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ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव, भारत-अमेरिका साझेदारी से क्रिटिकल मिनरल्स पर नया रणनीतिक खेल

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर हुए नए रणनीतिक समझौते को वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक समीकरणों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य 14 महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और विविध बनाना है, जिनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरणों और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में बड़े पैमाने पर होता है। इस समझौते के बाद दोनों देश मिलकर खनन, प्रसंस्करण और आपूर्ति नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे, जिससे वैश्विक बाजार में एक संतुलित विकल्प तैयार हो सके। विशेषज्ञों के अनुसार अब तक इन खनिजों की प्रोसेसिंग क्षमता कुछ देशों तक सीमित रही है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक तरह का केंद्रीकरण देखा गया है। भारत और अमेरिका का यह सहयोग इसी निर्भरता को कम करने और एक वैकल्पिक ढांचा विकसित करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। योजना के तहत भारत में रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग क्षमताओं को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे कच्चे माल के मूल्यवर्धन की प्रक्रिया देश के भीतर ही पूरी हो सके। इससे औद्योगिक उत्पादन और तकनीकी विकास को भी गति मिलने की संभावना है। इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसमें 14 क्रिटिकल मिनरल्स को प्राथमिकता दी गई है, जिनमें लिथियम, कोबाल्ट, निकल और ग्रेफाइट जैसे तत्व शामिल हैं। इन खनिजों का उपयोग आधुनिक तकनीक और ऊर्जा परिवर्तन के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है। इलेक्ट्रिक वाहनों के बैटरी सिस्टम से लेकर उन्नत सैन्य उपकरणों तक, इन संसाधनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर इनकी आपूर्ति और नियंत्रण को लेकर प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है। इस रणनीतिक साझेदारी के तहत अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों में संयुक्त निवेश और खनन परियोजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। भारत और अमेरिका की संस्थाएं मिलकर इन क्षेत्रों में खनन अवसरों का विस्तार कर सकती हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला अधिक स्थिर और विविध हो सके। इससे वैश्विक स्तर पर संसाधनों पर एकाधिकार की स्थिति को संतुलित करने का प्रयास माना जा रहा है। भारत में इस समझौते का एक बड़ा प्रभाव सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर भी देखने को मिल सकता है। देश में विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को गैलियम, जर्मेनियम और इंडियम जैसे दुर्लभ खनिजों की नियमित आपूर्ति की आवश्यकता होती है। इस सहयोग से इन संसाधनों की उपलब्धता में सुधार होने की संभावना है, जिससे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बल मिल सकता है। इसके साथ ही अमेरिका को भी भारत से उच्च गुणवत्ता वाले प्रोसेस्ड मैग्नेट्स और अन्य औद्योगिक उत्पादों की आपूर्ति का लाभ मिलेगा, जो उनके रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर में उपयोगी होंगे। यह आपसी निर्भरता आधारित व्यापार मॉडल दोनों देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के ढांचे में धीरे-धीरे एक बड़ा बदलाव ला सकता है। क्लीन एनर्जी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में नए सहयोग मॉडल उभर सकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और संसाधन प्रबंधन की दिशा बदल सकती है।

युद्धविराम के पीछे कौन सा बड़ा खेल? अमेरिका–इजरायल रिश्तों पर ईरानी विदेश मंत्री के तीखे सवाल

नई दिल्ली । मध्य-पूर्व में जारी तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका और इजरायल के बीच संबंधों और युद्धविराम प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि क्षेत्र में हालात जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उसमें कई अंतरराष्ट्रीय पक्षों की भूमिकाएं स्पष्ट नहीं हैं और विभिन्न स्तरों पर विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। अराघची के इन बयानों ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है। विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से आरोप लगाया कि व्हाइट हाउस और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेत दिए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि हजारों अमेरिकी सैनिक मध्य-पूर्व क्षेत्र की ओर तैनात किए जा रहे हैं, जिससे तनाव और बढ़ने की आशंका है। उनके अनुसार, यदि किसी स्तर पर युद्धविराम की कोशिश सफल भी होती है, तो यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका और इजरायल इस संघर्ष के अंतिम परिणाम को लेकर समान दृष्टिकोण रखते हैं या नहीं। अराघची ने अपने बयान में यह भी कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के एक महीने बाद अब दुनिया भर की सरकारें इसके राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों का आकलन करने में जुटी हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वहां से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ेगा। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रही है। ईरान का दावा है कि कुछ हालिया सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि वह इन कार्रवाइयों को गंभीरता से देख रहा है और आवश्यक प्रतिक्रिया देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। मध्य-पूर्व में स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई जब होर्मुज क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आईं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी और इसका उद्देश्य अपने सैनिकों और नौसैनिक इकाइयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। वहीं ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे आक्रामक कदम बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और सभी पक्षों की नजर आगामी घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

कोयला गैसीकरण को लेकर बड़ा कदम, 37,500 करोड़ की योजना के तहत निवेश और रोजगार सृजन को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली । भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में गुरुवार को एक राष्ट्रीय स्तर का रोड शो आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में निवेश, तकनीक और साझेदारी को प्रोत्साहित करना है। यह पहल कोयला संसाधनों के अधिक कुशल और पर्यावरण-अनुकूल उपयोग को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि गैसीकरण तकनीक के माध्यम से देश के विशाल कोयला भंडार का बेहतर उपयोग किया जा सकता है और आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कोयला मंत्रालय के अनुसार इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 37,500 करोड़ रुपये रखा गया है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक लगभग 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण को सुनिश्चित करना है। इस पहल से न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात पर निर्भरता में भी कमी आने की संभावना है। सरकार का आकलन है कि यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा देगा और घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाएगा। इस योजना के तहत लगभग 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद जताई गई है। इससे कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 25 बड़ी परियोजनाओं का विकास हो सकता है, जिनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 50 हजार रोजगार के अवसर उत्पन्न होने का अनुमान है। इसके अलावा, 75 मिलियन टन कोयला और लिग्नाइट के उपयोग से प्रतिवर्ष लगभग 6,300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होने की संभावना जताई गई है। साथ ही जीएसटी और अन्य करों के माध्यम से भी सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी। इस रोड शो का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना ही नहीं है, बल्कि एक मजबूत कोयला गैसीकरण इकोसिस्टम विकसित करना भी है। इसमें नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, प्रौद्योगिकी प्रदाता और वित्तीय संस्थान एक साथ मिलकर इस क्षेत्र के भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे। सरकार चाहती है कि भारत में इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए ताकि ऊर्जा उत्पादन को अधिक स्वच्छ, कुशल और आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाया जा सके। कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री G. Kishan Reddy और केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री Satish Chandra Dubey सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इस आयोजन को नीति और उद्योग जगत के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा संरचना को अधिक आत्मनिर्भर बनाने में भूमिका निभा सकता है। सरकार का कहना है कि यह पहल देश के कोयला और लिग्नाइट संसाधनों के वैज्ञानिक और औद्योगिक उपयोग को नई गति देगी, जिससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र मजबूत होगा बल्कि भारत की वैश्विक ऊर्जा प्रतिस्पर्धा में स्थिति भी बेहतर होगी।

गर्मी में स्टाइल भी, सुरक्षा भी! UV कपड़े बन रहे नया फैशन ट्रेंड

नई दिल्ली । भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और लगातार बढ़ती हीटवेव के बीच अब लोगों को राहत देने का नया तरीका फैशन ट्रेंड बनता जा रहा है। पहले जहां लोग धूप से बचने के लिए सनस्क्रीन, दुपट्टा, ग्लव्स और छाते का सहारा लेते थे, वहीं अब बाजार में ऐसे खास कपड़े तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं जिनमें “सनस्क्रीन” जैसी सुरक्षा पहले से मौजूद है। UV-प्रोटेक्टिव क्लोदिंग यानी अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने वाले कपड़े अब फैशन और हेल्थ दोनों का कॉम्बिनेशन बन चुके हैं। इन खास कपड़ों की मांग खासतौर पर उन लोगों में तेजी से बढ़ रही है जो रोजाना बाइक, स्कूटी, साइकिल या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर करते हैं। लंबे समय तक धूप में रहने से होने वाली टैनिंग, सनबर्न और स्किन डैमेज से बचने के लिए लोग अब UV-सुरक्षा वाले जैकेट, शर्ट, ट्राउजर, टोपी, ग्लव्स और स्कार्फ खरीद रहे हैं। UV-प्रोटेक्टिव कपड़े सामान्य फैब्रिक से अलग तकनीक से तैयार किए जाते हैं। इनमें धागों की बुनाई काफी घनी होती है ताकि सूरज की हानिकारक किरणें आसानी से कपड़े के आर-पार न जा सकें। इसके अलावा इनमें पॉलिएस्टर, नायलॉन और हाई-टेक कॉटन ब्लेंड जैसे फैब्रिक का इस्तेमाल किया जाता है, जो UV किरणों को बेहतर तरीके से ब्लॉक करते हैं। कई कंपनियां इन कपड़ों पर खास मिनरल या केमिकल कोटिंग भी करती हैं, जिसमें जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे तत्व शामिल होते हैं। ये UV किरणों को रिफ्लेक्ट करने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक जैसे सनस्क्रीन में SPF रेटिंग होती है, वैसे ही इन कपड़ों में UPF यानी अल्ट्रावायलेट प्रोटेक्शन फैक्टर होता है। यह बताता है कि कपड़ा कितनी UV किरणों को रोक सकता है। UPF 15 से 20 वाले कपड़े सामान्य सुरक्षा देते हैं, जबकि UPF 30 से 40 अच्छी सुरक्षा माने जाते हैं। वहीं UPF 50 वाले कपड़े लगभग 98 प्रतिशत तक UV किरणों को ब्लॉक कर सकते हैं। फैशन और स्किन प्रोटेक्शन का यह कॉम्बिनेशन लोगों को खूब पसंद आ रहा है। पहले जहां लोग गर्मी में चेहरा ढंककर निकलते थे, वहीं अब स्टाइलिश UV जैकेट और फुल स्लीव कपड़े नया स्टाइल स्टेटमेंट बनते जा रहे हैं। खासतौर पर युवाओं और आउटडोर एक्टिविटी करने वाले लोगों में इसका क्रेज तेजी से बढ़ा है। बढ़ती गर्मी और सन डैमेज का डर भी इस ट्रेंड के पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक तेज धूप में रहने से स्किन एजिंग, पिग्मेंटेशन और स्किन कैंसर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में UV कपड़े एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि UV-प्रोटेक्टिव कपड़े पहनने का मतलब यह नहीं है कि सनस्क्रीन की जरूरत खत्म हो गई। चेहरे, हाथों और शरीर के खुले हिस्सों पर सनस्क्रीन लगाना अब भी जरूरी है। साथ ही धूप का चश्मा और हाइड्रेशन भी बेहद जरूरी माना जाता है। जानकारों के मुताबिक अगर ये कपड़े गीले हो जाएं तो उनकी UPF क्षमता कम हो सकती है। इसलिए धूप में लंबे समय तक रहने पर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। फिलहाल फैशन इंडस्ट्री में UV-प्रोटेक्टिव क्लोदिंग तेजी से अपनी जगह बना रही है। स्टाइल, आराम और सुरक्षा का यह नया फॉर्मूला आने वाले समय में गर्मियों की जरूरत बन सकता है।

ऑटो सेक्टर में महंगाई का असर, हुंडई मोटर इंडिया ने जून से कीमतों में 12,800 रुपए तक बढ़ोतरी की घोषणा

नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल बाजार में एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी का दौर देखने को मिल रहा है, जहां प्रमुख वाहन निर्माता Hyundai Motor India ने अपने वाहनों की कीमतों में वृद्धि का ऐलान किया है। कंपनी ने जानकारी दी है कि जून 2026 से उसके सभी मॉडलों की कीमतों में अधिकतम 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी लागू की जाएगी। यह फैसला बढ़ती उत्पादन लागत, कच्चे माल की महंगाई और परिचालन खर्चों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए लिया गया है। कंपनी का कहना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में लागत दबाव को पूरी तरह से वहन करना संभव नहीं रह गया है, जिसके चलते आंशिक रूप से यह बढ़ोतरी ग्राहकों तक पहुंचाई जा रही है। कंपनी की ओर से जारी नियामक जानकारी में स्पष्ट किया गया है कि कीमतों में यह बदलाव मॉडल और वेरिएंट के आधार पर अलग-अलग होगा। कुछ मॉडलों पर इसका प्रभाव कम होगा, जबकि कुछ प्रीमियम वेरिएंट में यह बढ़ोतरी अधिक हो सकती है। कंपनी ने यह भी कहा है कि वह लगातार उत्पादन लागत को नियंत्रित करने और ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ कम करने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की लागत ने स्थिति को प्रभावित किया है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई बड़ी कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा कर चुकी हैं। हाल ही में Maruti Suzuki India ने भी अपने वाहनों की कीमतों में 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया था। इसी तरह Mahindra & Mahindra ने अपने एसयूवी और कमर्शियल वाहनों की कीमतों में संशोधन किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरे ऑटो सेक्टर पर इनपुट कॉस्ट का दबाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर स्टील, एल्युमिनियम और अन्य कच्चे माल की कीमतों में तेजी के कारण वाहन निर्माण लागत प्रभावित हो रही है। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा खर्चों में भी बढ़ोतरी ने कंपनियों के मार्जिन पर असर डाला है। ऐसे में कंपनियां आंशिक रूप से यह बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के लिए मजबूर हो रही हैं। इसका सीधा असर मध्यम वर्गीय ग्राहकों पर पड़ सकता है, जो नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी का असर आने वाले महीनों में बिक्री पर देखने को मिल सकता है। हालांकि, ऑटो सेक्टर में मांग अभी भी स्थिर बनी हुई है, खासकर एसयूवी सेगमेंट में, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतें ग्राहकों के खरीद निर्णय को प्रभावित कर सकती हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई कीमतें 1 जून 2026 से पूरे देश में लागू होंगी। इसके साथ ही मौजूदा बुकिंग और डिलीवरी पर लागू होने वाले नियमों को लेकर भी डीलर नेटवर्क को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर, ऑटोमोबाइल बाजार में बढ़ती लागत का असर अब सीधे ग्राहकों की जेब पर दिखाई देने लगा है, और आने वाले समय में अन्य कंपनियों द्वारा भी इसी तरह के फैसले लिए जाने की संभावना बनी हुई है।

सोने-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरी गिरावट, निवेशकों की निगाहें अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकीं

नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं पर दबाव स्पष्ट रूप से देखा गया। बाजार में आई इस गिरावट के बाद निवेशकों और कारोबारियों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में 1,539 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद इसका भाव 1,56,072 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले यह कीमत 1,57,611 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसी तरह 22 कैरेट सोना भी सस्ता होकर 1,42,962 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जबकि पहले यह 1,44,372 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 18 कैरेट सोने के दाम में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 1,17,054 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी के बाजार में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। चांदी का भाव 5,296 रुपये प्रति किलो कम होकर 2,60,917 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। इससे पहले यह 2,66,213 रुपये प्रति किलो था। चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि एक ही दिन में इतनी बड़ी कमी को निवेशक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देख रहे हैं। वायदा बाजार में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने और चांदी दोनों के कॉन्ट्रैक्ट में गिरावट दर्ज की गई है। 5 जून 2026 के लिए सोने का कॉन्ट्रैक्ट और 3 जुलाई 2026 के लिए चांदी का कॉन्ट्रैक्ट दोनों ही दबाव में रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों के दाम नीचे आए हैं। वैश्विक बाजार में कॉमेक्स पर भी कीमती धातुओं में कमजोरी दर्ज की गई है, जहां सोना और चांदी दोनों में प्रतिशत के आधार पर गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार निवेशक फिलहाल अमेरिका में आने वाले महंगाई और जीडीपी से जुड़े आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिनके आधार पर आगे की दिशा तय होगी। इन आंकड़ों के जारी होने से वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों की उम्मीदों पर भी असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई देगा। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्पष्ट नहीं होते, तब तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश की बजाय प्रतीक्षा की रणनीति अपना रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक डेटा इस रुझान को और स्पष्ट कर सकता है और सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

प्लेऑफ में आरसीबी का धमाकेदार प्रदर्शन, अनिल कुंबले बोले- यह टीम के आत्मविश्वास और चरित्र का प्रमाण

नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के पहले क्वालीफायर में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों को भी प्रभावित किया है। धर्मशाला में खेले गए इस मुकाबले में Royal Challengers Bengaluru ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 254 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया और फिर गेंदबाजी में बेहतरीन अनुशासन दिखाते हुए Gujarat Titans को 162 रनों पर समेटकर 92 रनों की बड़ी जीत दर्ज की। इस जीत के बाद टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज स्पिनर Anil Kumble ने आरसीबी के प्रदर्शन को लेकर कहा कि यह सिर्फ एक जीत नहीं बल्कि टीम के चरित्र और आत्मविश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। कुंबले के अनुसार प्लेऑफ जैसे दबाव वाले मुकाबले में इतना बड़ा स्कोर बनाना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं होता, लेकिन आरसीबी ने जिस आक्रामकता और संतुलन के साथ बल्लेबाजी की, उसने मैच की दिशा पहले ही तय कर दी। उन्होंने कहा कि पिच बल्लेबाजी के अनुकूल जरूर थी, लेकिन इतने बड़े मुकाबले में मानसिक दबाव को संभालना और लगातार रन बनाना ही असली चुनौती होती है, जिसे आरसीबी के बल्लेबाजों ने पूरी तरह से सफलतापूर्वक निभाया।A को रेखांकित किया, जब साई सुदर्शन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से आउट हुए और उसके बाद मैच का पूरा रुख बदल गया। कुंबले ने कहा कि उस एक विकेट ने आरसीबी को खेल पर पकड़ बनाने का मौका दिया, जिसके बाद गेंदबाजों ने लगातार अनुशासित लाइन और लेंथ के साथ खेल को नियंत्रित किया। उन्होंने इसे एक क्लिनिकल परफॉर्मेंस बताया जिसमें बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में टीम ने शानदार तालमेल दिखाया। पूर्व भारतीय कप्तान ने कप्तान रजत पाटीदार के प्रदर्शन को भी विशेष रूप से सराहा, जिन्होंने 33 गेंदों पर नाबाद 93 रनों की विस्फोटक पारी खेली और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। कुंबले के अनुसार बड़े मैचों में इस तरह का प्रदर्शन कप्तान के प्रति ड्रेसिंग रूम का भरोसा और सम्मान बढ़ाता है, जिससे टीम और अधिक एकजुट होकर खेलती है। उन्होंने कहा कि प्लेऑफ जैसे मुकाबले में जीत हासिल करना सिर्फ अंक या रिकॉर्ड का मामला नहीं होता, बल्कि यह टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देता है और आगे के मुकाबलों के लिए मानसिक बढ़त भी प्रदान करता है। कुंबले ने यह भी कहा कि आरसीबी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि हर मैच में कोई नया खिलाड़ी जिम्मेदारी उठाता है, जिससे टीम का संतुलन मजबूत बना रहता है। उनके अनुसार जब हर खिलाड़ी योगदान देता है तो वही टीम वास्तविक अर्थों में चैंपियन बनने की क्षमता रखती है। इस जीत ने न केवल आरसीबी को फाइनल में पहुंचाया है बल्कि पूरे टूर्नामेंट में उनकी दावेदारी को और मजबूत कर दिया है।

DNA बदलकर दिल की बीमारी खत्म करने का दावा! एक इंजेक्शन से 62% घटा खराब कोलेस्ट्रॉल

नई दिल्ली । दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही दिल की बीमारियों के बीच वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई थेरेपी विकसित करने का दावा किया है, जो भविष्य में हार्ट अटैक के खतरे को हमेशा के लिए कम कर सकती है। खास बात यह है कि इस इलाज में रोज दवाइयां खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि सिर्फ एक इंजेक्शन शरीर के डीएनए में बदलाव कर लंबे समय तक खराब कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रख सकता है। यह नई तकनीक जीन-एडिटिंग यानी डीएनए में बदलाव करने वाली थेरेपी पर आधारित है। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The New England Journal of Medicine में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक इस थेरेपी ने शुरुआती ट्रायल में बेहद उत्साहजनक परिणाम दिए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर आगे के बड़े अध्ययनों में भी ऐसे ही नतीजे मिले तो यह दिल की बीमारी के इलाज में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इस रिसर्च का नेतृत्व बायोटेक कंपनी Verve Therapeutics के सीईओ और वैज्ञानिक Dr. Sekar Kathiresan ने किया। अध्ययन में शामिल विशेषज्ञों के अनुसार यह थेरेपी शरीर में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL को लंबे समय तक कम रखने में सक्षम दिखाई दी है। रिसर्च के दौरान 85 मरीजों पर ट्रायल किया गया, हालांकि फिलहाल 35 मरीजों के डेटा का विश्लेषण सामने आया है। ये सभी मरीज आनुवंशिक रूप से हाई कोलेस्ट्रॉल या दिल की बीमारी से जूझ रहे थे। जिन मरीजों को इस नई दवा की सबसे ज्यादा डोज दी गई, उनमें सिर्फ एक इंजेक्शन के बाद LDL कोलेस्ट्रॉल में करीब 62 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। सबसे बड़ी बात यह रही कि जिन मरीजों को 18 महीने पहले यह थेरेपी दी गई थी, उनमें भी कोलेस्ट्रॉल का स्तर लगातार कम बना हुआ है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह थेरेपी शरीर में एक खास जीन-एडिटिंग “मशीन” की तरह काम करती है। इंजेक्शन के जरिए इसे शरीर में पहुंचाया जाता है, जहां यह खून के रास्ते सीधे लिवर तक पहुंचती है। इसके बाद यह लिवर सेल के डीएनए में मौजूद PCSK9 नाम के जीन को टारगेट करती है। यही जीन खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। थेरेपी इस जीन में बदलाव कर LDL को नियंत्रित कर देती है। दिल के विशेषज्ञ Dr. John H. P. Alexander ने इस शोध को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि यदि कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारी का स्थायी इलाज संभव हो जाता है तो यह मेडिकल साइंस में गेम चेंजर साबित होगा। हालांकि वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और इसे पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी साबित करने के लिए बड़े स्तर पर और अध्ययन किए जाएंगे। इसके बावजूद शुरुआती नतीजों ने दुनियाभर के मेडिकल समुदाय का ध्यान खींचा है। आमतौर पर जीन थेरेपी बेहद महंगी मानी जाती है, लेकिन रिसर्च टीम का दावा है कि भविष्य में इस दवा को आम लोगों की पहुंच में लाने की कोशिश की जाएगी। कंपनी इसे सिर्फ दुर्लभ इलाज नहीं बल्कि सामान्य हार्ट ट्रीटमेंट का हिस्सा बनाना चाहती है। भारत जैसे देश के लिए यह शोध बेहद अहम माना जा रहा है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल करीब 28 लाख लोगों की मौत दिल की बीमारियों से होती है। ऐसे में अगर यह थेरेपी सफल होती है तो लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है और हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Sheopur Jansunwai Case: जनसुनवाई में जहर खाने वाले बुजुर्ग की मौत, तहसीलदार को किया ससपेंड

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HIGHLIGHTS: श्योपुर जनसुनवाई में जहर खाने वाले बुजुर्ग की मौत के बाद हंगामा शव रखकर साढ़े 4 घंटे तक किया गया चक्काजाम प्रशासन ने तहसीलदार मनीषा मिश्रा को हटाया परिवार को 13 लाख सहायता और बेटे को नौकरी का आश्वासन विधायक बाबू जंडेल ने हत्या का केस दर्ज करने की मांग की   Sheopur Jansunwai Case: मध्यप्रदेश। श्योपुर कलेक्टोरेट की जनसुनवाई में जहर खाने वाले बुजुर्ग देवेंद्र गोयल की मौत के बाद बुधवार को शहर में भारी हंगामा हो गया। बता दें कि अग्रवाल समाज और कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के नेतृत्व में लोगों ने जय स्तंभ चौक पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन करीब साढ़े चार घंटे तक चला जिससे शहर में यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत सुनवाई न होने पर खाया जहर मृतक देवेंद्र गोयल मंगलवार सुबह अपनी शिकायत लेकर जनसुनवाई में पहुंचे थे। उनका आरोप था कि रिश्तेदारों ने उनकी दुकान पर कब्जा कर लिया है और कई बार शिकायत करने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि इस बार भी अधिकारियों ने उनकी बात गंभीरता से नहीं सुनी। इससे परेशान होकर उन्होंने कलेक्टोरेट परिसर में ही जहर खा लिया। मई का अंतिम प्रदोष व्रत 28 मई को, प्रदोष काल में करें शिव पूजा, मिलेगा विशेष फल तहसीलदार को पद से हटाया लगातार बढ़ते विरोध और चक्काजाम के बाद प्रशासन को आखिरकार कार्रवाई करनी पड़ी। जिसके चलते कलेक्टर शीला दाहिमा ने तहसीलदार मनीषा मिश्रा को तत्काल प्रभाव से हटा दिया। जिसके बाद दोपहर करीब डेढ़ बजे धरना समाप्त हुआ। प्रदर्शन खत्म होने के बाद विधायक बाबू जंडेल परिजनों और समाज के लोगों के साथ कोतवाली थाने पहुंचे और तहसीलदार के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने के लिए आवेदन सौंपा। साथ ही प्रशासन ने आश्वासन दिया कि भविष्य में जनसुनवाई में आने वाले लोगों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाएगा। मई का अंतिम प्रदोष व्रत 28 मई को, प्रदोष काल में करें शिव पूजा, मिलेगा विशेष फल परिवार को दिया आश्वासन प्रशासन ने मृतक के परिवार को तत्काल सहायता के रूप में 2 लाख रुपए देने की घोषणा की है। साथ ही अतिरिक्त सहायता के लिए मुख्यमंत्री को प्रस्ताव भेजने की बात कही गई है। मृतक के बेटे को नौकरी देने का आश्वासन भी प्रशासन की ओर से दिया गया है। वहीं अग्रवाल समाज ने परिवार को 11 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। पूरे मामले के बाद शहर में प्रशासनिक व्यवस्था और जनसुनवाई की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।  

भारत के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट एएमसीए की रफ्तार तेज, 30 महीने में पहला प्रोटोटाइप उड़ान के लिए तैयार करने का लक्ष्य

नई दिल्ली । भारत ने अपनी वायुसेना को आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए कार्यक्रम के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी कर दिया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी इस आरएफपी के साथ ही देश के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट के विकास की प्रक्रिया ने अब तेज रफ्तार पकड़ ली है। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय वायुसेना के लिए एक ऐसा आधुनिक लड़ाकू विमान तैयार करना है जो स्टील्थ तकनीक, अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और लंबी दूरी तक प्रभावी संचालन क्षमता से लैस हो। आरएफपी के अनुसार बिडिंग प्रक्रिया 11 जून से शुरू होगी और 27 जुलाई को समाप्त होगी, जबकि 28 जुलाई को बोली खोली जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के तहत चयनित साझेदार को कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के मात्र 30 महीनों के भीतर पहले प्रोटोटाइप की उड़ान सुनिश्चित करनी होगी। परियोजना के तहत कुल पांच लो-ऑब्जर्वेबल प्रोटोटाइप विमान तैयार किए जाएंगे, जिससे परीक्षण और विकास प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन भी बनाया जाएगा ताकि विमान की मजबूती और प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन किया जा सके। इस पूरे विकास कार्य की जिम्मेदारी एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी को सौंपी गई है, जो डिजाइन डेटा और तकनीकी ड्रॉइंग्स के आधार पर निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ इस परियोजना को आगे बढ़ाएगी। चयनित बोलीदाता को न केवल निर्माण कार्य करना होगा बल्कि फ्लाइट टेस्टिंग, टाइप सर्टिफिकेशन और तकनीकी मूल्यांकन में भी सहयोग देना होगा। विमान को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में उच्च स्तर की दक्षता और उत्तरजीविता क्षमता प्रदान कर सके। एएमसीए परियोजना के लिए देश के तीन प्रमुख निजी क्षेत्र नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो के साथ भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड तथा भारत फोर्ज के साथ बीईएमएल जैसी कंपनियां शामिल हैं। यह मॉडल भारत में रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है। इस फाइटर जेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्टील्थ तकनीक होगी, जिसके तहत इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह दुश्मन के रडार पर आसानी से दिखाई न दे। इसमें हथियारों और मिसाइलों को बाहरी हिस्सों की बजाय विमान के अंदरूनी कम्पार्टमेंट में रखा जाएगा, जिससे इसकी रडार क्रॉस सेक्शन क्षमता और कम हो जाएगी। यह विमान दो इंजन वाला मध्यम श्रेणी का लड़ाकू विमान होगा, जो लगभग 1.2 से 1.8 मैक की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम होगा। रक्षा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार यह प्रोजेक्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में भारतीय वायुसेना निर्धारित स्क्वाड्रन क्षमता से कम विमानों के साथ संचालन कर रही है। ऐसे में एएमसीए, तेजस के उन्नत संस्करणों के साथ मिलकर भविष्य में वायुसेना की ताकत को नई दिशा देगा। भारत पहले ही तेजस फाइटर जेट के जरिए स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता को मजबूत कर चुका है और अब इस परियोजना के जरिए अगली पीढ़ी की लड़ाकू तकनीक में प्रवेश कर रहा है।