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AI और नौकरियों पर बड़ी बहस: Glean CEO अरविंद जैन बोले-“AI इंसानों की जगह नहीं लेगा”

नई दिल्ली। दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर नौकरी संकट की चर्चा तेज है। कई बड़ी टेक कंपनियां छंटनी कर रही हैं और इसकी बड़ी वजह AI ऑटोमेशन को माना जा रहा है। इसी बीच Arvind Jain ने AI को लेकर अलग राय रखते हुए कहा है कि “AI कभी इंसानों की जगह नहीं लेगा।भारतीय मूल के टेक उद्यमी और Glean के CEO अरविंद जैन ने यह बयान Fortune Workplace Innovation Summit के दौरान दिया। अरविंद जैन ने क्या कहा,जैन के मुताबिक,AI इंसानों को replace नहीं बल्कि empower करता है यह कर्मचारियों को ज्यादा सक्षम और उत्पादक बनाता है फिलहाल AI की वजह से किसी पद के पूरी तरह खत्म होने की स्थिति नहीं दिख रही उन्होंने कहा कि AI बेहतर क्वालिटी का काम करने में मदद करता है और इंसानों की भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। दूसरी तरफ छंटनी का दौरहालांकि टेक इंडस्ट्री की वास्तविक तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार: Meta ने AI फोकस के बीच हजारों कर्मचारियों की छंटनी शुरू की कई कंपनियां ऑटोमेशन और AI आधारित सिस्टम अपना रही हैं 2026 में अब तक बड़ी संख्या में टेक कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं टेक दिग्गजों की अलग-अलग रायAI को लेकर इंडस्ट्री दो हिस्सों में बंटी दिख रही है। AI से नौकरी खतरे की चेतावनी देने वाले:Anthropic के CEO डारियो अमोदेई Amazon के अधिकारी Microsoft के नेतृत्व समूह Jamie Dimon इनका मानना है कि AI कई white-collar jobs को प्रभावित कर सकता है। जबकि अरविंद जैन का दृष्टिकोण:AI को “काम का सहयोगी” मानता है इंसानों की जरूरत खत्म होने की बात से असहमत हैविशेषज्ञों के अनुसार असली बहस अब यह नहीं है कि “AI आएगा या नहीं”, बल्कि यह है कि: कौन-सी नौकरियां बदलेंगीकौन-से कौशल सबसे ज्यादा जरूरी होंगे इंसान और AI साथ कैसे काम करेंगे

कटनी में गर्मी का कहर: 42 डिग्री पर पहुंचा पारा, दोपहर में सड़कें सूनी

मध्यप्रदेश । कटनी जिले में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप लगातार लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। गुरुवार को जिले का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक पारा लगातार इसी स्तर पर बना रहा। तेज धूप और झुलसाने वाली गर्म हवाओं के कारण शहर की रफ्तार थमती नजर आई और मुख्य सड़कें तथा बाजार दोपहर के समय लगभग सूने दिखाई दिए। आमतौर पर भीड़भाड़ वाले बाजार, चौराहे और व्यावसायिक इलाके भीषण गर्मी के कारण वीरान नजर आए। लोग गर्म हवाओं और तेज धूप से बचने के लिए घरों में ही रहने को मजबूर दिखे। केवल जरूरी कामों के लिए ही लोग बाहर निकल रहे हैं और वे भी सिर, चेहरा तथा पूरा शरीर कपड़ों से ढंककर ही घर से बाहर कदम रख रहे हैं। गर्मी के इस दौर में सड़कों के किनारे लगे गन्ने के रस, लस्सी और छाछ के स्टॉल लोगों को कुछ राहत देते नजर आए। दोपहर के समय इन स्टॉलों पर हल्की चहल-पहल दिखाई दी, जहां लोग गर्मी से राहत पाने के लिए ठंडे पेय पदार्थों का सहारा लेते दिखे। लगातार बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने लोगों से सावधानी बरतने और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देने की अपील की है। विभाग ने सलाह दी है कि लोग प्यास न लगने पर भी नियमित रूप से पानी, ओआरएस घोल, नींबू पानी और छाछ का सेवन करते रहें, ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी कहा है कि दोपहर के समय भारी, तला-भुना और अधिक मसालेदार भोजन से बचना चाहिए। इसके स्थान पर हल्का भोजन और मौसमी फलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। विभाग के अनुसार, गर्मी के मौसम में खानपान और दिनचर्या में थोड़ी सावधानी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचा सकती है। नागरिकों को विशेष रूप से दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है। यदि किसी जरूरी कार्य से बाहर जाना पड़े तो सूती और हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनने तथा सिर को टोपी, छतरी या गमछे से ढंककर रखने को कहा गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले दो-तीन दिनों तक जिले में गर्मी और लू का असर इसी तरह बना रह सकता है। दिन के साथ-साथ रात के तापमान में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे लोगों को चौबीसों घंटे गर्मी से राहत नहीं मिल रही। प्रशासन ने भी बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। कटनी में लगातार बढ़ती गर्मी ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में लोगों को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी, क्योंकि मौसम का यह तीखा तेवर फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा।

भारत के स्मार्ट मीटर और ग्रिड अपग्रेड बाजार में बड़ी दौड़, Hitachi-ABB समेत कंपनियों में बढ़ी प्रतिस्पर्धा

नई दिल्ली । भारत के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में इस समय एक बड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जहां कई वैश्विक और घरेलू कंपनियां स्मार्ट मीटरिंग, ग्रिड ऑटोमेशन और हाई वोल्टेज सिस्टम के बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रही हैं। बिजली उत्पादन से लेकर उसके वितरण तक का पूरा सिस्टम अब तेजी से तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रहा है, जिससे इस क्षेत्र की कंपनियों के लिए अवसर भी बढ़े हैं और चुनौतियां भी उतनी ही जटिल हो गई हैं। स्मार्ट मीटरिंग और ग्रिड मॉडर्नाइजेशन को लेकर सरकार की योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत करोड़ों स्मार्ट मीटर लगाने की योजना है, लेकिन अभी तक इसका बड़ा हिस्सा लागू होना बाकी है। यही कारण है कि इस सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों की ऑर्डर बुक तेजी से बढ़ रही है और निवेशकों की नजर भी इन पर लगातार बनी हुई है। Hitachi Energy, ABB India, Siemens Energy और Genus Power जैसी कंपनियां इस पूरे इकोसिस्टम में प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रही हैं। इन कंपनियों को लगातार बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं, खासकर ग्रिड ऑटोमेशन, हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट सिस्टम और स्मार्ट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स में। हालांकि केवल ऑर्डर मिलना ही सफलता की गारंटी नहीं माना जा रहा है, क्योंकि असली चुनौती इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने और उन्हें रेवेन्यू में बदलने की होती है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में स्मार्ट मीटरिंग का लक्ष्य बेहद बड़ा है, लेकिन अभी तक इंस्टॉलेशन की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है। करोड़ों मीटर लगाने की योजना के मुकाबले वास्तविक इंस्टॉलेशन का आंकड़ा काफी कम है, जिससे यह साफ है कि आने वाले वर्षों में इस सेक्टर में काम की संभावनाएं काफी ज्यादा हैं। इसी वजह से कंपनियों के बीच इस बाजार को पकड़ने की दौड़ और तेज हो गई है। इस पूरे सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन भी है। बिजली ग्रिड को न केवल मजबूत बनाना होता है, बल्कि उसे रियल टाइम मॉनिटरिंग, कम लॉस और बेहतर स्टेबिलिटी के साथ चलाना भी जरूरी है। इसके अलावा बिजली चोरी को रोकना और वितरण प्रणाली को अधिक कुशल बनाना भी इस बदलाव का अहम हिस्सा है।

माचलपुर में द्वितीय MPL नाइट क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ

मध्यप्रदेश । राजगढ़ जिले के माचलपुर में बुधवार रात खेल प्रेमियों के लिए उत्साह और रोमांच से भरी शाम देखने को मिली, जब द्वितीय एमपीएल (MPL) नाइट क्रिकेट टूर्नामेंट का भव्य शुभारंभ किया गया। टूर्नामेंट का उद्घाटन मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री और जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह ने फीता काटकर किया। आयोजन की शुरुआत देशभक्ति और खेल भावना के माहौल में हुई, जहां मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों, आयोजकों और दर्शकों ने मानव श्रृंखला बनाकर सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया। इसके बाद तिरंगे ध्वज का पूजन किया गया और विजेता ट्रॉफी का अनावरण हुआ। कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद अतिथियों का सम्मान दुपट्टा और एमपीएल की विशेष टोपी पहनाकर किया गया। पूरे आयोजन में युवाओं और खेल प्रेमियों का उत्साह देखने लायक था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रियव्रत सिंह ने आयोजन समिति और आरबीसी (RBC) क्रिकेट क्लब के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के खेल आयोजन ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के युवाओं को खेलों से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को खेल भावना बनाए रखते हुए अनुशासन और टीम भावना के साथ खेलने की सलाह दी। साथ ही सभी टीमों को बेहतर प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं भी दीं। टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबले बेहद रोमांचक रहे। पहला मैच फ्रेंड्स इलेवन छापीहेड़ा और लीमा स्पोर्ट्स जीरापुर के बीच खेला गया। पहले बल्लेबाजी करते हुए छापीहेड़ा की टीम ने निर्धारित 8 ओवरों में 7 विकेट खोकर 78 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी लीमा स्पोर्ट्स जीरापुर की टीम ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 6.4 ओवर में 4 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और मुकाबला 6 विकेट से अपने नाम कर लिया। इस जीत के सबसे बड़े हीरो इलियास रहे, जिन्होंने गेंदबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 2 ओवर में केवल 7 रन देकर 3 विकेट हासिल किए। इसके अलावा उन्होंने विजयी चौका लगाकर टीम को जीत दिलाई। उनके शानदार प्रदर्शन की दर्शकों ने जमकर सराहना की। दूसरा मुकाबला लीमा स्पोर्ट्स जीरापुर और आमलाबे वॉरियर्स के बीच खेला गया। इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए लीमा स्पोर्ट्स ने फिर से 8 ओवर में 7 विकेट खोकर 78 रन बनाए। जवाब में आमलाबे वॉरियर्स की टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 3 गेंद शेष रहते 4 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और मुकाबला 6 विकेट से जीत लिया। इस मैच में गोलू कुरैशी ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन किया। उन्होंने गेंदबाजी में 2 विकेट लेने के साथ बल्लेबाजी में 16 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। माचलपुर में शुरू हुआ यह नाइट क्रिकेट टूर्नामेंट अब क्षेत्र के खेल प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। आने वाले मुकाबलों को लेकर खिलाड़ियों और दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

जमीन विवाद में मां को ही बेघर करने पर उतारू हुए बेटे, पंचायत में मांगी माफी

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के विदिशा जिले से रिश्तों को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है, जहां 7 बेटों और 3 बेटियों की मां अपने ही परिवार के बीच अकेली पड़ गई। जमीन विवाद ने परिवार में ऐसी दरार पैदा कर दी कि बुजुर्ग मां को पंचायत का सहारा लेना पड़ा। हालांकि, पंचायत की समझाइश और सामाजिक दबाव के बाद बेटों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मां के पैर छूकर माफी मांगी। बताया जा रहा है कि परिवार में जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। आरोप है कि कुछ बेटों ने मां की जमीन पर कब्जा कर लिया और उन्हें ही घर तथा संपत्ति के अधिकार से दूर करने की कोशिश की। इस स्थिति से परेशान बुजुर्ग महिला ने गांव की पंचायत में गुहार लगाई। मामला सामने आने के बाद गांव में चर्चा का विषय बन गया और पंचायत ने दोनों पक्षों को बुलाकर समझाइश दी। पंचायत में जब मां ने अपनी पीड़ा सुनाई तो वहां मौजूद लोग भावुक हो गए। बुजुर्ग महिला ने कहा कि जिन बच्चों को उसने पाल-पोसकर बड़ा किया, वही आज उसे अकेला छोड़ रहे हैं। मां की बात सुनकर पंचायत प्रतिनिधियों ने बेटों को फटकार लगाई और परिवार की जिम्मेदारी समझाई। समझाइश के दौरान पंचायत ने साफ कहा कि माता-पिता का सम्मान करना केवल नैतिक जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि सामाजिक कर्तव्य भी है। पंचायत के हस्तक्षेप और ग्रामीणों की मौजूदगी में बेटों ने अपनी गलती मानी और मां के पैर छूकर माफी मांगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगे से मां का पूरा सम्मान किया जाएगा और जमीन विवाद को आपसी सहमति से सुलझाया जाएगा। इस घटना ने गांव में परिवार और रिश्तों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। ग्रामीणों का कहना है कि संपत्ति और जमीन के विवाद अब रिश्तों पर भारी पड़ते जा रहे हैं। जहां पहले संयुक्त परिवारों में आपसी सहयोग और सम्मान की भावना दिखाई देती थी, वहीं अब कई मामलों में माता-पिता तक को उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत के सदस्यों ने भी लोगों से अपील की कि परिवारिक विवादों को आपसी बातचीत और समझदारी से सुलझाया जाए, ताकि रिश्तों में कड़वाहट न आए। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता का सम्मान हर संतान का पहला कर्तव्य होना चाहिए। हालांकि पंचायत में समझौते के बाद फिलहाल मामला शांत हो गया है, लेकिन यह घटना समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी छोड़ गई है कि आखिर आधुनिक दौर में रिश्तों की अहमियत क्यों कम होती जा रही है। जिस मां ने अपने बच्चों के लिए पूरी जिंदगी संघर्ष किया, वही मां अपने बुढ़ापे में सम्मान और सहारे के लिए पंचायत के सामने गुहार लगाने को मजबूर हो गई।

कड़ी निगरानी में फलता सीट पर पुनर्मतदान, ईवीएम विवाद के बाद जनता की मजबूत भागीदारी, राजनीतिक मुकाबला हुआ रोचक

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान की प्रक्रिया गुरुवार को कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शांतिपूर्ण ढंग से जारी रही। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और लोगों में अपने मताधिकार को लेकर विशेष उत्साह नजर आया। दोपहर 1 बजे तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में 60 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो स्थानीय प्रशासन और चुनाव प्रक्रिया के प्रति जनता के सक्रिय रुझान को दर्शाता है। पूरे इलाके में केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है ताकि मतदान प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके। इस पुनर्मतदान की आवश्यकता उस समय उत्पन्न हुई जब मुख्य मतदान के दौरान कुछ पोलिंग बूथों पर ईवीएम और मतदाता सूची से जुड़ी तकनीकी एवं प्रशासनिक गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आईं। आरोप था कि नाम वापसी के बाद भी कुछ मशीनों में संबंधित उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिह्न प्रदर्शित हो रहा था, जिससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। इस गंभीर स्थिति के सामने आने के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे और व्यापक शिकायतों के आधार पर संबंधित बूथों पर पुनर्मतदान का निर्णय लिया गया। नए मतदान में सभी ईवीएम को अपडेट कर पूरी तरह संशोधित किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या भ्रम की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले से अधिक मजबूत किया गया है और हर मतदान केंद्र पर निगरानी के लिए विशेष टीमों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही सभी संवेदनशील क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी गई है और लगातार निगरानी की जा रही है। सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लोकतंत्र के प्रति जागरूकता और सक्रिय भागीदारी को दर्शा रही हैं। महिला और पुरुष दोनों वर्गों के मतदाताओं में अपने मताधिकार को लेकर उत्साह देखा गया है। प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की गड़बड़ी या दबाव की स्थिति को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुनर्मतदान भले ही सीमित क्षेत्र में हो रहा हो, लेकिन इसका प्रभाव क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों पर महत्वपूर्ण हो सकता है। विभिन्न दलों के बीच यह मुकाबला अब और भी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि मतदान के रुझान आगामी राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में शांतिपूर्ण माहौल में मतदान जारी है और प्रशासन इसे सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए पूरी तरह सतर्क है।

अमेरिका को निशाना बनाने वाले ठगी गिरोह का पर्दाफाश, भारतीय कॉल सेंटर पर बड़ी जांच और गिरफ्तारियां

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें भारत में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर पर अमेरिकी नागरिकों से लाखों डॉलर की ठगी करने के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में अमेरिका की आंतरिक खुफिया एजेंसी ने जांच के बाद बड़ा कदम उठाते हुए पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के बाद साइबर अपराध की दुनिया में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय गिरोहों पर एक बार फिर कड़ी निगरानी और सख्ती की चर्चा तेज हो गई है। जांच में सामने आया है कि यह कॉल सेंटर तकनीकी सहायता और अन्य सेवाओं के नाम पर अमेरिकी नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों को निशाना बनाता था। पीड़ितों को भ्रमित कर उनसे संवेदनशील जानकारी और धन की अवैध वसूली की जाती थी। इस पूरे नेटवर्क को एक संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसमें कॉल रूटिंग से जुड़े कुछ तकनीकी ढांचे और टेलीमार्केटिंग से जुड़े लोग भी शामिल थे। इस मामले में दो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों की नहीं बल्कि एक संगठित प्रणालीगत धोखाधड़ी थी। जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया है और आगे की कार्रवाई जारी है। यह कार्रवाई एक विस्तृत जांच का परिणाम है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए कई महत्वपूर्ण सुराग जुटाए गए। अमेरिकी एजेंसी ने अपने बयान में यह भी कहा है कि इस तरह की धोखाधड़ी का सबसे बड़ा निशाना अक्सर वरिष्ठ नागरिक होते हैं, जिन्हें तकनीकी जानकारी कम होने के कारण आसानी से भ्रमित किया जा सकता है। एजेंसी के अनुसार ऐसे अपराध न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि पीड़ितों को मानसिक रूप से भी प्रभावित करते हैं, जिससे वे भय और असुरक्षा की स्थिति में आ जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार पिछले वर्ष इस प्रकार के तकनीकी सहायता आधारित घोटालों के कारण अमेरिका में अरबों डॉलर का नुकसान दर्ज किया गया था। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि साइबर अपराध अब केवल छोटे स्तर का अपराध नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैश्विक स्तर की गंभीर चुनौती बन चुका है। अकेले कुछ क्षेत्रों में ही लाखों डॉलर के नुकसान की शिकायतें दर्ज की गई हैं, जो इस समस्या की व्यापकता को दर्शाती हैं। इस पूरे मामले में भारतीय टेलीमार्केटिंग और कॉल सेंटर नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि कुछ व्यवसायिक इकाइयों और उनसे जुड़े लोगों ने इस धोखाधड़ी को सुचारू रूप से चलाने में मदद की। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क कई स्तरों पर काम करते हैं और तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों को निशाना बनाते हैं। फिलहाल इस मामले में जांच जारी है और कई अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ वैश्विक सहयोग और सख्ती का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है, जो आने वाले समय में ऐसे अपराधों पर रोक लगाने में मददगार साबित हो सकती है।

शौचालय, पेयजल और एस्केलेटर सुधारने के आदेश, DRM ने लिया जायजा

मध्यप्रदेश । भोपाल रेल मंडल के डीआरएम पंकज त्यागी ने बुधवार रात विदिशा रेलवे स्टेशन का निरीक्षण कर अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चल रहे विकास कार्यों और यात्री सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान डीआरएम का सख्त रवैया देखने को मिला। जहां कहीं भी लापरवाही, अव्यवस्था या यात्रियों की सुविधा में कमी नजर आई, वहां उन्होंने अधिकारियों, ठेकेदारों और वेंडरों को जमकर फटकार लगाई और तुरंत सुधार के निर्देश दिए। डीआरएम ने निरीक्षण की शुरुआत प्लेटफॉर्म नंबर-1 से की, जहां उन्होंने यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की बारीकी से जांच की। दिव्यांग शौचालय के सामने वेंडर कर्मचारियों को बैठे देख उन्होंने नाराजगी जताई और तत्काल उन्हें हटाने के निर्देश दिए। इसी दौरान एक यात्री ने शिकायत की कि रात के समय स्टेशन के शौचालय बंद कर दिए जाते हैं, जिससे यात्रियों विशेषकर महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शिकायत सुनते ही डीआरएम ने स्टेशन अधीक्षक और संबंधित ठेकेदार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी लापरवाही दोबारा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान पेयजल व्यवस्था की भी जांच की गई। एक स्टॉल पर पानी की बोतल का मूल्य पूछने पर कर्मचारी सही जानकारी नहीं दे सका, जिस पर डीआरएम ने वेंडरों को साफ चेतावनी दी कि ओवररेटिंग, यात्रियों से अभद्र व्यवहार या किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर उनका लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है। इसके बाद डीआरएम ने स्टेशन परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने स्वचालित सीढ़ियों, नए फुट ओवरब्रिज (एफओबी), एस्केलेटर और प्लेटफॉर्म शेड की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और सभी कार्य तय समय सीमा में पूरे किए जाएं। निरीक्षण के दौरान डीआरएम ने कई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए। उन्होंने प्लेटफॉर्म क्रमांक-4 पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण शीघ्र पूरा करने, नए एफओबी पर सीसीटीवी कैमरे लगाने, प्लेटफॉर्म और एस्केलेटर शेड में सुधार करने और वेटिंग रूम के खाली हिस्सों में आकर्षक पेंटिंग कराने को कहा। इसके अलावा पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाने, एटीवीएम मशीन को हमेशा चालू रखने और प्लेटफॉर्म के सभी वॉटर स्टैंड की मरम्मत कराने के निर्देश भी दिए गए। डीआरएम पंकज त्यागी ने बताया कि यह एक नियमित निरीक्षण था और इसमें जो कमियां सामने आई हैं, उन्हें मौके पर ही सुधारने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्टेशन के लोकार्पण की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। हालांकि अभी उद्घाटन की तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन प्लेटफॉर्म 1 से 3 तक यात्रियों की आवाजाही के लिए नया एफओबी और एस्केलेटर लोकार्पण से पहले शुरू कर दिए जाएंगे। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करोड़ों रुपए की लागत से विदिशा रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। ऐसे में डीआरएम का सख्त निरीक्षण यह संकेत दे रहा है कि रेलवे स्टेशन के लोकार्पण से पहले किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ना चाहता।

पीएम मोदी के गिफ्ट पर टिप्पणी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज, प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए सवाल

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री को भेंट किए गए ‘मेलोडी’ चॉकलेट गिफ्ट के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे को लेकर शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने रुपये की डॉलर के मुकाबले गिरती कीमत को लेकर टिप्पणी करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर दिए गए अपने बयान में प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि “मेलोडी खाओ और खुश हो जाओ”, जिसे उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से सरकार की कार्यशैली पर कटाक्ष के रूप में पेश किया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और विभिन्न पक्षों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को लेकर बहस पहले से ही जारी है। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि रुपये की गिरती कीमत को लेकर चिंता जताने के बजाय सरकार इसे अलग नजरिए से पेश कर रही है। उनके अनुसार, यह कहना कि डॉलर मजबूत हो रहा है और रुपया कमजोर नहीं हो रहा, वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता। इस टिप्पणी को उन्होंने आर्थिक मुद्दों पर सरकार के रुख पर अप्रत्यक्ष सवाल के रूप में पेश किया। इससे पहले भी उन्होंने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को जोड़ते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी, जिसमें युवाओं की नौकरी की अपेक्षाओं और मौजूदा रोजगार स्थिति पर कटाक्ष किया गया था। इन बयानों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है और सोशल मीडिया पर भी व्यापक बहस छेड़ दी है। विवाद बढ़ने के साथ ही यह मामला केवल एक गिफ्ट या बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक स्थिति और राजनीतिक संवाद का विषय बन गया है। समर्थकों और आलोचकों के बीच इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जहां एक पक्ष इसे व्यंग्य के रूप में देख रहा है, वहीं दूसरा इसे राजनीतिक हमला मान रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान अक्सर मौजूदा आर्थिक और राजनीतिक माहौल में प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देखे जाते हैं, लेकिन इनके सार्वजनिक प्रभाव व्यापक हो सकते हैं। खासकर जब यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते हैं, तो उनका असर राजनीतिक विमर्श पर भी दिखाई देता है। कुल मिलाकर ‘मेलोडी’ गिफ्ट से शुरू हुआ यह मामला अब रुपये की स्थिति और आर्थिक नीतियों की बहस तक पहुंच गया है। इससे एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ है कि राजनीतिक बयानबाजी और प्रतीकात्मक घटनाएं किस तरह तेजी से राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बन जाती हैं और विभिन्न मुद्दों को एक साथ जोड़ देती हैं।

विदिशा में हादसे का खतरा: न गोताखोर, न होमगार्ड, फिर भी नदी में उतर रहे लोग

मध्यप्रदेश । विदिशा में भीषण गर्मी और अधिक मास के चलते नदी घाटों पर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने से लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नदी का रुख कर रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि प्रशासन द्वारा खतरनाक घोषित और प्रतिबंधित किए गए बगला घाट पर भी बड़ी संख्या में लोग स्नान करने पहुंच रहे हैं। घाट पर लगे चेतावनी बोर्डों को नजरअंदाज करते हुए बच्चे, युवा और बुजुर्ग नदी में उतर रहे हैं, जबकि मौके पर सुरक्षा के नाम पर कोई व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही। बगला घाट को पहले ही प्रशासन ने जोखिमपूर्ण क्षेत्र घोषित कर यहां स्नान पर रोक लगा दी थी। इसके पीछे मुख्य कारण नदी की अधिक गहराई और तेज जल प्रवाह है। पूर्व में यहां कई दर्दनाक हादसे हो चुके हैं, जिनमें लोगों की डूबने से मौत तक हो चुकी है। बावजूद इसके, लोग अपनी जान जोखिम में डालकर घाट पर पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह के समय घाट पर सबसे अधिक भीड़ रहती है। लोग धार्मिक आस्था और गर्मी से राहत दोनों कारणों से यहां स्नान करने आते हैं। अधिक मास का धार्मिक महत्व होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ गई है। घाट स्थित मंदिर के पुजारी ने बताया कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे खतरा पहले से ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। शहर में स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं की कमी भी लोगों को नदी की ओर खींच रही है। कई परिवार अपने बच्चों को तैरना सिखाने के लिए भी इसी घाट पर ला रहे हैं। यह स्थिति और अधिक खतरनाक बन जाती है क्योंकि घाट पर न तो प्रशिक्षित गोताखोर मौजूद हैं और न ही किसी प्रकार की रेस्क्यू टीम तैनात है। स्थानीय निवासी अश्वनी राजपूत ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यहां स्नान करते हैं, लेकिन उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल होमगार्ड जवानों और गोताखोरों की तैनाती की मांग की है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल चेतावनी बोर्ड लगाकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। जब तक घाट पर सख्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होगी, तब तक लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे। लोगों ने मांग की है कि प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाए और घाट पर नियमित गश्त बढ़ाई जाए। भीषण गर्मी के बीच बगला घाट पर बढ़ती भीड़ और सुरक्षा इंतजामों की कमी किसी बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रही है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह केवल चेतावनी जारी करने तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई भी सुनिश्चित करे।