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ईरान-अमेरिका बातचीत में नरमी के संकेत, लेकिन समझौता अभी अधर में; कुछ अहम मुद्दों पर जारी है गतिरोध

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत में हल्की नरमी के संकेत जरूर दिख रहे हैं, लेकिन किसी अंतिम समझौते पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि बातचीत में प्रगति हो रही है और जल्द कुछ सकारात्मक जानकारी सामने आ सकती है। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी माना है कि पिछले एक सप्ताह में दोनों देशों के रुख में नजदीकी आई है, लेकिन अहम मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ बातचीत में सुधार का मतलब यह नहीं है कि समझौता तय हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी अपने प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी समझौते में जल्दबाज़ी न की जाए और बातचीत को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाए। ईरानी सरकारी मीडिया का दावा है कि समझौता अमेरिका की पाबंदियों की वजह से अभी अटका हुआ है, जबकि दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि एक-दो मुद्दों पर अब भी गंभीर मतभेद कायम हैं। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने इस बातचीत का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि किसी ऐसे समझौते पर सहमति बने जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट ढांचा तय हो।फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अंतिम फैसला अभी दूर माना जा रहा है।

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर राहुल गांधी का सरकार पर बड़ा हमला, ‘महंगाई मानव मोदी’ कहकर साधा निशाना

नई दिल्ली । देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्माता दिखाई दे रहा है। ईंधन दरों में बढ़ोतरी का असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है और यही वजह है कि यह मुद्दा राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन गया है। हालिया कीमत वृद्धि के बाद विपक्ष ने सरकार की आर्थिक नीतियों और महंगाई को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी करके आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को महंगाई और जनजीवन से जोड़ते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। अपने बयान में राहुल गांधी ने तंज भरे अंदाज में प्रधानमंत्री की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी की जा रही है, जिससे आम लोगों पर असर धीरे-धीरे पड़ता रहे। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी वादों और बाद की आर्थिक परिस्थितियों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। दरअसल, पिछले कुछ समय से ईंधन की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के बाजार में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय हालात का असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां, भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़े कारक ईंधन कीमतों को प्रभावित करते हैं। ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों के दैनिक खर्चों पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से केवल वाहन चलाने की लागत ही नहीं बढ़ती, बल्कि परिवहन खर्च बढ़ने के कारण कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। यही कारण है कि पेट्रोल और डीजल की दरों में बदलाव हमेशा व्यापक चर्चा का विषय बन जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई और ईंधन मूल्य हमेशा संवेदनशील मुद्दे रहे हैं और विपक्ष इन्हें जनता से सीधे जुड़े विषयों के रूप में उठाता रहा है। आने वाले समय में भी यह मुद्दा राजनीतिक चर्चाओं में प्रमुख बना रह सकता है, क्योंकि इसका संबंध सीधे आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति से जुड़ा है। फिलहाल ईंधन कीमतों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में बाजार की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां और सरकारी फैसले इस मुद्दे की दिशा तय कर सकते हैं। जनता की नजर अब इस बात पर रहेगी कि आने वाले समय में ईंधन कीमतों में राहत मिलती है या बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहता है।

गुना में जैन समाज का मौन आक्रोश: रीवा कांड की SIT जांच और संत सुरक्षा नीति की उठी मांग

मध्य प्रदेश । गुना में सोमवार को जैन समाज का आक्रोश शांत स्वर में लेकिन बेहद प्रभावी रूप में सड़कों पर दिखाई दिया। रीवा में जैन साध्वी आर्यिका श्रुतमति माताजी एवं उपशममति माताजी की सड़क दुर्घटना में हुई असामयिक समाधि को लेकर पूरे समाज में गहरा शोक और आक्रोश व्याप्त है। इसी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर गुना सहित प्रदेशभर में जैन समाज के हजारों लोग सड़क पर उतर आए। गुना शहर में मौन जुलूस की शुरुआत चौधरी मोहल्ला स्थित श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से हुई। हाथों में तख्तियां, आंखों में आंसू और चेहरों पर गहरी पीड़ा लिए समाज के पुरुष, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। बिना नारेबाजी के यह जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों बताशा गली, हाट रोड, रपटा और हनुमान चौराहा से होते हुए कलेक्टोरेट पहुंचा। कलेक्ट्रेट परिसर में समाज के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि रीवा की घटना केवल एक सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं हो सकती, बल्कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो और परिस्थितियों को देखते हुए इसकी SIT या न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही पूरे प्रकरण में किसी भी तरह की साजिश या लापरवाही की आशंका को गंभीरता से जांच के दायरे में लिया जाए। समाज ने मांग की कि घटनास्थल के आसपास के सभी CCTV फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित किए जाएं और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि जांच में कोई सुनियोजित साजिश सामने आती है, तो संबंधित धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जैन समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि जैन साधु-संत पूरी तरह अहिंसक और निहत्थे होते हैं, जो पैदल विहार कर धर्म और शांति का संदेश देते हैं। ऐसे में उनके साथ हो रही लगातार दुर्घटनाएं और घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। समाज ने देशभर में “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” और “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की भी मांग की है। इसमें विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, ट्रैफिक नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त और विशेष चेतावनी संकेतक लगाने की बात शामिल है। इसके साथ ही संत सुरक्षा समन्वय प्रकोष्ठ और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था स्थापित करने की मांग भी रखी गई। इस मौन जुलूस में पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह सलूजा, वैश्य समाज अध्यक्ष राजेश मोहन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधि और नागरिक शामिल हुए। पूरे जिले में आरोन, राघौगढ़, बीनागंज और कुंभराज सहित कई क्षेत्रों में भी इसी तरह ज्ञापन सौंपे गए और विरोध दर्ज कराया गया।

गुना में दहेज का दर्दनाक मामला: 5 लाख की बाइक की मांग बनी मौत की वजह

गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले के म्याना थाना क्षेत्र में दहेज प्रताड़ना का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 24 वर्षीय नवविवाहिता भावना यादव ने लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से परेशान होकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मृतका के पति गिर्राज यादव को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि सास, ससुर और देवर फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। ढाई साल पहले हुई थी शादी, दहेज के लिए बढ़ता दबावमृतका भावना यादव की शादी करीब ढाई साल पहले अशोकनगर जिले के कदवाया निवासी परिवार से म्याना के नसीरा गांव में हुई थी। परिजनों के अनुसार शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा 5 लाख रुपये की मोटरसाइकिल और अन्य दहेज की मांग को लेकर उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों ने आरोप लगाया कि 13 मई को जब भावना का भाई उसे मायके लाने पहुंचा, तो ससुराल में उसके साथ मारपीट की गई। इसी दौरान वह मानसिक रूप से टूट गई और दोपहर में जहरीला पदार्थ खा लिया। मारपीट और धमकी का आरोप, अस्पताल ले जाते समय भी बर्बरतामृतका के भाई अभिषेक ने बताया कि जब वह बहन को लेने पहुंचा तो पति और ससुर ने उसके साथ भी मारपीट की। ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद उसे बाहर निकाला गया, लेकिन कुछ ही देर बाद ससुराल पक्ष ने बताया कि भावना ने जहर खा लिया है। परिजनों का आरोप है कि शुरुआत में उसे अस्पताल ले जाने में भी देरी की गई और बाद में रास्ते में भाई को गाड़ी से उतार दिया गया। जब परिवार अस्पताल पहुंचा, तो भावना को मृत घोषित कर दिया गया। ऑडियो से खुला राज: 5 लाख की बाइक की मांगइस मामले में एक ऑडियो भी सामने आया है, जिसमें पति गिर्राज यादव अपनी पत्नी से 5 लाख रुपये की मोटरसाइकिल की मांग करते हुए सुनाई दे रहा है। ऑडियो में वह धमकी देता है कि पैसे न मिलने पर रिश्ता खत्म समझा जाए। यह ऑडियो मामले में अहम सबूत माना जा रहा है, जिसने दहेज प्रताड़ना के आरोपों को और मजबूत कर दिया है। पुलिस जांच में चारों पर केस दर्ज, पति गिरफ्तारएसडीओपी स्तर की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पति, सास, ससुर और देवर मिलकर नवविवाहिता को दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने चारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने पति गिर्राज यादव को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

वायरल ट्रेंड के पीछे छिपा खतरा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर ऑनलाइन ठगी का नया खेल शुरू

नई दिल्ली ।सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने वाले ट्रेंड और डिजिटल अभियानों का प्रभाव युवाओं के बीच लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन लोकप्रियता और उत्सुकता के इस दौर में साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल के दिनों में एक वायरल डिजिटल ट्रेंड के नाम का इस्तेमाल कर साइबर ठगी का नया मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इसके बाद पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की चेतावनी जारी की है। जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कुछ संदिग्ध लिंक तेजी से प्रसारित किए जा रहे हैं। इन संदेशों में आकर्षक शब्दों और भावनात्मक अपील के जरिए लोगों को किसी डिजिटल अभियान या समूह से जुड़ने का निमंत्रण दिया जा रहा है। युवाओं को विशेष रूप से ध्यान में रखकर ऐसे संदेश तैयार किए जा रहे हैं ताकि वे उत्सुकतावश लिंक पर क्लिक कर दें। पुलिस का कहना है कि यह केवल एक साधारण लिंक नहीं बल्कि साइबर ठगी का हिस्सा हो सकता है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये कथित लिंक फिशिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन पर क्लिक करता है, उसके मोबाइल या डिजिटल डिवाइस की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके जरिए निजी जानकारी, बैंकिंग विवरण, पासवर्ड और अन्य महत्वपूर्ण डेटा साइबर अपराधियों तक पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार फिशिंग लिंक आज के समय में ऑनलाइन धोखाधड़ी का सबसे आम तरीका बनते जा रहे हैं। ये लिंक दिखने में सामान्य या भरोसेमंद लग सकते हैं, लेकिन इनके पीछे छिपा उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी हासिल करना होता है। कई मामलों में ऐसे हमलों के जरिए बैंक खातों से रकम निकालने और डिजिटल पहचान के दुरुपयोग जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर ट्रेंड या वायरल अभियान पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता। कई बार लोकप्रिय विषयों का इस्तेमाल करके साइबर ठग लोगों की भावनाओं और उत्सुकता का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि पुलिस और साइबर एजेंसियां लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करनी चाहिए। यदि कोई संदेश अत्यधिक आकर्षक, भावनात्मक या असामान्य वादा करता दिखाई दे तो सतर्क रहना आवश्यक है। इसके अलावा संदिग्ध संदेशों को आगे साझा करने से भी बचना चाहिए। डिजिटल दुनिया ने लोगों को जोड़ने के नए अवसर दिए हैं, लेकिन इसके साथ सतर्कता और जागरूकता भी उतनी ही जरूरी हो गई है। एक छोटी सी लापरवाही कई बार आर्थिक और व्यक्तिगत नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में ऑनलाइन सुरक्षा नियमों का पालन करना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

65 लाख लोगों की ऑक्सीजन के ‘रक्षक’ बने पक्षी: गांधीसागर के जंगलों में पर्यावरण संतुलन संभाल रहे कठफोड़वा

मंदसौर। मध्यप्रदेश के गांधीसागर अभयारण्य के घने जंगलों में एक अनोखा प्राकृतिक संतुलन देखने को मिलता है, जहां पक्षियों की कई प्रजातियां पर्यावरण की रक्षा में अहम भूमिका निभा रही हैं। खासकर ब्लैक-रम्प्ड फ्लेमबैक यानी सुनहरा कठफोड़वा पेड़ों की छाल में छिपे हानिकारक कीटों को नष्ट कर उन्हें बीमार होने से बचा रहा है। वन विशेषज्ञों के अनुसार, ये पक्षी पेड़ों के तनों में मौजूद लकड़ी भेदक भृंग, दीमक और अन्य कीटों को खाकर जंगल को स्वस्थ बनाए रखते हैं। इससे पेड़ों की जीवन अवधि बढ़ती है और वनों का प्राकृतिक संतुलन कायम रहता है। 1.5 करोड़ पेड़, 177 करोड़ किलो ऑक्सीजन प्रकृति का विशाल नेटवर्कपर्यावरण विशेषज्ञों का अनुमान है कि एक विकसित पेड़ सालभर में लगभग 118 किलो ऑक्सीजन छोड़ता है। इसी आधार पर गांधीसागर क्षेत्र के करीब 1.5 करोड़ पेड़ हर वर्ष लगभग 177 करोड़ किलो ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं। यह ऑक्सीजन करीब 65 लाख से अधिक लोगों की जरूरत को पूरा करने में सक्षम है। इस पूरे पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखने में कठफोड़वा और अन्य कीटभक्षी पक्षियों की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। कई प्रजातियां निभा रही अहम भूमिकागांधीसागर के जंगलों में केवल कठफोड़वा ही नहीं, बल्कि कई अन्य पक्षी भी प्राकृतिक कीट नियंत्रण में योगदान दे रहे हैं- नटहैच: पेड़ों के तनों पर उल्टा चलकर कीड़े ढूंढते हैंट्रीक्रीपर: छाल के भीतर छिपे कीड़ों को खाते हैंबार्बेट: फल और कीट दोनों का सेवन करते हैंवार्बलर: पत्तियों पर लगे छोटे कीटों को खत्म करते हैंफ्लाईकैचर: हवा में उड़ते कीड़ों को पकड़ते हैंटिट (चिड़िया): टहनियों से कीड़े चुनकर खाते हैं पेड़ों के ‘कीट डॉक्टर’ हैं कठफोड़वावनस्पति विशेषज्ञों के अनुसार, पेड़ों को सबसे अधिक नुकसान लकड़ी भेदक कीटों, दीमक और पत्तियों का रस चूसने वाले कीटों से होता है। ये कीट पेड़ों के भीतर सुरंग बनाकर उन्हें खोखला कर देते हैं और धीरे-धीरे सुखा देते हैं। ऐसे में कठफोड़वा जैसे पक्षी इन कीटों को खाकर प्राकृतिक कीटनाशक की भूमिका निभाते हैं और जंगलों को लंबे समय तक हरा-भरा बनाए रखते हैं। पर्यावरण संतुलन में अहम योगदानविशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन पक्षियों की संख्या में गिरावट आती है तो जंगलों में कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है, जिससे पेड़ों की संख्या घटने लगेगी और ऑक्सीजन उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। इसलिए इन प्रजातियों का संरक्षण बेहद जरूरी है। गांधीसागर अभयारण्य में यह प्राकृतिक तंत्र पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है, जहां पक्षी स्वयं जंगल के “रक्षक” बनकर कार्य कर रहे हैं।

रफ्तार का नशा पड़ा भारी, 200 किमी प्रति घंटे की स्पीड पर बनाई रील, डिजिटल सुरागों ने पहुंचाया सलाखों तक

नई दिल्ली सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने की चाहत कई बार लोगों को ऐसे कदम उठाने के लिए प्रेरित कर देती है, जिनका परिणाम गंभीर हो सकता है। तेज रफ्तार, स्टंट और वायरल होने की होड़ के बीच सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी अब कानून व्यवस्था के लिए भी चुनौती बनती जा रही है। ताजा मामले में एक युवक द्वारा रिंग रोड पर अत्यधिक रफ्तार से लग्जरी कार चलाने और उसका वीडियो साझा करने के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार युवक ने एक हाई-स्पीड मार्ग पर अपनी लग्जरी कार को बेहद तेज रफ्तार में दौड़ाया। बताया जा रहा है कि वाहन की गति सामान्य सीमा से कहीं अधिक थी और इसी दौरान ड्राइविंग से जुड़ा वीडियो रिकॉर्ड किया गया। बाद में इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता जतानी शुरू कर दी। तेज रफ्तार में वाहन चलाना केवल चालक के लिए ही नहीं बल्कि सड़क पर मौजूद अन्य लोगों के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे मामलों में एक छोटी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसी वजह से वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित एजेंसियां भी सक्रिय हो गईं। मामले की जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल गतिविधियों का सहारा लिया गया। पुलिस ने सोशल मीडिया प्रोफाइल और अन्य तकनीकी संकेतों के आधार पर आरोपी की पहचान की और उसके बाद कार्रवाई को अंजाम दिया। जांच एजेंसियों ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा की गई सामग्री कई बार जांच में अहम भूमिका निभाती है और कानून से बच निकलना आसान नहीं होता। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित रूप से वाहन और घटना से जुड़े तथ्यों को स्वीकार किया। इसके बाद कार्रवाई के तहत संबंधित वाहन को भी जब्त कर लिया गया और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सोशल मीडिया पर कुछ अलग दिखाने की होड़ किस हद तक लोगों को जोखिम उठाने के लिए प्रेरित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कें स्टंट या लोकप्रियता पाने का मंच नहीं हैं। यातायात नियम केवल व्यवस्था बनाए रखने के लिए नहीं बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए जाते हैं। तेज रफ्तार से जुड़ी घटनाएं पहले भी कई दर्दनाक हादसों का कारण बन चुकी हैं, जिनमें कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और रील संस्कृति ने नई संभावनाएं तो दी हैं, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है। कानून एजेंसियां लगातार यह संदेश दे रही हैं कि ऑनलाइन लोकप्रियता के लिए सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। यह घटना उन लोगों के लिए भी एक सीख मानी जा रही है जो कुछ मिनटों की प्रसिद्धि के लिए नियमों और सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं।

मंदसौर: तालाब में डूबे 16 वर्षीय किशोर का शव 13 घंटे बाद बरामद, एसडीआरएफ ने किया रेस्क्यू

मंदसौर। जिले के संजीत कस्बे में एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां रविवार शाम से लापता 16 वर्षीय किशोर चेतन का शव सोमवार दोपहर तालाब से बरामद किया गया। शव मिलने के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। जानकारी के अनुसार चेतन (पिता जगदीश बाली), जो वाल्मीकि समाज से था, रविवार शाम करीब 5 बजे घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की तो तालाब किनारे उसकी चप्पलें मिलीं, जिससे डूबने की आशंका गहरा गई। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। रात में शुरू हुआ रेस्क्यू, अंधेरे के कारण रोका गया ऑपरेशनसूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय गोताखोरों की मदद से शाम करीब 6 बजे सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। कई घंटे की तलाश के बावजूद सफलता नहीं मिली तो एसडीआरएफ (SDERF) टीम को बुलाया गया। रात करीब 10:30 बजे तक टीम ने तालाब के अलग-अलग हिस्सों में सर्चिंग की, लेकिन कम दृश्यता और अंधेरे के कारण रेस्क्यू रोकना पड़ा। सुबह फिर शुरू हुआ सर्च, दो घंटे में मिला शवसोमवार सुबह एक बार फिर एसडीआरएफ और गोताखोरों की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सुबह 10:30 बजे से सघन तलाशी अभियान चलाया गया और करीब पौने दो घंटे की मेहनत के बाद दोपहर 12:15 बजे किशोर का शव तालाब से बाहर निकाल लिया गया। शव मिलने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया और गांव में मातम छा गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस जांच में जुटी, हर एंगल से पड़ताल जारीनाहरगढ़ थाना पुलिस इस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है कि यह हादसा था या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। फिलहाल प्रारंभिक रूप से इसे डूबने की घटना माना जा रहा है।

रेल यात्रियों को बड़ी राहत: बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर और अजमेर-बांद्रा टर्मिनस ट्रेनें अब नियमित होंगी

रतलाम। यात्रियों की बढ़ती मांग और सुविधा को ध्यान में रखते हुए पश्चिम रेलवे ने बड़ा निर्णय लिया है। अब स्पेशल ट्रेन के रूप में चल रही दो प्रमुख ट्रेनों को नियमित सेवा में शामिल कर दिया गया है। इनमें ट्रेन संख्या 20163/20164 बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर एक्सप्रेस और 19625/19626 अजमेर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस शामिल हैं। इस फैसले से मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को स्थायी और सुगम रेल सेवा उपलब्ध होगी। बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर एक्सप्रेस का नया शेड्यूलट्रेन संख्या 20163 बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर एक्सप्रेस 30 मई से हर शनिवार को बांद्रा टर्मिनस से शाम 4:30 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन रतलाम (02:45/02:50 रविवार) और उज्जैन (05:10/05:15) होते हुए अगले दिन दोपहर 3:10 बजे जबलपुर पहुंचेगी। वहीं, वापसी में ट्रेन संख्या 20164 जबलपुर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस 29 मई से हर शुक्रवार को जबलपुर से शाम 5:00 बजे चलेगी और रतलाम (03:50/03:55 शनिवार) तथा उज्जैन (02:10/02:12) होते हुए अगले दिन दोपहर 2:15 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। इस ट्रेन में एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर और सामान्य श्रेणी के कोच उपलब्ध रहेंगे। इन प्रमुख स्टेशनों पर होगा ठहरावदोनों दिशाओं में इस ट्रेन का ठहराव बोरीवली, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, उज्जैन, संत हिरदाराम नगर, भोपाल, नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया और नरसिंहपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर होगा। अजमेर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस का संचालन भी नियमितरेलवे ने ट्रेन संख्या 19625 अजमेर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस को भी नियमित किया है, जो रविवार को अजमेर से सुबह 6:35 बजे रवाना होकर रतलाम (17:30/17:40) होते हुए सोमवार को बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 19626 बांद्रा टर्मिनस-अजमेर एक्सप्रेस सोमवार को बांद्रा टर्मिनस से सुबह 8:35 बजे चलेगी और रतलाम (21:05/21:15) होते हुए मंगलवार सुबह 9:10 बजे अजमेर पहुंचेगी। यात्रियों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटीइन दोनों ट्रेनों के नियमित होने से मुंबई, राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। अब यात्रियों को स्पेशल ट्रेन की अनिश्चितता से नहीं गुजरना पड़ेगा और नियमित शेड्यूल के साथ यात्रा आसान हो जाएगी। रेलवे के इस फैसले को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और यात्री सुविधा के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।

संत सुरक्षा की मांग तेज: रतलाम में जैन समाज ने उठाई सख्त कार्रवाई की आवाज

मध्य प्रदेश । रतलाम में रीवा जिले की दर्दनाक घटना के बाद जैन समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिला। सकल जैन श्री संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाजजन कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए जैन संतों की सुरक्षा के लिए विशेष “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग की। समाजजनों ने इस घटना को केवल सड़क दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे “संदिग्ध और गंभीर मामला” बताया। ज्ञापन अपर कलेक्टर डॉ. शालिनी श्रीवास्तव को सौंपा गया। इस दौरान समाज के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ-साथ हिंदू संगठन और व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। ‘यह हादसा नहीं, हत्या है’ – समाज का आरोपज्ञापन में स्पष्ट कहा गया कि रीवा में 20 मई को हुई घटना एक साधारण सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही या सुनियोजित कृत्य हो सकता है। जैन समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि मामले में हत्या का केस दर्ज किया जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।समाज ने आरोप लगाया कि पैदल विहार कर रहे निहत्थे साधु-संतों की सुरक्षा के लिए अब ठोस नीति बनाना जरूरी हो गया है, क्योंकि लगातार इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय बन रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर 7 प्रमुख मांगें रखी गईंज्ञापन में प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं, जिनमें शामिल हैं-घटना की SIT या न्यायिक जांच कराई जाएसभी CCTV और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जाएंदोषियों पर कठोरतम धाराओं में कार्रवाई होयदि षड्यंत्र के संकेत मिलें तो हत्या का केस दर्ज किया जाए“संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” तत्काल लागू किया जाएराष्ट्रीय स्तर पर संत सुरक्षा नीति और गाइडलाइन बनाई जाएविहार मार्गों पर पुलिस सहायता, संकेतक और ट्रैफिक नियंत्रण बढ़ाया जाएइसके अलावा समाज ने मांग की कि पैदल विहार करने वाले संतों के लिए रात्रि विश्राम की व्यवस्था सरकारी स्कूलों और पंचायत भवनों में की जाए। रीवा हादसे में दो साध्वियों की मौत, एक गंभीररीवा में 20 मई को हुए हादसे में तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे विहार कर रही जैन साध्वियों को टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में श्रुति मति माता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य साध्वी ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। एक साध्वी गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है। घटना का CCTV फुटेज सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है, जिसमें कार को तेज रफ्तार में साध्वियों को टक्कर मारते देखा गया। इसके बाद प्रदेशभर में जैन समाज में आक्रोश फैल गया। प्रदेशभर में विरोध, प्रशासन पर बढ़ा दबावरतलाम में ज्ञापन के बाद अब यह मुद्दा प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है। समाजजन लगातार मांग कर रहे हैं कि संतों की सुरक्षा के लिए स्थायी और सख्त नीति बनाई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।