्ज स्थितिभारत सरकार ने 2022 में उसे UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था उस पर आतंकी भर्ती, फंडिंग और हमलों की साजिश में शामिल होने के आरोप थे वह पाकिस्तान और PoK में सक्रिय नेटवर्क चलाने का आरोप झेल रहा था किन गतिविधियों में नाम सामने आया था?सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार उस पर आरोप थे कि वह: युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करता था फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट देता था CRPF पर ग्रेनेड हमलों जैसी घटनाओं में भूमिका में था विस्फोटक बरामदगी मामलों से जुड़ा था हत्या को लेकर क्या दावा है?रिपोर्ट्स में कहा गया है कि: PoK में अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया कई गोलियां लगने से मौके पर ही मौत हो गई हमले के पीछे कौन था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है आधिकारिक स्थिति अभी तक: किसी भी सरकार ने इस हत्या की स्वतंत्र पुष्टि या जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है यह घटना फिलहाल मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा सूत्रों के हवाले से सामने आई है
गर्मी ने बढ़ाई परेशानी: ट्रांसफार्मर फुंकने और बिजली गुल होने की घटनाएं तेज

मध्यप्रदेश । सतना जिले में भीषण गर्मी ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 45.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे अधिक तापमान है। लगातार बढ़ती गर्मी और लू के चलते मौसम विभाग ने 21 और 22 मई के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जिससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। तेज धूप और तपती गर्म हवाओं के कारण शहर और ग्रामीण इलाकों में आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दोपहर के समय बाजारों में सन्नाटा पसर जाता है और प्रमुख सड़कों पर आवाजाही बेहद कम हो जाती है। जरूरी कामों से बाहर निकलने वाले लोग भी सिर, चेहरा और शरीर को पूरी तरह ढककर ही घरों से निकलने को मजबूर हैं। मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 4 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड किया गया है, जबकि न्यूनतम तापमान 29.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से करीब 2 डिग्री अधिक है। लगातार बढ़ता तापमान आने वाले दिनों में और अधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का संकेत दे रहा है। भीषण गर्मी का असर केवल जनजीवन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है। तापमान बढ़ने के साथ ही एसी, कूलर और पंखों का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है, जिससे विद्युत लाइनों पर लोड कई गुना बढ़ गया है। इसके कारण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बार-बार बिजली कटौती की समस्या सामने आ रही है। स्थिति यह है कि लोड बढ़ने से ट्रांसफार्मरों में आग लगने और आर्मर्ड केबल के अत्यधिक गर्म होकर जलने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इससे बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है और कई इलाकों में घंटों बिजली गुल रहने की शिकायतें मिल रही हैं। विद्युत विभाग के अनुसार, गर्मी के इस चरम दौर में प्रतिदिन 800 से अधिक शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। इनमें मुख्य रूप से बिजली ट्रिपिंग, ट्रांसफार्मर खराब होना और लो वोल्टेज की समस्याएं शामिल हैं। विभागीय कर्मचारी लगातार फील्ड में काम कर रहे हैं, लेकिन बढ़ते लोड के कारण व्यवस्था पर दबाव कम नहीं हो पा रहा है। रेड अलर्ट के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी जा रही है। वहीं प्रशासन ने भी हीटवेव से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियों के निर्देश दिए हैं। कुल मिलाकर सतना इस समय भीषण गर्मी, लू और बिजली संकट की दोहरी मार झेल रहा है। यदि आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट नहीं आती, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
2029 चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, प्रदीप गुप्ता की भविष्यवाणी ने बढ़ाई राजनीतिक बहस

नई दिल्ली । देश की राजनीति को लेकर एक बार फिर बड़ा विश्लेषण सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। चुनावी सर्वे और राजनीतिक रुझानों पर काम करने वाली संस्था के प्रमुख प्रदीप गुप्ता ने 2029 के लोकसभा चुनाव और उससे आगे की राजनीतिक दिशा को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उनके अनुसार भारतीय राजनीति में मौजूदा सत्ता संतुलन आने वाले वर्षों में भी बड़े बदलाव की ओर नहीं जाता दिखाई दे रहा है, और इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है। प्रदीप गुप्ता ने अपने विश्लेषण में कहा कि देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव 2014 के बाद से देखा गया है, जिसने राजनीतिक परिदृश्य को काफी हद तक बदल दिया है। उनके अनुसार जिस तरह पहले कांग्रेस का लंबा शासनकाल रहा था, उसी तरह अब एक नई राजनीतिक साइकिल बन चुकी है, जो लंबी अवधि तक चल सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि यह राजनीतिक प्रभाव करीब दो दशकों तक जारी रह सकता है, जिससे चुनावी समीकरणों में स्थिरता जैसी स्थिति बनी रह सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हुए चुनावों के परिणाम यह संकेत देते हैं कि वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व को जनता से लगातार समर्थन मिल रहा है। विभिन्न राज्यों में हुए चुनावों के नतीजों को देखते हुए उनका मानना है कि राजनीतिक प्रभाव का दायरा लगातार मजबूत हो रहा है। उनके अनुसार जब किसी दल को लगातार बड़े जनादेश मिलते हैं तो उससे अपेक्षाएं भी बढ़ जाती हैं और उसे और बेहतर प्रदर्शन करना होता है। कांग्रेस को लेकर अपने आकलन में उन्होंने कहा कि पार्टी को अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने में अभी समय लग सकता है। उनके अनुसार पिछले लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहने के कारण संगठन और जनता के बीच विश्वास को फिर से स्थापित करने की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि लोकतंत्र में राजनीतिक बदलाव हमेशा संभव होते हैं, लेकिन इसके लिए समय और मजबूत रणनीति की आवश्यकता होती है। अपने विश्लेषण में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि देश के कई राज्यों में राजनीतिक प्रभाव का संतुलन स्पष्ट रूप से एक दिशा में झुका हुआ दिखाई देता है, जहां वर्तमान नेतृत्व मजबूत स्थिति में नजर आता है। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में चुनावी प्रतिस्पर्धा और अधिक रणनीतिक और जटिल हो सकती है। कुल मिलाकर उनके बयान ने 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। विभिन्न राजनीतिक दल इस तरह के आकलनों को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं, जबकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतिम परिणाम पूरी तरह जनता के मूड और आने वाले समय की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
ट्रंप, ईरान और चीन को लेकर ब्रह्मा चेलानी का बड़ा दावा: क्या बदल रही है वैश्विक राजनीति?

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ Brahma Chellaney ने हाल में एक श्रृंखला में ऐसे दावे किए हैं, जिनमें अमेरिका, ईरान, चीन और कैरेबियन क्षेत्र की भू-राजनीति को लेकर गंभीर टिप्पणियां शामिल हैं।इन दावों के अनुसार वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और अमेरिका की विदेश नीति नई दिशा में जा रही है। ट्रंप और वैश्विक रणनीति पर दावादावों में कहा गया है कि Donald Trump कथित तौर पर ईरान संकट के बीच नई रणनीतिक दिशा अपना रहे हैं। इसमें: मध्य पूर्व और कैरेबियन क्षेत्र में अमेरिका की सक्रियता बढ़ना क्यूबा और वेनेजुएला जैसी सरकारों पर दबाव की नीति सत्ता परिवर्तन (regime change) जैसी पुरानी रणनीतियों की वापसी का संकेत हालांकि ये सभी दावे विश्लेषण और टिप्पणी पर आधारित हैं, किसी आधिकारिक अमेरिकी नीति दस्तावेज से इनकी पुष्टि नहीं हुई है। क्यूबा और कैरेबियन तनाव का संदर्भचेलानी के अनुसार कैरेबियन क्षेत्र में तनाव के पीछे ये कारक बताए गए हैं: क्यूबा के खिलाफ आर्थिक और ऊर्जा प्रतिबंधों का विस्तार समुद्री नाकेबंदी और तेल आपूर्ति पर रोक के आरोप सैन्य गतिविधियों और निगरानी में वृद्धि इन घटनाओं को क्षेत्रीय संकट और मानवीय दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इन दावों पर अलग-अलग पक्षों की राय भिन्न है। चीन पर रणनीतिक टिप्पणीअपने एक अन्य विश्लेषण में चेलानी ने कहा कि: अमेरिका अब चीन को केवल प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि “समकक्ष महाशक्ति” के रूप में देख रहा है वैश्विक शक्ति संतुलन बहुध्रुवीय (multipolar) बनता जा रहा है एशिया में खासकर जापान और अन्य देशों के लिए चीन-अमेरिका संबंध महत्वपूर्ण तनाव कारक बन रहे हैं इस संदर्भ में China को लेकर वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा की चर्चा और तेज हो गई है। कितना तथ्य, कितना विश्लेषण?यह समझना जरूरी है कि: ये दावे मुख्यतः विश्लेषणात्मक टिप्पणियों और भू-राजनीतिक व्याख्या पर आधारित हैं इनमें कई बातें “प्रोजेक्शन” या “जियोपॉलिटिकल थ्योरी” के रूप में प्रस्तुत की गई हैं आधिकारिक अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इन सभी बिंदुओं की पुष्टि नहीं की है
दर्दनाक घटना: फंदे पर युवक, नीचे मिली सरकारी टीचर की खून से सनी लाश

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Satna जिले के कोलगवां थाना क्षेत्र में एक कमरे के अंदर दो शव मिलने से हड़कंप मच गया। कमरे के भीतर फर्श पर 29 वर्षीय सरकारी शिक्षिका पूनम अहिरवार का खून से लथपथ शव पड़ा था, जबकि उसके ऊपर 30 वर्षीय युवक अंबिकेश गौतम का शव फंदे से लटका हुआ मिला। यह घटना सामने आते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी। मौके से मिला खून से सना तवा, बढ़ा रहस्यघटनास्थल से एक खून और बालों से सना तवा भी बरामद हुआ है, जिसे कथित तौर पर तीसरी मंजिल से नीचे फेंका गया था। यह सबूत इस केस को और भी रहस्यमयी बना रहे हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि पहले युवती की हत्या की गई और बाद में युवक ने आत्महत्या कर ली। कैसे सामने आया मामलारीवा जिले के बेला गांव निवासी दो भाई एक ही कमरे में रहते थे। बड़ा भाई जब कमरे पर पहुंचा तो दरवाजा बाहर से बंद मिला। अंदर कूलर चलने की आवाज आ रही थी। फोन करने पर अंदर से ही रिंग बजने से शक गहरा गया। खिड़की से झांकने पर उसने फंदे पर युवक को देखा, जिसके बाद मकान मालिक की मदद से दरवाजा तोड़ा गया और अंदर भयावह दृश्य सामने आया। मृतका सरकारी टीचर, अनूपपुर की रहने वालीमृतका की पहचान Poonam Ahirwar के रूप में हुई है, जो अनूपपुर जिले की रहने वाली थीं और बाणसागर देवलोंद में वर्ग-1 की शिक्षिका थीं। परिजनों के अनुसार, वह 14 मई को घर से भोपाल जाने की बात कहकर निकली थीं, लेकिन सतना कैसे पहुंचीं, यह स्पष्ट नहीं है। पिता का आरोप तीसरे व्यक्ति की भूमिका संदिग्धमृतका के पिता ने इस मामले में हत्या का शक जताते हुए कहा कि उनकी बेटी का एक फल व्यापारी से संबंध था और वह इस केस में संदेह जता रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कमरे का ताला कैसे टूटा, हथियार कहां गया और क्या कोई तीसरा व्यक्ति इस वारदात में शामिल था। CCTV से मिला अहम सुरागपुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें 14 मई की रात दोनों को साथ कमरे की ओर जाते हुए देखा गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे। पुलिस जांच में कई एंगलपुलिस अब इस मामले मेंकॉल डिटेल रिकॉर्डसीसीटीवी फुटेजफॉरेंसिक रिपोर्टके आधार पर जांच कर रही है ताकि घटना की असली सच्चाई सामने आ सके। सतना का यह डबल डेथ केस अब भी कई सवाल छोड़ गया है—हत्या, आत्महत्या या तीसरे व्यक्ति की भूमिका? जांच के बाद ही इस रहस्यमयी घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
चार्जर विवाद के बाद अस्पताल में हड़कंप, महिला की सतर्कता से बचा नवजात

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Satna स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया जब एक युवक ने प्रसूता वार्ड से नवजात शिशु को झोले में रखकर बाहर ले जाने की कोशिश की। यह घटना मंगलवार-बुधवार की देर रात करीब 2 बजे की बताई जा रही है। चार्जर विवाद से शुरू हुआ मामलापुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी और नवजात की मां के बीच मोबाइल चार्जर को लेकर कहासुनी हुई थी। बताया जा रहा है कि इसी विवाद और नाराजगी के बाद आरोपी ने इस वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई।आरोपी को नशे की हालत में भी पाया गया है। दो दिन के नवजात को झोले में रखकर भागानवजात शिशु का जन्म दो दिन पहले ही हुआ था। आरोपी वार्ड के आसपास संदिग्ध रूप से घूमता रहा और बाद में बच्चे को दूध पिलाने के बहाने मां से दूर किया। इसके बाद जैसे ही महिला सो गई, उसने नवजात को झोले में रखा और अस्पताल से बाहर निकलने लगा। महिला की सतर्कता से बची बड़ी अनहोनीइसी दौरान एक अन्य महिला को झोले से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। शक होने पर जब उसने युवक से पूछताछ की तो वह भागने लगा। घबराहट में आरोपी झोला फेंककर फरार हो गया, लेकिन नवजात सुरक्षित बचा लिया गया। पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तारपुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आरोपी की पहचान की। आरोपी की पहचान पटनहा बिल्डिंग, कोलगवां निवासी विपिन सोनी के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर अपहरण के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है और न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया जारी है। सतना जिला अस्पताल की यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, लेकिन महिला की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया और नवजात सुरक्षित बचा लिया गया।
पाकिस्तान-ईरान का सीक्रेट डील दावा: क्या है पूरा मामला?

नई दिल्ली। हाल में कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और इज़रायली मीडिया दावों में यह कहा गया है कि पाकिस्तान और ईरान कथित तौर पर एक “सीक्रेट डील” पर काम कर रहे हैं, जिसमें अमेरिका से चल रही ईरान की बातचीत में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।इस पूरे विवाद को लेकर अभी तक किसी भी सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन दावों की पुष्टि नहीं की है, इसलिए इन्हें फिलहाल अनकन्फर्म्ड मीडिया रिपोर्ट्स के रूप में ही देखा जा रहा है। क्या दावा किया जा रहा है?रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोप यह हैं कि: पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहा है बदले में आर्थिक मदद या वित्तीय लाभ मिलने की बात कही जा रही है ईरान को अमेरिका के साथ “बेहतर डील” दिलाने में मदद का दावा इस प्रक्रिया में पाकिस्तान की “निष्पक्षता” पर सवाल उठाए जा रहे हैं BREAKING | The Secret Deal Between Iran and Pakistan • Pakistan is facing a deep economic crisis with over $100 billion in foreign debt • According to my sources, Tehran and Islamabad reached understandings under which Pakistan would help Iran secure a favorable deal. In… pic.twitter.com/1oXGgfWBLM — דרור בלאזאדה | Dror Balazada (@DBalazada) May 20, 2026 पाकिस्तान की भूमिका पर चर्चाइन दावों के बीच पाकिस्तान के कई शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के तेहरान दौरे को भी जोड़ा जा रहा है। इसमें शामिल हैं: गृह मंत्री के स्तर की यात्राएं विदेश नीति से जुड़े प्रतिनिधिमंडल सैन्य और कूटनीतिक संपर्क इन यात्राओं को कुछ रिपोर्ट्स में ईरान-अमेरिका बातचीत में सक्रिय कूटनीतिक भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। ईरान–अमेरिका तनाव की पृष्ठभूमियह पूरा मामला उस बड़े भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ा है जिसमें शामिल हैं: ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका और इज़रायल की सुरक्षा चिंताएं पश्चिम एशिया में लगातार सैन्य तनाव समय-समय पर हमलों और जवाबी कार्रवाइयों का दौर इस स्थिति में कई देशों द्वारा मध्यस्थता के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें पाकिस्तान का नाम भी सामने आता रहा है। इज़रायल की आपत्तिइज़रायली पक्ष की मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानों में: ईरान पर सख्त रुख की मांग अमेरिका की बातचीत नीति की आलोचना पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल हालांकि ये बयान राजनीतिक दृष्टिकोण से जुड़े हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं माना जा सकता।
देवरी में सूने मकान से जेवरात चोरी: परिवार अस्पताल में था, घर में हुई वारदात

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Sagar जिले के देवरी इलाके में चोरों ने एक सूने मकान में सेंध लगाकर बड़ी चोरी की घटना को अंजाम दिया। वारदात के समय घर का पूरा परिवार इलाज के लिए बाहर गया हुआ था। ताला तोड़कर घर में घुसे, अलमारी साफ कर गए चोरदेवरी बाजार वार्ड निवासी पुरुषोत्तम रैकवार के घर को निशाना बनाते हुए चोरों ने ताला तोड़ा और अंदर घुसकर अलमारी में रखे सोने-चांदी के जेवरात और नकदी पर हाथ साफ कर दिया। परिवार इलाज के सिलसिले में सागर गया हुआ था, जिसका फायदा उठाकर चोरों ने वारदात को अंजाम दिया। लाखों के जेवरात और नकदी ले उड़े चोरपीड़ित परिवार के अनुसार अलमारी में रखा पूरा कीमती सामान चोरी हो गया, जिसमें शामिल हैं-सोने का हार5 सोने की मालाएंअंगूठियां, चूड़ियां और झुमकीचांदी की करधोनी और पायलेंकरीब 1 लाख रुपए नकद कैसे हुई चोरी? घर में नहीं था कोईपरिवार इलाज के लिए गया हुआ था, जबकि घर की चाबी सामान्यतः एक ब्रश के डिब्बे में रखी जाती थी, जिसकी जानकारी केवल परिजनों को थी। इसी का फायदा उठाकर चोर अंदर घुसे। पुलिस जांच में जुटी, CCTV नहीं बना मददगारघटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। एफएसएल टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। हालांकि इलाके में CCTV कैमरे न होने से जांच और मुश्किल हो गई है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और मुखबिर तंत्र सक्रिय कर दिया गया है। देवरी की यह चोरी एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि सूने घरों की सुरक्षा कितनी कमजोर है। पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुटी है और जल्द खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है।