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चीन ने लॉन्च किया शेनझोउ 23 अंतरिक्ष यान… 3 लोगों को भेजा स्पेस स्टेशन

बीजिंग। चीन (China) ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम (Space Program) को नई रफ्तार देते हुए रविवार रात शेनझोउ-23 अंतरिक्ष यान (Shenzhou-23 spacecraft) को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। इस मिशन के जरिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों को चीन के तियांगोंग स्पेस स्टेशन (Tiangong Space Station) भेजा गया है। खास बात यह है कि इस मिशन में शामिल एक अंतरिक्ष यात्री पूरे एक साल तक अंतरिक्ष में रहेगा। चीन इसे इंसानी शरीर और दिमाग पर लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने के असर को समझने का बड़ा प्रयोग मान रहा है। इस मिशन को चीन के 2030 तक इंसान को चांद पर उतारने के लक्ष्य से भी जोड़कर देखा जा रहा है। क्या है शेनझोउ-23 मिशन की सबसे बड़ी खासियत?शेनझोउ-23 अंतरिक्ष यान को उत्तर-पश्चिम चीन स्थित जियुक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया गया। मिशन में कमांडर झू यांगझू के साथ झांग झियुआन और लाई का-यिंग शामिल हैं। लाई का-यिंग को चीनी अधिकारियों ने ली जियायिंग नाम से भी पहचान दी है। वह हांगकांग में जन्मी पहली महिला अंतरिक्ष यात्री हैं, जिन्हें किसी स्पेस मिशन में भेजा गया है। उनके पास कंप्यूटर फॉरेंसिक में डॉक्टरेट की डिग्री भी है। चीन ने इस मिशन को तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में अपनी बड़ी उपलब्धि बताया है। अंतरिक्ष स्टेशन पर क्या काम करेंगे वैज्ञानिक और यात्री?चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक यह टीम अंतरिक्ष स्टेशन पर कई वैज्ञानिक प्रयोग और तकनीकी परियोजनाओं पर काम करेगी। इसके साथ ही शेनझोउ-21 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ इन-ऑर्बिट रोटेशन भी किया जाएगा। शेनझोउ-21 की टीम पिछले 200 दिनों से ज्यादा समय से तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर मौजूद है। मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से शरीर पर पड़ने वाले असर, काम करने की क्षमता और मानसिक स्थिति का अध्ययन करना होगा। चीन का कहना है कि इससे भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों, खासकर चांद और उससे आगे की यात्राओं की तैयारी मजबूत होगी। क्या अमेरिका-चीन की अंतरिक्ष होड़ अब और तेज होगी?चीन लगातार अपने स्पेस प्रोग्राम को आगे बढ़ा रहा है। तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर पहले भी कई मिशन भेजे जा चुके हैं। चीन ने यह स्टेशन तब विकसित किया था, जब उसे राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कार्यक्रम से लगभग बाहर कर दिया गया था। अब चीन और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष को लेकर मुकाबला और तेज होता दिख रहा है। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी 2028 तक फिर से इंसानों को चांद पर उतारने की तैयारी कर रही है। ऐसे में चीन का यह मिशन सिर्फ वैज्ञानिक अभियान नहीं बल्कि ताकत और तकनीक का प्रदर्शन भी माना जा रहा है। तियांगोंग स्टेशन क्यों बन रहा है चीन की नई ताकत?तियांगोंग स्पेस स्टेशन का मतलब स्वर्गीय महल होता है। इस स्टेशन ने पहली बार 2021 में अंतरिक्ष यात्रियों की मेजबानी की थी। चीन का शेनझोउ कार्यक्रम लगातार विस्तार कर रहा है। पिछले साल इसी कार्यक्रम के तहत एक आपातकालीन मिशन भी चलाया गया था, जिसमें खराब अंतरिक्ष यान की वजह से स्टेशन पर फंसे अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाया गया था। अब शेनझोउ-23 मिशन के जरिए चीन यह दिखाना चाहता है कि वह लंबे समय तक अंतरिक्ष में इंसानों को सुरक्षित रखने और बड़े वैज्ञानिक मिशन चलाने में सक्षम है। यही वजह है कि दुनिया की नजर इस मिशन पर टिकी हुई है।

MP: बांधवगढ़ रिजर्व क्षेत्र में बाघ ने घर में घुसकर किया हमला महिला की मौत, 3 घायल

उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) के पास स्थित पनपथा गांव के खेरवा टोला (Kherwa Tola, Panpatha village) में रविवार तड़के करीब 3 बजे एक बाघ रिहायशी इलाके में घुस आया. बाघ ने अचानक ग्रामीणों पर हमला बोल दिया, जिसमें फूल बाई पाल (40) की मौके पर ही मौत हो गई. बाघ के इस हमले में तीन अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय के अनुसार, हमले के बाद बाघ मृतिका के घर के अंदर ही घुस गया. जब वन विभाग की टीम बचाव अभियान के लिए पहुंची और बाघ को बेहोश करने के लिए ट्रैंक्विलाइजर किया, तो उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. जांच करने पर पता चला कि बाघ की पहले ही मौत हो चुकी थी. अधिकारियों ने ‘ओवरडोज’ के आरोपों से इनकार किया है। गुस्साए ग्रामीणों का वन अधिकारियों पर हमलाबाघ के बार-बार होने वाले हमलों से गुस्साए ग्रामीणों का सब्र इस घटना के बाद टूट गया. ग्रामीणों ने कथित तौर पर वन रेंजर प्रतीक श्रीवास्तव को निशाना बनाया, जिससे वे घायल हो गए. एक महिला वन कर्मचारी के साथ भी हाथापाई की गई। ग्रामीणों का कहना है कि मदद के लिए बार-बार फोन करने के बावजूद अधिकारी समय पर नहीं पहुंचे. विरोध के कारण बचाव अभियान में देरी हुई और ग्रामीणों ने करीब दो घंटे तक महिला का शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से रोक दिया. बाघ का दोबारा होगा पोस्टमार्टमबाघ की संदिग्ध मौत को देखते हुए प्रशासन ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के प्रोटोकॉल के तहत कड़े कदम उठाए हैं. बाघ के शव को SWFH जबलपुर के डीप फ्रिज में सुरक्षित रखा गया है। दिल्ली और नागपुर के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में तीन पशु चिकित्सकों की टीम दोबारा शव का परीक्षण करेगी, ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके। मुआवजा और सहायता का ऐलानमुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त किया और ‘X’ के माध्यम से राहत राशि की घोषणा की. मृतका फूल बाई पाल के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. वहीं, घायलों का मुफ्त इलाज होगा और अस्पताल में रहने के दौरान उन्हें 500 रुपये प्रतिदिन का खर्च दिया जाएगा. गांव में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। बढ़ता मानव-बाघ संघर्षहाल ही में ऐसी घटनाओं में इजाफा हुआ है. शुक्रवार को ही महाराष्ट्र के चंद्रपुर में भी बाघ के हमले में चार महिलाओं की मौत हो गई थी. बांधवगढ़ में हुई यह घटना वन्यजीव प्रबंधन और ग्रामीणों की सुरक्षा के बीच बढ़ती खाई को दर्शाती है।

Somvar Shivling Puja: सही विधि से करें पूजा, मिलेंगे सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति के संकेत

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में भगवान शिव को अत्यंत दयालु और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। विशेष रूप से सोमवार का दिन शिव भक्ति के लिए सबसे शुभ माना गया है। इस दिन शिवलिंग पर विधि-विधान से पूजा करने और कुछ खास वस्तुएं अर्पित करने से जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर होने की मान्यता है। सोमवार के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भक्त शिवालय या घर के मंदिर में शिवलिंग की पूजा करते हैं। पूजा की शुरुआत गंगाजल से शिवलिंग के अभिषेक से होती है। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का भी स्रोत मानी जाती है। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसे अर्पित करने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही धतूरा, भांग और आक के फूल भी शिव पूजा में विशेष महत्व रखते हैं। सफेद पुष्प जैसे कनेर और चमेली चढ़ाने से भी भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस मंत्र के नियमित जाप से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। भक्त सोमवार का व्रत भी रखते हैं, जिसमें फलाहार या एक समय सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर जल अर्पित करने से मन की शुद्धि होती है और जीवन में चल रही बाधाएं दूर होती हैं। वहीं दूध अर्पित करने से मानसिक शांति और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। शहद और घी अर्पित करने से आर्थिक समृद्धि के मार्ग खुलते हैं। सोमवार की शिव पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी जाती है जो जीवन में तनाव, कर्ज या रिश्तों की समस्याओं से जूझ रहे हों। कहा जाता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा जीवन में चमत्कारिक बदलाव ला सकती है। कुल मिलाकर सोमवार को शिवलिंग पूजा न केवल एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि यह आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में संतुलन स्थापित करने का एक शक्तिशाली माध्यम भी है।

MP: छतरपुर में बेकाबू ट्रक ने ई-रिक्शा को रौंदा, एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत, 5 घायल

छतरपुर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छतरपुर जिले (Chhatarpur district) में रविवार को दर्दनाक सड़क हादसा (Tragic Road Accident) हो गया। बिजावर रोड स्थित मतगुवा पेट्रोल पंप के पास ई-रिक्शा और ट्रक की जोरदार टक्कर में एक ही परिवार के तीन लोगों (Three people) की मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के मुताबिक, हटनाई थाना ईशानगर निवासी करंजू आदिवासी अपने परिवार के साथ बटन नंदगाय, सटई से ई-रिक्शा में सवार होकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान मतगुवा की ओर से तेज रफ्तार में आ रहे ट्रक ने ई-रिक्शा को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ई-रिक्शा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में सुमन आदिवासी (16 वर्ष), सोमवती आदिवासी (8 वर्ष) और भूरा आदिवासी (5 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई। तीनों एक ही परिवार के सदस्य बताए जा रहे हैं। वहीं हादसे में करंजू आदिवासी (41 वर्ष), कन्हैया आदिवासी (14 वर्ष), गेंदा आदिवासी (38 वर्ष) और अन्य लोग घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। बताया गया है कि घायल किशन आदिवासी विजयपुरा सटई निवासी हैं, जो टैक्सी चालक और मृतकों के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। हादसे के बाद मृतकों के परिवार में मातम पसरा हुआ है। स्थानीय लोगों ने सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

Chardham Yatra: एक माह में 8 लाख से अधिक भक्तों ने किए बाबा केदारनाथ के दर्शन….

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा (Kedarnath Yatra) को एक माह पूरा हो गया है। इस अवधि में 8 लाख से अधिक तीर्थयात्री बाबा केदार (Baba Kedar) के दर्शन कर चुके हैं। जबकि इस बीच एक लाख से अधिक यात्री वाहन केदारघाटी में पहुंचे हैं। अभी तक की यात्रा में 65 फीसदी युवा एवं 35 फीसदी बुर्जुग एवं अन्य यात्री धाम पहुंचे हैं। बीती 22 अप्रैल को भगवान केदारनाथ (Lord Kedarnath) के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खोले गए। पहले ही दिन 38000 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। जबकि इसके बाद यात्री संख्या लगातार बढ़ती रही। अप्रैल माह से लेकर मई माह में निरंतर यात्रियों का सैलाब केदारधाम उमड़ रहा है। चारधामों में सबसे अधिक केदारनाथ पहुंचेचारधामों में केदारनाथ में सर्वाधिक यात्री पहुंच रहे हैं। 23 मई तक केदारनाथ धाम में 811923 तीर्थयात्रियों ने दर्शन कर लिए हैं। वहीं जून माह में स्कूलों में अवकाश होते ही यात्रियों की संख्या इससे भी अधिक होगी। इसके लिए प्रशासन, पुलिस और बीकेटीसी विशेष तैयारियों में लगी है। भीड़ नियंत्रण के लिए आला अधिकारी बैठकें कर योजना बना रहे हैं ताकि सभी यात्रियों को सुलभ दर्शन कराए जा सके। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि अभी तक रिकार्ड यात्री दर्शनों को पहुंचे हैं। अब स्कूलों में अवकाश होते ही यात्री संख्या बढ़ेगी इसके लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। 39 यात्रियों की हो चुकी मौतकेदारनाथ यात्रा में कई यात्रियों को मुश्किलें भी उठानी पड़ रही है। ऑक्सीजन की कमी और ठंड के चलते यहां यात्रियों का स्वास्थ्य भी खराब हो रहा है। अभी तक विभिन्न कारणों से 39 यात्रियों की मौत हो चुकी है। बीकेटीसी को हो चुकी 14.50 करोड़ की आयएक महीने की अवधि में बदरी-केदार मंदिर समिति को 14.50 करोड़ की आय हुई है। बदरी केदार मंदिर समिति बड़ी संख्या में आ रहे तीर्थयात्रियों को सुलभ दर्शन कराने के लिए दिन रात ड्यूटी पर तैनात है। दिनभर में केदारनाथ मंदिर महज 3-4 घंटे ही बंद हो रहा है। अन्य समय मंदिर दर्शनों के लिए खुला रखा गया है। 30925 यात्री कर चुके हैं हेलीकॉप्टर से यात्राकेदारनाथ के लिए 8 हेलीकॉप्टर कम्पनियों से 30025 यात्री यात्रा कर चुके हैं। जबकि हेलीकॉप्टरों ने एक माह की अवधि में कुल 5362 उड़ाने की है। इस दौरान 30925 यात्री हेलीकॉप्टर से केदारनाथ गए जबकि 30822 तीर्थयात्री केदारनाथ से वापस आए। घोड़े-खच्चरों से 2 करोड़ 44 लाख की आयमुख्य विकास अधिकारी आरएस रावत ने बताया कि केदारनाथ यात्रा में इस साल 7744 घोड़े खच्चर पंजीकृत है जबकि इनसे अभी तक 2 करोड़ 44 लाख 91 हजार की आय प्राप्त हुई है। अभी लम्बी यात्रा शेष है। जिससे आय में भी रिकार्ड इजाफा होगा।

भीषण गर्मी के बीच जल्द दस्तक दे सकती है मॉनसून….. इस साल समय से पहले होगी एंट्री

नई दिल्ली। केरल (Keral) में भारी बारिश (Heavy Rain) का दौर शुरू हो गया है। इससे संकेत मिलने लगे हैं कि भीषण गर्मी के बीच मॉनसून (Monsoon) की एंट्री जल्द ही हो सकती है। हालांकि, इसे लेकर IMD यानी भारत मौसम विज्ञान ने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा है। अनुमान लगाया जा रहा था कि केरल में मॉनसून (Monsoon) 26 मई तक दस्तक दे सकता है। इधर, राजधानी दिल्ली (Delhi) अभी तीन दिन तपने के लिए तैयार है। कहां पहुंचा मॉनसनIMD ने रविवार रात जानकारी दी है कि अगले 2 से 3 दिनों के दौरान दक्षिण पश्चिम मॉनसून के अरब सागर के दक्षिण पश्चिम और दक्षिण पूर्व, कोमोरिन इलाके, दक्षिण पूर्व और पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के बचे हुए हिस्सों में बढ़ने के लिए स्थिति अनुकूल है। हालांकि, केरल में मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। केरल में येलो अलर्ट25 मई को पतनमतिट्टा, आलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर, मलप्पुरम, कोझिकोड और वायनाड में येलो अलर्ट जारी किया गया है। जबकि, इसके अगले दिन यानी 26 मई को तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, आलाप्पुझा और एर्नाकुलम में अलर्ट है। 27 मई को केवल तीन जिलों तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और आलाप्पुझा का नाम दिया गया है। अंत में 28 मई को तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पतनमतिट्टा, आलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम और इडुक्की को इस सूची में शामिल किया गया है। मौसम विभाग ने मानसून के 26 मई को राज्य में दस्तक देने का अनुमान जताया है। विभाग ने 28 मई से तीन जून के बीच केरल के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का भी अनुमान जताया है। देश की सबसे गर्म जगहकई राज्यों में रविवार को भीषण गर्मी पड़ी जिनमें से महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का ब्रह्मपुरी 47.2 डिग्री सेल्सियस के साथ देश का सबसे गर्म स्थान रहा। हालांकि, मौसम विभाग ने 29 मई से गर्मी से धीरे-धीरे राहत मिलने का अनुमान लगाया है। आईएमडी ने अपने पूर्वानुमान में कहा, ‘अगले सात दिनों तक मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में तथा अगले 3-5 दिनों तक पूर्वी और उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है।’ भयंकर गर्मी के आसारजयपुर मौसम विज्ञान केंद्र ने लू की चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले तीन से चार दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। यह भी अनुमान है कि 26 और 27 मई को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में पारा 46-47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हालांकि, आंध्र प्रदेश में मौसम की स्थिति इसके विपरीत है। कई जिलों में भीषण गर्मी पड़ रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में आने वाले दिनों में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने रविवार को चेतावनी जारी की कि अगले तीन दिनों तक भीषण लू चलने की आशंका है।

Budget Travel Guide: कम खर्च में गोवा और मनाली घूमने का पूरा प्लान

नई दिल्ली । भारत में घूमने के शौकीनों के लिए गोवा और मनाली दो ऐसे डेस्टिनेशन हैं, जिनका नाम आते ही बीच, पहाड़ और एडवेंचर की तस्वीरें सामने आ जाती हैं। लेकिन अक्सर लोग यह सोचकर ट्रिप टाल देते हैं कि यहां घूमना महंगा पड़ेगा। अगर सही प्लानिंग की जाए तो इन दोनों जगहों की यात्रा बहुत ही कम बजट में भी की जा सकती है। सबसे पहले बात करें ट्रैवल की, तो सस्ते सफर के लिए ट्रेन और बस सबसे बेहतर विकल्प हैं। गोवा जाने के लिए कोंकण रेलवे रूट काफी किफायती और सुंदर है, जबकि मनाली के लिए दिल्ली या चंडीगढ़ से वोल्वो बसें आसानी से और कम दाम में मिल जाती हैं। अगर टिकट पहले से बुक कर ली जाए तो और भी सस्ते में सफर संभव है। रहने के लिए महंगे होटल्स की बजाय होस्टल, गेस्ट हाउस या बजट होमस्टे चुनना बेहतर होता है। गोवा में बीच के पास कई सस्ते हॉस्टल मिल जाते हैं, वहीं मनाली में वॉलनट और ओल्ड मनाली एरिया में बजट स्टे आसानी से मिल जाता है। ग्रुप में ट्रैवल करने पर रूम शेयरिंग से खर्च और कम हो जाता है। खाने-पीने के मामले में लोकल ढाबे और स्ट्रीट फूड सबसे किफायती विकल्प हैं। गोवा में सी-फूड और लोकल थाली काफी सस्ती मिलती है, जबकि मनाली में हिमाचली डिशेज जैसे धाम और राजमा चावल कम बजट में अच्छा खाना उपलब्ध कराते हैं। महंगे रेस्टोरेंट्स से बचना खर्च कम करने का सबसे आसान तरीका है। ट्रिप का सही समय चुनना भी बहुत जरूरी है। ऑफ-सीजन में यात्रा करने से होटल और ट्रैवल दोनों सस्ते मिलते हैं। गोवा में मॉनसून या ऑफ सीजन और मनाली में पीक सीजन के अलावा समय चुनना बजट ट्रिप को और आसान बनाता है। लोकल ट्रांसपोर्ट का उपयोग करना भी खर्च कम करता है। बाइक रेंट, लोकल बस और शेयर टैक्सी से घूमना काफी सस्ता पड़ता है। इसके अलावा पहले से एक रफ इटिनरेरी बनाकर चलना अनावश्यक खर्च से बचाता है। थोड़ी सी समझदारी और सही प्लानिंग के साथ गोवा की बीच लाइफ और मनाली की बर्फीली वादियों का मजा बिना ज्यादा पैसे खर्च किए भी लिया जा सकता है।

GWALIOR WATER CRISES: भीषण गर्मी में पानी की किल्लत, ग्वालियर में पानी की सप्लाई ठप; लोगों की बढ़ी मुश्किलें

GWALIOR WATER SUPPLY

HIGHLIGHTS: कई इलाकों में हफ्तों से नहीं आया पानी टैंकर पहुंचते ही लोगों में झगड़े की नौबत महिलाओं के बीच पानी को लेकर विवाद नगर निगम के दावों पर उठे सवाल भीषण गर्मी में बढ़ा जल संकट   GWALIOR WATER CRISES: ग्वालियर। भीषण गर्मी के बिच ग्वालियर में जल संकट बढ़ता ही जा रहा है। बता दें कि शहर के कई इलाकों में हालात बहुत ज्यादा खराब हो गए हैं, टैंकर पहुंचते ही लोग बाल्टी और डिब्बे लेकर दौड़ पड़ते हैं। कई जगहों पर पानी भरने को लेकर धक्का-मुक्की और विवाद जैसे हालात देखने को मिल रहे हैं, लोगों का कहना है कि बूंद-बूंद पानी के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। मेमोरियल डे 2026: शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अमेरिका का राष्ट्रीय दिवस नगर निगम का कहना सप्लाई भरपूर जमीनी हकीकत के सामने नगर निगम के दावें फीके पड़ते जा रहे हैं। नगर निगम का कहना है कि ग्वालियर की करीब 15 लाख आबादी के लिए रोजाना लगभग 10 एमसीएफटी पानी की जरूरत है, जबकि तिघरा डैम से करीब 12 एमसीएफटी पानी फिल्टर प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है। इसके बावजूद शहर के कई इलाकों में पानी की भारी कमी बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि कागजों में सप्लाई पूरी दिखाई जा रही है, लेकिन हकीकत में कई घरों तक हफ्तों से पानी नहीं पहुंचा। किस राशि को सताती है सबसे ज्यादा गर्मी? जानिए अपना तत्व, शरीर पर असर और राहत के ज्योतिषीय उपाय इन इलाकों में सबसे ज्यादा संकट शिंदे की छावनी, घोसीपुरा, सिंधिया नगर, जागृति नगर, गोल पहाड़िया, लक्ष्मीगंज, हनुमान घाटी, क्रेशर कॉलोनी, टावर कॉलोनी, किलागेट और गिरवाई सहित कई इलाकों में हालात बेहद खराब हैं। यहां लोग पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हो चुके हैं। कई बार टैंकरों में पानी कम पड़ जाता है, जिससे लोगों को खाली बर्तन लेकर लौटना पड़ता है। शिव भक्ति का विशेष दिन, जानें सोमवार व्रत की पूजा विधि और महत्व पानी के इंतजार में ठप हो रहा कामकाज स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी के इंतजार में उनका पूरा दिन खराब हो जाता है। दिहाड़ी मजदूर काम पर नहीं जा पा रहे, वहीं महिलाओं को घर के काम छोड़कर घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। बढ़ती गर्मी और लगातार बिगड़ते हालातों के बीच अब लोगों को डर सताने लगा है कि आने वाले दिनों में जल संकट और ज्यादा गंभीर हो सकता है।

मेमोरियल डे 2026: शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अमेरिका का राष्ट्रीय दिवस

मेमोरियल डे (Memorial Day) संयुक्त राज्य अमेरिका का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवकाश है, जिसे हर साल मई महीने के अंतिम सोमवार को मनाया जाता है। यह दिन उन अमेरिकी सैनिकों की याद में समर्पित होता है जिन्होंने देश की सेवा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। वर्ष 2026 में यह दिन 25 मई, सोमवार को मनाया जाएगा। मेमोरियल डे का इतिहासमेमोरियल डे की शुरुआत अमेरिकी गृहयुद्ध (American Civil War) के बाद हुई थी, जब देश में हजारों सैनिकों की मृत्यु ने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया था। शुरुआत में इसे “Decoration Day” कहा जाता था क्योंकि लोग शहीद सैनिकों की कब्रों पर फूल और पुष्प अर्पित करते थे। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे अमेरिका में फैल गई और 1971 में इसे आधिकारिक रूप से संघीय अवकाश (Federal Holiday) घोषित कर दिया गया। तब से यह हर साल मई के अंतिम सोमवार को मनाया जाने लगा। मेमोरियल डे 2026 की तारीख2026 में मई महीने का अंतिम सोमवार 25 मई को पड़ रहा है। इसलिए इस साल मेमोरियल डे 25 मई 2026 को पूरे अमेरिका में मनाया जाएगा। इस दिन सरकारी दफ्तर, बैंक और कई संस्थान बंद रहते हैं। इस दिन क्या होता है?मेमोरियल डे केवल एक छुट्टी का दिन नहीं है, बल्कि यह गहरी श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। इस दिन अमेरिका के लोग विभिन्न तरीकों से शहीदों को याद करते हैं— सैन्य कब्रिस्तानों में जाकर पुष्प अर्पित करना“National Moment of Remembrance” के तहत एक मिनट का मौन रखना परेड और स्मृति समारोहों का आयोजन परिवारों द्वारा शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देना कई जगहों पर अमेरिकी झंडा आधा झुका (half-staff) रखा जाता है। मेमोरियल डे और वेटरन्स डे में अंतरअक्सर लोग मेमोरियल डे और वेटरन्स डे को एक जैसा समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में अंतर है। मेमोरियल डे: उन सैनिकों के लिए जो युद्ध में शहीद हो चुके हैं। वेटरन्स डे: सभी जीवित और पूर्व सैनिकों के सम्मान में मनाया जाता है। मेमोरियल डे का महत्वयह दिन सिर्फ छुट्टी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है। यह अमेरिका को याद दिलाता है कि आज जो स्वतंत्रता और सुरक्षा मिली है, वह उन सैनिकों के बलिदान की वजह से संभव हुई है जिन्होंने देश के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी। आधुनिक समय में मेमोरियल डेआज के समय में मेमोरियल डे पर लोग पारिवारिक कार्यक्रमों, पिकनिक और यात्रा की योजना भी बनाते हैं क्योंकि यह गर्मी की शुरुआत और लंबे वीकेंड का अवसर भी होता है। हालांकि इसके मूल भाव शहीदों को याद करना को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है। मेमोरियल डे 2026 हमें यह याद दिलाता है कि स्वतंत्रता और शांति की कीमत बहुत बड़ी होती है। यह दिन न केवल सैनिकों के बलिदान को सम्मान देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और कृतज्ञता का संदेश भी देता है। -मेमोरियल डे (Memorial Day)

विश्व ड्रैकुला दिवस (25 मई): रहस्य, डर और साहित्यिक अमरता का अनोखा उत्सव

हर साल 25 मई को “विश्व ड्रैकुला दिवस” (World Dracula Day) मनाया जाता है, जो दुनिया के सबसे प्रसिद्ध काल्पनिक चरित्रों में से एक काउंट ड्रैकुला को समर्पित है। यह दिन केवल डरावनी कहानियों या हॉरर फिल्मों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह साहित्य, इतिहास, लोककथाओं और पॉप संस्कृति के उस अद्भुत संगम को दर्शाता है जिसने ड्रैकुला को अमर बना दिया। ड्रैकुला कौन है?ड्रैकुला एक काल्पनिक पिशाच (Vampire) पात्र है, जिसे आयरिश लेखक ब्रैम स्टोकर (Bram Stoker) ने 1897 में अपने प्रसिद्ध उपन्यास Dracula में प्रस्तुत किया था। यह कहानी एक रहस्यमयी ट्रांसिल्वेनियाई काउंट की है जो रात में जीवित रहने वाले पिशाच के रूप में इंसानों का खून पीकर अपनी शक्ति बढ़ाता है। इस उपन्यास ने दुनिया भर में हॉरर साहित्य की परिभाषा बदल दी। 25 मई का महत्व क्यों?विश्व ड्रैकुला दिवस 25 मई को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि माना जाता है कि इसी तारीख के आसपास ब्रैम स्टोकर ने ड्रैकुला की कहानी लिखने की शुरुआत की थी। यह दिन उनके साहित्यिक योगदान और हॉरर शैली को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। समय के साथ यह दिन ड्रैकुला के चाहने वालों और हॉरर प्रेमियों के लिए एक खास अवसर बन गया है। इतिहास और प्रेरणाड्रैकुला के चरित्र की प्रेरणा वास्तविक ऐतिहासिक व्यक्ति व्लाद द इम्पेलर (Vlad the Impaler) से ली गई मानी जाती है, जो 15वीं शताब्दी का एक रोमानियाई शासक था। वह अपनी क्रूरता और दुश्मनों को सूली पर चढ़ाने की सजा के लिए प्रसिद्ध था। हालांकि ब्रैम स्टोकर ने इसे पूरी तरह काल्पनिक और रहस्यमय पिशाच में बदल दिया। ड्रैकुला और पॉप संस्कृतिड्रैकुला केवल साहित्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फिल्मों, टीवी सीरीज, कॉमिक्स और वीडियो गेम्स में भी उसकी छवि अमर हो गई। 1922 की फिल्म Nosferatu से लेकर आधुनिक हॉलीवुड फिल्मों तक, ड्रैकुला का किरदार बार-बार अलग-अलग रूपों में सामने आया है। बेला लुगोसी और क्रिस्टोफर ली जैसे अभिनेताओं ने इस किरदार को वैश्विक पहचान दिलाई।आज ड्रैकुला को हॉरर का प्रतीक माना जाता है। उसकी छवि काले लबादे, नुकीले दांत और रहस्यमयी महल के साथ जुड़ी हुई है, जो डर और आकर्षण दोनों का मिश्रण है। विश्व ड्रैकुला दिवस का महत्वयह दिन हॉरर साहित्य के प्रशंसकों के लिए एक उत्सव है। कई देशों में इस दिन थीम पार्टी, कॉस्प्ले इवेंट, फिल्म स्क्रीनिंग और साहित्यिक चर्चा आयोजित की जाती है। लोग ड्रैकुला की कहानियों को फिर से पढ़ते हैं और इस किरदार के सांस्कृतिक प्रभाव को समझते हैं। डर के पीछे छिपा संदेशहालांकि ड्रैकुला एक डरावना पात्र है, लेकिन उसकी कहानी मानवीय भय, अमरता की इच्छा और अंधकार बनाम प्रकाश जैसे गहरे विषयों को भी दर्शाती है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि डर केवल बाहरी नहीं, बल्कि हमारे अंदर भी मौजूद होता है। विश्व ड्रैकुला दिवस केवल एक काल्पनिक पिशाच का उत्सव नहीं है, बल्कि यह साहित्य, कल्पना और मानवीय भावनाओं की गहराई को समझने का अवसर है। ड्रैकुला आज भी हमें यह याद दिलाता है कि कहानियां समय के साथ खत्म नहीं होतीं, बल्कि और अधिक शक्तिशाली बन जाती हैं। -विश्व ड्रैकुला दिवस