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अमेरिका-ईरान वार्ता फिर अटकी, फ्रीज फंड और यूरेनियम शर्तों पर गतिरोध गहराया

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर चल रही बातचीत एक बार फिर रुकती हुई नजर आ रही है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेशी बैंकों में जमा ईरान के फ्रीज फंड को जारी करने के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेद सामने आए हैं, जिससे प्रस्तावित समझौते पर अनिश्चितता बढ़ गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका शुरुआती चरण में ही कुछ ब्लॉक की गई संपत्तियों को रिलीज करने पर सहमत नहीं होता, तब तक किसी अंतिम समझौते की संभावना कम है। ईरान का आरोप है कि बातचीत के दौरान अमेरिकी रुख कई बार बदलता रहा है और पहले बनी सहमतियों के बावजूद अहम शर्तों पर अड़चनें पैदा हुई हैं। जानकारी के अनुसार, ईरान ने अपनी स्थिति उन देशों तक भी पहुंचाई है जो बैकचैनल कूटनीति में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। तेहरान का कहना है कि वह केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा नहीं कर सकता और उसे समझौते के तहत ठोस गारंटी चाहिए, खासकर फ्रीज किए गए धन की तत्काल रिहाई के रूप में। दूसरी ओर, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि दावा किया कि कुछ प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है, लेकिन बाद में यह भी कहा कि बातचीत अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अंतिम निर्णय अभी बाकी है। प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को नियंत्रित करने जैसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, यूरेनियम निपटान की प्रक्रिया और भविष्य में परमाणु गतिविधियों पर प्रतिबंध की अवधि को लेकर अभी भी सहमति नहीं बन सकी है। अगर यह वार्ता विफल होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिरता पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

अक्षय कुमार का बड़ा भोजपुरी अवतार: ‘वेलकम टू द जंगल’ में दिखेगा नया रंग, अक्षरा सिंह ने कराई खास तैयारी

नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार अपनी अपकमिंग मल्टीस्टारर फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म में वह इस बार एक अलग अंदाज में नजर आने वाले हैं, जहां वह एक भोजपुरी एक्टर का किरदार निभाते दिखेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्षय कुमार ने इस किरदार को रियलिस्टिक बनाने के लिए भोजपुरी भाषा और स्टाइल पर खास काम किया है। बताया जा रहा है कि इस तैयारी में भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह ने उनकी मदद की, जिससे वह किरदार की बारीकियों को बेहतर तरीके से समझ सकें। फिल्म से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अक्षय ने अपने बॉडी लैंग्वेज से लेकर बोलने के अंदाज तक में बदलाव किया है ताकि किरदार पूरी तरह से असरदार लगे। फिल्म में उनका कॉमिक और एनर्जी से भरपूर अवतार दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ चौंका भी सकता है। फिल्म के एक गाने ‘घिस घिस घिस’ में अक्षय कुमार भोजपुरी आइटम बॉय के रूप में भी नजर आएंगे, जिसे जल्द ही रिलीज किया जाएगा। मेकर्स को उम्मीद है कि यह गाना फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ाएगा। ‘वेलकम टू द जंगल’ का बजट लगभग 250 से 300 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, अनिल कपूर, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, रवीना टंडन और राजपाल यादव जैसे कई बड़े सितारे नजर आएंगे। फिल्म के टीजर को पहले ही अच्छा रिस्पॉन्स मिल चुका है और अब दर्शकों को इसके रिलीज का बेसब्री से इंतजार है।

बॉलीवुड का ऐतिहासिक डुएट: किशोर कुमार बनाम मोहम्मद रफी की जादुई जुगलबंदी

नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुनहरे दौर में जब मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसे दिग्गज गायक एक साथ किसी गाने में अपनी आवाज देते थे, तो वह सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि इतिहास बन जाता था। ऐसा ही एक यादगार किस्सा फिल्म दोस्ताना (1980) से जुड़ा है, जिसमें अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा मुख्य भूमिकाओं में थे। इस फिल्म के मशहूर डुएट गीत “सलामत रहे दोस्ताना हमारा” की रिकॉर्डिंग के दौरान स्टूडियो में एक दिलचस्प माहौल देखने को मिला। बताया जाता है कि मोहम्मद रफी समय पर स्टूडियो पहुंच गए थे और उन्होंने गाने की रिहर्सल भी पूरी तैयारी के साथ की थी। उनकी क्लासिकल और मधुर आवाज ने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित कर दिया था। लेकिन जब किशोर कुमार स्टूडियो पहुंचे तो उन्होंने माहौल को गंभीर बनाने के बजाय हल्का-फुल्का कर दिया। वे रफी साहब के साथ मजाक-मस्ती करने लगे, जिससे कई लोगों को लगा कि वह गाने को लेकर गंभीर नहीं हैं। उस समय कई लोगों को लगा कि रफी साहब अपनी परफॉर्मेंस से बाजी मार लेंगे। हालांकि, जैसे ही रिकॉर्डिंग शुरू हुई, पूरा माहौल बदल गया। पहले मोहम्मद रफी ने अपने हिस्से को बेहद खूबसूरती और गहराई के साथ गाया। लेकिन जब किशोर कुमार की बारी आई, तो उनकी आवाज ने स्टूडियो में मौजूद हर शख्स को हैरान कर दिया। उनकी गायकी में जो ऊर्जा, भाव और सहजता थी, उसने गाने को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया। संगीतकार पंडित रोनू मजुमदार के अनुसार, उस दिन दोनों ही दिग्गजों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन किशोर कुमार की आवाज में एक अलग तरह का जादू था, जिसने माहौल को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी परफॉर्मेंस को कई लोग उस दौर की सबसे यादगार रिकॉर्डिंग्स में से एक मानते हैं। फिल्म दोस्ताना के अन्य गीत भी सुपरहिट साबित हुए और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन यह डुएट गाना आज भी इसलिए याद किया जाता है क्योंकि इसमें दो महान गायकों की अद्भुत टक्कर और संगीत की असली ताकत देखने को मिली।

IPL 2026: राजस्थान की धमाकेदार एंट्री से प्लेऑफ की तस्वीर साफ, KKR-PBKS बाहर, RCB-GT-SRH-RR टॉप 4 में

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में प्लेऑफ की स्थिति अब पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। राजस्थान रॉयल्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्लेऑफ में जगह बना ली है, जबकि पंजाब किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स का सफर खत्म हो गया है। रविवार (24 मई) को खेले गए अहम मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने मुंबई इंडियंस को 30 रन से हराकर प्लेऑफ का टिकट पक्का किया। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस मैच में राजस्थान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 206 रन बनाए थे, जिसके जवाब में मुंबई इंडियंस लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी। इस जीत के साथ ही पंजाब किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। इससे पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB), गुजरात टाइटन्स (GT) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) पहले ही प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की कर चुकी थीं। अंकतालिका के अनुसार RCB पहले, गुजरात टाइटन्स दूसरे, सनराइजर्स हैदराबाद तीसरे और राजस्थान रॉयल्स चौथे स्थान पर रही। अब प्लेऑफ में क्वालिफायर-1 में RCB और गुजरात टाइटन्स के बीच मुकाबला होगा। यह मैच जीतने वाली टीम सीधे फाइनल में पहुंचेगी, जबकि हारने वाली टीम को एक और मौका मिलेगा। वहीं एलिमिनेटर में सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रॉयल्स आमने-सामने होंगी। क्वालिफायर-1, एलिमिनेटर और क्वालिफायर-2 के मुकाबले क्रमशः 26, 27 और 29 मई को खेले जाएंगे, जबकि फाइनल 31 मई को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होगा।

जॉन एफ. कैनेडी का ऐतिहासिक भाषण: चाँद पर अमेरिका उतारने का सपना बना अंतरिक्ष युग की शुरुआत

25 मई 1961 को अमेरिकी इतिहास और वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक ऐसा क्षण आया जिसने पूरी दुनिया की सोच बदल दी। इस दिन राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए वह ऐतिहासिक घोषणा की, जिसने “स्पेस रेस” यानी अंतरिक्ष दौड़ को एक नई दिशा और गति दे दी। यह भाषण केवल एक राजनीतिक बयान नहीं था, बल्कि विज्ञान, तकनीक और राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा का एक साहसिक संकल्प था, जिसने आने वाले दशक की दिशा तय कर दी। कैनेडी ने अपने भाषण में स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका को इस दशक के अंत से पहले किसी इंसान को चंद्रमा पर उतारना चाहिए और उसे सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना चाहिए। उस समय यह लक्ष्य बेहद कठिन और लगभग असंभव माना जा रहा था, क्योंकि अंतरिक्ष तकनीक अभी शुरुआती दौर में थी और सोवियत संघ पहले ही अंतरिक्ष दौड़ में अमेरिका से आगे निकल चुका था। 1957 में स्पुतनिक उपग्रह और 1961 में यूरी गगारिन की अंतरिक्ष यात्रा ने अमेरिका पर दबाव बढ़ा दिया था। कैनेडी का यह भाषण उस समय आया जब शीत युद्ध अपने चरम पर था। अमेरिका और सोवियत संघ के बीच केवल सैन्य या राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं थी, बल्कि तकनीकी और वैज्ञानिक श्रेष्ठता की भी होड़ थी। अंतरिक्ष इस प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा मंच बन चुका था। ऐसे में कैनेडी ने अंतरिक्ष कार्यक्रम को राष्ट्रीय सम्मान और सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल विज्ञान का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की शक्ति और नेतृत्व का प्रतीक है। उनकी यह घोषणा अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के लिए एक ऐतिहासिक आदेश बन गई। इसके बाद अपोलो कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर मानव भेजना था। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हजारों वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों ने दिन-रात काम किया। नई रॉकेट तकनीक, जीवन समर्थन प्रणाली, अंतरिक्ष यान डिजाइन और कंप्यूटिंग सिस्टम में बड़े पैमाने पर विकास किया गया। कैनेडी के इस भाषण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह था कि उन्होंने जनता को एक बड़े सपने से जोड़ा। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों को यह विश्वास दिलाया कि असंभव लगने वाला लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है, यदि राष्ट्र एकजुट होकर प्रयास करे। उनके शब्दों ने पूरे देश में एक नई ऊर्जा और उत्साह पैदा किया। इस भाषण के आठ साल बाद, 1969 में, अपोलो-11 मिशन के तहत नील आर्मस्ट्रॉन्ग और बज़ एल्ड्रिन ने चंद्रमा की सतह पर कदम रखा। जब नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने कहा “यह मनुष्य के लिए एक छोटा कदम, लेकिन मानवता के लिए एक बड़ी छलांग है,” तो वह वास्तव में कैनेडी के सपने की पूर्ति थी। कैनेडी का 25 मई 1961 का भाषण आज भी इतिहास में एक प्रेरणादायक क्षण के रूप में याद किया जाता है। यह केवल अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत नहीं थी, बल्कि मानव क्षमता, साहस और दूरदृष्टि का प्रतीक था। इसने यह साबित किया कि जब नेतृत्व स्पष्ट और लक्ष्य बड़ा हो, तो मानवता किसी भी सीमा को पार कर सकती है। आज भी यह भाषण वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें याद दिलाता है कि बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प कितना महत्वपूर्ण होता है। -25 मई 1961 कैनेडी का भाषण

सोने के गहनों पर टैक्स हटाने की मांग से नेपाल की नीति पर चर्चा तेज

नई दिल्ली । नेपाल अपनी पर्यटन अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिशों में जुटा है और इसी क्रम में देश के पूर्व वित्त मंत्री सुरेंद्र पांडे ने एक नया और चर्चित सुझाव सामने रखा है। काठमांडू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि नेपाल को भारतीय पर्यटकों, खासकर शादी समारोहों को आकर्षित करने के लिए सोने के गहनों पर लगने वाले टैक्स को खत्म करने पर विचार करना चाहिए। पांडे का मानना है कि अगर नेपाल सरकार यह कदम उठाती है, तो देश को एक बड़े “शादी डेस्टिनेशन” के रूप में विकसित किया जा सकता है। भारत जैसे विशाल बाजार से आने वाले पर्यटकों के जरिए नेपाल न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा दे सकता है, बल्कि होटल, ट्रैवल और स्थानीय कारोबार को भी मजबूती मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल में नियम और प्रक्रियाएं जितनी सरल होंगी, उतना ही अधिक विदेशी पर्यटक आकर्षित होंगे। खासतौर पर भारतीय यात्रियों के लिए सीमाओं पर प्रक्रियाएं आसान बनाने और वाहनों के प्रवेश को सरल करने की भी आवश्यकता है। पूर्व वित्त मंत्री ने सुझाव दिया कि नेपाल को भारत और चीन जैसे बड़े देशों को ध्यान में रखते हुए बड़े पर्यटन पैकेज तैयार करने चाहिए। उनका कहना है कि इन देशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या बहुत अधिक है और सही रणनीति अपनाकर नेपाल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। फिलहाल नेपाल में विदेशी यात्रियों को सीमित मात्रा में सोने और चांदी के गहने बिना कस्टम ड्यूटी के लाने की अनुमति है, लेकिन यह शर्त रहती है कि उन्हें निजी उपयोग के बाद वापस ले जाया जाए। इसी व्यवस्था को और लचीला बनाने की मांग अब तेज हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल पहले से ही प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत के कारण लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। भारत से हर साल लाखों लोग नेपाल की यात्रा करते हैं। ऐसे में यदि नियमों में ढील दी जाती है, तो यह देश के पर्यटन सेक्टर के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। सुरेंद्र पांडे के इस सुझाव को नेपाल की आर्थिक रणनीति में एक नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में भारत-नेपाल पर्यटन संबंधों को और मजबूत कर सकता है।

90 YEARS OF AKASHVANI: सुरों और सूफी गीतों से सजी शाम; आकाशवाणी के 90 साल पूरे होने का खास जश्न

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HIGHLIGHTS: आकाशवाणी के 90 वर्ष पूरे होने पर खास आयोजन बुंदेली लोकगीतों ने बांधा समां सूफी गायन पर झूमे श्रोता ‘दमादम मस्त कलंदर’ पर थिरका पूरा हॉल संस्कृति और लोक परंपराओं को समर्पित रही शाम   90 YEARS OF AKASHVANI: भोपाल। आकाशवाणी के 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में भोपाल के रवींद्र भवन में एक खास सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बता दें कि संगीत और लोक परंपराओं से सजी इस शाम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत बुंदेली लोकगायिका पुष्पलता शर्मा ने पारंपरिक विवाह गीतों से की, ‘बजा बजा रमतुला’ और ‘आ गए पार्वती के दूल्हा’ जैसे गीतों ने माहौल को और ज़्यादा भक्तिमय बना दिया। Natural Beauty Care: दही और चावल का आटा त्वचा के लिए क्यों है फायदेमंद? बुंदेली गीतों ने बांधा समां पुष्पलता शर्मा ने अपने गायन में बुंदेली संस्कृति की झलक पेश की उन्होंने गारी, लगुन, दादरा और स्वांग जैसे पारंपरिक गीतों से लोगी को खूब लुभाया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों बजाई और कई लोग को तो उनके गीतों पर झूम उठे, कार्यक्रम के दौरान पूरा सभागार लोक संगीत के रंग में रंगा नजर आया। MP: बांधवगढ़ रिजर्व क्षेत्र में बाघ ने घर में घुसकर किया हमला महिला की मौत, 3 घायल सूफियाना रंग में रंगा सभागार शाम का दूसरा हिस्सा सूफियाना रंग में रंगा नजर आया जहां मशहूर सूफी गायक उस्ताद मुनव्वर मासूम ने जैसे ही बिस्मिल्लाह से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की, माहौल पूरी तरह बदल गया। ख्वाजा जी महाराज करम सरकार ने लोगों को आध्यात्मिक एहसास से भर दिया। वहीं छाप तिलक सब छीनी और दमादम मस्त कलंदर पर पूरा हॉल झूम उठा, कई लोग अपनी सीटों पर बैठे-बैठे ही ताल पर थिरकते नजर आए। MP: बांधवगढ़ रिजर्व क्षेत्र में बाघ ने घर में घुसकर किया हमला महिला की मौत, 3 घायल आकाशवाणी ने भारत की संस्कृति को पीढ़ियों तक पहुंचाया कार्यक्रम के दौरान आकाशवाणी भोपाल के प्रभारी समूह प्रमुख संजीव कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आकाशवाणी सिर्फ खबरों का माध्यम नहीं रहा, बल्कि उसने देश की लोक संस्कृति, संगीत और परंपराओं को पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम किया है। साथ ही कार्यक्रम प्रमुख शुभम तिवारी ने भी कहा कि बदलते दौर में भी आकाशवाणी अपनी सांस्कृतिक पहचान को लगातार मजबूत कर रहा है। वरिष्ठ उद्घोषक पुरुषोत्तम श्रीवास और अमिता त्रिवेदी के संचालन ने कार्यक्रम को और जीवंत बना दिया। अंत में कार्यक्रम अधिकारी योगेश नागर ने सभी कलाकारों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।   आकाशवाणी के 90 साल का यह जश्न सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था… बल्कि भारतीय लोक संस्कृति, संगीत और विरासत को समर्पित एक ऐसी शाम थी, जिसने वहां मौजूद हर इंसान के दिल में अपनी अलग छाप छोड़ दी।

कंगना रनौत का ट्रोलर्स पर वार: ऐश्वर्या राय को लेकर दिया सख्त जवाब

नई दिल्ली। कान फिल्म फेस्टिवल 2026 में ऐश्वर्या राय बच्चन एक बार फिर अपने ग्लैमरस और एलिगेंट लुक्स को लेकर चर्चा में आ गई हैं। रेड कार्पेट पर उनके अलग-अलग फैशन एक्सपेरिमेंट्स को जहां एक तरफ खूब सराहा गया, वहीं सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। इस बीच बॉलीवुड एक्ट्रेस और राजनेता कंगना रनौत उनके समर्थन में सामने आई हैं और ट्रोलर्स को कड़ा जवाब दिया है। कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर ऐश्वर्या राय की तारीफ करते हुए कहा कि फैशन और स्टाइल किसी व्यक्ति के आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम होता है और किसी भी महिला को किसी को कुछ साबित करने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने लिखा कि ऐश्वर्या बेहद शानदार लग रही हैं और जो लोग उन्हें आलोचना की नजर से देख रहे हैं, उन्हें पहले खुद को देखना चाहिए। कंगना ने अपनी पोस्ट में साफ कहा कि ऐश्वर्या राय किसी को खुश करने के लिए रेड कार्पेट पर नहीं आतीं, बल्कि वह अपनी मौजूदगी और आत्मविश्वास से वहां चमकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर लोगों को उम्रदराज महिलाओं को रेड कार्पेट पर देखने की आदत नहीं है, तो अब उन्हें इसकी आदत डाल लेनी चाहिए। कंगना के इस बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है, जहां एक वर्ग उनके समर्थन को सही ठहरा रहा है तो दूसरा इसे अलग नजरिए से देख रहा है। हालांकि, कई यूजर्स ने कंगना के बयान को महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास से जोड़ते हुए सराहा भी है। इस बीच कान फिल्म फेस्टिवल में ऐश्वर्या राय के साथ उनकी बेटी आराध्या बच्चन भी नजर आईं, जिसने इस बार खास ध्यान खींचा। रूबी रेड गाउन में आराध्या का रेड कार्पेट डेब्यू काफी चर्चा में रहा और उनकी तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। ऐश्वर्या राय हर साल की तरह इस बार भी अपने स्टाइल और ग्रेस के कारण सुर्खियों में बनी हुई हैं, जबकि कंगना रनौत का यह समर्थन बयान इस पूरे मामले को और अधिक चर्चित बना रहा है।

आकाश में 31 मई की रात दिखेगा दुर्लभ नजारा…. Blue Moon होगा पूर्णिमा का चांद

नई दिल्ली। आसमान (Sky) में होने वाली खगोलीय घटनाएं (Astronomical Events) हमेशा लोगों को आकर्षित करती हैं और मई 2026 के अंत में ऐसा ही एक दुर्लभ नजारा (Rare sight) देखने को मिलने वाला है. इस महीने के दौरान दूसरी बार पूर्णिमा का चंद्रमा (Full Moon) दिखाई देगा, जिसे लोकप्रिय रूप से “ब्लू मून” (Blue Moon) कहा जाता है. यह घटना बहुत कम देखने को मिलती है, इसलिए खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह खास अवसर माना जा रहा है. मई 2026 की पहली पूर्णिमा 1 मई को दिखाई दी थी, जबकि दूसरी पूर्णिमा 31 मई को दिखाई देगी. एक ही कैलेंडर महीने में दो पूर्ण चंद्रमा दिखाई देने की वजह से इस दूसरे पूर्णिमा चंद्रमा को Blue Moon कहा जाता है. हालांकि इसके नाम से ऐसा लग सकता है कि चंद्रमा नीले रंग का दिखाई देगा, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता. क्या है Blue Moon?Blue Moon एक खगोलीय घटना है, जिसमें एक ही कैलेंडर महीने के भीतर दो बार पूर्णिमा आती है. आमतौर पर किसी महीने में केवल एक ही पूर्णिमा होती है, लेकिन कभी-कभी चंद्रमा के चक्र और कैलेंडर की गणना के बीच अंतर के कारण ऐसा अवसर बन जाता है जब एक महीने में दो पूर्णिमा दिखाई देती हैं. जब दूसरी पूर्णिमा उसी महीने में आती है, तो उसे Blue Moon कहा जाता है. यह घटना हर साल नहीं होती, इसलिए इसे दुर्लभ माना जाता है. यही कारण है कि दुनिया भर के स्काईवॉचर्स इस घटना का बेसब्री से इंतजार करते हैं. 31 मई को कब और कहां दिखाई देगा Blue Moon?रिपोर्ट के अनुसार, 31 मई 2026 को Blue Moon पूर्वी दिशा के आसमान में उदय होगा. यह सामान्य पूर्णिमा की तुलना में क्षितिज के थोड़ा नीचे दिखाई देगा और कन्या राशि (Virgo Constellation) के दाईं ओर नजर आएगा. मौसम साफ रहने पर लोग इसे खुली जगहों से आसानी से देख सकेंगे. शहरों की तेज रोशनी से दूर क्षेत्रों में यह नजारा और भी शानदार दिखाई दे सकता है. चूंकि यह घटना महीने के अंतिम दिन हो रही है, इसलिए इसे वर्ष 2026 के सबसे चर्चित चंद्र घटनाओं में से एक माना जा रहा है. Blue Moon नाम क्यों पड़ा?कई लोगों को लगता है कि Blue Moon के दौरान चंद्रमा नीला दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में इसका रंग सामान्य पूर्णिमा जैसा ही रहता है. “Blue Moon” केवल एक खगोलीय नाम है, जो एक महीने में दूसरी पूर्णिमा को दिया जाता है. इस नाम का उपयोग वर्षों से किया जाता रहा है और यह धीरे-धीरे लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बन गया. हालांकि कुछ विशेष वायुमंडलीय परिस्थितियों में चंद्रमा हल्का नीला दिखाई दे सकता है, लेकिन इसका इस खगोलीय घटना से कोई सीधा संबंध नहीं होता. आखिर Blue Moon होता क्यों है?Blue Moon की वजह चंद्रमा और कैलेंडर के बीच मौजूद समय का अंतर है. पृथ्वी को अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में 24 घंटे लगते हैं, जिससे एक दिन बनता है. वहीं पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में लगभग 365 दिन लगते हैं, जिससे एक वर्ष बनता है. दूसरी ओर, चंद्रमा को पृथ्वी के चारों ओर एक पूरा चक्र पूरा करने में लगभग 29.5 दिन लगते हैं. यदि 12 चंद्र चक्रों को जोड़ा जाए, तो यह एक कैलेंडर वर्ष से लगभग 11 दिन कम होता है. यही अंतर समय के साथ बढ़ता जाता है और कभी-कभी किसी वर्ष में एक अतिरिक्त पूर्णिमा दिखाई देने लगती है. इसी वजह से मई 2026 में दो पूर्णिमा देखने को मिलेंगी. मई की पहली पूर्णिमा को क्या कहा गया?मई 2026 की पहली पूर्णिमा 1 मई को दिखाई दी थी, जिसे “फ्लावर मून” (Flower Moon) कहा जाता है. यह नाम वसंत ऋतु में फूलों के खिलने से जुड़ा हुआ है. उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में इस समय प्रकृति पूरी तरह खिल उठती है, इसलिए इस पूर्णिमा को Flower Moon का नाम दिया गया. पहली पूर्णिमा और दूसरी पूर्णिमा के बीच लगभग 29.5 दिनों का अंतर होता है. इसी कारण मई के अंत तक एक और पूर्णिमा दिखाई दे रही है, जो Blue Moon के रूप में जानी जाएगी. खगोल प्रेमियों के लिए खास मौकाBlue Moon केवल एक सुंदर दृश्य ही नहीं, बल्कि यह हमें चंद्रमा और पृथ्वी की गति को बेहतर तरीके से समझने का अवसर भी देता है. खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक यादगार रात हो सकती है. यदि मौसम साफ रहा तो 31 मई की रात आसमान में चमकता हुआ पूर्ण चंद्रमा एक शानदार दृश्य पेश करेगा।

Natural Beauty Care: दही और चावल का आटा त्वचा के लिए क्यों है फायदेमंद?

नई दिल्ली । आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी और प्रदूषण के कारण त्वचा की समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में लोग महंगे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स की बजाय प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों की ओर रुख कर रहे हैं। दही और चावल का आटा त्वचा की देखभाल के लिए एक बेहद सरल और प्रभावी उपाय माना जाता है, जिसे आसानी से घर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा की गहराई से सफाई करने में मदद करता है और डेड स्किन सेल्स को हटाता है। वहीं चावल का आटा एक प्राकृतिक स्क्रब की तरह काम करता है, जो त्वचा को एक्सफोलिएट कर उसे मुलायम और चमकदार बनाता है। जब इन दोनों को मिलाकर फेस पैक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो यह त्वचा पर जमी गंदगी और टैनिंग को कम करने में सहायक होता है। इस फेस पैक को बनाने के लिए दो चम्मच दही में एक से दो चम्मच चावल का आटा मिलाकर एक पेस्ट तैयार किया जाता है। इसे चेहरे पर हल्के हाथों से लगाकर 10 से 15 मिनट तक छोड़ दिया जाता है। सूखने के बाद हल्के हाथों से मसाज करते हुए धोने पर त्वचा साफ और ताजगी भरी नजर आती है। यह नुस्खा खासतौर पर ऑयली और डल स्किन के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। यह न सिर्फ चेहरे की चमक बढ़ाता है, बल्कि पिंपल्स और दाग-धब्बों को कम करने में भी मदद करता है। नियमित उपयोग से त्वचा का रंग निखरता है और चेहरा प्राकृतिक रूप से ग्लो करने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह एक सुरक्षित और केमिकल-फ्री उपाय है, लेकिन बहुत संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। सप्ताह में दो से तीन बार इसका इस्तेमाल बेहतर परिणाम देता है। कुल मिलाकर दही और चावल का आटा त्वचा की देखभाल का एक आसान, सस्ता और असरदार तरीका है, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाने में मदद करता है।