Chambalkichugli.com

भारत ने रचा नया इतिहास: बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बना, अमेरिका को पीछे छोड़ा

नई दिल्ली । दक्षिण एशिया के व्यापारिक समीकरणों में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है, जिसमें भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनने का स्थान हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि दोनों पड़ोसी देशों के बीच बढ़ती आर्थिक निर्भरता, बेहतर कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग में हो रही प्रगति का संकेत मानी जा रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूती देखी गई है। ऊर्जा, खाद्य उत्पाद, कपड़ा, दवाइयां, मशीनरी और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े सामानों के आदान-प्रदान में तेजी आई है। भौगोलिक निकटता और कम परिवहन लागत ने भारत को बांग्लादेश के लिए एक सुविधाजनक और किफायती व्यापारिक साझेदार बना दिया है। इसी कारण आयात और निर्यात दोनों स्तरों पर भारत की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, फरवरी महीने में बांग्लादेश के कुल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 8.47 प्रतिशत रही, जिससे वह अमेरिका से आगे निकल गया। वहीं, इस अवधि में संयुक्त राज्य अमेरिका की हिस्सेदारी 8.46 प्रतिशत दर्ज की गई, जिससे दोनों देशों के बीच बहुत कम अंतर के बावजूद भारत ने दूसरा स्थान हासिल कर लिया। हालांकि, इस सूची में चीन अब भी शीर्ष पर बना हुआ है, जिसकी हिस्सेदारी 21 प्रतिशत से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार में आई यह वृद्धि केवल आंकड़ों का बदलाव नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों के गहराने का संकेत है। सीमा व्यापार, रेलवे संपर्क, बंदरगाह सहयोग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं ने इस व्यापारिक वृद्धि को गति दी है। इसके साथ ही मुक्त व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारत और बांग्लादेश के व्यापारिक संबंधों में कुछ उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले हैं। विशेष रूप से कुछ समय के लिए प्रशासनिक बाधाओं, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में देरी और कुछ उत्पादों पर प्रतिबंध जैसे कारणों ने व्यापार को प्रभावित किया था। इसके अलावा राजनीतिक तनाव का असर भी द्विपक्षीय व्यापार पर पड़ा था। लेकिन हाल के समय में संबंधों में सुधार के संकेत मिले हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियों में फिर से तेजी आई है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका के साथ बांग्लादेश के व्यापार में भी अस्थायी बढ़ोतरी देखी गई थी, जब एलपीजी, कपास और गेहूं जैसे उत्पादों के आयात में तेजी आई थी। इसी कारण कुछ महीनों के लिए अमेरिका की हिस्सेदारी भारत से आगे निकल गई थी, लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं रही और बाद में भारत ने अपनी स्थिति पुनः मजबूत कर ली। चीन अभी भी बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है, विशेषकर औद्योगिक कच्चे माल, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आपूर्ति में उसकी प्रमुख भूमिका है। इसके अलावा इंडोनेशिया और ब्राज़ील जैसे देश भी बांग्लादेश के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं, जो ऊर्जा, खाद्य तेल और कृषि उत्पादों की आपूर्ति करते हैं। भारत की यह बढ़त दक्षिण एशिया में बदलते आर्थिक परिदृश्य और क्षेत्रीय सहयोग की मजबूती को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक संबंध और अधिक मजबूत हो सकते हैं, जिससे दोनों देशों की आर्थिक वृद्धि को नई दिशा मिलेगी।

बंगाल में बड़ा सर्च ऑपरेशन: ईडी ने रंगदारी और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर कसा शिकंजा, कई शहरों में एक साथ कार्रवाई

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में गुरुवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। कोलकाता से लेकर मुर्शिदाबाद तक कई ठिकानों पर एक साथ की गई छापेमारी ने कथित रंगदारी और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े नेटवर्क पर जांच एजेंसियों का शिकंजा और कस दिया है। यह कार्रवाई सुबह करीब छह बजे शुरू हुई, जब अलग-अलग टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर दबिश दी और जांच अभियान को तेज कर दिया। सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला कथित जबरन वसूली और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच लंबे समय से चल रही थी। जांच एजेंसी को शुरुआती इनपुट्स में ऐसे संकेत मिले थे कि इस नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध धन को इधर-उधर किया गया और उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई। इसी आधार पर कई स्थानों को चिन्हित कर एक साथ कार्रवाई की गई। कोलकाता के रॉय स्ट्रीट इलाके में स्थित एक होटल और एक कारोबारी के घर पर जांच टीमों ने छापेमारी की। इसके अलावा शहर के कुछ अन्य हिस्सों में भी तलाशी अभियान चलाया गया, जहां दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच की गई। इसी दौरान कोलकाता पुलिस से जुड़े एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और एक सब-इंस्पेक्टर के आवास पर भी जांच एजेंसी की टीमों के पहुंचने की जानकारी सामने आई, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। वहीं मुर्शिदाबाद जिले के कांडी इलाके में भी एक महत्वपूर्ण ठिकाने पर छापेमारी की गई, जो कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े व्यक्ति का निवास बताया जा रहा है। जांच एजेंसी इस पूरे मामले में आर्थिक लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि धन का प्रवाह किन माध्यमों से और किन लोगों तक पहुंचा। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पूछताछ और प्रारंभिक विश्लेषण के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क में कई संस्थाओं और व्यक्तियों का उपयोग किया गया, जिसके जरिए काले धन को वैध आर्थिक ढांचे में बदलने की कोशिश की गई। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि इस पूरे रैकेट से किन प्रभावशाली लोगों को लाभ मिला और उनका इसमें क्या रोल रहा। फिलहाल जांच एजेंसी की टीमें दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड को खंगालने में जुटी हैं। अभी तक इस कार्रवाई को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन यह साफ है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे संभव हैं।

जबलपुर में बड़ा जमीन घोटाला: 37 लाख की रजिस्ट्री, महिला को मिले सिर्फ 5 लाख

मध्य प्रदेश । जबलपुर में देश की चौथी सबसे बड़ी रिंग रोड परियोजना के निर्माण के साथ ही एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आने के आरोपों ने हड़कंप मचा दिया है। पनागर, पाटन और बरगी क्षेत्र में आदिवासी और कोल समुदाय के परिवारों की जमीनों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के दावे किए जा रहे हैं। आरोप है कि जिन जमीनों को शासन ने गरीब आदिवासी परिवारों को केवल जीवनयापन और खेती के लिए दिया था, उन्हीं जमीनों की खरीद-फरोख्त अवैध तरीके से की जा रही है। रिंग रोड प्रोजेक्ट के कारण इन जमीनों की कीमत अचानक करोड़ों रुपये तक पहुंच गई है, जिसका फायदा भू-माफिया उठा रहे हैं। मामले में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, मंझगवा निवासी किस्सो बाई की 0.56 हेक्टेयर जमीन 37 लाख रुपये में बेची गई थी। रजिस्ट्री में यह राशि बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए दिखायी गई है, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि उसे वास्तविक रूप से केवल करीब 5 लाख रुपये ही मिले। बाकी रकम का कोई स्पष्ट भुगतान नहीं हुआ। इसी तरह एक अन्य मामले में संदीप कोल और उनके परिवार की 0.474 हेक्टेयर जमीन 33 लाख 40 हजार रुपये में बेची गई, जिसमें अलग-अलग बैंकों के जरिए भुगतान दर्शाया गया है, लेकिन पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें पूरी राशि नहीं मिली और लेनदेन में गड़बड़ी की गई है। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से चल रहा है, जिसमें सरकारी और अहस्तांतरणीय जमीनों को भी अवैध रूप से ट्रांसफर किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस नेटवर्क में कई प्रभावशाली लोग भी शामिल हो सकते हैं। प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया है कि ये जमीनें मूल रूप से सरकार द्वारा आदिवासी समुदाय को दी गई थीं, जिन्हें कानूनी रूप से बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद रजिस्ट्री और बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए बिक्री दिखाना गंभीर सवाल खड़े करता है। जबलपुर एसडीएम अभिषेक सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि यह एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी और वह स्वयं मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करेंगे। फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। इस खुलासे के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और कई अन्य रजिस्ट्रियों की भी जांच की संभावना जताई जा रही है।

नशे में की गई हरकत पर पुलिस एक्शन, पहले भी कर चुका था नुकसान

मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले के सूंड गांव में डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति तोड़े जाने की घटना के बाद फैले तनाव के बीच पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में आरोपी कैलाश यादव को पुलिस ने दबोचकर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। घटना 20 और 21 मई की दरमियानी रात की बताई जा रही है, जब ग्राम सूंड निवासी विकास जाटव ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि डॉ. अंबेडकर की मूर्ति को खंडित कर दिया गया है। इस घटना से गांव में लोगों की धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत हुईं और माहौल तनावपूर्ण हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिरसौद थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और भारतीय न्याय संहिता की धारा 298 के तहत केस दर्ज कर जांच प्रारंभ की। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई। पुलिस ने आरोपी कैलाश यादव (35), निवासी ग्राम सूंड (हाल निवासी ग्राम खर्द) को बेरजा नदी पुलिया के पास से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की गई, जिसमें उसने स्वीकार किया कि घटना के समय वह अत्यधिक शराब के नशे में था और उसी हालत में उसने मूर्ति को नुकसान पहुंचाया। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी वर्ष 2018 में इसी तरह की घटना में शामिल रहा है, जिससे उसकी आपराधिक प्रवृत्ति की पुष्टि होती है। पुलिस अब उसके पुराने रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। इस घटना के बाद गांव में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसे पुलिस ने पूरा कर दिखाया है। फिलहाल आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

कठमई में पेयजल समस्या पर सवाल: सुविधा के बावजूद क्यों नहीं मिल रहा पानी?

मध्य प्रदेश । शिवपुरी नगर पालिका क्षेत्र के कठमई इलाके में जल संकट की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। यहां रहने वाले कई परिवार आज भी एकमात्र बोरवेल के सहारे अपनी पानी की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों को उस समय सबसे ज्यादा परेशानी होती है जब यह बोरवेल खराब हो जाता है। ऐसी स्थिति में महिलाओं और बच्चों को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से नियमित पानी आपूर्ति की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। दिलचस्प बात यह है कि इस इलाके में नल जल योजना के तहत पानी की टंकी का निर्माण और पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा किया जा चुका है। यहां तक कि पाइपलाइन का परीक्षण भी सफल बताया जा रहा है। इसके बावजूद अब तक अधिकांश घरों में पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इस स्थिति को लेकर प्रशासन और स्थानीय निवासियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ लोग पानी की कमी से परेशान हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन का दावा है कि सभी व्यवस्थाएं पूरी हो चुकी हैं। नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) इशांक धाकड़ ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कठमई क्षेत्र में जल आपूर्ति की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उनके अनुसार, समस्या यह है कि कई रहवासी अभी तक नल कनेक्शन नहीं ले रहे हैं, जिसके कारण घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। सीएमओ ने यह भी कहा कि जैसे ही लोग नगर पालिका से नल कनेक्शन लेंगे, उनके घरों में नियमित जल आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। हालांकि, स्थानीय लोग इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि प्रक्रिया और व्यवस्था दोनों को और सरल किया जाना चाहिए। कुल मिलाकर, कठमई क्षेत्र में तैयारियों के बावजूद पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है और लोग रोजाना परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

शादी से लौटते परिवार की गुमशुदगी का 26 साल बाद दर्दनाक खुलासा, नहर से निकली पुरानी वैन

नई दिल्ली । भाखड़ा नहर में 26 साल पहले हुई एक रहस्यमयी गुमशुदगी का अंत आखिरकार उस समय हुआ जब गहराई में दबी एक पुरानी वैन और उसमें मौजूद मानव अवशेषों ने पूरे मामले की परतें खोल दीं। यह घटना न केवल एक दर्दनाक हादसे की याद दिलाती है बल्कि उस लंबे इंतजार की कहानी भी बयान करती है, जिसमें एक परिवार और गांव ने दशकों तक अपने प्रियजनों की वापसी की उम्मीद को जिंदा रखा। साल 2000 में कोटला गांव के चार लोग एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे। तेज राम, मुन्नी लाल, सुरजीत सिंह और सुरजीत का आठ साल का बेटा कालू एक वैन में सवार थे। यह वैन तेज राम की थी, जिसे उन्होंने हाल ही में जमीन बेचकर खरीदा था। लेकिन उस रात घर लौटते समय चारों लोग अचानक लापता हो गए। न तो उनका कोई सुराग मिला और न ही वैन का पता चल सका। यह मामला धीरे-धीरे एक रहस्यमयी गुमशुदगी में बदल गया, जिसने पूरे क्षेत्र को लंबे समय तक बेचैन रखा। परिजनों ने वर्षों तक खोज जारी रखी। खेत बिके, आर्थिक संसाधन खत्म हुए, निजी स्तर पर गोताखोरों की मदद ली गई और नहरों की तलाशी तक करवाई गई, लेकिन हर प्रयास नाकाम रहा। समय के साथ उम्मीदें धुंधली पड़ती गईं, लेकिन सवाल वही बना रहा कि आखिर उस रात हुआ क्या था। हाल ही में एक अन्य मामले की जांच के दौरान जब गोताखोर भाखड़ा नहर में उतरे, तो तलाशी अभियान के दौरान उन्हें पानी की गहराई में एक पुरानी वैन दिखाई दी। वैन को बाहर निकाला गया तो अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। वाहन के भीतर मानव कंकाल, पुराने कपड़े और कुछ निजी सामान बरामद हुए, जिससे यह पुष्टि हुई कि यह वही वाहन है जो 26 साल पहले लापता हुआ था। प्रारंभिक जांच में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि रात के समय दृश्यता कम होने के कारण वैन अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई होगी, और अंदर बैठे लोग बाहर निकलने में असमर्थ रहे होंगे। तेज बहाव और गहरी जलधारा के कारण वाहन वर्षों तक पानी के भीतर छिपा रहा और किसी को इसकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में शोक और सन्नाटा फैल गया है। जिस परिवार ने इतने वर्षों तक अपने परिजनों की वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी थी, उन्हें अब 26 साल बाद यह कठोर सत्य मिला है कि उनका इंतजार कभी पूरा नहीं हो सकता। गांव में लोग इस घटना को एक ऐसे Cold Case के रूप में देख रहे हैं, जिसने समय के साथ अपनी परतें खोली हैं लेकिन साथ ही कई सवाल भी छोड़ दिए हैं। यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि कुछ रहस्य समय के साथ दबते नहीं, बल्कि और अधिक गहरे होकर किसी दिन अचानक सामने आ ही जाते हैं।

ग्वालियर में बड़ी कार्रवाई: चोरी के गहनों और सामान के साथ दो चोर पकड़े गए

मध्य प्रदेश । ग्वालियर के हजीरा थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी चोरी की वारदात का खुलासा करते हुए दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। यह चोरी किसी सामान्य घर में नहीं बल्कि मजिस्ट्रेट प्रकाश चंद्र आर्य के सूने मकान में की गई थी, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है। घटना 15 मई की रात की है, जब न्यू कॉलोनी नंबर-1, बिरला नगर स्थित मजिस्ट्रेट के बंद मकान को चोरों ने निशाना बनाया। मकान लंबे समय से खाली पड़ा था, क्योंकि प्रकाश चंद्र आर्य अपने परिवार के साथ भोपाल में निवास कर रहे हैं। इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने घर में घुसकर चांदी के गहने, सिक्के और अन्य सामान चोरी कर लिया। घटना की जानकारी सबसे पहले पड़ोसी को मिली, जिन्होंने तुरंत परिवार को सूचित किया। इसके बाद पीड़ित पक्ष की ओर से हजीरा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को एक अहम सुराग मिला, जिसमें सूचना मिली कि दो संदिग्ध युवक चार शहर का नाका क्षेत्र में चोरी का सामान बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घेराबंदी की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तुषार गिरी और राजकुमार जाटव के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उनके पास से चोरी किए गए चांदी के गहने, सिक्के, एक होंडा एक्टिवा स्कूटी और एक रेडमी मोबाइल फोन बरामद किया गया। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी चोरी किए गए सामान को जल्द से जल्द बेचने की फिराक में थे। प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि आरोपी शहर में हुई अन्य चोरी की घटनाओं में भी शामिल हो सकते हैं। हजीरा थाना पुलिस अब दोनों आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है और उनसे लगातार पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है। यह कार्रवाई पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि इसमें एक जिम्मेदार अधिकारी के घर हुई चोरी का खुलासा किया गया है।

महिला सुरक्षा पर फिर उठा बड़ा सवाल, नूंह की घटना को लेकर कांग्रेस-BJP में तीखी बयानबाजी, जांच की मांग तेज

नई दिल्ली। हरियाणा के नूंह जिले में सामने आए एक गंभीर मामले ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इसने राजनीतिक माहौल को भी गर्मा दिया है। 19 वर्षीय युवती के साथ कथित गैंगरेप और बाद में आत्महत्या की घटना को लेकर अब सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस पूरे मामले ने महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गहरी चिंता पैदा कर दी है और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। घटना के सामने आने के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब एक युवती अपने ही घर में सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही, तो राज्य और देश में महिलाओं की सुरक्षा के दावों पर कैसे भरोसा किया जा सकता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और प्रशासनिक तंत्र उन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। मामला नूंह के बिछोर थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। पीड़िता के परिवार के अनुसार, 18 मई को कुछ लोग घर में घुसे और युवती के साथ कथित रूप से गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया। आरोप यह भी है कि आरोपियों ने इस दौरान वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी दी और लगातार ब्लैकमेल करते रहे। इस मानसिक प्रताड़ना के कारण युवती गहरे तनाव में चली गई और उसने जहर खा लिया। इलाज के दौरान दिए गए बयान में उसने पूरी घटना का जिक्र किया, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया। पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में पीड़िता के पिता की शिकायत के आधार पर पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं और जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दी जा सके। इस बीच कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि मामले की जांच फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत कराई जाए ताकि पीड़िता को जल्द न्याय मिल सके। पार्टी का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में देरी न्याय प्रणाली पर जनता का भरोसा कमजोर करती है। साथ ही कांग्रेस ने यह भी कहा है कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाना समय की जरूरत है। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी लोगों में रोष देखा जा रहा है। महिला सुरक्षा को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जताई है और प्रशासन से ठोस कदम उठाने की अपील की है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि आखिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है और क्या इसमें और सुधार की जरूरत है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और दोषियों तक कानून कितनी तेजी से पहुंचता है।

सस्ते सीमेंट का झांसा देकर लाखों की धोखाधड़ी, फर्जी डीलर ने लगाया चूना

मध्य प्रदेश। ग्वालियर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें जालसाजों ने एक हाईकोर्ट वकील को ही अपना निशाना बना लिया। मुरार थाना क्षेत्र में रहने वाले एडवोकेट लखनलाल शर्मा से सस्ते दाम पर सीमेंट दिलाने का झांसा देकर 1 लाख 93 हजार 200 रुपये की ऑनलाइन ठगी कर ली गई। पूरा मामला उस समय शुरू हुआ जब एडवोकेट अपने मकान निर्माण के लिए थोक में सीमेंट खरीदने के लिए इंटरनेट पर “अल्ट्राटेक सीमेंट डीलर” सर्च कर रहे थे। इसी दौरान उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताया और लोकल डीलर से संपर्क कराने की बात कही। कुछ ही देर बाद एक अन्य नंबर से कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को आशीष शुक्ला बताते हुए अल्ट्राटेक का अधिकृत डीलर होने का दावा किया। आरोपी ने 840 बोरी सीमेंट 230 रुपये प्रति बोरी की सस्ती दर पर देने का सौदा तय किया, जिससे पीड़ित का भरोसा मजबूत हो गया। ठगों ने पूरी योजना के तहत वॉट्सऐप पर जीएसटी सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, कैंसिल चेक और डिलीवरी एड्रेस जैसे कई दस्तावेज भेजकर खुद को असली डीलर साबित करने की कोशिश की। इसके बाद 1,93,200 रुपये का फर्जी इनवॉइस बिल भी भेजा गया। इन दस्तावेजों पर भरोसा करते हुए एडवोकेट ने अपनी पत्नी के बैंक खाते से पूरी रकम मुंबई के अंधेरी स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक के खाते में ट्रांसफर कर दी। लेकिन अगले ही दिन जब सीमेंट की डिलीवरी नहीं हुई और दोनों मोबाइल नंबर बंद मिले, तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद पीड़ित ने असली अल्ट्राटेक कंपनी के अधिकृत डीलर से संपर्क किया, जहां उन्हें बताया गया कि उनके पास भेजा गया बिल और डील पूरी तरह फर्जी है। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई और मुरार थाने में एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस अब बैंक खाते, मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच के आधार पर साइबर ठगों की तलाश में जुट गई है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि ठगों ने पूरी योजना बनाकर इंटरनेट सर्च का फायदा उठाते हुए यह फ्रॉड किया। यह घटना एक बार फिर यह चेतावनी देती है कि ऑनलाइन सर्च से मिले अनजान नंबरों और डील्स पर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है।

घर के अंदर हुआ खून का खेल, जिस पोते को दादा ने पाला, उसी ने ले ली जान, गांव में मातम और गुस्सा

नई दिल्ली। रिश्तों की नींव पर जब भरोसा दरकता है, तो घटनाएं इंसानियत को झकझोर देती हैं। ऐसा ही एक दर्दनाक मामला हरियाणा के हांसी क्षेत्र के एक गांव से सामने आया है, जहां पारिवारिक विवाद ने एक घर को मातम में बदल दिया। जिस दादा ने कभी अपने पोते को उंगली पकड़कर चलना सिखाया था, उसी पोते पर अब उनके जीवन को समाप्त करने का आरोप लगा है। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और लोग अभी भी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि एक ही परिवार के भीतर इतना बड़ा और भयावह कदम कैसे उठाया जा सकता है। घटना देर रात की बताई जा रही है, जब घर के अंदर अचानक तेज आवाजें सुनाई दीं। शुरुआत में ग्रामीणों को लगा कि यह कोई सामान्य पारिवारिक विवाद होगा, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति गंभीर हो गई। घर के अंदर अफरा-तफरी मच गई और जब लोग मौके पर पहुंचे तो उन्होंने 80 वर्षीय बुजुर्ग को गंभीर रूप से घायल अवस्था में देखा। यह दृश्य इतना भयावह था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति स्तब्ध रह गया। कुछ ही समय में पूरे गांव में इस घटना की खबर फैल गई और माहौल गम और गुस्से में बदल गया। जानकारी के अनुसार, मृतक बुजुर्ग की पहचान बरखा राम के रूप में हुई है, जिनकी कथित तौर पर उनके ही पोते अंकित ने हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि आरोपी अविवाहित है और लंबे समय से पारिवारिक तनाव का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि घर में अक्सर झगड़े की स्थिति रहती थी और कई बार विवाद हिंसक रूप भी ले लेते थे। यह भी आरोप सामने आए हैं कि आरोपी नशे की हालत में भी दादा से विवाद करता था, जिससे घर का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहता था। बताया जा रहा है कि बुजुर्ग कुछ समय से अपनी बेटियों के पास रह रहे थे और करीब 15 दिन पहले ही गांव लौटे थे। घटना वाली रात किसी बात को लेकर दादा और पोते के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो धीरे-धीरे गंभीर विवाद में बदल गई। इसी दौरान हमला हुआ, जिसमें बुजुर्ग को सिर पर गंभीर चोट लगी। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमला किस वस्तु से किया गया, लेकिन चोटों की गंभीरता को देखते हुए स्थिति बेहद नाजुक मानी गई। घटना के बाद पूरे गांव में मातम जैसा माहौल बन गया। हर कोई यही सवाल कर रहा है कि आखिर एक पोता अपने ही दादा के साथ इतना क्रूर व्यवहार कैसे कर सकता है। ग्रामीणों के बीच आक्रोश भी देखा जा रहा है और लोग इस घटना को रिश्तों पर एक गहरा धक्का बता रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है, जबकि मामले की गहन जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि घटना के पीछे के कारणों और परिस्थितियों की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं यह दर्दनाक घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि पारिवारिक रिश्तों में बढ़ता तनाव किस तरह कभी-कभी भयावह परिणामों में बदल सकता है।